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उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों के लिए चला रही अनेक प्रोत्साहन व अनुदान कार्यक्रम

रबी सीजन 2025-26: 92 हजार से अधिक मिनीकिट देकर किसानों को समृद्ध करेगी योगी सरकार उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों के लिए चला रही अनेक प्रोत्साहन व अनुदान कार्यक्रम किसानों की चलेगी पाठशाला, उत्पादन के लिए नई तकनीक जानेंगे कृषक रबी सीजन में पूरे प्रदेश में चलाई जाएगी 8385 किसान पाठशाला  किसानों को प्रति एकड़ 4000 रुपये का दिया जाएगा अनुदान दलहनी फसलों के बीजों पर भी अनुदान दे रही योगी सरकार खरीफ फसलों की अपेक्षा रबी में दलहनी फसल का क्षेत्रफल व उत्पादन होता है अधिक  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों के लिए निरंतर अनेक प्रोत्साहन योजना व अनुदान कार्यक्रम चला रही है। इसी क्रम में रबी फसल के मद्देनजर योगी सरकार किसानों को 92 हजार से अधिक मिनीकिट देकर समृद्ध करेगी। इसके साथ ही उत्पादन की नई तकनीक से अवगत कराने के लिए कृषि विभाग 8385 किसान पाठशाला भी चलाएगा। गौरतलब है कि रबी फसल में दलहनी फसलों का क्षेत्रफल एवं उत्पादन खरीफ मौसम की अपेक्षा अधिक होता है। साथ ही रबी के मौसम में फसलों पर कीट एवं व्याधि का संक्रमण भी कम होता है, जिससे दलहनी फसलों की उत्पादकता अधिक प्राप्त होने की संभावना होती है।  दलहनी फसलों से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अनेक योजनाएं चला रहा कृषि विभाग  रबी में दलहनी फसलों से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा भी किसानों के लिए कई प्रोत्साहन योजना एवं अनुदान आधारित कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विशेष रूप से योगी सरकार द्वारा नवीन प्रजातियों के प्रोत्साहन के लिए दलहनी फसलों के निःशुल्क मिनीकिट, एकड़ प्रदर्शन एवं किसान पाठशाला चलाये जा रहे हैं। योगी सरकार किसानों को प्रति एकड़ 4000  रुपये के अनुदान के साथ ही उत्पादन की नवीन तकनीक के प्रसार के लिए किसान पाठशाला भी चला रही है।  रबी सीजन 2025-26 में 92518 मिनी किट और 8385 किसान पाठशाला का लक्ष्य वर्तमान रबी सीजन में 92518 मिनीकिट, 8385 खंड प्रदर्शन तथा 8385 किसान पाठशाला का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त नेशनल फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन मिशन के अंतर्गत 10 वर्ष से कम अवधि के दलहनी फसलों के बीजों पर 5000 रुपये प्रति कुंतल, 10 वर्ष से अधिक अवधि के दलहनी फसल के बीजों पर 2500 रुपये प्रति कुंतल, क्लस्टर प्रदर्शन पर 9000 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा फसल पद्धति प्रदर्शन पर 15000 रुपये प्रति हेक्टेयर के अनुदान की सुविधा है। किसानों को बीजों पर अनुदान एटसोर्स अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदर्शन का अनुदान चयनित किसानों के खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित किया जायेगा। प्रदेश सरकार किसानों को अन्नदाता मानकर उनके उत्थान के लिए निरंतर प्रयत्न कर रही है। इसी क्रम में रबी सीजन में उत्पादन बढा़ने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। हाल ही में प्रदेश स्तर पर रबी गोष्ठी भी हुई थी, जिसके माध्यम से हजारों किसानों ने खेती में नवीनीकरण की जानकारी प्राप्त की। किसान बीज शोधन, जैव रसायन व कृषि रक्षा रसायन से बीज शोधित करके ही बोआई करें, जिससे बीज जनित एवं भूमि जनित रोगो के संक्रमण की संभावना नहीं रहती है। साथ ही राइजोबियम कल्चर से शोधित करने पर मृदा में 20-25 किग्रा. नाइट्रोजन का स्थिरीकरण हो जाता है। इससे आगामी फसलों की लागत कम हो जायेगी तथा उत्पादकता में वृद्धि हो सकेगी।    

