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कोरबा के विकास में DMF की बड़ी भूमिका: मंत्री लखनलाल देवांगन बोले- जिले की तरक्की का मजबूत आधार बना फंड

कोरबा जिले के विकास का महत्वपूर्ण आधार है डीएमएफ – मंत्री लखनलाल देवांगन डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित कार्यों को मिली स्वीकृति रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग, आबकारी, सार्वजनिक उपक्रम एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की मुख्य उपस्थिति में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) कोरबा की शासी परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु प्रस्तावित कार्यों की कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया। इस अवसर पर कोरबा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया सहित शासी परिषद के सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं पदेन अध्यक्ष कुणाल दुदावत ने की। बैठक में मंत्री देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए डीएमएफ योजना की व्यवस्था की है, जिसके माध्यम से कोरबा जिले को बड़ी राशि प्राप्त होती है। डीएमएफ अब कोरबा जिले की प्रगति का मजबूत आधार बन चुका है। जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अधोसंरचना विकास जैसे कार्यों को इससे नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग और जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। डीएमएफ मद से स्कूल, आंगनबाड़ी भवन, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण तथा पुल-पुलियों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत कार्यों का समय-सीमा में पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आमजन को शीघ्र लाभ मिल सके। मंत्री देवांगन ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा है कि कोरबा जिले में डीएमएफ के तहत होने वाले सभी कार्य पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूरे हों। निर्माण पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक भी डीएमएफ के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और नए प्रस्तावों को बजट प्रावधान के अनुरूप प्रस्तुत किया जाए। सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि डीएमएफ मद के माध्यम से कोरबा जिले को विकास की नई पहचान प्राप्त होगी। जिले में जहां भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल तथा अन्य आवश्यक क्षेत्रों में राशि की जरूरत है, वहां इस फंड का प्रभावी उपयोग होना चाहिए। उन्होंने सभी कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने पर विशेष जोर दिया। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निर्धारित किए गए केपीआई के अनुरूप तैयार की गई है। जिले में उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों को विशेष महत्व दिया गया है और सभी कार्यों को गुणवत्तापूर्वक तथा समय-सीमा में पूर्ण करने के प्रयास किए जाएंगे। कलेक्टर ने बताया कि डीएमएफ से संबंधित शिकायतों के निराकरण हेतु टोल-फ्री नंबर जारी किया गया है तथा निर्माण पोर्टल के माध्यम से सभी कार्यों की प्रगति देखी जा सकती है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के अभिसरण के साथ उच्च प्राथमिकता वाले विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा। उन्होंने जिले शिक्षा,स्वास्थ्य, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में खनन प्रभावित विद्यार्थियों को दिए जाने वाले लाभ,खेल,अधोसंरचना, बेसलाइन सर्वे, पंचवर्षीय परिपेक्ष्य परियोजना,सड़क सुरक्षा आदि के संबंध में विस्तार से बताया। इस दौरान वनमंडलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव, कुमार निशांत, जिला पंचायत सीईओ एवं पदेन सचिव दिनेश नाग, निगमायुक्त  आशुतोष  पाण्डेय, अपर कलेक्टर देवेन्द्र पटेल, प्रशिक्षु आईएएस तरूण किरण तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी डीएमएफ के सदस्य श्रीमती किरण मरकाम, पार्षद नरेन्द्र देवांगन भी बैठक में शामिल हुए। खनिज संपदा से जनकल्याण की नई उड़ान वर्ष 2026-27 के लिए विकास का खाका तैयार कलेक्टर सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास कोरबा की शासी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें खनिज क्षेत्रों के सतत विकास और प्रभावित समुदायों के कल्याण के लिए वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में यह जानकारी दी गई कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए तीन चरणों में एक व्यापक बेसलाइन सर्वे किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5 विकास खंडों के 782 गाँवों को कवर कर आगामी पाँच वर्षों की परिप्रेक्ष्य योजना तैयार की जाएगी। पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निर्माण पोर्टल का शुभारंभ किया गया है, जो एक डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में जिले की सभी परियोजनाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग और फंड मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेगा।वर्ष 2026-27 के लिए 70 प्रतिशत राशि सीधे तौर पर उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल के लिए आवंटित की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में 255 करोड़ रुपये के बजट से 16 पीएम स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी लैब और नीट-जेईई हेतु आवासीय कोचिंग की सुविधा प्रदान की जाएगी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए 67.18 करोड़ रुपये से मोबाइल मेडिकल यूनिट और एम्बुलेंस सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पेयजल संकट के समाधान हेतु 150 नए ट्यूबवेल और सौर ऊर्जा संचालित पंपों की स्थापना की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एंटी-स्मॉग गन और सघन वृक्षारोपण के माध्यम से ग्रीन बेल्ट विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के अनुरूप, इन सभी प्रयासों का मुख्य लक्ष्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए स्थायी और आत्मनिर्भर आजीविका के नए अवसर सृजित करना है।

