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लोकभवन में अत्याधुनिक 87 इंटरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: सीएम योगी   लोकभवन में अत्याधुनिक 87 इंटरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीर पुलिसकर्मियों का सम्मान और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया सीएम ने   बंद कमरे में टिप्पणी करना आसान, सुरक्षा हटा दें तो बड़े से बड़े व्यक्ति को भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगती: मुख्यमंत्री   सीएम ने कहा- पुलिस रिफॉर्म लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश, सात पुलिस कमिश्नरेट कर रहे काम   14 लाख से अधिक कैमरों से अपराध पर निगरानी, घटनाओं के खुलासे के साथ रोकथाम में भी मिल रही मदद   यूपी पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र, वीरगति को प्राप्त इंस्पेक्टर सुनील कुमार के परिवार का सम्मान   16 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पदक, 10 को मुख्यमंत्री वीरता पदक लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकार की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के हर जिले में दुर्दांत माफिया का बोलबाला था। समानांतर सरकारें चलती थीं। माफिया के सामने नाक रगड़ी जाती थी, घुटने टेके जाते थे और पुलिस मजबूर थी। राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो वह कानून-व्यवस्था को सीधा कैसे कर सकता है।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लोकभवन सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई, वीर पुलिसकर्मियों को पदक प्रदान किए और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद सरकार ने पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाया। प्रकाश सिंह ने जिस पुलिस रिफॉर्म की वकालत की थी, उसे उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे पहले लागू किया। प्रदेश में अब सात पुलिस कमिश्नरेट काम कर रहे हैं। आज यूपी पुलिस के सामने विचार, वीरता और तकनीक, तीनों का समन्वय दिखाई दे रहा है। ‘संघर्ष’ के माध्यम से पुलिस सेवा के अनुभव और चुनौतियां सामने आई हैं तो जांबाजों की वीरता का सम्मान हुआ है और सड़क सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहन पुलिस बल को समर्पित किए गए हैं। बंद कमरे में बैठकर टिप्पणी करना बेहद आसान मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद कमरे में बैठकर किसी के प्रति कोई भी टिप्पणी करना आसान है। कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसे अपने पद का कितना भी गुरूर हो, सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी। स्वस्थ चिंतन तभी संभव है, जब समाज में सुरक्षा का वातावरण हो। सुरक्षित माहौल में ही समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। यूपी पुलिस की थीम ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ इसी भावना को व्यक्त करती है। जब तराई क्षेत्र आतंकवाद की चपेट में था, तब पुलिस व सेना की सुरक्षा में ही आवागमन संभव था। सूर्यास्त के बाद आवाजाही लगभग बंद हो जाती थी। उस समय डीजीपी के रूप में प्रकाश सिंह ने इन चुनौतियों का सामना किया।  पुलिस सुधारों के लिए प्रकाश सिंह को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। उत्तर प्रदेश ने पुलिस सुधारों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विचार तभी सार्थक, जब व्यवहार में उतरें मुख्यमंत्री ने कहा कि वैचारिकी केवल शब्द या आलेख नहीं होती, बल्कि वह व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों को भी समाहित करती है। प्रकाश सिंह ने अपने सेवाकाल में पग-पग पर इन चुनौतियों का सामना किया और अपनी पूरी सेवा को कुशलतापूर्वक पूरा किया। लंबे समय तक विभिन्न संस्थानों में व्याख्यानों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने वाली उनकी वैचारिकी अब पुस्तक के रूप में सामने आई है। आचार और विचार में जब समन्वय होता है और दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी परिणाम सामने आता है। 2017 से पहले कानून-व्यवस्था थी बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ‘यूपी वाला’ कहकर लोगों को बाहर कर दिया जाता था। पुलिस के सामने भी बड़ी चुनौतियां थीं। राजनीतिक नेतृत्व में स्वयं निर्णय लेने की सामर्थ्य नहीं हो तो कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करना कठिन होता है। तब पुलिस सुधार और अवस्थापना सुविधाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं थी। एक वर्ष में करीब छह हजार पुलिस कार्मिकों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता था। पुलिसकर्मियों को टूटे भवनों में रहना पड़ता था। पीएसी की वाहिनियां समाप्त कर दी गई थीं। कोसीकलां, मेरठ, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई स्थानों पर दंगों के चलते लंबे समय तक कर्फ्यू लगा। इन्हीं परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश को बीमारू कहा जाने लगा। अर्थव्यवस्था, रोजगार, तकनीक और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन सहित विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियां खड़ी थीं। 