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लैंगिक उत्पीड़न अंतर्गत कार्यशाला 23 मार्च को

बिलासपुर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिलाओं का कार्यस्थल लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 23 मार्च को सवेरे 11 बजे से जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभा भवन में किया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने कार्यालय, निजी संस्थान एवं प्रतिष्ठान में गठित आंतरिक शिकायत समिति के अध्यक्ष एवं 1 सदस्य को कार्यशाला में उपस्थित होने कहा है।  

वित्त मंत्री चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026, विधानसभा से पारित

वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा से पारित   आवास और अधोसंरचना विकास को मिलेगी नई गति रायपुर  राज्य में आवासीय और शहरी अधोसंरचना विकास को व्यापक स्वरूप देने के उद्देश्य से वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह संशोधन मंडल की भूमिका को विस्तार देते हुए उसे एक आधुनिक और बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सदन में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का गठन मूलतः मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 के तहत किया गया था। राज्य गठन के बाद यह संस्था प्रदेश में आवासीय योजनाओं, नगरीय अधोसंरचना और किफायती आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में मंडल द्वारा लगभग 3,050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। राज्य शासन द्वारा 735 करोड़ रुपये का ऋण भुगतान कर मंडल को ऋणमुक्त किया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY 2.0) के अंतर्गत 2,000 ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण को स्वीकृति मिली है। मंत्री चौधरी ने बताया कि 650 करोड़ रुपये से अधिक की 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है। नवंबर 2025 में आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेले में 2,060 करोड़ रुपये की 56 नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया, जिसमें 2,517 संपत्तियों की बुकिंग और 1,477 का आवंटन किया जा चुका है। वर्तमान में मंडल छत्तीसगढ़ के 33 में से 27 जिलों में सक्रिय है और प्रक्रियात्मक सुधारों के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ भौतिक कब्जा सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके अलावा, 858 करोड़ रुपये की लागत से 146 विकासखंडों में शासकीय आवासों का निर्माण कर मंडल ने अपनी तकनीकी क्षमता भी सिद्ध की है। उन्होंने कहा कि रायपुर, नवा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव को एकीकृत कर एक शहरी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें गृह निर्माण मंडल की भूमिका अहम होगी। संशोधन के तहत मंडल को केवल आवास निर्माण तक सीमित न रखते हुए टाउन प्लानिंग स्कीम, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), जॉइंट वेंचर, रिडेवलपमेंट, स्लम पुनर्विकास और मिश्रित भूमि उपयोग जैसी आधुनिक विकास अवधारणाओं को लागू करने की अनुमति दी गई है। अंत में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि यह संशोधन गृह निर्माण मंडल को एक सशक्त, सक्षम और बहुआयामी संस्था के रूप में स्थापित करेगा। इससे राज्य में सुनियोजित, टिकाऊ और समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा आम नागरिकों को बेहतर आवास और आधुनिक अधोसंरचना सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

झारखंड सूचना विभाग की टीम ने छत्तीसगढ़ संवाद से ली ‘रोजगार और नियोजन’ की जानकारी

झारखंड के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की टीम ने छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा प्रकाशित ‘रोजगार और नियोजन’ की ली जानकारी रायपुर युवाओं को रोजगार संबंधी जानकारी सुलभ कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। आज झारखंड के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की टीम ने छत्तीसगढ जनसंपर्क की सहयोगी संस्था छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा प्रकाशित लोकप्रिय पत्रिका ‘रोजगार और नियोजन’ का अवलोकन कर जानकारी ली। टीम को साप्ताहिक पत्रिकारोजगार और नियोजन पत्रिका के संबंध में सहायक संपादक श्रीमती गीतांजली  नेताम ने रोजगार और नियोजन पत्रिका  की पाठ्य सामग्री, स्वरूप और युवाओं के लिए उपयोगी जानकारी दी।           झारखंड की टीम ने रोजगार और नियोजन पत्रिका की सराहना की l टीम में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग झारखंड के डिप्टी डायरेक्टर आनंद कुमार, विभाग की प्रतिनिधि श्रीमती सुनीता धान  तथा विधि सलाहकार अमन कुमार शामिल रहे।         झारखण्ड की टीम के अधिकारियों ने बताया कि झारखंड के युवाओं को भी इसी प्रकार की विश्वसनीय और संगठित रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य में ‘रोजगार और नियोजन’ जैसी पत्रिका प्रकाशित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए वे इस प्रकाशन की प्रति लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी प्रस्तुत करेंगे। टीम के सदस्यों ने कहा कि इस प्रकार की पत्रिका प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें सरकारी नौकरियों, योजनाओं और कैरियर मार्गदर्शन से जुड़ी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होती है।           इस पहल को लेकर टीम ने उम्मीद जताई जा रही है कि यदि यह योजना साकार होती है, तो झारखंड के हजारों युवाओं को रोजगार संबंधी सटीक और समय पर जानकारी मिल सकेगी, जिससे उनके भविष्य निर्माण में सकारात्मक योगदान मिलेगा। झारखण्ड की टीम के छत्तीसगढ संवाद भ्रमण के अवसर पर रोजगार और नियोजन से  संबद्ध अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे l

