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स्टार्ट इन यूपी स्टार्टअप के अंतर्गत एक माह के भीतर 106 नए स्टार्टअप को मिली मान्यता

स्टार्टअप इकोसिस्टम : यूपी में स्टार्टअप्स को लगातार मिल रही उड़ान    स्टार्ट इन यूपी स्टार्टअप के अंतर्गत एक माह के भीतर 106 नए स्टार्टअप को मिली मान्यता   स्टार्टअप इंडिया के तहत भी यूपी में मिल रही मजबूती, कुल 19,042 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप    योगी सरकार के नीतिगत सहयोग और अनुकूल वातावरण से उत्तर प्रदेश बनता जा रहा स्टार्टअप हब लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम का परिदृश्य लगातार व्यापक होता जा रहा है। अनुकूल वातावरण की वजह से प्रदेश में स्टार्टअप्स के मामले में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जा रही है। प्रदेश सरकार की स्टार्ट इन यूपी पहल के अंतर्गत रिकॉग्नाइज्ड (मान्यता प्राप्त) स्टार्टअप्स की संख्या अब 3000 के पार पहुंच चुकी है। योगी सरकार की स्पष्ट मान्यता है कि प्रदेश का युवा नौकरी ढूँढ़ने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला बने और यह साकार होने लगा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में स्टार्ट इन यूपी रिकॉग्नाइज्ड स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 3011 हो गई है, जबकि दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 2905 था। दिसंबर के बाद मात्र कुछ ही समय में 106 नए स्टार्टअप्स को मान्यता मिली है, जो प्रदेश में बढ़ते उद्यमी विश्वास को दर्शाता है। प्रदेश स्तर के साथ-साथ केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया योजना के अंतर्गत भी उत्तर प्रदेश की स्थिति लगातार सुदृढ़ होती जा रही है। दिसंबर, 2025 में उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 18,568 थी जो वर्तमान में  बढ़कर 19,042 हो गई है। इस दौरान 474 नए स्टार्टअप्स को स्टार्ट अप इंडिया के अंतर्गत मान्यता प्राप्त हुई है। यह आंकड़ा प्रमाणित करता है कि उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर भी स्टार्टअप गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में स्टार्टअप्स को लेकर स्पष्ट और दूरदर्शी नीति अपनाई गई है। स्टार्ट इन यूपी नीति के माध्यम से सरकार ने फंडिंग, सपोर्ट, मेंटरशिप इनक्यूबेशन और तकनीकी सहयोग जैसी सुविधाओं को प्रदान करने का काम किया है। इसके साथ ही आवेदन और मान्यता की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे कि अधिक से अधिक युवा उद्यमिता की ओर आकर्षित हों। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाए और उन्हें अपने विचारों को व्यावसायिक रूप देने के लिए अनुकूल वातावरण मिले।  आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि कानून-व्यवस्था में व्यापक सुधार, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जोर और डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार का असर भी स्टार्टअप सेक्टर पर स्पष्ट दिखाई आ रहा है। अब स्टार्टअप्स केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गए हैं, छोटे शहरों और जिलों से भी नए उद्यम सामने आ रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल रहा है और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