तरबूज खाने से बच्चे की मौत, 3 अन्य बच्चे अस्पताल में भर्ती मामले में जांजगीर कलेक्टर ने लिया तत्काल संज्ञान

तरबूज खाने से बच्चे की मौत, 3 अन्य बच्चे अस्पताल में भर्ती मामले में जांजगीर कलेक्टर ने लिया तत्काल संज्ञान जांच के लिए भेजे गए तरबूज के सैंपल स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कर रही अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच रायपुर जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम धुरकोट में तरबूज खाने के बाद एक बच्चे की मृत्यु तथा 3 अन्य बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे ने तत्काल संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम एवं संबंधित एसडीएम को जिला चिकित्सालय जांजगीर भेजा , कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम जांजगीर ने मेडिकल टीम को गांव में संबंधित परिवार के सभी लोगों के स्वास्थ्य जांच के लिए रवाना किया तथा तहसीलदार को गांव में इस बाबत पूरे मामले पर लगातार निगरानी रखने हेतु निर्देशित किया गया। सिविल सर्जन श्री एस. कुजूर ने बताया बच्चों के तरबूज और चिकन खाने बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। एक बच्चे की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो गई, जबकि 3 अन्य बीमार बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है जिनकी हालत अब सामान्य है ।कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित तरबूज के सैंपल जांच हेतु भेज दिए गए हैं। साथ ही मृत बच्चे का पोस्टमार्टम कराया गया है और विसरा सुरक्षित रखा गया है ताकि मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। जिला प्रशासन द्वारा पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है तथा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर निगरानी भी कर रही है।