धान से मक्का की ओर बढ़ते कदम :फसलचक्र परिवर्तन से धमतरी के किसानों की बढ़ी आय, जल संरक्षण को मिली नई दिशा

रायपुर धान से मक्का की ओर बढ़ते कदम :फसलचक्र परिवर्तन से धमतरी के किसानों की बढ़ी आय, जल संरक्षण को मिली नई दिशा कभी धान की पारंपरिक खेती के लिए पहचाने जाने वाला धमतरी जिला अब कृषि नवाचार की नई मिसाल बनता जा रहा है। यहां के किसान फसलचक्र परिवर्तन अपनाकर कम पानी में अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव ने न केवल खेती की तस्वीर बदली है, बल्कि किसानों की सोच और संसाधनों के उपयोग में भी सकारात्मक परिवर्तन लाया है।       जिला प्रशासन की दूरदर्शी पहल में फसलचक्र परिवर्तन को एक जन-अभियान का रूप दिया गया है। किसानों को जागरूक करने, प्रशिक्षण देने और निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के प्रयासों ने इस पहल को सफल बनाया है। कृषि विभाग की टीम ने गांव-गांव पहुंचकर किसानों से संवाद स्थापित किया, जिससे उनमें नई फसलों के प्रति विश्वास मजबूत हुआ।        ग्राम गट्टासिल्ली तालपारा के किसान रामप्रकाश नेताम इस परिवर्तन के प्रेरक उदाहरण हैं। पहले वे केवल धान की खेती करते थे, लेकिन अब 3.5 एकड़ में मक्का की खेती कर बेहतर उत्पादन और आय अर्जित कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत तकनीकों, कीट प्रबंधन और फसल देखरेख के बेहतर तरीकों को अपनाया है, जिससे उनकी खेती अधिक लाभकारी बन गई है।         रामप्रकाश जैसे सैकड़ों किसानों ने मक्का सहित अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। खेतों में लहराती मक्का की फसल इस सकारात्मक बदलाव की सजीव तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि खेती का जोखिम भी कम हुआ है।         फसलचक्र परिवर्तन का पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों के कारण सिंचाई पर दबाव घटा है, जिससे जल संसाधनों का संरक्षण हो रहा है और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल रही है। साथ ही, विविध फसलों की खेती से भूमि की उर्वरता में भी सुधार हुआ है।       यह पहल केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय को स्थायी और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। धमतरी में फसलचक्र परिवर्तन अब एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में उभर रहा है, जो आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए कृषि नवाचार और सतत विकास का प्रेरणास्रोत बनेगा।

भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का होली मिलन समारोह संपन्न

बिलासपुर भारतीय जनता युवा मोर्चा छत्तीसगढ़ द्वारा रायपुर के शहनाई गार्डन मे आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुआ इस अवसर पर मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के यशश्वी मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय जी एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष माननीय किरण सिंहदेव जी सहित मंत्रीगण, भाजपा नेतागण उपस्थित रहें.  *शानदार होली मिलन कार्यक्रम के आयोजन के लिये ऊर्जावान भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा प्रदेश महामंत्री जितेंद्र देवांगन कुणाल ठाकुर उपाध्यक्ष गौरी गुप्ता सनी केसरी जी आयुष सिंह आलिंद तिवारी जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता जिला महामंत्री केतन वर्मा राजकमल कश्यप महर्षि बाजपेई भानु श्रीवास अमर राजपूत पृथ्वी श्रीवास शुभम यादव गुलशन खांडेकर गौरव मिश्रा अमन सोनी  सिद्धार्थ त्रिवेदी शुभम मिश्रा आयुष चतुर्वेदी.

