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मुख्यमंत्री योगी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि का निर्णय

मुख्यमंत्री योगी का बड़ा निर्णय, 30 वर्ष बाद बढ़ेंगे पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकार मुख्यमंत्री योगी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि का निर्णय वर्ष 1995 में तय सीमाएं अब पुरानी, लागत बढ़ने के अनुरूप अब हो रहा वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण मुख्य अभियंता को अब ₹10 करोड़, अधीक्षण अभियंता को ₹5 करोड़ तक कार्य स्वीकृति का अधिकार अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता के अधिकारों में भी बढ़ोतरी से निर्णय प्रक्रिया होगी त्वरित मुख्यमंत्री के निर्णय से निविदा, अनुबंध व कार्यारंभ प्रक्रिया में तेजी, प्रशासनिक दक्षता व पारदर्शिता में वृद्धि होगी उत्तर प्रदेश अभियंता सेवा (लोक निर्माण विभाग) (उच्चतर) नियमावली, 1990 में होगा संशोधन विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग में पहली बार मुख्य अभियंता (स्तर-एक) का नया पद शामिल मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों की संख्या बढ़ी, पदोन्नति प्रक्रिया स्पष्ट होगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोक निर्माण विभाग के विभागीय अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पाँच गुना तक की वृद्धि किए जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बदलावों से विभागीय अधिकारियों को निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी। उच्च स्तर पर अनुमोदन की आवश्यकता घटने से निविदा, अनुबंध गठन एवं कार्यारंभ की प्रक्रिया में गति आएगी। यह सुधार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने में सहायक होगा। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विभाग के अधिकारियों के वित्तीय अधिकार वर्ष 1995 में निर्धारित किए गए थे। इस बीच निर्माण कार्यों की लागत में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के अनुसार वर्ष 1995 की तुलना में वर्ष 2025 तक लगभग 5.52 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए और परियोजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध रूप से किया जा सके। अपर मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री को सिविल, विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए वित्तीय अधिकारों की वर्तमान व्यवस्था की जानकारी दी। विमर्श के उपरांत निर्णय लिया गया कि सिविल कार्यों के लिए अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों की सीमा अधिकतम पाँच गुना तक तथा विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए कम से कम दो गुना तक बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्णय के अनुसार मुख्य अभियंता को अब ₹2 करोड़ के स्थान पर ₹10 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार होगा। अधीक्षण अभियंता को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार दिया जाएगा। अधिशासी अभियंता के वित्तीय अधिकार ₹40 लाख से बढ़ाकर ₹2 करोड़ किए जाएंगे। सहायक अभियंता को भी सीमित दायरे में टेंडर स्वीकृति एवं छोटे कार्यों की अनुमति देने के अधिकार बढ़ाए जाएंगे। बता दें कि यह पुनर्निर्धारण तीन दशकों के बाद होने जा रहा है। बैठक में उत्तर प्रदेश अभियंता सेवा (लोक निर्माण विभाग) (उच्चतर) नियमावली, 1990 में संशोधन के माध्यम से विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग की सेवा संरचना, पदोन्नति व्यवस्था तथा वेतनमान के पुनर्गठन से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बताया गया कि नियमावली में किया जा रहा यह संशोधन विभागीय अभियंताओं की सेवा संरचना को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से किया गया है। संशोधित नियमावली में विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग में पहली बार मुख्य अभियंता (स्तर-एक) का नया पद सम्मिलित किया गया है। इसके साथ मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों की संख्या में वृद्धि की गई है। नवसृजित पदों को नियमावली में समाहित करते हुए उनके पदोन्नति स्रोत, प्रक्रिया और वेतनमान को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे सेवा संरचना अधिक पारदर्शी और संगठित हो सके। बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्य अभियंता (स्तर-एक) के पद पर पदोन्नति अब मुख्य अभियंता (स्तर-दो) से वरिष्ठता के आधार पर की जाएगी। इसी प्रकार मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया को नियमावली में स्पष्ट किया गया है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता (स्तर-एक) तक के पदों के वेतनमान और मैट्रिक्स पे लेवल भी निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ चयन समिति की संरचना को अद्यतन किया गया है, ताकि पदोन्नति और नियुक्ति की कार्यवाही अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य की विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में एक प्रमुख विभाग है, इसलिए अभियंताओं की सेवा नियमावली को समयानुकूल, व्यावहारिक और पारदर्शी बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति व्यवस्था से विभाग की कार्यकुशलता, तकनीकी गुणवत्ता और सेवा भावना को नई दिशा मिलेगी।