2017 के बाद इन परिस्थितियों को बदलते हुए प्रदेश को आगे बढ़ाने का काम किया गया। तकनीक बनी आधुनिक पुलिसिंग का आधार सीएम योगी ने कहा कि पुलिस सुधारों के साथ तकनीक का समावेश भी आवश्यक है। सेफ सिटी के लक्ष्य के तहत प्रदेश के शहरों में 14 लाख से अधिक कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे घटनाओं की रोकथाम और उनके अनावरण में भूमिका निभा रहे हैं। जिलों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। विचार और व्यवहार के साथ जब तकनीक जुड़ती है तो उसके परिणाम भी सामने आते हैं। आज यूपी पुलिस की पहचान में यह बदलाव दिखाई देता है। सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस के एसटीएफ से जुड़े जांबाज इंस्पेक्टर स्वर्गीय सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उनकी वीरता के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया है और यूपी पुलिस को पहली बार यह गौरव प्राप्त हुआ है। सुनील कुमार सिंह ने 22 जनवरी, 2025 को आमने-सामने की मुठभेड़ में चार दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया था। इस दौरान वह अपराधियों की गोलियों से गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनका बलिदान हुआ। मुख्यमंत्री ने उनकी धर्मपत्नी एवं परिवार के सदस्यों को सम्मानित करते हुए उनकी स्मृति को नमन किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में 16 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार तथा 10 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को मुख्यमंत्री वीरता पदक से … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना   प्रदेश में अब 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहन, यातायात नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई   आठ माह में सड़क दुर्घटनाओं में सात और मृतकों की संख्या में आठ प्रतिशत की कमी   75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों में 801 विशेष टीमें कर रहीं निगरानी    लखनऊ  सड़क हादसों में कमी लाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के बेड़े में गुरुवार को 87 नए इंटरसेप्टर वाहन शामिल हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही प्रदेश में इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या बढ़कर 172 हो गई है। इनमें 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया वाहन हैं।   नए इंटरसेप्टर वाहनों से तेज रफ्तार, नशे में वाहन चलाने, काली फिल्म, प्रेशर हॉर्न और रैश ड्राइविंग जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई में मदद मिलेगी। इनमें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर, टिंट मीटर और डेसिबल मीटर जैसे उपकरण हैं। जरूरत पड़ने पर इन वाहनों का इस्तेमाल ट्रैफिक रिस्पॉन्स व्हीकल के रूप में भी किया जा सकेगा।   700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों पर नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में शुरू की गई जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) योजना सभी 75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। इसके तहत 801 विशेष टीमों में करीब 3,500 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। ये टीमें क्रिटिकल कॉरिडोर और ब्लैक स्पॉट पर नियमित पेट्रोलिंग, निगरानी और यातायात नियमों का पालन करा रही हैं।   पिछले आठ माह में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में करीब सात प्रतिशत और मृतकों की संख्या में करीब आठ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में करीब 1,107 लोगों की जान बचाई गई।   109 मार्गों पर रियल टाइम निगरानी शहरों में जाम की समस्या से निपटने के लिए RTC योजना के तहत 20 प्रमुख जिलों के 109 मार्गों की UP GATI प्लेटफॉर्म से रियल टाइम निगरानी की जा रही है। रूट मार्शल और संबंधित विभाग जाम के कारणों की पहचान कर मौके पर कार्रवाई करते हैं। मार्च 2026 में इन मार्गों पर 16,723 कंजेशन पॉइंट दर्ज किए गए थे, जो अगस्त तक घटकर 8,569 रह गए। इस तरह करीब 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।   कैमरों से निगरानी, नियम तोड़ने पर ई-चालान यातायात व्यवस्था की निगरानी के लिए ITMS और Safe City कैमरा नेटवर्क की भी मदद ली जा रही है। ANPR के साथ रेड लाइट और गति सीमा के उल्लंघन की पहचान करने वाले कैमरों तथा कमांड सेंटर की लाइव फीड से यातायात पर नजर रखी जाती है। जरूरत पड़ने पर जाम और भीड़ वाले इलाकों में ड्रोन से भी निगरानी की जाती है। कैमरों और फील्ड टीमों से मिली जानकारी के आधार पर नियम तोड़ने वालों के ई-चालान के साथ मौके पर भी कार्रवाई की जा रही है।