छत्तीसगढ़ के लाल अजय गुप्ता: तेंदूपत्ता से लेकर IFS तक का सफर

रायपुर छत्तीसगढ़ के वनांचलों से अक्सर संघर्ष की खबरें आती हैं, लेकिन इस बार रायगढ़ से एक ऐसी कहानी निकली है जो उम्मीदों को नई उड़ान दे रही है। संबलपुरी गांव के अजय गुप्ता, जिनका बचपन जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ बीनते हुए बीता, अब देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक भारतीय वन सेवा के अधिकारी बनने जा रहे हैं। अजय ने IFS परीक्षा में ऑल इंडिया 91वीं रैंक हासिल की है। UPSC में भी गाड़े झंडे अजय की कामयाबी केवल IFS तक सीमित नहीं है। उन्होंने इस साल सिविल सेवा परीक्षा यानी UPSC में भी 452वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले अजय ने अपनी स्कूली शिक्षा में भी मेधावी होने का प्रमाण दिया था; उन्होंने 10वीं में 92.66% और 12वीं में 91.40% अंक प्राप्त किए थे। NIT रायपुर ने दिया बड़ा विजन अपनी सफलता का श्रेय अजय एनआईटी रायपुर को देते हैं। अजय का कहना है कि कॉलेज जाने से पहले उनके सपने सिर्फ गांव तक सीमित थे, लेकिन एनआईटी के माहौल ने उन्हें बड़े लक्ष्य तय करने की प्रेरणा दी। आर्थिक तंगी के बावजूद स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं के सहारे उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। छुट्टियों के दौरान वे घर लौटकर परिवार के साथ आज भी आजीविका के कामों में हाथ बंटाते थे। बस्तर के अनुभव ने दिखाया रास्ता अजय ने बताया कि बस्तर में ग्रामीण विकास के कार्यों से जुड़ने और वनों के साथ उनके पुराने जुड़ाव ने ही उन्हें वन सेवा चुनने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अजय की सफलता को वनवासी परिवारों के संघर्ष की जीत बताया है, वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे दूरस्थ क्षेत्रों की आकांक्षाओं का प्रतीक कहा है। आर्थिक संघर्ष के बीच शिक्षा को बनाया हथियार अजय ने इस साल सिविल सेवा परीक्षा भी 452वीं रैंक के साथ पास की है। NIT ने अजय को बड़े लक्ष्य रखने की नई सोच दी। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, 10वीं कक्षा में 92.66% और 12वीं कक्षा में 91.40% अंक हासिल किए। अजय के इस बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रायपुर में दाखिला मिला, जहां स्कॉलरशिप ने तीन साल तक उनकी पढ़ाई में आर्थिक मदद की। अजय ने पहले उनके सपने सिर्फ उनके गांव तक ही सीमित थे, लेकिन NIT ने उनकी सोच का दायरा बढ़ा दिया। NIT ने बदली सोच उन्होंने कहा कि NIT में दाखिला लेने के बाद ही मुझे यह एहसास हुआ कि मैं और भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता हूं। उन्होंने आगे बताया कि जंगल से उनका जुड़ाव और बस्तर में ग्रामीण विकास के लिए किए गए कामों ने ही उन्हें सिविल सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय करने में मदद की। पढ़ाई के साथ-साथ अपने परिवार की मदद करने के बीच तालमेल बिठाते हुए, वह छुट्टियों के दौरान घर लौटकर रोज़ी-रोटी से जुड़े कामों में हाथ बंटाते थे। राज्य सरकार की छात्रवृत्तियों और वनोपज से जुड़ी सहायता योजनाओं ने उन्हें अपनी परीक्षाओं पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अजय की यह सफलता जंगल में रहने वाले परिवारों के मजबूत हौसले को दर्शाती है, जबकि वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की ऊंची आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। सरकारी योजनाओं ने पंखों को दी मजबूती अजय की इस लंबी उड़ान में छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने कैशलेस सपोर्ट और आर्थिक संबल प्रदान किया। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई के दौरान इस छात्रवृत्ति ने आर्थिक बोझ को कम किया। राज्य शासन की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता मिली, जिससे वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके। अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ जिले के अजय गुप्ता को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि अजय ने न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि एक ऐसा युवा जिसने स्वयं जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित किया, आज उन्हीं वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। हमारी सरकार की लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान की है। अजय की उपलब्धि यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर हमारे ग्रामीण अंचल के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं। वन मंत्री ने जताया गौरव, हजारों परिवारों के सपनों का प्रतीक वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अजय गुप्ता को फोन कर बधाई दी और उनकी उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। मंत्री जी ने कहा कि अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के उन हजारों वनाश्रित परिवारों की जीत है जो जंगलों के बीच रहकर बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करता है कि हमारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि ऐसे ही सशक्त भविष्य का निर्माण करना है। युवाओं के लिए नया आदर्श अजय गुप्ता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं जो सीमित संसाधनों में IFS जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत सच्ची हो और शासन का साथ मिले, तो वनांचल का कोई भी युवा देश के शीर्ष पद तक पहुँच सकता है।    

BJP में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए छत्तीसगढ़ से पांच नामों पर नजर, 12 मई को होगी बैठक

