samacharsecretary.com

मंदिरों को तोड़ने का सफेद झूठ फैला रही है कांग्रेस: मुख्यमंत्री योगी

काशी में मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेसवार्ता निशाने पर कांग्रेस, सीएम बोले: मंदिरों को तोड़ने के एआई जेनरेटेड वीडियो दिखाकर फैलाया जा रहा है झूठ कहा, कांग्रेस ने कभी नहीं किया विरासत का सम्मान, विकास में भी बन रही है बाधा पौराणिक महत्व, धार्मिक प्रक्रिया को छेड़े बिना किया जाएगा मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास काशी "जब काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण हो रहा था, तब भी कुछ लोगों ने साजिशें रची थीं। यहां तक कि जिन वर्कशॉप में मूर्तियां बनती हैं, वहां से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष लाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए और सफेद झूठ फैलाया गया कि मंदिर तोड़े जा रहे हैं।" कांग्रेस पर यह सीधा हमला बोला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने। मुख्यमंत्री शनिवार को वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के बाद पत्रकारों को सम्बोधित कर रहे थे।  दरअसल पिछले एक-दो दिनों से सोशल मीडिया पर काशी के मंदिर व मणिकर्णिका घाट को तोड़ने के कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन्हीं आरोपों का जवाब देने के लिए सीएम खुद मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने इन वीडियो की सत्यता को सिरे से खारिज करते हुए कहा, यहां पर पिछले 11 वर्षों में हुए समग्र विकास की परियोजना को बाधित करने के लिए जो साजिशें रची जा रही हैं और जिस प्रकार का दुष्प्रचार किया जा रहा है, इसके बारे में सही तथ्य जनता के सामने आ सकें, इसीलिए मुझे आज यहां पर आना पड़ा। उन्होंने कहा कि काशी के प्रति हर सनातन धर्मावलम्बी व हर भारतवासी अपार श्रद्धा का भाव रखता है, लेकिन स्वतंत्र भारत में काशी को जो सम्मान मिलना चाहिए था, काशी का जो विकास होना चाहिए था, वो नहीं हुआ। पिछले 11 वर्षों में काशी एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक व सांकृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उनका संवर्धन कर रही है और भौतिक विकास के माध्यम से नई ऊंचाइयों को भी प्राप्त कर रही है। पीएम कहते हैं 'मेरी काशी' सीएम योगी ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि देश की संसद में काशी का प्रतिनिधित्व स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं और वह अक्सर अपने भाषणों में कहते हैं, 'मेरी काशी'। प्रारम्भ से ही उन्होंने कहा है कि काशी की पुरानी काया को संरक्षित करते हुए उसे नए कलेवर के रूप में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए और उसी के अनुरूप काशी की परियोजनाएं तैयार हुईं।  देश की जीडीपी में काशी का योगदान 1.3 लाख करोड़ कॉरिडोर बनने के बाद काशी में आए परिवर्तन को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम बनने से पहले यहां प्रतिदिन औसतन पांच हजार से 25 हजार श्रद्धालु आते थे। कॉरिडोर बनने के बाद प्रतिदिन सवा लाख से डेढ़ लाख श्रद्धालु यहां दर्शन कर रहे हैं। विशेष अवसरों पर यह संख्या 6 से 10 लाख तक पहुंचती है। गतवर्ष 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ धाम में दर्शन किए। बाबा विश्वनाथ धाम बनने के बाद से अब तक अकेले काशी ने देश की जीडीपी में 1.3 लाख करोड़ रुपए का योगदान किया है।  मंदिर तोड़े नहीं गए, पुनरुद्धार हुआ सीएम ने सीधे-सीधे कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब काशी विश्वनाथ धाम बन रहा था, तब भी कांग्रेस ने सफेद झूठ फैलाया कि मंदिर तोड़े गए, जो कि सरासर गलत है। उन मंदिरों का पुनरुद्धार हुआ है, वे आज भी वैसे ही हैं। फर्क इतना है कि पहले जीर्णशीण हालत में थे, अब उनका पुनरुद्धार हो चुका है।  कांग्रेस क्यों वापस नहीं लाई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति मुख्यमंत्री ने कहा कि सौ वर्ष पहले माता अन्नपूर्णा की मूर्ति यहां से चोरी कर यूरोप पहुंचा दी गई थी। प्रधानमंत्री के प्रयास से वह मूर्ति वापस आई और काशी विश्वनाथ में उसकी स्थापना की गई। सीएम योगी ने कांग्रेस से सवाल किया कि 1947 से लेकर 2014 तक ज्यादातर समय केंद्र में कांग्रेस की सरकारें रहीं, आखिर उन्होंने यह प्रयास क्यों नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकारों में भारत की विरासत के प्रति सम्मान का भाव ही नहीं था। तुष्टीकरण की राह पर चलकर भारत की आस्था का अपमान करने वाली कांग्रेस कभी भी भारत की विरासत का सम्मान नहीं कर सकती।  सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली सीएम योगी ने कहा कि विरासत का सम्मान कैसे होता है, यह हमें कांग्रेस से पूछने की आवश्यकता नहीं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर 500 वर्षों के बाद मंदिर निर्माण का कार्य, काशी हो या अयोध्या, मां विंध्यवासिनी धाम हो या प्रयागराज, बौद्ध तीर्थस्थल हो या फिर भारत की विरासत से जुड़े सभी तीर्थस्थल, विरासत के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के सभी कार्य प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सकुशल संपन्न हो रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस द्वारा इस प्रकार की अनर्गल टिप्पणी और उसके नेताओं के इस प्रकार के बचकाने बयान और बचकानी हरकतों को देखकर उन पर हंसी भी आती है और दया भी। इनका यह कृत्य वैसे ही है जैसे 'सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली'। जिन लोगों ने विरासत का सदैव अपमान किया, वो आज भी विकास के कार्यों में बाधा पैदा कर रहे हैं। यह स्थिति केवल मणिकर्णिका में ही नहीं है, सच्चाई तो यह है कि ये लोग विकास के हर उस कार्यक्रम में बाधा पैदा करेंगे, जो प्रदेश या देश के विकास से और लोक कल्याण से जुड़ा हो।