अदम्य साहस दिखाने वाले पुलिसकर्मियों को CM योगी ने किया सम्मानित, ‘संघर्ष’ पुस्तक का विमोचन

अदम्य साहस व कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया सीएम योगी ने वीरता पदक से अलंकृत किया पुलिसकर्मियों को, शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की पत्नी को किया सम्मानित यूपी के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया मुख्यमंत्री ने लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  अदम्य साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को वीरता पदक प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया।  पुलिस सेवा में सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने एसटीएफ के शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की पत्नी मुनेश देवी को नगद धनराशि एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। निरीक्षक सुनील कुमार ने 20 जनवरी 2025 को शामली के झिंझाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में चार अपराधियों को मार गिराने में अदम्य साहस का परिचय दिया था। कर्तव्य पालन करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की थी। स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने की घोषणा भी की गई। गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर घोषित वीरता पदक 1. देवदत्त सिंह – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 2. राजन कुमार – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 3. रितुल कुमार वर्मा – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 4. निपुण अग्रवाल, आईपीएस – सेनानायक, नवमी वाहिनी पीएसी, मुरादाबाद 5. स्वतंत्र कुमार सिंह – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर 6. मुन्ने सिंह – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, मेरठ 7. नीरज कुमार पाल – आरक्षी, नागरिक पुलिस, कमिश्नरेट गाजियाबाद 8. अशोक कुमार मीणा, आईपीएस – पुलिस अधीक्षक, हरदोई 9. कुलदीप कुमार – पुलिस उपाधीक्षक, जनपद संभल 10. गीतेश कपिल – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, शाहजहांपुर 11. प्रवीण अहलावत – आरक्षी, नागरिक पुलिस, जनपद सहारनपुर 12. अमित – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 13. अंगद सिंह यादव – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 14. डॉ. दीक्षा शर्मा – पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट लखनऊ 15. संदीप कुमार – आरक्षी, नागरिक पुलिस, कमिश्नरेट गाजियाबाद 16. रिपुदमन सिंह – निरीक्षक, नागरिक पुलिस गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर घोषित वीरता पदक 1. धर्मेंद्र सिंह राठौर – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, बुलंदशहर 2. केशव शांडिल्य – उपनिरीक्षक, एसटीएफ 3. राहुल कुमार – मुख्य आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 4. अजय कुमार वर्मा – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, जनपद मथुरा 5. घनश्याम यादव – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 6. अवनीश कुमार त्यागी – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, जनपद मैनपुरी 7. अमित त्रिपाठी – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 8. अमित – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 9. मनीष बिष्ट – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, कमिश्नरेट गाजियाबाद 10. रणधीर सिंह – मुख्य आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ

इंडी गठबंधन की बैठक में नहीं पहुंचे अखिलेश तो राजभर ने राहुल से पूछा- ‘डिंपल या धर्मेंद्र को क्यों नहीं भेजा?’