योगी सरकार की योजनाओं से रोशन होगी अयोध्या, दीपोत्सव में नजर आएगा विकास का रंग

अयोध्या रामनगरी अयोध्या सिर्फ आस्था की धरती नहीं, बल्कि अब यह विकास और विरासत का संगम बन चुकी है। इस बार के नौवें दीपोत्सव में योगी सरकार की विकास दृष्टि भी दीपों की तरह चमकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को वैश्विक तीर्थ और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए अनेक भव्य परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया है। इनमें राम की पैड़ी का भव्य सौंदर्यीकरण, सरयू घाटों का पुनरुद्धार और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार शामिल है। इन योजनाओं ने न सिर्फ अयोध्या की प्राचीनता को जीवित रखा है, बल्कि श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा है। दीपोत्सव जैसे विश्व प्रसिद्ध आयोजन में दर्शकों के लिए अब राम की पैड़ी पर बैठना पहले से कहीं अधिक आरामदायक और आकर्षक होगा। योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 2324.55 लाख रुपए की लागत से यहां लगभग 350 मीटर लंबी सीढ़ियों और दर्शक दीर्घा का निर्माण कराया है, जिसमें 18,000 से 20,000 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। यहां बनाया गया सेल्फी पॉइंट, जिसमें भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की पत्थर की भव्य मूर्तियां हैं, श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, बाउंड्री वॉल और अन्य पर्यटन सुविधाओं ने इसे विश्वस्तरीय रूप प्रदान किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 2367.61 लाख रुपए की नई परियोजना से राम की पैड़ी और भी भव्य स्वरूप में नजर आएगी। यहां आठ छोटे एम्फीथिएटर बनाए जा रहे हैं, जो दर्शकों को बैठने की सुविधा देंगे। साथ ही छह पत्थर की छतरियां, आठ भव्य दीपक और सात मीटर ऊंचे पत्थर के स्तंभ इस घाट की शोभा बढ़ाएंगे। प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के साथ यह स्थान अब आधुनिकता और परंपरा का अद्भुत संगम बन जाएगा, जो विश्वभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा। अयोध्या की जीवनरेखा कही जाने वाली सरयू नदी के तट को भी नया रूप दिया जा रहा है। लगभग 2.5 किलोमीटर लंबाई में फैले घाटों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर 2346.11 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। परियोजना में 32 पत्थर की छतरियां, 11 विशाल स्तंभ, चार पूजा स्थल, दो गौ-पूजा स्थल, 15 दिशा सूचक, 60 इंटरप्रिटेशन वॉल और एक वीआईपी पवेलियन बनाए जा रहे हैं। आधुनिक रोशनी और स्वच्छ घाट व्यवस्था के साथ यह क्षेत्र अब आध्यात्मिक पर्यटन का नया गंतव्य बनेगा। सरयू आरती का दृश्य अब और भी मनमोहक और भव्य होगा। यूपीपीसीएल के परियोजना प्रबंधक मनोज शर्मा ने कहा योगी सरकार के नेतृत्व में अयोध्या में जो विकास कार्य हो रहे हैं, वे महज निर्माण नहीं बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। राम की पैड़ी और सरयू घाटों के सौंदर्यीकरण से न सिर्फ धार्मिक पर्यावरण समृद्ध हुआ है, बल्कि पर्यटन को भी नई दिशा मिली है। हमारा प्रयास है कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय से पहले और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरी हों, ताकि श्रद्धालु और पर्यटक यहां आने पर अयोध्या की भव्यता और दिव्यता का अनुभव कर सकें। जिलाधिकारी निखिल टीकाराम ने बताया कि सभी निर्माण कार्य यूपीपीसीएल के माध्यम से कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा इन परियोजनाओं ने अयोध्या को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। राम की पैड़ी और सरयू घाटों का सौंदर्यीकरण न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण है, बल्कि यह श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और सुखद वातावरण भी देता है। इन विकास कार्यों से न सिर्फ अयोध्या की पहचान विश्व में सशक्त हुई है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी नई गति मिली है।  

शीर्ष सरकारी सूत्रों ने कहा- अकाउंट सस्पेंड करने के पीछे सरकार का हाथ नहीं

लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का आधिकारिक फेसबुक अकाउंट सस्पेंड हो गया है। इसके बाद राजनीतिक बवाल मचा गया। सपा ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है, तो वहीं शीर्ष सरकारी सूत्रों ने कहा है कि उनके फेसबुक अकाउंट सस्पेंड करने के पीछे सरकार का कोई हाथ नहीं है। यह कार्रवाई दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई है। वे दिशा-निर्देश जो देश के कानून के मुताबिक प्रत्येक नागरिक पर लागू होते हैं।  सरकारी सूत्रों ने कहा कि उनके अकाउंट पर एक पोस्ट थी जो सामुदायिक दिशा-निर्देशों के विरुद्ध थी और फेसबुक ने नियमों के मुताबिक कार्रवाई की है। अखिलेश के फेसबुक अकाउंट में पर 80 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे, जो एक्सेसिबल नहीं है। सपा ने इसको बीजेपी का विपक्षी आवाज दबाने का प्रयास बताया है। पार्टी प्रवक्ता फखरुल हसन ने एक्स पर लिखा- देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का फेसबुक अकाउंट सस्पेंड करना लोकतंत्र पर हमला है। बीजेपी ने अघोषित इमरजेंसी लगा दी है। हालांकि, सपा विधायक पूजा शुक्ला ने कहा कि फेसबुक ने बिना चेतावनी के अकाउंट बंद किया। यह लाखों की आवाज को दबाने की साजिश है। सपा का आरोप है कि यह सस्पेंशन बीजेपी के इशारे पर किया गया। पार्टी ने कहा कि अखिलेश ने हाल ही में बसपा प्रमुख मायावती की बीजेपी की तारीफ पर सवाल उठाए थे, जिससे ‘आंतरिक सांठगांठ’ का दावा किया। इससे पहले सपा ने चुनाव आयोग पर बीजेपी से मिलीभगत का आरोप लगाया था। अकाउंट सस्पेंड होने से सपा कार्यकर्ताओं में गुस्सा है। पार्टी ने फेसबुक से तुरंत बहाली की मांग की और कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है। सरकारी सूत्रों ने सपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार का इसमें कोई हाथ नहीं है। सस्पेंशन फेसबुक के कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वाले एक पोस्ट के कारण हुआ। यह इंटरमीडियरी गाइडलाइंस के तहत कार्रवाई है, जो हर नागरिक पर लागू होती है। सरकार ने कोई दखल नहीं दिय। सूत्र ने कहा कि फेसबुक ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सपा का दावा है कि बिना चेतावनी के अकाउंट बंद किया गया है।  