रायपुर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन इस महीने के आखिरी सप्ताह तक होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ से पांच नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया जा सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश 12 मई को प्रदेश दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के शीर्ष नेताओं से बैठक कर इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं। कई नेताओं के नाम चर्चा में जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय कार्यकारिणी के पदेन सदस्य रहेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अन्य पांच सदस्यों के नाम तय करेंगे। कोंडागांव विधायक और पूर्व मंत्री लता उसेंडी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। वहीं खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, बस्तर सांसद महेश कश्यप, रेणुका सिंह और भावना बोहरा के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा को भी कार्यकारिणी में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। 12 और 13 मई को अहम बैठकें छत्तीसगढ़ भाजपा की महत्वपूर्ण बैठकें 12 और 13 मई को रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित होंगी। 12 मई को शाम छह बजे कोर कमेटी की बैठक होगी, जबकि शाम 7:30 बजे प्रदेश पदाधिकारियों की चर्चा आयोजित की जाएगी। 13 मई को सुबह 10 बजे प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी। भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कंडेय ने बताया कि बैठकों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन मिलेगा।

वीडियो कॉल सुविधा से परिवार से मिली महिला कैदी, रायपुर जेल में भावुक पल

रायपुर मातृ दिवस (Mother's Day 2026) के अवसर पर रायपुर महिला केंद्रीय जेल में बंद महिला बंदियों को बड़ी सौगात मिली। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप रविवार को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से अब महिला बंदी जेल परिसर से ही अपने स्वजन और अधिवक्ताओं से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर सकेंगी। पहले चरण में रायपुर महिला केंद्रीय जेल के साथ कवर्धा, जशपुर समेत सात जेलों में यह सुविधा शुरू की गई है। यह व्यवस्था जेल विभाग और BSNL के बीच हुए एमओयू के तहत लागू की गई है। परिवार को देखकर छलक उठीं आंखें वीडियो कॉलिंग सिस्टम के उद्घाटन के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। कई महिला बंदियों की आंखें नम हो गईं, जब उन्होंने वर्षों बाद अपने परिवार के सदस्यों को स्क्रीन पर देखा और उनसे बातचीत की। जेल अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिलेगी और वे भावनात्मक रूप से अपने परिवार से जुड़े रह सकेंगे। कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनने की पहल कार्यक्रम के दौरान निश्चय योजना के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 38 महिला बंदियों को कौशल प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल रिहाई के बाद बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी। मदर्स डे के मौके पर जेल प्रशासन ने अपनी माताओं के साथ जेल में रह रहे 14 बच्चों को विशेष उपहार भी भेंट किए। बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ निश्चय कार्यक्रम के तहत जेल में बंद युवाओं को अपराध की दुनिया से दूर कर रोजगार के योग्य बनाने के लिए कंप्यूटर प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। रविवार को केंद्रीय और महिला जेल रायपुर में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 67 बंदियों, जिनमें 38 महिलाएं और 29 पुरुष शामिल हैं, को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय जेल में कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। यहां बंदियों को आधुनिक डिजिटल शिक्षा प्रदान की जाएगी। बंदियों के लिए लोन मेला भी लगेगा बंदियों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 13 मई को इंडियन ओवरसीज बैंक की ओर से जेल परिसर में लोन मेला आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य रिहा होने वाले बंदियों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री, बीएसएनएल के विजय छबलानी, महिला जेल प्रभारी गरिमा पांडेय सहित जेल विभाग का स्टाफ उपस्थित रहा।  

