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फरवरी में बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार, 1.43 करोड़ बच्चों का किया गया परीक्षण

फरवरी में बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार, 1.43 करोड़ बच्चों का हुआ परीक्षण नाटेपन में लगभग 1.21 प्रतिशत,  अति कुपोषित श्रेणी के बच्चों में लगभग 0.12 प्रतिशत तथा अंडरवेट बच्चों में लगभग 0.61 प्रतिशत का सुधार     जनवरी के मुकाबले फरवरी में कुपोषण संकेतकों में गिरावट, योगी सरकार के पोषण कार्यक्रमों का असर लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बच्चों की पोषण की स्थिति में सुधार के सकारात्मक संकेत मिले हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण ट्रैकर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 की तुलना में फरवरी 2026 में स्टंटिंग में लगभग 1.21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि अति कुपोषित श्रेणी के बच्चों में लगभग 0.12 प्रतिशत तथा अंडरवेट बच्चों में लगभग 0.61 प्रतिशत का सुधार देखा गया है। ये दिखाता है कि योगी सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए गंभीर है और बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं कर रही है।  बड़े पैमाने पर हुआ बच्चों का परीक्षण पोषण ट्रैकर के माध्यम से बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी की जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों की लंबाई, वजन और आयु का आकलन कर उनकी पोषण स्थिति का निर्धारण किया जाता है। फरवरी में प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर परीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके तहत 1 करोड़ 43 लाख से अधिक बच्चों का परीक्षण किया गया। डिजिटल निगरानी से मिल रहे सकारात्मक परिणाम प्रदेश में पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चों की पोषण स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इससे डेटा का संकलन और विश्लेषण अधिक सटीक और पारदर्शी हुआ है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा नियमित रूप से बच्चों का परीक्षण और डेटा अपडेट किए जाने से कुपोषण की समय रहते पहचान और आवश्यक हस्तक्षेप संभव हो पा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इसी तरह की निरंतर निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले समय में पोषण संकेतकों में और सुधार देखने को मिलेगा।

नवरात्रि पर यूपी के देवी मंदिरों में श्रद्धा का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

नवरात्रि पर यूपी के देवी मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन नवरात्रि के दूसरे दिन मां विंध्यवासिनी, मां पाटेश्वरी देवी, मां विशालाक्षी के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, युवा भक्तों की सबसे अधिक रही संख्या विंध्याचल, काशी, प्रयागराज, मां शाकुम्भरी देवी, मां कात्यायनी और मां पाटेश्वरी देवी के धामों में लगा रहा भक्तों का तांता    लखनऊ चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के सभी देवी मंदिरों में आस्था का अद्भुत जनसैलाब देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के दूसरे दिन भी शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लाखों की संख्यां में भक्तों ने मां भगवती का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विंध्याचल, काशी, प्रयागराज, सहारनपुर, देवीपाटन और वृंदावन सहित कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें सुबह से ही देखी गईं। श्रद्धालुओं के सैलाब में युवाओं की संख्या सबसे ज़्यादा रही, उनके जोश और उत्साह भरे “जय माता दी” के जयकारों से मंदिरों परिसर पूरी तरह भक्तिमय नजर आये। विशेष अवसर के चलते नगर निगमों और प्रशासन द्वारा स्वच्छता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को मां भगवती के सुगम दर्शन सुलभ हो सकें।  नवरात्रि के दूसरे दिन मीरजापुर स्थित माँ विंध्यवासिनी धाम में लोगों की आस्था चरम पर रही। सुबह से लेकर शाम तक यहां 6 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के दरबारों में मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। मीरजापुर सिटी मजिस्ट्रेट और मेला प्रभारी अविनाश कुमार ने बताया कि प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की संख्या सुबह ही 2 लाख के आंकड़े को पार कर गई थी। मां विंध्यवासिनी के धाम में नवरात्रि के अवसर पर पूरे दिन और रात दर्शन-पूजन का क्रम चल रहा है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में पेयजल, छाया, कूलर के साथ एलईडी स्क्रीन की भी  व्यवस्था की गई है, जिससे कतार में लगे भक्तों को भी मां के दर्शन का लाभ मिल सके। साथ ही न केवल मंदिर परिसर, बल्कि विंध्याचल धाम के आस-पास के क्षेत्रों व अन्य मंदिरों में भी सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए, जिससे दर्शन व्यवस्था सुगम बनी रही। इसी तरह प्रयागराज स्थित मां ललिता देवी शक्तिपीठ में भी आस्था का सैलाब उमड़ा। पिछले दो दिनों में यहां लगभग 2.5 से 3 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह मां भगवती के 51 शक्तिपीठों में से एक महत्वपूर्ण स्थल है। इसके साथ ही प्रयागराज के अन्य प्रसिद्ध देवी धाम अलोप शंकरी और कल्याणी देवी मंदिर में भी  की भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में वाराणसी के प्रसिद्ध मां विशालाक्षी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखी गई। सामान्य दिनों में जहां 4 से 5 हजार लोग दर्शन करने आते हैं, वहीं नवरात्रि में यह संख्या बढ़कर 7 से 8 हजार तक पहुंच गई है। यहां विशेष रूप से दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। इसी क्रम में नगर निगम और प्रशासन द्वारा यहां स्वच्छता और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।  सहारनपुर के शाकुम्भरी देवी मंदिर में भी नवरात्रि के दूसरे दिन शाम तक 80 हजार से अधिक भक्त पहुंच चुके हैं। वहीं बलरामपुर स्थित मां पाटेश्वरी देवीपाटन मंदिर में करीब 2.5 लाख भक्तों ने दर्शन किए। इन सभी स्थलों पर भक्तों में खासा उत्साह देखा गया, जिसमें युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। वहीं कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन भी नवरात्रि के अवसर पर शक्ति की भक्ति में डूबा नजर आ रहा है। वृंदावन स्थित शक्ति पीठ मां कात्यायनी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शुरुआती दो दिनों में ही यहां 1.5 लाख से अधिक भक्तों ने माँ के दर्शन किए। मंदिर में विशेष सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। नवरात्रि के अवसर पर प्रदेश के मंदिरों में उमड़ी इस भारी भीड़ के बीच प्रशासन द्वारा सुगम दर्शन, स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। नगर निगम की टीमें लगातार सफाई व्यवस्था में जुटी हैं, जबकि महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर प्रमुख स्थल पर सीसीटीवी कैमरे और भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदेश में नवरात्रि के दौरान उमड़ा यह जनसैलाब न केवल आस्था की गहराई को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की लहर चल रही है, उसे देखते हुए नई पीढ़ी में भी अपने सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था और विश्वास बढ़ा है।

महिला निदेशकों की बढ़ती भूमिका में यूपी का स्टार्टअप बूम, 174 से बढ़कर 2525 हुई संख्या

महिला निदेशकों की अगुवाई में यूपी का स्टार्टअप बूम, 174 से 2525 पहुंची संख्या    योगी सरकार में महिला भागीदारी वाले स्टार्टअप्स में यूपी की बढ़ रही हिस्सेदारी 2017 से 2025 तक मजबूत उछाल, 2026 में भी 300 से ज्यादा डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त नए स्टार्टअप जुड़े योगी सरकार की नीतियों से महिला उद्यमिता को मिला निर्णायक बल लखनऊ  उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है और यह बढ़त अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देने लगी है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में महिला निदेशक या साझेदार वाले स्टार्टअप्स की संख्या में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में केवल 174 ऐसे स्टार्टअप्स थे जिन्हें डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त थी और जिनमें कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार शामिल थी। यह संख्या लगातार बढ़ते हुए वर्ष 2025 में 2525 तक पहुंच गई।  31 जनवरी 2026 तक भी 301 नए स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी दर्ज की गई है। ये सभी स्टार्टअप्स डीपीआईआईटी की ओर से आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त हैं। प्रदेश में इस बढ़त को योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए निवेश अनुकूल माहौल, प्रक्रियाओं में सरलता और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। इसका असर खासतौर पर महिला उद्यमिता पर पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं अब निदेशक और साझेदार के रूप में सामने आ रही हैं। केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया पहल के साथ राज्य स्तर पर मिले सहयोग ने इस वृद्धि को गति दी है। फंड ऑफ फंड्स, स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम और क्रेडिट गारंटी स्कीम जैसी योजनाओं के जरिए स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक वित्तीय सहायता मिल रही है। इसका लाभ उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को भी मिला है, जिससे नए स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभरते स्टार्टअप केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। महिला भागीदारी में हो रही लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश में उद्यमिता का दायरा व्यापक हो रहा है और महिलाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम न केवल विस्तार कर रहा है, बल्कि महिला सशक्तीकरण के एक नए मॉडल के रूप में भी स्थापित कर रहा है। जहां नीतिगत समर्थन और बढ़ती भागीदारी मिलकर नई आर्थिक संभावनाओं को जन्म दे रही है।