UP में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए साइन हुआ MoU

उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को सशक्त बनाने को एमओयू साइन – उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय के अधीन डिजिटल इंडिया कारपोरेशन की स्वतंत्र इकाई इंडिया एआई मिशन और यूपीडेस्कोके बीच हुआ एमओयू का आदान प्रदान  – उत्तर प्रदेश को AI हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, इंडिया एआई मिशन के तहत यूपी में सशक्त होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम – एमओयू प्रदेश के युवाओं को भविष्य के लिए आवश्यक डिजिटल और एआई कौशल प्रदान करने में होगा मददगार लखनऊ योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन डिजिटल इंडिया कारपोरेशन की स्वतंत्र इकाई इंडिया एआई मिशन और उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीडेस्को) लखनऊ के बीच एक एमओयू का आदान प्रदान किया गया। यह एमओयू उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को सशक्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। एमओयू प्रदेश के युवाओं और छात्रों के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम के नये अवसर प्रदान करेगा एमओयू प्रमुख सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, अनुराग यादव तथा इंडिया एआई मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह के बीच हुआ। इस अवसर पर मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इसे राज्य और केंद्र सरकार के बीच मजबूत सहयोग का प्रतीक बताया। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप सरकार पिछले पौने नौ वर्षों से डिजिटल गवर्नेंस, स्टार्टअप्स, आईटी पार्क, डाटा सेंटर और उभरती तकनीकों को लगातार बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री की एआई, मशीन लर्निंग और डाटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना प्राथमिकताओं में शामिल है। यही वजह है कि इंडिया एआई मिशन के तहत एमओयू प्रदेश के युवाओं, छात्रों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। प्रदेश में स्थापित की जाएंगी 65 डाटा एवं एआई लैब प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुराग यादव ने कहा कि इंडिया एआई मिशन के तहत यह पहल प्रदेश के युवाओं को भविष्य के लिए आवश्यक डिजिटल और एआई कौशल प्रदान करने में सहायक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योगी सरकार युवाओं के कौशल विकास, नवाचार को प्रोत्साहन देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर रही है। यह पहल प्रदेश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यूपीडेस्को की प्रबंध निदेशक नेहा जैन ने बताया कि इंडिया एआई मिशन परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को नोडल प्रशासकीय विभाग तथा यूपीडेस्को को राज्य की नोडल एजेंसी नामित किया गया है। उन्होंने बताया कि इंडिया एआई मिशन के तहत प्रदेश में कुल 65 डाटा एवं एआई लैब स्थापित किए जाने की योजना है। योगी सरकार ने दी 49 डाटा एवं एआई लैब की स्थापना को हरी झंडी वर्तमान में लखनऊ और गोरखपुर स्थित एनआईईएलआईटी (NIELIT)केंद्रों में दो इंडिया एआई डाटा एवं एआई लैब पहले से संचालित हो रही हैं, जबकि पीलीभीत में एक डाटा एवं एआई लैब उद्योग साझेदार के सहयोग से स्थापित की गई है। इसके अलावा, योगी सरकार द्वारा 49 डेटा एवं एआई लैब को स्वीकृति दी जा चुकी है और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वहीं शेष 13 अतिरिक्त स्थानों की पहचान शीघ्र की जाएगी। इन इंडिया एआई डाटा एवं एआई लैब्स को विशेष रूप से एआई स्किलिंग के लिए आधुनिक अवसंरचना और तकनीकी संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। इन लैब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को एआई टूल्स, डेटा सेट्स और वास्तविक समय की समस्याओं पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे छात्र न केवल उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल हासिल कर सकेंगे, बल्कि नवाचार आधारित एआई समाधान भी विकसित कर पाएंगे।

गाय के गोबर से बड़े पैमाने पर बायोगैस बनाकर घटाई जाएगी तेल-एलपीजी पर निर्भरता

सीएम योगी का विजन : गाय बनेगी मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार, बड़ी संख्या में गो पालकों को होगी आमदनी गाय के गोबर से बड़े पैमाने पर बायोगैस बनाकर घटाई जाएगी तेल-एलपीजी पर निर्भरता यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर हो सकती है 500 करोड़ के पेट्रोलियम उत्पादों की बचत यूपी में 2022 से अब तक यूपी नेडा के अंतर्गत 26 से अधिक सीबीजी प्लांट लगाए गए, 21 से अधिक प्रोजेक्ट निर्माणाधीन लखनऊ  देश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश तेजी से लीडिंग स्टेट के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत अब बड़ी मात्रा में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाकर क्रूड ऑयल और एलपीजी पर निर्भरता घटाने की ठोस रणनीति पर काम हो रहा है। बायोगैस बनाने में अधिक पैमाने पर गाय के गोबर का सदुपयोग किया जाएगा, जिसका सबसे ज्यादा लाभ गोपालकों को मिलेगा। इस योजना में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट लगाए जा चुके हैं। एक वैज्ञानिक आंकलन के अनुसार यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बन सकती है। 2022 से अब तक यूपी नेडा के अंतर्गत प्रदेश में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें लखनऊ, गोरखपुर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, बाराबंकी, बदायूं, बरेली और मिर्जापुर जिलों में उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 21 से अधिक नए सीबीजी प्लांट निर्माणाधीन हैं। सीबीजी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए कार्ययोजना गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि सीबीजी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना लागू की जा रही है। प्राथमिक तकनीकी आकलनों के अनुसार एक देशी गाय से प्रतिदिन औसतन लगभग 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है, जिससे मीथेन युक्त बायोगैस का उत्पादन संभव है। गो सेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि परिशोधन के बाद यही गैस सीबीजी के रूप में रसोई और वाहनों में उपयोग की जा सकती है। यदि प्रदेश में गायों के गोबर से मीथेन का दोहन किया जाए, तो पेट्रोलियम उत्पादों पर होने वाले व्यय में उल्लेखनीय कमी की संभावना बन सकती है। गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी एक वैज्ञानिक आंकलन के अनुसार यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बन सकती है। इससे अन्य देशों से आयात होने वाले कच्चे तेल और एलपीजी पर निर्भरता भी घटेगी। बाराबंकी का निजी सहभागिता वाला सीबीजी प्लांट और मथुरा की श्री माताजी गौशाला जैसे प्रयोग इस मॉडल की व्यवहारिक सफलता के उदाहरण हैं।  गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैव-उर्वरक और जैव-उर्वरक से कृषि उत्पादकता का यह चक्र गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राज्य को ऊर्जा सुरक्षा की ओर ले जाएगा।

