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नक्सलियों ने डाले हथियार: कांकेर में 5 उग्रवादी करेंगे आत्मसमर्पण, पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

कांकेर. पापा राव के बाद नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने का दौर थमा नहीं है. आज कांकेर जिले के उइकाटोला के जंगलों से 5 हथियार बन्द नक्सली समर्पण करने निकले है, जो कांकेर एसपी कार्यालय में आत्मसमर्पण करेंगे. एक SLR, दो 303 रायफल के साथ समर्पण करने निकले 5 ईनामी नक्सलियों में ACM मंगेश, ACM गणेश उइका, ACM राजे, ACM हिड़मे उर्फ जमाली और ACM मंगति शामिल हैं. इन पांचों नक्सलियों के समर्पण के साथ ही कांकेर जिले का मोहला, अवन्धी संयुक्त एरिया कमेटी भी नक्सल मुक्त हो जाएगा. पापाराव ने डाले साथियों के साथ हथियार पापाराव ने अपने साथियों के साथ बीजापुर जिले के कुटरु थाना में अपने हथियार जमा किए. पापाराव समेत 18 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं. सभी नक्सलियों ने कुटरु थाना में अपने हथियार जमा किए. इसके बाद उनको बस से जगदलपुर रवाना किया गया है. पापाराव ने बताया कि लगातार नक्सल संगठन के ऊपर दबाव, जंगलों में कठिन जीवन और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया. कौन है पापाराव पापाराव ऊर्फ सुनम चंदरैय्या ऊर्फ मंगू दादा ऊर्फ चंद्रन्ना (56) छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी है. वह DKSZCM यानि दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर है. वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य भी है. पापाराव नक्सल संगठन में एक बड़ा नाम है. साल 2010 में हुए ताड़मेटला कांड का मास्टरमाइंड पापाराव को बताया जाता है. पापाराव की नक्सल संगठन की रणनीतिक गतिविधियों और कैडर संचालन में अहम भूमिका रही है. 16.12.2025 बीजापुर पुलिस के सामने 34 माओवादियों ने सरेंडर कर दिया. इनमें से 26 माओवादियों पर कुल मिलाकर 84 लाख का इनाम घोषित था.सरेंडर करने वालों में 7 महिलाएं भी शामिल थी. 08.12.2025 राजनांदगांव मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के सामने 12 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया.इनमें एक प्रमुख माओवादी नेता रामधर माझी भी शामिल था, जिस पर 1.5 करोड़ का इनाम घोषित था. 26.11.2025 बीजापुर 41 हार्डकोर नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया.इनमें से 32 नक्सलियों पर सामूहिक रूप से 1.19 करोड़ का इनाम घोषित था. 25.11.2025 नारायणपुर नई नक्सल पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर दंडकारण्य क्षेत्र के 28 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए सरेंडर नक्सली'दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी' (DSZC) के सक्रिय सदस्य थे. 17.10.2025 जगदलपुर 210 नक्सलियों ने हथियार समेत पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. यह अबतक का सबसे बड़ा सरेंडर था.राज्य में 170 नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने के ठीक एक दिन बाद, 210 और नक्सलियों ने आतंक का रास्ता छोड़ा. 15.10.2025 गढ़चिरौली, महाराष्ट्र वामपंथी उग्रवाद को एक बड़ा झटका देते हुए, CPI (माओवादी) पोलित ब्यूरो के वरिष्ठ सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव, उर्फ़ सोनू ने, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली पुलिस मुख्यालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में 60 माओवादी कैडरों के साथ सरेंडर कर दिया. 24.07.2025 बीजापुर, कांकेर, दंतेवाड़ा बीजापुर और दंतेवाड़ा में 2 बड़े सरेंडर हुए. बीजापुर में 25 नक्सिलयों ने हथियार डाले जबकि दंतेवाड़ा में 16 ने सरेंडर किया. कांकेर में 13 नक्सलियों ने हथियार डाल खून खराबे से तौबा कर ली. अबूझमाड़ में 8 और सुकमा में 5 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया. बीजापुर में सरेंडर करने वाले 25 माओवादियों पर 1 करोड़ 15 लाख का इनाम घोषित था.सरेंडर करने वाले नक्सलियों में एक सब-ज़ोनल समिति सदस्य, दो DVCM, दो कंपनी PPCM, बटालियन और कंपनी पार्टी के तीन सदस्य, और ACM स्तर के 8 माओवादी शामिल हैं. 27.06.2025 नारायणपुर माओवाद-विरोधी अभियान के दौरान नारायणपुर में 6 नक्सलियों ने सरेंडर किया. 6.06.2025 दंतेवाड़ा 'लोन वर्राटू'अभियान से प्रभावित होकर 7 माओवादियों ने सरेंडर कर दिया. 2.06.2025 सुकमा सुरक्षाबलों के सामने 16 हार्डकोर माओवादियों ने सरेंडर किया. सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर 25 लाख का इनाम घोषित था. 27.05.2025 सुकमा नक्सली हिंसा से तंग आकर 18 माओवादियों ने हथियार डाल दिए. सरेंडर करने वालों में 4 पीएलजीए बटालियन के सक्रिय मेंबर भी शामिल हैं. 23.05.2025 बस्तर सुरक्षाबलों के सामने कुल 33 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, इनमें से 24 नक्सलियों पर कुल 91 लाख का इनाम घोषित था. 13.05.2025 दंतेवाड़ा डीआरजी दफ्तर में 6 हार्डकोर माओवादियों ने सरेंडर कर दिया. सरेंडर करने वाले माओवादियों में एक महिला नक्सली भी शामिल है. 8.04.2025 दंतेवाड़ा नक्सली हिंसा और उसकी विचारधारा से परेशान 26 माओवादियों ने सरेंडर कर दिया. सरेंडर करने वाले 3 माओवादियों पर इनाम भी घोषित था. 7.04.2025 नारायणपुर 5 इनामी महिला नक्सलियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए. सरेंडर नक्सली लंबे समय से छत्तीसगढ़ के बस्तर और अबूझमाड़ इलाकों में सक्रिय रहे. 28.02.2025 बीजापुर बीजापुर में 3 और सुकमा में 7 माओवादियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए. सरेंडर माओवादियों पर कुल 32 लाख का इनाम घोषित था. 9.01.2025 बीजापुर बस्तर संभाग के बीजापुर में सुरक्षाबलों के सामने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के 13 कैडरों ने सरेंडर कर दिया. इनमें से 5 कैडरों के सिर पर कुल 13 लाख का इनाम था.