‘अखिलेश से पूछिए, इंडी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए?’, ओपी राजभर का राहुल गांधी पर सीधा हमला इंडी गठबंधन की बैठक में नहीं पहुंचे अखिलेश तो राजभर ने राहुल से पूछा- ‘डिंपल या धर्मेंद्र को क्यों नहीं भेजा?’ ‘अखिलेश ऑनलाइन भी जुड़ सकते थे’, इंडी गठबंधन की बैठक से दूरी पर राजभर ने घेरा 'अखिलेश खुद नहीं गए तो डिंपल या धर्मेंद्र को भेज देते', इंडी गठबंधन की बैठक को लेकर राजभर का तीखा हमला ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के आरोपों को लेकर राजभर का राहुल पर हमला- ‘पहले चुनावों का इतिहास देखिए’ ओपी राजभर की राहुल गांधी को नसीहत- ‘ज्ञानेश कुमार पर ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय जनता के बीच जाइए’ ‘आरोप-आरोप खेलते रहिए, आपस में लड़ते रहिए’, राहुल गांधी पर ओपी राजभर का तीखा हमला लखनऊ सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए हैं। राजभर ने कहा कि राहुल गांधी ने इंडी गठबंधन की बैठक की, लेकिन अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि अपने दोस्त अखिलेश यादव से पूछिए कि वह ऐसा कौन सा काम कर रहे थे कि बैठक में नहीं आ सके। '6 अक्टूबर तक नामांकन था, कल ही जाने की क्या जल्दी थी' ओपी राजभर ने कहा कि राज्यसभा का नामांकन 6 अक्टूबर तक होना है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि अखिलेश यादव के लिए पहले ही नामांकन करने की ऐसी क्या जल्दी थी। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि मान लिया कि उस दिन नामांकन नहीं होता तो अखिलेश यादव के लिए पहाड़ टूट जाता, लेकिन अगर खुद नहीं जाना था तो डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव को क्यों नहीं भेजा गया। राजभर ने कहा कि डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव भी नामांकन में नहीं थे। उन्होंने आगे सवाल उठाया कि अगर नामांकन इतना जरूरी था और अखिलेश यादव खुद नहीं आ सकते थे तो वह ऑनलाइन भी इंडी गठबंधन की बैठक से जुड़ सकते थे। 'अखिलेश एसी में बैठक पीसी करके ठहाके लगा रहे थे' राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि जब राहुल गांधी दिल्ली में बैठक कर रहे थे, तब अखिलेश यादव ‘एसी में बैठक पीसी करके ठहाके लगा रहे थे।’ उन्होंने कहा कि कई नेता ऑनलाइन बैठक में जुड़े थे, ऐसे में अखिलेश यादव भी ऑनलाइन जुड़ सकते थे। ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं और बीजेपी के चुनावी इतिहास को देखा जाना चाहिए कि उनके पहले बीजेपी कितने चुनाव जीत चुकी है। राजभर ने कांग्रेस नेता अभिजीत दीपके के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वह कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी को हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली जिता दिया। राजभर ने कहा कि उन्हें बताया जाना चाहिए कि इन तीनों राज्यों में चुनाव ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले हो चुका था। उन्होंने अपने पोस्ट में 2014, 2019 और 2024 में बीजेपी की जीत का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे। 'ज्ञानेश कुमार पर ऊर्जा बर्बाद करने की जगह जनता के बीच जाइए' ओपी राजभर ने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार पर अपनी ऊर्जा बर्बाद करने की जगह जनता के बीच जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के बीच जाने पर ही जीत की कुछ संभावना बनेगी। राजभर ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो विपक्ष आरोप-आरोप का खेल खेलता रहेगा, आपस में लड़ता रहेगा और विपक्ष में बैठे रहने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा।

सिविल कोर्ट में अब बिना C.O.P. ड्रेस एंट्री नहीं, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

