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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद

भटके कदमों को नई दिशा: सुकमा में पुनर्वास से विकास की कहानी लिख रही है सरकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद मोबाइल, आवास की चाबी और नियुक्ति पत्र का वितरण, ‘पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन रायपुर  नक्सल आतंक से लंबे समय तक प्रभावित रहे सुकमा में अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित लोगों से आत्मीय संवाद कर उनके अनुभव जाने और उन्हें मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए दृढ़संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा और नया जीवन प्राप्त कर सकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नक्सल पुनर्वास नीति के चलते सुकमा सहित बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है, जिनमें से 361 पुनर्वासितों ने नया जीवन प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी रोजगार और समाज में बराबरी का अवसर प्रदान करना है। पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, कपड़ा सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, जिससे वे डिजिटल और संचार माध्यमों से जुड़कर आधुनिक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सकें। विशेष रूप से 115 महिलाएं प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। मुख्यमंत्री साय  ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के आश्रितों को भी राहत प्रदान करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में 20 तथा जिला प्रशासन द्वारा 95 लोगों को शासकीय सेवा में रोजगार के अवसर दिए गए हैं।  कार्यक्रम के दौरान ग्राम ढोंडरा कोंटा निवासी मौसम संजना, नागारास जगरगुंडा निवासी भरत कुमार हेमला सहित अन्य हितग्राहियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग के अंतर्गत 10 नव नियुक्त शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल, राजमिस्त्री किट, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबियां तथा पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए।  इस अवसर पर 25 हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपकर उन्हें सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने नक्सल पुनर्वास की सफलता की प्रेरणादायक कहानियों को दर्शाती ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। साथ ही, पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी प्रतीक है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बस्तर महेश कश्यप  सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Train Alert: कपलिंग फेल होने से 25 डिब्बे अलग, बिलासपुर-कटनी रूट पर टला बड़ा हादसा

गौरेला पेण्ड्रा मरवाही. बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन पर रविवार शाम एक बड़ा रेल हादसा टल गया, जब पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन के पास कोयले से लदी एक मालगाड़ी अचानक दो हिस्सों में बंट गई. घटना से रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया. जानकारी के मुताबिक, पेंड्रारोड और वेंकटनगर स्टेशन के बीच खैरझीटी बैरियर के पास अनूपपुर की ओर जा रही इस मालगाड़ी की कपलिंग अचानक टूट गई. इसके चलते इंजन से जुड़े लगभग 25 डिब्बे अलग होकर पीछे छूट गए. हालांकि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया. गनीमत रही कि लोको पायलट की सूझबूझ के कारण तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए गए. अगर लोको पायलट की नजर समय पर नहीं पड़ती, तो एक बड़े हादसे की संभावना थी. ​तस्वीरों में साफ देख सकते हैं कि कैसे मालगाड़ी दो भागों में पटरी पर खड़ी है और रेलवे का तकनीकी अमला मौके पर पहुंचकर जांच में जुटा है. घटना की सूचना मिलते ही अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची. काफी मशक्कत के बाद डिब्बों को सुरक्षित तरीके से दोबारा जोड़ा गया.​ ​रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कपलिंग टूटने के सटीक कारणों की जांच की जा रही है. फिलहाल, मरम्मत के बाद मालगाड़ी को उसके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है और इस रूट पर रेल परिचालन सामान्य है.

