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यूपी पुलिस को नई गाइडलाइन, तलाशी से पहले अनिवार्य होगा गवाह का होना

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में पुलिस व्यवस्था को और जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश के नए DGP (पुलिस प्रमुख) राजीव कृष्ण ने बीते सोमवार को गिरफ्तारी और तलाशी से जुड़े नए नियम लागू किए हैं। यह नियम पूरे राज्य में सभी पुलिस कप्तानों को भेजे गए हैं और इनके सख्त पालन के निर्देश दिए गए हैं। अब CBI और ED की तरह काम करेगी यूपी पुलिस नए नियमों के मुताबिक, अब यूपी पुलिस भी CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों की तर्ज पर गिरफ्तारी और तलाशी का काम करेगी। इसका मतलब है कि अब पुलिस को हर गिरफ्तारी के बारे में पूरी रिपोर्ट बनानी होगी, जिसमें कई जरूरी बातें दर्ज करना अनिवार्य होगा। हर गिरफ्तारी की रिपोर्ट में ये बातें होंगी: – गिरफ्तारी का स्थान और समय – गिरफ्तारी का कारण – अभियुक्त (आरोपी) का बयान – बरामद सामान का पूरा विवरण – मेडिकल जांच की स्थिति – गिरफ्तारी के समय मौजूद दो स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर यह सभी बातें अब लिखित रूप में दर्ज की जाएंगी, जिससे केस की जांच में पारदर्शिता बनी रहे और अदालत में सबूतों की मजबूती हो। बरामद सामान का पूरा रिकॉर्ड जरूरी पुलिस को अब यह भी सुनिश्चित करना होगा कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी से जो भी चीजें बरामद होती हैं, उनका पूरा ब्यौरा लिखित रूप में रिकॉर्ड किया जाए। इससे अदालत में सबूत पेश करने में आसानी होगी और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई तेज हो सकेगी। निर्दोष लोगों को नहीं होगी परेशान इस नई व्यवस्था से निर्दोष लोगों को फंसने से बचाया जा सकेगा। क्योंकि हर कदम पर रिकॉर्ड और गवाह होंगे, जिससे पुलिस की जवाबदेही भी तय होगी। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है तो उसके परिजनों को समय पर पूरी जानकारी दी जाएगी, ताकि तनाव और अफवाहों से बचा जा सके। कितना होगा असर? यह आदेश सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को भेज दिया गया है और उन्हें कहा गया है कि इन नियमों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करें। अब देखने वाली बात यह होगी कि थानों और फील्ड में तैनात पुलिसकर्मी इन बदलावों को कितनी गंभीरता से अपनाते हैं।

स्कूल और कोचिंग संस्थानों पर ताला, प्रयागराज में 7 अगस्त तक बंदी

प्रयागराज जनपद के प्री प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों को सात अगस्त तक के लिए बंद कर दिया गया है। लगातार हो रही बारिश के साथ ही जनपद में बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए प्रयागराज के जिलाधिकारी ने यह निर्देश दिया है।  जिले में भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रयागराज में प्री प्राइमरी से कक्षा-12 तक संचालित समस्त बोर्ड (बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा परिषद, सीबीएसई, आईसीएसई, संस्कृत बोर्ड व अन्य बोर्ड) के सभी विद्यालय सात अगस्त तक के लिए बंद रहेंगे। समस्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बीएसए देवब्रत सिंह ने भी आठवीं तक के सभी विद्यालय बंद रखने का आदेश जारी किया है। बीएसए ने साफ किया है कि परिषदीय शिक्षक वर्क फ्रॉम होम के तहत डीबीटी, यू-डायस प्लस एवं अन्य विभागीय कार्यों का संपादन करना सुनिश्चित करेंगे। साथ ही निर्देशित किया है कि जिन विद्यालयों में जिला प्रशासन ने बाढ़ चौकी व रैन बसेरा बनाया गया है उन विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी अपना सहयोग प्रदान करेंगे। वहीं दूसरी ओर सेंट जोसेफ कॉलेज, सेंट मेरीज कॉन्वेंट, गंगा गुरुकुलम फाफामऊ समेत कई स्कूलों ने सभी अभिभावकों को मैसेज किया है कि पांच से सात अगस्त तक ऑनलाइन कक्षाएं पूर्व निर्धारित समय सारिणी के अनुसार संचालित होंगी।  

