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‘नए उत्तर प्रदेश’ की तस्वीर सामने रखी CM योगी ने, 24,000+ स्टार्टअप और 8 यूनिकॉर्न की गिनाई उपलब्धियां

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को उप्र की प्रगति से साक्षात्कार कराया। उन्होंने 2017 के बाद प्रदेश की उड़ान को अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट किया। वहीं पूर्ववर्ती सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो, तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा? पूर्ववर्ती सरकारों ने अनलिमिटेड पोटेंशियल का नहीं किया उपयोग मुख्यमंत्री ने लिखा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश के अनलिमिटेड पोटेंशियल का उपयोग नहीं किया, बल्कि इसे 'बीमारू' ही बनाए रखा। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का जो विजन दिया, डबल इंजन सरकार ने उसे उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा है। मोबाइल से मॉड्यूल और माइक्रोचिप तक पहुंच रही विकास यात्रा मुख्यमंत्री ने बताया कि आज साढ़े 9 वर्ष के भीतर देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी है। जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की HCL-Foxconn चिप इकाई बन रही है, 644 मेगावाट के डेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके हैं और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप व8 यूनिकॉर्न हैं। यानी यात्रा मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप तक पहुंच रही है। 2017 से पहले सैफई महोत्सव ही था सांस्कृतिक उत्थान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की तस्वीर भी दिखाई। कहाकि आज के परिदृश्य से अलग पहले सिर्फ घोषणाएं होती थीं, पर परियोजनाएं जमीन पर उतरने के लिए संघर्ष करती थीं। क्योंकि तब परिवारवाद ही विकास था, सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान और माफियाकरण ही औद्योगिकीकरण का मॉडल बन गया था। भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा उप्र मुख्यमंत्री ने बताया कि हमने प्राथमिकता बदली। परिवार के विकास की जगह प्रदेश का विकास, माफिया के संरक्षण की जगह निवेशक का संरक्षण और तुष्टीकरण की जगह टेक्नोलॉजी पर जोर दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स बढ़ा तो डेटा सेंटर की आवश्यकता बढ़ी और डेटा बढ़ा तो आज उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर से एआई सिटी तक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा है। तकनीक का निर्माता बन रहा उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने बताया कि एआई-प्रज्ञा के माध्यम से 10 लाख युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम भी युवाओं को नौकरी खोजने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार देने वाला बना रहा है। कभी उत्तर प्रदेश तकनीक का बाजार था, आज उसका निर्माता बन रहा है। असेंबली से एआई तक यह यात्रा केवल तकनीक की नहीं, हमारे युवाओं के रोजगार, उद्यम और समृद्धि की यात्रा है। 'नए उत्तर प्रदेश' की दिख रही नई उड़ान सीएम ने बताया कि इसी कड़ी में आज (मंगलवार) लखनऊ में एचसीएल टेक की स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता करूंगा। इस अवसर पर HCL GUVI Emerging Tech Skilling Centre का शुभारंभ भी होगा। 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प के साथ यही 'नए उत्तर प्रदेश' की नई उड़ान है।

इंटरनेशनल ट्रेड शो के बाद ODOP की राष्ट्रीय मंच पर एंट्री, IITF 2026 में पहली बार लगेगा स्टॉल

