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श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए 12100 फीट लम्बाई में घाटों का निर्माण, कम से कम पैदल चलने के लिए घाटों के नजदीक बनाई गई पार्किंग

मकर संक्रांति स्नान पर्व के लिए तैयारी पूरी, 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन का प्रशासन का अनुमान  श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए 12100 फीट लम्बाई में घाटों का निर्माण, कम से कम पैदल चलने के लिए घाटों के नजदीक बनाई गई पार्किंग 42 पार्किंग स्थल का निर्माण, आवागमन सुगम बनाने के लिए गोल्फ कार्ट और रैपिडो बाइक सेवा होगी मददगार स्वच्छता के लिए 3300 स्वच्छता कर्मी तैनात, मेला क्षेत्र में 25,880 टॉयलेट का निर्माण यातायात एवं भीड़ प्रबन्धन हेतु एआई सर्विलांस बेस्ड अन्तर्जनपदीय एवं अन्तर्राज्यीय कार्ययोजना का विकास प्रयागराज  प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले का दूसरा स्नान पर्व मकर संक्राति 15 जनवरी को है। पौष पूर्णिमा स्नान पर्व में 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को सकुशल स्नान संपन्न कराने के बाद अब मेला प्रशासन ने मकर संक्रांति स्नान पर्व के लिए कमर कस ली है। इसके लिए स्नान घाटों पर विशेष व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं को कम से कम पैदल चलना पड़े, इसके लिए घाटों के समीप ही पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इस दौरान एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान का प्रशासन का अनुमान है।  प्रशासन ने तैयार किया भीड़ प्रबंधन का मेगा प्लान  माघ मेला-2024 में इस पर्व पर 28.95 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया था। इस बार लगभग तीन गुना अधिक श्रद्धालुओं के आगमन के अनुमान को देखते हुए मेला प्रशासन ने भी भीड़ प्रबंधन का मेगा प्लान तैयार किया है। माघ मेला अधिकारी ऋषिराज का कहना है भीड़ प्रबन्धन एवं सुगम यातायात के दृष्टिगत इस बार 42 अस्थायी पार्किंग विकसित की गयी है, जिसमें लगभग एक लाख से अधिक वाहन पार्क हो सकेंगे। माघ मेला 2025-26 में कुल 12100 फीट लम्बाई में घाटों का निर्माण किया गया है जिनमें सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं चेंजिंग रूम, पुऑल, कॉसा, शौचालय आदि उपलब्ध हैं। मेला अधिकारी के अनुसार माघ मेले में गंगा में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कानपुर के गंगा बैराज से प्रतिदिन 8000 क्यूसेक जल छोड़ा जा रहा है। प्रयागराज में दोनों नदियों में गिरने वाले सभी 81 नालों की टैपिंग की जा चुकी है। निरंतर गंगा जल की मॉनिटरिंग हो रही है। स्वच्छता , सुरक्षा और सुगम परिवहन को प्राथमिकता शासन के निर्देश पर माघ मेले में स्वच्छता , सुरक्षा और सुगम परिवहन पर विशेष जोर दिया गया है। मेला अधिकारी ऋषिराज बताते हैं कि माघ मेले को खुले में शौच मुक्त (O.D.F.), दुर्गन्ध मुक्त और गंगा में जीरो डिस्चार्ज हेतु लगभग 25,880 शौचालय, 11 हजार डस्टबिन, 10 लाख से अधिक लाइनर बैग, 25 सक्शन गाड़ियां एवं 3,300 सफाई कर्मी तैनात किये गये हैं। श्रद्धालुओं के सुगम एवं सुलभ आवागमन हेतु बाइक टैक्सी और गोल्फ कार्ट की व्यवस्था की गयी है। माघ मेला पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय बताते हैं कि सम्पूर्ण मेला क्षेत्र में 17 थाने व 42 पुलिस चौकी, 20 अग्निशमन स्टेशन, 07 अग्निशमन चौकी, 20 अग्निशमन वॉच टावर, 01 जल पुलिस थाना, 01 जल पुलिस कन्ट्रोल रूम तथा 04 जल पुलिस सब कन्ट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।  8 किलोमीटर से अधिक डीप वाटर बैरीकेडिंग एवं 02 किलोमीटर रिवर लाइन (एकल दिशा मार्ग हेतु) लगायी गयी है। मेला क्षेत्र में सुरक्षा के दृष्टिगत पैरा मिलिट्री फोर्स की तैनाती की गयी है। नगर एवं मेला क्षेत्र में पूर्व से स्थापित सीसीटीवी  कैमरों के अतिरिक्त एआई  युक्त कैमरों सहित 400 से अधिक कैमरों के माध्यम से क्राउड मानिटरिंग, क्राउड डेन्सिटी एनालिसिस, इन्सीडेन्ट रिपोर्टिंग, स्वच्छता एवं सुरक्षा निगरानी की व्यवस्था की गयी है।

