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गैस कंपनी का बड़ा फैसला: अब बिना कार्ड भी मिल सकेगा LPG सिलेंडर, लाखों को फायदा

बिलासपुर. एफटीएल, प्रवासी, श्रमिकों और विद्यार्थियों को गैस कंपनी ने बड़ी राहत देते हुए बिना कार्ड 5 किलो गैस सिलेंडर 564 रुपए में उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू की है. इस व्यवस्था का उद्देश्य इन वर्गों को ईंधन संकट से बचाना और सुचारू गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है. शहर में गैस आपूर्ति को लेकर सामने आ रही दिक्कतों के बीच शुक्रवार को प्रशासन और गैस कंपनियों ने एक अहम कदम उठाया है. अब एफटीएल, प्रवासी, श्रमिकों और विद्यार्थियों को बिना कार्ड भी सस्ती दर पर गैस उपलब्ध कराई जाएगी. इस नई व्यवस्था के तहत 5 किलो का गैस 112 रुपये प्रति किलो की दर से दिया जाएगा. सोमवार को कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में गैस वितरकों और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया कि इन वर्गों को गैस की कमी का सामना न करना पड़े. खासतौर पर छात्र और माइग्रेट उपभोक्ता यानी जो अस्थायी तौर पर रहता है उसको इसका लाभ मिलेगा ऐसे अवसर यानी देश भर में गैस की किल्लत की बात चल रही है. तो वे दस्तावेजों के अभाव में गैस सुविधा से वंचित रह जाते हैं, उन्हें इस पहल से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. इसके लिए गैस कम्पनी ने संबंधित या निकट के गैस एजेंसी में जाकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर गैस पा सकेंगे. कालाबाजारी और किल्लत से मुक्ति प्रशासन ने गैस एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस योजना का लाभ पात्र उपभोक्ताओं तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी प्रकार की कालाबाजारी या अतिरिक्त वसूली न हो. अधिकारियों ने कहा इस पहल को आम लोगों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है. इससे न केवल गैस की किल्लत कम होगी, बल्कि जरूरतमंद उपभोक्ताओं को आसानी से ईंधन उपलब्ध हो सकेगा. छोटा सिलेंडर, बड़ा झटका गैस उपभोक्ताओं को राहत के नाम पर 5 किलो सिलेंडर की उपलब्धता तो आसान हुई है, लेकिन कीमत के मामले में यह सबसे महंगा साबित हो रहा है. जानकारी के अनुसार 14 किलो घरेलू गैस करीब 71 रुपये प्रति किलो और 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर 111 रुपए प्रति किलो के आसपास मिल रहा है, जबकि 5 किलो सिलेंडर की दर इससे अधिक पड़ रही है. ऐसे में सुविधा के साथ महंगाई की मार भी झेलनी पड़ेगी.

नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: 25 माओवादी कैडरों ने छोड़ी बंदूक

रायपुर. छत्तीसगढ़ के इतिहास में अहम मोड़ दर्ज हो गया है. वर्षों से हिंसा, डर और बंदूक के साये में जी रहे दण्डकारण्य क्षेत्र ने अब शांति और भरोसे की ओर कदम बढ़ाया है. नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता तब सामने आई, जब 25 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में वापसी की. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे न केवल आत्मसमर्पण, बल्कि “विश्वास की जीत” बताया है. 25 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसी दण्डकारण्य क्षेत्र में चल रहे “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. इनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं. ये सभी माओवादी लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे और अलग‑अलग हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं. आत्मसमर्पण के साथ ही इन कैडरों ने बंदूक छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा जताया है. सीएम विष्णुदेव साय ने बताया ऐतिहासिक दिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही हिंसा और डर की विचारधारा का आज अंत होता दिख रहा है. यह लोकतंत्र, जन‑विश्वास और सरकार की नीति की जीत है. मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के लिए नई शुरुआत बताया. ₹1.47 करोड़ के इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आत्मसमर्पण करने वाले 25 माओवादी कैडरों पर कुल 1 करोड़ 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का संकेत है कि अब भटके हुए लोगों का भरोसा सरकार की पुनर्वास नीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बढ़ रहा है. 93 हथियार और ₹14 करोड़ से ज्यादा की बरामदगी सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समन्वित रणनीति के चलते माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. इस कार्रवाई के दौरान 93 घातक हथियारों के साथ कुल ₹14.06 करोड़ की बरामदगी हुई है. यह बरामदगी साफ तौर पर दिखाती है कि नक्सली तंत्र अब कमजोर पड़ चुका है. ""दण्डकारण्य क्षेत्र आज वामपंथी उग्रवाद के अंत के ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण का साक्षी बन रहा है। “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत आज 25 माओवादी कैडरों (12 महिला सहित) ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की। इन पर कुल ₹1.47 करोड़ का इनाम घोषित था। माओवादी…"" – Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) दण्डकारण्य में लौट रहा शांति का भरोसा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह घटना केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे और शांति की वापसी है. दण्डकारण्य क्षेत्र अब धीरे‑धीरे सामान्य जीवन, स्थिरता और विकास की ओर बढ़ रहा है. यहां के लोग हिंसा नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की चाह रख रहे हैं. इतिहास में याद रखा जाएगा 31 मार्च 2026 मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 मार्च 2026 का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में उस तारीख के रूप में याद रखा जाएगा, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आए. यह वह दिन है, जब प्रदेश ने हिंसा के अंधेरे से निकलकर एक नए और शांतिपूर्ण युग की ओर कदम बढ़ाया.