इंटरनेशनल ट्रेड शो के बाद एक जनपद एक व्यंजन की राष्ट्रीय मंच पर दस्तक आईआईटीएफ 2026 में पहली बार लगेगा ओडीओसी का स्टॉल, भारत मंडपम में यूपी के स्थानीय व्यंजन और उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार 14 से 27 नवंबर तक नई दिल्ली में होगा 45वां इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर, ओडीओपी के साथ ओडीओसी के जरिए योगी सरकार की ‘लोकल से ग्लोबल’ पहल को मिलेगी नई पहचान प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और समृद्ध पाक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा प्रदेश की स्थानीय पाक परंपराओं को व्यापार, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने का अवसर उपलब्ध करा रही योगी सरकार लखनऊ, ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में आकर्षण का केंद्र बनने के बाद योगी सरकार की महत्वपूर्ण पहल ‘एक जनपद एक व्यंजन' (ओडीओसी) अब राष्ट्रीय मंच पर दस्तक देने जा रही है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 14 से 27 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 45वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (आईआईटीएफ) 2026 में पहली बार ओडीओसी का स्टॉल लगाया जाएगा। यहां ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) के साथ ओडीओसी के जरिए उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और समृद्ध पाक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो में ओडीओसी को मिले मंच के बाद आईआईटीएफ जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व्यापार मेले में इसकी पहली प्रस्तुति इस पहल के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे उत्तर प्रदेश की स्थानीय पाक परंपराओं को व्यापार, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने का अवसर मिलेगा। उत्पाद के बाद अब स्थानीय स्वाद की ब्रांडिंग उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की अपनी अपनी विशिष्ट पहचान और पारंपरिक व्यंजन हैं। ओडीओसी की अवधारणा इन्हीं स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक  पहचान, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने की सोच पर आधारित है। अब तक जहां ओडीओपी के माध्यम से जिलों के विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया है, वहीं ओडीओसी स्थानीय स्वाद और पाक परंपराओं को भी इसी व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से जोड़ रहा है। आईआईटीएफ में ओडीओसी के स्टॉल के जरिए प्रदेश की इस पाक विविधता को एक व्यवस्थित मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले आगंतुकों, व्यापारियों, निवेशकों और संभावित खरीदारों को उत्तर प्रदेश के स्थानीय व्यंजनों और उनसे जुड़े उत्पादों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। ओडीओपी के साथ ओडीओसी, ‘लोकल से ग्लोबल’ का अगला कदम प्रधानमंत्री मोदी के विजन ‘लोकल से ग्लोबल’ को योगी सरकार साकार करते हुए स्थानीय उत्पादों को बाजार, ब्रांड और व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दे रही है। ओडीओपी इस दिशा में प्रदेश की प्रमुख पहलों में शामिल है। अब ओडीओसी के माध्यम से इसी सोच को प्रदेश की पाक विरासत तक विस्तार दिया जा रहा है। आईआईटीएफ में ओडीओपी और ओडीओसी की संयुक्त मौजूदगी से उत्तर प्रदेश के उत्पाद और स्वाद, दोनों को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जा सकेगा। इससे स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों, खाद्य कारोबारियों और संबंधित क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए नए बाजार और व्यापारिक संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद है। ग्रेटर नोएडा के बाद दिल्ली में बढ़ेगा ओडीओसी का दायरा ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों को बड़े व्यापारिक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर दिया। अब उसी क्रम में ओडीओसी को नई दिल्ली के भारत मंडपम तक ले जाया जा रहा है। यह बदलाव इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि ओडीओसी अब केवल प्रदेश की स्थानीय पहल के रूप में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के व्यंजनों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने वाले ब्रांडिंग मॉडल के रूप में आगे बढ़ रहा है। देश-विदेश के खरीदारों तक पहुंचेगी यूपी की पाक पहचान इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर देश के प्रमुख व्यापारिक आयोजनों में शामिल है। ऐसे मंच पर ओडीओसी की पहली भागीदारी उत्तर प्रदेश के स्थानीय व्यंजनों और उनसे जुड़े उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करेगी। इसके जरिए प्रदेश की पारंपरिक पाक विरासत को केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित रखने के बजाय उसे ब्रांड, बाजार और आर्थिक अवसर से जोड़ने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। स्थानीय स्वाद के साथ जुड़े छोटे उद्यमियों और कारोबारियों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है।

12 अक्टूबर तक पूरा होगा फसल क्षति का डिजिटल सर्वे, प्रभावित किसानों को मिलेगी नियमानुसार सहायता

लखनऊ योगी सरकार ने हाल में चक्रवात, अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए फसल क्षति का तेजी से और पारदर्शी आकलन कराने के निर्देश दिए हैं। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा करते हुए 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल क्षति की फीडिंग पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। राहत आयुक्त ने कहा कि किसान हित सर्वोपरि है और किसी भी प्रभावित किसान का अहित नहीं होना चाहिए। फसल क्षति का आकलन केवल लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के आधार पर नहीं होगा। जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्वयं क्षेत्र में जाकर सर्वे की स्थिति देखेंगे और इसकी गुणवत्ता व पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे। डिजिटल सर्वे से होगा फसल नुकसान का सटीक आकलन बाढ़ के पानी में डूबी फसलों का डिजिटल क्रॉप सर्वे कराया जाएगा। इससे खेतों में हुई वास्तविक क्षति का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा। डिजिटल सर्वे से मिली जानकारी के आधार पर पात्र किसानों को उनकी फसल के नुकसान के अनुसार नियमानुसार सहायता राशि दी जाएगी। उप जिलाधिकारी और तहसीलदार डिजिटल क्रॉप सर्वे का क्रॉस-वेरिफिकेशन भी करेंगे। आईएमडी और एडब्ल्यूएस-एआरजी के आंकड़ों से तय होगी वास्तविक वर्षा फसल क्षति का आकलन अधिक वैज्ञानिक और तथ्यपरक बनाने के लिए आईएमडी और एडब्ल्यूएस-एआरजी की रिपोर्ट व आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे संबंधित क्षेत्रों में वास्तव में कितनी बारिश हुई, इसका सही आकलन किया जा सकेगा। वर्षा के वास्तविक आंकड़ों और डिजिटल सर्वे को आधार बनाकर फसल नुकसान का निर्धारण किया जाएगा। 12 अक्टूबर तक पूरा करना होगा डिजिटल क्रॉप सर्वे राहत आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हर स्थिति में 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल क्षति की फीडिंग पूरी कर ली जाए। जिलों में सर्वे की प्रगति प्रतिदिन गूगल शीट और पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। बजट की मांग भी पोर्टल पर दर्ज वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ही की जाएगी। फसल सर्वे से पहले संबंधित खसरा और अन्य राजस्व अभिलेखों की जांच की जाएगी। इससे पिछले वर्ष बोई गई फसल की जानकारी मिल सकेगी और वर्तमान फसल तथा उसे हुई क्षति का सही आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे पात्र किसानों तक राहत पहुंचाने में पारदर्शिता बढ़ेगी। बाढ़ के साथ बारिश और चक्रवात से हुए नुकसान की भी होगी गणना सरकार ने केवल बाढ़ से हुई फसल क्षति ही नहीं, बल्कि भारी बारिश और चक्रवात के प्रभाव से हुए नुकसान को भी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित जिलों को निर्धारित गूगल शीट पर इन सभी आंकड़ों को अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। आंकड़ों में किसी तरह की भिन्नता मिलने पर संबंधित अधिकारी को उसका स्पष्ट कारण बताना होगा। किसान हित को सर्वोच्च प्राथमिकता योगी सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राहत और सहायता वितरण की पूरी प्रक्रिया में तेजी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरती जाए। प्रभावित किसानों को समय पर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। राहत आयुक्त ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि आमजन के जीवन की आधारशिला हैं। इसलिए सभी अधिकारी किसान हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करें।

जापान से निवेश की डील के लिए यूपी सरकार की बड़ी पहल, 19 अक्टूबर से शुरू होगा दौरा

 लखनऊ राज्य में विदेशी निवेश को आमंत्रित करने के लिए राज्य सरकार का प्रतिनिधिमंडल 19 अक्टूबर को जापान जाएगा। चार दिवसीय दौरे में ग्रीनहाईड्रोजन, इलेक्ट्रानिक्स और वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) के क्षेत्र में निवेश को लेकर विभिन्न जापानी कंपनियों के साथ करार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 से 26 फरवरी तक सिंगापुर व जापान की यात्रा की थी। इस यात्रा में जापान के यामानाशी प्रांत के 200 निवेशकों को उन्होंने राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया था। मुख्यमंत्री की इस यात्रा से पहले जनवरी में जापानी निवेशकों का दल उत्तर प्रदेश के दौरे पर आया था। इसके बाद से जापानी निवेशकों के दो दौरे उत्तर प्रदेश में हो चुके हैं। औद्योगिक विकास विभाग ने जापानी निवेशकों को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सेक्टर पांच-ए में स्थापित की जा रही जापानी सिटी का भी दौरा कराया था। साथ ही लखनऊ और अन्य जिलों में उपलब्ध भूमि, सड़क, हवाई व रेल की कनेक्टिविटी की जानकारी दी थी। जापान की कनाडेविया कंपनी के प्रतिनिधियों ने ग्रीन हाईड्रोजन के क्षेत्र में निवेश में रुचि दिखाई है। इन्वेस्ट यूपी के अधिकारी होंगे शामिल इसी सिलसिले में राज्य सरकार का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी के नेतृत्व में जापान के यामानाशी प्रांत के दौरे पर जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा), आइटी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग और इन्वेस्ट यूपी के अधिकारी शामिल होंगे। जापानी कंपनी कनाडेविया के साथ आइआइटी कानपुर व बीएचयू में स्थापित हो रहे ग्रीन हाईड्रोजन के एक्सीलेंस सेंटरों की स्थापना में तकनीकी सहयोग प्रदान करने को लेकर पहले ही एमओयू हो चुका है।  

सितंबर में आबकारी राजस्व ने लगाई ऐतिहासिक छलांग: करीब 800 करोड़ रुपए की अधिक कमाई

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अवैध शराब के कारोबार और माफिया तंत्र के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति का सीधा और बड़ा असर उत्तर प्रदेश के आबकारी राजस्व पर दिख रहा है। आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के सितंबर महीने में शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए गत वर्ष के मुकाबले राजस्व संग्रह में लगभग 21% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में कुल 4,611.29 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल हुआ है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि (3,811.70 करोड़) से 799.59 करोड़ रुपए अधिक है। इसके साथ ही विभाग ने इस माह 120.98% की उपलब्धि हासिल की है। माफिया तंत्र पर नकेल और ताबड़तोड़ कार्रवाई बनी राजस्व में उछाल की वजह आबकारी विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में चलाए गए सघन प्रवर्तन अभियान, अवैध शराब के ठिकानों पर छापेमारी, अवैध भट्ठियों के ध्वस्तीकरण और माफियाओं की धरपकड़ का नतीजा रहा कि समानांतर अवैध व्यापार पूरी तरह ध्वस्त हो गया। हाईवे, ढाबों और अंतर्राज्यीय सीमाओं पर लगातार चेकिंग और क्यूआर कोड आधारित ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ तकनीक की वजह से कर चोरी पर पूरी तरह लगाम कसी गई है, जिससे वैध बिक्री में तेजी आई और सीधा लाभ सरकारी खजाने को मिला। 6 माह में 29,406 करोड़ रुपए का संग्रह चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर 2026) के दौरान भी विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विभाग की कुल क्रमिक प्राप्ति 29,406.50 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में यह आंकड़ा 26,149.32 करोड़ रुपए था। इस प्रकार गत वर्ष के मुकाबले विभाग ने 3,257.18 करोड़ रुपए (112.46%) का अतिरिक्त राजस्व जुटाया है। डिस्टिलरी से लेकर फुटकर दुकानों तक कड़ा पहरा आबकारी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा विभाग की टीम ने पूरे प्रदेश में तकनीक-सक्षम निगरानी और सघन प्रवर्तन अभियान चलाकर लीकेज को पूरी तरह रोका है। डिस्टिलरी से लेकर फुटकर दुकानों तक कड़ा पहरा है। निरंतर छापेमारी, जब्ती और गिरफ्तारियों के चलते अवैध नेटवर्क को तोड़ा गया है, जिसका सीधा परिणाम इस रिकॉर्ड राजस्व संग्रह के रूप में सामने आया है। चालू वित्तीय वर्ष के आगामी महीनों में भी यह कड़ाई जारी रहेगी। सितंबर में करीब 800 करोड़ रुपए अधिक राजस्व आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश से माफिया राज और अवैध धंधे पूरी तरह समाप्त हो रहे हैं। सितंबर माह में लगभग 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व यह साबित करता है कि जनता का विश्वास पारदर्शी व्यवस्था में है। यह अतिरिक्त राजस्व प्रदेश के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं को और गति देगा। अवैध शराब का कारोबार करने वालों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है। सितंबर 2026 में चलाए गए विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत विभाग ने 89 हजार से अधिक स्थानों पर छापेमारी कर 2.33 लाख लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त की और 251 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

डीएनए-ड्रोन लैब में प्रशिक्षु अफसरों ने समझी जांच की ताकत

लखनऊ  योगी सरकार की तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था को वैज्ञानिक साक्ष्यों का संबल मिल रहा है। इसी कड़ी में प्रान्तीय सिविल सेवा (PCS) 2025 बैच के 38 प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ का भ्रमण कर आधुनिक फॉरेंसिक जांच की बारीकियां समझीं। अधिकारियों ने संस्थान में स्थापित डीएनए लैब और ड्रोन लैब का अवलोकन किया तथा अपराध की वैज्ञानिक जांच में इनके उपयोग और महत्व की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ जी.के. गोस्वामी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा फॉरेंसिक साइंस के माध्यम से सच्चाई को वैज्ञानिक रूप से कानून के समक्ष ला कर न्याय दिलाने में सहयोग करना ही हमारा मूल कार्य है। फील्ड में सिविल सेवा का काम बेहद कठिन काम है जो त्याग और समर्पण मांगता है, आपको मानसिक रूप से हर पल अपने को विषम परिस्थितियों से जूझने के लिए तैयार रखना होगा।   उन्होंने कहा कि कानून और विज्ञान का संगम ही फॉरेंसिक विज्ञान है। यह एक विजन है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश भर के अफसरों को फॉरेंसिक की बारीकियां से अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने नए कानून के सदर्भ में तीन विषयों न्याय, सत्य एवं साक्ष्य पर भी प्रकाश डालते हुए इसका महत्व बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में फॉरेंसिक विज्ञान अति महत्वपूर्ण है साइबर और फॉरेंसिक हमारे जीवन में साया की तरह है क्योंकि हमारा जीवन आधुनिक तकनीक पर ज्यादा निर्भर है। डॉ गोस्वामी ने कहा कि मृत्यु कालिक बयान के विषय पर प्रशिक्षु अधिकारियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि मृत्युकालिक बयान की आवश्यकता तब पड़ती है जब ऐसा प्रतीत हो कि यदि पीड़ित के बयान तत्काल अंकित नहीं किए गये तो उसकी मृत्यु हो सकती है और बाद में अपराध को कानूनी रूप से सुझाने का महत्वपूर्ण साक्ष्य का लोप हो सकता है। ऐसी दशा में पुलिस अथवा चिकित्सक की सूचना पर किसी भी मजिस्ट्रेट को पीड़ित की भाषा में ही उसके बयान अंकित करने चाहिए जो क़ानूनी रूप से ग्राह्य है। उन्होंने कहा कि संभव हो तो बयान के समय डिजिटल रिकार्डिग भी करा लें। यदि पीड़ित व्यक्ति बात करने में सक्षम न हो परन्तु लिखित देने में सक्षम हो तो एसा बयान भी मृत्युकालिक बयान माना जायेगा। संस्थान के अपर निदेशक संजीव सुमन ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संस्थान के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, पलक अनेजा, सेंथिल शिव सुब्रमण्यम, जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार तिवारी, आरआई शैलेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे।

दशहरा पर अन्नदाता किसानों को मिलेगा योगी सरकार का उपहार

लखनऊ योगी सरकार अन्नदाता किसानों को दशहरा पर उपहार देगी। उपहार स्वरूप प्रदेश के किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र प्राप्त होगा। इसके लिए अन्नदाता किसानों को 7 से 20 अक्टूबर तक www.agriculture.up.gov.in पर आवेदन करना होगा।  संयुक्त कृषि निदेशक (अभियंत्रण) बलराम वर्मा ने बताया कि विभाग की ओर से संचालित नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजनांतर्गत सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना में 2166 कृषि यंत्र तथा प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फ़ॉर इन सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिडयू अंतर्गत 1755 कृषि यंत्र तथा अन्य योजनाओं के कृषि यंत्र/ कृषि रक्षा उपकरण के लिए अनुदान दिया जाएगा।  कस्टम हायरिंग सेंटर व फार्म मशीनरी बैंक (10-10 लाख), किसान ड्रोन व अन्य एकल कृषि यंत्र पर अनुदान दिया जाएगा। वहीं फसल अवशेष प्रबंधन के तहत एकल कृषि यंत्र व कस्टम हायरिंग सेंटर (30 लाख), त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत मेज सेलर, मिलेट पर्लर, कीट रोग नियंत्रण योजना के तहत कृषि रक्षा यंत्र, सीडीपी योजना के तहत कृषि यंत्र के लिए किसान आवेदन कर सकेंगे।  उन्होंने बताया कि www.agriculture.up.gov.in पर यंत्रों की बुकिंग/जनपदवार आवेदन किया जाएगा। इस लिंक पर किसान कार्नर के अंतर्गत यंत्र बुकिंग प्रारंभ पर क्लिक कर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। यहां पूर्ण विवरण, यंत्र बुकिंग, अनुदान प्रक्रिया आदि की भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति, मंत्री सुनील शर्मा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने किया स्वागत

योगी सरकार की ग्लोबल कनेक्टिविटी और निवेश नीति को मिला नया आयाम, जेवर पहुंचे स्विस राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति, मंत्री सुनील शर्मा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने किया स्वागत एविएशन के साथ आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर जोर स्विस कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी द्वारा विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का किया निरीक्षण, करीब 65 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रहा मौजूद नोएडा/लखनऊ  उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश और आधुनिक औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की योगी सरकार की नीति को आज उस समय एक और अंतरराष्ट्रीय आयाम मिला, जब स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति महामहिम गाय बर्नार्ड पारमेलिन अपने करीब 65 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर पहुंचे। यह दौरा उत्तर प्रदेश और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी और एविएशन क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, नागरिक उड्डयन विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं आईआईडीसी दीपक कुमार तथा इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद ने राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन और उनके प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। योगी सरकार की निवेश नीति से वैश्विक साझेदारी को मिल रहा विस्तार योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक बुनियादी ढांचे और निवेश के अनुकूल वातावरण को अपनी विकास नीति का प्रमुख आधार बनाया है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इसी व्यापक विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जेवर में विकसित हो रहा यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक हवाई संपर्क से जोड़ने के साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक, कारोबारी और निवेश गतिविधियों को नई गति देने की क्षमता रखता है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का जेवर एयरपोर्ट दौरा इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि एयरपोर्ट का विकास स्विस कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी द्वारा किया गया है। इससे उत्तर प्रदेश में स्विस तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश के साथ बने इस महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहयोग का नया अवसर सामने आया है। आधुनिक सुविधाओं का लिया जायजा दौरे की शुरुआत एनआईए ऑफिस में हुई, जहां अवनी बोर्ड रूम में एयरपोर्ट से संबंधित प्रेजेंटेशन दिया गया। इस दौरान राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन ने भी प्रतिनिधिमंडल को संबोधित किया। इसके बाद एयरपोर्ट परिसर के आंगन में भारतीय संगीत की धुनों के बीच लंच का आयोजन किया गया और ग्रुप फोटो भी हुआ। इसके पश्चात प्रतिनिधिमंडल दो हिस्सों में विभाजित हुआ। राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन, उनकी पत्नी और चयनित अधिकारी एयरसाइड तथा एटीसी टॉवर के विशेष निरीक्षण के लिए गए। वहीं प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने टर्मिनल, सुरक्षा क्षेत्र, बोर्डिंग गेट्स, एप्रन और बैगेज रिक्लेम सहित एयरपोर्ट की विभिन्न सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल दोपहर करीब दो बजे एयरपोर्ट से रवाना हुआ। एविएशन के साथ आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स में सहयोग की उम्मीद करीब 65 सदस्यीय स्विस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति की पत्नी, स्विस राजदूत, राष्ट्रीय परिषद के सदस्य, राज्य सचिव और लगभग 40 उद्योगपति शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ने इस दौरे को केवल एयरपोर्ट निरीक्षण तक सीमित न रखते हुए संभावित आर्थिक और औद्योगिक सहयोग की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया। उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश प्रोत्साहन नीतियों और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर प्रयासों से राज्य में वैश्विक कंपनियों के लिए निवेश का अनुकूल माहौल तैयार हुआ है। ऐसे में स्विस राष्ट्रपति का जेवर दौरा एविएशन के अलावा आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तकनीक और इससे जुड़े क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग और निवेश की संभावनाओं को भी मजबूत कर सकता है।

‘403 सीट पर है निगाहें’, अखिलेश की पोस्ट पर राजभर का तंज, बोले- सपने देखना बुरी बात नहीं

राज्यसभा का तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगी सपा, राजभर ने अखिलेश पर कसा तंज; बोले- बस हो गया टांय-टांय फिस्स '403 सीट पर है निगाहें', अखिलेश की पोस्ट पर राजभर का तंज, बोले- सपने देखना बुरी बात नहीं तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार पर पीछे हटे अखिलेश तो राजभर ने कसा तंज, बोले- कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं राज्यसभा चुनाव से पहले अखिलेश पर राजभर का वार, बोले- 'कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं' अखिलेश के राज्यसभा दांव पर राजभर ने कसा तंज, बोले- कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं अखिलेश यादव पर ओपी राजभर ने साधा निशाना, बोले- बस हो गया टांय-टांय फिस्स लखनऊ, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी की तरफ से तीन की जगह दो ही उम्मीदवारों को उतारने का ऐलान किया है। सपा सुप्रीमो के इस फैसले पर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा कि अखिलेश कभी-कभी समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। 'बस हो गया टांय-टांय फिस्स' ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, "मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स!"। उन्होंने अखिलेश यादव के दो उम्मीदवार उतारने के फैसले पर कटाक्ष करते हुए लिखा, "वैसे कभी-कभी ही सही, आप कुछ समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। जैसे आज किया।" '403 के सपने देखना बुरी बात नहीं' राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव के 403 विधानसभा सीटों से जुड़े राजनीतिक दावे पर भी तंज कसा। उन्होंने लिखा, "रही बात 403 की तो बस यही कहूंगा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है।" इसके जरिए राजभर ने राज्यसभा चुनाव से आगे विधानसभा चुनाव की सियासत को भी निशाने पर लिया।  बता दें कि राज्यसभा चुनाव के लिए सपा की तरफ से पहले ही दो उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया जा चुका है। लेकिन अखिलेश यादव लगातार दावा कर रहे थे कि वो तीसरे उम्मीदवार के जरिए बीजेपी को सरप्राइज देंगे। लेकिन अब अखिलेश अपनी ही बात से पीछे हट गए हैं। अब इसी को लेकर ओपी राजभर ने अखिलेश पर तंज कसा है।

वोटर लिस्ट में नाम छूट गया तो चिंता नहीं, BLO घर-घर जाकर करेंगे नाम जोड़ने की पहल

लखनऊ एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में छूटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलेगा। छूटे हुए मतदाताओं, महिलाओं और पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के नाम सूची में जोड़े जाएंगे। बीएलओ घर-घर जाकर लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने का काम करेंगे। यही नहीं बूथ पर भी मतदाताओं को फॉर्म-6 उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से सभी जिलों की निगरानी होगी। बीएलओ के लिए टारगेट भी तय किया गया है। एक महीने तक विशेष अभियान चलाकर छूटे हुए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। यूपी में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया से पूर्व की और उसके बाद जारी मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम का मिलान भी किया जाएगा। बीएलओ को एक सप्ताह में कम से कम 25 लोगों से संपर्क कर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है। बूथ पर भी लगेंगे विशेष शिविर घर-घर संपर्क के दौरान छूटे हुए मतदाताओं व पहली बार मतदाता बनने जा रहे युवाओं के भी फॉर्म-6 भरवाए जाएंगे। ऐसी महिलाएं जिनकी शादी के बाद ससुराल वाले क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़ा है, उनका नाम भी जुड़वाया जाएगा। नए भरवाए जा रहे फॉर्मों को राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों से साझा किया जाएगा। वहीं बूथ पर विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। आश्रय स्थलों, श्रमिक कालोनियों में रहने वाले, बेघर व वंचित वर्ग के पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने को विशेष कैंप लगाए जाएंगे। एक महीने में सभी बीएलओ अपने-अपने क्षेत्र में यह कार्य पूरा करेंगे। डिजिटल ऐप से होगी रियल टाइम ट्रैकिंग अभियान को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने तकनीक का सहारा भी लेने का फैसला किया है। बीएलओ अपने मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर सत्यापन के दौरान भरे गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की ऑनलाइन एंट्री करेंगे। इसकी सीधे राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग होती रहेगी। इसके साथ ही जो नागरिक बीएलओ के पहुंचने से पहले ही आवेदन करना चाहते हैं, वे वोटर सर्विस पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप से भी डिजिटल फॉर्म जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदनों का सत्यापन भी बीएलओ द्वारा घर जाकर ही किया जाएगा। लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पुनरीक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी क्षेत्र में पात्र मतदाताओं या नवविवाहिताओं के नाम बड़े पैमाने पर छूटने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित बीएलओ और सुपरवाइजर के खिलाफ जवाबदेही तय कर कार्रवाई होगी। आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनावों से पहले प्रदेश का कोई भी नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।