विशेषज्ञ बोले , उत्तर प्रदेश को एआई आधारित हेल्थ मिशन की दिशा में आगे बढ़ा रही योगी सरकार

स्टार्टअप इकोसिस्टम से उत्तर प्रदेश बन सकता है ग्लोबल एआई पावर हाउस : कविता भाटिया  विशेषज्ञ बोले , उत्तर प्रदेश को एआई आधारित हेल्थ मिशन की दिशा में आगे बढ़ा रही योगी सरकार एआई से उत्तर प्रदेश अपने नागरिकों के स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता को कर रहा मजबूत   आर्थिक विकास और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान भी बनाने के लिए लगातार आगे बढ़ रहा यूपी  लखनऊ,  उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के पहले दिन  होटल द सेंट्रम में हेल्थ सेक्टर में एआई के प्रयोग को लेकर विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि एआई केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि जनकल्याण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन चुका है। यह सेशन प्राथमिकता वाले एआई मुद्दों पर साझा समझ विकसित करने, नीति संबंधी जानकारी के आदान-प्रदान और व्यावहारिक समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया। इसमें सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मिलकर चुनौतियों की पहचान, बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने और परिणाम तैयार करने पर विचार किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्थ डाटा और एआई आधारित सॉल्यूशंस से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा  विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हेल्थ सेक्टर में तकनीक और एआई के प्रयोग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएम योगी की मंशा है कि एआई के जरिए मातृ एवं नवजात देखभाल, रोगों की समय पर पहचान, सटीक इलाज और हेल्थ रिसर्च को नई गति दी जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्थ डाटा और एआई आधारित सॉल्यूशंस के माध्यम से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाया जा रहा है। सत्र में इंडिया एआई मिशन की सीओओ कविता भाटिया ने एआई के क्षेत्र में जनभागीदारी के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मजबूत पब्लिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और समृद्ध, संरचित (रिच स्ट्रक्चर्ड) डाटा के प्रभावी उपयोग से उत्तर प्रदेश को एआई आधारित हेल्थ मिशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टार्टअप इकोसिस्टम के जरिए उत्तर प्रदेश को एक ग्लोबल एआई पावर हाउस के रूप में स्थापित किया जा सकता है, जहां नवाचार, निवेश और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। स्टोर डाटा का सही और सुरक्षित इस्तेमाल भविष्य में बीमारियों के सटीक इलाज के साथ रिसर्च में अहम भूमिका निभाएगा  इंडिया एआई मिशन के जनरल मैनेजर स्वदीप सिंह ने हेल्थ सेक्टर में एआई के लिए डाटा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि स्टोर किए गए डाटा का सही और सुरक्षित इस्तेमाल भविष्य में बीमारियों के सटीक इलाज और गहन रिसर्च में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमें किसी एक प्रकार के डाटा पर निर्भर न रहते हुए, विविध एआई-आधारित डाटा सॉल्यूशंस पर काम करना होगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी, सटीक और भरोसेमंद बन सकें। वहीं फ्यूचर स्किल्स, इंडिया एआई मिशन के जीएम कार्तिक सूरी ने कहा कि हेल्थ सेक्टर में एआई के सफल उपयोग के लिए फ्यूचर रेडी वर्कफोर्स तैयार करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि देशभर में कई डाटा लैब स्थापित की जा चुकी हैं और लगातार नई एआई-आधारित डाटा लैब बन रही हैं। आवश्यकता इस बात की है कि युवाओं की क्षमता को एआई बेस्ड टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाए, ताकि एआई सुरक्षित और भरोसेमंद बने।