टूरिस्टों के लिए अब सफारी का नया अंदाज: इटावा पार्क में चलें आकर्षक मिनी बसों में

इटावा इटावा सफारी पार्क में आने वाले पर्यटकों को सफारी की सैर कराने के लिए दो नई आकर्षक मिनी बस पहुंच रहीं हैं। इन बसों में पर्यटकों की सुविधा के हिसाब से डिजाइन किया गया है। अभी राजगीर सफारी में इसी तरह की बसों से पर्यटकों को सैर कराई जाती है अब यह बसें इटावा सफारी में भी पर्यटकों को घुमाएंगी। इनमें बैठकर पर्यटक आसानी से वन्य जीवों के दीदार कर सकेंगे। सफारी में जो व्यवस्था की गई है उसमें लायन सफारी में शेर खुले में भ्रमण कर रहे हैं और पर्यटक बंद वाहनों से इनका दीदार करते हैं। इस कार्य में अब इन बसों की सेवाएं भी ली जाएंगी।   इसके साथ ही इन बसों में यह व्यवस्था भी की गई है कि सफारी के वन्यजीवों के बारे में भी पर्यटकों को बसों में बैठे बैठे पूरी जानकारी मिलेगी। सफारी के शेरों का इतिहास भी बताया जाएगा। सफारी पार्क के निदेशक डा. अनिल पटेल ने बताया कि दो नई बसों की खरीद की गई है। जल्द ही यह सफारी पार्क पहुंच जाएंगी। इससे पर्यटकों का आवागमन सुगम होगा।  

SSC CHSL परीक्षा 2025: स्लॉट फुल होने पर भी मिलेगी दूसरी तिथि या शहर चुनने की सुविधा

 प्रयागराज SSC CHSL Exam 2025 कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने संयुक्त उच्च माध्यमिक स्तर परीक्षा (सीएचएसएल)-2025 के लिए एक बड़ा बदलाव करते हुए अभ्यर्थियों को अपनी परीक्षा का शहर, तिथि और पाली (शिफ्ट) खुद चुनने की सुविधा शुरू कर दी है। यह सुविधा 28 अक्टूबर की रात 11 बजे तक कैंडिडेट पोर्टल पर लाइव रहेगी।  पहले जैसी चयन व सबमिशन प्रक्रिया होगी कर्मचारी चयन आयोग ने यह भी बताया कि चुनी गई तिथि पर स्लाट उपलब्ध नहीं है तो उम्मीदवार या तो दूसरी तिथि चुन सकते हैं या दूसरा शहर चुन सकते हैं। फिर पहले जैसा ही चयन और सबमिशन प्रक्रिया अपनानी होगी।   एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर सुविधा आयोग के अनुसार उम्मीदवारों को एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट के कैंडीडेट पोर्टल पर लाग-इन करना होगा। इसके बाद अभ्यर्थी शहर, परीक्षा तिथि और शिफ्ट पर क्लिक करके स्लाट चुन सकेंगे। अभ्यर्थियों को आवेदन के समय दिए गए तीन पसंदीदा शहरों में उपलब्ध स्लाट दिखाई देंगे। किसी शहर में स्लाट उपलब्ध होने पर हरा रंग का ‘सेलेक्ट’ विकल्प दिखेगा। मनचाहा स्लाट के बाद ओटीपी वेरीफिकेशन मनचाहा स्लाट चुनने के बाद उम्मीदवार को ओटीपी वेरीफिकेशन के साथ ‘वैलीडेट एंड सबमिट’ करना होगा। 28 अक्टूबर रात 11 बजे तक स्लाट नहीं चुनने पर सिस्टम अपने आप उपलब्ध स्लाट आवंटित कर देगा। यह परीक्षा 12 नवंबर से शुरू होनी है। ऐसे में शहर आवंटन की जानकारी तीन नवंबर से पोर्टल पर उपलब्ध होगी। उम्मीदवार अपनी परीक्षा का शहर, तारीख और पाली की जानकारी उसी दिन देख सकेंगे। प्रवेशपत्र परीक्षा तिथि से तीन–चार दिन पहले डाउनलोड किए जा सकेंगे। अन्य परीक्षाओं में लागू हो सकता है निर्णय अब तक एसएससी की परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र और तिथि आयोग द्वारा आवंटित किए जाते थे, लेकिन अब एसएससी ने पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाते हुए उम्मीदवारों को सीधा विकल्प चुनने का अधिकार दिया है। यह सुविधा फिलहाल सीएचएसएल-2025 के लिए एक बार के रूप में लागू की गई है। अन्य परीक्षाओं में लागू होने को लेकर निर्णय बाद में लिया जाएगा।  