हॉकी में छत्तीसगढ़ को कांस्य पदक

रायपुर  खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आज रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में पुरुषों की हॉकी में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच तीसरे और चौथे स्थान के लिए मैच खेला गया। इसमें छत्तीसगढ़ ने मध्यप्रदेश को 14-6 से हरा कर कांस्य पदक जीता।

बस्तर में नक्सलवाद पर बड़ी सफलता: टॉप नक्सल लीडरों का एनकाउंटर, हथियारों के साथ सरेंडर, ये हैं 5 कारण

जगदलपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद लगभग खत्म हो गया है। सुरक्षाबल के जवानों ने डेडलाइन 31 मार्च 2026 से पहले ही नक्सलियों के कई टॉप लीडरों का एनकाउंटर किया। इसके साथ ही बड़ी संख्या में नक्सलियों के सरेंडर के कारण जवानों को बड़ी सफलता मिली है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल कैंप की स्थापना से जवानों को इस मिशन में बड़ी मदद मिली है। बस्तर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में स्थानीय लोगों का साथ मिला। इसके साथ ही रणनीति बनाई गई थी कि फोर्स की पहुंच उन इलाकों में होनी चाहिए जो हार्डकोर नक्सली माने जाते हैं। जिसके बाद सुरक्षा कैंप की स्थापना पर फोकस किया गया। कैंप की स्थापना से स्थानीय लोगों से संवाद आसान हुआ इसके साथ की नक्सलियों की गतिविधियों पर सीधी नजर रखी गई। जिस कारण से नक्सलवाद के खिलाफ जीत मिली है। हार्डकोर नक्सली इलाके में फोर्स की पहुंच बस्तर संभाग में 2025 में नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ क्षेत्र की जनता से संवाद के मकसद से 58 नवीन सुरक्षा कैम्प की स्थापना की गई। इसके साथ ही 22 मार्च 2026 तक 15 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए। जिसमें नारायणपुर जिले के हार्डकोर नक्सली इलाका माने जाने वाले जटवर, मदौड़ा, वाड़ापेंदा, कुरूषकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर, दिवालूर, तुमनार। बीजापुर जिले के आदवाड़ा, मुक्कावेली, गुण्डेपुरी, पालसेगुड़ी, सेन्ड्रा, बड़ेगुण्डेम जैसे स्थान पर सुरक्षा कैंप की स्थापना की गई। ग्रामीणों तक योजनाओं का पहुंचा लाभ बस्तर संभाग के सुरक्षा कैम्पों की स्थापना के साथ-साथ विकास कार्य को भी प्राथमिकता दी गई। नक्सली इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बिजली, बैंक, आंगनबाड़ी केन्द्र एवं अन्य सुविधायें उपलब्ध कराया गया। जिस कारण से नक्सल प्रभावित क्षेत्रवासियों में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाने लगा। नक्सलियों के खिलाफ रणनीति के साथ लड़ाई लडी गई। अलग-अलग मोर्चे पर रणनीति तैयार की गई थी। जो गांव नक्सलवाद से मुक्त हो रहे थे वहां, सरकारी योजनाएं पहुंचाकर ग्रामीणों का विश्वास हासिल किया गया। सुंदरराज पी, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज नक्सलियों के सरेंडर से संगठन कमजोर बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खात्मे के लिए नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी कैडरों को सरेंडर के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए 'पूना मारगेम' अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत 2025 में 1573 और 2026 में 373 माओवादियों ने सरेंडर किया है। जिस कारण से नक्सली संगठन को झटका लगा। वहीं, 2024 में 792 माओवादियों ने हिंसा त्यागकर सरकार की नीतियों का साथ दिया और समाज की मुख्यधारा में लौटे हैं। बड़े नक्सलियों का एनकाउंटर नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने टॉप नक्सली लीडरों को टारगेट किया। नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने बसवाराजू, माड़वी हिडमा जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर किया। जिसके बाद से नक्सली संगठन कमजोर होता गया। नक्सल संबंधी घटनाओं का विवरण साल 2024 साल 2025 साल 2026 (22 मार्च तक) मुठभेड़ में मारे गए नक्सली 217 256 26 गिरफ्तार नक्सली 929 898 94 नक्सलियों द्वारा बरामद हथियार 286 677 237 सरेंडर करने वाले नक्सली 792 1573 373 बरामद किए गए आईईडी विस्फोटक 308 894 220 हथियार के साथ सरेंडर से झटका माओवादी संगठनों को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब नक्सलियों ने अपने हथियारों के साथ सरेंडर किया। बस्तर संभाग में पुलिस ने नक्सली मुठभेड़, माओवादियों द्वारा डम्प किये गये हथियार एवं पूना मारगेम के तहत सशस्त्र माओवादियों द्वारा हिंसा त्यागकर समाज के मुख्यधारा में शामिल होनों से नक्सली संगठन को झटका लगा।  