राष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की की प्रतिष्ठापना

राष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में की श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना राष्ट्रपति, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने किए रामलला के दर्शन, चरणों में झुकाया शीश अयोध्या/लखनऊ  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की। राष्ट्रपति ने नव संवत्सर पर रामलला के चरणों में शीश झुकाकर व आरती उतारकर श्रद्धा निवेदित की। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राष्ट्रपति के साथ रामलला की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में सभी देवों के समक्ष शीश झुकाया। राष्ट्रपति ने श्रीराम मंदिर परिसर का भ्रमण कर यहां की दीवारों पर उकेरी गईं आकृतियों का भी अवलोकन किया। राष्ट्रपति ने पूज्य संतों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीरामयंत्र की विधिवत प्रतिष्ठापना की। श्रीराम यंत्र दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या भेजा गया था। वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित यह यंत्र देवताओं का निवास माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करने की क्षमता रखता है। दक्षिण भारत, काशी, अयोध्या के आचार्यों द्वारा मंदिर में श्रीराम यंत्र के लिए नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही शुरू हो चुका था। यंत्र प्रतिष्ठापना के समय राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मां अमृतानंदमयी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, सदस्य गोपाल जी आदि मौजूद रहे।

सीएम योगी करेंगे वन एवं अर्थव्यवस्थाएं विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन

सीएम योगी करेंगे ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर लखनऊ में ‘अरण्य समागम’ का आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शनिवार सुबह 10 बजे होगा कार्यक्रम, विशेषज्ञों और गणमान्य अतिथियों की रहेगी मौजूदगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) के मार्स हॉल में प्रातः 10:00 बजे ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय वन दिवस (21 मार्च) के अवसर पर आयोजित ‘अरण्य समागम’ के तहत किया जा रहा है। इस आयोजन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ तथा गणमान्य अतिथि भाग लेंगे। ’वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषय पर होगा मंथन ‘अरण्य समागम’ के अंतर्गत आयोजित इस राष्ट्रीय वानिकी संवाद में वन और अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इस मंच के माध्यम से सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। हरित प्रदेश के लक्ष्य को नई गति प्रदेश में ‘स्वच्छ-समृद्ध-हरित प्रदेश’ के संकल्प के तहत पिछले 9 वर्षों में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया है। हरित क्षेत्र बढ़ाने के सतत प्रयासों से प्रदेश का वनावरण 9.96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। निजी भूमि पर पौधरोपण को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक वृक्ष धन योजना संचालित की जा रही है, जबकि पीएम मोदी के विजन के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान जन आंदोलन का रूप ले चुका है। किसानों को कार्बन क्रेडिट की धनराशि वितरित करने वाला उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना है और वर्षाकाल 2026 में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योगी सरकार की महत्वपूर्ण पहल उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘स्वच्छ-समृद्ध-हरित प्रदेश’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में यह आयोजन योगी सरकार की एक और महत्वपूर्ण पहल है। वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ‘एक और कदम हरियाली की ओर’ संदेश के साथ आयोजित यह कार्यक्रम जनभागीदारी को प्रोत्साहित करेगा और प्रदेश को हरित एवं समृद्ध बनाने के संकल्प को और मजबूत करेगा। कार्यक्रम में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यावरण, वन, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन  डॉ. अरुण कुमार सक्सेना तथा राज्य मंत्री पर्यावरण, वन, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन केपी मलिक की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इसके अलावा अन्य गणमान्य अतिथि और विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में शामिल होंगे, जो अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे। यह आयोजन नीति और व्यवहार के बीच समन्वय स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