बड़ा प्रशासनिक फैसला: सीवरेज सफाई बिना परमिशन नहीं, भू-राजस्व संशोधन बिल भी पास

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य में जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर कड़ाई से कार्यवाही की जाए. उन्होंने सीवरेज सफाई के संबध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए. इसके अतर्गत केवल नगर निगम के माध्यम से या पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही सीवरेज सफाई का कार्य करवाया जाए. साथ ही सफाई के दौरान सुरक्षा मापदंडों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए, जिससे कोई भी अप्रिय घटना ना होने पाए. विनियोग विधेयक प्रस्तुत – वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक लाख 87 हजार 500 करोड़ रुपए का व्यापक और जनोन्मुखी विनियोग विधेयक प्रस्तुत करते हुए राज्य के समग्र विकास की दिशा में एक मजबूत खाका सामने रखा. विधानसभा में विनियोग विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट राज्य के 3 करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य समावेशी विकास, आर्थिक सुदृढ़ता तथा अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में तैयार इस बजट को सरकार ने “संकल्प आधारित बजट” बताया है, जो राज्य को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक पारित – विधानसभा में आज छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक पारित हुआ. इस विधेयक पर विपक्ष ने आपत्ति की. कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कहा, बिना वित्तीय पत्रक के विधेयक को पारित करना ठीक नहीं है. संशोधक विधेयक के प्रावधान से वित्तीय हानि की संभावना है. राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विपक्ष की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा, वित्तीय हानि नहीं होगी. विधेयक के लिए वित्तीय पत्रक की आवश्यकता नहीं है.

कलेक्टर ने जनगणना की तैयारियों का लिया जायजा, 1 मई से शुरू होगी मकानों की गणना

कलेक्टर ने जनगणना की तैयारियों का लिया जायजा    प्रथम चरण में 1 मई से शुरू होगी मकानों की गणना  बिलासपुर जनगणना 2026-27 के तहत जिले में मकान गणना का कार्य 01 मई से शुरू होने जा रहा है, जिसके लिए जिला प्रशासन द्वारा तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। इसी सिलसिले में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने आज जिले के सकरी, नेवसा, रतनपुर एवं रानीगांव क्षेत्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जमीनी स्तर पर जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।     दौरे के दौरान कलेक्टर ने हाउस लिस्टिंग एवं जनसंख्या गणना से संबंधित की जा रही तैयारियों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रत्येक कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। कलेक्टर ने डिजिटल माध्यम से किए जाने वाले डेटा संकलन की तैयारियों की भी जानकारी ली। उन्होंने फील्ड स्तर पर तैनात कर्मचारियों के प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता तथा कार्य की निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।     निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्थानीय नागरिकों से संवाद कर उन्हें जनगणना के महत्व के बारे में अवगत कराया और इसमें सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि जनगणना देश के विकास की आधारशिला है, इसमें दी गई प्रत्येक जानकारी भविष्य की योजनाओं को दिशा देती है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनजागरूकता गतिविधियों को और तेज किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में सहभागिता निभा सकें। साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि नागरिकों की निजी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाए। जिले में 01 मई से 30 मई तक हाउस लिस्टिंग का कार्य किया जाएगा, जबकि जनसंख्या गणना का कार्य सितंबर 2026 से प्रारंभ होकर मार्च 2027 तक संचालित होगा। जनगणना की तैयारियों के तहत जिला स्तरीय अधिकारियों एवं तहसीलदारों का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है, जबकि फील्ड स्तरीय अधिकारियों का प्रशिक्षण 23 मार्च से शुरू हो रहा है।      दौरे के दौरान सहायक कलेक्टर श्री अरविंथ कुमारन, एडीएम श्री शिव कुमार बनर्जी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी उपस्थित थे।  

आयुष्मान मरीजों को झटका: बड़े अस्पतालों ने इलाज से किया मना, स्वास्थ्य मंत्री सख्त

रायपुर. एक तरफ सरकार आयुष्मान योजना की सफलता की कहानी कह रही है, वहीं दूसरी ओर राजधानी रायपुर स्थित नामचीन अस्पताल योजना के तहत मरीजों का उपचार करने से इंकार कर रहे हैं. विधानसभा में योजना को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, श्री नारायणा हॉस्पिटल, बालगोपाल हॉस्पिटल सहित अन्य अस्पतालों के खिलाफ शिकायत मिली है, जिस पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने आयुष्मान योजना को लेकर सवाल किया. उन्होंने पूछा कि प्रदेश में आयुष्मान योजना में कितने कार्डधारी हैं, और एक अप्रैल 25 से 15 फरवरी 26 तक कितने हितग्राहियों का आयुष्मान योजनांतर्गत उपचार हुआ? कितनी राशि का भुगतान हुआ? कितनी बची है? राज्यांश और केंद्रांश कितना है? भुगतान लम्बित होने पर कितने लोगों का इलाज नहीं हुआ? कितनी शिकायत आई? कितनी जाँच हुई? स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में 2.47 करोड़ आयुष्मान योजना के कार्डधारी हैं. 2024 से 2026 तक योजनांतर्गत 22,59,995 लोगों का उपचार हुआ. योजना में केंद्र का 60% और राज्य का हिस्सा 40% है. वहीं योजना में शामिल अस्पतालों को लेकर 31 शिकायतें प्राप्त हुई, जिन पर कार्यवाही हुई है. इसके साथ कार्ड से इलाज करने पर मना करने वाले अनेक अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है, और कई अस्पतालों के खिलाफ जांच जारी है.