 रायबरेली उत्तर प्रदेश के रायबरेली सिविल कोर्ट परिसर में वकीलों की पहचान और अनुशासन को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाया है। एसोसिएशन की ओर से जारी सूचना में बिना सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (C.O.P.) के वकीलों की निर्धारित ड्रेस में कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों को चेतावनी दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विधिक कार्रवाई की बात कही गई है। सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र यादव और महामंत्री संजय प्रताप सिंह 'कछवाह' की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि जिन लोगों के पास सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (C.O.P.) नहीं है, वे वकीलों की निर्धारित पोशाक पहनकर न्यायालय परिसर में प्रवेश न करें। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। फर्जी वकीलों पर कार्रवाई को लेकर सख्ती बार एसोसिएशन के इस कदम को कोर्ट परिसर में वकीलों की पहचान और पेशेवर अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। एसोसिएशन की ओर से जारी चेतावनी के बाद ऐसे लोगों पर निगरानी बढ़ने की संभावना है, जो बिना वैध दस्तावेजों के खुद को अधिवक्ता के तौर पर पेश करते हैं। कोर्ट परिसर में आने वाले लोगों के लिए अधिवक्ता की पहचान और वैध दस्तावेजों को लेकर स्पष्टता बनाए रखना इस तरह के निर्देशों का प्रमुख उद्देश्य है।  कचहरी परिसर में चर्चा का विषय बना नोटिस सेंट्रल बार एसोसिएशन की ओर से जारी सख्त सूचना के बाद रायबरेली कचहरी परिसर में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। नोटिस में नियमों के पालन पर जोर देते हुए स्पष्ट किया गया है कि कोर्ट परिसर में अधिवक्ता की निर्धारित ड्रेस का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप ही किया जाए। एसोसिएशन के इस कदम से न्यायालय परिसर में पेशेवर पहचान और अनुशासन को लेकर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। नियम तोड़ने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी एसोसिएशन ने अपने निर्देश में साफ किया है कि C.O.P. के बिना निर्धारित अधिवक्ता ड्रेस में कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जा सकती है। अब इस निर्देश के लागू होने के बाद कोर्ट परिसर में ऐसे लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई किस तरह की जाती है, इस पर नजर रहेगी।

मंदिर में दो साधुओं की दर्दनाक मौत, तख्त से बांधकर जलाने का आरोप

 शाहजहांपुर यूपी के शाहजहांपुर से रात दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। गांव के पश्चिम में स्थित हनुमान मंदिर में रहकर पूजा-पाठ करने वाले दो वृद्धों की तख्त से बांधकर जिंदा जला देने से मौत हो गई। वारदात रात करीब एक बजे की बताई जा रही है। मृतकों की पहचान गोपाल दास और बड़े दास के रूप में हुई है। बड़े दास दिव्यांग बताए गए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मंदिर की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद में सुमित सिंह नाम के युवक पर दोनों वृद्धों के साथ मारपीट करने, उन्हें अलग-अलग तख्त से बांधने और मंदिर परिसर और आसपास से लकड़ियां जुटाकर आग लगाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि मंदिर सुमित के परिवार की जमीन पर बना है और वह उस पर कब्जा करना चाहता था। दोनों वृद्ध मंदिर में रहकर पूजा-पाठ करने के साथ उसकी देखभाल भी करते थे। इसी बात को लेकर पहले से विवाद होने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि बुधवार रात सुमित गांव में घूमते हुए पहले काल सिंह स्थान पर पहुंचा और वहां लाइट तोड़ने के बाद हनुमान मंदिर गया। यहां दोनों वृद्धों से उसका विवाद हुआ। इसके बाद उसने कथित तौर पर दोनों के साथ मारपीट की और उन्हें तख्त से बांधकर आग लगा दी। आग में झुलसने से दोनों की मौत हो गई। दो महीने पहले जेल से छूटकर आया था आरोपी ग्रामीणों के मुताबिक, आरोपी सुमित सिंह करीब दो महीने पहले जेल से छूटकर आया था। उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और कार जलाने समेत कई मामलों में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी है। उस पर पूर्व में आगजनी की घटनाओं में शामिल रहने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। बताया जा रहा है कि उसके पिता का नाम भी हिस्ट्रीशीटर के रूप में सामने आता रहा है। हालांकि, आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और वारदात के पीछे की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। दो वृद्धों को मंदिर परिसर में बांधकर जिंदा जलाने की घटना से गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वारदात में इस्तेमाल किए गए तरीके, जमीन के विवाद की पृष्ठभूमि और आरोपी की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। मंदिर की जमीन को लेकर पुराना विवाद गांव के पश्चिम में स्थित हनुमान मंदिर में दोनों वृद्ध लंबे समय से रहकर पूजा-पाठ और देखभाल करते थे। बताया जा रहा है कि मंदिर सुमित के परिवार की जमीन पर बना है। इसी जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि विवाद की तत्काल वजह क्या थी और वारदात से पहले आरोपियों व मृतकों के बीच क्या हुआ। दो महीने पहले जेल से छूटने की जानकारी ग्रामीणों के अनुसार, सुमित सिंह करीब दो महीने पहले जेल से बाहर आया था। उसके खिलाफ कार जलाने और एससी-एसटी एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी गई है। उस पर पहले भी आगजनी की घटनाओं में शामिल रहने के आरोप हैं।

महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर CM योगी बोले- निश्छल भाव से करें समाज सेवा

गोरखपुर गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने उनके जीवन और आदर्शों को याद किया।  आयोजित समारोह में सीएम योगी ने कहा कि जिस महापुरुष या आराध्य का हम गुणगान करते हैं, उसके आदर्शों के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास भी करना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने भगवान शिव का उदाहरण देते हुए कहा कि विषम और सम परिस्थितियों में खुद को एक समान रखते हुए निश्छल भाव से समाज और लोक कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने विषम परिस्थितियों में विष को अपने कंठ में धारण किया, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। शिवत्व का अर्थ समाज और लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना सीएम योगी ने कहा कि समाज की विसंगतियों को अपने भीतर समाहित कर समाज और लोक कल्याण के लिए आदर्श स्थापित करना ही शिवत्व है। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने लक्ष्य और कर्तव्य के प्रति स्थिर रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज और महंत अवेद्यनाथ महाराज की पुण्यस्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि दोनों संतों के जीवन से स्थिरता और संकल्प की प्रेरणा मिलती है।  महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ के जीवन से मिलती है प्रेरणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीवन में सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र स्थिरता है। स्थिरता का भाव व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि दोनों संतों के जीवन चरित्र का अध्ययन करने पर समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने महंत अवेद्यनाथ के जीवन को उनके गुरु महंत दिग्विजयनाथ के आदर्शों और मूल्यों का विस्तार बताया। साथ ही कहा कि समाज में जब विसंगतियां पैदा होती हैं तो उनका परिमार्जन करने का सामर्थ्य समाज में होना चाहिए। गोरक्षपीठ में सात दिवसीय श्रद्धांजलि समारोह का समापन गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 24 से 30 सितंबर तक साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। इसके अंतिम दिन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा हुई। कार्यक्रम में देशभर से संत-धर्माचार्यों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी सहभागिता की। समारोह के दौरान महंतद्वय के सामाजिक, धार्मिक और लोक कल्याण से जुड़े कार्यों को याद किया गया।

सीएम योगी गुरुवार को 87 इंटरसेप्टर वाहनों को दिखाएंगे हरी झंडी

सीएम योगी गुरुवार को 87 इंटरसेप्टर वाहनों को दिखाएंगे हरी झंडी पुलिसकर्मियों का होगा पदक अलंकरण, 'संघर्ष' पुस्तक का भी होगा विमोचन लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यमंत्री असीम अरुण भी रहेंगे मौजूद लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार, 1 अक्टूबर को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में अत्याधुनिक उपकरणों से लैस 87 इंटरसेप्टर वाहनों का फ्लैग ऑफ करेंगे। इनमें चारपहिया और दोपहिया वाहन शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुलिसकर्मियों का पदक अलंकरण भी करेंगे।  इस दौरान मुख्यमंत्री योगी पुलिस सुधारों पर आधारित पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी करेंगे। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण भी मौजूद रहेंगे।