KGMU धर्मांतरण केस में नया मोड़, PFI लिंक, विदेशी संपर्क और दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े अहम सबूत मिले

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े लव जिहाद, यौन शोषण और धर्मांतरण मामले की जांच गंभीर हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर केस की कमान स्पेशल टास्क फोर्स को सौंप दी गई है. STF की जांच शुरू होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बनी आंतरिक जांच समिति को भंग कर दिया गया है.  फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अब तक की जांच रिपोर्ट कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को सौंपते हुए आगे की जांच STF से कराने की सिफारिश की थी. KGMU की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. उन्होंने 9 जनवरी को महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के दौरे के दौरान हुए बवाल से मुख्यमंत्री को अवगत कराया. इसके साथ ही विश्वविद्यालय में की गई कार्रवाई और जांच की स्थिति भी बताई. मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. इस केस का सबसे अहम किरदार आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज पुलिस की गिरफ्त में है. 50 हजार के इनामी रमीज को 18 दिन की फरारी के बाद लखनऊ से गिरफ्तार किया गया. उससे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि KGMU में चल रहा धर्मांतरण नेटवर्क सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कई लोगों से जुड़े हो सकते हैं. यहां की दो महिला स्टाफ और एक डॉक्टर नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं. आरोप है कि मिलकर धर्मांतरण का रैकेट चलाया जा रहा था. यह भी सामने आया है कि कुछ महिलाओं ने पहले ही इसकी शिकायत की थी. उस वक्त विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया था. अब कुछ विभागाध्यक्षों की भूमिका भी एजेंसियों के रडार पर है. रमीज की गिरफ्तारी के बाद उसके PFI कनेक्शन ने जांच को नई दिशा दी है. पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि फरारी के दौरान रमीज प्रतिबंधित संगठन PFI के कई पदाधिकारियों के संपर्क में था. उसने PFI से कानूनी मदद लेने की कोशिश भी की थी. इसके सबूत मोबाइल डेटा से मिले हैं. रमीज के पिता सलीमुद्दीन के भी PFI से पुराने और गहरे संबंध बताए जा रहे हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि PFI ने सलीमुद्दीन को दो बार सम्मानित किया था. सबसे चौंकाने वाला खुलासा दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन को लेकर हुआ है. पूछताछ में रमीज ने स्वीकार किया है कि उसका संपर्क दिल्ली ब्लास्ट केस की आरोपी डॉक्टर शाहीन से था.  शाहीन को पहले ही दिल्ली ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. रमीज ने बताया कि वह डॉक्टरों की कॉन्फ्रेंस में उससे मिला था. फरारी के दौरान शाहीन बाग भी गया था. पुलिस पहले ही रमीज और डॉक्टर शाहीन के संबंधों की जानकारी ATS को दे चुकी थी. इसी इनपुट के बाद ATS ने केस में सक्रियता बढ़ा दी है. रमीज के पास से बरामद फोन के डेटा को रिकवर के लिए भेजा गया है.  जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे PFI नेटवर्क, विदेशी संपर्क और संभावित आतंकी लिंक की कई परतें खुल सकती हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या KGMU में मेडिकल पेशे की आड़ में धर्मांतरण का कोई बड़ा नेटवर्क चल रहा था. क्या दिल्ली ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से इसके तार जुड़े हैं. और इस पूरे नेटवर्क का असली सरगना कौन है?