सौर ऊर्जा से हाई क्वॉलिटी चारा बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं

गो सेवा से लखपति बन गईं झांसी की प्रवेश कुमारी  सौर ऊर्जा से हाई क्वॉलिटी चारा बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं नए स्टार्टअप से गांवों में शुरू हुई सामूहिक भागीदारी की प्रथा सीएम योगी के आत्मनिर्भर विजन को मिल रही रफ्तार लखनऊ  बुंदेलखंड की धरती अब न केवल शौर्य के लिए, बल्कि महिला उद्यमिता के रूप में भी पहचानी जा रही है। झांसी की प्रवेश कुमारी ने चारा बनाने की यूनिट के जरिये वह मुकाम हासिल किया है, जो आज प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए उदाहरण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के सपने को धरातल पर उतारते हुए प्रवेश ने सौर ऊर्जा की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले पशु चारे की यूनिट स्थापित कर न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त किया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है। बिजली खर्चा शून्य, मिल रहा सस्ता और पोषक चारा इस उद्यम की सबसे बड़ी विशेषता इसका ईको-फ्रेंडली होना है। योगी सरकार और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (DA) के सहयोग से स्थापित यह यूनिट पूरी तरह 18 kW सौर ऊर्जा प्रणाली पर संचालित होती है। इससे बिजली का खर्च शून्य के बराबर है, जिससे चारे की उत्पादन लागत कम आती है। सस्ता और पोषक चारा मिलने से स्थानीय डेयरी किसानों के पशुओं का स्वास्थ्य सुधरा है और दूध उत्पादन क्षमता में भी इजाफा हुआ है। रोजगार और सामूहिक भागीदारी की नई प्रथा प्रवेश कुमारी आज करीब 25,000 रुपये प्रति माह कमा रही हैं। उनके इस स्टार्टअप ने गांव की सामाजिक संरचना को भी बदला है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा है। गांव की अन्य महिलाओं को स्थायी आय और आर्थिक स्वतंत्रता मिली रही है। जिससे वे भी अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। खरीद से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण तक की जिम्मेदारी खुद संभालती हैं यहां आधुनिक मशीनरी और मानकीकृत तकनीकों से पौष्टिक चारा तैयार किया जाता है। साथ ही स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। प्रवेश केवल उद्यमी नहीं, बल्कि एक कुशल मैनेजर भी हैं। वे कच्चे माल की खरीद से लेकर वित्तीय खातों, उत्पादन योजना और गुणवत्ता नियंत्रण तक की जिम्मेदारी खुद संभालती हैं। उनकी इस सक्रिय शैली और वित्तीय अनुशासन के कारण उनके 'गोमाता कैटल फीड' को पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है। छोटे प्रयास से बड़ी शुरुआत शुरुआत एक छोटे प्रयास से हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के मार्गदर्शन ने इसे व्यवसाय बना दिया। आज गांव की महिलाएं साथ मिलकर काम कर रही हैं। – प्रवेश कुमारी, महिला उद्यमी

ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट

योगी सरकार की पहल से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बनेगा देश का सबसे ‘ग्रीन’ एयरपोर्ट ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट टर्मिनल भवन को खास तरह से किया गया है डिजाइन, ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत रहेगी न्यूनतम 20% पार्किंग क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फास्ट और स्टैंडर्ड चार्जिंग की सुविधा 82.94 एकड़ में सोलर फार्म, 51,966 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से होगा संचालन आरएनजी प्लांट, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट से पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई दिशा लखनऊ/ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) न सिर्फ हवाई कनेक्टिविटी का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित करेगा। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जेवर एयरपोर्ट को भारत का पहला IGBC ग्रीन कैंपस प्रमाणित एयरपोर्ट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है, जो बड़ी उपलब्धि है। यह एयरपोर्ट ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से विकसित किए गए नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर आधारित है। स्टैंडर्ड और फास्ट चार्जिंग की सुविधा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशों के तहत एयरपोर्ट का टर्मिनल भवन इस तरह डिजाइन किया गया है कि ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत न्यूनतम हो। एयरपोर्ट पार्किंग के 20 प्रतिशत हिस्से में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए स्टैंडर्ड और फास्ट चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराई गई है।एयरसाइड संचालन के लिए उपयोग होने वाले सभी वाहन 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक होंगे और इनके चार्जिंग प्वाइंट्स कई स्थानों पर लगाए जाएंगे। 82.94 एकड़ में फैला सोलर फार्म योगी सरकार के ग्रीन एनर्जी विजन के अनुरूप  परिसर में 82.94 एकड़ में फैला सोलर फार्म विकसित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता 51,966 मेगावाट-घंटा होगी। इससे एयरपोर्ट को बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त होगी। साथ ही दो स्थानों पर बनाए जा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग पौंड टिकाऊ जल स्रोत उपलब्ध कराएंगे। एयरपोर्ट में आरएनजी प्लांट लगाने की भी योजना है, जिससे एयरपोर्ट वाहन, डीजी सेट और अन्य प्रणालियां ग्रीन फ्यूल पर संचालित हो सकेंगी। वहीं एक व्यापक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली कचरे के पृथक्करण, रीसाइक्लिंग और वैज्ञानिक उपचार को बढ़ावा देगी। एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग प्लान भी तैयार पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग प्लान भी तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से हर महीने वायु, पानी, मिट्टी, कचरा और सीवेज के मानकों की निगरानी की जाएगी। जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के साथ ही न सिर्फ निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि योगी सरकार के ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास के संकल्प को भी नई उड़ान देगा।

राहुल गांधी राम मंदिर करेंगे दर्शन! तनुज पुनिया ने बताया यात्रा का कार्यक्रम

बाराबंकी   राहुल गांधी जल्‍द ही राम मंदिर जाएंगे और वहां रामलला के दर्शन करेंगे. बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने इसकी घोषणा की. एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में उन्‍होंने इस बात का ऐलान किया. पुनिया ने अभी तक राहुल के राम मंदिर ना आने के सवाल का भी जवाब दिया. उन्‍होंने कहा क‍ि जल्द ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी राम मंदिर जाएंगे. अब मंदिर का ध्वज भी लग गया. अब राम मंदिर कंप्लीट हो गया है. अधूरे राम मंदिर में कोई पूजा करने नहीं जाता. अब राहुल गांधी अयोध्या राम मंदिर दर्शन करेंगे. दरअसल, 23 जनवरी को 32 सदस्यीय संसदीय समिति अयोध्या के दौरे पर पहुंचेगी. इस समिति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी शामिल हैं. समिति के अयोध्या आगमन और राहुल गांधी के रामलला के दर्शन को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. कांग्रेस नेता तनुज पुनिया ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा है कि अब जब राम मंदिर का निर्माण पूर्ण हो चुका है और मंदिर में ध्वजारोहण भी हो गया है, ऐसे में राहुल गांधी रामलला के दर्शन कर सकते हैं. बता दें कि बीते वर्षों में जब राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था, तब मंदिर पूरी तरह तैयार नहीं था. अब निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद राहुल गांधी के अयोध्या आगमन और रामलला दर्शन की संभावना जताई जा रही है. इससे पहले वर्ष 2016 में भी राहुल गांधी अयोध्या आए थे, तब उन्होंने हनुमानगढ़ी में दर्शन किए थे और संतों से आशीर्वाद लिया था, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं किए थे. इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी राहुल गांधी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रण दिया गया था. अब एक बार फिर उनके अयोध्या आने को लेकर संत समाज की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने राहुल गांधी के संभावित दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि कालनेमियों को चलो अब सद्बुद्धि आई है. जो लोग भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताते थे, जिन्होंने राम मंदिर के विरोध में बड़े बड़े वकील खड़े किए, आज वही लोग रामलला के दर्शन की बात कर रहे हैं. राम के शरण में सभी का स्वागत है, हम भी माला पहनाकर स्वागत करेंगे. महंत राजू दास ने यह भी कहा कि राहुल गांधी को अपने उन सहयोगी दलों से भी जवाब मांगना चाहिए, जो सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहे हैं और सनातन की तुलना कोरोना, डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों से करते हैं. उन्होंने याद दिलाया कि 2016 में भी राहुल गांधी के अयोध्या आगमन पर संतों ने उनका स्वागत किया था और उनसे विपक्ष में रहते हुए राम मंदिर के पक्ष में आवाज उठाने का आग्रह किया था. वहीं जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राहुल गांधी के रामलला दर्शन को लेकर स्वागत के साथ-साथ सवाल भी खड़े किए. उन्होंने कहा कि राम जी की शरण में कभी भी, कोई भी आ सकता है. यदि राहुल गांधी रामलला के दर्शन के लिए आ रहे हैं तो उनका स्वागत है. हालांकि इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ज्योतिषीय दृष्टि से यह दौरा दिखावे जैसा प्रतीत होता है. परमहंस आचार्य ने कहा कि राहुल गांधी इसलिए अयोध्या आ रहे हैं क्योंकि उनके नफरत के हथियार खत्म हो चुके हैं. जनता ने उन्हें तवज्जो नहीं दी, तो कांग्रेस को जीवित रखने के लिए राम के शरण में आने का दिखावा किया जा रहा है.

अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, गैंगस्टर एक्ट मामले में मिली कानूनी राहत

लखनऊ सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में नियमित जमानत दे दी है। अब्बास अंसारी गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे हैं और मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस जमानत में अब्बास अंसारी यूपी से बाहर तो जा सकते हैं, लेकिन उन्हें इससे पहले ट्रायल कोर्ट को जानकारी देनी होगी। इस जानकारी में उन्हें अपना मोबाइल नंबर और कहां जा रहे हैं इसकी पूरी जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही वह कहीं जा सकते हैं। नियमित जमानत देते समय सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अंसारी को अंतरिम राहत देते समय पहले लगाई गई सभी शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। अब्बास अंसारी कई आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन अन्य मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। इस फैसले से अब वे सभी मामलों में जमानत पर हैं। राज्य की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने पेश किया, लेकिन कोर्ट ने उनके तर्कों को ध्यान में रखते हुए भी जमानत को नियमित कर दिया। यह फैसला अब्बास अंसारी और उनके परिवार के लिए बड़ी कानूनी जीत मानी जा रही है। इससे पहले, सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत की शर्तों में ढील दी थी। अंसारी को लखनऊ में उन्हें अलॉट किए गए सरकारी आवास में रहना था। इसके अलावा, पिछले साल सितंबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा मामले में उनकी जेल की सजा पर रोक लगाने के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा में अब्बास अंसारी की सदस्यता भी बहाल कर दी गई थी। अब्बास अंसारी पर 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान नफरत फैलाने वाला भाषण देने का आरोप था। आरोप है कि उन्होंने एक पब्लिक मीटिंग में भड़काऊ बातें कही थीं और सरकारी अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि समाजवादी पार्टी के सत्ता में आने के बाद वह उनसे हिसाब बराबर करेंगे और उन्हें सबक सिखाएंगे। मुख्तार अंसारी का दशकों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में काफी राजनीतिक प्रभाव रहा था। उन्होंने कई बार मऊ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। मुख्तार अंसारी के निधन के बाद उनके बेटे अब्बास अंसारी ने राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। 2022 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने मऊ सदर सीट जीती थी।

प्रगति मॉडल से उत्तर प्रदेश बना देश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री

‘प्रगति’ नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से सुनिश्चित हो रहे हैं ठोस परिणाम प्रगति मॉडल से उत्तर प्रदेश बना देश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री इंटर-एजेंसी बाधाएँ समाप्त, अनुमतियों और मंजूरियों में आई तेजी बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट बना उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री ₹10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाओं के साथ यूपी के पास देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो यूपी में 39% परियोजनाएँ पूरी, 202 परियोजनाएँ समयबद्ध प्रगति पर ₹2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएँ पूर्ण, ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएँ प्रगति पर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का सशक्त उदाहरण है। मंगलवार को आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘प्रगति’ उस प्रशासनिक मॉडल को दर्शाता है, जिसकी नींव आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी और 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति ने यह सिद्ध किया है कि जब इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी एक साथ आती हैं, तो आउटकम अपने आप सुनिश्चित हो जाते हैं। डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूती देते हुए प्रगति एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना है, जहां अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से जटिल समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हुआ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में 'स्वागत' (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रीवांसेज बाई एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) के रूप में प्रारंभ हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के निवारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर ‘प्रगति’ के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ, जिसने मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, सामाजिक योजनाओं और सिस्टम रिफॉर्म के क्षेत्र में टीम इंडिया अप्रोच को मजबूती प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि गवर्नेंस रिफॉर्म है। इसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के साथ-साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके माध्यम से ₹86 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें से 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है, जो शासन की विश्वसनीयता को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर सिद्ध हुआ है। उत्तर प्रदेश आज देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभरा है। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे प्रोजेक्ट समयबद्ध ढंग से आगे बढ़े हैं, जिनके पीछे निरंतर समीक्षा और समस्या-समाधान का प्रभावी मंच प्रगति रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास ₹10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाओं के साथ देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो है। इनमें परिवहन, ऊर्जा, शहरी विकास, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास से जुड़े प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें से ₹2.37 लाख करोड़ की लागत की 128 परियोजनाएं (39%) पहले ही पूर्ण होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी अड़चनों का समाधान कर परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है, और इसमें ‘प्रगति’ एक सशक्त आधार बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल ने उत्तर प्रदेश को रेलवे, हाईवे और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में यदि परियोजनाओं, एमओयू और अनुमतियों में देरी होती है तो निवेशक दूसरे राज्यों की ओर रुख करता है। प्रगति ने वर्षों में होने वाली प्रक्रियाओं को महीनों और महीनों की प्रक्रियाओं को दिनों में समेटते हुए परियोजनाओं को तय समय-सीमा में धरातल पर उतारने का सशक्त माध्यम प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ₹4.19 लाख करोड़ की लागत के 65 बड़े प्रोजेक्ट प्रगति के अंतर्गत शामिल हैं। इनमें से 26 परियोजनाएँ पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 39 परियोजनाएँ निर्माण के विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर बैठकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। इससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेज़ प्रगति संभव हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया सुशासन का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 515 मुद्दों में से 494 का समाधान (96%) किया गया है। वहीं, प्रगति के अंतर्गत 287 मुद्दों में से 278 मुद्दों का समाधान (97%) सुनिश्चित किया गया है। यह उच्च समाधान दर प्रशासनिक तत्परता, स्पष्ट जवाबदेही और निर्णायक नेतृत्व की क्षमता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। राज्य सरकार अब केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में परियोजनाओं को गति दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति ने टीम इंडिया स्पिरिट को और सशक्त किया है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से अब समस्या पर नहीं, बल्कि समाधान पर चर्चा होती है। वर्ष 2014 से पहले जहां परियोजनाएं स्वीकृत तो होती थीं लेकिन पूरी नहीं हो पाती थीं, आज हर परियोजना के शिलान्यास के साथ उसकी पूर्णता की समय-सीमा तय होती है और उसकी नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ विकास की गति को भी तेज़ करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री का निर्देश, अपरिहार्य होने पर ही वृक्षों की कटान हो, जितने वृक्ष कटें उससे अधिक पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, अपरिहार्य होने पर ही वृक्षों की कटान हो, जितने वृक्ष कटें उससे अधिक पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए एनएचएआई सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा, समन्वय और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश जिलाधिकारी साप्ताहिक एवं मुख्य सचिव पाक्षिक समीक्षा कर परियोजनाओं को समय से पूर्ण कराएं: मुख्यमंत्री भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों से सीधा संवाद करें, बिचौलियों का हस्तक्षेप न हो: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास प्रदेश की अनिवार्य आवश्यकता है, किंतु यह पर्यावरण की कीमत पर नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वर्ष प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा सरकार की नीति है कि किसी भी परियोजना में अपरिहार्य स्थिति में ही वृक्षों की कटान की जाए और जितने वृक्ष कटें, उससे अधिक संख्या में पौधरोपण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे। मुख्यमंत्री सोमवार को प्रदेश में संचालित एवं प्रस्तावित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलावार समीक्षा करते हुए उन्होंने एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों एवं जिला प्रशासन के बीच बेहतर, सतत और प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रत्येक जनपद के जिलाधिकारी एनएचएआई परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित करें। जहां भी किसी स्तर पर कोई विषय लंबित हो, उसे मुख्य सचिव की सोमवारीय समीक्षा बैठक में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत कर समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मुख्य सचिव स्वयं इन परियोजनाओं की पाक्षिक समीक्षा करें, जिससे कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो और निर्णय शीघ्रता से लिए जा सकें। भूमि अधिग्रहण से संबंधित विषयों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सीधे किसानों से संवाद स्थापित किया जाए। किसी भी स्थिति में बिचौलियों को हस्तक्षेप का अवसर न मिले, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें और परियोजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परियोजनाएं प्रदेश के आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और आमजन की सुविधा से सीधे जुड़ी हैं। अतः सभी कार्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे उत्तर प्रदेश में सुदृढ़ कनेक्टिविटी के माध्यम से विकास को नई गति मिल सके।