UP के 1,565 PM श्री स्कूलों में बदलेगा शिक्षा का परिवेश, अभिभावक-ग्राम समुदाय की होगी भागीदारी

योगी सरकार में 1,565 पीएम श्री स्कूलों में विद्यालय, अभिभावक और ग्राम समुदाय मिलकर गढ़ेंगे शिक्षा का नया परिवेश – नवंबर में होगा विशेष आयोजन, विद्यालय, अभिभावक और ग्राम समुदाय की सहभागिता से बच्चों को मिलेगा समृद्ध शैक्षिक परिवेश – रैली, प्रभातफेरी, नाटक, कहानी-वाचन, खेल एवं पोस्टर प्रदर्शनी जैसी गतिविधियों से सजेगा ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ – बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ उत्कृष्ट विद्यार्थियों का होगा सम्मान – कक्षा 5, 8 और 10 के विद्यार्थियों को क्रमशः अगली कक्षाओं में नामांकन के लिए किया जाएगा प्रोत्साहित – 1,565 पीएम श्री विद्यालयों के लिए कुल ₹46.95 लाख का वित्तीय प्रावधान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के पीएम श्री स्कूलों को शिक्षा के साथ जनभागीदारी और सामुदायिक सहभागिता के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। प्रदेश के 1,565 पीएम श्री स्कूलों में नवंबर में ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम का विशेष आयोजन किया जाएगा। ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ आयोजन के लिए 1,565 पीएम श्री स्कूलों के लिए कुल ₹46.95 लाख की वित्तीय सीमा निर्धारित की गई है।  ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम के माध्यम से पीएम श्री स्कूलों को स्थानीय समुदाय से जोड़ने, अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने और बच्चों की प्रतिभा को मंच देने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यालय, परिवार और ग्राम समुदाय की साझेदारी से तैयार यह पहल बच्चों की शिक्षा को सामाजिक सहयोग से जोड़ते हुए पीएम श्री स्कूलों को स्थानीय स्तर पर सीखने, सहभागिता और विकास के केंद्र के रूप में और भी सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  विद्यालय और समुदाय की साझेदारी को मिलेगा नया आयाम ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालय को उसके सामाजिक परिवेश से जोड़ते हुए अभिभावकों, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों, शिक्षकों और अन्य स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इन्हें एक साझा मंच पर लाकर बच्चों की शिक्षा, नामांकन, ठहराव और सीखने की प्रक्रिया को और अधिक समृद्ध बनाया जाएगा। इस दौरान समुदाय को विद्यालय की गतिविधियों तथा समग्र शिक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी।  रैली से खेल तक, बच्चों की प्रतिभा को मिलेगा मंच इस दौरान रैली/ प्रभातफेरी, नाटक एवं कहानी-वाचन, पोस्टर एवं कलाकृतियों की प्रदर्शनी तथा खेल प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियां होंगी। इसके साथ हस्ताक्षर अभियान और सेल्फी प्वाइंट जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों, अभिभावकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में विद्यालय के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किए जाने का भी प्रावधान है, जिससे बच्चों में उपलब्धि के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास को प्रोत्साहन मिलेगा।  बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश आयोजन में बाल अधिकारों के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा। इसके माध्यम से अभिभावकों और ग्राम समुदाय को बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए उनकी शिक्षा और संरक्षण के प्रति सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाया जाएगा।  कोट: “पीएम श्री स्कूलों को समुदाय से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालय, अभिभावक और ग्राम समुदाय मिलकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेंगे।” संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा कोट: “विद्यालय और समुदाय की सहभागिता से बच्चों की शिक्षा को नई ऊर्जा मिलेगी। ‘मेरा गांव–मेरा विद्यालय’ कार्यक्रम में गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा, सीखने और आगे बढ़ने के अवसरों को प्रोत्साहित किया जाएगा।” मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