रामनगरी में राष्ट्रपति का स्वागत, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया अभिनंदन

रामनगरी में राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने किया राष्ट्रपति का स्वागत  महापौर ने देश की प्रथम नागरिक को सौंपी ‘नगर की चाबी’  एयरपोर्ट से राम मंदिर के रास्ते में कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से राष्ट्रपति का किया भव्य स्वागत अयोध्या  चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रामनगरी पहुंचीं। यहां उनका भव्य स्वागत किया गया। उनका अयोध्या आगमन ऐतिहासिक व सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण रहा। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।  महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए उन्हें ‘नगर की चाबी’ भेंट की। यह सम्मान अतिथि को नगर की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च प्रतीकात्मक सम्मान माना जाता है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अयोध्या का यह दूसरा दौरा है। एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से किया भव्य स्वागत अयोध्या एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला रवाना हुआ, पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा दृश्य देखने को मिला। सड़क के दोनों ओर करीब 20 सांस्कृतिक मंच सजाए गए थे, जहां लगभग 250 कलाकारों ने रामायण आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भारतीय वेशभूषा में कलाकारों ने स्वागत गीत, भजन, अवधी-भोजपुरी लोकगायन-लोकनृत्य समेत भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रमों के जरिए मन मोह लिया।  हर ओर उत्साह व उल्लास अयोध्यावासियों ने भी सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प वर्षा, जयकारों संग देश की प्रथम नागरिक का गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति ने भी अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए रामलीला के अंश, झांकियां, ढोल-नगाड़ा, शंखनाद, वेदपाठ और भजन-कीर्तन जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिससे अयोध्या की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। राष्ट्रपति के आगमन के मद्देनजर सजी अयोध्या नगरी में हर ओर श्रद्धा, उत्साह और उल्लास का वातावरण रहा।

सनातन विरोध वाले स्थानों पर नहीं जाती वर्तमान पीढ़ी: सीएम योगी

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र प्रतिष्ठापना कार्यक्रम  सनातन विरोध वाले स्थानों पर नहीं जाती वर्तमान पीढ़ी: सीएम योगी अब नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाते हैं लोग: मुख्यमंत्री  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में की श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना मुख्यमंत्री ने कहा, दुनिया में युद्ध चल रहे और हम कर रहे रामराज्य की अनुभूति अयोध्या/लखनऊ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की। इस अवसर पर राष्ट्रपति की उपस्थिति में गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सबसे पहले प्रदेशवासियों को भारतीय नवसंवत्सर की शुभकामना दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरयू मैया अयोध्या धाम को पवित्र करते हुए अपने निर्मल जल से पूरे क्षेत्र को पवित्र करती हैं। रामराज्य की अनुभूति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में युद्ध चल रहे हैं और हम श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना कार्यक्रम में सहभागी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने वर्तमान पीढ़ी की प्रशंसा की और कहा कि यह पीढ़ी नववर्ष पर ऐसे किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं जाती, जहां सनातन के विरोध में कोई कार्य हो रहा है। वह नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाती है। हर सनातन धर्मावलंबी व सच्चा भारतीय आनंदित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व-मार्गदर्शन में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन, श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, रामदरबार के पवित्र विग्रह की स्थापना, ध्वजा आरोहण और आज श्रीराम यंत्र की स्थापना का कार्यक्रम हर सनातन धर्मावलंबी व सच्चे भारतीय को आनंद से विभोर कर देता है और यही भारत की आस्था है।  राम मंदिर को अंधविश्वास बताने वाले सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे सीएम योगी ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा, कहा कि आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया था। इसे अपमानित करने वाले वही लोग हैं, जो सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे। नोएडा न जाना उनके लिए अंधविश्वास नहीं था, लेकिन राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, कृष्ण-कन्हैया के मथुरा-वृंदावन की बात करना अंधविश्वास का पर्याय था। लेकिन जो आस्था 500 वर्ष तक निरंतर बनी रही, संघर्षों का मुकाबला करती रही, वह न रुकी, न डिगी और न झुकी। आस्था को अपमानित करने वाली सत्ता के खिलाफ संघर्ष निरंतर जारी रहा। अंततः वह दिन आया, जब अयोध्या इस रूप में सबके सामने है।  श्रीराम मंदिर भारत के राष्ट्र मंदिर का बना प्रतीक  सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भारत के राष्ट्र मंदिर का प्रतीक बन गया है। यह रामराज्य की आधारशिला भी है। दुनिया में तमाम युद्ध चल रहे हैं, अव्यवस्था, आर्थिक अराजकता, भय-आतंक है और अयोध्याधाम में हजारों की संख्या में उपस्थित हम लोग भयमुक्त होकर राष्ट्रपति जी के अभिवादन और श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम में सहभागी बनकर रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि भारत इसलिए भारत बना है, क्योंकि इसे ऋषि-मुनियों की तपस्या, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता और भारत की आस्था ने सदैव ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के रूप में बनाए रखा। श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम के साथ जुड़कर न केवल प्रदेशवासी, बल्कि देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी के मन में भी आनंद की अनुभूति हो रही है। 2025 में 156 करोड़ श्रद्धालु आए उत्तर प्रदेश  सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2025 में 156 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटक धार्मिक व आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा करने उत्तर प्रदेश आए। अयोध्या, काशी, प्रयागराज महाकुम्भ, मथुरा-वृंदावन में दर्शन करने जितने लोग आए, उतनी आबादी कई देशों की नहीं है। यह नया और बदलता भारत है। वर्तमान पीढ़ी अब दिग्भ्रमित नहीं है, वह सही दिशा में जा रही है। वह नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाती है। लोग किसी ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं जाते, जहां सनातन के विरोध में कोई कार्य हो रहा है। सीएम योगी ने बलिदान देने वाले रामभक्तों, संतों को किया नमन  सीएम ने राम मंदिर निर्माण यज्ञ में योगदान देने वाले संतों, रामभक्तों, कारीगरों/श्रमिकों का अभिनंदन किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान बलिदान देने वाले रामभक्तों के साथ ही संतों व दिवंगत विहिप नेता अशोक सिंहल आदि को नमन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को स्मृति चिह्न प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मां अमृतानंदमयी (अम्मा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भैया जी, श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले कारीगरों के पारिवारिक सदस्यों समेत हजारों रामभक्त मौजूद रहे।

PAK की साजिश का खुलासा, दिल्ली से कश्मीर तक सेना की जासूसी के लिए CCTV कैमरे लगवा रहा था

गाजियाबाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान की ISI से जुड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. अब तक इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो आरोपियों नौशाद अली और समीर की तलाश जारी है. आरोपियों ने पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के इशारे पर भारतीय सेना की जासूसी की योजना बनाई थी।  जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क दिल्ली और सोनीपत रेलवे स्टेशन समेत कई महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठानों में सोलर पावर्ड CCTV कैमरे लगाकर लाइव फीड पाकिस्तान भेजने की योजना बना रहा था. इन कैमरों के जरिए सेना की मूवमेंट, हथियार और अन्य संवेदनशील जानकारी भेजी जानी थी।  पाकिस्तान ISI का जासूसी रैकेट का खुलासा  जासूसी नेटवर्क का संचालन सुहैल मलिक उर्फ रोमियो, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर कर रहे थे. सुहैल मलिक को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जबकि साने इरम उर्फ महक इस नेटवर्क को चलाने में सक्रिय भूमिका निभा रही थी. इसके अलावा प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार भी गिरफ्तार हुए हैं. पूछताछ में पता चला कि नेटवर्क का विस्तार उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल तक फैला हुआ था।  CCTV और GPS लोकेशन का इस्तेमाल आरोपियों ने रेलवे स्टेशन और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की लाइव वीडियो और GPS लोकेशन विदेश में बैठे हैंडलर्स को भेजी. इसके लिए मोबाइल फोन में एक खास एप्लिकेशन इंस्टॉल किया गया था, जिसकी ट्रेनिंग ऑनलाइन पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स ने दी थी. नेटवर्क के कई आरोपियों ने दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर कैमरे छिपाकर लगाये. पुलिस ने इन्हें बरामद कर लिया है।  14 मार्च से SIT की कार्रवाई इस मामले की शुरुआत 14 मार्च 2026 को हुई, जब थाना कौशांबी पुलिस को भोवापुर इलाके में कुछ युवकों की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली. इसके बाद BNS की धारा 61(2)/152 और ऑफिशियल एक्ट की धारा 3/5 के तहत केस दर्ज किया गया. 5 युवक और 1 महिला को गिरफ्तार किया गया।  पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की, जिसमें कई आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और महत्वपूर्ण लोकेशन मिलीं. इनके खिलाफ जांच के लिए एसआइटी गठित की गई. SIT में एसीपी रैंक के दो अधिकारी और चार इंस्पेक्टर शामिल हैं. इसमें अपराध शाखा, खुफिया विभाग, साइबर क्राइम टीम और SWAT टीम की मदद ली जा रही है।  20 मार्च को 9 और आरोपी गिरफ्तार SIT ने 20 मार्च को 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल थे. गिरफ्तार आरोपियों में गणेश, विवेक, गगन कुमार प्रजापति और दुर्गेश निषाद के नाम सामने आए. पूछताछ में पता चला कि आरोपी विदेश में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर रेलवे और सुरक्षा ठिकानों की रेकी करते और फोटो, वीडियो व GPS लोकेशन भेजते थे।  