मंगलवार को गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री

सीएम योगी के मार्गदर्शन में और मजबूत होगा विरासत व विकास का भरोसा मंगलवार को गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री अलग-अलग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए छह लोगों को देंगे गोरखपुर रत्न सम्मान गोरखपुर कला, संस्कृति, मेधा और रोजगार के मंच गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में मंगलवार (13 जनवरी) को शामिल होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विरासत व विकास के भरोसे को और मजबूत करेंगे। समापन समारोह में अलग-अलग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मुख्यमंत्री छह लोगों को गोरखपुर रत्न से सम्मानित भी करेंगे।  वर्ष 2017 से गोरखपुर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रगति की नई उड़ान भरी है। कभी पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले इस जिले ने हर क्षेत्र में विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। बहुमुखी विकास के साथ यहां की कला, संस्कृति भी लगातार संरक्षित और समृद्ध हुई है। इन सबको समेटते हुए गोरखपुर महोत्सव कला, संस्कृति, पर्यटन व रोजगार का सशक्त मंच बना है।  इस बार गोरखपुर महोत्सव का शुभारंभ रविवार (11 जनवरी) को प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने किया। रामगढ़ताल के सामने चंपा देवी पार्क में चल रहे महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह को मंगलवार अपराह्न मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सान्निध्य प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री इस समारोह में छह विशिष्ट लोगों को गोरखपुर रत्न सम्मान प्रदान करेंगे। यह सम्मान खेल, विज्ञान, सामाजिक कार्य उद्योग व कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को मिलेगा।  सीएम योगी के हाथों इन्हें मिलेगा गोरखपुर रत्न सम्मान 1. शिवम यादव (खेल) : पैरा बैडमिंटन के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी। थाइलैंड में आयोजित पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल 2025 में पदक विजेता। 2. अनन्या यादव (खेल) : अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ी। थाइलैंड में नवंबर 2025 में आयोजित आईएचएफ ट्रॉफी में रजत पदक। 3. नीतिश सिंह (खेल) :  अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही। अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो, यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस, टर्की की सबसे ऊंची चोटी अरारत को फतह करने वाले। 2023 में विवेकानंद यूथ अवार्ड से सम्मानित। 4. प्रो. शरद मिश्रा (विज्ञान) : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोफेसर। 25 वर्षों का शोध अनुभव। गोरखपुर क्षेत्र में भूजल में उपस्थित आर्सेनिक प्रदूषण पर गहन शोध और बचाव का फार्मूलेशन। गाल ब्लैडर कैंसर पर भी सराहनीय शोध।  5. अविनाश कुमार मौर्य (कृषि) : प्रगतिशील कृषक। औद्यानिक फसलों विशेषकर टमाटर की खेती कर एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में 10 लाख रुपये से अधिक का लाभ अर्जित किए। 6. आशीष श्रीवास्तव (सामाजिक कार्य) : सक्रिय समाजसेवी।

‘यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ में केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद बोलेः एआई पैठ में शीर्ष पर भारत