दीपोत्सव 2025:लक्ष्मण किला घाट पहली बार बना दीपोत्सव का आकर्षण केंद्र

दीपोत्सव 2025: 56 घाटों पर जगमगाएंगे 28 लाख दीप, अयोध्या में रचेगा नया विश्व रिकॉर्ड दीपोत्सव 2025:लक्ष्मण किला घाट पहली बार बना दीपोत्सव का आकर्षण केंद्र दीपोत्सव 2025 :योगी सरकार के नेतृत्व में अयोध्या का दीपोत्सव बनेगा सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक -22 समितियाँ जुटीं युद्धस्तर पर तैयारियों में, सरयू तट होगा दिव्य आलोकित  -दीपोत्सव से अयोध्या की आस्था और संस्कृति पहुंचेगी विश्व पटल पर अयोध्या रामनगरी अयोध्या इस वर्ष एक बार फिर विश्व मंच पर अपनी आस्था, संस्कृति और गौरव का प्रकाश फैलाने जा रही है। योगी सरकार के नेतृत्व में इस बार नौवां दीपोत्सव 2025 अब तक का सबसे भव्य और ऐतिहासिक आयोजन बनने जा रहा है। सरयू तट के 56 घाटों पर लगभग 26 लाख दीपों के प्रज्वलन के लिए 28 लाख दिए बिछाए जाएंगे, जो एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करेगा। इस वर्ष आयोजन की विशेषता यह है कि पहली बार लक्ष्मण किला घाट को दीपोत्सव में शामिल किया गया है। अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को देगा वैश्विक स्वरूप यह दीपोत्सव केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिकता और विश्वबंधुत्व का सशक्त प्रतीक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में यह आयोजन न केवल अयोध्या के विकास और राम मंदिर निर्माण के विज़न को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश को धार्मिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु और देश-विदेश से आए पर्यटक रामनगरी की इस दिव्य आभा के साक्षी बनेंगे। इन घाटों पर होगा दीपों का सागर लक्ष्मण किला घाट पर पहली बार सवा चार लाख दीप प्रज्वलित होंगे। राम की पैड़ी और चौधरी चरण सिंह घाट पर करीब साढ़े चार लाख दीप जलाए जाएंगे। भजन संध्या घाट पर साढ़े पांच लाख दीपों की रौशनी से सरयू तट अलौकिक चमक में नहाएगा। मुख्य आकर्षण राम की पैड़ी रहेगी, जहां 15 से 16 लाख दीपों की अविरल ज्योति से पूरा घाट जगमगा उठेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं दीप प्रज्ज्वलित कर इस भव्य कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बन जाएगा। पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की तैयारी बीते वर्षों में अयोध्या का दीपोत्सव गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। इस बार लक्ष्य है उस रिकॉर्ड को और आगे बढ़ाना 28 लाख दीपों का नया विश्व कीर्तिमान स्थापित करने का। इसके लिए सरकार, प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं की टीमें युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटी हैं। दीपों की सजावट, सुरक्षा व्यवस्था, सांस्कृतिक मंचन, और पर्यटकों के स्वागत की रूपरेखा बारीकी से तैयार की जा रही है। फैक्ट फाइल दीपोत्सव 2025 नौवां दीपोत्सव अयोध्या में आयोजित होगा। 33 लाख दीपों की कुल व्यवस्था। 75 हजार लीटर तेल की जरूरत होगी। 55 लाख रुई बत्तियाँ तैयार की जा रही हैं। 30 हजार स्वयंसेवकों को टोपी व टीशर्ट वितरित होंगी। 28 लाख दीप बिछाकर नया विश्व रिकॉर्ड रचा जाएगा। 22 समितियाँ बना रहीं आयोजन को साकार डाॅ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के दीपोत्सव नोडल अधिकारी प्रो. संत शरण मिश्र के निर्देशन में 22 समितियाँ गठित की हैं, जो दीपोत्सव के प्रत्येक पहलू की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इनमें प्रमुख समितियाँ हैं। समन्वय समिति, अनुशासन समिति,सुरक्षा समिति, दीप गणना समिति, यातायात समिति, स्वच्छता समिति, मीडिया एवं फोटोग्राफी समिति, प्राथमिक चिकित्सा समिति, साज-सज्जा एवं रंगोली समिति,वालंटियर व आईकार्ड समिति, पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण समिति, सभी समितियों के संयोजक, सह-संयोजक एवं सदस्य दिन-रात अयोध्या को दिव्य स्वरूप देने के अभियान में लगे हुए हैं। अयोध्या दीपोत्सव का आध्यात्मिक और राष्ट्रीय महत्व अयोध्या दीपोत्सव केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं यह ‘रामराज्य’ के आदर्शों का स्मरण, भारतीय संस्कृति की एकता का प्रतीक और विश्व को शांति का संदेश देने वाला अवसर है। यह आयोजन अयोध्या को केवल एक शहर नहीं, बल्कि “विश्व सांस्कृतिक राजधानी” के रूप में स्थापित करता है। दीपों की यह ज्योति केवल सरयू किनारे नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष और विश्व के हृदय में आस्था, एकता और आशा की लौ जलाएगी।

पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश

पराली को लेकर सीएम योगी सख्त, शून्य घटनाओं का लक्ष्य तय पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश  सेटेलाइट से की जाएगी निगरानी, अन्नदाता किसानों को किया जाएगा जागरूक फसल अवशेष जलाने पर लगेगी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, नोडल अधिकारी करेंगे निगरानी लखनऊ उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पराली जलाने की घटनाओं को ‘शून्य’ किया जाए। इस संबंध में शासनादेश के तहत विस्तृत दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जाए। सभी जिलाधिकारियों से अपेक्षा की गई है वो सेटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं की लगातार निगरानी करें और संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरती जाए। जारी निर्देशों के अनुसार, फसल अवशेष जलाने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जाएगी। दो एकड़ से कम क्षेत्र पर ₹2,500, दो से पांच एकड़ तक ₹5,000 और पांच एकड़ से अधिक पर ₹15,000 का जुर्माना निर्धारित किया गया है। प्रत्येक 50 से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी जो पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी इस अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संयुक्त प्रयासों से ही स्वच्छ पर्यावरण और प्रदूषण मुक्त प्रदेश का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। निर्देशों के अनुसार, जिलाधिकारियों से कहा गया है कि हॉटस्पाट चिन्ह्ति करते हुए 50/100 किसानों पर एक नोडल अधिकारीकी नियुक्ति किया जाए। नोडल अधिकारी को पराली जलाने की घटनाओं को शून्य करने के लिए विशेष हिदायत दी जाए। इसके साथ ही, राजस्व, पुलिस, कृषि, ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज विभागों के जनपद, तहसील, विकासखण्ड एवं क्षेत्रीय कर्मियों के माध्यमसे फसल कटने के समय निगरानी करते हुए, फसल अवषेश जलाने की घटनाओं को शून्य करना है। यदि कोई कृषक फसल अवषेश जलाता हुआ पाया जाता है तो मौके पर उसको रोकना तथा उस पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की धनराषि अधिरोपित करते हुए कार्यवाही करना सुनिश्चित किया जाए।

पुलिस विभाग में मची हलचल: केशव कुमार के आदेश पर 314 पुलिसकर्मी हुए स्थानांतरित

कुशीनगर पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए बड़े पैमाने पर तबादलों को शुरू किया है। इस कार्रवाई के तहत पिछले तीन साल से एक ही थाने में तैनात 314 पुलिसकर्मियों को अन्य थानों में स्थानांतरित किया गया है। इस फैसले से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और कर्मियों के बीच चर्चा जोरों पर है। जानकारी के अनुसार, स्थानांतरण की सूची में हेड कांस्टेबल और आरक्षी शामिल हैं, जो लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थ थे। पुलिस अधीक्षक का यह कदम कार्यक्षमता बढ़ाने और भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी जैसे मुद्दों को रोकने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से कुछ कर्मी प्रभावशाली लोगों के संपर्क में आकर अनुचित गतिविधियों में लिप्त हो सकते हैं, जिसे रोकने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। स्थानांतरण की सूची जारी होने के बाद कई पुलिसकर्मियों ने नई तैनाती को लेकर अपनी सहमति जताई, जबकि कुछ ने असंतोष भी व्यक्त किया। हालांकि, पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने साफ किया कि यह फैसला विभाग की बेहतरी और जनता की सेवा को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने कहा कि नियमित स्थानांतरण से पुलिसकर्मियों को नए अनुभव मिलेंगे और उनकी कार्यक्षमता में सुधार होगा। पुलिस महकमे के सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई से जूनियर और सीनियर दोनों स्तर के कर्मियों में हलचल है। कुछ थानों में स्टाफ की कमी की शिकायतें भी सामने आई हैं, लेकिन प्रशासन ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इन खामियों को दूर कर लिया जाएगा। स्थानांतरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई असुविधा न हो। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह कदम पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी।  

योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से जन शिकायतों के निस्तारण में आई तेजी, पीड़ितों को मिल रहा त्वरित न्याय

जनशिकायतों के निस्तारण में देवीपाटन मंडल अव्वल, मीरजापुर मंडल ने हासिल किया दूसरा स्थान    योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से जन शिकायतों के निस्तारण में आई तेजी, पीड़ितों को मिल रहा त्वरित न्याय  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मॉनीटरिंग से शिकायतों का समयबद्ध हो रहा निस्तारण  आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट में जनमानस की शिकायतों के निस्तारण में देवीपाटन मंडल ने प्राप्त किया पहला स्थान  – रिपोर्ट में मीरजापुर दूसरे तो बस्ती मंडल है तीसरे स्थान पर, शिकायतों के निस्तारण के बाद मंडलायुक्त ले रहे फीडबैक  – मंडलायुक्तों की मॉनीटरिंग, विभागीय आख्या की जांच और शिकायकर्ता के फीडबैक से समस्या के समाधान में आ रही तेजी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगरानी से जन शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है। योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से शिकायतों के समाधान में न केवल पारदर्शिता आई है, बल्कि पीड़ितों को त्वरित न्याय भी मिल रहा है। योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक सुधारों और तकनीकी उपायों को अपनाकर शिकायतों के निस्तारण को सुनिश्चित किया है। वहीं, आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट में देवीपाटन मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में बाजी मारी है और प्रदेश में एक बार फिर पहला स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह प्रदेशभर में मीरजापुर मंडल ने दूसरा और बस्ती मंडल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बता दें कि अगस्त माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में भी देवीपाटन जनशिकायतों के निस्तारण में पहले स्थान पर था। हर माह रेंडम पांच शिकायतकर्ता से दवीपाटन मंडलायुक्त खुद लेते हैं निस्तारण का फीडबैक देवीपाटन मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जनशिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए देवीपाटन मंडल के जिलों क्रमश: श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर में जनशिकायतों के पारदर्शी और त्वरित समाधान के लिए कई बिंदुओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिलों में जनशिकायतों की निस्तारण की रिपोर्ट की लगातार मॉनीटरिंग की जाती है। मंडलायुक्त ने बताया कि वह खुद मंडल के सभी जिलों के जनशिकायतों के निस्तारण के पहलुओं की मॉनीटरिंग करते हैं। इसके साथ ही रेंडम पांच शिकायतकर्ता से मंडलायुक्त कार्यालय से फीडबैक लिया जाता है ताकि यह पता चल सके कि पीड़ित की शिकायत पर वास्तविकता में एक्शन लिया गया है या फिर रिपोर्ट ही लगायी गयी है। इसके साथ ही हर माह जनशिकायतों के मामलों की विभागीय आख्या की जांच की जाती है। यही वजह है कि देवीपाटन मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में प्रदेश भर में एक बार फिर पहला स्थान प्राप्त किया है। मंडलायुक्त ने बताया कि सितंबर माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में दवीपाटन मंडल को पूर्णांक 120 में से 104 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 86.67 प्रतिशत है।    मीरजापुर मंडल ने दूसरा तो बस्ती मंडल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया योगी सरकार द्वारा लांच आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पोर्टल नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कई सुधारों के बाद यह अत्यधिक प्रभावी साबित हुआ है। आईजीआरएस की सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार मीरजापुर मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में प्रदेशभर में दूसरा प्राप्त किया है। मीरजापुर मंडलायुक्त ने बताया कि सितंबर माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में मीरजापुर मंडल को पूर्णांक 120 में से 98 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 81.67 प्रतिशत है। पिछले माह भी आईजीआरएस की अगस्त माह की रिपोर्ट में मीरजापुर मंडल दूसरे स्थान पर था। इसी तरह बस्ती मंडल ने जनशिकायतों के निस्तारण में पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बस्ती मंडलायुक्त ने बताया कि सितंबर माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में बस्ती मंडल को पूर्णांक 120 में से 97 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 80.83 प्रतिशत है। इसके साथ ही टॉप फाइव मंडल में अलीगढ़ मंडल ने चौथा और वाराणसी मंडल ने पांचवां स्थान प्राप्त किया है। इन मंडलों ने शिकायतों के निस्तारण में समय की बचत और पीड़ितों से फीडबैक लेकर सुधार की प्रक्रिया को तेज किया है। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि कोई भी शिकायत अनसुलझी न रहे और समाधान की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध हो। साथ ही अधिकारियों के फील्ड विज़िट्स ने इस प्रक्रिया को और भी प्रभावी बना दिया है।

भदोही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया 49वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला और चौथे कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ

एक देश टैरिफ लगाएगा तो हम 10 नए देशों में रास्ते खोलेंगे : यूएस टैरिफ पर बोले सीएम योगी  भदोही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया 49वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला और चौथे कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ  मुख्यमंत्री ने कालीन उद्योग से जुड़े उद्यमियों से कहा- यूएस टैरिफ से घबराने की जरूरत नहीं, चुनौतियां अवसर लेकर आती हैं यूएई, यूके और अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से खुलेंगे नये बाजार के द्वार : मुख्यमंत्री   भदोही, मीरजापुर और वाराणसी को जोड़कर बनाया जाएगा विशेष कार्पेट डेवलपमेंट रीजन मुख्यमंत्री ने कहा : भदोही को छोटा मत समझिए, यह प्रदेश की आर्थिक ताकत है  88 देशों में पहुंच रही हैं भदोही की कालीनें : सीएम योगी  मुख्यमंत्री ने कालीन उद्यमियों और बायर्स से किया संवाद  कार्पेट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हाई लेवल कमेटी का गठन किया : मुख्यमंत्री  कालीन उद्योग 17 हजार करोड़ का निर्यात और 30 लाख लोगों को रोजगार दे रहा है  दीपावली पर सभी जिलों के स्वदेशी मेलों में अपना जलवा बिखेर रही है भदोही की कालीनें   भदोही  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को भदोही में 49वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला और चौथे कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से आए कालीन उद्यमियों और निर्यातकों के साथ संवाद करते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार हर स्थिति में उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह हमारे लिए नए अवसरों के द्वार खोलने का समय है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “जब भी चुनौतियां आती हैं, वे अपने साथ अवसर भी लाती हैं। अमेरिका ने टैरिफ लगाया है, लेकिन यह केवल एक देश का निर्णय है। हम यूएई, यूके और अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में ये समझौते हमारे उद्योगों के लिए नए बाजार खोलेंगे।” उन्होंने बताया कि सरकार ने इस विषय पर हाई लेवल कमेटी का गठन किया है जो टैरिफ से उत्पन्न स्थिति पर लगातार काम कर रही है। ग्लोबल मार्केट में बढ़ी है भदोही के कालीन की मांग मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 वर्ष पहले कार्पेट उद्योग बंदी के कगार पर था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भदोही, मीरजापुर और वाराणसी के कार्पेट क्लस्टर को नई ऊर्जा मिली। भदोही को केंद्र बनाकर कार्पेट एक्सपो मार्ट की स्थापना की गई। जब पहला एक्सपो हुआ था, तब विदेशी खरीदारों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन आज 88 देशों से तीन से चार सौ फॉरेन बायर्स यहां आ रहे हैं। यह बताता है कि ग्लोबल मार्केट में आपके कालीनों की मांग कितनी बढ़ी है। योगी आदित्यनाथ ने अपने उद्बोधन में कहा कि यूपी सरकार ने कार्पेट सेक्टर सहित एमएसएमई और ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रॉडक्ट) योजना के तहत प्रत्येक जिले में विशिष्ट उद्योगों को प्रोत्साहित किया है। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल, फिरोजाबाद के ग्लास और वाराणसी के सिल्क को नई पहचान मिली है। 2017 में जब हमने ओडीओपी योजना शुरू की थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यूपी दो लाख करोड़ से अधिक का निर्यात करेगा, यह अब वास्तविकता बन चुकी है। कार्पेट उद्योग महिला स्वावलंबन का यह सबसे बड़ा माध्यम मुख्यमंत्री ने बताया कि कार्पेट उद्योग केवल व्यापार नहीं है, यह हमारे कारीगरों और हस्तशिल्पियों की जीवंत परंपरा है। आज यह उद्योग 25 से 30 लाख लोगों को रोजगार देता है और हर साल करीब 17 हजार करोड़ रुपए का निर्यात करता है। महिला स्वावलंबन का यह सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। सरकार का प्रयास है कि इस उद्योग को और अधिक महिलाओं से जोड़ा जाए ताकि वे घर पर रहकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भदोही को छोटा मत समझिए, यह प्रदेश और देश की आर्थिक ताकत का प्रतीक है। 2014 से पहले यह उद्योग लगभग मृतप्राय हो चुका था, लेकिन आज यह यूपी की पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर प्रदेश के सभी 75 जिलों में स्वदेशी मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भदोही की कालीनों के विशेष स्टॉल लगाए गए हैं। कार्पेट उद्यमियों से मुख्यमंत्री ने किया संवाद रवि पाटेरिया ने कहा कि “कालीन उद्योग हाथों का जादू है। हमने विश्व का सबसे बड़ा कालीन बनाकर कजाकिस्तान भेजा है। इस कला को विशेष दर्जा मिलना चाहिए।” इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विचार समिति के गठन पर सरकार विचार कर रही है, ताकि उद्यमियों के सुझावों को नीतिगत निर्णयों में शामिल किया जा सके। हाजी हमीद ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “आपकी प्रतिबद्धता ने कालीन उद्योग को नया जीवन दिया है। भदोही और प्रदेश दोनों को इस उद्योग के माध्यम से वन ट्रिलियन इकॉनमी में सहभागी बनाया जा सकता है।” अनिल सिंह ने मीरजापुर-विंध्य कॉरिडोर के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि आसपास के क्षेत्रों को भी एनसीआर की तरह विकसित किया जाए, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “भदोही, वाराणसी और मीरजापुर को जोड़कर विकास क्षेत्र के रूप में तैयार करने की दिशा में कार्य चल रहा है।” आदर्श पूर्णिमा, जो चार दशकों से इस उद्योग से जुड़ी हैं, ने कहा कि “आध्यात्म और राजनीति का संगम हो तो सफलता निश्चित है।” वहीं निर्यातक आलोक बरनवाल ने बुनकरों की कमी और श्रमिकों के पलायन की समस्या उठाई, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “हम उद्योग को महिलाओं और स्थानीय श्रमिकों से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहे हैं।“ मुख्यमंंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल उद्योग को बचाना नहीं, बल्कि इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना है। जब एक देश टैरिफ लगाएगा तो हम 10 नए देशों के लिए अपने रास्ते खोलेंगे। यही आत्मनिर्भर भारत की भावना है। चुनौतियों से घबराना नहीं है, बल्कि उन्हें अवसर में बदलना है। सरकार आपके साथ है, आपका भविष्य उज्ज्वल है। इस अवसर पर सांसद डॉ विनोद बिंद, विधायकगण दीनानाथ भास्कर, विपुल दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विकास आयुक्त हस्तशिल्प भारत सरकार अमृत राज, सीपीसी के चेयरमैन कुलदीप, पद्मश्री डॉ रजनीकांत, भदोही कार्पेट उद्योग से जुड़े पदाधिकारीगण, स्टेक होल्डर्स सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।  मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को किया सम्मानित, प्रदान किया ऋण मुख्यमंत्री … Read more

राम की पैड़ी पर दर्शक दीर्घा बनी आकर्षण, एक साथ बैठ सकेंगे 20 हजार श्रद्धालु

दीपोत्सव 2025 दीपोत्सव में झलकेगा विकास का उजियारा, योगी सरकार की योजनाओं से निखरेगी अयोध्या  राम की पैड़ी पर दर्शक दीर्घा बनी आकर्षण, एक साथ बैठ सकेंगे 20 हजार श्रद्धालु एम्फीथिएटर, छतरियां और दीपकों से सजेगी रामनगरी, बढ़ेगा सांस्कृतिक वैभव  सरयू घाटों का भव्य सौंदर्यीकरण, पर्यटकों के लिए बनेगा नया आकर्षण केंद्र  डीएम बोले अयोध्या पहुंची विकास की नई ऊंचाइयों पर, बन रही विश्व की आध्यात्मिक राजधानी अयोध्या  रामनगरी अयोध्या केवल आस्था की धरती नहीं, बल्कि अब यह विकास और विरासत का संगम बन चुकी है। इस बार के नौवें दीपोत्सव में योगी सरकार की विकास दृष्टि भी दीपों की तरह चमकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को वैश्विक तीर्थ और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए अनेक भव्य परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया है। इनमें राम की पैड़ी का भव्य सौंदर्यीकरण, सरयू घाटों का पुनरुद्धार और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार शामिल है। इन योजनाओं ने न केवल अयोध्या की प्राचीनता को जीवित रखा है, बल्कि श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा है। राम की पैड़ी पर बैठेगा श्रद्धा और सौंदर्य का संगम दीपोत्सव जैसे विश्व प्रसिद्ध आयोजन में दर्शकों के लिए अब राम की पैड़ी पर बैठना पहले से कहीं अधिक आरामदायक और आकर्षक होगा। योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 2324.55 लाख रुपये की लागत से यहां लगभग 350 मीटर लंबी सीढ़ियों और दर्शक दीर्घा का निर्माण कराया है, जिसमें 18,000 से 20,000 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। यहां बनाया गया सेल्फी पॉइंट, जिसमें भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की पत्थर की भव्य मूर्तियां हैं, श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, बाउंड्री वॉल और अन्य पर्यटन सुविधाओं ने इसे विश्वस्तरीय रूप प्रदान किया है। राम की पैड़ी का भव्यीकरण, आठ एम्फीथिएटर और पत्थर की छतरियाँ बनेंगी आकर्षण वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 2367.61 लाख रुपये की नई परियोजना से राम की पैड़ी और भी भव्य स्वरूप में नजर आएगी। यहां आठ छोटे एम्फीथिएटर बनाए जा रहे हैं, जो दर्शकों को बैठने की सुविधा देंगे। साथ ही छह पत्थर की छतरियाँ, आठ भव्य दीपक और सात मीटर ऊंचे पत्थर के स्तंभ इस घाट की शोभा बढ़ाएंगे। प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के साथ यह स्थान अब आधुनिकता और परंपरा का अद्भुत संगम बन जाएगा, जो विश्वभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा। सरयू घाटों का नवनिर्माण भक्तिभाव और पर्यटन दोनों का केंद्र अयोध्या की जीवनरेखा कही जाने वाली सरयू नदी के तट को भी नया रूप दिया जा रहा है। लगभग 2.5 किलोमीटर लंबाई में फैले घाटों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर 2346.11 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। परियोजना में 32 पत्थर की छतरियाँ, 11 विशाल स्तंभ, चार पूजा स्थल, दो गौ-पूजा स्थल, 15 दिशा सूचक, 60 इंटरप्रिटेशन वॉल और एक वीआईपी पवेलियन बनाए जा रहे हैं। आधुनिक रोशनी और स्वच्छ घाट व्यवस्था के साथ यह क्षेत्र अब आध्यात्मिक पर्यटन का नया गंतव्य बनेगा। सरयू आरती का दृश्य अब और भी मनमोहक और भव्य होगा। यूपीपीसीएल के परियोजना प्रबंधक मनोज शर्मा ने कहा योगी सरकार के नेतृत्व में अयोध्या में जो विकास कार्य हो रहे हैं, वे केवल निर्माण नहीं बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। राम की पैड़ी और सरयू घाटों के सौंदर्यीकरण से न सिर्फ धार्मिक पर्यावरण समृद्ध हुआ है, बल्कि पर्यटन को भी नई दिशा मिली है। हमारा प्रयास है कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय से पहले और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरी हों, ताकि श्रद्धालु और पर्यटक यहां आने पर अयोध्या की भव्यता और दिव्यता का अनुभव कर सकें। अयोध्या बनी विश्व की आध्यात्मिक राजधानी : डीएम निखिल टीकाराम जिलाधिकारी निखिल टीकाराम ने बताया कि सभी निर्माण कार्य यूपीपीसीएल के माध्यम से कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा इन परियोजनाओं ने अयोध्या को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। राम की पैड़ी और सरयू घाटों का सौंदर्यीकरण न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण है, बल्कि यह श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और सुखद वातावरण भी देता है। इन विकास कार्यों से न सिर्फ अयोध्या की पहचान विश्व में सशक्त हुई है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी नई गति मिली है।

पूर्वांचल-बिहार के यात्रियों के लिए खुशखबरी, वाराणसी से शुरू हुई नई स्पेशल ट्रेन

वाराणसी रेल यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने वाराणसी जंक्शन से लोकमान्य तिलक (टी.) के बीच आरक्षित फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। इस बाबत शुक्रवार को लोकमान्य तिलक (टी.) – वाराणसी जं. स्‍पेशल ट्रेन की जानकारी रेलवे की ओर से एक्‍स हैंडल पर साझा की गई है। वाराणसी से चलने वाली इस स्पेशल ट्रेन का स्‍टापेज जौनपुर सिटी, सुल्तानपुर जंक्शन, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, उरई, वीरांगना लक्ष्मीबाई (झांसी) बीना जंक्शन, रानी कमलापति, इटारसी जंक्शन, खंडवा, भुसावल जंक्शन, नासिक रोड, कल्याण जंक्शन और थाने रेलवे स्टेशन होंगे। यहां से यात्री सफर कर सकते हैं। 13 अक्‍टूबर से 17 नवंबर तक हर सोमवार को यह ट्रेन 1.35 बजे रवाना होगी। इसके अलावा ट्रेन हर मंगलवार को शाम 4.55 बजे लोकमान्य तिलक (टी.) से वाराणसी के ल‍ि‍ए रवाना होगी।  भारतीय रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए वाराणसी जंक्शन से लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच विशेष फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की है। यह निर्णय त्योहारों के मौसम में यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है। रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि यह ट्रेन विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए चलाई जाएगी जो त्योहारों के दौरान अपने घरों की ओर यात्रा करना चाहते हैं। इस विशेष ट्रेन का संचालन 13 अक्टूबर से शुरू होगा और यह 17 नवंबर तक होगा। ट्रेन का समय और मार्ग पहले से निर्धारित किया गया है, जिससे यात्रियों को यात्रा की योजना बनाने में आसानी होगी। इस ट्रेन में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि यात्रियों को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस विशेष ट्रेन के माध्यम से हम त्योहारों के दौरान यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस ट्रेन में आरक्षित सीटों की संख्या सीमित होगी, इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी सीटें पहले से बुक कर लें। इसके लिए रेलवे की वेबसाइट या मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा सकता है। विशेष ट्रेन का मार्ग वाराणसी जंक्शन से शुरू होकर लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक जाएगा। इस ट्रेन में वातानुकूलित श्रेणी की बोगियां होंगी, जिससे सभी वर्ग के यात्रियों को यात्रा करने का अवसर मिलेगा। रेलवे ने यह सुनिश्चित किया है कि ट्रेन की समयबद्धता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। त्योहारों के दौरान यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह विशेष ट्रेन एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित होगी। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए कई अन्य विशेष ट्रेनें भी चलाने की योजना बनाई है, ताकि अधिक से अधिक लोग अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकें। इस प्रकार की पहल से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि रेलवे को भी अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा। इस विशेष ट्रेन के संचालन से संबंधित सभी जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले सभी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर लें। इसके अलावा, रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन करें और कोविड-19 से संबंधित दिशा-निर्देशों का ध्यान रखें। वाराणसी जंक्शन से लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच चलने वाली यह आरक्षित फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन यात्रियों के लिए एक सुखद और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करेगी। रेलवे की इस पहल से त्योहारों के मौसम में यात्रा करना और भी आसान हो जाएगा।