छत्तीसगढ़ में परंपरा और विवाद: शव दफनाने के लिए जमीन न मिलने से लोगों में गुस्सा

जगदलपुर  बस्तर के गांवों में कभी सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति की पहचान माने जाने वाले सामुदायिक आयोजन अब विवादों की वजह बनने लगे हैं। भानपुरी पंचायत के करंदोला गांव में एक ईसाई मत में मतांतरित महिला के शव को दफनाने को लेकर उपजा विवाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। यह मामला केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बस्तर में बढ़ती वैचारिक दूरी और सामाजिक बदलाव को फिर उजागर कर दिया। ग्रामीणों ने ग्राम परंपरा का दिया हवाला गांव के लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि गांव की जमीन पर ईसाई रीति से शव दफनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ग्रामीणों का तर्क था कि गांव की परंपरागत व्यवस्था, रीति-रिवाज और ग्राम सभा की सहमति सर्वोपरि है। उनका कहना था कि सामुदायिक सहमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब ग्रामीणों को जानकारी मिली कि वन विभाग की फेंसिंग युक्त भूमि पर शव दफनाने की तैयारी की जा रही है। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि तार फेंसिंग हटाकर गड्ढा भी खोद दिया गया था। इसके बाद गांव में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। प्रशासन और पुलिस ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता गया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने अंततः शव को अंतिम संस्कार के लिए जगदलपुर स्थित करकापाल कब्रिस्तान भेज दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि मतांतरण के बाद गांव की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और स्थानीय नियमों को लगातार चुनौती दी जा रही है। उनका कहना था कि इससे गांवों की सांस्कृतिक पहचान कमजोर हो रही है और सामाजिक विभाजन बढ़ रहा है। संगठनों ने उठाए पेसा कानून के मुद्दे घटना के बाद बजरंग दल विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप ने कहा कि बस्तर पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून और ग्राम परंपराओं को विशेष महत्व प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मिशनरी संगठन गांवों की सामाजिक संरचना को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं विहिप जिला सह मंत्री घनश्याम नाग ने कहा कि हर समाज को स्थानीय परंपराओं और ग्राम व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में स्पष्ट नीति तैयार करने की मांग की, ताकि भविष्य में सामाजिक तनाव की स्थिति न बने। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद बस्तर संभाग में पिछले कुछ वर्षों में मतांतरण और धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों में सामाजिक बहिष्कार, सामुदायिक आयोजनों में मतभेद और अंतिम संस्कार को लेकर तनाव की घटनाएं लगातार चर्चा में रही हैं। पिछले वर्ष नारायणपुर के एड़का गांव में शव दफनाने को लेकर हुए विवाद के दौरान तत्कालीन एसपी सदानंद घायल हो गए थे। इस मामले में कई ग्रामीणों की गिरफ्तारी भी हुई थी। पेसा कानून और ग्राम सभा पर फिर चर्चा करंदोला विवाद के बाद एक बार फिर पेसा कानून और ग्राम सभा की शक्तियां चर्चा में आ गई हैं। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के कारण बस्तर में ग्राम सभा और पारंपरिक व्यवस्था को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की भूमि, सामाजिक परंपराओं और सामुदायिक फैसलों में ग्राम सभा की सहमति सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। यही वजह रही कि करंदोला गांव में लोग अपने पारंपरिक नियमों का हवाला देते हुए विरोध पर अड़े रहे।

छत्तीसगढ़ के पेंड्रा में इतिहास की खोज: 500 वर्षीय श्रीमद्भागवत गीता और कई पांडुलिपियां बरामद

