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जनदर्शन में उप मुख्यमंत्री ने सुनी नागरिकों की समस्याएं

रायपुर लोगों की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता :  अरुण साव नागरिकों की समस्याओं, मांगों एवं शिकायतों को सुनकर उनके निराकरण के लिए शासन-प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से लोरमी रेस्ट हाउस में जनदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने जनदर्शन में पहुंचे नागरिकों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, मांगों एवं शिकायतों को गंभीरता से सुना। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे तथा प्राप्त आवेदनों पर संबंधित विभागों के माध्यम से नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।  लोगों की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता :  अरुण साव जनदर्शन कार्यक्रम में क्षेत्र के नागरिकों ने अपनी समस्याएं सीधे उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। इस दौरान लोगों ने अपनी आवश्यकताओं, स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़ी मांगों को सामने रखा। उप मुख्यमंत्री  साव ने नागरिकों की बातों को सुनते हुए उनके आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं का समाधान शासन की प्राथमिकता है और लोगों को अपनी जायज मांगों के निराकरण के लिए अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। जनदर्शन में 520 से अधिक आवेदकों ने उनके समक्ष अपनी मांगें एवं समस्याएं रखीं।  लोगों की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता :  अरुण साव उप मुख्यमंत्री  साव ने ग्राम तुलसाघाट निवासी  लाल दास खाण्डेकर की मांग पर तत्काल श्रवण यंत्र प्रदान कर लाभान्वित किया। इसके साथ ही ग्राम लाखासार निवासी  हितेश साहू को आय प्रमाण पत्र प्रदान किया। उन्होंने शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने कामना की कि मां दुर्गा की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली आए। उन्होंने इस पावन पर्व को आस्था, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बताते हुए सभी के सुखमय जीवन की कामना की। उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विकास एवं निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विकास कार्यों के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचना को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हुए आवश्यकतानुसार कार्यवाही की जाएगी।  उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास में आम नागरिकों की आवश्यकताओं और सुझावों का महत्वपूर्ण योगदान है। जनदर्शन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को सीधे सुनने और उनके समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करने का अवसर मिलता है। शासन की मंशा है कि आम नागरिकों को योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ मिले तथा उनकी समस्याओं का नियमानुसार निराकरण हो।  उप मुख्यमंत्री  साव ने धान खरीदी को लेकर कहा कि किसानों को धान विक्रय के दौरान किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए सभी स्तरों पर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। धान खरीदी प्रदेश के किसानों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए इसकी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित एवं सुचारू बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जनदर्शन में मुंगेली जिला पंचायत के सीईओ  गोकुल रावटे, वनमंडलाधिकारी  तन्यम कौशिक, लोरमी एसडीएम मती रेखा चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया तीन दिवसीय शिवरीनारायण महोत्सव का शुभारंभ

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज माता शबरी की पावन नगरी शिवरीनारायण में तीन दिवसीय शिवरीनारायण महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर महानदी पर 63 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से नए पुल के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने नगर के गंदे पानी के समुचित शोधन के लिए एसटीपी प्लांट की स्थापना तथा राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत शिवरीनारायण के विकास की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने शिवरीनारायण को नगरपालिका बनाने की दिशा में आवश्यक सर्वे कराने की बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से शिवरीनारायण का विशेष महत्व है। यहां की आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अधोसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। महानदी पर नए पुल के निर्माण से क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम होगा और आसपास के गांवों एवं क्षेत्रों को बेहतर संपर्क सुविधा मिलेगी। एसटीपी प्लांट की स्थापना से नगर की स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ महानदी के संरक्षण में भी सहायता मिलेगी। माता शबरी की पावन धरती पर आना मेरे लिए सौभाग्य : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री  साय ने शिवरीनारायण महोत्सव एवं शारदीय नवरात्रि की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान राम के चरणों से पावन हुई माता शबरी की इस धरती पर आना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि माता शबरी के बुलावे पर वे सपत्नीक यहां पहुंचे हैं। शिवरीनारायण की भूमि आस्था, भक्ति और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर गौमाता की पूजा की और मां चित्रोत्पला गंगा की महाआरती में शामिल होकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं कल्याण की कामना की। उन्होंने शिवरीनारायण में प्रतिदिन संध्या आरती की परंपरा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी परंपराएं हमारी आस्था और संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ती हैं। उन्होंने इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। मोदी की गारंटी को तेजी से धरातल पर उतार रही सरकार मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रदेशवासियों को दी गई गारंटियों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार गठन के बाद शपथ ग्रहण के 24 घंटे के भीतर आयोजित पहली मंत्रिपरिषद की बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय लिया गया। इनमें से लगभग साढ़े 11 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण पूरा हो रहा है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 6 हजार आवास दिए जा चुके हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी 32 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत हो और वह सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। किसानों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों से किए गए वादों को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा किया है। किसानों को वर्षों से लंबित धान का बकाया बोनस दिया गया है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रदेश में 250 से अधिक नए धान खरीदी केंद्र भी खोले गए हैं। उन्होंने कहा कि वनांचल में रहने वाले परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर 5500 रुपए प्रति मानक बोरा की गई है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुकाएं भी प्रदान की जा रही हैं। सरकार गांव, गरीब, किसान और वनवासी परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महतारी वंदन से मजबूत हो रहा माताओं-बहनों का आर्थिक स्वावलंबन मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और स्वावलंबन को मजबूत करने का माध्यम बनी है। अनेक महिलाएं इस राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ छोटे व्यवसाय शुरू करने और अपनी आय बढ़ाने में कर रही हैं। लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भगवान राम का छत्तीसगढ़ से अत्यंत आत्मीय संबंध है। छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है और यहां उन्हें भांजे के रूप में सम्मान देने की विशिष्ट परंपरा है। प्रदेशवासियों को अयोध्या में प्रभु रामलला के दर्शन कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक लगभग 50 हजार श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभु रामलला के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि शिवरीनारायण भी भगवान राम की वनगमन यात्रा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत इसके विकास से यहां धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे। बस्तर में शांति के साथ विकास की नई शुरुआत मुख्यमंत्री ने बस्तर में आ रहे सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि नियद नेल्लानार योजना और अग्रणी बस्तर अभियान के माध्यम से उन दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की योजनाएं और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जो लंबे समय तक विकास से वंचित रहे। उन्होंने कहा कि बस्तर में 421 बंद पड़े स्कूलों को फिर से प्रारंभ किया गया है। जहां कभी नक्सलवाद के कारण शिक्षा और विकास की राह कठिन थी, वहां आज बच्चे स्कूल जा रहे हैं और विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सरकार का लक्ष्य बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शांति, सुरक्षा और विकास को स्थायी आधार देना है। विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, रोजगार और … Read more

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित पीपीपीएसी की बैठक संपन्न

रायपु मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मूल्यांकन समिति की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा बिलासपुर के कोनी स्थित सिम्स मेडिकल कैंपस में निर्मित 240 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बिस्तरों वाले स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत संचालित और रखरखाव करने के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई।  बैठक में पीपीपी मॉडल अस्पताल को 10 वर्षों के लिए बिलासपुर के कोनी में कुल 340 बिस्तरों वाले इन दोनों अस्पतालों को एक ही 10-वर्षीय लाइसेंस समझौते के तहत निजी डेवलपर, ऑपरेटर को संचालन और रखरखाव के लिए सौंपने के प्रस्ताव पर विचार किया गया।    अस्पताल में सरकारी योजनाओं (आयुष्मान भारत आदि) के लाभार्थियों और पूरी तरह निःशुल्क मरीजों के लिए आरक्षित रहेंगे। केवल 20 प्रतिशत बिस्तरों का उपयोग पेड मरीजों के इलाज के लिए किया जा सकेगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी जैसी प्रमुख चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी।  बैठक में विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष कुमार ठाकुर, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव  अमित कटारिया, वित्त एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं संबंधित ऑपरेटर संस्था केपीएमजी के प्रतिनिधि शामिल हुए।  

24 वैकल्पिक शालाओं से लगभग 800 बच्चों को जोड़ने की पहल

रायपुर नारायणपुर जिले के दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित अंचलों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों से बच्चों के लिए पढ़ाई के नए अवसर खुल रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में नए विद्यालयों के संचालन, बंद शालाओं को पुनः प्रारंभ करने और वैकल्पिक शालाओं की स्थापना के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में अनेक पहल की गई हैं। जिले में 24 वैकल्पिक शालाओं के माध्यम से लगभग 800 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की गई है। वहीं, निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग, डिजिटल शिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा से विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत शिक्षा सत्र 2024-25 में ईरक्कभट्टी, जड्डा, ताडोबेडा एवं तोयामेटा (एनमेटा) में चार नवीन प्राथमिक विद्यालय प्रारंभ किए गए। इसके साथ ही लंबे समय से बंद नौ प्राथमिक शालाओं में दोबारा पढ़ाई शुरू कराई गई। इन प्रयासों से 207 विद्यार्थियों को लाभ मिला। शिक्षा सत्र 2025-26 एवं 2026-27 में 24 वैकल्पिक शालाओं का संचालन शुरू किया गया, जिससे ऐसे गांवों के बच्चों तक भी शिक्षा पहुंची, जिन्हें पहले विद्यालय जाने का अवसर नहीं मिला था। सत्र 2026-27 में चार प्राथमिक शालाओं का शुभारंभ भी किया गया है। ‘स्कूल केईंता’ अभियान से शिक्षा से वंचित बच्चों की पहचान  शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने के लिए जिले में विशेष ‘स्कूल केईंता’ अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत 24,701 परिवारों का सर्वेक्षण कर 1,047 शाला त्यागी और 1,295 अप्रवेशी बच्चों की पहचान की गई। इन बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की गई है। जिले में वर्तमान में 538 विद्यालय संचालित हैं। आवासीय शिक्षा के लिए दो कस्तूरबा गांधी विद्यालय, दो पोर्टा केबिन विद्यालय और एक डॉरमेट्री की सुविधा उपलब्ध है। केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय भी विद्यार्थियों को शैक्षणिक अवसर प्रदान कर रहे हैं। शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 187 शासकीय शालाओं में 273 अतिथि शिक्षकों की स्वीकृति दी गई है। जरूरत वाले गांवों में शिक्षा दूतों के माध्यम से भी बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। निःशुल्क कोचिंग से उच्च शिक्षा की राह हुई आसान जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिले में पिछले दो वर्षों से निःशुल्क कोचिंग संचालित की जा रही है। शिक्षा सत्र 2025-26 में गणित संकाय के 29 विद्यार्थियों में से 16 का चयन विभिन्न प्रतिष्ठित शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में हुआ। जीवविज्ञान संकाय के सात विद्यार्थियों ने नीट के माध्यम से काउंसलिंग प्रक्रिया में सफलता प्राप्त की। इनमें एक विद्यार्थी का चयन शासकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। डिजिटल शिक्षा और नवाचार से बढ़ रहे सीखने के अवसर  जिले में 10 आईसीटी लैब और 32 स्मार्ट क्लास संचालित हैं। डिजिटल शिक्षण सामग्री से विद्यार्थियों को विषयों को सरल और रुचिकर तरीके से समझने में मदद मिल रही है। आठ विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से बच्चों को वैज्ञानिक प्रयोग और मॉडल निर्माण के अवसर दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही 12 हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के जरिए विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और रोजगारोन्मुखी कौशल से परिचित कराया जा रहा है। दोनों विकासखंडों में एक-एक पीएम  विद्यालय तथा जिले में कुल सात स्वामी आत्मानंद विद्यालय संचालित हैं। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विद्यार्थियों के लिए पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 100-100 सीटों वाले बालक एवं बालिका छात्रावासों के संचालन की दिशा में कार्य प्रारंभ किया गया है। नारायणपुर जिले के बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी जिले की स्थिति बेहतर हुई है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कवर्धा में मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

’रायपुर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कवर्धा में मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने आज नवरात्रि के अवसर पर कबीरधाम जिले के विभिन्न देवी मंदिरों में दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की। उन्होंने कवर्धा स्थित प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर और मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचकर माता रानी का आशीर्वाद लिया। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने सर्वप्रथम मां महामाया मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने मां विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन कर प्रदेश एवं कबीरधाम जिले की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। ’मां विंध्यवासिनी मंदिर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का किया निरीक्षण’ उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। ज्योति कलश भवन के निर्माण से मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार में सहायता मिलेगी। ’छिरपानी कॉलोनी के मां दुर्गा पंडाल में किए दर्शन’ उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कवर्धा के छिरपानी कॉलोनी स्थित मां दुर्गा पंडाल पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात भी की।

महानदी केवल हमारी जीवनदायिनी नहीं, छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति और सभ्यता की अविरल धारा : मुख्यमंत्री साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज माता शबरी की पावन नगरी शिवरीनारायण में महानदी के पवित्र तट पर आयोजित चित्रोत्पला गंगा महाआरती में शामिल हुए।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने धर्मपत्नी मती कौशल्या देवी साय के साथ श्रद्धा और भक्तिभाव से महाआरती में सहभागिता की तथा महानदी मैया से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की। महानदी के तट पर दीपों की जगमगाहट, वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति के बीच आयोजित महाआरती ने शिवरीनारायण की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को और भव्यता प्रदान की। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को शिवरीनारायण महोत्सव और शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन अत्यंत मंगलमय है। माता शबरी की पुण्यभूमि में महानदी के पावन तट पर चित्रोत्पला गंगा महाआरती में सपत्नीक शामिल होना उनके लिए सौभाग्य का अवसर है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता हमारी आस्था, परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति समाज के गहरे जुड़ाव को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ की गंगा मैया है। यह केवल जल की धारा नहीं, बल्कि हमारे प्रदेश की आस्था, संस्कृति, सभ्यता और जनजीवन की अविरल धारा है। सदियों से महानदी ने छत्तीसगढ़ की धरती को सींचा है, हमारी कृषि और अर्थव्यवस्था को संबल दिया है तथा इसके तटों पर हमारी समृद्ध संस्कृति और सभ्यता पुष्पित-पल्लवित हुई है। जिस प्रकार पूरे देश में गंगा मैया के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव है, उसी प्रकार महानदी के प्रति भी छत्तीसगढ़वासियों के मन में अगाध श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि नदियों के प्रति हमारी आस्था तभी सार्थक होगी, जब हम उनके संरक्षण, संवर्धन और स्वच्छता को भी अपनी सामूहिक जिम्मेदारी मानें। जल संरक्षण को जनभागीदारी से जनआंदोलन बनाना होगा : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  साय ने जल संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि जल है तो कल है। जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। प्रकृति से प्राप्त जल अनमोल धरोहर है और इसे भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। आज किए गए हमारे प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेंगे। इसलिए जल संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए समाज की सामूहिक चेतना और सक्रिय जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। हमें वर्षा जल की एक-एक बूंद सहेजने की संस्कृति विकसित करनी होगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव हो या शहर, घर हो या सार्वजनिक परिसर – जहां भी संभव हो, वर्षा जल संचय की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। जब जल बचाना प्रत्येक परिवार और प्रत्येक नागरिक का संकल्प बनेगा, तभी जल संरक्षण वास्तविक अर्थों में एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को देश की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में देशभर में जल संचय-जनभागीदारी अभियान के माध्यम से वर्षा जल को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ सहित विभिन्न अवसरों पर जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित कर देशवासियों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से हमें छत्तीसगढ़ में भी जल संरक्षण के प्रयासों को और व्यापक बनाना है। प्रत्येक गांव, नगर और परिवार को जल संचय की मुहिम से जोड़कर इसे जन-जन का संकल्प बनाना होगा। वर्षा जल का अधिकतम संचय और भूजल संवर्धन समय की आवश्यकता मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और जल संचय की दिशा में अनेक अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप किए जा रहे नवाचारों को और विस्तार देने की आवश्यकता है। उन्होंने जल संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे पांच प्रतिशत मॉडल सहित विभिन्न नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों के माध्यम से वर्षा जल को अधिक से अधिक सहेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्षा का पानी बहकर निकल जाने के बजाय धरती के भीतर पहुंचे, इसके लिए हमें वैज्ञानिक और स्थानीय दोनों प्रकार के उपाय अपनाने होंगे। सोकपिट निर्माण, हैंडपंपों के आसपास भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और स्थानीय जल संरचनाओं का संरक्षण जैसे छोटे-छोटे प्रयास व्यापक परिणाम दे सकते हैं। गांवों और शहरों में उपलब्ध संसाधनों तथा भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जल संचय की व्यवस्थाएं विकसित करने से भूजल स्तर में सुधार होगा और भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे परंपरागत तालाब, कुएं और अन्य जल स्रोत केवल जल संरचनाएं नहीं, बल्कि हमारी विरासत का भी हिस्सा हैं। इनका संरक्षण और पुनर्जीवन आवश्यक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से नदियों, तालाबों, कुओं सहित सभी जल स्रोतों को स्वच्छ रखने, उनके संरक्षण में सहभागी बनने और वर्षा जल का अधिकतम संचय करने की अपील की। नदियों के प्रति श्रद्धा के साथ उनके संरक्षण का भी लें संकल्प मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महानदी सहित प्रदेश की सभी नदियां हमारी जीवनरेखा हैं। नदियों के प्रति हमारी श्रद्धा हमें उनके संरक्षण के लिए भी प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि चित्रोत्पला गंगा महाआरती जैसे आयोजन हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त करने के साथ प्रकृति और नदियों के प्रति हमारे दायित्व का भी स्मरण कराते हैं। आज इस पवित्र अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि जल का अपव्यय नहीं करेंगे, जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाएंगे और जल संरक्षण के प्रयासों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार अपने स्तर पर जल संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है, लेकिन इस अभियान की वास्तविक शक्ति समाज की भागीदारी है। जब शासन और समाज मिलकर एक दिशा में प्रयास करेंगे, तब हम अपनी नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल सुनिश्चित कर सकेंगे। शिवरीनारायण हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र मुख्यमंत्री  साय ने शिवरीनारायण की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पावन भूमि भगवान राम और माता शबरी की भक्ति से जुड़ी हुई है। शिवरीनारायण … Read more

समान नागरिक संहिता पर उच्च स्तरीय समिति के समक्ष विभिन्न संगठनों व सामाजिक प्रतिनिधियों ने रखे अपने सुझाव

रायपुर /समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के पूर्व राज्य स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा विस्तृत चर्चा एवं सुझाव के लिए आज चर्चा कार्यक्रम आयोजित की गई।  समान नागरिक संहिता के लिए बनाई गई समिति के सदस्य भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी  एम. के. राउत, समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता  मोहन पवार तथा मती ज्योतिरानी सिंह के समक्ष विभिन्न समाज के प्रतिनधियों ने अपने विचार रखे। प्रतिनिधियों को पीपीटी के माध्यम से समान नागरिक संहिता के वर्तमान नियमों एवं कानूनों की जानकारी दी गई।  समान नागरिक संहिता पर रायशुमारी के लिए विभिन्न संगठनों व सामाजिक प्रतिनिधियों ने की चर्चा  पुराने सर्किट हाउस के सभाकक्ष में छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर गठित राज्य स्तरीय समिति द्वारा आज आयोजित परामर्श बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस दौरान समिति के सदस्यों ने विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों तथा समाज प्रमुखों से बिन्दुवार चर्चा की। इस दौरान मुख्य रूप से विवाह और तलाक, उत्तराधिकार और विरासत, भरण-पोषण तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर सभी पक्षों से खुलकर सुझाव प्राप्त किए गए। इस दौरान रानी दुगार्वती जागृति महिला मंडल के डॉ. वेदवती मंडावी, मती राजकुमारी ठाकुर, मती नमिता नुरूटी, धनेश्वरी प्रभाकर, रंजना नेताम, कमला देवी नेताम, राजकुमारी धु्रव, पुष्पा प्रिस्ट और वंदना कतलाम ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं और विशिष्ट सांस्कृतिक ताने-बाने की रक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की मौलिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का औपचारिक अनुरोध किया।  वहीं द्वितीय सत्र में अल्पसंख्यक समुदाय से उपस्थित मुस्लिम समाज, ईसाई, बौद्ध तथा गोंडवाना समाज के प्रतिनिधियों का समाज प्रमुखों ने विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीयन कराने तथा संपत्ति व वसीयत से जुड़े कानूनी प्रावधानों व लिव-इन संबंध अपने विचार रखे। उक्त चर्चा में मुस्लिम समुदाय से प्रमुख रूप से सर्व अहमद नूरानी, मती अयाज तनवीर, सैयद इरफान रिजवी, सबाउल्ला खान, मो. अदनान, मो. अशफाक, गुलाम मुस्तफा, गुलाम सैलानी, मसीही समाज से प्रिस्ट फादर तरूण, अधिवक्ता डब्ल्यूपी मेसी, निर्मल कुजूर, सुभाषचन्द्र मेश्राम, भारतीय बौद्ध महासभा के  रविन्द्र गाडगे तथा  विरेन्द्र, सतनामी समाज के  बी.एल. कुर्रे मौजूद रहे। समिति के सदस्यों ने सभी प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत किए गए सुझावों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभिन्न सामाजिक समूहों से प्राप्त इन सभी महत्वपूर्ण व्यावहारिक तथ्यों और सुझावों का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा, ताकि एक समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार किया जा सके।

छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण संशोधन विधेयक 2026-

रायपुर,  राज्य शासन के प्रशासनिक सुधार और अत्यावश्यक सेवाओं के सुचारू संचालन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ सचिवों की उच्च स्तरीय समिति की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में ‘छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण संशोधन विधेयक 2026’ के विभिन्न प्रावधानों और इसके क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।  मुख्य सचिव ने जोर दिया कि नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी और अत्यावश्यक जनसुविधाओं में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो, इसके लिए कानूनी प्रावधानों को समय के अनुकूल और अधिक सख्त बनाया जाना आवश्यक है। अधिनियम की समीक्षा समिति ने छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम (पूर्ववर्ती 1979 अधिनियम) में प्रस्तावित संशोधनों के प्रत्येक बिंदु की बारीकी से समीक्षा की। लोक सेवाओं की सुगमता, प्रशासनिक नियंत्रण और अनुशासन बनाए रखने से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने पर चर्चा की गई। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ सचिवों ने अपने-अपने विभागों से संबंधित आवश्यक सेवाओं के दायरे को स्पष्ट करने तथा विधिक प्रक्रियाओं को त्रुटिरहित बनाने के बहुमूल्य सुझाव दिए। त्वरित कार्रवाई के निर्देश मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि संशोधन विधेयक के प्रारूप को विधिक और प्रशासनिक औपचारिकताओं को शीघ्रता से पूरा करते हुए उच्च स्तरीय कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।  बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव मती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष कुमार ठाकुर, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चम्पावत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

सेवा संकल्प अभियान के तहत दिव्यांग धनेश्वर साहू को मिली ट्राइसाइकिल

रायपुर  महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री एवं भटगांव विधायक मती लक्ष्मी राजवाड़े ने संवेदनशीलता और जनसेवा की प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए सूरजपुर जिले के ग्राम कसलगिरी निवासी दिव्यांग  धनेश्वर साहू को ट्राइसाइकिल प्रदान की। विधानसभा क्षेत्र के भ्रमण के दौरान मंत्री की मुलाकात  साहू से हुई थी। उनकी आवागमन संबंधी कठिनाइयों और आवश्यकता को समझते हुए मती राजवाड़े ने उन्हें ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। सेवा संकल्प अभियान के तहत अपने आश्वासन को पूरा करते हुए मंत्री राजवाड़े ने अपने निज निवास बीरपुर में  धनेश्वर साहू को ट्राइसाइकिल भेंट की। इससे उन्हें आवागमन में सुविधा मिलेगी और दैनिक गतिविधियां अधिक सहजता से पूरी करने में मदद मिलेगी। मंत्री  राजवाड़े ने कहा कि जनसेवा का उद्देश्य आमजन की जरूरतों को समझकर यथासंभव सहायता उपलब्ध कराना है। दिव्यांगजनों के जीवन को सहज और सुविधाजनक बनाने के लिए जरूरी सहयोग देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

विष्णु के सुशासन में अवैध खनिज परिवहन पर सख्ती, रेत से भरे 6 ट्रैक्टर जब्त

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में खनिज संपदा के संरक्षण, अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण तथा शासकीय राजस्व की सुरक्षा के लिए विशेष जोर दिया जा रहा है। सुशासन की इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रेत परिवहन करते पाए गए 6 ट्रैक्टरों को जब्त किया है। खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही क्षेत्र में चीचगोहना पुल के नीचे अवैध रूप से रेत परिवहन करते 2 ट्रैक्टर तथा मरिहीघाट क्षेत्र से रेत से भरे 3 ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं। जब्त पांचों ट्रैक्टरों को सुरक्षार्थ मरवाही थाने में रखा गया है। इसी प्रकार गौरेला क्षेत्र के पिपरिया में अवैध रूप से रेत परिवहन करते पाए गए एक ट्रैक्टर को जब्त कर गौरेला थाने में सुरक्षित रखा गया है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के सुशासन में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खनिज संपदा के नियमानुसार उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी के तहत जिला प्रशासन एवं खनिज विभाग द्वारा खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए निगरानी एवं जांच की कार्रवाई की जा रही है। खनिजों के अवैध कारोबार से होने वाली राजस्व हानि को रोकने के साथ ही पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब्त किए गए सभी वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान और खनिज अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। संबंधित प्रकरणों में निर्धारित अर्थदंड अथवा समझौता राशि खनिज मद में जमा कराए जाने के उपरांत ही नियमानुसार वाहनों को मुक्त किया जाएगा। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप खनिज संपदा के अवैध दोहन पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सतत निगरानी रखी जा रही है। खनिज विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण में संलिप्त पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, खनिज राजस्व की सुरक्षा तथा खनन गतिविधियों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जांच एवं प्रवर्तन की कार्रवाई निरंतर की जाएगी।