संस्कृति के सम्मान से होता है विकास का सशक्त आरंभ — मुख्यमंत्री साय

जहां संस्कृति का सम्मान होता है, वहीं से विकास की नई शुरुआत होती है — मुख्यमंत्री साय लोक-आस्था, परंपरा और विकास का संगम बना कुँवरगढ़ महोत्सव रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास के संगम का सशक्त प्रतीक ‘कुँवरगढ़ महोत्सव’ का आज धरसींवा  में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पर मुख्यमंत्री साय ने 136 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करते हुए क्षेत्र को बड़ी सौगात दी। उन्होंने ग्राम कूंरा का नाम उसके ऐतिहासिक गौरव के अनुरूप ‘कुँवरगढ़’ करने की महत्वपूर्ण घोषणा की, जिससे क्षेत्रवासियों में उत्साह का वातावरण देखने को मिला। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि कुँवरगढ़ महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक-आस्था, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे नई पहचान देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और बस्तर, सरगुजा, कोरिया तथा सिरपुर महोत्सव की श्रृंखला में अब कुँवरगढ़ महोत्सव भी एक विशिष्ट पहचान बनाएगा। इस दौरान उन्होंने नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में त्वरित और बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री साय ने क्षेत्र के विकास को नई गति देने के उद्देश्य से गौरवपथ निर्माण, रानीसागर तालाब के सौंदर्यीकरण, पुलिस चौकी की स्थापना, खारून नदी में एनीकट निर्माण, खेल मैदान के उन्नयन तथा रायपुर के टेकारी-नयापारा से बड़े नाला मार्ग के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और आमजन के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उल्लेखनीय है कि धरसींवा क्षेत्र का प्राचीन ग्राम कूंरा, जिसे अब ‘कुँवरगढ़’ के रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है, अपने भीतर गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है। यह क्षेत्र आदिवासी शासक राजा कुँवर सिंह गोंड के साम्राज्य का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जिनकी वीरता और विरासत आज भी यहां के जनजीवन में जीवंत है। उत्तर में माता कंकालिन, दक्षिण में माता चंडी, पश्चिम में माता महामाया और पूर्व में भगवान चतुर्भुजी की उपस्थिति इस क्षेत्र को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। लगभग 12 हजार की आबादी वाला यह क्षेत्र अपनी परंपरा और विकास के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है। महोत्सव में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए हैं तथा स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि अनेक क्रांतियों और परंपराओं की साक्षी रही है। उन्होंने लोगों को नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय के अवलोकन के लिए भी प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की पावन धरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रभु राम का ननिहाल है और वनवास काल का अधिकांश समय उन्होंने यहीं व्यतीत किया।दंडकारण्य, माता शबरी का आश्रम, माता कौशल्या की नगरी तथा गुरु घासीदास जी और गहिरा गुरु जैसे संतों की तपोभूमि होने के कारण यह प्रदेश आध्यात्मिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करते हुए कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ अनेक क्रांतियां इस धरती पर हुई हैं। मुख्यमंत्री ने धरसींवा विधायक अनुज शर्मा की इस पहल की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने दो वर्षों के कार्यकाल में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में धरसींवा विधायक अनुज शर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, सुमोना सेन, देवजीभाई पटेल, अंजय शुक्ला, संभागायुक्त महादेव कावरे, कलेक्टर गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

डॉ. रमन सिंह ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजा पत्र, जानिए क्या है मामला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र देश की रियासतों का भारत में विलय करने वाले सरदार पटेल "लौह पुरुष" और नक्सलवाद से देश को मुक्ति दिलाने वाले अमित शाह को लिखा "साध्य पुरुष" रायपुर  आज विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नक्सलवाद से मुक्ति पर जताया उनका आभार उन्होंने पत्र में लिखा कि 31 मार्च 2026 का यह ऐतिहासिक दिन राष्ट्र के लिए एक नई आशा और नई सुबह लेकर आया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और आपके दृढ़ संकल्प से दशकों से नक्सलवाद के कष्ट झेल रही भारत भूमि अब अलोकतांत्रिक विचारधारा से पूरी तरह मुक्त हुई है। संविधान विरोधी शक्तियों ने दशकों से भारत भूमि को भीतर से चोट पहुंचाई है। माओ और लेनिन जैसी लोकतंत्र विरोधी विचारधारा ने नक्सलबाड़ी से लेकर बस्तर तक हजारों निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाया, विकास को बाधित कर आदिवासियों को मुख्यधारा से अलग करने का काम किया और इसका परिणाम हमनें छत्तीसगढ़ की धरती पर देखा है। जिस छत्तीसगढ़ में धान का कटोरा बनने का सामर्थ्य था, उसे भुखमरी और पलायन के दौर से गुजरना पड़ा। इस परिस्थिति के लिए जितनी जिम्मेदार नक्सलवाद की विचारधारा थी, उतनी ही जिम्मेदार तत्कालीन केंद्र सरकार भी रही। उन्होंने आगे लिखा कि मुझे याद है जब मैं मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में जाया करता था, तब यूपीए सरकार के मंत्री नक्सलवाद को राज्य की समस्या मानकर स्वयं को किनारे कर लेते थे हालांकि बाद में UPA सरकार के प्रधानमंत्री रहे श्री मनमोहन सिंह जी ने स्पष्ट रूप से यह माना कि नक्सलवाद किसी राज्य की समस्या नहीं बल्कि राष्ट्र की समस्या है और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। वो इसे समस्या तो मानते थे लेकिन समाधान नहीं करते थे। छत्तीसगढ़ से जब सलवा जुडूम के तौर पर एक स्वफूर्त आंदोलन उठा तब महेंद्र कर्मा जैसे बस्तर के कांग्रेसी नेताओं ने भी नक्सलवाद का पुरजोर विरोध किया लेकिन उस दौर की केंद्र सरकार ने कभी खुलकर उनका समर्थन नहीं किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने आगे लिखा कि मैं मानता हूं कि यदि उस कालखंड में देश को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व मिला होता और गृहमंत्री के रूप में आपका सहयोग प्राप्त होता तो नक्सलवाद मुक्त भारत के लक्ष्य को हम तब ही पूरा कर लेते लेकिन देर से ही सही पर जब 2014 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला उसी दिन से नक्सलवाद के समूल नाश की योजना प्रारंभ हुई और जब 2019 में आप केंद्रीय गृहमंत्री के तौर पर सामने आए तब हम छत्तीसगढ़वासियों का यह विश्वास दृढ़ हो गया कि अब सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरा देश नक्सलवाद के दंश से मुक्त होगा। 24 अगस्त 2024 को जब आपने देश से नक्सलवाद के समूल नाश की घोषणा की तब मेरे मन में एक बार यह विचार आया कि इतने कम समय में दशकों की समस्या का समाधान कैसे होगा, कहीं आपने इस घोषणा में जल्दबाजी तो नहीं कर दी है लेकिन जब मैंने पीछे पलट कर 5 अगस्त 2019 का वह दिन याद किया जब आपने आजादी के बाद से चली आ रही कश्मीर में धारा 370 की समस्या का किस प्रकार समाधान किया था, तो मेरा विश्वास और दृढ़ हो गया कि यदि देश से नक्सलवाद कोई समाप्त कर सकता है तो वह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केवल आप ही कर सकते हैं। आज आपके संकल्प से जब देश से नक्सलवाद समापन का लक्ष्य पूरा हो रहा है तब मैं विशेष रूप से यह कहना चाहता हूं कि इस लक्ष्य की पूर्ति आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रबल रणनीति और संपूर्ण सहयोग के बिना कभी संभव नहीं हो सकती थी। आज मैं पूरे जिम्मेदारी के साथ यह बात लिख रहा हूं कि आजादी के नाद 562 रियासतों का भारत में विलय कराने वाले "लौह पुरुष" सरदार वल्लभ भाई पटेल के उपरांत यदि देश को कोई सबसे मजबूत गृहमंत्री मिला है तो वह आप "साध्य पुरुष" हैं। जिन्होंने राष्ट्रहित में हर असंभव कार्य को संभव किया है, सदियों के बाद जब भारत के इतिहास का उल्लेख होगा तब देश को आंतरिक रूप से सुरक्षित करने में आपके योगदान को स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया जाएगा। अंत में उन्होंने लिखा कि अब जब बस्तर में नक्सलवाद खत्म हो चुका है, यहां विकास का नया दौर शुरू होगा। हमारे आदिवासी भाई-बहनों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और युवा वर्ग को शिक्षा व कौशल विकास के जरिए आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। अब बस्तर के लोग आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे और क्षेत्र तेजी से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को प्रणाम करते हुए आपके योगदान, आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र के नव आरंभ पर हृदय से शुभकामनाएं व्यक्त करता हूं और छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने हमारे छत्तीसगढ़ को न सिर्फ नक्सलवाद से मुक्ति दिलाई है बल्कि अब विकास की ओर एक नव दिशा में आगे बढ़ने में मार्ग प्रशस्त किया है।

रायपुर: कुआं बना जीवन में बदलाव का कारण, अब सालभर होगी खेती

रायपुर कभी बारिश पर निर्भर रहने वाले जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड बम्हनीडीह के ग्राम सरवानी के किसान हेमंत साहू के जीवन में अब बड़ा बदलाव आया है। मनरेगा के तहत खेत में बने कुएं ने उनकी खेती को नई दिशा दी है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। हेमंत साहू बताते हैं कि पहले सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण वे साल में केवल एक फसल ही ले पाते थे। खेत अक्सर सूखे रहते थे और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाता था। भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। मनरेगा योजना के तहत उनके खेत में व्यक्तिगत कुआं निर्माण स्वीकृत हुआ। लगभग 2.99 लाख रुपये की लागत से बने इस कुएं ने स्थायी सिंचाई की समस्या को दूर कर दिया। साथ ही निर्माण कार्य के दौरान 357 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ, जिससे गांव के मजदूरों को काम मिला। कुएं के निर्माण के बाद अब हेमंत साहू सालभर खेती कर रहे हैं। उनके खेत में टमाटर, बैंगन, भिंडी, पत्तागोभी, लौकी, मिर्च, करेला, खीरा और ककड़ी जैसी सब्जियों की खेती हो रही है। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। हेमंत साहू का कहना है कि अब हर मौसम में खेती संभव हो गई है और वे भविष्य को लेकर अधिक आत्मविश्वासी हैं। श्री साहू की सफलता की इस बात का प्रमाण है कि सही योजना, स्थानीय सहयोग और मेहनत से ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। मनरेगा ने न केवल सिंचाई की समस्या हल की, बल्कि किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

भगवान महावीर के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत, हमारे मार्गदर्शक — मुख्यमंत्री साय

भगवान महावीर का सत्य-अहिंसा का संदेश हमारा पथ प्रदर्शक-मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री भगवान महावीर जनकल्याणक महोत्सव 2026 में हुए शामिल रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के एमजी रोड स्थित दादाबाड़ी तीर्थ में आयोजित भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव 2026 में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने दादाबाड़ी परिसर स्थित जिनमंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने समाज सेवा, पत्रकारिता, शिक्षा और उच्च शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को “जैन रत्न अलंकरण” से सम्मानित किया और कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक परिवर्तन और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।  मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी का सत्य और अहिंसा का संदेश समस्त मानवता के लिए पथ प्रदर्शक है, जो हमें त्याग, तपस्या, करुणा और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज एक सुखद संयोग है कि भगवान महावीर जयंती के पावन अवसर पर देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक उपलब्धि की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद सबसे बड़ी बाधा रहा है और बस्तर जैसे प्राकृतिक संपदा से समृद्ध क्षेत्र को लंबे समय तक विकास से वंचित रहना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प और प्रभावी रणनीति के कारण आज नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने भगवान महावीर से प्रार्थना की कि छत्तीसगढ़ में शांति और विकास का यह वातावरण निरंतर बना रहे और भविष्य में कभी भी हिंसा का यह दौर वापस न आए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने सुशासन के संकल्प के साथ तेज गति से कार्य करते हुए विकास के अनेक आयाम स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री की गारंटियों को पूरा करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंदों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, किसानों के हित में किए गए वादों को निभाया जा रहा है, महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ा गया है तथा रामलला दर्शन योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को विकसित और समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करना है। मुख्यमंत्री ने जैन समाज की सराहना करते हुए कहा कि समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और परमार्थ के क्षेत्र में जैन समाज का योगदान अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  कार्यक्रम में विधायक राजेश मूणत,  लोकेश कावड़िया, भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रेश शाह, विकास सेठिया, आनंद जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

घबराहट में न करें पेट्रोल-डीजल का स्टॉक, बिलासपुर प्रशासन अलर्ट, सप्लाई पूरी तरह सुचारू

बिलासपुर खाड़ी देशों में बने हालात का असर देश के कई हिस्सों में दिखने लगा है, जिसके चलते लोगों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि बिलासपुर जिले में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. कलेक्टर संजय अग्रवाल ने साफ किया है कि जिले में किसी भी प्रकार की कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सुचारू है. कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि हाल के दिनों में ईंधन की मांग जरूर बढ़ी है, लेकिन इसका कारण वास्तविक कमी नहीं बल्कि लोगों द्वारा जरूरत से ज्यादा स्टॉक करना है. जिले में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. 38 गैस एजेंसियों में घरेलू एलपीजी के 9489 सिलेंडर, व्यावसायिक गैस (19.2 किग्रा) के 247 सिलेंडर, 171 पेट्रोल पंपों पर 1209 किलोलीटर पेट्रोल, 1429 किलोलीटर डीजल उपलब्ध है. कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि यह स्टॉक वर्तमान जरूरतों के अनुसार पर्याप्त है और आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी. अफवाहों से बढ़ रही भीड़, प्रशासन सतर्क कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि कुछ स्थानों पर ईंधन की अचानक बढ़ी मांग का कारण अफवाहें हैं. लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल और गैस खरीदकर स्टॉक कर रहे हैं, जिससे अनावश्यक दबाव बन रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की घबराहट से कृत्रिम संकट की स्थिति बन सकती है, जबकि वास्तविकता में सप्लाई पूरी तरह सामान्य है. संयम और जिम्मेदारी की जरूरत प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि, केवल जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें. अनावश्यक भंडारण से बचें. अफवाहों पर ध्यान न दें. पेट्रोल-डीजल और गैस का उपयोग सोच-समझकर करें. जहां संभव हो, वैकल्पिक साधनों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है, ताकि संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके. कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि जिले में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी.

लक्षद्वीप के अब्दुल फताह 7 मीटर की दूरी पार कर स्वर्ण जीतने वाले पहले लंबी कूद खिलाड़ी बने

रायपुर झारखंड के शिव कुमार सोरेन और पृथ्वी उरांव ने मंगलवार को जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में आयोजित किए जा रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में क्रमशः पुरुष और महिला वर्ग में सबसे तेज धावक बनने का गौरव हासिल किया। वहीं, मेजबान छत्तीसगढ़ के सिद्धार्थ नागेश ने शॉट पुट में स्वर्ण और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीता, जबकि तिलक बारसेट ने पुरुष 100 मीटर में रजत पदक अपने नाम किया। शिव कुमार और पृथ्वी ने अपनी-अपनी 100 मीटर दौड़ की शुरुआत से अंत तक बढ़त बनाए रखते हुए अपने राज्य के लिए स्वर्ण पदक जीते। शिव कुमार ने 10.58 सेकंड का समय लिया, जबकि बारसेट ने 10.87 सेकंड के साथ रजत पदक हासिल किया। ओडिशा के अतिश किंडो (10.91 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता। महिला 100 मीटर फाइनल में 16 वर्षीय पृथ्वी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 12.73 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता। नागालैंड की रुडुओल्हौनुओ बेल्हो (12.90 सेकंड) और झारखंड की पुतुल बक्शी (13.03 सेकंड) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए।  पृथ्वी ने दौड़ के बाद कहा, मैं पदक जीतने को लेकर आश्वस्त थी क्योंकि मैंने चयन ट्रायल्स में अच्छा प्रदर्शन किया था। आज मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दिया और खुशी है कि मैंने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय बनाया। मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए सिद्धार्थ नागेश ने दिन की शुरुआत पुरुष डिस्कस थ्रो में 35.56 मीटर के साथ रजत पदक जीतकर की। गुजरात के दानिश मकवाना (44.83 मीटर) ने स्वर्ण, जबकि ओडिशा के चंद्राय मुर्मू (33.97 मीटर) ने कांस्य पदक जीता। शाम के सत्र में सिद्धार्थ ने एक कदम आगे बढ़ते हुए 13.52 मीटर के थ्रो के साथ शॉट पुट में स्वर्ण पदक हासिल किया। दानिश मकवाना (13.04 मीटर) को रजत मिला। मेजबान छत्तीसगढ़ ने महिला फुटबॉल के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश को पेनल्टी शूटआउट में हराकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में उसका सामना झारखंड से होगा जिसने गुजरात को 9-0 हराया। छत्तीसगढ़ अब पदक तालिका में 2 स्वर्ण, 7 रजत और 4 कांस्य के साथ 10वें स्थान पर है। कर्नाटक 19 स्वर्ण, 7 रजत और 7 कांस्य के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि ओडिशा 13 स्वर्ण, 8 रजत और 15 कांस्य के साथ दूसरे स्थान पर है। झारखंड ने महिला 4×100 मीटर और पुरुष 77 किग्रा ग्रीको रोमन में स्वर्ण जोड़कर 7 स्वर्ण, 2 रजत और 5 कांस्य के साथ तीसरे स्थान पर छलांग लगाई। अंबिकापुर में अभिषेक मुंडा ने हिमाचल प्रदेश के अरफान को हराकर स्वर्ण जीता। पिछली शाम जगदलपुर में असामयिक बारिश के कारण एथलेटिक्स सत्र रद्द होने के बाद सुबह का सत्र बेहद व्यस्त रहा, जिसमें सात फाइनल हुए और लंबी कूद का फाइनल दर्शकों के लिए रोमांचक साबित हुआ। लक्षद्वीप के 26 वर्षीय अब्दुल फताह ने अंतिम प्रयास में 7.03 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता और 7 मीटर पार करने वाले अपने क्षेत्र के पहले खिलाड़ी बने। ओडिशा के भीमा सरदार (6.96 मीटर) ने रजत और जीवन बिलुंग (6.95 मीटर) ने कांस्य पदक हासिल किया। पुरुष 400 मीटर फाइनल में कांटे की टक्कर देखने को मिली, जहां ओडिशा के नोबल कुमार किसन की आखिरी क्षणों की डाइव भी उन्हें जीत नहीं दिला सकी। गुजरात के संतोषभाई गणवित ने 49.332 सेकंड में स्वर्ण जीता, जबकि नोबल 49.335 सेकंड के साथ रजत पर रहे। कर्नाटक के रामू (49.60 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता। गोवा की मानसी कुंकलका ने 9.72 मीटर के थ्रो के साथ महिला शॉट पुट में स्वर्ण जीतकर अपने राज्य का खाता खोला। बिहार की अनामिका गोंड (9.50 मीटर) और मेघालय की मेलिबाडक्रो (9.43 मीटर) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक जीते। 100 मीटर: स्वर्ण – पृथ्वी उरांव (झारखंड) 12.73 सेकंड; रजत – रुडुओल्हौनुओ बेल्हो (नागालैंड) 12.90 सेकंड; कांस्य – पुतुल बक्शी (झारखंड) 13.03 सेकंड 100 मीटर दौड़: स्वर्ण – बसंती माझी (ओडिशा) 16.20 सेकंड; रजत – कविता टाडिंगी (ओडिशा) 16.81 सेकंड; कांस्य – राठवा सोमसिंह (गुजरात) 16.94 सेकंड 400 मीटर: स्वर्ण – रीथुश्री (कर्नाटक) 58.63 सेकंड; रजत – आदित्य केएम (केरल) 1:00.07; कांस्य – चिंतामणि टुटी (झारखंड) 1:00.76 4×100 मीटर: स्वर्ण – झारखंड 50.31 सेकंड; रजत – ओडिशा 51.11 सेकंड; कांस्य – 54.00 सेकंड डिस्कस थ्रो: स्वर्ण – मुस्कान लोबी (गुजरात) 32.29 मीटर; रजत – अपिक्षा गामित (गुजरात) 31.52 मीटर; कांस्य – कृष्णामोनी पेगु (असम) 29.95 मीटर शॉट पुट: स्वर्ण – मानसी कुंकलका (गोवा) 9.72 मीटर; रजत – अनामिका गोंड (बिहार) 9.50 मीटर; कांस्य – मेलिबाडक्रो (मेघालय) 9.43 मीटर पुरुष 100 मीटर: स्वर्ण – शिव कुमार सोरेन (झारखंड) 10.58 सेकंड; रजत – तिलक बारसेट (छत्तीसगढ़) 10.87 सेकंड; कांस्य – अतिश किंडो (ओडिशा) 10.91 सेकंड 110 मीटर बाधा दौड़: स्वर्ण – ट्रोइलुक्या मोसरोन्ग (असम) 15.85 सेकंड; रजत – सापावत दत्तू (तेलंगाना) 16.65 सेकंड; कांस्य – हरि मोहन त्रिपुरा (त्रिपुरा) 16.82 सेकंड 400 मीटर: स्वर्ण – संतोषभाई गणवित (गुजरात) 49.332 सेकंड; रजत – नोबल कुमार किसन (ओडिशा) 49.335 सेकंड; कांस्य – रामू (कर्नाटक) 49.60 सेकंड 4×100 मीटर: स्वर्ण – ओडिशा 41.97 सेकंड; रजत – झारखंड 42.29 सेकंड; कांस्य – गुजरात 43.44 सेकंड लंबी कूद: स्वर्ण – अब्दुल फताह (लक्षद्वीप) 7.03 मीटर; रजत – भीमा सरदार (ओडिशा) 6.96 मीटर; कांस्य – जीवन बिलुंग (ओडिशा) 6.95 मीटर हाई जंप: स्वर्ण – सागर एक्का (ओडिशा) 1.94 मीटर; रजत – वैभव गांवकर (गोवा) 1.91 मीटर; कांस्य – हेमंत खड़िया (ओडिशा) 1.80 मीटर डिस्कस थ्रो: स्वर्ण – दानिश मकवाना (गुजरात) 44.83 मीटर; रजत – सिद्धार्थ नागेश (छत्तीसगढ़) 35.56 मीटर; कांस्य – चंद्राय मुर्मू (ओडिशा) 33.97 मीटर शॉट पुट: स्वर्ण – सिद्धार्थ नागेश (छत्तीसगढ़) 13.52 मीटर; रजत – दानिश मकवाना (गुजरात) 13.04 मीटर; कांस्य – मानस प्रतिम राभा (असम) 12.20 मीटर फुटबॉल (सेमीफाइनल) महिला: छत्तीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 2-2 (पेनल्टी में 4-3) से हराया; झारखंड ने गुजरात को 9-0 से हराया  रायपुर झारखंड के शिव कुमार सोरेन और पृथ्वी उरांव ने मंगलवार को जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में आयोजित किए जा रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में क्रमशः पुरुष और महिला वर्ग में सबसे तेज धावक बनने का गौरव हासिल किया। वहीं, मेजबान छत्तीसगढ़ के सिद्धार्थ नागेश ने शॉट पुट में स्वर्ण और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीता, जबकि तिलक बारसेट ने पुरुष 100 मीटर में रजत पदक अपने नाम किया। शिव कुमार और पृथ्वी ने … Read more