कब्जा हटाने के आदेश में आपत्तिजनक भाषा, यूपी अफसर पर कार्रवाई, सीएम योगी का त्वरित एक्शन

लखनऊ  सीएम योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग के एक हालिया आदेश को लेकर कड़ा रुख अपनाया है, जिसमें ग्राम पंचायत की भूमि से अवैध कब्जा हटाने की प्रक्रिया को जाति व धर्म विशेष से जोड़कर निर्देशित किया गया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आदेश को पूर्वाग्रह से प्रेरित और अस्वीकार्य मानते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्देश दिया है. साथ ही इस आदेश के लिए जिम्मेदार संयुक्त निदेशक (पंचायती राज) सुरेंद्र नाथ सिंह को निलंबित कर दिया गया है. पंचायती राज विभाग की ओर से जारी यह पत्र प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों, मंडलीय उपनिदेशकों और जिला पंचायत राज अधिकारियों को भेजा गया था. इसमें प्रदेश की 57,000 से अधिक ग्राम पंचायतों की सार्वजनिक भूमि, जैसे कि ग्राम सभा की भूमि, पोखरे, खलिहान, खाद गड्ढे, श्मशान भूमि आदि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का निर्देश दिया गया था. हालांकि, पत्र की भाषा में विशेष रूप से यादव जाति और मुस्लिम धर्म के लोगों द्वारा किए गए कथित कब्जे का उल्लेख किया गया, जिसे लेकर कई स्तरों पर आपत्ति दर्ज की गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित आदेश को न केवल संविधान की भावना के विरुद्ध बताया, बल्कि यह भी कहा कि सरकारी नीतियां किसी भी समुदाय या वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह से प्रेरित नहीं हो सकतीं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कानून का शासन सभी के लिए समान रूप से लागू होता है और किसी भी प्रकार की कार्रवाई पूरी तरह से तथ्यों, साक्ष्यों और नियमों के अनुसार होनी चाहिए न कि जातिगत या धार्मिक पहचान के आधार पर. सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि भविष्य में इस प्रकार की भाषा, जो सामाजिक समरसता को प्रभावित कर सकती है, का प्रयोग किसी भी सरकारी पत्राचार में न किया जाए. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह चेतावनी भी दी है कि शासन की ओर से कोई भी निर्णय लेते समय संवैधानिक मूल्यों, निष्पक्षता और प्रशासनिक मर्यादा का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए.