भैया दूज की अनोखी जश्न: जेल अधीक्षक को तिलक लगाकर ड्रम वाली मुस्कान ने मनाई खुशी

मेरठ  चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड की आरोपी मुस्कान रस्तोगी ने जेल में भैया दूज मनाया है। गुरुवार को भाई दूज के मौके पर मेरठ कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने उन 27 महिला बंदियों से तिलक लगवाया, जिनके भाई मुलाकात के लिए नहीं पहुंचे। पति सौरभ की हत्या के आरोप में प्रेमी साहिल के साथ जेल में बंद मुस्कान के घर से उसका भाई भी जेल नहीं पहुंचा था। ऐसे में जेल अधीक्षक ने मुस्कान से भाई दूज का तिलक लगवाया। नीले ड्रम हत्याकांड से मुस्कान सुर्खियों में आई थी। उसकी मां कविता ने बताया है कि परिवार अब मुस्कान से कोई संबंध नहीं रखना चाहता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी त्योहार पर वह उससे नहीं मिलेंगे, क्योंकि मुस्कान उनके जीवन का हिस्सा नहीं रही। वहीं, भैया दूज पर जेल परिसर में रोली, चावल, मिठाई और जलपान की विशेष व्यवस्था की गई। बहनों के लिए छायादार पंडाल लगाए गए, ताकि वह सहजता से पर्व मना सकें। सुबह से ही बंदियों और उनके परिजनों में उत्साह देखने को मिला और देर शाम तक तिलक का क्रम जारी रहा। डेरा सच्चा सौदा की ओर से फ्री भोजन की आयोज भैया दूज के अवसर पर मेरठ जिला कारागार परिसर में डेरा सच्चा सौदा के नेतृत्व में निशुल्क भोजन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बंदियों से मिलने आने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था की गई। चार टुकड़ों में थी लाश; शव का पंचनामा भरने वाले दारोगा का बयान सौरभ हत्याकांड में शव का पंचनामा भरने वाले दारोगा धर्मेंद्र कुमार के जिला जज कोर्ट में 6 अक्टूबर को बयान दर्ज कराया था। दारोगा ने कोर्ट को बताया कि नीले ड्रम में लाश को सीमेंट से जमाया हुआ था। कटर से ड्रम और सीमेंट को काटकर मोर्चरी पर शव को बाहर निकाला गया। लाश टुकड़ों में मिली थी। सिर को धड़ से काटकर अलग किया गया था। दोनों हाथों को भी कलाई से काटकर अलग किया हुआ था। दोनों कटे हुए हाथ एक पॉलीथिन में बंद मिले थे। चाकू भी ड्रम के अंदर ही मिला था।  

योगी सरकार ने किया बड़ा फैसला: यूपी में 1022 नए अग्निशमन कर्मियों की भर्ती और हर जिले में फायर चौकी