जासूसी नेटवर्क ने भारतीय मोबाइल नंबरों के OTP विदेश भेजकर व्हाट्सएप और सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने की योजना बनाई थी. इसके लिए आरोपी 500 से 5000 रुपये तक लेते थे. सिम कार्ड हासिल करने के लिए स्नैचिंग, एजेंट्स से प्री-एक्टिवेटेड सिम खरीदना और अपने या परिवार के नाम पर सिम लेना जैसे तरीके अपनाए गए. पैसे के लेन-देन के लिए UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया, लेकिन सीधे खाते में पैसे नहीं लिए. इसके बजाय जन सेवा केंद्रों या दुकानों के जरिए ट्रांसफर कर नकद राशि हासिल की जाती थी।  मोबाइल, OTP और सिम कार्ड के जरिए जासूसी जांच में यह भी पता चला कि नेटवर्क ने तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं को अपने साथ जोड़ा था, जैसे मोबाइल मैकेनिक, CCTV ऑपरेटर और कंप्यूटर से जुड़े लोग. इन युवाओं को पैसों के लालच और विदेश में बैठे हैंडलर्स के निर्देशों के तहत शामिल किया गया. पुलिस फिलहाल फरार आरोपियों नौशाद अली और समीर की तलाश में लगी हुई है. जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और इसके पीछे की साजिश की गहनता से जांच कर रही हैं. यह मामला देश की सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। 

कैलादेवी शक्तिपीठ में नवरात्रि महापर्व: 1100 वर्षों की आस्था और लक्खी मेले का अद्भुत संगम

करौली उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल कैलादेवी धाम करौली जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर दूर त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, जहां सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। इतिहासकार वेणु गोपाल शर्मा के अनुसार कैलादेवी माता की मूर्ति की स्थापना वर्ष 1114 ई. में महात्मा केदार गिरि ने की थी। इसके बाद 1116 ई. में खींची राजा मुकुंद दास ने मंदिर का निर्माण कराया, जबकि 1153 ई. में रघुनाथ दास खींची ने इसका विस्तार किया। बाद में 1753 में राजा गोपाल सिंह ने मंदिर को भव्य स्वरूप दिया। करौली राजघराने ने माता को कुलदेवी के रूप में स्थापित किया, जिसके बाद से मंदिर का महत्व लगातार बढ़ता गया। अरावली पर्वतमाला के बीच स्थित इस धाम में माता कैलादेवी के साथ मां चामुंडा की प्रतिमा भी विराजमान है। मंदिर परिसर आज विशाल और भव्य स्वरूप में विकसित हो चुका है। कैलादेवी धाम में साल में दो बार मेला लगता है। चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां लख्खी मेला भरता है, जो करीब 20 दिन तक चलता है। इस दौरान 50 लाख से अधिक श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिससे यहां लघु कुंभ जैसा दृश्य देखने को मिलता है। शारदीय नवरात्रि में भी करीब 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। करौली राजपरिवार से जुड़े राजऋषि प्रकाश जती के अनुसार नवरात्रि में घट स्थापना के समय माता को धारण कराई गई पोशाक अष्टमी तक नहीं बदली जाती। इस दौरान माता के प्राचीन आभूषण भी धारण कराए जाते हैं। अष्टमी के बाद ही माता का विशेष शृंगार किया जाता है। मान्यता है कि विवाह, संतान प्राप्ति, नए वाहन पूजन या मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त माता के दरबार में दर्शन के लिए अवश्य आते हैं। बच्चों का पहला मुंडन संस्कार भी यहां कराना शुभ माना जाता है। कैलादेवी धाम में भक्ति का अनोखा रंग लांगुरिया गीतों के रूप में देखने को मिलता है। ढोल-नगाड़ों की धुन पर श्रद्धालु नृत्य करते हैं। यहां भगवान कृष्ण को लांगुरिया के रूप में पूजा जाता है। माता के दर्शन के बाद बोहरा भगत के दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है। श्रद्धालुओं के अनुसार इनके दर्शन के बिना कैलादेवी की यात्रा अधूरी मानी जाती है।