‘साड़ी गुरु’ बनी यूपी पुलिसवाली, विदेशी महिलाओं को सिखाई भारतीय परंपरा

आगरा  ताजमहल का पश्चिमी गेट. पर्यटकों की भीड़, संगमरमर की चमक, और उसके बीच नीली-गुलाबी साड़ी में इटली से आईं दो महिलाएं एलिसिया और ब्रूना. हवा तेज़ थी, साड़ी उड़ रही थी. पल्लू बार-बार नीचे गिर रहा था. उन्होंने कई बार कोशिश की, प्लेट्स बनाईं, लेकिन साड़ी सही नहीं हो रही थी. आसपास मौजूद लोग वीडियो बनाने , लोग लेकिन किसी ने पास आकर मदद नहीं की. तभी सामने आई यूपी पुलिस की महिला सिपाही लक्ष्मी देवी. लक्ष्मी न तो घबराईं, न झिझक दिखी. एक प्यारी-सी मुस्कान के साथ उन्होंने कहा May I help you? इसके बाद शुरू हुआ वो लम्हा, जो उन दोनों विदेशी मेहमानों की पूरी इंडिया ट्रिप का सबसे यादगार हिस्सा बन गया. लक्ष्मी देवी ने बड़े ही आत्मीय ढंग से दोनों की साड़ी संभाली. प्लेट्स बनाईं, पल्लू को सलीके से कंधे पर टिकाया और उन्हें सिखाया कि चलना कैसे है, बैठना कैसे है ताकि साड़ी पैर में न आए, और पूरे वक्त आरामदायक भी रहे. दोनों ने खूब सवाल भी किए  एलिसिया ने पूछा, आप रोज साड़ी पहनती हैं इस पर लक्ष्मी मुस्कराईं और कहा कि त्योहारों पर, घर में, और कभी-कभी ड्यूटी पर भी. हमारी वर्दी में भी साड़ी होती है. लक्ष्मी ने जब बताया कि पल्लू का मतलब गरिमा से है, और प्लेट्स अनुशासन की तरह होती हैं तो एलिसिया और ब्रूना की आंखों में जिज्ञासा और सम्मान साथ दिखा. ब्रूना ने कहा कि अब समझ में आया, भारतीय महिलाएं साड़ी में इतनी सहज और सुंदर कैसे लगती हैं. यह कपड़ा नहीं, एक संस्कृति है. लोग देखते रहे, पर लक्ष्मी ने जो किया, वो दिल छू गया इस पूरी प्रक्रिया को कोई रिकॉर्ड कर रहा हो या नहीं, फर्क नहीं पड़ता. जो दृश्य था, वो सीधे विदेशी मेहमानों के दिल में दर्ज हो चुका था. ताजमहल की छाया में, दो विदेशी सैलानी और एक भारतीय महिला पुलिसकर्मी तीनों के बीच भाषा अलग थी, लेकिन भाव और सम्मान एकदम एक से. सिर्फ स्मारक नहीं, अनुभव था ये एलिसिया और ब्रूना भारत भ्रमण पर थीं. दिल्ली देख चुकी थीं, अब आगरा आईं और आगे उनका रुख जयपुर की ओर था. लेकिन उनके मुताबिक, “ताजमहल सुंदर है, लेकिन हमें जो सबसे प्यारा अनुभव मिला, वो लक्ष्मी के साथ था. लक्ष्मी देवी ने इस पूरी घटना पर कहा, मैंने वही किया जो मेरी मां करतीं, मेरी बहन करतीं, या कोई भारतीय महिला करती. साड़ी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और वो हमारी मेहमान हैं. आखिर में एलिसिया ने कहा Thank you, Lakshmi.

बारिश का कहर बरसेगा अगले 24 घंटे, इन जिलों में अलर्ट जारी

लखनऊ यूपी में मानसून ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। इसका असर यह हुआ है कि राज्य के कई जिले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 4 अगस्त को भी तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा और कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी यूपी में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का अनुमान मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग सभी इलाकों में आज गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। वहीं, पूर्वी यूपी के भी कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। कुछ जिलों में तो भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट – बहुत भारी बारिश की चेतावनी इन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और वज्रपात (बिजली गिरने) का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है: मथुरा, हाथरस, आगरा, संभल, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर। इन इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। इन जिलों में येलो अलर्ट – भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना कुछ जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, यानी यहां भी भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका है: नोएडा, गाजियाबाद, बागपत, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, कानपुर, उन्नाव, लखनऊ, हरदोई, बाराबंकी, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी, महाराजगंज, संत कबीर नगर, बस्ती। इन जिलों में सामान्य बारिश की संभावना इन जिलों में आज कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है: ललितपुर, झांसी, हमीरपुर, महोबा, बांदा, फतेहपुर, चित्रकूट, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ, देवरिया, बलिया, चंदौली, प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी, कुशीनगर, गाजीपुर, वाराणसी। बाढ़ से बिगड़े हालात, रेस्क्यू जारी लगातार बारिश से प्रदेश के 17 से ज्यादा जिलों में बाढ़ की स्थिति बन गई है। गंगा, यमुना और अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच चुका है। इससे सैकड़ों गांवों में पानी भर गया है और कई इलाकों का संपर्क बाकी दुनिया से कट गया है।प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज़ कर दिए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और उन्हें जरूरी दवाएं और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही हैं। तापमान में मामूली गिरावट की संभावना मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन उसके बाद तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। क्या करें, क्या न करें:     अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें     बाढ़ प्रभावित इलाकों से दूर रहें     बच्चों और बुज़ुर्गों को विशेष सावधानी में रखें     बिजली गिरने के समय खुले स्थानों से बचें     प्रशासन की चेतावनियों और निर्देशों का पालन करें  

अखिलेश का बीजेपी पर बड़ा वार: ‘सांसद लेता है कमीशन, उसके बाद नंबर आता है विधायक का