स्पेशल: योगी सरकार के जीरो पावर्टी अभियान को धार देंगे यूनिवसिर्टी और कॉलेज

जीरो पावर्टी परिवार के सदस्यों के सर्वांगीण विकास के लिए ग्राम पंचायतों को लेंगे गोद पायलेट प्रोजेक्ट के तहत राजधानी लखनऊ से होगी ग्राम पंचायतों को गोद लेने की शुरुआत पायलेट प्रोजेक्ट के सफल परिणाम के बाद इसे पूरे प्रदेश में किया जाएगा लागू  यूनिवर्सिटी और कॉलेज अपने नजदीकी 10 से 15 ग्राम पंचायतों को लेंगे गोद ग्राम पंचायतों को गोद लेने के लिए कॉलेज, यूनिवर्सिटी और विभाग के बीच जल्द होगा एमओयू संस्थानों के एनएसएस, एनसीसी और एमएसडब्ल्यू के छात्रों को अभियान से जोड़ा जाएगा  लखनऊ योगी सरकार प्रदेश को गरीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत योगी सरकार जीरो पावर्टी अभियान से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को जोड़ने पर विचार कर रही है। इसके लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज से एमओयू साइन किया जाएगा। यह विश्वविद्यालय और कॉलेज जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित निर्धन परिवारों के सर्वांगीण विकास के लिए 10 से 15 ग्राम पंचायतों को गोद लेंगे। इन संस्थानों के एनएसएस, एनसीसी, एमएसडब्ल्यू समेत विभिन्न कोर्स के छात्र जीरो पावर्टी परिवार के सदस्यों को आजीविका, कौशल विकास, रोजगार व सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों में इन्हे जोड़ने के लिए वालंटियर्स के रूप में काम करेंगे। इसकी शुरुआत पायलेट प्रोजेक्ट के तहत सबसे पहले राजधानी लखनऊ से होगी। वहीं सफल परिणाम के बाद चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।  संस्थानों के स्तर पर नोडल शिक्षक की जाएगी तैनाती प्रमुख सचिव नियोजन एवं जीरो पावर्टी अभियान के नोडल अधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत के चिन्हित परिवारों को विश्वविद्यालय और कॉलेज के छात्रों द्वारा आजीविका संवर्धन, कौशल विकास, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सर्वे करेंगे। इसे प्रभावी रूप से लागू करने के लिए संस्थानों के स्तर पर नोडल शिक्षक की तैनाती की जाएगी, जो पूरे अभियान की निगरानी करेंगे और ग्राम पंचायतों में चल रहे कार्यक्रमों का मार्गदर्शन करेंगे। युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के एनएसएस, एनसीसी और एमएसडब्ल्यू (सोशल वर्क) समेत विभिन्न कोर्स में अध्यनरत छात्रों को भी जोड़ा जाएगा। ये छात्र गांवों में जाकर जीरो पावर्टी परिवारों के सदस्यों की जरूरतों का आकलन करेंगे।  जिलाधिकारी स्तर पर एमओयू और त्रैमासिक समीक्षा बैठकें की जाएंगी प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए माइक्रो-प्लानिंग की जाएगी। युवाओं को स्किलिंग, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट लिंकेंज से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा जीरो पावर्टी परिवार के युवाओं को आवेदन प्रक्रियाओं में सहायता दी जाएगी ताकि पात्र परिवार किसी भी योजना से वंचित न रहें। इतना ही नहीं योग्य लाभार्थियों की नियमित मेंटरिंग और प्रगति की ट्रैकिंग भी की जाएगी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का 100  प्रतिशत कवरेज मिले। इसे प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन के साथ विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का समन्वय किया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी स्तर पर एमओयू और त्रैमासिक समीक्षा बैठकें आयोजित होंगी, ताकि कार्यों की प्रगति का आकलन किया जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।

मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर व काल भैरव मंदिर में किया दर्शन पूजन

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को वाराणसी पहुंचे। चंदौली में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के शिलान्यास समारोह से वह सीधे वाराणसी पहुंचे। उन्होंने यहां काशी विश्वनाथ मंदिर व काशी कोतवाल काल भैरव के दर्शन-पूजन किए। नए वर्ष में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दूसरा वाराणसी दौरा है।  मुख्यमंत्री ने की लोक कल्याण की कामना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी कोतवाल काल भैरव मंदिर और श्री काशी विश्वनाथ धाम में विधिवत पूजन-अर्चन कर लोक कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने काल भैरव मंदिर में नन्हे बच्चों को देख उनका हाल पूछा और चॉकलेट भी दी। मुख्यमंत्री ने दर्शन करने आए भक्तों का अभिवादन भी किया।  इस दौरान कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, अवधेश सिंह आदि मौजूद रहे।

यूपी के प्रशंसक बने मुख्य न्यायाधीश, मुक्त कंठ से यूपी को सराहा, कहा – जिस भी प्रदेश में जाऊंगा, यूपी सरकार का उदाहरण दूंगा

मुख्य न्यायाधीश ने चंदौली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया छह एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास व भूमि पूजन न्याय का मंदिर साबित होगा कोर्ट कॉम्प्लेक्सः मुख्य न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश ने कहा, अन्य राज्य सरकारों व हाईकोर्ट से आह्वान करूंगा कि वहां भी मिलें ऐसी सुविधाएं सीएम से किया अनुरोध, कॉम्प्लेक्स में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंदौली देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शनिवार को चंदौली में छह एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। उन्होंने इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार व उच्च न्यायालय को बधाई दी और प्रदेश सरकार के प्रयास को सराहा। उन्होंने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री ने 10 कोर्ट कॉम्प्लेक्स की घोषणा की है। इनमें से छह की स्थापना (शिलान्यास व भूमि पूजन) का कार्य आज शुरू हुआ है। इसके बनने से यूपी सारे भारत में उदाहरण प्रस्तुत करेगा। ये कॉम्प्लेक्स देश के लिए बेंचमार्क बनेंगे। मैं जिस भी प्रदेश में जाऊंगा, वहां यूपी सरकार का उदाहरण दूंगा। राज्य सरकारों व हाईकोर्ट से आह्वान करूंगा कि वहां भी ऐसी सुविधाएं मिलें।   न्याय का मंदिर साबित होगा कोर्ट कॉम्प्लेक्स मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह क्षेत्र अनेक ऐतिहासिक धार्मिक मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री जी ने उसी इतिहास में नई कड़ी जोड़ी है,  जब यहां न्यायिक मंदिरों की स्थापना की जा रही है। इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स अगले 50 वर्ष तक न्याय परिसर की आवश्यकताओं को सशक्त रूप से पूरा करने में सफल रहेंगे। हर प्रकार की सुविधाओं से युक्त इस कॉम्प्लेक्स में अधिवक्ताओं व आम आदमी के लिए प्रदान की गईं सुविधाएं सराहनीय हैं। कोर्ट कॉम्प्लेक्स न्याय का मंदिर साबित होगा। यहां बैठकर न्यायिक अधिकारी मानवीय मूल्यों का ध्यान रखते हुए फरियादियों को न्याय देंगे। इसमें बार के सदस्यों की भी सक्रिय भूमिका होगी।  मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान में डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशयरी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसमें एक अनुच्छेद है कि हर राज्य के पास अपना हाईकोर्ट होगा और उस हाईकोर्ट के पास मौलिक, मानवीय व अन्य अधिकारों को लागू करने की क्षमता होगी। संविधान निर्माताओं की सोच यही रही कि डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशयरी स्थापित होगी तो लोगों को अपने क्षेत्र में कोर्ट की सुविधाएं मिलेंगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का अनुरोध मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट से कहा कि जनपद न्यायालयों में प्रैक्टिस करने वाली महिलाओं के लिए अलग से बार रूम बनें। उन्होंने यहां की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया कि कॉम्प्लेक्स में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बन जाए। इससे बुजुर्गों, वादकारियों आदि को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी निजात मिल जाएगी।  शिलान्यास व भूमि पूजन कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली व उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता तथा वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।