पेंड्रा  भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जीपीएम जिले में प्राचीन, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर सर्वेक्षण कर दुर्लभ पांडुलिपियों का संकलन एवं संरक्षण किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत पेंड्रा में राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह तथा पुरानी बस्ती वार्ड क्रमांक चार निवासी प़ं मोहन दत्त शर्मा के घर से 200 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। डिजिटल संरक्षण के माध्यम से सुरक्षित किया गया इन पांडुलिपियों को कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन के समक्ष डिजिटल संरक्षण के माध्यम से सुरक्षित किया गया। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में “ज्ञानभारतम” अभियान के जिला समन्वयक डाॉ राहुल गौतम के नेतृत्व में सर्वेक्षण टीम ने पंडित मोहन दत्त शर्मा के घर पर लगभग 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित “अथ श्रीमद्भागवत गीता” सहित कई प्राचीन पांडुलिपियां खोजीं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र धरोहर है कलेक्टर डॉ. देवांगन ने इस दुर्लभ धार्मिक धरोहर की प्राप्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्रीफल और दक्षिणा अर्पित कर ग्रंथ को नमन किया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र धरोहर है। प्राप्त पांडुलिपियों में “लग्न चंद्रिका”, “अथश्रीभागवतमहात्म्य”, “यद्वादशमहावाक्य”, “रामचंद्राय नमः” तथा अन्य धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथ शामिल हैं। पांडुलिपियों की फोटोग्राफी भी कराई गई इन सभी पांडुलिपियों की जियो टैगिंग कर “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से डिजिटल संरक्षण किया गया। यह ग्रंथ पंडित मोहन दत्त शर्मा के स्वामित्व में ही सुरक्षित रहेंगे। धार्मिक पांडुलिपियों के संरक्षण और स्मृति स्वरूप पंडित मोहन दत्त शर्मा के संयुक्त परिवार के सदस्यों के साथ पांडुलिपियों की फोटोग्राफी भी कराई गई। राजस्व और वन विभाग के पुराने नक्शे भी प्राप्त हुए इसी दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के निवास पर लगभग 200 वर्ष पुरानी हस्तलिखित जमींदारी वंशावली तथा पेंड्रागढ़ के राजस्व और वन विभाग के पुराने नक्शे भी प्राप्त हुए। इन दस्तावेजों का भी डिजिटल संरक्षण किया गया। कलेक्टर डॉ. देवांगन ने राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह एवं उनकी पत्नी शिखा सिंह से ऐतिहासिक धरोहरों और पारिवारिक पृष्ठभूमि पर चर्चा की। इस अवसर पर जसीईओ मुकेश रावटे, एसडीएम विक्रांत अंचल, डिप्टी कलेक्टर अमित बेक, सीएमओ अमनदीप मिंज सहित सर्वे टीम के सदस्य उपस्थित थे। पांडुलिपियां का अभियान के तहत हुआ डिजिटल संरक्षण  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक सफलता प्राप्त हुई है. जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और जिला समन्वयक डॉ. राहुल गौतम के नेतृत्व में सर्वेक्षण टीम ने पेंड्रा की पुरानी बस्ती में स्थित पंडित मोहन दत्त शर्मा और राजा उपेंद्र बहादुर सिंह के निवास स्थानों से 200 से 500 साल पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां बरामद की हैं।  इन अमूल्य धरोहरों को कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां इनका जियो-टैगिंग कर ‘ज्ञानभारतम’ एप के माध्यम से डिजिटल संरक्षण सुनिश्चित किया गया. ​सर्वेक्षण के दौरान पंडित मोहन दत्त शर्मा के घर से लगभग 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित ‘श्रीमद्भागवत गीता’ के साथ-साथ लग्न चंद्रिका, शीघ्रबोध और सारस्वत तद्धित प्रक्रिया जैसी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां प्राप्त हुईं।  भौगोलिक इतिहास को समझने में अत्यंत सहायक कलेक्टर ने इन पवित्र ग्रंथों की प्राप्ति पर हर्ष व्यक्त करते हुए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पंडित शर्मा के दस सदस्यीय संयुक्त परिवार के साथ इस उपलब्धि को साझा किया. वहीं, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेंद्र बहादुर सिंह के घर से पेंड्रागढ़ की 200 साल पुरानी जमींदारी वंशावली और राजस्व व वन विभाग के ऐतिहासिक नक्शे मिले हैं, जो क्षेत्र के राजनीतिक और भौगोलिक इतिहास को समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।  क्या होता है इनका महत्व? दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां ऐसे पुराने दस्तावेज या किताबें होती हैं, जिन्हें प्राचीन समय में हाथ से लिखा जाता था. उस दौर में छपाई मशीनें नहीं होती थीं, इसलिए विद्वान, पंडित या लेखक कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र या कपड़े पर हाथ से धार्मिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जानकारी लिखते थे. इन पांडुलिपियों में धर्मग्रंथ, ज्योतिष, आयुर्वेद, इतिहास, संस्कृत साहित्य, गणित और समाज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं. कई पांडुलिपियां सैकड़ों साल पुरानी होती हैं, इसलिए उन्हें दुर्लभ और ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है।  इनका महत्व इसलिए भी ज्यादा होता है क्योंकि ये हमें पुराने समय की भाषा, संस्कृति, परंपरा और ज्ञान के बारे में जानकारी देती हैं. कई बार इनमें ऐसी जानकारियां मिलती हैं, जो किसी छपी हुई किताब में उपलब्ध नहीं होतीं।   

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने दी चेतावनी, सुप्रीम कोर्ट आदेश का पालन जरूरी