लखनऊ सपा मुखिया अखिलेश यादव ने खस्ताहाल सड़को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार नहीं भ्रष्टाचार का सहकार है। इसीलिए भाजपा राज में सड़के धंस रही हैं, पुल गिर रहे हैं, छते टपक रही हैं, पानी की टंकियाँ धराशायी हो रही हैं। भाजपाई भ्रष्टाचार का कमाल देखिए अखिलेश ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि भाजपा का कुकर्म, धर्म में भी अधर्म! महाकुंभ में प्रयागराज में हजारों करोड़ों की लागत से बनी सड़कों का हाल देखिए, भाजपाई भ्रष्टाचार का कमाल देखिए। दरअसल इस भाजपाई महाभ्रष्टाचार की बंदरबाँट को समझने के लिए विशेष ‘भाजपाई करप्शन क्रोनोलॉजी’ (BCC) समझनी होगी। महाकमीशन लेकर ‘प्रधान ठेका’ दिया जाता है अखिलेश ने आगे कहा कि पहले महाकमीशन लेकर ‘प्रधान ठेका’ दिया जाता है। फिर बड़ा कमीशन लेकर ‘मुख्य ठेका’ दिया जाता है। फिर मोटा कमीशन लेकर ‘उप ठेका’ दिया जाता है और उसके बाद भाजपाई सांसद का कमीशन का खेला चलता है, उसके बाद विधायक जी का… इसीलिए भाजपा राज में सड़के धंस रही हैं, पुल गिर रहे हैं, छते टपक रही हैं, पानी की टंकियाँ धराशायी हो रही हैं। भाजपा सरकार नहीं, भ्रष्टाचार का सहकार है।

UP में शराब की दुकान खोलने का क्रेज, एक ठेके के लिए 265 आवेदन – ये हैं लाइसेंस के नियम और फायदे

लखनऊ  देश में शराब की बिक्री लगातार बढ़ रही है, राज्य सरकारों की इससे झोली भरती है, अप्लीकेशन फीस, लाइसेंस चार्ज और फिर हर बोतल पर कमीशन यानी TAX से सरकार को मोटी कमाई होती है. राज्य सरकारें अपने हिसाब से आबकारी नीतियों पर बदलाव करती रहती हैं, ताकि पारदर्शिता के साथ-साथ सरकार की आय भी बढ़ती रहे.   इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों के साथ लागू की गई है. उत्तर प्रदेश सरकार की मानें तो नई आबकारी नीति 2025-26 का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना, शराब व्यापार में पारदर्शिता लाना और मिलावट को रोकना है. ई-लॉटरी के माध्यम से लाइसेंस आवंटन प्रक्रिया को निष्पक्ष और आसान बनाया गया है.  अगर उत्तर प्रदेश में आप शराब की दुकान का लाइसेंस लेना चाहते हैं तो आपको ऑनलाइन आवेदन करना होगा. इसकी पूरी जानकारी आपको आबकारी विभाग की वेबसाइट या जिला आबकारी विभाग से मिल जाएगी. लाइसेंस के लिए आवेदन उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (www.upexcise.in) पर ऑनलाइन जमा करना होगा.  एक अनुमान के मुताबिक वित्त-वर्ष 2024-25 के दौरान उत्तर प्रदेश में करीब 12533 शराब और बीयर दुकानें थीं. इनमें अंग्रेजी शराब की 6,563 और बीयर की 5970 दुकानें थीं. कंपोजिट दुकानों को लेकर आबकारी विभाग ने अंग्रेजी शराब और बीयर की दुकानों की कुल संख्या 9,362 कर दी है. अब आइए बताते हैं, आप कैसे उत्तर प्रदेश में शराब और बीयर की दुकान खोल सकते हैं…  सरकार का दावा है कि शराब की दुकान का लाइसेंस प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया गया है. उत्तर प्रदेश आबकारी नीति 2025-26 के अनुसार कंपोजिट दुकानों पर अंग्रेजी शराब, बीयर और वाइन की बिक्री एक साथ की जा सकेगी. यानी सूबे में कुल शराब की दुकानों की संख्या में जो कमी आई है, उसकी ये वजह है. पहले अंग्रेजी शराब, बीयर और वाइन की अलग-अलग दुकानें होती थीं, जिसे अब एकसाथ खोलने की अनुमति दे दी गई है, जिससे दुकानों की संख्या घटी है, यानी दुकानें बंद नहीं हुई हैं, विलय कर दिया गया है.   ई-लॉटरी सिस्टम से लाइसेंस का वितरण उत्तर प्रदेश में शराब (देशी, विदेशी, बीयर) और भांग की दुकानों के लाइसेंस अब ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटित किए जा रहे हैं. पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण (रिन्यूवल) इस बार नहीं होगा. हालांकि, वित्तीय वर्ष 2026-27 में लाइसेंस रिन्यूवल का विकल्प उपलब्ध होगा. एक व्यक्ति, फर्म या कंपनी पूरे प्रदेश में अधिकतम दो दुकानों का लाइसेंस प्राप्त कर सकती है. एक व्यक्ति को दो से अधिक दुकानों का लाइसेंस नहीं मिलेगा, जिससे शराब व्यापार में एकाधिकार (मोनोपॉली) को रोका जा सके. कंपोजिट दुकान किसे कहते हैं? इस आर्टिकल में ऊपर कंपोजिट दुकानों का जिक्र है. दरअसल सूबे की सरकार ने पहली बार 'कंपोजिट शॉप्स' का नया विकल्प दिया है. जहां एक ही दुकान पर देशी शराब, विदेशी शराब, बीयर और वाइन बेची जा सकती है. इससे पहले बीयर की दुकानें अलग थीं. अभी भी इन दुकानों पर शराब पीने की अनुमति नहीं होगी. हालांकि ग्राहकों को शराब पीने की सुविधा देने के लिए कंपोजिट दुकानों को मॉडल शॉप में परिवर्तित किया जा सकेगा. इसके लिए अलग से शुल्क देना पड़ेगा. मॉल या मल्टीप्लेक्स में प्रीमियम दुकानें खोलने की अनुमति नहीं है. लेकिन हवाई अड्डों, मेट्रो और रेलवे स्टेशनों पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के साथ खोली जा सकती हैं.  प्रोसेसिंग शुल्क यानी आवदेन शुल्क (ये रकम वापस नहीं की जाएगी): देशी शराब की दुकान: 65,000 रुपये कंपोजिट दुकान: 90,000 रुपये मॉडल शॉप: 1,00,000 रुपये भांग की दुकान: 25,000 रुपये उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में आबकारी नीति 2025-26 के तहत करीब 1,987.19 करोड़ रुपये प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में जमा हुए थे. यह शुल्क गैर-वापसी योग्य है, यानी ये वापस नहीं किए गए. सरकार को केवल अप्लीकेशन से करीब 2000 करोड़ रुपये की कमाई हुई. बता दें, यूपी आबकारी विभाग चार श्रेणियों में 27,308 शराब की दुकानों के लिए ऑनलाइन लॉटरी आयोजित की थी, लॉटरी में 2 लाख से ज्यादा आवेदन आए थे, जिनमें औसतन प्रति दुकान के लिए 15 आवेदक थे. सबसे ज्यादा आवेदन मिश्रित शराब (Composite Liquor) की दुकानों के लिए मिले, ग्रेटर नोएडा में एक दुकान के लिए 265 आवेदन प्राप्त मिले. राज्य में 1 अप्रैल 2025 से नई आबकारी नीति लागू हो गई है.  अगर आप उत्तर प्रदेश में कंपोजिट दुकान के लिए आवेदन करते हैं, तो आपको कुल 90,000 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क या आवेदन शुल्क के तौर जमा करना होगा, और ये किसी भी स्थिति में वापस नहीं किया जाएगा. भले ही आपका आवेदन अस्वीकार हो जाए, आप लॉटरी में चयनित न हों, या आप बाद में प्रक्रिया से हट जाएं. इसलिए नई आबकारी नीति को देखते हुए कह सकते हैं, अब केवल गंभीर आवेदक ही प्रक्रिया में भाग लें, और लाइसेंस मिले या ना मिले आवेदन शुल्क के तौर पर 25 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक चुकाने ही पड़ेंगे.  लाइसेंस पाने की योग्यता  आवेदक कम से कम 21 वर्ष का भारतीय नागरिक होना चाहिए. एक व्यक्ति केवल एक आवेदन कर सकता है, लेकिन विभिन्न दुकानों के लिए आवेदन संभव है. आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड साफ होना चाहिए. परिवार (पति/पत्नी, आश्रित पुत्र, अविवाहित पुत्रियां, आश्रित माता-पिता) के सदस्यों को अलग-अलग आवेदन करने की अनुमति है.  आवेदन के लिए ये दस्तावेज जरूरी- पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी) आयकर रिटर्न (पिछले तीन वर्ष का) शपथ पत्र (ई-लॉटरी आवेदन के साथ) प्रोसेसिंग शुल्क का भुगतान रसीद अन्य दस्तावेज- निवास प्रमाण पत्र और बैंक विवरण.  सभी पात्र आवेदनों की जांच जिला आबकारी अधिकारी द्वारा की जाती है. लॉटरी माध्यम से चयन के बाद आवेदकों को ईमेल और SMS के माध्यम से सूचित किया जाता है. परिणाम आबकारी विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध होते हैं.  नई आबकारी नीति में ये बदलाव भी: – चयन के बाद, लाइसेंस शुल्क (254-260 रुपये प्रति लीटर) और अन्य शुल्क जमा करना होगा. – देशी शराब अब एसेप्टिक ब्रिक पैक (टेट्रा पैक) में उपलब्ध होगी, जिससे मिलावट की संभावना कम होगी.  – सूबे के प्रत्येक जिले में फल आधारित शराब (फ्रूट वाइन) की एक दुकान होगी. मंडल मुख्यालयों पर लाइसेंस शुल्क 50,000 रुपये और अन्य जिला मुख्यालयों पर 30,000 रुपये है.  – सभी दुकानों पर दो CCTV कैमरे और जियो-फेंसिंग अनिवार्य होगी. … Read more

बाढ़ से बेहाल यूपी के 17 जिले, 402 गांव डूबे – राहत के लिए 11 मंत्री पहुंचे ज़मीन पर

कानपुर उत्तर प्रदेश इन दिनों बाढ़ के विकराल संकट से जूझ रहा है. गंगा, यमुना और अन्य नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और इसकी चपेट में अब तक 17 जिलों के 402 गांव आ चुके हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद राहत कार्यों की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है. अब उन्होंने अपने कैबिनेट के 11 मंत्रियों को सीधे ग्राउंड ज़ीरो पर भेजकर बाढ़ राहत की निगरानी का जिम्मा सौंपा है. ये सभी मंत्री प्रभावित जिलों में पहुंच चुके हैं और राहत शिविरों, बांधों और जलभराव वाले गांवों का दौरा कर रहे हैं. 17 जिले बाढ़ की चपेट में, हजारों परिवार विस्थापित राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश के जिन जिलों में बाढ़ का सर्वाधिक असर दिख रहा है, उनमें कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, औरैया, चित्रकूट, बलिया, बांदा, गाज़ीपुर, मीरजापुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जालौन, कानपुर देहात, हमीरपुर, इटावा और फतेहपुर शामिल हैं. इन जिलों की 37 तहसीलों के 402 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी के अनुसार, कुल 84,392 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिनमें से अब तक 47,906 पीड़ितों को राहत सहायता दी जा चुकी है. ये आंकड़े खुद में संकट की गंभीरता को बयां करते हैं. 11 मंत्री पहुंचे मोर्चे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रभावित जिलों की सतत निगरानी के साथ ही अपने मंत्रियों को सीधे फील्ड में भेजा है. इनमें से कई मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में पहुंच चुके हैं और कई वहीं रात्रि विश्राम कर रहे हैं ताकि अगले दिन का दौरा भी निर्बाध रूप से हो सके. वाराणसी शहर दक्षिणी के विधायक एवं पूर्व मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बाढ़ग्रस्त घरों तक स्वयं राहत सामग्री पहुंचाई। यहां जानिए कौन मंत्री किस जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं: – नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ : प्रयागराज –  स्वतंत्र देव सिंह और संजय गंगवार : जालौन – स्वतंत्र देव सिंह और प्रतिभा शुक्ला : औरैया – रामकेश निषाद : हमीरपुर – जयवीर सिंह : आगरा – सुरेश खन्ना : वाराणसी – संजय निषाद : कानपुर देहात -धर्मवीर प्रजापति : इटावा – अजीत पाल : फतेहपुर – दयाशंकर सिंह 'दयालु' : बलिया 47 हजार से अधिक पीड़ितों को पहुंचाई गई मदद सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 493 नावों और मोटरबोट्स की मदद से राहत सामग्री बांटी जा चुकी है. 6,536 खाद्यान्न पैकेट और 76,632 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं. इसके अतिरिक्त, बाढ़ के कारण संकट में आए 2,759 मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है. बाढ़ की वजह से 343 मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से 327 मामलों में पीड़ितों को सहायता राशि दी जा चुकी है. इसके साथ ही 4,015 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हुई है. 905 शरणालयों में 11 हजार से ज्यादा लोग ले रहे हैं आश्रय राज्य सरकार द्वारा बनाए गए 905 बाढ़ शरणालयों में फिलहाल 11,248 लोग अस्थायी रूप से रह रहे हैं. इन स्थानों पर भोजन, पीने का पानी, बिजली, शौचालय और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है. 757 मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगाया गया है, जो शरणार्थियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं. इसके अलावा 1,29,571 क्लोरीन टैबलेट और 37,089 ओआरएस पैकेट वितरित कर बाढ़ के बाद संभावित जलजनित बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है. 500 क्विंटल भूसा और 29 लंगर, मवेशियों और लोगों दोनों की भूख का समाधान प्रभावित इलाकों में सिर्फ इंसानों की नहीं, मवेशियों की भूख का भी ध्यान रखा जा रहा है. अब तक 500 क्विंटल भूसा वितरित किया गया है. वहीं, पीड़ितों को गर्म और पौष्टिक भोजन मिले, इसके लिए 29 लंगर शिविर लगाए गए हैं जो दिन-रात काम कर रहे हैं. इसके अलावा 1,193 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं, जो पूरे समय इलाके की निगरानी कर रही हैं और जरूरत के अनुसार अलर्ट जारी कर रही हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी पीड़ित मदद से वंचित न रह जाए. उनका स्पष्ट संदेश है आपदा राहत में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

सीएम योगी की सौगात: रक्षाबंधन पर बहनों को मिलेगी मुफ्त रोडवेज यात्रा की सुविधा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास पर कानून व्यवस्था अन्य प्रकार की विभागीय समीक्षा को लेकर बैठक कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने त्योहारों के महीनों में मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस बल को विशेष निगरानी करने के लिए निर्देशित किया। मिलावट को लेकर दिए कड़े निर्देेश इस दौरान सीएम योगी ने रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों के मद्देनजर कड़े निर्देश दिए। उन्होंने खाद्यपदार्थों में मिलावट न हो इसके लिए जांच टीमोंं को सक्रिय करने के आदेश दिए। उन्होंने भाई बहन के त्योहार रक्षाबंधन को लेकर बहनों को उपहार दिया है। सीएम योगी अपने सरकारी आवास से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सभी प्रकार की बस सेवाओ को 8 अगस्त की सुबह से लेकर 10 अगस्त की रात्रि 12 बजे तक बसों की निःशुल्क यात्रा की सौगात दिया है। इस दौरान बहनों को एसी और नॉन एसी की सभी बसों जिसमे यूपीएसआरटीसी और उससे अनुबंधित बसों की यात्रा निःशुल्क रहेगी।