समीक्षा बैठक में खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहब कंगाले ने की अहम चर्चा

खाद्य विभाग की सचिव  रीना बाबा साहब कंगाले ने ली समीक्षा बैठक कमर्शियल एलपीजी वितरण के लिए प्राथमिकता श्रेणियां तय, दैनिक समीक्षा से व्यवस्था होगी मजबूत गैस आपूर्ति – प्राथमिकता के आधार पर होगा वितरण रायपुर  प्रदेश में गैस की उपलब्धता एवं वितरण प्रणाली के संबंध में ऑयल कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहब कंगाले ने समीक्षा बैठक ली। बैठक में एलपीजी की उपलब्धता, वितरण प्रणाली एवं उपभोक्ता संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ता संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों को विगत माह की कुल खपत के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही एलपीजी प्रदाय किया जाएगा। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 25 दिवस तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिवस के भीतर एलपीजी रिफिल की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को समय पर गैस मिल सके। जिला प्रशासन को सभी एलपीजी वितरकों के कार्यालय एवं गोदामों में पुलिस एवं होमगार्ड के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे भीड़भाड़ एवं अव्यवस्था की स्थिति न बने। साथ ही वितरकों को अपने दूरभाष नंबर सक्रिय रखने एवं उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश भी दिए गए हैं। उपलब्ध स्टॉक को ध्यान में रखते हुए विभिन्न संस्थानों के लिए प्राथमिकता श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इनमें शैक्षणिक संस्थान एवं चिकित्सालय, सैन्य एवं अर्द्धसैन्य कैंप, जेल, होटल, समाज कल्याण विभाग के संस्थान, रेलवे एवं एयरपोर्ट कैंटीन, शासकीय कार्यालय, गेस्ट हाउस, पशु आहार उत्पादक इकाइयां तथा रेस्टोरेंट शामिल हैं। बैठक में यह भी तय किया गया कि कमर्शियल एलपीजी स्टॉक की उपलब्धता एवं वितरण की दैनिक समीक्षा ऑयल कंपनियों द्वारा की जाएगी तथा इसकी जानकारी प्रतिदिन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम, छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के सदस्य सचिव राजीव कुमार जायसवाल, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के मंडल एलजी प्रमुख श्रीपाद बक्षी, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के प्रादेशिक प्रबंधक दिलीप मीणा, हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक मंगेश डोंगरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक – केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया

छत्तीसगढ़ में जनजातीय शक्ति का खेल महाकुंभ: देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक – केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया खेल प्रतिभाओं को नया आसमान देने सरकार प्रतिबद्ध — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर, बस्तर और सरगुजा बने राष्ट्रीय खेल संगम के केंद्र देशभर से 9 खेल विधाओं में 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 2500 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती  एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय आयोजन की आधिकारिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस गरिमामयी अवसर पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह खेल महाकुंभ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर के साथ-साथ बस्तर और सरगुजा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 2500 खिलाड़ी 9 खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की और ओलंपिक पदक विजेता सुसाइखोम मीराबाई चानू की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गौरव प्रदान किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का विषय है कि प्रभु श्रीराम के ननिहाल में देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर ओलंपिक में 4 लाख तथा सरगुजा ओलंपिक में साढ़े तीन लाख लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय समाज में खेलों के प्रति गहरी रुचि है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आत्मसमर्पित नक्सली भी ‘नुआबाट’ (नई राह) के माध्यम से मुख्यधारा में लौटकर इन आयोजनों में सहभागी बने—जो परिवर्तन और विश्वास का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार में खेलों को लेकर उत्साह और प्रयास दोनों दोगुने हैं। राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत खेल अधोसंरचना निर्माण और प्रतिभाओं के चिन्हांकन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि रायपुर और बिलासपुर में खेलो इंडिया के तहत रेजिडेंशियल अकादमियां संचालित हैं, जबकि जशपुर, रायगढ़ और रायपुर में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ओलंपिक में चयनित खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए, स्वर्ण पदक विजेताओं को 3 करोड़, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का नामकरण जनजातीय नायक शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर किया गया है, जो राज्य के गौरव और प्रेरणा के प्रतीक हैं। जनजातीय संस्कृति, इतिहास और गौरव से जुड़ा आयोजन मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, बल्कि यह जनजातीय शौर्य और बलिदान की भूमि भी है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, गेंद सिंह और गुण्डाधुर जैसे नायकों का उल्लेख करते हुए बताया कि नवा रायपुर में उनके सम्मान में म्यूजियम बनाया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। उन्होंने खिलाड़ियों से इस म्यूजियम का अवलोकन करने का आग्रह भी किया। केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक है और आने वाले वर्षों में भी यह श्रृंखला जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवन शैली है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘फिट इंडिया’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों ने खेलों को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि देश की 65 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी में अपार क्षमता है और अब खेल प्रतिभाएं केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों से भी उभर रही हैं।  उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान राम के ननिहाल में इस आयोजन का शुभारंभ होना अत्यंत शुभ संयोग है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज ने सदैव देश को वीरता और परिश्रम की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलों को नई दिशा मिल रही है और ‘ट्राइबल गेम्स’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि यह आयोजन ऐतिहासिक है और देशभर से आए खिलाड़ियों के स्वागत के लिए पूरा छत्तीसगढ़ उत्साहित है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जनजातीय प्रतिभाओं को विश्व मंच तक ले जाने का सशक्त माध्यम बनेगा और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लाभ प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, इंद्र कुमार साव, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, मुख्य सचिव विकासशील सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण,  बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

नक्सल लीडर का जाल: एक छिपा, दूसरा फरार, कई ने सरेंडर किया, बस अंतिम चोट बाकी

  बस्तर छत्तीसगढ़ में बस्तर के घने जंगलों से इस समय जो खबरें सामने आ रही हैं, वे नक्सल आंदोलन के इतिहास में निर्णायक मोड़ का संकेत दे रही हैं. वर्षों तक सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने शीर्ष नक्सली नेताओं का नेटवर्क अब तेजी से कमजोर पड़ता दिख रहा है. ताजा घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन के भीतर दबाव बढ़ चुका है और नेतृत्व स्तर पर अस्थिरता साफ दिखाई दे रही है।  सूत्रों के अनुसार, नक्सल आंदोलन का बड़ा चेहरा माने जाने वाले गणपति के बारे में देश छोड़कर नेपाल में भागने  की ख़बर है, जबकि उसका करीबी सहयोगी मिशिर झारखंड में छिपा हुआ बताया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन दोनों तक पहुंच बनते ही नक्सल संगठन के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका लगेगा. इसी दिशा में केंद्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियां समन्वित रणनीति के साथ लगातार अभियान चला रही हैं।  इसी बीच बस्तर से एक और बड़ी खबर सामने आई है. लंबे समय से सक्रिय और प्रभावशाली नक्सली कमांडर पापा राव बुधवार को अपने 18 साथियों के साथ सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर रहा है. यह घटनाक्रम केवल औपचारिक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि नक्सल आंदोलन के कमजोर पड़ते मनोबल का स्पष्ट संकेत है. वर्षों तक संगठन में सक्रिय रहे पापा राव पर कई गंभीर मामलों में संलिप्तता रही और वह सुरक्षाबलों की वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। सुरक्षा बलों की रणनीति में बदलाव पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अब केवल मुठभेड़ों पर निर्भर रहने के बजाय खुफिया तंत्र को मजबूत किया गया. स्थानीय लोगों के साथ विश्वास का रिश्ता बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसका परिणाम यह हुआ कि संगठन के भीतर दरारें उभरने लगी हैं. कई नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं।  सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाल के समय में सैकड़ों नक्सली मारे गए हैं. हजारों ने आत्मसमर्पण किया और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी हुई हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि नक्सल संगठन की ताकत लगातार घट रही है. अब स्थिति यह है कि शीर्ष स्तर के नेता भी खुद को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं।  एक समय था जब दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिले नक्सल गतिविधियों के गढ़ माने जाते थे. अब इन क्षेत्रों में विकास कार्यों ने नई तस्वीर पेश की है. सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ने से स्थानीय युवाओं का रुझान हिंसा से हटकर मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है।  क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट? विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के पीछे दो मुख्य कारण हैं- सुरक्षाबलों की सटीक और निरंतर कार्रवाई, सरकार की पुनर्वास और विकास आधारित नीतियां. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को नई शुरुआत का अवसर देने की पहल ने भी इस दिशा में सकारात्मक प्रभाव डाला है।  हालांकि, यह भी सच है कि नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. अभी भी कुछ दूरदराज के इलाकों में इसकी उपस्थिति बनी हुई है. लेकिन जिस तरह से शीर्ष नेतृत्व बिखर रहा है और कैडर टूट रहा है, उससे यह संकेत स्पष्ट है कि संगठन अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है।  सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इस मौके को निर्णायक सफलता में बदला जाए. इसके लिए खुफिया तंत्र को और मजबूत करना, स्थानीय जनता का विश्वास बनाए रखना और विकास कार्यों की गति को लगातार बनाए रखना आवश्यक होगा।  बस्तर से लेकर झारखंड तक के हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है. यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे, तो निकट भविष्य में इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।  फिलहाल, पापा राव का आज अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण और गणपति-मिशिर जैसे शीर्ष नेताओं की तलाश ने पूरे नक्सल नेटवर्क में हलचल मचा दी है. आने वाले दिन इस संघर्ष की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित होंगे।  नक्सल नेतृत्व तेजी से खत्म देश में चल रहे नक्सल विरोधी ऑपरेशन के चलते अब नक्सली संगठन का टॉप नेतृत्व तेजी से खत्म हो रहा है. सुरक्षा एजेंसियों के ऑपरेशन में कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए हैं. कई बड़े नेता सरेंडर भी कर चुके हैं. स्थिति यह है कि अब कई इलाकों में नक्सलियों के बड़े नेता ही नहीं बचे हैं।  सुरक्षा बलों की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के 11 सदस्य मारे गए, जो संगठन के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं. यह नक्सल संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।  ये टॉप नक्सली कमांडर ढेर सुरक्षा बलों की  रिपोर्ट के अनुसार जिन बड़े नक्सली नेताओं को ऑपरेशन में मारा गया, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं: सुधाकर हिडमा दामोदर विकास सुदर्शन अनिल रवि मोहन रमेश शंकर अन्य सेंट्रल कमेटी सदस्य (इनमें कई सेंट्रल कमेटी और स्टेट कमेटी स्तर के नेता शामिल थे) गिरफ्तार और सरेंडर रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक 463 नक्सली मारे गए हैं. 1600 गिरफ्तार किए जा चुके हैं और करीब 2500 ने सरेंडर किया है. ये आंकड़े बताते हैं कि संगठन कमजोर हो रहा है।  बड़े नक्सलियों का सरेंडर 2025-26 में कई बड़े नक्सली नेताओं ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें प्रमुख हैं- पापा राव आज 18 नक्सलियों के साथ  सरेंडर कर रहा (बड़ा नक्सली कमांडर) है. इसके अलावा, कई स्टेट कमेटी, एरिया कमेटी और डिविजनल कमांडर स्तर के नक्सली सरेंडर कर चुके हैं. इनमें  टॉप 5 बड़े नक्सली नेता शामिल हैं।  सुरक्षा बलों की रिपोर्ट के अनुसार, दंतेवाड़ा और नारायणपुर में अब बड़े नक्सली लीडर नहीं बचे. कांकेर-बीजापुर में भी कई एरिया कमेटी खत्म किए जा चुके हैं. बड़े नेता नेपाल और झारखंड भाग रहे हैं. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जल्द ही नक्सल नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा. इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 31 मार्च 2026 तक की गई है, जिसका मात्र 6 दिन बचा हुआ है।   

बस्तर के नन्हे ललित की आंखों में लौटी रोशनी जिला अस्पताल में हुआ जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन

रायपुर जिला अस्पताल में हुआ जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन बस्तर के नौ वर्षीय बालक ललित मौर्य के जीवन में अब खुशियों का एक नया सवेरा हुआ है। जिले के विकासखंड बस्तर के अंतर्गत ग्राम पंचायत नदीसागर के आश्रित ग्राम पराली का निवासी ललित जन्म से ही मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा था। इस जन्मजात विकार के कारण वह दुनिया की खूबसूरती देखने में पूरी तरह असमर्थ था और उसका बचपन अंधेरे के साये में बीत रहा था। हालांकि ललित के मोतियाबिंद की पहचान पूर्व में ही हो गई थी, लेकिन सर्जरी को लेकर मन में बैठे डर और संशय के कारण उसके परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं हो रहे थे।       ललित के उजाले की ओर बढ़ने का सफर 20 मार्च को बस्तर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित दिव्यांग सशक्तिकरण शिविर से शुरू हुआ, जहाँ वह दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने पहुँचा था। कलेक्टर  आकाश छिकारा की पहल पर आयोजित इस विशेष शिविर में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान नेत्र विशेषज्ञों ने ललित की स्थिति को समझा। इस दौरान पलारी के नेत्र सहायक अधिकारी  अनिल नेताम ने विशेष सक्रियता दिखाते हुए परिजनों को ऑपरेशन के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उनके अथक प्रयासों और निरंतर दी गई समझाइश का ही परिणाम था कि परिजन अंततः सर्जरी के लिए राजी हुए, जिसके बाद ललित को तत्काल बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया।        कलेक्टर बस्तर  आकाश छिकारा के विशेष दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता दिखाते हुए इस केस को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सेवा योजना और जिला प्रशासन के कुशल समन्वय से 24 मार्च को जिला महारानी अस्पताल जगदलपुर में डॉ सरिता थॉमस द्वारा ललित का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन संपन्न हुआ। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक, सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद और जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुमारी रीना लक्ष्मी के मार्गदर्शन में मेडिकल टीम ने इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अंजाम दिया।       इस पुनीत कार्य में नेत्र सहायक अधिकारी कुमारी दिव्या पाण्डे,  सुंकर अमृत राव,  देवकरण व्यास सहित वार्ड इंचार्ज मती अन्नपूर्णा साहू और स्टाफ नर्स मती स्मृता कच्छ व नमिता मौर्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही ऑपरेशन थिएटर में सहायक  डोलेश्वर जोशी की सक्रियता ने इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया। ऑपरेशन के बाद जब ललित की आंखों से पट्टी हटाई गई, तो उसके चेहरे पर आई चमक ने पूरी मेडिकल टीम की मेहनत को सफल कर दिया। अब ललित न केवल अपनी आंखों से दुनिया को देख पा रहा है, बल्कि अपने परिजनों और आसपास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से पहचानने भी लगा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस संवेदनशीलता ने एक मासूम के जीवन से अंधेरा मिटाकर एक परिवार के घर में उम्मीद का दीया जला दिया है।  

स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के तकनीकी सहयोग से बच्चों में गैर-संचारी रोगों पर राज्य स्तरीय परामर्श आयोजित

रायपुर बच्चों में बढ़ते गैर-संचारी रोगों (एनसीडी), विशेषकर बाल मधुमेह, सिकल सेल रोग एवं जन्मजात हृदय रोग की रोकथाम, शीघ्र पहचान तथा प्रभावी प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रायपुर में  संजीव कुमार झा (संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं) की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन किया गया। इस परामर्श का मुख्य उद्देश्य राज्य में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाना, बहु-विभागीय समन्वय को बढ़ावा देना तथा गुणवत्तापूर्ण उपचार एवं सुदृढ़ रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान बच्चों में एनसीडी की वर्तमान स्थिति, प्रमुख चुनौतियों एवं भावी प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने शीघ्र पहचान, दवाओं की सतत उपलब्धता, उपचार अनुपालन तथा मजबूत रेफरल तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। सिकल सेल रोग प्रबंधन हेतु जशपुर मॉडल को एक प्रभावी एवं अनुकरणीय पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। पैनल चर्चाओं में बाल मधुमेह एवं सिकल सेल रोग के समग्र प्रबंधन, निजी क्षेत्र की भागीदारी, सामुदायिक सहयोग तथा सामाजिक कलंक को कम करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। समूह कार्य के माध्यम से प्रतिभागियों ने स्क्रीनिंग बढ़ाने, उपचार अनुपालन सुधारने तथा सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में AIIMS रायपुर एवं पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के विशेषज्ञों के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) एवं भारतीय शिशु रोग अकादमी (IAP) के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का सफल संचालन यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में, एकम फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। तकनीकी सत्रों में डॉ. खेमराज सोनवानी (उप संचालक, सिकल सेल), डॉ. वी.आर. भगत (उप संचालक, शिशु स्वास्थ्य)एवं  सुबोध धर शर्मा (राज्य सलाहकार, NP-NCD)  सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सलाहकार उपस्थित रहे। परामर्श में ट्राइबल वेलफेयर विभाग, स्कूल शिक्षा, समाज कल्याण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधियों की सहभागिता से बहु-विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ किया गया। सहयोगी संस्थाओं की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन, संगवारी, क्लिंटन फाउंडेशन, NASCO, प्रतिनिधि जुवेनाइल डायबिटीज तथा पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय योगदान दिया। इस राज्य स्तरीय परामर्श में कुल 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया। साथ ही राज्य के उच्च प्राथमिकता वाले 8 जिलों—रायपुर, कांकेर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, महासमुंद, रायगढ़ एवं राजनांदगांव से जिला स्तर के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें जिला एनसीडी नोडल अधिकारी, सिकल सेल नोडल अधिकारी तथा एनसीडी सलाहकार/सहायक नोडल अधिकारी शामिल थे। इन प्रतिनिधियों ने अपने-अपने जिलों के अनुभव साझा करते हुए जमीनी स्तर की चुनौतियों एवं संभावित समाधान प्रस्तुत किए। अंत में प्रतिभागियों ने राज्य में बच्चों हेतु एनसीडी सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने तथा बहु-विभागीय समन्वय के माध्यम से कार्ययोजना को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने की सहमति व्यक्त की गई। कार्यक्रम को सहयोग करने तथा सफल बनाने के लिए राज्य द्वारा यूनिसेफ की सराहना की गई और भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम को करने के लिए विशेष सहयोग के लिए कहा गया।

शून्य दुर्घटना पर कार्यशाला में दिया गया जोर

रायपुर शून्य दुर्घटना पर कार्यशाला में दिया गया जोर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा आज बिलासपुर के पं. देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में आयोजित एकदिवसीय औद्योगिक सुरक्षा जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बिलासपुर के संभागायुक्त  सुनील जैन, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह, आईएचएस के संचालक  मनीष वास्तव ने संबोधित किया। कार्यशाला में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के डिप्टी डायरेक्टर विजय कुमार सोरी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्र की स्पॉन्ज आयरन फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना था।       कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संभागायुक्त  सुनील जैन ने स्पष्ट कहा कि औद्योगिक सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि उद्योगों का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। दुर्घटनाएं भले ही क्षणिक होती हैं, लेकिन उनके दुष्परिणाम लंबे समय तक प्रभावित करते हैं। इसलिए औद्योगिक इकाइयों में जोखिम की पहचान कर समय रहते उचित प्रबंधन, आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की स्थापना, नियमित प्रशिक्षण एवं मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।         कलेक्टर  संजय अग्रवाल ने कहा कि उद्योग देश के विकास और रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम हैं, लेकिन किसी भी दुर्घटना से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि संस्थान की साख भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन और श्रमिकों के सामूहिक प्रयास से ही सुरक्षित कार्य वातावरण निर्मित किया जा सकता है। श्रमिकों को नियमित प्रशिक्षण देने, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने तथा उनमें स्वामित्व की भावना विकसित करने पर उन्होंने विशेष बल दिया।           कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। सुरक्षा उपकरणों का उपयोग न करना गंभीर घटनाओं को जन्म देता है, जिसमें मानव लापरवाही प्रमुख कारण होती है। उन्होंने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने तथा किसी भी घटना की स्थिति में उसे छुपाने के बजाय तत्काल प्रशासन को सूचित करने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों द्वारा सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर प्रस्तुतियां दी गईं तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से श्रमिकों एवं प्रबंधन को जागरूक किया गया। पावर पॉइंट प्रस्तुति एवं संवादात्मक सत्रों के जरिए प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला में सुरक्षा की शपथ भी ली गई। इस आयोजन के माध्यम से औद्योगिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।

चेंबर अध्यक्ष सतीश थौरानी का नया कदम, व्यापारियों के हित में विशेषज्ञों की टीम तैयार

रायपुर छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने व्यापारिक हितों के संरक्षण और व्यापारियों को तकनीकी व कानूनी अड़चनों से राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. चेम्बर द्वारा प्रदेश भर के विषय विशेषज्ञों को विभिन्न विभागों के लिए सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है. यह विशेषज्ञ टीम व्यापारियों को जीएसटी, आयकर, बैंकिंग और श्रम कानून जैसे जटिल विषयों पर आ रही परेशानियों का निराकरण करने और उन्हें सही मार्गदर्शन देने के लिए सीधे संपर्क में रहेगी. जीएसटी एवं अप्रत्यक्ष कर विभाग में चेतन तारवानी, भावेश मित्तल, जितेन्द्र खनूजा, नितिन गोयल और रश्मि वर्मा सहित 20 अनुभवी विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. ये विशेषज्ञ रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, भिलाई और अन्य शहरों के व्यापारियों को जीएसटी संबंधी कानूनी पेचीदगियों पर सलाह देंगे. आयकर एवं मुकदमेबाजी से संबंधित व्यापारियों को आयकर से संबंधित नोटिस और अन्य विधिक कार्यों में सहयोग के लिए हार्दिक पाटनी, मुकुल चोरड़िया, डिंपल वल्र्यानी और रितेश जायसवाल सहित 9 विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है. MSME सब्सिडी, बैंकिंग एवं वित्त (MSME Subsidy, Banking Finance) जैसे विषय पर छोटे और मध्यम उद्योगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और बैंकिंग संबंधी सहायता के लिए अरिहंत जैन, दाहवाल शाह और विक्रम देवनानी सहित 9 सलाहकार नियुक्त किए गए हैं. साथ ही श्रम कानून और रेरा से संबंधित विषयों के लिए हिमांशु लालवानी और सीए टुटेजा जी को विशेषज्ञ नियुक्त किया गया है. चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने बताया कि छत्तीसगढ़ का व्यापारी वर्ग हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. अक्सर जीएसटी, आयकर और बैंकिंग जैसे जटिल तकनीकी विषयों के कारण व्यापारियों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है. हमारा लक्ष्य केवल व्यापार करना नहीं, बल्कि ”व्यापार सुगमता” को धरातल पर उतारना है. इसी उद्देश्य के साथ हमने प्रदेश के चोटी के विशेषज्ञों की एक ”एडवाइजरी टीम” तैयार की है. ये सलाहकार केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सीधे फील्ड में उतरकर व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करेंगे. अब किसी भी व्यापारी को नोटिस या कानूनी पेचीदगियों से घबराने की जरूरत नहीं है. हमारी टीम उनके साथ खड़ी है. हम एक ऐसा वातावरण बनाना चाहते हैं, जहां छत्तीसगढ़ का हर व्यापारी निडर होकर अपने व्यापार का विस्तार कर सके और प्रदेश की उन्नति में सहभागी बने.

मधुमक्खी पालन से किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव

रायपुर  मधुमक्खी पालन  शहद, मोम और पराग उत्पादन के लिए एक अत्यंत लाभदायक कृषि-आधारित व्यवसाय है। भारत में  वैज्ञानिक तकनीक से मधुमक्खियों को बक्सों में पालकर, मौसमी फूलों के अनुसार स्थानांतरित कर बड़े पैमाने पर शहद निकाला जाता है, जो किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रमुख साधन है। मधुमक्खी पालन अपनाने पर किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।             कृषि आधारित आय को सुदृढ़ करने और किसानों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में  जिले भर से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।            जिला पंचायत सीईओ बलरामपुर मती नयनतारा सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में किसानों को पारंपरिक एकल फसल पद्धति को आगे बढ़ते हुए फसल विविधिकरण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन एवं मधुमक्खी पालन जैसे कृषि आधारित व्यवसाय अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।          उप संचालक कृषि  रामचंद्र भगत ने फसल चक्र एवं विविधिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होती है तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी कम किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ. जी. के. निगम ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक लाभकारी व्यवसाय है, जिसे कम पूंजी और सीमित श्रम में शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जलवायु इस व्यवसाय के लिए अनुकूल है, जिससे लघु एवं सीमांत किसानों को आय का बेहतर विकल्प मिल सकता है।        प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ प्राध्यापक डॉ. जी. पी. पैकरा ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन एवं गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता  परमेश्वर गोरे ने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली और प्रोपोलिस जैसे बहुमूल्य उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। विशेषज्ञ डॉ. सचिन जायसवाल ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाने पर किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। वैज्ञानिक  अनिल कुमार सोनपाकर ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।          अनुभवी मधुमक्खी पालक कृषक  बैद्यनाथ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किसान अपने खेत में 5 से 10 मधुमक्खी पेटियां स्थापित कर आसानी से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण में भाग लेने वाले किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस जिला स्तरीय प्रशिक्षण में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वैज्ञानिकों सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।  

मुख्यमंत्री ने कहा—नक्सलवाद अब अंतिम पड़ाव पर, बस्तर में गूंज रही विकास की आवाज़

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को आज एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बस्तर संभाग के जगदलपुर में मोस्ट वॉन्टेड हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार बताते हुए कहा कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और बस्तर की धरती पर हिंसा की विचारधारा पराजित होती स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक भय और हिंसा का वातावरण बनाने वाली माओवादी विचारधारा अब समाप्ति की ओर है और बस्तर तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और पुनर्वास केंद्रित नीतियों के कारण भटके हुए युवा अब मुख्यधारा में लौटने का विश्वास पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का भरोसा मिले, तो हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास के मार्ग को अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में बंदूक की आवाज़ नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे कार्यों ने बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। मुख्यमंत्री  साय ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह के सशक्त मार्गदर्शन को देते हुए कहा कि नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने सुरक्षाबलों के साहस, समर्पण और रणनीतिक कार्रवाई की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि माओवाद के पूर्ण खात्मे के साथ बस्तर में शांति, विकास और विश्वास की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ेगी और छत्तीसगढ़ देश के सुरक्षित, समृद्ध और विकसित राज्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।