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्सप्रेसवे पर हर 100 किमी की दूरी पर फायर टेंडर युक्त एक छोटी फायर चौकी बनाने के निर्देश दिए हैं। आग लगने पर इससे गोल्डन ऑवर में राहत दी जा सकेगी। इसके साथ ही अग्निकांड को रोकने और हादसा होने पर त्वरित राहत देने के लिए फायर महकमे में 1022 पद (98 राजपत्रित और 922 अराजपत्रित) बढ़ाए जाएंगे। राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में भी पद बढ़ाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा विभाग में पदों के सृजन व अभियोजन संवर्गीय अधिकारियों के कैडर रिव्यू के संबंध में बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हर मंडल में विशेष यूनिट गठित की जाए। केमिकल, बायोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल हादसा होने पर विशेष यूनिट सहायक साबित होगी। बहुमंजिला इमारतों में हादसा होने पर भी इस यूनिट की मदद ली जा सकेगी। फायर सर्विस को केवल आग बुझाने तक सीमित न रखकर इसे आपदा प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपात सेवाओं में काम करने के लिए भी विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि फायर महकमे को अति आधुनिक उपकरणों और ट्रेनिंग के जरिए मजबूत किया जाए। बैठक में कुछ बड़े हादसों का भी जिक्र हुआ। अफसरों को समय-समय पर बड़े प्रतिष्ठानों, मॉल व मल्टीप्लेक्स के साथ बहुमंजिला अपार्टमेंट का निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने विभाग की प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हर जिले में लेखा कैडर स्थापित करने के भी निर्देश दिए। विभाग की नई ऑपरेशनल इकाइयों के रूप में कुशीनगर, आजमगढ़, श्रावस्ती, कानपुर नगर, अयोध्या, अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट और सोनभद्र एयरपोर्ट पर अग्निशमन सेवाओं की यूनिट तैनात की जा चुकी है। अग्निशमन विभाग में बढ़ेंगे 1022 पद मुख्यमंत्री योगी ने विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए कहा कि नए पद भी सृजित होने चाहिए। राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में अतिरिक्त पद सृजित कर प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने को भी कहा। इस निर्देश के साथ ही विभाग में राजपत्रित और अराजपत्रित स्तर के नए 1022 पदों के सृजित होने का रास्ता भी साफ हो गया।  

सीएम योगी के निर्देश पर विभिन्न सेक्टर्स पर फोकस डेस्क की स्थापना का प्रदेश को मिल रहा व्यापक लाभ