यूपी में माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा, गोरखपुर और संतकबीर नगर में बन रहीं पायलट परियोजनाएं

गोरखपुर व संतकबीर नगर में राप्ती और कुवानो नदी क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन का विकास जल संरक्षण के साथ किसानों को मिलेगा कम लागत में अधिक उत्पादकता का लाभ लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं व जल उपयोग दक्षता का विस्तार करने के उद्देश्य से माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। इस दिशा में विभाग केंद्र सरकार की मॉडर्नाइजेशन ऑफ कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (एमसीएडीडब्लूएम) परियोजना के तहत गोरखपुर और संत कबीर नगर जिलों में माइक्रो इरिगेशन की पायलट परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। ये पायलट परियोजनाएं गोरखपुर में कलपईचा/रामगढ़ ताल व राप्ती नदी क्षेत्र में, जबकि संतकबीर नगर में कुवानो नदी क्षेत्र में बनाई जा रही हैं, जो माइक्रो इरिगेशन की पीपीआईएन (प्रेशराइज्ड पाइप्ड इरिगेशन नेटवर्क) तकनीक के जरिए जल उपयोग की दक्षता में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि लाएंगी। पायलट परियोजनाओं के सफल संचालन के आधार पर इसका विस्तार प्रदेश के अन्य जनपदों में भी किया जाएगा, जो किसानों के लिए लाभप्रद होने के साथ प्रदेश में कृषि क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित करेगी। गोरखपुर और संतकबीर नगर में हो रहा निर्माण सिंचाई विभाग केंद्रीय परियोजना के तहत गोरखपुर और संत कबीर नगर में कुल छह पायलट परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। इनमें चार परियोजनाओं  के फाइनल डीडीआर तैयार हो चुके हैं, जबकि शेष दो परियोजनाओं के कमांड एरिया को लेकर विचार चल रहा है, जिस पर जल्द ही स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है। परियोजनाओं का कुल सीसीए (कल्चरेबल कमांड एरिया) 2149 हेक्टेयर है, जिसमें गोरखपुर के बांसगांव, मलांव व मझगवां, राजधनी, बरगदवां, जंगल गौरी-1 तथा संतकबीर नगर जिले में प्रजापतिपुर क्लस्टर शामिल हैं। इनमें से गोरखपुर के बांसगांव और जंगलगौरी-1 क्लस्टरों के कमांड एरिया को स्वीकृति मिलते ही, फरवरी 2026 के अंत तक सभी क्लस्टरों में परियोजनाओं का संचालन शुरू हो जाएगा। इससे क्षेत्र के हजारों किसान प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित होंगे। उन्हें रबी व खरीफ, दोनों फसलों के उत्पादन में लाभ मिलेगा। जल उपयोग दक्षता में होगी 75 प्रतिशत वृद्धि माइक्रो इरिगेशन की ये परियोजनाएं पीपीआईएन तकनीक के जरिए पानी को जलस्रोत से सीधे खेतों तक पहुंचाती है, जिससे पानी की बर्बादी में कमी आने के साथ जल उपयोग दक्षता में लगभग 75 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी। परियोजना के तहत पीपीआईएन के जरिए क्षेत्र के सभी जलस्रोतों का एकीकरण कर उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही किसानों को माइक्रो इरिगेशन के यंत्र, ड्रिप और स्प्रिंकलर के लिए सहायता भी प्रदान की जाएगी। प्रत्येक क्लस्टर में गठित वाटर यूजर सोसाइटी सिंचाई नेटवर्क के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगी। इन पायलट परियोजनाओं के सफल संचालन के आधार पर परियोजना का विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों में भी किया जाना है, जो प्रदेश में माइक्रो इरिगेशन के विकास से पीडीएमसी (पर ड्राप मोर क्रॉप) अवधारणा को सफल बनाएंगी। माइक्रो इरिगेशन की ये परियोजनाएं एक ओर किसानों को कम लागत पर बेहतर उत्पादकता और दीर्घकालिक जल-सुरक्षा प्रदान करेंगी, साथ ही मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप प्रदेश में सतत कृषि के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

बुलडोजर एक्शन और मणिकर्णिका का भविष्य, काशी के ‘महाश्मशान’ की तस्वीरों में नई दिशा

वाराणसी काशी में इन दिनों मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प का काम चल रहा है. निर्माण कार्य में हो रही तोड़फोड़ को लेकर हंगामा भी बरपा हुआ है. कांग्रेस इसे लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर है. इस बीच शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे. उन्होंने कहा कि 'कुछ लोग काशी को बदनाम कर रहे हैं'. इस बीच यूपी सरकार ने मणिकर्णिका के प्रस्तावित नए स्वरूप की तस्वीरें जारी की हैं जिनमें इस 'महाश्मशान' के भविष्य के स्वरूप को देखा जा सकता है. मणिकर्णिका घाट का प्लेटफार्म काफी बड़ा बनाया जाएगा ताकि एक साथ किए जाने वाले अंतिम संस्कार को लेकर विश्व स्तरीय सुविधाएं वहां मिल सकें. सरकार ने मणिकर्णिका घाट को नए सिरे से बनाने की तैयारी की है. इस प्रोजेक्ट की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अंतिम संस्कार के लिए बना यह घाट कायाकल्प के बाद कैसा दिखाई देगा. 35 करोड़ की राशि आवंटित फिलहाल मणिकर्णिका घाट पहुंचने के लिए तंग गलियों से होकर गुजरना पड़ता है. यहां दाह संस्कार की मूलभूत सुविधाएं बेहद जर्जर और गंदगी से भरी पड़ी थीं. लेकिन पीएम मोदी ने कुछ समय पहले काशी कॉरिडोर से सटे मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प की परियोजना को अपने विजन काशी में शामिल किया था. पहले ही प्रथम चरण के लिए 35 करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी है और जल्द ही मणिकर्णिका घाट नए तरीके से बनकर सामने आएगा.  मणिकर्णिका पर कभी नहीं बुझती चिता की आग मणिकर्णिका घाट के बारे में यह कहा जाता है कि यहां 24 घंटे 365 दिन कभी चिता की आग नहीं बुझती. यहां जलने वाली चिताओं से निकलने वाली भस्म कॉरिडोर तक आती हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में अब जब कॉरिडोर बिल्कुल मणिकर्णिका घाट से सट गया है, इसके कायाकल्प की जरूरत भी महसूस की जा रही थी. हालांकि यहां एक चबूतरे के विध्वंस के बाद हंगामा मच गया क्योंकि वहां कई मूर्तियां थीं. सरकार अब नए तरीके से इसे बना रही है. 'कुछ लोग काशी को बदनाम कर रहे' शनिवार को वाराणसी के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. जब काशी विश्वनाथ धाम परियोजना की शुरुआत हुई थी, तब भी इसके खिलाफ साजिशें रची गई थीं. आज वही लोग टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर यह भ्रम फैला रहे हैं कि मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं, जबकि इससे बड़ा सफेद झूठ कुछ नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज काशी को एक नई वैश्विक पहचान मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि काशी की प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे देश और दुनिया के सामने नए स्वरूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए. इसी सोच के तहत बीते वर्षों में काशी में बड़े स्तर पर विकास कार्य हुए हैं. कांग्रेस ने साधा निशाना यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा, 'देश, काशी और हिंदू धर्म की विरासत को मोदी-योगी सरकार ने ध्वस्त कर दिया है. कॉरिडोर के नाम पर मॉल बनाया गया और काशी विश्वनाथ जी के कई मंदिर तोड़े गए. वट वृक्ष को खत्म कर दिया गया. कसौटी के पत्थर पर लक्ष्मी नारायण जी के मंदिर को तोड़ दिया है. 2023 में मणिकर्णिका घाट का स्वनीकरण की जगह उसे विध्वंस कर दिया गया.' 'ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है' कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, 'बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मिृतियां भी जुड़ी हैं. विकास के नाम पर, चंद लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए, देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है. इसके पहले भी बनारस में रिनोवेशन के नाम पर कई सदी पुराने अनेक मंदिर ध्वस्त किए जा चुके हैं. काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिटाने की ये साजिशें तत्काल बंद होनी चाहिए.  

CM योगी का बयान: काशी में मूर्ति तोड़ने का आरोप झूठा, AI के जरिए फैलाया जा रहा भ्रम

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को वाराणसी के दौरे पर हैं. इस दौरान मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए काशी को लेकर फैलाए जा रहे कथित भ्रम और सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर कड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के मुताबिक, टूटी हुई मूर्तियों की एआई तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर यह झूठ फैलाया जा रहा है कि काशी में मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं.  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि काशी अविनाशी है. काशी के प्रति हर सनातन धर्मावलंबी और हर भारतवासी अपार श्रद्धा का भाव रखता है. लेकिन स्वतंत्र भारत में काशी को जो सम्मान मिलना चाहिए था, जो विकास होना चाहिए था और समग्र विकास के कार्यक्रमों को जो महत्व मिलना चाहिए था, वह आज़ादी के तत्काल बाद नहीं मिल सका. पिछले ग्यारह–साढ़े ग्यारह सालों के भीतर काशी ने एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उसका संवर्धन किया है. साथ ही भौतिक विकास के कार्यों के माध्यम से काशी ने नई ऊंचाइयों को भी प्राप्त किया है. आज काशी को एक नई वैश्विक पहचान मिली है. यह हम सभी का सौभाग्य है कि काशी का प्रतिनिधित्व देश की संसद में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं. प्रारंभ से ही उनका साफ दृष्टिकोण रहा है कि काशी की पुरातन काया को संरक्षित करते हुए उसे नए कलेवर में देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए. इसी सोच के अनुरूप पिछले ग्यारह–साढ़े ग्यारह सालों में काशी के लिए योजनाएं तैयार की गईं. काशी के लिए 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जिनमें से 36 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाएं लोकार्पित हो चुकी हैं. शेष परियोजनाएं तेजी से प्रगति पर हैं. ये सभी परियोजनाएं काशी के समग्र विकास से जुड़ी हैं, जिनमें आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई है. इन योजनाओं का उद्देश्य यह भी है कि काशी में नए संस्थान खुलें, परंपरागत उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को जीआई टैग के माध्यम से वैश्विक पहचान मिले और स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके. इन सभी क्षेत्रों में पिछले ग्यारह–साढ़े ग्यारह सालों में युद्ध स्तर पर काम हुआ है. काशी की गलियों की स्थिति दो हजार चौदह से पहले कैसी थी, यह किसी से छुपी नहीं है. काशी विश्वनाथ धाम बनने से पहले औसतन श्रद्धालुओं की संख्या पांच हजार से लेकर अधिकतम पच्चीस हजार तक रहती थी. आज वही संख्या प्रतिदिन सवा लाख से डेढ़ लाख तक पहुंच चुकी है. सावन मास, महाशिवरात्रि और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान यह संख्या छह लाख से लेकर दस लाख तक पहुंच जाती है. केवल पिछले साल ही काशी में ग्यारह करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ धाम में दर्शन किए. काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद से अब तक काशी ने देश की जीडीपी में लगभग एक लाख तीस हजार करोड़ रुपये का योगदान दिया है. इससे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं – चाहे वह गाइड के रूप में हो, पुरोहित्य कर्म के रूप में, व्यापार, फूल-पत्ती और प्रसाद की बिक्री, होटल, रेस्टोरेंट, नाविक, टैक्सी या अन्य सेवाओं के माध्यम से. आज काशी की सभी प्रमुख सड़कें फोर लेन से जुड़ी हैं. यातायात की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है और घंटों के जाम की जगह अब सुगम यातायात व्यवस्था है. काशी के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से वंदे भारत, अमृत भारत सहित नई रेल सुविधाएं शुरू हुई हैं. एयर कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है और देश में पहली बार वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वॉटरवे की सुविधा विकसित की गई है, जिससे व्यापार और परिवहन के नए आयाम खुले हैं.

श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर निर्माण के लिये हुई पहली रजिस्ट्री

