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RTE में बड़ा बदलाव: EWS बच्चों को प्राथमिकता, पारदर्शिता के लिए डिजिटल सिस्टम लागू करेगी सरकार

रायपुर. डिजिटल सुशासन का सशक्त मॉडल से शिक्षा के अधिकार को एक नया आसमान मिल रहा है। भारत में शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा मिलने के बाद से लगातार यह प्रयास किए जा रहे हैं कि हर बच्चे तक शिक्षा का उजाला पहुंच सके। हमारे देश मे एक लंबे समय तक यह देखा गया कि नीतियां तो जरूर बनाई जाती रही मगर जमीन पर उसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता और पहुंच की कमी बनी रहती थी। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने जो करके दिखाया है आज उसकी मिसाल दी जा रही है। प्रदेश भर मे मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में डिजिटल सुशासन के जरिए शिक्षा के अधिकार (RTE) को वास्तविक रूप में लागू किया जा रहा है। यह कदम तकनीकी सुधार ही नई बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और पारदर्शिता की दिशा में भी एक क्रांतिकारी पहल है। RTE और डिजिटल बदलाव से पैदा हो रही एक नई सोच शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित किया गया है। पहले यही प्रक्रिया जटिल, समय लेने वाली और कई बार विवादों से घिरी रहने वाली होती थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस चुनौती को समझा और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया। अब आवेदन करने से लेकर चयन तक स्टेप ऑनलाइन और औटोमेटिक हो गया है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप स्वयमेव कम हो गया है। पक्षपात की संभावना पूरी तरह से समाप्त हो गई है साथ ही पारदर्शिता और भरोसा बढ़ा है। निष्पक्षता की गारंटी बन रही है ऑनलाइन लॉटरी डिजिटल प्रक्रिया का सबसे इम्पॉर्टन्ट पार्ट है ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम। उदाहरण के तौर पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कुल 38,439 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमे 27,203 आवेदन पात्र पाए गए और इन पात्र आवेदन से 14,403 बच्चों का ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से चयन किया गया। पूरी तरह कंप्यूटर आधारित और रैंडमाइज्ड होने वाली इस प्रक्रिया से किसी भी प्रकार की सिफारिश या पक्षपात की गुंजाइश अपने आप समाप्त हो जाती है। राज्य सरकार का यह कदम सुनिश्चित करता है कि हर बच्चे को समान अवसर मिले जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। सटीकता और भरोसे का आधार है डिजिटल सत्यापन डिजिटल प्रणाली में चयन के साथ डिजिटल सत्यापन को भी शामिल किया गया है। इस प्रणाली मे आवेदन के दौरान दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच,पात्रता की स्वचालित पुष्टि, गलत जानकारी की तत्काल पहचान कर ली जाती है। जिससे यह पूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित बन जाती है। अभिभावकों के लिए भी बनी सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली का बड़ा लाभ आम नागरिकों को भी मिल रहा है। अब अभिभावकों को स्कूलों या कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते क्योंकि वे अब घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मोबाइल नंबर के जरिए सत्यापन और अपडेट प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन करते समय सिस्टम के द्वारा 1.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले निजी स्कूलों की सूची और उपलब्ध सीटों की जानकारी भी उपलब्ध हो जाती है। इस सुविधा से अभिभावकों को सही निर्णय लेने में मदद मिलती है। कमजोर वर्ग के बच्चों को मिल रही प्राथमिकता इस योजना के उद्देश्य के मूल मे ही समाज के उन कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाना है जो अब तक अपने पिछड़ेपन की वजह से ज्ञान और शिक्षा से वंचित रहे। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए इस योजना मे अनुसूचित जाति (SC),अनुसूचित जनजाति दिव्यांग और अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार की यह पहल सामाजिक समावेशन को मजबूत करने वाली और समानता की दिशा में ठोस कदम साबित हो रही है। योजना के व्यापक प्रभाव से हो रहा लाखों बच्चों को लाभ वर्तमान मे छत्तीसगढ़ में इस योजना से 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त राज्य की साय सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 300 करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया है, जिससे और भी अधिक बच्चों को लाभ मिल सकेगा और निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया और मजबूत होगी। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि यह कदम केवल कागजों तक ही सीमित नहीं होगा बल्कि जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव को देखा जा सकेगा। जिलेवार सफलता प्रमाण है की योजना राज्य के हर कोने तक पहुंच रही है। इस डिजिटल प्रक्रिया की सफलता इस बात से ही साबित हो जाती है कि छत्तीसगढ़ के लगभग सभी जिलों में हजारों बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है। रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग, सरगुजा, जशपुर, बस्तर जैसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बच्चों का चयन हुआ है। सुदूर प्रांतों से बच्चों का चयन यह दर्शाता है कि यह योजना केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों तक भी सफलता पूर्वक पहुंची है। छत्तीसगढ़ मे हुई डिजिटल सुशासन की व्यापक पहल RTE के अलावा भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में कई डिजिटल सुधार किए जा चुके हैं जैसे e-Office प्रणाली,CMO पोर्टल, स्मार्ट क्लासरूम, विद्या समीक्षा केंद्र इत्यादि इन सभी कदमों का उद्देश्य छत्तीसगढ़ प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना ही रहा है। APAAR ID से और संवरेगा राज्य का डिजिटल भविष्य शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को और मजबूत करने के लिए छात्रों को 12 अंकों की एक विशिष्ट पहचान देने वाली APAAR ID जैसी पहल भी महत्वपूर्ण है। यह ID उनके पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने का कम करती है, जिससे भविष्य में बच्चों को स्कूल बदलने में आसानी होगी, रिकॉर्ड की पारदर्शिता बनी रहेगी और शिक्षा प्रणाली की दक्षता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता से संभव हो पाया यह बदलाव इस महा परिवर्तन के पीछे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की स्पष्ट सोच और प्रतिबद्धता साफ दिखाई देती है क्योंकि वे दृढ़ता से इस बात के पक्षधर हैं कि “कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।” उनकी यही सोच इस डिजिटल RTE मॉडल की नींव है। समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर एक मजबूत कदम डिजिटल प्रक्रिया ने शिक्षा को अधिक समावेशी, अधिक सुलभ और अधिक पारदर्शी बनाने का कम किया है परिणामस्वरूप … Read more

ED जांच में बड़ा अपडेट: रोशन चंद्राकर के घर से टीम लौटी, कई कागजात कब्जे में

धमतरी. बहुचर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले मामले में ईडी ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की. राइस मिलर रोशन चंद्राकर और भाजपा नेता भूपेंद्र चंद्राकर के भाई के निवास में एक साथ दबिश दी गई. इससे इलाके में हड़कंप मच गया. देर रात तक चली कार्रवाई के बाद मंगलवार सुबह ईडी अधिकारियों की टीम दस्तावेज जब्त कर रोशन चंद्राकर के घर से निकल गई है. जांच के बाद कई नाम सामने आ सकते हैं. जानकारी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने सोमवार को धमतरी में भाजपा नेता रोशन चंद्राकर और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के भी ठिकानों पर छापेमारी की है. भूपेंद्र चंद्राकार पर सिर्फ अभनपुर ही नहीं, बल्कि अपने करीबियों को अलग-अलग तहसीलों में भारतमाला घोटाले में करोड़ों रुपए मुआवजा पहुंचाने का आरोप है. गौरतलब है कि राइस मिल लेवी वसूली मामले में रोशन चंद्राकर के निवास पर करीब तीन साल पहले भी ईडी ने छापा मारा था। इस दौरान उन्हें जेल भी हुई थी. जानिए क्या है मामला भारतमाला परियोजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में हुए जमीन मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं. रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक की धांधली का आरोप है. अधिकारियों और जमीन दलालों की मिलीभगत प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा की जांच में पता चला है कि कृषि भूमि को बैकडेट में गैर-कृषि भूमि में बदलकर उसका मुआवजा कई गुना बढ़ाकर दिखाया गया. यह खेल राजस्व विभाग के अधिकारियों (एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी) ने जमीन दलालों के साथ मिलकर खेला. इसमें एक ही खसरे की जमीन को कागजों में छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग लोगों को मुआवजा दिलाया गया. 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश मामले में ईडी ने कार्रवाई करते हुए पूर्व में रायपुर और महासमुंद में छापेमारी कर करोड़ों की संपत्तियां अटैच की हैं, और 40 लाख रुपये से अधिक कैश जब्त किए हैं. मामले में तत्कालीन सब-डिविज़नल ऑफिसर (SDO) निर्भय साहू और अन्य अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके साथ ईओडब्ल्यू ने 10 लोगों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें सरकारी अधिकारी और जमीन दलाल शामिल हैं.

वित्तीय अनियमितताओं पर गिरी गाज, DEO निलंबित; शिक्षा विभाग का सख्त रुख

महासमुंद. छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महासमुंद के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय कुमार लहरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विजय कुमार लहरे पर परीक्षा प्रश्नपत्र विवाद, विभागीय कार्यों में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं जैसे कई गंभीर आरोप लगे है, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, 8 जनवरी 2026 को एक समाचार प्रकाशित हुआ था, जिसमें चौथी कक्षा की अंग्रेजी परीक्षा के प्रश्नपत्र में आपत्तिजनक सवाल पूछे जाने का मामला सामने आया। प्रश्न में कुत्ते के नाम के विकल्प में भगवान राम का नाम शामिल किया गया था, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। जांच में पाया गया कि प्रश्नपत्र तैयार करने और वितरण की पूरी जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी की थी, लेकिन इस प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई। इन कारणों से हुई कार्रवाई – परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने में गंभीर लापरवाही आपत्तिजनक सवाल से धार्मिक भावनाओं को ठेस हाईकोर्ट से जुड़े मामले में समय पर कार्रवाई नहीं करना विभागीय आदेशों की अवहेलना लेखा परीक्षण (ऑडिट) में गंभीर अनियमितताएं उजागर शासन ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन मानते हुए, सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई की है। निलंबन अवधि में विजय लहरे को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा और उनका मुख्यालय रायपुर संभागीय कार्यालय तय किया गया है। निलंबन के बाद अब बी.एल. देवांगन (उप संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय) को महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस पूरे मामले को शासन ने विभाग की छवि धूमिल करने वाला और गंभीर कदाचार मानते हुए सख्त कदम उठाया है।

ग्राम नारी की महिलाएं: हाथ करघे से सफलता तक के सफर की तस्वीर

हाथ करघे से कमाई तक- ग्राम नारी की महिलाओं की सफलता का राज रायपुर ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने अपने सामूहिक प्रयास, मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर ऐसी सफलता की कहानी रची है, जो न केवल आर्थिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएँ यदि अवसर और सहयोग प्राप्त करें, तो वे किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर सकती हैं। धमतरी जिले के छोटे से ग्राम नारी में आज आत्मनिर्भरता, परंपरा और नवाचार का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कभी सीमित संसाधनों और अवसरों वाला यह गाँव अब ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।  परंपरा से जुड़ी नई शुरुआत         नारी गाँव में पहले बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी, लेकिन पड़ोसी राज्य ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस क्षेत्र में कदम रखा। संबलपुरी साड़ियाँ अपनी विशेष इकत डिज़ाइन और आकर्षक रंगों के लिए जानी जाती हैं, जिन्हें बनाने के लिए उच्च कौशल और धैर्य की आवश्यकता होती है।  सरकार का मजबूत सहयोग         छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समिति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत नियमित रूप से धागा प्रदाय किया जा रहा है, जिससे बुनकरों को नियमित रोजगार तथा समितियों को सुचारु संचालन हेतु सेवा प्रभार के रूप मे आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही नवीन बुनाई प्रशिक्षण तथा बुनकरों को नवीन करघे वितरण से उत्पादन क्षमता बढ़ी है। इस सहयोग से समिति आर्थिक रूप से सशक्त हुई है तथा बाजार मांग के अनुरूप वस्त्र तैयार करने मे सक्षम हुई है।  बढ़ता बाजार और आय          आज ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ग्राम नारी द्वारा तैयार की गई साड़ियों की बिक्री मुख्य रूप से ओडिशा के बाजारों में होती है। वर्तमान मे समिति द्वारा माह मे 300-400 साड़ियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे समिति का मासिक कारोबार लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक पहुँच चुका है, जो ग्रामीण स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है।  महिलाओं का सशक्तिकरण            इस पहल ने न केवल आय के स्रोत को बढ़ाया है बल्कि, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दी है तथा सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित की है। जो महिलाएँ पहले इस कार्य से अनभिज्ञ थीं, वे आज कुशल बुनकर बन चुकी हैं और आत्मविश्वास के साथ उत्पादन में योगदान दे रही हैं। पूर्व मे शासकीय वस्त्र उत्पादन से जो महिलाएं प्रतिदिन 300-350 रुपये कमाती थी, वे आज 550-600 रुपये काम रही है। भविष्य मे अतिरिक्त कौशल उन्नयन प्रशिक्षण तथा दक्षता से वे 1000-1200 रुपये प्रतिदिन कमाने मे सक्षम हो सकेंगी।    भविष्य की दिशा           ग्राम नारी की यह सहकारी समिति आज आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़ रही है। यदि इसे आगे ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों तक पहुँच का समर्थन मिले, तो यह और भी बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। यह कहानी दर्शाती है कि जब सरकारी सहयोग और समुदाय की मेहनत साथ आती है, तो छोटे गाँव भी सफलता की बड़ी मिसाल बन सकते हैं।

परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती अपनाई, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा

रायपुर, परंपरागत खेती (गेहूं-धान) की तुलना में फूलों की खेती कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा दे रही है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की 12 महीने मांग होने से किसान हर सीजन में बंपर कमाई कर रहे हैं। कम पूंजी से शुरू होकर, यह व्यवसाय प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ  दे रहा है, जिससे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।  शादी, पार्टी, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे अच्छी कीमतें मिलती हैं।            राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा निवासी किसान  ईश्वरचरण पैकरा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान की सफलता आज सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।          पैकरा पहले परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे, जिसमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। विभाग द्वारा तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती की, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था और सीमित आय होती थी, वहीं फूलों की खेती से उन्हें करीब 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उनकी कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।           फूलों की खेती में सफलता मिलने के बाद  पैकरा का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे बताते हैं कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब वे इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके खेत में खिले गेंदा फूलों की रंगीन पंक्तियां आज उनकी मेहनत और सफलता की कहानी बयां करती हैं। उनकी इस उपलब्धि को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार राज्य शासन की योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रही हैं, बल्कि कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

गांव की महिलाओं ने हाथ करघे को बनाया आत्मनिर्भरता का जरिया, जानें सफलता का राज

रायपुर ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने अपने सामूहिक प्रयास, मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर ऐसी सफलता की कहानी रची है, जो न केवल आर्थिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएँ यदि अवसर और सहयोग प्राप्त करें, तो वे किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर सकती हैं। धमतरी जिले के छोटे से ग्राम नारी में आज आत्मनिर्भरता, परंपरा और नवाचार का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कभी सीमित संसाधनों और अवसरों वाला यह गाँव अब ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।  परंपरा से जुड़ी नई शुरुआत  नारी गाँव में पहले बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी, लेकिन पड़ोसी राज्य ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस क्षेत्र में कदम रखा। संबलपुरी साड़ियाँ अपनी विशेष इकत डिज़ाइन और आकर्षक रंगों के लिए जानी जाती हैं, जिन्हें बनाने के लिए उच्च कौशल और धैर्य की आवश्यकता होती है।  सरकार का मजबूत सहयोग   छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समिति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत नियमित रूप से धागा प्रदाय किया जा रहा है, जिससे बुनकरों को नियमित रोजगार तथा समितियों को सुचारु संचालन हेतु सेवा प्रभार के रूप मे आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही नवीन बुनाई प्रशिक्षण तथा बुनकरों को नवीन करघे वितरण से उत्पादन क्षमता बढ़ी है। इस सहयोग से समिति आर्थिक रूप से सशक्त हुई है तथा बाजार मांग के अनुरूप वस्त्र तैयार करने मे सक्षम हुई है।  बढ़ता बाजार और आय  आज ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ग्राम नारी द्वारा तैयार की गई साड़ियों की बिक्री मुख्य रूप से ओडिशा के बाजारों में होती है। वर्तमान मे समिति द्वारा माह मे 300-400 साड़ियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे समिति का मासिक कारोबार लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक पहुँच चुका है, जो ग्रामीण स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है।  महिलाओं का सशक्तिकरण   इस पहल ने न केवल आय के स्रोत को बढ़ाया है बल्कि, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दी है तथा सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित की है। जो महिलाएँ पहले इस कार्य से अनभिज्ञ थीं, वे आज कुशल बुनकर बन चुकी हैं और आत्मविश्वास के साथ उत्पादन में योगदान दे रही हैं। पूर्व मे शासकीय वस्त्र उत्पादन से जो महिलाएं प्रतिदिन 300-350 रुपये कमाती थी, वे आज 550-600 रुपये काम रही है। भविष्य मे अतिरिक्त कौशल उन्नयन प्रशिक्षण तथा दक्षता से वे 1000-1200 रुपये प्रतिदिन कमाने मे सक्षम हो सकेंगी।    भविष्य की दिशा   ग्राम नारी की यह सहकारी समिति आज आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़ रही है। यदि इसे आगे ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों तक पहुँच का समर्थन मिले, तो यह और भी बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। यह कहानी दर्शाती है कि जब सरकारी सहयोग और समुदाय की मेहनत साथ आती है, तो छोटे गाँव भी सफलता की बड़ी मिसाल बन सकते हैं।

छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण स्थित राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवा धाम कुरियारी में आयोजित 9 दिवसीय राम कथा में शामिल हुए। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी मती कौशल्या साय के साथ आश्रम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि सदैव भगवान राम के चरणों से धन्य रही है। उन्होंने वनवास काल में भगवान राम के आगमन और माता शबरी की अद्भुत भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने आस्था, समर्पण और विश्वास की अनूठी परंपरा को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि तेंदुवाधाम आज धार्मिक और सांस्कृतिक जागरण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु एक साथ राम कथा का श्रवण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर को अत्यंत सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि एक ही मंच से अनेक संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना विशेष अनुभव है। उन्होंने आश्रम परिसर में हरिवंश औषधालय एवं पंचकर्म केंद्र,  राम-जानकी मंडपम, हरिवंश वैदिक पाठशाला, मां दुर्गा गौ मंदिर और हनुमत प्रवेश द्वार सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के लोकार्पण पर आश्रम प्रबंधन और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि भी है। उन्होंने अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण के दौरान छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक चावल और चिकित्सकों की टीम के वहां पहुंचने का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेशवासियों की गहरी श्रद्धा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान राम भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं, जो देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और जवानों के अदम्य साहस से आज प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है तथा राज्य में शांति, विकास और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” यहां की संस्कृति और जीवन मूल्यों की सच्ची पहचान है। इस अवसर पर परमपूज्य वासुदेवनंद सरस्वती महाराज, किन्नर अखाड़ा प्रमुख मां टीना सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया। राघव सेवा समिति के प्रमुख डॉ. अशोक हरिवंश ने बताया कि यह स्थल माता शबरी की जन्मभूमि शिवरीनारायण में स्थित है, जहां ‘कलिंग शैली’ में भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। आश्रम में औषधालय, वैदिक विद्यालय, गौ मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, गीता वाटिका, शबरी रसोई और निर्धन कन्या विवाह जैसी अनेक सामाजिक-धार्मिक पहल संचालित हो रही हैं। कार्यक्रम के तहत विभिन्न वर्गों – दिव्यांगजन, रक्तदाता, कुष्ठ रोगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों – को समर्पित विशेष दिवस भी आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में सांसद मती कमलेश जांगड़े, महंत  रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे हेतु द्विदिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सम्पन्न

रायपुर आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय द्वारा राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSS) के अंतर्गत संचालित पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दो दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित सम्पन्न हुआ। संचालनालय के अधिकारियों ने सर्वेक्षण की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस प्रशिक्षण से प्रतिभागियों की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जो (PLFS) सर्वे के प्रभावी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह प्रशिक्षण विगत दिनों संचालनालय के प्रशिक्षण कक्ष में आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न जिलों से सर्वे कार्य से जुड़े अधिकारी एवं प्रशिक्षुओं ने भागीदारी की। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सर्वेक्षण की संपूर्ण प्रक्रिया, प्रश्नावली की विस्तृत समझ, डेटा संग्रहण की विधियां तथा फील्ड में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही, हैंड्स-ऑन अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में सर्वेक्षण करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया गया।

सेजेस कन्नेवाड़ा की हिमांशी को उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं

रायपुर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में चयनित होकर राज्य का मान बढ़ाने वाली स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कन्नेवाड़ा की छात्रा हिमांशी साहू को बालोद कलेक्टर मती दिव्या उमेश मिश्रा ने सम्मानित किया। कलेक्टर मती मिश्रा ने आज बालोद के संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान कुमारी हिमांशी साहू की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की भूरी-भूरी सराहना करते हुए उनके इस उपलब्धि को पूरे जिले के लिए गौरव बताया। इस अवसर पर कलेक्टर ने हिमांशी साहू को प्रशस्ति पत्र के अलावा शाॅल, फल भेंटकर उनका आत्मीय सम्मान किया।           इस अवसर पर कलेक्टर मती मिश्रा ने हिमांशी की उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। कलेक्टर मती मिश्रा ने कुमारी हिमांशी साहू को कड़ी मेहनत कर जीवन में उपलब्धि हासिल करने की सीख भी दी। उल्लेखनीय है कि हिमांशी साहू स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कन्नेवाड़ा में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत है। कुमारी हिमांशी ने 96 प्रतिशत अंकों के साथ कक्षा 8वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है।          छात्रा हिमांशी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में पूरे राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त कर अपने विद्यालय तथा संपूर्ण बालोद जिला का नाम रोशन किया है। इस अवसर पर कलेक्टर मती मिश्रा ने कुमारी हिमांशी के पिता  अभय कुमार और माता मती सहिता साहू को भी सम्मानित कर उनकी सुपुत्री की महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस मौके पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर  चंद्रकांत कौशिक,  अजय किशोर लकरा एवं  नूतन कंवर सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