फोकस सेक्टर डेस्क से प्रदेश में निवेश को मिल रही नई उड़ान सीएम योगी की दूरदर्शी पहल से करोड़ों के निवेश पाइपलाइन में, जल्द उतरेंगे धरातल पर टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर में खुली निवेश की राह फोकस सेक्टर डेस्क की मदद से प्रदेश में निवेश प्रोत्साहन लागू करने की दिशा में इन्वेस्ट यूपी के प्रयासों को मिली सफलता सीएम योगी के निर्देश पर विभिन्न सेक्टर्स पर फोकस डेस्क की स्थापना का प्रदेश को मिल रहा व्यापक लाभ लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब सिर्फ देश का सबसे बड़ा राज्य नहीं, बल्कि भारत की सबसे तेज़ी से उभरती निवेश भूमि बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन्वेस्ट यूपी द्वारा किए जा रहे नवाचारपूर्ण प्रयासों ने प्रदेश को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बना दिया है। इसी दिशा में एक अहम कदम साबित हुई है—फोकस सेक्टर डेस्क की स्थापना, जिसने न केवल निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि उद्योग जगत में उत्तर प्रदेश की छवि को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। करोड़ों के निवेश पाइपलाइन में सीएम योगी के निर्देश पर इन्वेस्ट यूपी द्वारा गठित फोकस सेक्टर डेस्क अब प्रदेश में करोड़ों रुपये के निवेश को जुटाने में सफल रही है। टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश प्रस्ताव न केवल मंजूरी के दौर में हैं, बल्कि जल्द ही धरातल पर उतरने वाले हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में फोकस सेक्टर डेस्क की रणनीति ने न केवल निवेश प्रक्रिया को गति दी है, बल्कि ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में ठोस आधार भी तैयार किया है। टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर में बड़े खिलाड़ी तैयार भारतीय तकनीकी वस्त्र संघ (ITTA), परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC), भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (CITI) और उत्तर भारत वस्त्र अनुसंधान संघ (NITRA) की साझेदारी से इस सेक्टर में ग्रासिम, ट्राइडेंट, रिलायंस, जीईएसएल और श्याम संस जैसी बड़ी कंपनियां प्रदेश में निवेश कर रही हैं। उनके प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं।  ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में नई ऊर्जा सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), एसीएमए, एसएमईवी और एआरएआई जैसी संस्थाओं के सहयोग से प्रदेश में ऑटोमोबाइल उद्योग को नई रफ्तार मिल रही है। अशोक लेलैंड, मिंडा और टाटा मोटर्स (विस्तार परियोजना) जैसे दिग्गज निवेश के लिए तैयार हैं। केमिकल सेक्टर में औद्योगिक चमक भारतीय रासायनिक परिषद (ICC), ISCM Association और CHEMEXCIL के सहयोग से प्रदेश में रिलायंस इंडस्ट्रीज और दीपक नाइट्राइट जैसी कंपनियां बड़े निवेश की योजना पर काम कर रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रदेश बन रहा टेक हब ICEA, ELCINA, AIEA और IEEMA के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ रहा है। डिक्सन, एम्बर, एचसीएल-फॉक्सकॉन, हायर और एलजी जैसी कंपनियों की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं, जिससे प्रदेश भारत का अगला टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में अग्रसर है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर से विश्व स्तरीय साझेदारी नैसकॉम के सहयोग से एडोब, एएमडी और जेपी मॉर्गन जैसी वैश्विक कंपनियां उत्तर प्रदेश में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं।

मुख्यमंत्री ने लिया निर्णय, फायर सर्विस विभाग में 98 राजपत्रित और लगभग 922 अराजपत्रित नए पद सृजित होने का रास्ता साफ

केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल दुर्घटनाओं तथा सुपर हाईराइज बिल्डिंग जैसी परिस्थितियों से निपटने हेतु स्पेशलाइज्ड यूनिट गठित हो: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने लिया निर्णय, फायर सर्विस विभाग में 98 राजपत्रित और लगभग 922 अराजपत्रित नए पद सृजित होने का रास्ता साफ जनसंख्या, औद्योगिक विस्तार और शहरीकरण की गति को देखते हुए फायर सर्विस को अधिक सशक्त और आधुनिक बनाया जाए: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने अग्निशमन विभाग के विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता जताई मुख्यमंत्री ने फायर सर्विस को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने के दिए निर्देश प्रत्येक जनपद में अकाउंट कैडर की स्थापना और प्रशिक्षण संस्थान में नए पदों से प्रशासनिक दक्षता व प्रशिक्षण गुणवत्ता में होगा सुधार एक्सप्रेस-वे पर हर 100 किमी पर छोटी फायर चौकी स्थापित की जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विस्तार और शहरीकरण की गति को देखते हुए अग्निशमन विभाग की संरचना को अधिक सशक्त, आधुनिक तथा जनसुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि फायर सर्विस को केवल आग बुझाने तक सीमित न रखकर इसे आपदा प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपात सेवाओं के समेकित स्वरूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री गुरुवार को अग्निशमन विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता जताते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक रीजन में स्पेशलाइज्ड यूनिट गठित की जाए, जो केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल दुर्घटनाओं तथा सुपर हाईराइज बिल्डिंग जैसी परिस्थितियों से निपटने में सक्षम हों। मुख्यमंत्री ने फायर सर्विस को अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित जनशक्ति से सुसज्जित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में विभाग में नए पदों के सृजन पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रत्येक जनपद में अकाउंट कैडर स्थापित किया जाए। साथ ही, राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में अतिरिक्त पद सृजित कर प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभाग में राजपत्रित संवर्ग के 98 तथा अराजपत्रित संवर्ग के लगभग 922 नए पद सृजित होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे जनपद, रीजनल और मुख्यालय स्तर पर फायर सर्विस की कार्यक्षमता और जनसेवा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में फायर एवं आपात सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। एक्सप्रेस-वे पर बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक 100 किलोमीटर की दूरी पर फायर टेंडर सहित एक छोटी फायर चौकी स्थापित की जाए, ताकि दुर्घटना की स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर राहत व बचाव कार्य प्रारंभ किया जा सके। बैठक में बताया गया कि नई ऑपरेशनल इकाइयों के रूप में कुशीनगर, आजमगढ़, श्रावस्ती, कानपुर नगर, अयोध्या, अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट और सोनभद्र एयरपोर्ट पर अग्निशमन सेवाओं की समुचित जनशक्ति पहले ही तैनात की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फायर सर्विस जनता के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। इसकी संरचना ऐसी होनी चाहिए, जो हर परिस्थिति में त्वरित, कुशल और उत्तरदायी प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि विभाग के पुनर्गठन की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जाए, ताकि इसका लाभ शीघ्र जनता तक पहुँच सके।