वृंदावन आश्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की प्रेमानंद महाराज से मुलाकात, राधे-राधे के साथ स्वागत

मथुरा ब्रज प्रवास के दूसरे दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद जी महाराज से मुलाकात की. राधा केली कुंज आश्रम में  दोनों के बीच करीब 27 मिनट तक बातचीत हुई. आश्रम पहुंचने पर प्रेमानंद महाराज ने राधे-राधे कहकर राष्ट्रपति का स्वागत किया. इसके बाद दोनों के बीच आध्यात्म, समाज और ब्रज की परंपरा को लेकर चर्चा हुई. बताया जा रहा है कि इस दौरान प्रेमानंद महाराज ने नाम जप की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यही मनुष्य के जीवन के उद्धार का सरल मार्ग है। मुलाकात के दौरान आश्रम की ओर से राष्ट्रपति को प्रसाद स्वरूप दुपट्टा, माला और प्रसाद भेंट किया गया. इस दौरान राष्ट्रपति अपने परिवार के साथ मौजूद रहीं. इससे पहले दौरे के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रेम मंदिर पहुंचकर भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन किए थे. मंदिर में उनका प्रवेश भोग घर द्वार से हुआ, जहां मंदिर प्रबंधन की ओर से उनका स्वागत किया गया. गर्भगृह में पहुंचकर उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और आरती में शामिल हुईं. उस समय संकीर्तन मंडली द्वारा भजन गाए जा रहे थे, जिससे पूरा वातावरण भक्ति में डूबा हुआ था. राष्ट्रपति ने मंदिर में आयोजित लेजर शो भी देखा और दर्शन के बाद प्रसाद ग्रहण किया. इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर की परिक्रमा की। प्रथम तल पर भी किया पूजन प्रेम मंदिर के प्रथम तल पर पहुंचकर राष्ट्रपति और राज्यपाल ने श्री सीता-राम सहित अन्य विग्रहों के दर्शन किए. वहां भी उन्होंने विधिपूर्वक पूजा की और परिक्रमा की. मंदिर प्रबंधन की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह और धार्मिक साहित्य भेंट किया गया. अपने कार्यक्रम के अगले चरण में राष्ट्रपति ने इस्कॉन मंदिर (श्री श्री कृष्ण बलराम मंदिर) का दौरा किया. यहां मंदिर के संतों और पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया. राष्ट्रपति ने मुख्य मंदिर में जाकर भगवान कृष्ण-बलराम के दर्शन किए और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना की. उन्होंने पूजा सामग्री अर्पित की और कुछ समय मंदिर में ध्यान भी लगाया. मंदिर परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत नृत्य को उन्होंने देखा और सराहा. इसके साथ ही उन्होंने कीर्तन भी सुना, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। सुरक्षा और व्यवस्थाएं रहीं सुदृढ़ राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पूरे वृंदावन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क रही. मंदिर परिसरों में भी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रखी गईं. ब्रज प्रवास के दूसरे दिन की शुरुआत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के साथ हुई, जिसने इस दौरे को खास बना दिया. यह मुलाकात आस्था और संवाद का संतुलित उदाहरण रही, जहां देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद और संत परंपरा के बीच सहज बातचीत देखने को मिली।