CM योगी का सख्त संदेश: अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं, भूमाफियाओं पर चलेगा कानून का डंडा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से आए प्रत्येक प्रार्थी से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। आमजनों के प्रार्थना पत्र लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश दिया और कहा कि अवैध कब्जा कतई बर्दाश्त नहीं है। भूमाफिया और दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी है और नियमित रूप से होती रहेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ ही लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार आपकी समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के समक्ष कुछ वादी जमीन कब्जा व मारपीट आदि की शिकायत लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हर एक व्यक्ति के पास पहुंचकर उसकी शिकायत सुनी, प्रार्थना पत्र लिया और फिर अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनपद स्तर पर कानून व राजस्व के प्रकरण में तेजी से सुनवाई करते हुए इसका निस्तारण किया जाए। कानून व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता में है। इसमें हीला-हवाली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रशासन और जनपद, मंडल, रेंज व जोन के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि दबंगों व भूमाफिया के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई नियमित रूप से जारी रखें। गंभीर बीमारी से जूझ रहे कुछ पीड़ितों ने ‘जनता दर्शन’ में पहुंचकर इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। सीएम ने कहा कि सरकार इलाज के लिए आर्थिक सहायता दे रही है। आप भी हॉस्पिटल से जल्द एस्टिमेट बनवाकर दें, एस्टिमेट मिलते ही आपके इलाज में सरकार तुरंत आर्थिक मदद करेगी। धन के अभाव में इलाज नहीं रुकेगा। ‘जनता दर्शन’ में कई बच्चे भी अपने अभिभावकों के साथ पहुंचे। नन्हे-मुन्ने बच्चों के सामने सीएम योगी का बालप्रेम फिर उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री ने बच्चों का हाल जाना, उन्हें दुलारा-पुचकारा और चॉकलेट दी। सीएम ने अभिभावकों से कहा कि ठंड में बच्चों का विशेष ध्यान रखें। यह अपनत्वपूर्ण भाव सुनकर अभिभावकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।

कानपुर दौरे पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, 16 जनवरी को 15 जगहों पर भव्य अभिनंदन

कानपुर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी 16 जनवरी को कानपुर दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे को लेकर यहां पार्टी कार्यकर्ता जोर शोर से तैयारी में जुटे हुए हैं। प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद चौधरी का यह पहला कानपुर आगमन होगा। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अनूप गुप्ता ने रविवार को प्रस्तावित स्वागत मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया। प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत में नहीं रहेगी कोई कमी दोपहर लगभग तीन बजे कानपुर पहुंचे अनूप गुप्ता ने भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल सहित वरिष्ठ नेताओं के साथ जाजमऊ से लेकर एचबीटीयू तक प्रस्तावित मार्ग का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान विभिन्न स्वागत बिंदुओं का भी निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, ताकि प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत में किसी प्रकार की कमी न रहे। मार्ग निरीक्षण के उपरांत शाम चार बजे एचबीटीयू सभागार में प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत को भव्य बनाने को लेकर एक वृहत बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगमन से पूर्व पूरे कानपुर नगर को भाजपा व भगवा झंडों, होल्डिंग्स और स्वागत द्वारों से सजाया जाएगा। महानगर के सभी प्रमुख चौराहों को विशेष रूप से सजाया जाएगा।         इन स्थानों पर होगा भव्य स्वागत   बैठक में यह भी तय हुआ कि नगर में स्थापित सभी महापुरुषों की प्रतिमाओं पर आगमन से एक दिन पूर्व विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा तथा विधिवत माल्यार्पण किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत के लिये 15 स्थानों पर भव्य स्वागत की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसमें कानपुर महानगर के 10 विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ता सहभागिता करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का काफिला जाजमऊ से लाल बंगला, फूलबाग, बड़ा चौराहा, चुन्नीगंज, मोतीझील होते हुए कोका-कोला चौराहा, गोल चौराहा, रावतपुर मार्ग से एचबीटीयू पहुंचेगा। एचबीटीयू में वे कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करेंगे।

हैरान करने वाली कार्रवाई: लखनऊ नगर निगम ने केंद्रीय संस्थान NBFGR का मुख्यालय किया सील

लखनऊ लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) ने हाउस टैक्स नहीं देने पर केंद्र सरकार के ही एक दफ्तर पर ताला मारकर उसे सील कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBFGR) पर नगर निगम का करोड़ से ऊपर रुपया बकाया है, जिसका भुगतान कई बार नोटिस देने के बाद भी नहीं हुआ है। निगम के अधिकारियों ने सोमवार की सुबह तेलीबाग स्थित एनबीएफजेआर के मुख्यालय पर ताला मार दिया। नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर नगर निगम इस समय बड़े बकाएदारों के खिलाफ सख्त अभियान चला रहा है।   नगर निगम जोन–4 की जोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी ने सोमवार को नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्स (एनबीएफजीआर) का परिसर सील कर दिया। कृषि मंत्रालय के इस संस्थान पर नगर निगम का हाउस टैक्स मद में कुल 1 करोड़ 36 लाख 65 हजार 932 रुपये बकाया था। कई बार नोटिस और पत्राचार के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं करने पर लखनऊ नगर निगम ने यह अभूतपूर्व कदम उठाया है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बकाया कर की वसूली को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी, चाहे बकाएदार निजी हो या सरकारी विभाग। नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्स (एनबीएफजीआर) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 1983 में इलाहाबाद (प्रयागराज) में एक किराए के परिसर में राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो की स्थापना की थी। ब्यूरो का स्थायी कार्यालय 1990 में लखनऊ के तेलीबाग इलाके में बना और तब से वो यहीं से चल रहा है। संस्थान का मुख्यालय 52 एकड़ में फैला है, जिसमें प्रशासनिक भवन के अलावा प्रयोगशाला, खेत और आवासीय परिसर भी शामिल हैं। संस्थान मछली आनुवंशिक संसाधनों का मूल्यांकन और संरक्षण करता है। मछली के संरक्षण के लिए भी यहां रिसर्च होता है।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ पर किया शिलान्यास