ब्रह्मोस सिस्टम इंजीनियर आकाशदीप की लखनऊ में मौत, DRDO में मचा शोक

लखनऊ राजधानी लखनऊ के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में कार्यरत ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम इंजीनियर आकाशदीप गुप्ता की मंगलवार रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई.  अस्पताल प्रशासन की सूचना पर आलमबाग पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी. डीआरडीओ (DRDO) में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट में सिस्टम इंजीनियर के पद पर कार्यरत आकाशदीप गुप्ता अपनी पत्नी भारती गुप्ता के साथ दिल्ली में रहते थे. लखनऊ के ओमनगर, आलमबाग के मूल निवासी आकाशदीप की पत्नी भारती दिल्ली में केनरा बैंक में कार्यरत हैं. दोनों की शादी इसी साल अप्रैल में हुई थी. दीपावली के अवसर पर यह दंपति दिल्ली से लखनऊ अपने पैतृक घर आए थे. आकाशदीप के पिता कुलदीप गुप्ता जनवरी में उत्तर प्रदेश होम गार्ड के विभाग से सेवानिवृत्त हुए हैं. परिवार में एक विवाहित बहन भी है. इस पूरे मामले में आलमबाग इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र ने बताया कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है. फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की असल वजह सामने आ पाएगी.  वहीं, आकाशदीप के पिता कुलदीप गुप्ता के मुताबिक, छुट्टी पर बेटा घर आया हुआ था. दिल्ली में उसकी पोस्टिंग थी. उन्होंने अच्छे से दिवाली मनाई. खेलने का शौकीन था. 21 अक्टूबर की शाम को आकाशदीप खेलने गया. रात में जब आया तो खाना खाने के बाद उसे थोड़ी दिक्कत सी महसूस हुई. इसके बाद उसे अस्पताल ले गए, जहां उसने दम तोड़ दिया. 

मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली में ये सेटेलाइट ऑफिस देंगे राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार

5 शहर, 5 रणनीतियां, एक लक्ष्य — यूपी में निवेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न पर 5 महानगरों में खुलेंगे ‘इन्वेस्ट यूपी’ के सैटेलाइट निवेश प्रोत्साहन ऑफिस मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली में ये सेटेलाइट ऑफिस देंगे राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मुंबई से लेकर चेन्नई तक हर सैटेलाइट ऑफिस का होगा अपना इंडस्ट्री-फोकस हर सैटेलाइट ऑफिस में जीएम से लेकर उद्यमी मित्र तक की समर्पित टीम संभालेगी निवेश संवर्धन की कमान सीएम योगी दे चुके हैं ‘इन्वेस्ट यूपी’ के पुनर्गठन को मंजूरी, अब देशभर में पहुंचेगी यूपी की निवेश ताकत लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। अब देश के पांच प्रमुख महानगरों—मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली—में ‘इन्वेस्ट यूपी’ के सैटेलाइट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन ऑफिस खोले जाएंगे। इसका उद्देश्य देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों से पूंजी निवेश को सीधे उत्तर प्रदेश तक लाना और निवेशकों को राज्य की नीतियों एवं संभावनाओं से जोड़ना है।  प्रत्येक ऑफिस में होगा समर्पित स्टॉफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इन्वेस्ट यूपी के पुनर्गठन प्रस्ताव को हरी झंडी दे चुके हैं। इसी क्रम में इन सैटेलाइट ऑफिसों की स्थापना किए जाने का प्रस्ताव है, जो राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देंगे। प्रत्येक ऑफिस में एक जनरल मैनेजर, एक असिस्टेंट जनरल मैनेजर, दो उद्यमी मित्र, दो एग्जिक्यूटिव और दो ऑफिस असिस्टेंट की टीम कार्य करेगी। सभी पांचों कार्यालयों पर कुल 12 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक धनराशि व्यय होने का अनुमान है। रणनीतिक क्षेत्रों पर होगा फोकस सरकार की योजना के अनुसार, प्रत्येक शहर का सैटेलाइट ऑफिस अपनी भौगोलिक और औद्योगिक विशेषता के अनुरूप रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा। मुंबई ऑफिस वित्तीय सेवाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक और ईएसजी फंड पर ध्यान देगा। बेंगलुरु ऑफिस जीसीसी, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर, ईवी और डीपटेक सेक्टर पर फोकस करेगा। हैदराबाद ऑफिस फार्मा, डेटा सेंटर, हेल्थटेक और एंटरप्राइज SaaS उद्योगों पर केंद्रित रहेगा। चेन्नई ऑफिस ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और हार्डवेयर निर्माण उद्योगों में निवेश आकर्षित करेगा। नई दिल्ली ऑफिस समर्पित इन्वेस्ट यूपी एवं एशिया-यूरोपीय संघ सुविधा कार्यालय के रूप में कार्य करेगा। ‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’ की छवि होगी और मजबूत  योगी सरकार का यह कदम निवेशकों से नजदीकी संवाद बढ़ाने और राज्य की ‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’ की छवि को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोक्ता राज्य नहीं, बल्कि निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बन चुका है। सैटेलाइट ऑफिस इस दिशा में सेतु का काम करेंगे। इन सैटेलाइट ऑफिसों के माध्यम से उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष औद्योगिक केंद्रों में अपनी स्थायी मौजूदगी दर्ज करेगा और वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक नई पहचान बनाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जन समस्याओं के प्रति संवेदनशील होकर त्वरित समाधान का निर्देश दिया

जन समस्याओं के प्रति बनें संवेदनशील, कराएं त्वरित समाधान: मुख्यमंत्री जनता दर्शन में 300 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोगों से बोले – चिंता मत करिए, होगी प्रभावी कार्रवाई गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सबकी समस्या सुनते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की समस्याओं पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाएं। समस्या से जुड़ी शिकायत पर तेजी से कार्रवाई करते हुए गुणवत्तापूर्ण व संतुष्टिपरक समाधान सुनिश्चित कराएं। समस्या लेकर पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत करिए। सरकार हर समस्या पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी।  दीपावली के दिन से गोरखपुर प्रवास कर रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान करीब 300 लोगों से मिले। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर लगी कुर्सियों पर बैठाए गए लोगो तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याओं को सुना। इत्मीनान से बात सुनते हुए उनके प्रार्थना पत्र लिए। पास में खड़े अधिकारियों को समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से जुड़े समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और सन्तुष्टिपरक होना चाहिए।  जमीन कब्जा किए जाने से संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथने पुलिस अधिकारियों को भू माफिया के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा यदि कोई दबंग, माफिया किसी की जमीन जबरन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। गरीबों को उजाड़ने वाले कतई न बख्शे जाएं। जहां पैमाइश की जरूरत हो, वहां पैमाइश कराकर विवाद का निस्तारण कराया जाए।  जनता दर्शन में हर बार की तरह कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी।