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प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने और उन्हें हरसंभव मंच उपलब्ध कराने सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री साय

रायपुर.  भारत को कबड्डी विश्वकप और एशियन चैंपियनशिप दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली संजू देवी को राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी खिलाड़ी को इतनी बड़ी प्रोत्साहन राशि दी गई है। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें यह राशि सौंपी। साव ने इस दौरान बिलासपुर के चिंगराजपारा कबड्डी क्लब को कबड्डी मैट भी प्रदान किया। संजू देवी को उनके शानदार खेल की वजह से पिछले साल नवम्बर में बांग्लादेश में आयोजित कबड्डी विश्वकप में मोस्ट वेल्युबल प्लेयर चुना गया था। कबड्डी विश्वकप के फाइनल में भारत को मिले 35 प्वाइंट्स में से 16 प्वाइंट्स अकेले संजू ने दिलाए थे। सेमी-फाइनल सहित अन्य मैचों में भी उन्होंने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत को चैंपियन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।  संजू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्य की पहली कबड्डी खिलाड़ी है। कबड्डी विश्व कप के साथ ही उन्होंने पिछले साल मार्च में ईरान में आयोजित एशियन कबड्डी चैम्पियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था और भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। कोरबा के छोटे से गांव केराकछार की श्रमिक दंपति की संतान 23 साल की संजू राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बिलासपुर के बहतराई आवासीय बालिका कबड्डी अकादमी में जुलाई-2023 से प्रशिक्षण ले रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संजू देवी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने और उन्हें हरसंभव मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य की बेटियां आज अपने दमखम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच रही हैं, और संजू देवी इसका जीवंत उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि संजू जैसी प्रतिभाएं आने वाले समय में प्रदेश और देश का नाम और अधिक रोशन करेंगी तथा युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने संजू देवी को सम्मानित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य में लगातार खेल और खिलाड़ियों की तरक्की व बेहतरी के लिए काम हो रहे हैं। संजू देवी ने अपने बेहतरीन खेल की बदौलत बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने अपने उत्कृष्ट खेल से देश को दो-दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक दिलाया है और अपने बेहतरीन खेल कौशल से मोस्ट वेल्युबल प्लेयर बनी हैं। छत्तीसगढ़ की बेटी का यह प्रदर्शन राज्य का मान-सम्मान और गौरव बढ़ाने वाला है। उन्होंने संजू देवी को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि वे आने वाले समय में भी इसी तरह हमारे राज्य और देश का नाम रोशन करती रहेंगी।    उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि राज्य में जब ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी हों तो हमारी जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ाएं और प्रोत्साहित करें। हमारे खिलाड़ियों को… और विशेषकर लड़कियों को अच्छा खेलने का प्रोत्साहन मिले, इसके लिए सरकार संजू देवी को 50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दे रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने अभी हाल ही में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शानदार मेजबानी की है। बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक के भी वृहद आयोजन किए गए हैं।  साव ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में लगातार खेल प्रतियोगिताएं चलती रहें, चाहे वो सरकार के माध्यम से हों, अन्य संस्थाओं के माध्यम से हों या खेल संघों के माध्यम से हों। खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने बजट में पर्याप्त प्रावधान किए हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती तनुजा सलाम, छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के अध्यक्ष शशिकांत बघेल और संजू देवी के कोच दिल कुमार राठौर सहित राज्य शासन के विभिन्न अकादमियों में प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ी, कबड्डी संघ के पदाधिकारी एवं विभागीय अधिकारी भी सम्मान समारोह में मौजूद थे। जुनून, कड़ी मेहनत, मानसिक मजबूती, समर्पण और संघर्ष का नाम संजू देवी रावत दमदार खेल और विपक्षी टीम के पाले में जाकर अपनी टीम के लिए अंक बटोरने की काबिलियत की वजह से संजू देवी को नवम्बर-2025 में बांग्लादेश में हुए कबड्डी विश्वकप में टूर्नामेंट का मोस्ट वेल्युबल प्लेयर चुना गया। फाइनल और सेमीफाइनल सहित शुरूआती मैचों में भी निर्णायक क्षणों में उसने टीम की जीत सुनिश्चित करने वाले अंक बटोरे। संजू छत्तीसगढ़ की पहली अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी है। बांग्लादेश में कबड्डी विश्व कप खेलने के साथ ही वह मार्च-2025 में ईरान में हुए एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में देश के लिए खेल चुकी है। ईरान में भी उसने उम्दा प्रदर्शन किया था।  संजू ने गरीबी व अभावों के बीच संघर्ष और कड़ी मेहनत से ये उपलब्धियां हासिल की हैं। वे खेल के प्रति अपने जुनून, समर्पण, अनुशासन, मानसिक मजबूती, कठोर परिश्रम और संघर्ष से यहां तक पहुंची हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के अपने जुनून और जज्बे के बीच उसने जो मानसिक मजबूती दिखाई है, वह दुर्लभ है। अपनी लगन, कड़ी मेहनत और कबड्डी के प्रति जुनून से उन्होंने एक छोटे से गांव से निकलकर दो-दो अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत को चैंपियन बनाने में महती भूमिका निभाई है।  संजू की सफलता और उपलब्धियां खेल में अपना करियर बनाने की सोच रहे बच्चों और युवाओं को प्रेरित करने वाली है। बिलासपुर के शासकीय कबड्डी अकादमी में अपने खेल को तराशने वाली संजू कहती है कि बड़े स्तर पर सफल होने के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। बाधाओं के बीच पहली सीढ़ी पार करने के बाद ही आपको दूसरी सीढ़ी चढ़ने का मौका मिलता है। लगातार अच्छे प्रदर्शन से मिली भारतीय टीम में जगह संजू ने अपने गांव केराकछार से कबड्डी विश्व कप तक के सफर के बारे में बताया कि उन्होंने जनवरी-2024 में कोलकाता में आयोजित ईस्ट जोन इंटरयुनिवर्सिटी टूर्नामेंट में और जनवरी-2025 में भटिंडा में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में बिलासपुर विश्वविद्यालय की ओर से तथा विशाखापट्टनम, तमिलनाडु, नागपुर, महासमुंद और भजियापार (महाराष्ट्र) के ऑल इंडिया टूर्नामेंट में राज्य की ओर से भागीदारी की है। वर्ष-2024 में छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ द्वारा आयोजित चयन स्पर्धा में अच्छे प्रदर्शन के फलस्वरूप इंडिया कैंप के लिए संजू का चयन हुआ। इंडिया … Read more

तेज रफ्तार का कहर: सूरजपुर में नियंत्रण खोकर घर में घुसा वाहन, अधिकारी और पुलिसकर्मी जख्मी

सूरजपुर. छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में आज एसडीएम की कार दुर्घटना का शिकार हो गई. बाइक सवार को बचाने उनकी सरकारी कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे घर में जा घुसी. हादसे में रामानुजनगर एडीएम अजय माडियम सहित दो आरक्षक और वहान चालक घायल हो गए हैं. जानकारी के मुताबिक, एसडीएम अजय मडियम रामानुजनगर से सूरजपुर की ओर आ रहे थे. इसी दौरान देवनगर गांव में सामने से आ रहे एक बाइक सवार को बचाने के लिए एसडीएम की कार अनियंत्रित हो गई और वाहन एक मकान में जा घुसी. गनीमत रही कि उस वक्त घर पर कोई नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया. इस दुर्घटना में एसडीएम सहित अन्य लोगो को मामूली चोटें आई है. हादसे की सूचना पर कलेक्टर मौके पर पहुंचे और अपनी वाहन से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया.  जिनका उपचार जिला चिकित्सालय में जारी है.

अम्बिकापुर : भाषा के आधार पर भेदभाव करने वाले किड्स एकेडमी पर कार्रवाई, 1 लाख रुपये का जुर्माना

अम्बिकापुर : भाषा के आधार पर भेदभाव करने वाले किड्स एकेडमी पर कार्रवाई, 1 लाख रुपये का जुर्माना अम्बिकापुर    भाषा के आधार पर बालक को प्रवेश देने से इंकार करने के संबंध में सोशल मीडिया तथा विभिन्न न्यूज चैनलों के माध्यम से सामने आए मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर  अजीत वसंत ने तत्काल जांच के निर्देश दिए । कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रकरण की विस्तृत जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी डॉ दिनेश कुमार झा ने आदेश जारी किया गया है, जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया कि स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजूकेशन सोसायटी) चोपड़ापारा अम्बिकापुर द्वारा 04 वर्ष के एक मासूम बच्चे को विद्यालय में प्रवेश देने से इस आधार पर इंकार किया गया कि वह हिन्दी में बातें नहीं कर पाता तथा स्थानीय सरगुजिहा भाषा में बात करता है। संस्था द्वारा बच्चे के पिता से यह भी कहा गया कि इस विद्यालय में बड़े घर के बच्चे पढ़ते हैं और शिक्षक बच्चे की बातें नहीं समझ पा रहे हैं, इसलिए उसे प्रवेश नहीं दिया जा सकता। इस प्रकार भाषा के आधार पर किसी बालक के साथ किया गया भेदभाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के विपरीत तथा पूर्णतः अनुचित एवं अस्वीकार्य पाया गया। इस संबंध में संस्था से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि संस्था बिना विभागीय मान्यता के संचालित हो रही थी तथा शाला प्रबंधन एवं शिक्षकों द्वारा अपनी गलती स्वीकार की गई। प्राप्त शिकायत की जांच हेतु श्रीमती रूमी घोष, वरिष्ठ प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केदारपुर अम्बिकापुर की अध्यक्षता में जांच दल गठित किया गया। जांच दल द्वारा भी समाचारों में प्रसारित घटना की पुष्टि करते हुए संस्था के बिना मान्यता संचालन की जानकारी दी गई। उक्त कृत्य को निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया। अतः निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा-18 (5) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजूकेशन सोसायटी) चोपड़ापारा अम्बिकापुर पर 1,00,000 रुपये (एक लाख रुपये) का आर्थिक दण्ड अधिरोपित किया गया है तथा आगामी आदेश तक संस्था का संचालन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देशित किया है कि अधिरोपित आर्थिक दण्ड शासन के खजाने में चालान के माध्यम से जमा कर उसकी प्रति प्रस्तुत की जाए। साथ ही विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, अम्बिकापुर को निर्देश दिए गए हैं कि संस्था में अध्ययनरत बच्चों के पालकों से संपर्क कर उनके बच्चों को अन्य उपयुक्त विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित करें।

रवि सिंह राजपूत बने छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद में नामांकन समिति के अध्यक्ष, एक साथ मिली कई अहम जिम्मेदारियां

बिलासपुर.  छत्तीसगढ़ के विधि जगत में एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। युवा एवं ऊर्जावान अधिवक्ता  रवि सिंह राजपूत को छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद में नामांकन समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें परिषद की विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों में सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जो उनके प्रति परिषद के विश्वास और उनके उत्कृष्ट कार्यों का प्रमाण है। रवि सिंह राजपूत को न केवल नामांकन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, बल्कि उन्हें परिषद के कार्यकारिणी सदस्य के रूप में भी शामिल किया गया है। इसके अलावा उन्हें विधिक सहायता समिति (लीगल एड) का नामित सदस्य बनाया गया है, जहां वे समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्गों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनकी जिम्मेदारियों का दायरा यहीं तक सीमित नहीं है। उन्हें प्रिविलेज समिति, अधिवक्ता कल्याण समिति, वित्त समिति और परीक्षण समिति में भी सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। साथ ही वे नियम निर्माण समिति, लेजिस्लेशन एवं रिफॉर्म समिति तथा समन्वय समिति में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इतनी बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि परिषद को उनकी कार्यक्षमता, नेतृत्व क्षमता और ईमानदारी पर पूर्ण विश्वास है। कम समय में उन्होंने विधि क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है, जिसके चलते उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिवक्ता समुदाय में उनके इस चयन को लेकर खुशी की लहर है। उनके सहयोगियों और समर्थकों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक कदम बताया है। उनका मानना है कि रवि सिंह राजपूत के नेतृत्व में परिषद के कार्यों में पारदर्शिता, गति और प्रभावशीलता आएगी। इस अवसर पर रवि सिंह राजपूत ने परिषद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे उन्हें सौंपी गई सभी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा करना, विधिक व्यवस्था को मजबूत बनाना और आम जनता को सुलभ एवं त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में कार्य करना है। उनकी इस उपलब्धि से यह स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ के विधि क्षेत्र में युवा नेतृत्व तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में ऐसे ही युवा अधिवक्ता प्रदेश की न्याय व्यवस्था को नई दिशा देंगे।

रायपुर: बंदूक से विकास की ओर, सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी

रायपुर : बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी रायपुर सुकमा जिले में वन विभाग की एक सराहनीय पहल ने विकास और पुनर्वास की नई मिसाल पेश की है। वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार किया गया तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है। सुकमा नगर से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान पहले उपेक्षित और जर्जर था, लेकिन वन विभाग के प्रयासों से इसे एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। यहाँ बनाए गए आकर्षक टापू और प्राकृतिक वातावरण अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इस केंद्र की सबसे खास पहल है “तुंगल नेचर कैफे”, जिसे ‘आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाएँ संचालित कर रही हैं। इनमें 5 महिलाएँ वे हैं जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 5 महिलाएँ नक्सल हिंसा से प्रभावित रही हैं। इन सभी को जगदलपुर और सुकमा के संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया गया है। आज ये महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। जो महिलाएँ कभी संघर्ष और भय के माहौल में थीं, वे अब स्वावलंबन और आत्मसम्मान की मिसाल बन गई हैं। इस पर्यटन केंद्र की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर 2025 को शुरू होने के बाद केवल तीन महीनों में, 30 मार्च 2026 तक यहाँ 8 हजार 889 पर्यटक आए। इस दौरान केंद्र ने लगभग 2.92 लाख रूपए की आय भी अर्जित की। पर्यटक यहाँ स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेने के साथ-साथ तुंगल डैम में कयाकिंग, पैडल बोटिंग और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव कर रहे हैं। यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। तुंगल इको-पर्यटन केंद्र न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि यह उन महिलाओं के साहस, आत्मविश्वास और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ मानव विकास को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। बस्तर की बदलती तस्वीर में यह केंद्र एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर उभरा है।

रायपुर : महिला सशक्तीकरण के लिए टाउन-हॉल बैठकें, नारी शक्ति वंदन सम्मेलन और रोड-शो होंगे आयोजित

रायपुर : महिला सशक्तीकरण के लिए टाउन-हॉल बैठकें, नारी शक्ति वंदन सम्मेलन और रोड-शो होंगे आयोजित नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को जारी किए निर्देश महिलाओं के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक सशक्तीकरण हेतु गहन जन-जागरूकता अभियान के आयोजन और समन्वय के लिए दिए निर्देश रायपुर  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने महिला सशक्तीकरण के लिए टाउन-हॉल बैठकों, नारी शक्ति वंदन सम्मेलनों और रोड-शोज के आयोजन एवं आवश्यक समन्वय के लिए राज्य के सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने मंत्रालय से सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी परिपत्र में कहा है कि महिलाओं के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक सशक्तीकरण को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शासन द्वारा एक विशेष अल्पकालिक एवं गहन जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। जिला कलेक्टरों के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में ये अभियान संचालित किए जाएंगे। नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र के माध्यम से इन जन-जागरूकता अभियानों के आयोजन एवं समन्वय के संबंध में सभी निकायों को जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार आवश्यक बुनियादी ढांचा (छाया, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्था) और स्थल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है। महिला सशक्तीकरण से संबंधित जन-जागरूकता अभियान के प्रथम चरण में संबंधित निकायों को विशेष सामान्य सभा आहूत कर कार्यक्रम की महत्ता पर विशेष चर्चा एवं संकल्प पारित करने को कहा गया है। राज्य शासन की प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं को आमजनों तक पहुंचाने एवं इसके लिए जागरूक करने महिला हितग्राहियों, स्वसहायता समूहों (SHGs) और स्थानीय जमीनी नेटवर्क को सक्रिय कर हितग्राहियों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने विभागीय अभिसरण के जरिए जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में विभिन्न योजनाओं के लाभ की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने सभी विभागों से आवश्यक समन्वय स्थापित कर स्टॉल व अन्य उपाय करने के निर्देश निकायों को दिए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने राज्य शासन की इस सर्वोच्च प्राथमिकता के अंतर्गत संचालित कार्यो का संपादन कर किए गए कार्यों एवं कार्यवाहियों की जानकारी संचालनालय को भेजना सुनिश्चित करने को कहा है।

बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक बना कानून, गजट में प्रकाशित

रायपुर. छत्तीसगढ़ में जबरन और प्रलोभन से धर्मांतरण पर रोक लगाने 19 मार्च को विधानसभा में पारित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक ने कानून का रूप ले लिया है. विधेयक पर 6 अप्रैल को राज्यपार रमेन डेका के हस्ताक्षर करने के बाद अब छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है. बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में 19 मार्च को उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श के बाद पारित किया गया था. विधेयक का उद्देश्य राज्य में धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करना है. उपमुख्यमंत्री शर्मा ने विधेयक के संबंध में कहा था कि वर्ष 1968 से लागू प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गए थे. बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े विवादों के कारण सामाजिक तनाव और वर्ग संघर्ष की स्थितियां बनीं, जो कई बार प्रशासन और न्यायालय तक पहुंचीं. ऐसे परिदृश्य में एक स्पष्ट, पारदर्शी और प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे समाज में बार-बार उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सके और समरसता को बनाए रखा जा सके. विधेयक में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. अब धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा, जिसके बाद निर्धारित समय-सीमा में सूचना सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी. जांच के उपरांत ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता रहे, लेकिन यह परिवर्तन किसी दबाव, प्रलोभन या भय के कारण न हो, इसकी जांच अनिवार्य होगी. इस कानून में धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है. इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी को हर वर्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें धर्मांतरण से संबंधित जानकारी का विवरण शामिल होगा. ग्राम सभा को भी इस प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके. विवाह को धर्मांतरण का आधार नहीं माना गया है, और विवाह के बाद भी धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा. अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विधेयक में कड़े दंड के प्रावधान किए गए हैं. जिसमें अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सामान्य अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 5 लाख रुपए तक जुर्माना, विशेष वर्ग जिसमें महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति, नाबालिग आदि शामिल है, के अवैध धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना, सामूहिक अवैध धर्मांतरण पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान है. इसी तरह लोक सेवक द्वारा इस प्रकार का अपराध किया जाता है तो उसे 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 10 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है, वैसे ही धन के माध्यम से धर्मांतरण किए जाने संबंधित व्यक्ति को 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 20 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है. भय या प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष कारावास एवं न्यूनतम 30 लाख रुपए जुर्माना का भी प्रावधान है. इन अपराधों की पुनरावृत्ति किए जाने पर संबंधित को आजीवन कारावास और पीड़ितों के लिए प्रतिकार व्यवस्था विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है. इस विधेयक में प्रतिकार व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, प्रलोभन या धोखे से किया गया हो, तो उसे स्पष्ट रूप से पीड़ित माना जाएगा. ऐसे मामलों में न्यायालय आरोपी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकता है. इसका भी प्रावधान किया गया है. इस अधिनियम के तहत मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी. ऐसे मामलों में प्रमाण का भार आरोपी पर होगा. मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित न्यायालयों को अधिसूचित किया जाएगा.

IAS अधिकारी की 20 करोड़ की संपत्ति जब्त, करप्शन केस में बड़ी स्ट्राइक, प्रशासनिक हलचल

रायपुर  छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां IAS अधिकारी पर एक बड़ी कार्रवाई हुई है। दरअसल भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे IAS समीर विश्नोई के खिलाफ अहम कार्रवाई करते हुए 20 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली गई है। जानकारी के मुताबिक आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी समीर विश्नोई के खिलाफ कड़ा एक्शन अमल में लाया गया है। कोयला लेवी स्कैम से जुड़ा है मामला आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विश्नोई के खिलाफ की गई इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई के बाद अफरा-तफरी मच गई है। ACB/EOW की जांच के बाद विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, रायपुर ने विश्नोई और पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर अर्जित करीब 20 करोड़ रुपए की बेनामी अचल संपत्तियों को अटैच करने के आदेश से हलचल है।राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें समीर विश्नोई को कोयला लेवी घोटाले का प्रमुख आरोपी माना गया है और अब बेनामी अचल संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई  हुई है। कोयला लेवी स्कैम से जुड़ा मामला राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने अपराध क्रमांक 23/2024 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया था। समीर विश्नोई को कोयला लेवी घोटाले का प्रमुख आरोपी माना गया है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी कोयला लेवी स्कैम में विश्नोई की 5 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया जा चुका है। वहीं एसीबी/ईओडब्ल्यू की जांच में करीब 4 करोड़ रुपए मूल्य की 9 अतिरिक्त संपत्तियों का खुलासा हुआ, जिनके अटैचमेंट के लिए विशेष अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती 17 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायालय में सुनवाई के बाद सभी चिन्हित संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया गया। आदेश के बाद अब इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह रोक लग गई है। पहले भी हुई है कार्रवाई उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इसी मामले में आरोपी रहीं सौम्या चौरसिया की अवैध संपत्तियों की कुर्की न्यायालय के आदेश से की जा चुकी है। समीर विश्नोई ने पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर फर्म बनाकर की अवैध कमाई जांच में सामने आया है कि समीर विश्नोई ने अपनी पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम परफर्म बनाकर अवैध कमाई को उसमें निवेश किया और फिर कई संपत्तियां खरीदीं। करप्शन के मामले मे महासमुंद जिले में करीब 22 एकड़ जमीन, नया रायपुर में प्लॉट, जैसे अचल संपत्तियां शामिल हैं। यही नहीं रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर भी निवेश करके प्रापटी कमाई गई है। वहीं आपको बता दें कि इससे पहले भी ED द्वारा कोयला लेवी स्कैम में विश्नोई की 5 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया जा चुका है। वहीं अब पिछले कल यानीकि 17 अप्रैल को विशेष न्यायालय में सुनवाई के बाद सभी चिन्हित संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया गया है। लिहाजा आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस विश्नोई के खिलाफ यह  बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी में मिशन कर्मयोगी के तहत संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन

रायपुर : छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी रायपुर में मिशन कर्मयोगी के तहत संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित 40 विभागों के अधिकारियों की सहभागिता प्रशिक्षण और नवाचार पर हुआ गहन मंथन रायपुर क्षमता विकास आयोग, भारत सरकार के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, रायपुर द्वारा मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत  एक दिवसीय संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ शासन के लगभग 40 विभागों के नोडल अधिकारी, सचिव स्तर के अधिकारी तथा क्षमता विकास आयोग, नई दिल्ली के पर्यवेक्षक ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यशाला को चार थीम आधारित सत्रों में विभाजित किया गया था। उद्घाटन सत्र में सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग अविनाश चंपावत ने कार्यशाला के औचित्य, उद्देश्य एवं लक्ष्यों पर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए क्षमता निर्माण की आवश्यकता और प्रशासनिक दक्षता के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण व्याख्यान दिए गए। आईएएस अधिकारी कार्तिकेय गोयल ने “रोल आधारित क्षमता निर्माण एवं प्रदर्शन” विषय पर अपने विचार साझा किए। प्रशासन अकादमी के महानिदेशक एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुब्रत साहू ने “प्रशिक्षण संस्थानों की शक्ति आधारित भूमिका” पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। ट्रिपल आईटी रायपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर ओ.पी. व्यास ने “AI टेक्नोलॉजी के उपयोग एवं शिक्षण पद्धति” विषय पर नवीन तकनीकी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। वहीं, आई-गॉट कर्मयोगी की स्टेट नोडल ऑफिसर एवं अवर सचिव श्रीमती अंजू सिंह ने राज्य में कैडर आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था की जानकारी दी। द्वितीय सत्र में सभी विभागों के नोडल अधिकारियों को चार समूहों में विभाजित कर थीम आधारित प्रेजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके पश्चात तृतीय सत्र में समूहों द्वारा अपने-अपने प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए गए, जो इस कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण रहा। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की नोडल अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे ने अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर “संस्थागत प्रशिक्षण की भूमिका, उद्देश्य, लक्ष्य, चुनौतियां एवं समाधान” विषय पर एक समग्र प्रस्तुति दी। इस प्रेजेंटेशन में पर्यटन विभाग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी प्रमील वर्मा, आईएचएम रायपुर की प्रोफेसर श्रीमती  प्रिया शर्मा, सीनियर मैनेजर आईटी विकेश ऊके सहित महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मत्स्य, पशुपालन, खेल एवं युवा कल्याण, वाणिज्य एवं उद्योग तथा परिवहन विभाग के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यशाला का समापन चतुर्थ सत्र में प्रशासन अकादमी के महानिदेशक सुब्रत साहू के प्रेरक समापन उद्बोधन के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंत में डायरेक्टर महावर ने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला प्रशासनिक क्षमता विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है, जिससे विभागों के बीच समन्वय, नवाचार और दक्षता को नई दिशा मिलेगी।

तुंगल बना इको-पर्यटन हब: वन मंत्री की पहल से बदली तस्वीर

सुकमा/रायपुर. सुकमा जिले में वन विभाग की एक सराहनीय पहल ने विकास और पुनर्वास की नई मिसाल पेश की है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार किया गया तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है। सुकमा नगर से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान पहले उपेक्षित और जर्जर था, लेकिन वन विभाग के प्रयासों से इसे एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। यहाँ बनाए गए आकर्षक टापू और प्राकृतिक वातावरण अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इस केंद्र की सबसे खास पहल है “तुंगल नेचर कैफे”, जिसे ‘आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाएँ संचालित कर रही हैं। इनमें 5 महिलाएँ वे हैं जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 5 महिलाएँ नक्सल हिंसा से प्रभावित रही हैं। इन सभी को जगदलपुर और सुकमा के संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया गया है। आज ये महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। जो महिलाएँ कभी संघर्ष और भय के माहौल में थीं, वे अब स्वावलंबन और आत्मसम्मान की मिसाल बन गई हैं। इस पर्यटन केंद्र की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर 2025 को शुरू होने के बाद केवल तीन महीनों में, 30 मार्च 2026 तक यहाँ 8 हजार 889 पर्यटक आए। इस दौरान केंद्र ने लगभग 2.92 लाख रूपए की आय भी अर्जित की। पर्यटक यहाँ स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेने के साथ-साथ तुंगल डैम में कयाकिंग, पैडल बोटिंग और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव कर रहे हैं। यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। तुंगल इको-पर्यटन केंद्र न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि यह उन महिलाओं के साहस, आत्मविश्वास और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ मानव विकास को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। बस्तर की बदलती तस्वीर में यह केंद्र एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर उभरा है।