बिलासपुर  हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन को आदेश दिया है कि नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को 15 दिनों के भीतर नियमित पद के अनुरूप वेतन दिया जाए। यह मामला लंबे समय से चल रहे नियमितीकरण विवाद और पूर्व आदेशों के पालन नहीं होने को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं का है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट द्वारा आदेश पारित किए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान सभी लाभ अब तक नहीं दिए हैं। पक्षकारों ने कहा कि 6 मार्च 2023 के आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि संबंधित कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी माना जाएगा तथा उनकी सेवाओं का नियमितीकरण 26 अगस्त 2008 से प्रभावी समझा जाएगा। साथ ही उन्हें नियमित कर्मचारियों के बराबर सभी सुविधाएं और लाभ भी दिए जाने थे। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर निर्देश जानकारी के अनुसार,  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को न तो नियमित किया गया है और न ही देयकों का पेमेंट किया गया है। जिसके खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट SLP और रिव्यू पीटीशन खारिज कर चुका जानकारी के अनुसार, सेंट्रल यूनिवर्सिटी की ओर से दायर एसएलपी और रिव्यू पीटीशन सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। फिर भी अब तक नियमित कर्मचारियों की तहर दैनिभो कर्मियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि, साल 2023 में पारित आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय अब तक कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी के समान पूरा लाभ नहीं दे रहा है। यूनिवर्सिटी ने जबाव में दी सफाई मामले में  यूनिवर्सिटी की ओर से वकील ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारियों का नियमितीकरण कर दिया गया है, लेकिन कुछ दस्तावेजों के सत्यापन की प्रोसेस बाकी है। विश्वविद्यालय ने सफाई दी कि कर्मचारियों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे,जो उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे लाभ देने में देरी हो रही है। इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि संबंधित आदेश और पत्राचार कर्मचारियों को उपलब्ध ही नहीं कराया गया था। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिए दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल 2026 का पत्राचार 12 मई तक सभी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद कर्मचारियों को एक हफ्ते के भीतर जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।  हाईकोर्ट ने कहा- 15 दिन में नियमित पद का वेतन दिया जाए सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी भले नियमितीकरण का दावा कर रही हो, लेकिन अब तक कर्मचारियों को नियमित पद का वेतन नहीं दिया जा रहा है। इस पर विवि की ओर से कहा गया कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी कर ली जाएगी और जो कर्मचारी नियमित पद पर कार्यरत हैं, उन्हें नियमित पद के अनुसार वेतन दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने इस यूनिवर्सिटी के पक्षकार वकीलों के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया और कहा कि नियमित कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे याचिकाकर्ताओं को 15 दिनों के भीतर नियमित पद का वेतन भुगतान किया जाए। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा इस आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका और पुनर्विचार याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है। इसके बावजूद कर्मचारियों को पूरा लाभ नहीं मिल पाया। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कहा गया कि कर्मचारियों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण प्रक्रिया में देरी हुई। इस पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल 2026 का पत्र सभी याचिकाकर्ताओं को 12 मई तक उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे। सुनवाई के दौरान कर्मचारियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि विश्वविद्यालय नियमितीकरण का दावा तो कर रहा है, लेकिन उन्हें अब भी नियमित पद के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा। इस पर विश्वविद्यालय ने अदालत को भरोसा दिलाया कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी और नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को उसी अनुरूप वेतन दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट कर दिया कि जो कर्मचारी नियमित पदों पर कार्य कर रहे हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर नियमित वेतनमान का लाभ दिया जाना अनिवार्य होगा।

राजस्थान-बंगाल के सिस्टम का असर: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन मौसम रहेगा खराब

