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नए शहरों के विकास को रफ्तार, 8 शहरों को पहले चरण के लिए ₹425 करोड़

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रदेश के आठ शहरों के विकास के लिए ₹425 करोड़ की धनराशि स्वीकृत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए नए शहरों का सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास करना तथा लोगों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ में नए शहरों के समग्र विकास के लिए सीड कैपिटल के रूप में यह धनराशि जारी की जाएगी। योजना के तहत भूमि अर्जन में आने वाले खर्च का अधिकतम 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराती है, जिसे अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए कुल ₹3000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें से पहले चरण में ₹425 करोड़ जारी किए जाएंगे।

जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में बड़ी प्रगति: एयरोड्रम लाइसेंस सीएम योगी को किया गया प्रस्तुत

लखनऊ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया। इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है। इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं। एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा। तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

कैब एग्रीगेटर पर सख्ती: UP सरकार का बड़ा फैसला, Ola-Uber के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

लखनऊ  योगी सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा को देखते हुए परिवहन से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यूपी में अब ओला व उबर को भी पंजीकरण कराना होगा। परिवहन मंत्री ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 का जिक्र किया और बताया कि भारत सरकार ने 1 जुलाई 2025 को नियमावली में संशोधन किया है। भारत सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाएगा। ओला-उबर पर पहले नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। आवेदन, लाइसेंस और रिन्युअल शुल्क भी देना होगा। कौन गाड़ी चला रहा है, यह अभी तक हम नहीं जान पाते थे। इनका ड्राइवर का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन तथा फिटनेस टेस्ट आदि भी कराएंगे। परिवहन मंत्री ने बताया कि अब यूपी में बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के गाड़ी नहीं चला पाएंगे। अधिसूचना जारी होने के बाद यह लागू हो जाएगी। आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, जबकि 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। रिन्युअल हर पांच साल पर होता रहेगा। रिन्युअल के लिए पांच हजार रुपये देना होगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि ऐसा ऐप भी विकसित करेंगे, जिससे समस्त जानकारी पब्लिक डोमेन में रहे। इसके तहत ड्राइवर आदि की समस्त जानकारी भी प्राप्त होगी। अब प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगी बस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में कैबिनेट बैठक हुई। वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकार वार्ता में बताया कि बैठक में कुल 31 प्रस्ताव आए, जिसमें से 30 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने स्वीकृति दी। योगी सरकार ने ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को स्वीकृति दी। इस योजना के माध्यम से अब उत्तर प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नई पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बसें पहुंचेंगी। इन बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित इससे प्रदेश की बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित होगी। ये बसें चलाने की अनुमति निजी लोगों को मिलेगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें सीडीओ, एसपी, एआरटीओ, एआरएम सदस्य होंगे। ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी। सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए ये बसें सुबह 10 बजे तक जनपद मुख्यालय तक पहुंचेंगी। इस सेवा का लाभ विद्यार्थियों के अलावा कचहरी, ऑफिस या अपना उत्पाद शहर में बेचने जाने वाले लोगों को भी मिलेगा। कई गांवों में ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़ी बसें टर्न होने में परेशानी होती है। 12,200 में से 5000 ऐसे गांव हैं, जहां बड़ी बसें टर्न नहीं हो सकतीं। इसलिए ये छोटी बसें होंगी, जिनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और अधिकतम सीट क्षमता 28 होगी।  

अयोध्या में बनेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, भूमि हस्तांतरण को योगी कैबिनेट की मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनपद अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत बनाया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार अयोध्या के चक नंबर-4, मोहल्ला वशिष्ठ कुंड, परगना हवेली अवध, तहसील सदर में स्थित नजूल भूमि के सात गाटा नंबर (1026, 1027, 1029, 1030, 1031, 1033 मि. और 1035) कुल लगभग 2500 वर्गमीटर क्षेत्रफल को अयोध्या म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पक्ष में हस्तांतरित किया जाएगा। जिलाधिकारी अयोध्या द्वारा नगर आयुक्त के अनुरोध पर यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार यह भूमि कुछ शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन नगर निगम अयोध्या को निःशुल्क आवंटित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य इस भूमि पर आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर खेल सुविधाओं को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं को बेहतर खेल अवसंरचना उपलब्ध कराना है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह भूमि हस्तांतरण अपवाद स्वरूप किया जा रहा है और इसे भविष्य में उदाहरण के रूप में नहीं माना जाएगा।

पहले चरण में मथुरा, वाराणसी और लखनऊ में शुरू होगी इको टूरिज्म वैन सेवा, पर्यटकों को मिलेगा अनोखा अनुभव

लखनऊ उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) जल्द ही पर्यटन को नई दिशा देने वाली अनूठी पहल शुरू करने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए इको टूरिज्म वैन सेवा शुरू की जाएगी। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस क्रम में पहले चरण में मथुरा, वाराणसी और लखनऊ में इस सेवा की शुरुआत होगी। इन शहरों के फीडबैक के आधार पर इको टूरिज्म वैन सेवा को राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा। यूपीएसटीडीसी की इको टूरिज्म वैन सेवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत पर्यटन की अवधारणा को साकार करेगी। इससे एक ओर पर्यटकों को अनोखा अनुभव मिलेगा, तो वहीं दूसरी ओर यह सेवा कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में भी सार्थक कदम साबित होगी। मिलेगा ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता का वर्चुअल अनुभव यूपीएसटीडीसी पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इको टूरिज्म वैन सेवा की शुरुआत कर रहा है। यह पर्यटकों को सुविधा प्रदान करने के साथ पर्यटन यात्रा का अनोखा अनुभव भी प्रदान करेगी। इको वैन में आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और वर्चुअल रियलिटी (वीआर) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनके माध्यम से पर्यटक यात्रा के दौरान ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता का वर्चुअल अनुभव ले सकेंगे। साथ ही इको टूरिज्म वैन में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाएगा। यह पर्यटकों की सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगा। वहीं टिकट बुकिंग के लिए डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी दी जाएगी। वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूज़ीन योजना के साथ ग्रामीण पर्यटन स्थलों से भी जोड़ेगी यूपीएसटीडीसी इको-टूरिज्म वैन सेवा के साथ मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूज़ीन योजना को भी जोड़ेगा। इसके माध्यम से पर्यटकों को पर्यटन क्षेत्र के स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। साथ ही क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजन बनाने वाले रेस्टोरेंट्स और रसोइयों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह वैन पर्यटकों को इको फ्रेंडली तरीके से विभिन्न जिलों के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक ले जाएंगी। इससे रास्ते में पड़ने वाले ग्रामीण और कम ज्ञात पर्यटन स्थलों में भी पर्यटन गतिविधियों का विकास होगा। यूपीएसटीडीसी की यह पहल न केवल पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध होगी। योगी सरकार की इस नई रणनीति से उत्तर प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।

टीआई मेडिकल्स 215 करोड़ रुपये का निवेश कर स्थापित करेगी चिकित्सा उपकरण निर्माण इकाई

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस निर्माण इकाई स्थापित करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत टीआई मेडिकल्स प्रा लि को भूमि सब्सिडी प्रदान करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। कंपनी द्वारा गौतमबुद्ध नगर स्थित यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) के मेडिकल डिवाइस पार्क क्षेत्र में 4.48 हेक्टेयर भूमि पर करीब 215.20 करोड़ रुपये के निवेश से चिकित्सा उपकरण निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की एफडीआई, एफसीआई और फॉर्च्यून इंडिया-500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत प्रस्तावित है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार कंपनी को अनुमन्य सब्सिडी के तहत 14.77 करोड़ रुपये की राशि प्रतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जाएगी। यह राशि केंद्र सरकार की मेडिकल डिवाइस पार्क योजना के अंतर्गत पहले से प्राप्त सब्सिडी को समायोजित करने के बाद दी जाएगी। इस निवेश से प्रदेश में मेडिकल डिवाइस निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। यह पहल राज्य को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगी। इस परियोजना से संबंधित प्रस्ताव पर पहले विभिन्न स्तरों पर विचार किया गया था। उत्तर प्रदेश की एफडीआई, एफसीआई एवं फॉर्च्यून ग्लोबल 500/फॉर्च्यून इंडिया 500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत प्राधिकृत समिति की 5 जुलाई 2024 को हुई बैठक में परियोजना को मंजूरी दी गई थी और कंपनी को 22 जुलाई 2024 को पात्रता प्रमाणपत्र भी जारी किया गया। बाद में 15 मई 2025 को हुई इम्पावर्ड कमेटी की बैठक में सब्सिडी से जुड़े बिंदुओं पर विचार किया गया। मेडिकल डिवाइस पार्क योजना के अंतर्गत कंपनी को पहले से केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी प्राप्त हो चुकी है। इसी आधार पर एफडीआई नीति के तहत अनुमन्य कुल सब्सिडी ₹41.52 करोड़ में से पहले प्राप्त सब्सिडी घटाकर शेष ₹14.77 करोड़ की राशि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा कंपनी को प्रतिपूर्ति के रूप में देने का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे अब मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिल गई है।

बांदा में 20 हजार लीटर क्षमता का नया डेयरी प्लांट

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बुंदेलखंड क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रस्ताव मंजूर किया गया। इसके तहत बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत जनपद बांदा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के नए डेयरी प्लांट की स्थापना और झांसी में पहले से स्थापित 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लांट का विस्तार कर उसे 30 हजार लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इन परियोजनाओं के सिविल और मैकेनिकल कार्य टर्न-की आधार पर कराने के लिए इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी लि. को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। कैबिनेट ने इस कंपनी को नियमानुसार सेंटेज चार्ज देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जिसका व्यय राज्य सरकार अपने स्रोतों से वहन करेगी। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है और प्रदेश में दुग्ध उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बुंदेलखंड क्षेत्र में डेयरी प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने से दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का बेहतर और बाजार आधारित मूल्य मिल सकेगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्र में दूध के खराब होने की समस्या कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और बुंदेलखंड में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही यह पहल प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में भी सहायक मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। माननीय उच्च न्यायालय की संस्तुति के आधार पर उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली, 2026 लागू की जाएगी। इसके तहत भर्ती, कोटा और चयन प्रक्रिया से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। संशोधन के अनुसार भर्ती के स्रोत से जुड़े नियम-5, कोटा से संबंधित नियम-6, चयन प्रक्रिया से जुड़े नियम-18, पदोन्नति से संबंधित नियम-20, नियुक्ति से जुड़े नियम-22 और परिशिष्ट-1 में बदलाव किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह पदोन्नति श्रेष्ठता और वरिष्ठता के आधार पर तथा उपयुक्तता परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों को दी जाएगी। वहीं सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिए पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें वही सिविल जज शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने उस पद पर कम से कम तीन साल की सेवा और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कम से कम सात साल की सेवा पूरी की हो। इसके अलावा अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा।

शाहजहांपुर और बाराबंकी ने बराबर अंक प्राप्त कर दूसरा, जालौन ने तीसरा स्थान प्राप्त किया

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों से समग्र विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस दौरान प्रदेश में न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, बल्कि समाज के हर वर्ग का उत्थान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। सीएम योगी के सपनों को साकार करने में एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। आईजीआरएस से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में आईजीआरएस की फरवरी की रिपोर्ट में प्रदेशभर में रामपुर ने शत-प्रतिशत अंक प्राप्त कर पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि शाहजहांपुर और बाराबंकी ने बराबर अंक प्राप्त कर दूसरा तो जालौन ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।  49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की हर माह की जाती है समीक्षा आईजीआरएस हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और जन शिकायत की सुनवाई की रिपोर्ट जारी करता है। आईजीआरएस प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा करता है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। आईजीआरएस की फरवरी की रिपोर्ट के अनुसार रामपुर ने मानक पूर्णांक 140 में पूरे 140 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है।  रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि आईजीआरएस की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि रामपुर ने आईजीआरएस और सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट में पहला स्थान प्राप्त किया है।   टॉप टेन जिलों में जालौन, बरेली, श्रावस्ती और हाथरस ने बनाई जगह शाहजहांपुर जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिले में विकास परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और तय समय सीमा में पूरा करने के लिए हर हफ्ते अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की जाती है। साथ ही आम जनमानस की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। उनकी समस्या के निस्तारण के संतुष्टिपूर्ण फीडबैक पर ही आईजीआरएस की रिपोर्ट जारी की जाती है। ऐसे में आईजीआरएस की फरवरी की रिपोर्ट में शाहजहांपुर पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप आगे भी लगातार प्रयास रहेगा कि आम जनमानस की शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।  इसी तरह शाहजहांपुर ने 137 अंक और बाराबंकी ने भी 137 अंक हासिल कर दूसरा, जालौन ने 136 अंक प्राप्त कर तीसरा और बरेली के साथ श्रावस्ती और हाथरस ने बराबर-बराबर 135 अंक हासिल कर चौथा स्थान प्राप्त किया है। वहीं बलिया, आजमगढ़ और भदोही बराबर-बराबर 134 अंक हासिल कर पांचवें पायदान पर हैं। वहीं टॉप टेन जिलों में अंबेडकरनगर, प्रयागराज, कन्नौज, पीलीभीत और हमीरपुर ने जगह बनाई है।

एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन के साथ वरिष्ठ अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया बढ़ेगी आगे सुरक्षा मंजूरी के बाद जल्द तय होगी उद्घाटन तिथि, पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता लखनऊ, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया । इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है। इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं। एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा। तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।