भारी बारिश से तबाही: 46 जिलों में अलर्ट, अब तक 9 मौतें, कई शहरों में स्कूल बंद

 लखनऊ यूपी में मानूसन पूरी तरह से सक्रिय है। प्रदेश में नदियों से सटे हुए 17 जिलों में बारिश का कहर है। रविवार को अलग-अलग जिलों में बारिश की वजह से नौ मौतें हुईं। सोमवार की सुबह सीतापुर जिले में दीवार गिरने से दो किशोरियों की मौत हो गई। यह संख्या जोड़ लें तो 24 घंटे में प्रदेश में बारिश से 11 मौतें हो गई है। भारी बारिश को देखते हुए राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वे लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों और राहत विभाग को जरूरी दिशा-निर्देश दे रहे हैं, ताकि राहत कार्यों में कोई कमी न रहे। टीम-11 में शामिल मंत्रियों ने भी बाढ़ प्रभावित जिलों का रविवार को निरीक्षण किया। वर्तमान में प्रदेश के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों की 37 तहसीलें और 402 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ प्रभावित जिलों में कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, औरैया, चित्रकूट, बलिया, बांदा, गाज़ीपुर, मीरजापुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जालौन, कानपुर देहात, हमीरपुर, इटावा और फतेहपुर शामिल हैं। इन सभी जिलों में राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। वहीं एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी के जवान चौबीसो घंटे पेट्रोलिंग कर रहे हैं। राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने बताया कि 17 जिलों में कुल 84392 लोग प्रभावित हैं, जिनमें से 47906 लोगों को राहत सामग्री दी गई है। बाढ़ की वजह से 2759 मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया है। बाढ़ की चपेट में आने से अब तक 343 लोगों के मकानों को नुकसान पहुंचा है। इनमें से 327 लोगों को सहायता राशि मिल चुकी है। प्रदेश में 4015 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल बाढ़ की चपेट में आया है। इन प्रभावित क्षेत्रों में 493 नावों और मोटरबोट की सहायता से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। इन इलाकों में अब तक 6536 खाद्यान्न पैकेट और 76632 लंच पैकेट बांटे गए हैं। 29 लंगरों के जरिये पीड़ितों को भोजन की सुविधा दी जा रही है।    ये मंत्री बाढ़ प्रभावित इलाकों में करेंगे रात्रि विश्राम – नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’- प्रयागराज, मिर्जापुर व बांदा – स्वतंत्र देव सिंह और संजय गंगवार- जालौन – स्वतंत्र देव सिंह और प्रतिभा शुक्ला- औरैया – रामकेश निषाद- हमीरपुर – जयवीर सिंह- आगरा – सुरेश खन्ना- वाराणसी – संजय निषाद- कानपुर देहात – धर्मवीर प्रजापति- इटावा – अजीत पाल-फतेहपुर – दयाशंकर ''दयालु''- बलिया आज 46 जिलों में बारिश का अलर्ट यूपी में मानसून पूरी तरह से प्रभावी है। आज के लिए प्रदेश के तराई और आगरा मंडल के 15 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 31 अन्य जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है और 64 जिलों में गरज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मानसूनी ट्रफ लाइन अभी भी प्रदेश के तराई इलाकों की ओर है। आज तराई व आगरा क्षेत्र में भारी बारिश के आसार हैं। कल रविवार को तराई, पूर्वांचल समेत विभिन्न इलाकों में अच्छी बारिश देखने को मिली। तराई के कई जिलों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। लखीमपुर खीरी और भदोही में सर्वाधिक 120 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं चित्रकूट और प्रतापगढ़ में 110 मिमी, अलीगढ़ में 100 मिमी, वाराणसी, बलिया, प्रयागराज, मिर्जापुर में 90 मिमी बारिश हुई। रविवार की देर शाम गोंडा, बहराइच, सीतापुर, बाराबंकी में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश हुई। यहां है भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, मथुरा, हाथरस, आगरा, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल, बदायूं व आसपास के इलाकों में।   यहां है भारी बारिश का यलो अलर्ट संतकबीरनगर, बस्ती, महाराजगंज, हरदोई, फरुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, अयोध्या, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, जालौन व आसपास के इलाकों में।   लखनऊ सहित कई जिलों में अवकाश लखनऊ में रविवार से हो रही भारी बारिश के चलते एक से लेकर 12वीं तक के सभी बोर्ड के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश पांडेय के द्वारा यह अवकाश घोषित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जो बच्चे स्कूल के लिए रवाना कर दिए गए हैं उन्हें वापस बुला लिया जाए। आदेश के देर से आने से कई स्कूलों के बच्चे रवाना हो गए थे। मालूम हो कि लखनऊ में बारिश रविवार से लगातार हो रही थी। अन्य जिलों में भी अवकाश घोषित लखनऊ के अलावा रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, बहराइच और अंबेडकर नगर में भी अवकाश घोषित किया गया है। डीएम के द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराया जाए।