सुल्तानपुर, कासगंज व फतेहपुर को मिली ग्रामीण स्टेडियम की सौगात खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत 21 करोड़ रुपये से निर्मित पांच (लखनऊ में दो, हरदोई, कन्नौज व सहारनपुर) मल्टीपर्पज हॉल का किया लोकार्पण लखनऊ, मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय युवा दिवस पर सोमवार को सुल्तानपुर, कासगंज व फतेहपुर में ग्रामीण स्टेडियम का शिलान्यास किया। यह स्टेडियम 26 करोड़ से तैयार होंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत 21 करोड़ रुपये से बने पांच मल्टीपर्पज हॉल का भी लोकार्पण किया। योजना के तहत लखनऊ में दो, हरदोई, कन्नौज व सहारनपुर में एक-एक हॉल का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य स्तर पर विवेकानंद युवा पुरस्कार भी प्रदान किए। यह पुरस्कार व्यक्तिगत श्रेणी के साथ ही युवक व महिला मंगल दल को भी दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों इन्हें मिला पुरस्कार विवेकानंद यूथ अवार्ड- व्यक्तिगत श्रेणी (50 हजार का चेक, प्रशस्ति पत्र व स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा) 1-    अभिनीत कुमार मौर्य- हरदोई 2-    महिका खन्ना- शाहजहांपुर 3    प्रणव द्विवेदी- गोरखपुर 4-    शिखा सहलोत – गाजियाबाद 5-    अभिषेक पांडेय- मऊ 6-    सचिन गौरी वर्मा- गोरखपुर 7-    संजना सिंह- बरेली 8 –    मार्तंड राम त्रिपाठी-गोरखपुर 9-    साक्षी झा- गाजियाबाद 10-    दिव्यांश टंडन-मेरठ युवक मंगल दल 1-    संतकबीर नगर- विकास खंड व ग्राम पंचायत सेमरियावां – रिजवान मुनीर 2-    बिजनौर- विकास खंड नूरपुर व ग्राम पंचायत शहदपुरगुलाल- घनश्याम सिंह 3-    शाहजहांपुर- विकास खंड भावलखेड़ा व ग्राम पंचायत चौधेरा- इंद्रजीत लोधी-आशीष महिला मंगल दल 1-    बिजनौर- नहटौर विकास खंड- बसेड़ाखुर्द ग्राम पंचायत- दामिनी   2-    फिरोजाबाद- अरांव विकास खंड- अकबरपुर सराय ग्राम पंचायत- शिवानी चंदेल- अंजली चंदेल 3-    संतकबीर नगर- सांथा विकास खंड- पसाई ग्राम पंचायत- सुमन कुमारी-राधिका प्रथम पुरस्कार- एक-एक लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार- 50-50 हजार रुपये व तृतीय पुरस्कार- 25-25 हजार रुपये व प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र, ट्रॉफी व स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा

कमांड सेंटर ने महाकुम्भ-25 में भारी भीड़ को कंट्रोल करने के साथ 60 लाख से अधिक साइबर अटैक को किया ध्वस्त