अगला ब्रेक-थ्रू अमेरिका की सिलिकॉन वैली में नहीं, बल्कि यूपी के टियर-2 व टियर-3 शहरों में होगाः जितिन प्रसाद ‘यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ में केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद बोलेः एआई पैठ में शीर्ष पर भारत    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बोलेः 2017 के बाद यूपी के हेल्थ सेक्टर में आया ऐतिहासिक बदलाव नीति आयोग सदस्य विनोद कुमार पॉल के अनुसार, वर्ष 2035 तक भारत वैश्विक एआई परिदृश्य में देगा 10 से 15 प्रतिशत का योगदान लखनऊ उत्तर प्रदेश अब केवल निवेश का ही नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश डिजिटलाइजेशन, एआई और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह बातें केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने सोमवार को ‘यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ के उद्घाटन सत्र में कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जहां दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है, वहीं एआई पेनिट्रेशन के मामले में भी वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि व स्वास्थ्य क्षेत्र का अगला बड़ा ब्रेक-थ्रू अमेरिका की सिलिकॉन वैली में नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में देखने को मिलेगा। सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, नीति आयोग के सदस्य विनोद कुमार पॉल और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने भी एआई, स्वास्थ्य और डिजिटल परिवर्तन पर अपने विचार रखे। यूपी अब निवेश के साथ टेक डेस्टिनेशन भीः जितिन प्रसाद केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश निवेश का डेस्टिनेशन तो बन ही चुका है, अब वह तेजी से टेक डेस्टिनेशन की ओर बढ़ रहा है। एआई, डिजिटलाइजेशन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में देश में बड़े स्तर पर काम हो रहा है, जो किसी भी लिहाज से मामूली नहीं है। स्टैनफोर्ड सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट बताती हैं कि एआई पेनिट्रेशन में भारत पहले पायदान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस तेज बढ़त के साथ चुनौतियां भी हैं। साइबर लिट्रेसी को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग करने वाले आम लोग बेसिक साइबर हाइजीन, एआई और नई तकनीकों को समझ सकें। डीपफेक और मिस-इन्फॉर्मेशन को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकारें समन्वय के साथ काम कर रही हैं और किसी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रयास बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत आज एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरा है। देश में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी को जनता का पूरा समर्थन प्राप्त है। जब जनभावना साथ होती है, तो सरकार के लिए बड़े और दूरगामी फैसले लेना आसान हो जाता है। पूरी दुनिया की नजर दिल्ली में होने वाले एआई इंपैक्ट समिट पर जितिन प्नसाद ने नई दिल्ली में होने वाले एआई इंपैक्ट समिट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन आमतौर पर विकसित देशों में होता रहा है, लेकिन पहली बार भारत इसकी मेजबानी कर रहा है। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि भारत में होने वाले इस समिट से क्या परिणाम निकलते हैं। आने वाले समय में यह समिट भारत की एआई नीति के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। केन्द्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत ‘एआई सर्विस प्रोवाइडर ऑफ द वर्ल्ड’ बनने जा रहा है। इसमें स्टार्टअप्स और युवाओं की बड़ी भूमिका होगी। उत्तर प्रदेश इस यात्रा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सरकार ने रिसर्चर्स को कम दरों पर जीपीयू उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, ताकि वे नए मॉडल विकसित कर सकें और समाज के लिए उपयोगी समाधान निकाल सकें। उन्होंने यूपी में एआई प्रज्ञा, यूपी एग्रीस और एआई आधारित मार्केटप्लेस जैसे प्रयासों की सराहना की। स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘रोशनी मॉडल’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यह फोटो के माध्यम से आंखों में मोतियाबिंद की पहचान करने में सक्षम है।  2017 के बाद हेल्थ सेक्टर में आमूलचूल परिवर्तनः ब्रजेश पाठक उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारत एक ऐसे महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है, जहां वह वैश्विक चुनौतियों को स्वीकार कर रहा है। उत्तर प्रदेश की भूमिका इसलिए भी अहम है क्योंकि जनसंख्या के लिहाज से यह दुनिया के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि यूपी में कोई योजना सफल होती है, तो उसे पूरे देश के बड़े हिस्से की सफलता माना जाता है। उन्होंने 2017 से पहले और बाद की स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि 2017 के बाद प्रदेश के हेल्थ सेक्टर में आमूलचूल परिवर्तन आया है। वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना को जमीन पर उतारा गया है। वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में केवल 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, वहीं आज 81 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से कार्य कर रहे हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या 5000 से बढ़कर लगभग तीन गुना हो चुकी है और 12 से साढ़े 12 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन सीटों और सुपर स्पेशियलिटी प्रशिक्षण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। टर्शरी केयर में लोहिया, पीजीआई और केजीएमयू ने बेहतर प्रदर्शन किया है। क्वार्टनरी केयर की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अनुपूरक बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। ब्रजेश पाठक ने भरोसा जताया कि यूपी पीजीआई के माध्यम से देश में सबसे पहले इस दिशा में सफलता हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि एआई को पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों को आपस में जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में बड़े स्तर पर निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अभिनव प्रयोग के तहत स्टेट बैंक के सहयोग से विकसित एप के माध्यम से महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा आसानी से मिल रही है। भारत के एआई परिदृश्य में उत्तर प्रदेश की बड़ी भूमिकाः विनोद कुमार पॉल नीति आयोग के सदस्य विनोद कुमार पॉल ने कहा कि नीति आयोग लंबे समय से एआई पॉलिसी पर कार्य कर रहा है। 2018-19 में एआई स्ट्रैटेजी विकसित की गई और पिछले दो वर्षों में फ्रंटियर हब के जरिए एआई, क्वांटम इकॉनमी, कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और जॉब क्रिएशन जैसे क्षेत्रों में काम हुआ है। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक 2035 तक भारत वैश्विक एआई … Read more

पूछ एआई के को-फाउंडर व सीईओ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की मुलाकात

एआई ही है ‘नेक्स्ट बिग थिंग’ – सिद्धार्थ भाटिया पूछ एआई  के को-फाउंडर व सीईओ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की मुलाकात सिद्धार्थ भाटिया ने की मुख्यमंत्री की तारीफ, बोले: प्रदेश में एआई को लेकर मुख्यमंत्री का विजन साफ और स्पष्ट सभी तक एआई की पहुंच ही देश व प्रदेश के कायाकल्प का माध्यम बनेगी: सिद्धार्थ भाटिया भारत का डेटा भारत में ही रहे और एआई का लाभ सभी को मिले, इस दिशा में हो रहा प्रयास लखनऊ  विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध डबल इंजन सरकार के प्रयास अब धरातल पर प्रभावी रूप से दिखाई देने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी भविष्य आधारित तकनीक का प्रयोग विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से हो रहा है। एआई को ही ‘नेक्स्ट बिग थिंग’ यानी अगला बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। पूछ एआई के को-फाउंडर और सीईओ सिद्धार्थ भाटिया ने यह बात कही। सोमवार को उनकी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हुई, जिसमें प्रदेश में एआई से जुड़े प्रयासों और इसे जनता तक अधिक सुलभ बनाने को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि जब शीर्ष नेतृत्व का विजन, उद्देश्य और महत्वाकांक्षा स्पष्ट होती है, तो उसके सकारात्मक परिणाम स्वतः ही धरातल पर दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एआई को लेकर जिस प्रकार नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन पर कार्य हुआ है, उससे आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन सहित कई बड़ी उपलब्धियां प्रदेश के खाते में जुड़ेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई की नागरिकों तक व्यापक और सुलभ पहुंच ही देश व प्रदेश के कायाकल्प का मार्ग प्रशस्त करेगी। भारत में ही रहे भारत का डेटा, सभी को मिले एआई का लाभ पूछ एआई के सीईओ व को-फाउंडर सिद्धार्थ भाटिया के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में भारत में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ा है। हालांकि, यह आवश्यक है कि भारत का डेटा भारत में ही सुरक्षित रहे। इससे एआई के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम भारत में एआई को इस तरह सुलभ बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसान हो, गृहिणी, पेशेवर या छात्र, बिना किसी ऐप के कॉल या व्हाट्सऐप संदेश के माध्यम से समाधान प्राप्त कर सके। उन्होंने कहा कि यह सेवा सभी के लिए निःशुल्क होनी चाहिए और इसका उपयोग इतना सरल हो कि किसी को प्रॉम्प्ट सीखने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूपीआई इसका सटीक उदाहरण है। प्रारंभ में इसे लेकर आशंकाएं थीं, लेकिन आज यह घर-घर तक और देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक डिजिटल भुगतान का सशक्त माध्यम बन चुका है। इसी प्रकार एआई का उपयोग भी उत्तर प्रदेश और भारत के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, इसी दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। रोजगार छिनने का नहीं, सृजन का माध्यम है एआई सिद्धार्थ भाटिया ने कहा कि एआई रोजगार छीनने का नहीं, बल्कि रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग समय की आवश्यकता है और जो इससे स्वयं को अनभिज्ञ रखेगा, वह पीछे रह जाएगा। भविष्य की जरूरत यह है कि सभी पेशेवरों सहित आम नागरिक भी एआई के प्रति न केवल जागरूक हों, बल्कि उसका प्रभावी उपयोग करें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस दिशा में बड़े स्तर पर सराहनीय प्रयास हुए हैं, लेकिन इन्हें और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के दौरान प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। सिद्धार्थ भाटिया आगामी दिनों में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एआई सेक्टर का प्रतिनिधित्व भी करेंगे।