Raipur Heat Alert: पारा 41 डिग्री, 15 अप्रैल से लू चलेगी- सावधान रहने की सलाह

रायपुर. छत्तीसगढ़ में गर्मी अब अपने तेवर दिखा रहा है. राजधानी समेत प्रदेश के कई इलाकों में तेजी से तापमान में वृद्धि हो रही है. रविवार को सबसे ज्यादा गर्मी रायपुर में पड़ी, यहां सर्वाधिक अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं बिलासपुर और राजनांदगांव में भी 40 डिग्री का टार्चर लोगों को झेलना पड़ा. मध्य हिस्से में अगले कुछ दिनों में हीट वेव के हालात बनने के आसार हैं. रविवार को कैसा प्रदेश में मौसम ? प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है. पिछले 24 घंटों के दौरान कहीं भी बारिश नहीं हुई. सबसे ज्यादा दिन में तापमान रायपुर में 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 16.5 डिग्री सेल्यसियस दर्ज किया गया. मौसम विशेषज्ञ एचपी चंद्रा ने बताया कि एक द्रोणिका उत्तर पश्चिम विहार से मणिपुर तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. उत्तर पश्चिम से शुष्क और गर्म हवा आने के कारण प्रदेश में लगातार अधिकतम तापमान में वृद्धि होने की संभावना है. प्रदेश में 13 अप्रैल को मौसम शुष्क रह सकता है. मध्य भाग में 15 अप्रैल से ग्रीष्म लहर चलने और ग्रीष्म लहर जैसे स्थिति बनने की संभावना है. रायपुर में कैसा रहेगा मौसम ? मौसम विभाग ने राजधानी रायपुर में आज आकाश मुख्यतः साफ रहने की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. 

नक्सल मोर्चे पर अलर्ट: सीमा के जंगल में मिला विस्फोटक जखीरा, CRPF की सघन तलाशी अभियान जारी

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय नक्सली मंसूबों को नाकाम करने की दिशा में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है. ओडिशा के कोमना पुलिस कैंप से निकली सीआरपीएफ (CRPF) की टीम ने एक संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान सोनाबेड़ा अभ्यारण्य से लगे ढेकुनपानी के घने जंगलों में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री (Naxal Explosive Material) और संदिग्ध सामान बरामद किया है. इस बरामदगी से इलाके में दहशत फैलाने की एक बड़ी साजिश विफल हो गई है. ​गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई ​जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को लंबे समय से छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा (Chhattisgarh Odisha Border) पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी. इसी आधार पर सीआरपीएफ की टीम ने ढेकुनपानी जंगल (Dhekunpani Forest) के रणनीतिक स्थानों पर सर्चिंग अभियान (Search Operation) तेज किया. जंगलों के भीतर छिपाई गई विस्फोटक सामग्री को जवानों ने बेहद सावधानी के साथ बरामद किया. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल सुरक्षाबलों के वाहनों को निशाना बनाने या किसी बड़े आईईडी (IED) ब्लास्ट के लिए किया जाना था. इलाके में हाई अलर्ट, सर्चिंग तेज ​इस बरामदगी के बाद सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं. कोमना पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें अब आसपास के अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी नजर रख रही हैं. सोनाबेड़ा अभ्यारण्य का इलाका अपनी दुर्गम भौगोलिक संरचना के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता है, जिसका फायदा उठाकर अक्सर असामाजिक तत्व अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करते हैं. जवानों की मुस्तैदी का परिणाम ​अधिकारियों का कहना है कि समय रहते विस्फोटक सामग्री का मिलना जवानों की मुस्तैदी का परिणाम है. फिलहाल, सुरक्षाबलों ने ढेकुनपानी और उसके आसपास के जंगलों में गश्त और सर्चिंग अभियान को और अधिक सघन कर दिया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके. सीमावर्ती थानों को भी सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं. खतरनाक है नक्सलियों की समाग्री सुरक्षाबलों द्वारा मौके से जब्त की गई सामग्रियों की सूची जो नक्सलियों की खतरनाक तैयारी की ओर इशारा करती है. ​70 जिलेटिन की छड़ें हैं, जो एक उच्च क्षमता वाला विस्फोटक है. इसका उपयोग ब्लास्ट के लिए किया जाता है. ​3 स्टील कंटेनर बरामद हुए हैं. इनका उपयोग अक्सर 'टिफिन बम' बनाने के लिए किया जाता है, जो काफी घातक साबित होते हैं. ​4 बंडल इलेक्ट्रॉनिक वायर हैं, जिनका विस्फोटकों को दूर से नियंत्रित करने या सर्किट तैयार करने के लिए इन तारों का उपयोग किया जाता है.

कानून पर हमला! तस्करों और भीड़ की हिंसा में पुलिस टीम जख्मी, 10 गिरफ्तार

महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में फरार आरोपियों को गिरफ्तारी करने पहुंची पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया. घटना में टीआई समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. इसके बावजूद बहादुर पुलिसकर्मियों ने किसी तरह आरोपियों को थाने लेकर आई. मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तारी के बाद जेल भेज दिया है. पूरा मामला पटेवा थाना अंतर्गत पचारी ग्राम का है. जानकारी के अनुसार, थाना पटेवा के आबकारी एक्ट के एक मामले में फरार आरोपी विजय मारकण्डेय और विनोद मारकण्डेय की गिरफ्तारी के लिए सांकरा थाना के टीआई  उत्तम तिवारी समेत अन्य पुलिसकर्मी पहुंचे थे. पटेवा में अलग-अलग थाना और पुलिस इकाइयों के बल की संयुक्त टीम ने ग्राम पचरी में दबिश दी थी. पुलिस ने आरोपियों को घेराबंदी कर दबोच लिया. वाहन में बैठाने के दौरान आरोपियों ने विरोध करते हुए पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट शुरू (Attack On Police In CG) कर दी. साथ ही उन्होंने अपने परिजनों और आसपास के लोगों को उकसाया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग लाठी-डंडों, लोहे की छड़ और ईंट-पत्थरों के साथ मौके पर पहुंच गए. भीड़ ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया, जिसमें थाना प्रभारी उत्तम तिवारी को सिर, गले और सीने में गंभीर चोटें आईं. वहीं महिला आरक्षक समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. पुलिस वाहन में भी की तोड़फोड़ भीड़ के हमले के दौरान पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया, जिसमें हाईवे पेट्रोलिंग वाहन का कांच टूट गया. घटना के दौरान आरोपियों के परिजनों ने उन्हें छुड़ाने की कोशिश करते हुए पुलिस कार्रवाई में बाधा डाली. हालांकि पुलिस टीम ने किसी तरह स्थिति को संभालते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर थाना पटेवा ले आई. पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी विजय मारकण्डेय, विनोद मारकण्डेय सहित उनके परिजनों और अन्य लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, जानलेवा हमला, मारपीट और अन्य सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर दस लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं फरार तीन आरोपी की तलाश में जुटी है.

छत्तीसगढ़ के कांकेर में एनकाउंटर, सुरक्षाबलों ने मार गिराया बड़े कैडर का आखिरी ACM

कांकेर. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सुरक्षबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है. जवानों ने इस मुठभेड़ में बड़े कैडर की एक महिला नक्सली को मार गिराया है. मारी गई महिला माओवादी की पहचान ACM रैंक कमांडर रंगाबोइना भाग्या उर्फ रूपी के रूप में हुई है, जो बस्तर इलाके में बड़े कैडर की आखिरी नक्सली मानी जा रही है. रूपी पर 4 लाख रुपए का ईनाम घोषित है. एसपी निखिल राखेचा ने इसकी पुष्टि की है. जानकारी के मुताबिक, सर्चिंग पर निकलने जवानों पर माचपल्ली के जंगलों में अचानक फायरिंग हुई. जवाबी कार्रवाई में एसीएम रैंक की महिला नक्सली रूपी को ढेर कर दिया गया. रूपी डीकेएसजेडसी सदस्य विजय रेड्डी की पत्नी थी. विजय रेड्डी मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 2025 में हुई एक मुठभेड़ में मारा गया था. रूपी बस्तर क्षेत्र के माड़ डिवीजन में में सक्रिय अंतिम तेलुगू माओवादी कैडर थी. साल 2004 यानी 24 साल पहले  माओवादी संगठन के साथ जुड़ी थी. मुठभेड़ स्थल की सर्चिंग के दौरान मृत महिला माओवादी के शव के साथ एक पिस्टल हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री बरामद की गई है. इलाके में सुरक्षाबलों ने सर्चिंग जारी है. कांकेर पुलिस अधीक्षक जिला निखिल राखेचा ने बताया कि जिला कांकेर के छोटेबेठिया–परतापुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाके में स्थित माचपल्ली–आरामझोरा–हिडूर क्षेत्र के जंगलों में माओवादियों की मौजूदगी की आसूचना के आधार पर पुलिस बल द्वारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था. सर्च अभियान के दौरान पुलिस बल और माओवादियों के बीच माचपल्ली इलाके में मुठभेड़ हुई. मुठभेड़ के पश्चात सर्चिंग के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा एक महिला माओवादी कैडर का शव बरामद किया गया. मुख्यधारा में लौटे नक्सली, बस्तर रेंज IG की अपील बस्तर रेंज आईजी सुन्दरराज पट्टलिंगम ने कहा कि माओवादी कैडरों के सामने आत्मसमर्पण और पुनर्वास का अवसर देते हुए शासन की ओर से लगातार अपील की जाती रही है, जिसके प्रभाव से विगत महीनों में काफी बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों ने पुनर्वास का मार्ग अपनाया है. किंतु रूपी जैसे कुछ कैडरों ने पुनर्वास के मार्ग को छोड़कर हिंसात्मक रास्ता अपनाया, जिसका परिणाम आज उनके अंत के रूप में सामने आया है. आईजीपी बस्तर ने शेष बचे कुछ माओवादी कैडरों से अपील की कि उनके पास अब बहुत सीमित समय शेष है. वे सभी हिंसा के मार्ग को त्यागें और समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें.

रेलवे का बड़ा ऐलान: महाराष्ट्र-बंगाल रूट पर 11 स्पेशल ट्रेनें, लाखों यात्रियों को फायदा

भिलाई. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने समर स्पेशल ट्रेन शुरू की है। इस बार 11 समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जो करीब 87 फेरों में दौड़ेंगी। इन ट्रेनों का संचालन 2 अप्रैल से शुरू हो चुका है। जो 16 जुलाई 2026 तक अलग-अलग तारीखों पर चलेंगी। ये ट्रेनें देश के 20 से ज्यादा प्रमुख स्टेशनों को जोड़ेंगी, जिससे मध्य भारत, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा। इन ट्रेनों से करीब 1.5 लाख से अधिक यात्रियों को कन्फर्म सीट और राहत मिल सकेगी। ये स्पेशल ट्रेनें लंबी दूरी के व्यस्त रुट को कवर करेंगी। जो दुर्ग, हरिद्वर, इतवारी, शालीमार, एलटीटी, संतरागाछी, हटिया, पटना-एलटीटी, तिरुपति-रक्सौल, चर्लपल्ली, गोंदिया, रक्सौल, एलटीटी, हावड़ा, इतवारी मालदा टाउन और पुणे, संतरागाछी शामिल हैं। इन मार्गो पर हर साल गर्मियों में भारी भीड़ रहती है, ऐसे में यह सुविधा यात्रियों के लिए काफी राहत देने वाली है। छत्तीसगढ़ में ये एक्सप्रेस ट्रेनें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़ समेत सभी प्रमुख स्टेशनों में रुकेगी। गर्मी की छुट्टियों में ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इन स्पेशल ट्रेनों से वेटिंग लिस्ट कम होगी। लंबी दूरी के यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।

सुकमा को आज बड़ी सौगात: CM साय खोलेंगे नई लैब, स्वास्थ्य सुविधाओं को मिलेगा बूस्ट

जगदलपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुकमा दौरे पर रहेंगे. इस दौरान विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे. निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, सुबह 11:35 बजे मुख्यमंत्री निवास से पुलिस ग्राउंड जाएंगे, यहां से वह सुकमा के लिए रवाना होंगे. दोपहर 1:05 बजे सुकमा पहुंचने के बाद उनका दौरा जिला चिकित्सालय से शुरू होगा. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 1:20 बजे अटल आरोग्य लैब का उद्घाटन करेंगे. इसके बाद मुख्यमंत्री जिला पुनर्वास केंद्र के साइंस पार्क में VR Lab और STEM Lab के अलावा नालंदा परिसर भवन निर्माण का भूमिपूजन करेंगे. वहीं इमली प्रसंस्करण यूनिट का शुभारंभ करेंगे. वहीं दोपहर 2:20 बजे मिनी स्टेडियम सुकमा में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान का शुभारंभ में शामिल होंगे. इस दौरान जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया जाएगा. अब सीएम रायपुर वापस लौटेंगे. मुख्यमंत्री IIIT नवा रायपुर में आयोजित MY Bharat Budget Quest 2026 के समापन समारोह में शिरकत करेंगे.

Property Tax Alert: 30 अप्रैल के बाद बढ़ेगा 17% अधिभार, पुराने बकाएदारों पर प्रशासन का शिकंजा

दुर्ग. शासन के निर्देश पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संपत्तिकर सहित अन्य सभी प्रकार के कर पटाने के लिए दुर्ग निगम ने हितग्राहियों को 30 अप्रैल तक मौका दिया है। इस दौरान किसी भी प्रकार का अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूला जाएगा। इसके बाद 1 मई से 17 प्रतिशत अधिभार वसूलने की तैयारी है। जानकारी के मुताबिक लक्ष्य का 80 प्रतिशत तक टैक्स वसूला जा चुका है। वर्तमान में लगातार अभियान भी चलाया जा रहा है। साथ ही तीन साल से अधिक पुराने बकाएदारों द्वारा टैक्स नहीं जमा करने पर नल कनेक्शन काटने से लेकर अन्य कार्रवाई की तैयारी की गई है। निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल नियमित रूप से टैक्स वसूली की समीक्षा भी कर रहे हैं। शासन के निर्देश पर टैक्स जमा करने की तारीख 30 अप्रैल की गई है। यह निर्णय नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक करदाता समय पर कर जमा कर शासकीय छूट का लाभ प्राप्त कर सकें। अप्रैल माह के अंत तक संपत्तिकर जमा करने वाले करदाताओं से किसी भी प्रकार की पेनल्टी नहीं ली जाएगी। वहीं 1 मई के बाद पिछले वर्ष का संपत्तिकर जमा करने पर 17 प्रतिशत तक सरचार्ज वसूला जाएगा। राजस्व विभाग को निर्देशित किया गया है कि आगामी दिनों में घर-घर जाकर बकायादारों से वसूली की जाए तथा नागरिकों को ऑनलाइन टैक्स भुगतान के लिए भी प्रेरित किया जाए। आयुक्त ने अमले को निर्देश दिए गए हैं कि वसूली के दौरान टीम अपनी गतिविधियों की फोटो व्हाट्सएप पर अपडेट करें, ताकि कार्य की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा सके।

बीजापुर के 224 गांवों में विकास की लहर, नियद नेल्लानार और सरकारी योजनाओं से हो रहा बदलाव

बीजापुर में विकास की नई दस्तक: नियद नेल्लानार, मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास से बदल रही 224 गांवों की तस्वीर दशकों से विकास से कटे इलाकों में पहुंचा रोजगार, राशन, शिक्षा और सुरक्षित आवास; 5 लाख मानव दिवस सृजित वापस लौटे गांव, बदली जिंदगी: नक्सल इलाके में विकास की सशक्त कहानी रायपुर  लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास से अछूते रहे बीजापुर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में अब बदलाव की बयार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से उन गांवों तक विकास की पहुंच बनी है, जहां दशकों तक नक्सल प्रभाव के कारण बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई थीं। अब इन क्षेत्रों में रोजगार, आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों का विस्तार हो रहा है, जिससे लोगों के जीवन में ठोस परिवर्तन दिखाई दे रहा है। बीजापुर जिले में नियद नेल्लानार योजना के तहत 42 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से 67 ग्राम पंचायतों के 224 गांवों को शामिल किया गया है। इस पहल में मनरेगा की सक्रिय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे के निर्माण को गति मिली है, जिससे ग्रामीणों को अपने ही गांव में काम और अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। 16 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार का सहारा इन ग्रामों में अब तक 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें से 7,271 नए जॉब कार्ड बनाए गए हैं। इससे हजारों परिवारों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें 966 आत्मसमर्पित नक्सली, 178 घायल पीड़ित परिवार और 477 मृतक नक्सल पीड़ित परिवारों के जॉब कार्ड बनाकर उन्हें मनरेगा योजना से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका का आधार मिल रहा है। पहली बार दिखा विकास का व्यापक असर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत नियद नेल्लानार क्षेत्रों में 1,744 विकास कार्य कराए गए हैं, जिनके माध्यम से 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित हुए हैं। इन कार्यों के जरिए न केवल स्थानीय स्तर पर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिला है, बल्कि पलायन में भी कमी आई है और ग्रामीणों का शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। आजीविका डबरी बन रही आय का सशक्त जरिया नियद नेल्लानार क्षेत्र में 372 आजीविका डबरी की स्वीकृति देकर ग्रामीणों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की गई है। जनपद पंचायत भैरमगढ़ के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलनार, जहां कभी नक्सली दहशत के कारण ग्रामीण गांव छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर थे, अब पुनः जीवन की मुख्यधारा में लौट आया है। नियद नेल्लानार योजना में शामिल होने के बाद ग्रामीण अपने गांव लौट आए हैं। उनके आजीविका संवर्धन के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत वर्ष 2025-26 में हितग्राही सहदेव कोरसा, लखु और सुदरू कोरसा की आजीविका डबरी पूर्ण हो चुकी हैं। इन डबरियों में मत्स्य पालन एवं हॉर्टिकल्चर विभाग से अभिसरण के माध्यम से मछली पालन एवं सब्जी उत्पादन का कार्य प्रस्तावित है। 2977 परिवारों को मिला पक्का आवास नियद नेल्लानार क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस योजना के तहत कुल 2,977 हितग्राहियों को आवास स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अब तक 690 हितग्राहियों के पक्के आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। इन आवासों में अब परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। गांव-गांव में बदलाव की सजीव तस्वीर जनपद पंचायत बीजापुर के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम दुगाली में मनरेगा से निर्मित कुआं अब 100 से अधिक ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बन गया है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण जहां बोरिंग संभव नहीं थी, वहां यह कुआं स्थायी समाधान बनकर उभरा है। इससे ग्रामीणों को सुलभ पेयजल के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला है। ग्राम पालनार में, जहां पहले प्रशासन की पहुंच नहीं थी, आज पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और गौठान निर्माण कार्य जारी हैं, जिसमें वर्तमान में 200 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। कावड़गांव में 50 वर्षों के भय और अलगाव के बाद अब 100 प्रतिशत ग्रामीण श्रमिकों को जॉब कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। साथ ही इस गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और मोबाइल टॉवर जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच चुकी हैं। सावनार (तोड़का पंचायत) में 9.35 लाख रुपए की लागत से बने आंगनबाड़ी भवन से 40–45 बच्चों को नियमित शिक्षा और पोषण मिल रहा है। पुसुकोण्टा (उसूर) में 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित आंगनबाड़ी भवन ने बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया है। धरमारम और तोड़का क्षेत्र में उचित मूल्य दुकानों के निर्माण से अब ग्रामीणों को गांव में ही राशन मिल रहा है। ग्राम बांगोली में, जहां पहले 18 किलोमीटर दूर जाकर राशन लाना पड़ता था, अब 524 परिवारों को गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध हो रही है। युवाओं का कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पुनर्वासित आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे वे निर्माण कार्यों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के प्रभावी अभिसरण से बीजापुर के अंदरूनी गांवों में अब विकास ने गति पकड़ ली है। रोजगार, बुनियादी ढांचे और शासन के प्रति बढ़ते विश्वास के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी व्यापक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बस्तर में समृद्धि की नई राह : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के जिन गांवों तक कभी विकास की पहुंच नहीं थी, वहां आज नियद नेल्लानार योजना और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं के माध्यम से नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हुआ है। हमारी सरकार का स्पष्ट विश्वास है कि जब विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब ही स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन, सुरक्षित आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों के विस्तार से न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बल्कि शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील नीतियों, … Read more