Collector Office Dispute Ends: प्रशासन-संगठनों में समझौता, विवाद का हुआ पटाक्षेप

मुंगेली. कलेक्टर कार्यालय से जुड़ा विवाद, जिसने बीते कुछ दिनों में जिले का माहौल गरमा दिया था और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा का विषय बना हुआ था, अब पूरी तरह शांत हो गया है। 26 अप्रैल 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय मुंगेली में आयोजित शांतिवार्ता बैठक के बाद प्रशासन, जोहार पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो गया। इस बैठक में एसडीएम अजय कुमार शतरंज, तहसीलदार शेखर पटेल, नायब तहसीलदार प्रकाश यादव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान 24 अप्रैल को कलेक्टर परिसर में हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तार से समीक्षा की गई और दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी। अंततः सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपसी सहमति बन गई और भविष्य में किसी भी विवाद को संवाद के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया गया। क्या था पूरा मामला दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 24 अप्रैल को उस वक्त हुई थी, जब कुछ लोग कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देने पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए दावों में आरोप लगाया गया कि कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखे गए आवेदन को सार्वजनिक रूप से फेंक दिया। इस दावे को स्थानीय भाषा और अस्मिता के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी और मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा। वायरल पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि ज्ञापन जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की मांग को लेकर दिया जा रहा था, लेकिन आवेदन देने पहुंचे लोगों की बात नहीं सुनी गई और उनके साथ असम्मानजनक व्यवहार हुआ। देखते ही देखते यह मुद्दा केवल एक प्रशासनिक घटना न रहकर सामाजिक और भावनात्मक बहस का विषय बन गया। प्रशासन ने आरोपों को बताया था निराधार हालांकि, जिला प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। प्रशासन का कहना था कि कलेक्टर ने आवेदन को विधिवत स्वीकार करने और नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही थी। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोग बिना पूर्व अनुमति के कार्यालय परिसर में बैठ गए थे और नारेबाजी करने लगे, जिससे शासकीय कार्य प्रभावित हुए। इस दौरान कर्मचारियों के साथ बहस और हंगामे की स्थिति भी बनी। थाने तक पहुंच गया था मामला घटना के बाद कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों ने सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 24 अप्रैल को दोपहर करीब 12:15 से 1:00 बजे के बीच कुछ लोगों ने कलेक्टर कक्ष के बाहर नारेबाजी और हंगामा किया, जिससे कार्यालय का माहौल प्रभावित हुआ और आम लोगों को भी असुविधा हुई। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है और मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई थी।प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया था कि घटना के बाद कुछ लोगों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी और अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ। शांतिवार्ता से मामले का पटाक्षेप इसी बढ़ते विवाद और जनभावनाओं को देखते हुए 26 अप्रैल को शांतिवार्ता बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने परिपक्वता दिखाते हुए विवाद को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया। लंबी चर्चा के बाद यह तय हुआ कि भविष्य में किसी भी मुद्दे को टकराव के बजाय बातचीत और समन्वय के जरिए सुलझाया जाएगा। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया कि संवाद ही किसी भी विवाद का सबसे बेहतर समाधान है। प्रशासन और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना व जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदधिकारियों के बीच बनी यह सहमति न केवल तत्काल विवाद को खत्म करती है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देती है। यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि डिजिटल युग में किसी भी घटना के कई पहलू सामने आ सकते हैं, लेकिन सही तथ्यों, पारदर्शिता और आपसी संवाद से किसी भी विवाद का समाधान संभव है। फिलहाल, मुंगेली में स्थिति सामान्य हो चुकी है और प्रशासन व सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय स्थापित हो गया है।