योगी सरकार में युवाओं के लिए सरकारी सेवाओं के बढ़े अवसर, 520 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को सरकारी सेवाओं से जोड़ने और विभिन्न विभागों में मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में लगातार भर्ती प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने खेल एवं युवा कल्याण से जुड़े कुल 520 पदों पर चयन के लिए दो अलग-अलग मुख्य परीक्षाओं के विज्ञापन जारी किए हैं। इनमें खेल निदेशालय के 108 पद तथा क्षेत्रीय युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी एवं व्यायाम प्रशिक्षक के 412 पद शामिल हैं। दोनों भर्तियों के लिए अभ्यर्थियों का चयन प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा-2025 (पीईटी-2025) के नार्मलाइज्ड स्कोर के आधार पर मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्टिंग के बाद किया जाएगा। खेल निदेशालय में 108 पदों पर भर्ती आयोग ने विज्ञापन संख्या 22-परीक्षा/2026, खेल निदेशालय मुख्य परीक्षा (प्रा0अ0प0-2025)/22 जारी किया है। इसके तहत विभिन्न प्रकार के कुल 108 रिक्त पदों पर चयन किया जाएगा। विज्ञापन 30 सितंबर 2026 को प्रकाशित किया गया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया 14 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थी 4 नवंबर 2026 तक पंजीकरण, शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा कर सकेंगे। शुल्क समायोजन एवं आवेदन में अनुमन्य संशोधन की अंतिम तिथि 11 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। युवा कल्याण एवं व्यायाम प्रशिक्षक के 412 पद विज्ञापन संख्या 23-परीक्षा/2026, क्षेत्रीय युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी तथा व्यायाम प्रशिक्षक मुख्य परीक्षा (प्रा0अ0प0-2025)/23 के तहत कुल 412 पदों पर भर्ती होगी। इनमें क्षेत्रीय युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी के 368 पद तथा व्यायाम प्रशिक्षक के 44 पद शामिल हैं। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 16 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। आवेदन, पंजीकरण एवं शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 6 नवंबर 2026 है, जबकि शुल्क समायोजन एवं आवेदन में अनुमन्य संशोधन की अंतिम तिथि 13 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। पीईटी-2025 में शामिल अभ्यर्थी ही कर सकेंगे आवेदन दोनों मुख्य परीक्षाओं के लिए वही अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने संबंधित पद की अनिवार्य अर्हता पूरी करने के साथ पीईटी-2025 में प्रतिभाग किया हो और आयोग द्वारा उन्हें स्कोर कार्ड जारी किया गया हो। मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों की शॉर्टलिस्टिंग पीईटी-2025 के नार्मलाइज्ड स्कोर के आधार पर मेरिट के अनुसार की जाएगी। शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को ही मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। आयोग के अनुसार पीईटी-2025 में वास्तविक अथवा नार्मलाइज्ड स्कोर में शून्य या उससे कम/नकारात्मक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किया जाएगा। यूआई और प्रोविजनल अभ्यर्थियों के लिए भी प्रावधान पीईटी-2025 के परिणाम में आयोग स्तर से अंडर इन्वेस्टिगेशन (यूआई) और प्रोविजनल के रूप में चिन्हित अभ्यर्थियों को भी संबंधित मुख्य परीक्षाओं में आवेदन की औपबंधिक अनुमति दी गई है। हालांकि, ऐसे अभ्यर्थियों की मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्टिंग और चयन संबंधी आगे की कार्यवाही आयोग द्वारा की जा रही जांच के परिणाम एवं अंतिम निर्णय के अधीन होगी। समयसीमा का रखें विशेष ध्यान आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अंतिम तिथियों के बाद आवेदन या शुल्क स्वीकार नहीं किया जाएगा। अभ्यर्थियों को बैंक द्वारा शुल्क समायोजन की प्रक्रिया भी निर्धारित समयसीमा में पूरी करनी होगी। शुल्क समायोजन के बाद ही आवेदन पत्र का प्रिंटआउट निकाला जा सकेगा। दोनों विज्ञापनों में आवेदन के दौरान अनुमन्य विवरण में संशोधन के लिए अलग से समय दिया गया है।