रायपुर  छत्तीसगढ़ का मौसम इन दिनों काफी बदल चुका है। राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक जो ट्रफ लाइन बनी है और बिहार से आंध्र प्रदेश तक का एक्टिव साइक्लोनिक सर्कुलेशन, इसका सीधा असर हमारे प्रदेश पर देखने को मिल रहा है। इसी कारण शाम और रात के समय कई जगहों पर अचानक बादल छाने, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने में आ रहा है। मौसम विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, और बिजली गिरने का खतर भी बना रहेगा। लोगों को खासतौर पर खुले मैदानों और खेतों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि मौसम के इस बदलाव से अचानक जोखिम बढ़ सकता है। कई जगहों पर हल्की बारिश और थंडरस्टॉर्म जैसी स्थिति बन रही है। हालांकि, मौसम विभाग के मुताबिक 11 मई के बाद इसकी तीव्रता थोड़ी कम होने लगेगी। फिर भी अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी, जिससे मौसम को पूरी तरह स्थिर कहना मुश्किल है। पिछले 24 घंटों में तापमान में कोई खास बदलाव नहीं आया है, लेकिन गर्मी का असर बरकरार है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे गर्म हवाओं का असर फिर से बढ़ेगा। इसी बीच, दुर्ग में कल का तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रहा, जो उस दिन का सबसे गर्म तापमान था। वहीं, पेंड्रा रोड में 19.2 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडी स्थिति रही। रायपुर समेत कई शहरों में दिन के समय बादल छाए रहे और शाम तक मौसम ने करवट ली। राजस्थान से बंगाल तक बनी ट्रफ लाइन और बिहार से आंध्र प्रदेश तक एक्टिव साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण छत्तीसगढ़ का मौसम बदला हुआ है। इसके प्रभाव से शाम और रात में बादल, गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन रही है। इस बीच मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कुछ इलाकों में गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना है, हालांकि आज (11 मई) के बाद से थंडरस्टॉर्म की एक्टिविटी धीरे-धीरे कम होगी। मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में पारा 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर फिर तेज होगा। पिछले 24 घंटे में 39 डिग्री के साथ दुर्ग सबसे गर्म रहा। वहीं 19.2 डिग्री के साथ पेंड्रा रोड सबसे ठंडा रहा। अगर हम राजधानी रायपुर की बात करें, तो यहां दिन में आंशिक बादल छाए रहने की उम्मीद है। अधिकतम तापमान लगभग 40 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। भिलाई और अंबिकापुर जैसे क्षेत्रों में हाल ही में तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई है, जिससे कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ। कुछ स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली की आपूर्ति में बाधा जैसी समस्याएं भी सामने आईं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 5 दिनों तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। कुछ जगहों पर बिजली गिरने और तेज हवाओं का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। हालांकि, 11 मई के बाद धीरे-धीरे थंडरस्टॉर्म की गतिविधियां कम होने लगेंगी। लेकिन तब तक लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खासकर, शाम और रात के समय बाहर निकलते वक्त सावधानी बरतें, क्योंकि मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है।

एमसीबी में गर्मी से राहत, हैंडपंप की मरम्मत से गांवों में पानी की सुविधा बहाल

एमसीबी भीषण गर्मी और बढ़ते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग की टीम द्वारा विकासखंड भरतपुर के ग्राम बड़गांवकला, घाटमा, केसौडा, जनौरा एवं ढाबतुमाड़ी में हैंडपंपों की मरम्मत और निरीक्षण कार्य किया गया। गर्मी के मौसम में पेयजल की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए खराब एवं बंद पड़े हैंडपंपों को प्राथमिकता के आधार पर सुधार कर पुनः चालू किया जा रहा है। विभागीय अमले की तत्परता से ग्रामीणों को समय पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है, जिससे उन्हें काफी राहत मिली है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं विभागीय टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समय पर मरम्मत कार्य होने से पानी की समस्या काफी हद तक दूर हुई है। विभाग द्वारा लगातार गांवों का निरीक्षण कर पेयजल व्यवस्था पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि भीषण गर्मी के दौरान किसी भी क्षेत्र में जल संकट उत्पन्न न हो। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बताया कि जिलेभर में हैंडपंप सुधार एवं रखरखाव का कार्य निरंतर जारी है और जहां से भी खराब हैंडपंप की सूचना प्राप्त हो रही है, वहां तत्काल टीम भेजकर समस्या का समाधान किया जा रहा है।