– सुगम दर्शन का सपना होगा साकार, ब्रज में बढ़ेगा पर्यटन और रोजगार – हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से कॉरिडोर निर्माण का रास्ता हो रहा साफ मथुरा  कान्हा की नगरी वृन्दावन में ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के भक्तों के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। भव्य और दिव्य 'श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर' के निर्माण की दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए शुक्रवार को भूमि की पहली रजिस्ट्री सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश पर गठित हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से कॉरिडोर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस परियोजना से न केवल दर्शन सरल होंगे, बल्कि समूचे ब्रज क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। गोस्वामी परिवार ने सहर्ष की पहली रजिस्ट्री श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर निर्माण के लिए आज बिहारी पुरा क्षेत्र की संपत्ति संख्या- 25 के एक भाग (69.26 वर्ग मीटर) की रजिस्ट्री तहसीलदार सदर के पक्ष में की गई। यति गोस्वामी, अभिलाष गोस्वामी और अनिकेत गोस्वामी ने इस पुनीत कार्य हेतु सहर्ष अपनी भूमि का विक्रय- विलेख (सेल डीड) निष्पादित किया। जिला मजिस्ट्रेट चन्द्र प्रकाश सिंह और अपर जिलाधिकारी डॉ० पंकज कुमार वर्मा के प्रयासों से हुई यह पहली रजिस्ट्री कॉरिडोर निर्माण के संकल्प को धरातल पर उतारने की शुरुआत है। परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मेल उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार गठित इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक कुमार की अध्यक्षता में प्रशासन, पुलिस, पुरातत्व विभाग और गोस्वामी समाज के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति ने मंदिर के गोस्वामियों, सेवायतों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों के साथ निरंतर बैठकें कर सभी के सुझावों को इस योजना में शामिल किया है। यह कॉरिडोर वृंदावन की प्राचीन दिव्यता को बनाए रखते हुए आधुनिक जरूरतों को पूरा करेगा। इस भव्य निर्माण से ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान मिलेगी और ठाकुर जी के भक्तों के लिए दर्शन की राह आसान हो जाएगी। प्रस्तावित कॉरिडोर में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित वातावरण, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और सुगम प्रवेश- निकासी द्वार बनाए जाएंगे, जिससे संकरी गलियों में होने वाली भीड़ का दबाव कम होगा। धार्मिक पर्यटन और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार कॉरिडोर के निर्माण से वृन्दावन में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को होगा। नए होटलों, रेस्टोरेंटों और दुकानों के खुलने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। समिति ने यह भी घोषणा की है कि जो लोग स्वेच्छा से कॉरिडोर हेतु अपनी जमीन पहले प्रदान करेंगे, उन्हें भविष्य में दी जाने वाली सुविधाओं में वरीयता दी जाएगी। सुरक्षित और सुविधाजनक होंगे ठाकुर जी के दर्शन अभी तक श्रद्धालुओं को वृंदावन की संकरी गलियों के कारण भारी परेशानी और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ता था। कॉरिडोर बनने के बाद श्री बांके बिहारी जी के दर्शन अत्यंत सुलभ हो जाएंगे। यह प्रोजेक्ट न केवल वृन्दावन की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखेगा, बल्कि आधुनिक तीर्थयात्रियों की जरूरतों को भी पूरा करेगा। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि इस पवित्र कार्य में सभी अपना सहयोग दें ताकि ब्रज की महिमा वैश्विक पटल पर और अधिक चमके। हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी में शामिल समिति में मा० न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मा० उच्च न्यायालय इलाहाबाद/ अध्यक्ष अशोक कुमार जी, मा० जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सेवानिवृत्त)/ सदस्य मुकेश मिश्रा जी, मा० जिला एवं सत्र न्यायाधीश मथुरा/ सदस्य विकास कुमार जी, मुंसिफ / सिविल जज मथुरा/ सदस्य शिप्रा दुबे जी, जिला मजिस्ट्रेट / कलेक्टर / सदस्य सचिव चन्द्र प्रकाश सिंह जी, सदस्य/ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार जी, नगर आयुक्त मथुरा- वृन्दावन नगर निगम/ सदस्य जग प्रवेश जी, सदस्य/ उपाध्यक्ष मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण लक्ष्मी एन जी, सदस्य/ अधीक्षण पुरातत्वविद् भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा डॉ० स्मिता एस० कुमार जी, गोस्वामी राजभोग समूह से शैलेन्द्र गोस्वामी पुत्र श्री ब्रजनाथ गोस्वामी एवं श्रीवर्धन गोस्वामी पुत्र श्री जुगल किशोर गोस्वामी, गोस्वामी शयन भोग समूह से श्री दिनेश कुमार गोस्वामी पुत्र श्री बिहारीलाल गोस्वामी एवं श्री विजय कृष्ण गोस्वामी (बब्बू) पुत्र श्री बाल कृष्ण गोस्वामी शामिल है।

स्टार्टअप इंडिया के 10 साल : उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप क्रांति को गति देते सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर लैब सुविधा, मेंटरशिप, टेस्टिंग और नेटवर्किंग से युवाओं को मिल रहा अवसर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश त्वरित गति से नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक के विकास की दिशा में अग्रसर है। प्रदेश में 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस देश की तकनीकी अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। यह स्टार्टअप क्रांति को गति देने का काम कर रहे हैं। सरकार का यह कदम स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बना रहा है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इनोवेशन हब के रूप में स्थापित होने की ओर कदम बढ़ा रहा है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को आधुनिक अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जाता है। ये ऐसे विशेषीकृत संस्थान होते हैं, जो किसी एक उन्नत तकनीक या क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पाद, विकास और उद्योग सहयोग के केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां पर स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को उच्च स्तरीय लैब सुविधाएं, प्रोडक्ट परीक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उद्योग जगत से नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने थीम आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति दी है। ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, मेडिटेक, टेलिकॉम, ड्रोन, एडिटिव, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इन अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा विश्वस्तरीय स्टार्टअप बना सकेंगे और प्रदेश को नए रोजगार अवसरों का बड़ा गंतव्य बनाएंगे। सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस  में चयनित प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप को जो सुविधाएं प्रदान की जा रही है, उनमें उच्च स्तरीय लैब, को-वर्किंग स्पेस, रिसर्च सपोर्ट, प्रोडक्ट टेस्टिंग और विशेषज्ञ मेंटरशिप शामिल हैं। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा की राह में संसाधनों का आभाव रोड़ा न बने। प्रदेश सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता का भी मजबूत ढांचा तैयार किया है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थापित 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्षेत्रीय विकास को भी गति दे रहे हैं।  जिससे छोटे शहरों के युवाओं को भी विश्व स्तरीय सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हो रही हैं ।

योगी सरकार के नेतृत्व में यूपी में औद्योगिक विस्तार को नई रफ्तार, डिफेंस कॉरिडोर में 1000 एकड़ भूमि आवंटन की तैयारी

झांसी, अलीगढ़, चित्रकूट और लखनऊ बने निवेशकों की पसंद करीब ₹3.5 हजार करोड़ के प्रस्तावित निवेश से औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बल ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर हो सकता है निवेश प्रस्तावित भूमि आवंटन से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार होगा उपलब्ध लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के अंतर्गत पाइपलाइन में मौजूद निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए लगभग 1000 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटन की तैयारी की जा रही है। योगी सरकार की स्पष्ट डिफेंस इंडस्ट्रियल नीति, तेज निर्णय प्रक्रिया और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते देश–विदेश की कंपनियां उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में निवेश के लिए आगे आ रही हैं। उपलब्ध प्रस्तावों के अनुसार निवेश की इच्छुक कंपनियों को विभिन्न नोड्स में भूमि आवंटन प्रस्तावित है, जिनके माध्यम से करीब ₹3.5 हजार करोड़ के निवेश की संभावना है। डिफेंस कॉरिडोर का प्रमुख केंद्र बना झांसी नोड उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत प्रस्तावित निवेश में झांसी नोड निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है। यहां गुडलक एस्ट्रा द्वारा 247 एकड़ भूमि पर ₹1000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। वहीं, रेडवुड ह्यूजेस द्वारा 247 एकड़ भूमि पर ₹700 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यही नहीं, सिटाडेल और गुरुत्वा जैसी कंपनियों द्वारा भी डिफेंस एंड एलाइड मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश का प्रस्ताव है। झांसी में यह निवेश बुंदेलखंड को डिफेंस इंडस्ट्रियल क्लस्टर के रूप में विकसित करने के योगी सरकार के विजन को मजबूती देगा। अलीगढ़ और चित्रकूट में हाई-टेक डिफेंस और ड्रोन सेक्टर को बढ़ावा अलीगढ़ फेज–2 नोड में स्पेसकेम, मराल और जी-1 ऑफशोर जैसी कंपनियों द्वारा केमिकल, ऑफशोर और डिफेंस सपोर्ट मैन्युफैक्चरिंग में निवेश प्रस्तावित है। चित्रकूट नोड में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा 209.95 एकड़ भूमि पर ₹672 करोड़ का निवेश प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, आईजी ड्रोन्स द्वारा ड्रोन टेक्नोलॉजी सेक्टर में ₹100 करोड़ का निवेश प्रस्ताव है। यह निवेश चित्रकूट को योगी सरकार के डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम होगा। लखनऊ नोड में डिफेंस सपोर्ट और टेक्नोलॉजी यूनिट्स राजधानी लखनऊ स्थित डिफेंस नोड में भी नेक्सा मुंबई, इंद्रप्रस्थ और प्रोमोटेक जैसी कंपनियों द्वारा कम भूमि में उच्च तकनीक आधारित निवेश प्रस्तावित हैं। यह निवेश डिफेंस सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी और सपोर्ट सिस्टम को मजबूती प्रदान करेगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) को डिफेंस कॉरिडोर में इसके अतिरिक्त भी निवेश के कई और आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिनके लिए आवश्यक भूमि के आवंटन की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। यूपीडा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उसके पास डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में संभावित निवेश के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए भूमि आवंटन की सभी आवश्यक प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों का पालन किया जा रहा है। डिफेंस उत्पादन, रोजगार और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) के तहत प्रस्तावित भूमि आवंटन से योगी सरकार को उम्मीद है कि हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध होगा। इससे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता तथा स्थानीय एमएसएमई व स्टार्टअप्स को डिफेंस सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान को भी मजबूती देगी।