45 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई थी आस्था की डुबकी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिव्य-भव्य महाकुम्भ- 25 आयोजन की देश ही नहीं पूरी दुनिया ने सराहना की, जहां 45 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस आयोजन को सुरक्षित बनाने के लिये यूपी पुलिस की भी देश और विदेश में तारीफ हुई। इस आयोजन को थल से लेकर नभ तक सुरक्षित बनाने के लिये यूपी पुलिस के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) ने अहम भूमिका निभाई। इस सेंटर ने जहां एक ओर जमीन पर भारी भीड़ को कंट्रोल किया, वहीं 60 लाख से अधिक साइबर अटैक को ध्वस्त किया। नर्व सेंटर बना इंट्रीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है कि प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ-25 को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली और आईसीसीसी को स्काच गोल्ड अवार्ड (SKOCH Gold Award) से सम्मानित किया गया। प्रयागराज के महाकुंभ-25 को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय समागमों में गिना गया, जहां 45 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं, मौनी अमावस्या जैसे दिनों में असाधारण पीक-फुटफॉल, हजारों हेक्टेयर में फैली अस्थायी नगरी और अभूतपूर्व लॉजिस्टिक्स का समन्वय देखने को मिला। इस विराट आयोजन की तैयारी एक साल पहले शुरू हुई थी। इसमें “पब्लिक-फर्स्ट” चिंता और जमीन-आसमान दोनों मोर्चों पर चलती क्राइसिस-मैनेजमेंट की मशीनरी का नर्व सेंटर इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बना। 12 महीने पहले ही शुरू हुआ “वार-रूम मॉडल महाकुम्भ-25 की तैयारी “इवेंट मैनेजमेंट” नहीं, बल्कि सिस्टम-इंजीनियरिंग थी। इसे अमलीजामा पहनाने के लिये योजना बनाने से लेकर धरातल पर उतारने के लिये एक साल पहले तैयारी शुरू की गई। इसमें टेबल-टॉप एक्सरसाइज़, परिदृश्य-आधारित परीक्षण (scenario testing) और भीड़-ओवरफ्लो जैसी स्थितियों के लिए डिजिटल-ट्विन सिमुलेशन तक शामिल था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट संदेश था कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षित अनुभव और मेले का सुचारू संचालन हो। इसके लिये कटिंग-एज टेक्नोलॉजी को जनहित में तैनात किया गया। आईसीसीसी:नर्व सेंटर, जो भीड़, आपदा और प्रतिक्रिया को एक स्क्रीन पर लाया महाकुम्भ-25 में आईसीसीसी को केंद्रीय कमांड हब की तरह डिजाइन किया गया जो चौबीसों घंटे सक्रिय रहा। इसमें भीड़-प्रबंधन, पब्लिक-सेफ्टी, आपदा-प्रतिक्रिया, ट्रैफिक-मैनेजमेंट और इंटर-एजेंसी समन्वय से लेकर रीयल-टाइम शामिल थी। इस प्रणाली में 2,750 से अधिक एआई समर्थित कैमरे, चार ऑपरेशनल आईसीसीसी यूनिट्स, 400 से अधिक कार्मिक, 1920 कॉल-सेंटर (हर शिफ्ट में 50 ऑपरेटर), जैम-प्रूफ वायरलेस ग्रिड, ANPR-आधारित वाहन मॉनिटरिंग, VMD डिस्प्ले, और श्रद्धालुओं की सहायता हेतु 11 भाषाओं वाला AI चैटबॉट “Kumbh Sah’AI’yak” जैसे घटक शामिल रहे। यही वह “सिंगल-पॉइंट कमांड” था जहाँ से QRT डिस्पैच, ग्रीन-चैनल एक्टिवेशन, रेलवे-बस-स्टैंड इनफ्लो अलर्ट, और बहु-विभागीय सूचना-हैंडओवर ज़ीरो-डिले लक्ष्य के साथ चलाया गया। जमीन पर भीड़ और ऑनलाइन “डिजिटल हमला”: 60 लाख से अधिक साइबर अटैक महाकुम्भ-25 जितना भौतिक-रूप से बड़ा था, उतना ही “डिजिटल-फुटप्रिंट” बड़ा स्वरूप था। इसी डिजिटल निर्भरता ने इसे साइबर हमलावरों के लिए हाई-वैल्यू लक्ष्य बनाया। 