भर्ती अभ्यर्थियों के लिए राहत: जॉइनिंग के बाद खाली पद वेटिंग लिस्ट से भरे जाएंगे

बिलासपुर. पुलिस आरक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग के बाद खाली रह जाने वाले पदों को वेटिंग लिस्ट से भरा जाए. कोर्ट ने साफ कहा कि सभी विज्ञापित पद केवल जारी चयन सूची से भर पाना संभव नहीं है. दरअसल, वर्ष 2024 में पुलिस विभाग द्वारा करीब 5967 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि कई अभ्यर्थियों ने एक से अधिक जिलों से आवेदन किया और मेरिट में आने पर उन्हें कई जिलों की चयन सूची में शामिल कर लिया गया. इससे वास्तविक रूप से पद खाली रह जाने की स्थिति बन रही है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि चयन सूची में 5948 अभ्यर्थियों के नाम प्रकाशित किए गए हैं, लेकिन यह संभव है कि एक ही अभ्यर्थी एक से अधिक जिलों में चयनित हो. ऐसे में जब वह किसी एक जिले में जॉइन करेगा, तो बाकी जिलों के पद रिक्त हो जाएंगे. इन रिक्त पदों को बाद में वेटिंग लिस्ट से भरा जाएगा. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिंगल बेंच ने कहा कि वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट है कि सभी पद चयन सूची से नहीं भर पाएंगे. इसलिए राज्य सरकार को निर्देशित किया जाता है कि चयनित उम्मीदवारों की जॉइनिंग के बाद बचे हुए पदों को नियमों के तहत वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों से भरे. कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए रिक्त पदों को जल्द भरने की कार्रवाई की जाए. 

धर्मांतरण कानून पर बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में बिल पास, जानें अन्य राज्यों से कितना अलग

रायपुर. छत्तीसगढ़ बहुप्रतीक्षित विधेयक आखिरकार विधानसभा में पारित किया गया। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन में भारी गहमागहमी देखने को मिली। गृह मंत्री विजय शर्मा ने राज्य में धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ सदन के पटल पर रखा। विधेयक पेश होते ही विपक्ष ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम करार दिया। क्या है छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विधेयक? छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्रय विधेयक 2026 के फॉर्मेट का अनुमोदन किया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति और साधनों पर सही तरीके से रोक लगाना है. अब अगर छत्तीसगढ़ में रहने वाले किसी व्यक्ति को कोई दूसरा इंसान जबरन दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अगर नियम के बाहर कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी. विधेयक साफ तौर पर यह कहता है कि धर्म परिवर्तन किसी भी व्यक्ति की इच्छा से होना चाहिए. दबाव या लालच से नहीं. छत्तीसगढ़ में पहले से ही धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जो 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्व में आया था. सार्वजनिक की जाएगी धर्मांतरण की जानकारी छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विधेयक के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का नियम होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा. जबरन धर्मांतरण करवाने पर है सजा का प्रावधान     कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान किया गया है.     विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे. मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है. दूसरे राज्यों से कैसे अलग है छत्तीसगढ़ का कानून छत्तीसगढ़ से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्म बदलने के खिलाफ कानून मौजूद हैं. सभी राज्यों में लगभग कानून एक जैसा ही है, लेकिन उसकी सजा और जुर्माने में अंतर है. जबकि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की एक बड़ी आबादी है और उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है. इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण ना हो इस पर जोर दिया गया है और सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन की आईं खबरें छत्तीसगढ़ के बस्तर और जशपुर क्षेत्र में कई बार आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन की खबरें आई थीं. कई बार ऐसा भी पता चला है कि आदिवासियों और धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के बीच भी विवाद हुआ था. अब धर्मांतरण विधेयक के बाद ऐसे मामलों में रोक लगने की उम्मीद होगी. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई FIR भी दर्ज हुई हैं और पुलिस को शिकायत भी मिली है. उपमुख्यमंत्री ने कही ये बात धर्मांतरण विधेयक पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 1968 का धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू है. अब परिस्थितियां बदल गई हैं, तो नई परिस्थितियों के तहत धर्म स्वतंत्र विधेयक लाया गया है.