45-दिवसीय आयोजन के दौरान 60 लाख से अधिक malicious/ संदिग्ध साइबर हमले रोके गए, जिनके IP 25+ देशों से ट्रेस हुए; हमलों में DDoS, ransomware-टाइप गतिविधियां, DNS poisoning, SQL injection, spoofing, brute force, web-app attacks आदि शामिल बताए गए। यह सफलता केंद्रीय एजेंसियों के समय पर अलर्ट और राज्य पुलिस/सिस्टम-इंटीग्रेटर्स की त्वरित कार्रवाई से संभव हुई। साथ ही आईआईटी कानपुर और ट्रिपलआईटी प्रयागराज की तकनीकी टीमों ने साइबर-सिक्योरिटी असेसमेंट व ऑन-ग्राउंड सपोर्ट में भूमिका निभाई। STQC (MeitY) के माध्यम से डिजिटल-इन्फ्रास्ट्रक्चर के टेस्टिंग/क्वालिटी-चेक का भी उल्लेखनीय योगदान रहा है। डिजिटल कुम्भ के साथ डिजिटल सेफ्टी को किया गया सुनिश्चित आईपीएस भानु भास्कर ने बताया कि महाकुम्भ की टेक-तैनाती में 56 “साइबर वॉरियर्स” द्वारा सक्रिय मॉनिटरिंग ने “डिजिटल कुम्भ” के साथ-साथ “डिजिटल सेफ्टी” को भी सुनिश्चित किया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि साइबर-डिफेंस को केवल “आईटी-इश्यू” नहीं माना गया, बल्कि इसे भीड़-प्रबंधन, इमरजेंसी-रिस्पॉन्स और पब्लिक-ट्रस्ट से सीधे जोड़कर देखा गया क्योंकि एक भी सफल defacement/DoS/हैकिंग घटना गलत सूचना, अफरा-तफरी और ऑपरेशनल बाधा पैदा कर सकती थी। इंटर-एजेंसी कॉर्डिनेशन: एक प्लेटफॉर्म, अनेक विभाग आईसीसीसी मॉडल की ताकत “टेक्नोलॉजी” से भी ज्यादा उसकी इंटर-एजेंसी सिंक्रोनाइज़ेशन क्षमता रही। पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, आपदा-प्रबंधन, ट्रैफिक, नगर-सेवाएँ, रेलवे-समन्वय तथा तकनीकी/शैक्षणिक संस्थानों का सहयोग भी अहम है। साइबर-सुरक्षा के लिए भी यही सहयोग-आर्किटेक्चर अपनाया गया। CERT-In की सरकारी इकाइयों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप CISO-फंक्शन, समर्पित साइबर-टीम और रिपोर्टिंग/रेस्पॉन्स-मैकेनिज़्म जैसी सर्वोत्तम प्रथाओं की दिशा में समन्वय की सोच दिखाई देती है। साइबर हमलों से निपटने को देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों को सहयोग लिया गया आई जी प्रेम गौतम ( तत्कालीन आईजी रेंज प्रयागराज) द्वारा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की संभावित कमजोरियों एवं साईबर हमलों से निपटने के लिए देश के कई  प्रतिष्ठित संस्थानों/केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग प्राप्त किया गया जो अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। फील्ड-स्तर पर जहां 60,000+ प्रशिक्षित कर्मियों की विशाल तैनाती रही, वहीं आईसीसीसी  में “मानव-मशीन” साझेदारी ने ऑपरेशंस को गति और सटीकता दी। महाकुम्भ आईसीसीसी का पर्यवेक्षण भानु भास्कर (पूर्व ADG Prayagraj Zone) ने किया, जिन्हें वरिष्ठ अधिकारियों/टीम ( तरुण गाबा, पुलिस आयुक्त प्रयागराज, प्रेम गौतम आईजी रेंज प्रयागराज, डीआईजी महाकुम्भ वैभव कृष्ण ) का सहयोग मिला।  “ऑफिसर-इन-चार्ज” के रूप में Amit Kumar, IPS ने ऑपरेशनल कमांड व टेक्नोलॉजी-ह्यूमन इंटीग्रेशन की जिम्मेदारी निभाई। SKOCH Gold Award 2025 महाकुम्भ-25 के आईसीसीसी मॉडल को 105th SKOCH Summit में SKOCH Gold Award 2025 से सम्मानित किया गया। Skoch समिति द्वारा तत्कालीन एडीजी जोन प्रयागराज भानु भास्कर को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया जिसे तत्कालीन एसपी आईसीसीसी अमित कुमार द्वारा ग्रहण किया गया। यह अवॉर्ड यूपी पुलिस की टेक-ड्रिवन, नागरिक-केंद्रित पहलों को राष्ट्रीय मान्यता देता है जिसमें आईसीसीसी को “24×7 nerve centre” के रूप में रेखांकित किया गया।