samacharsecretary.com

विद्यार्थियों के आधार बायोमेट्रिक अपडेट के लिए स्कूलों में शिविर, 21 हजार से अधिक स्टूडेंट्स शामिल

महासमुंद जिले में यूडाईस 2025-26 के अंतर्गत आधार से संबंधित बायोमेट्रिक अपडेट की प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 06 फरवरी 2026 की स्थिति में जिले में कुल 30,587 विद्यार्थियों का बायोमेट्रिक अपडेट लंबित है, जिसे शीघ्र पूर्ण किया जाना है। इस हेतु विद्यालयों में विशेष बायोमेट्रिक अपडेट शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से यूआईडीएआई से डाटा अपडेट कर उसकी प्रविष्टि यूडाईस पोर्टल पर की जाएगी। अभियान के अंतर्गत ई.डी.एम. चिप्स से समन्वय कर 20 से अधिक लंबित बायोमेट्रिक वाले 352 विद्यालयों का चयन किया गया है, जिसमें लगभग 21,406 विद्यार्थियों का अपडेट किया जाना है। जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा रेखराज शर्मा द्वारा सभी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयकों को निर्देशित करते हुए अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए विद्यालयों को पालकों एवं विद्यार्थियों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं शिविर में उपस्थित होकर अपना बायोमेट्रिक अपडेट करवा सकें। इस कार्य के सफल संचालन के लिए विकासखंड स्तर पर बीआरसी एवं संकुल स्तर पर संकुल समन्वयकों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पूरे अभियान की प्रतिदिन मॉनिटरिंग जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद द्वारा किया जाएगा। प्रथम चरण में 5 से 7 वर्ष एवं 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों के बायोमेट्रिक अपडेट पर फोकस करते हुए शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। यूआईडीएआई द्वारा बायोमेट्रिक अपडेट की जानकारी यूडाईस पोर्टल पर अपडेट करने की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही यूआईडीएआई के निर्देशानुसार 7 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट एक वर्ष के लिए निःशुल्क किया गया है, जबकि 5 से 7 वर्ष एवं 17 वर्ष के बच्चों के लिए यह सुविधा पहले से ही निःशुल्क है। आधार ऑपरेटरों को प्रतिदिन शिविर की जानकारी निर्धारित प्रारूप में संधारित करने तथा शिविर स्थल पर आवश्यक दस्तावेज सूची, शुल्क सूची एवं अन्य निर्देश प्रदर्शित करने कहा गया हैं। 

हाईकोर्ट ने खारिज किया भतीजे का दावा, कहा- मुस्लिम व्यक्ति को वसीयत के लिए वारिसों की सहमति जरूरी

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति का एक तिहाई से अधिक हिस्सा वसीयत के जरिए किसी को नहीं दे सकता। जब तक कि बाकी वैध वारिस अपनी सहमति न दें। हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून में वारिसों के अधिकारों की सुरक्षा एक मूल सिद्धांत है। यह फैसला कोरबा जिले से जुड़े एक मामले में आया है। जहां एक विधवा को उसके पति की संपत्ति में हिस्सा देने से निचली अदालतों ने इनकार कर दिया था। जानिए पूरा मामला दरअसल, 64 साल की जैबुननिशा ने अपने पति अब्दुल सत्तार लोधिया की जायदाद पर हक मांगते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी। उन्होंने कोरबा के द्वितीय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनके केस को 2015 और 2016 में खारिज कर दिया था। जैबुननिशा के पति की 2004 में मौत हो गई थी। जिसके बाद भतीजे मोहम्मद सिकंदर ने एक वसीयत पेश की, जिसमें दावा किया गया कि सारी जायदाद उसे मिलेगी। सिकंदर ने खुद को ‘’पालक बेटा' बताया था। जैबुननिशा ने इस वसीयत को फर्जी बताया और कहा कि यह उनकी सहमति के बिना बनाई गई थी। लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील जैबुननिशा ने पहले निचली अदालतों में मुकदमा दायर किया था, लेकिन दोनों अदालतों ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालतों के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि निचली अदालतें विधवा के वैध कानूनी अधिकार की रक्षा करने में असफल रही थी। मुस्लिम लॉ एक्ट में है यह प्रावधान हाईकोर्ट ने मुस्लिम लॉ के सेक्शन 117 और 118 का हवाला देते हुए कहा कि वसीयत के जरिए जायदाद देने की एक सीमा है। मुस्लिम व्यक्ति अपनी जायदाद का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा ही वसीयत कर सकता है। अगर इससे ज्यादा जायदाद वसीयत की जाती है, या किसी वारिस को दी जाती है, तो उसके लिए बाकी वारिसों की सहमति जरूरी है। जस्टिस बीडी गुरु ने यह भी कहा कि निचली अदालतों ने गलती की कि उन्होंने विधवा पर वसीयत को गलत साबित करने का बोझ डाल दिया। असल में यह सिकंदर की जिम्मेदारी थी कि वह साबित करे कि जैबुननिशा ने पति की मौत के बाद अपनी मर्जी से और पूरी समझदारी से वसीयत के लिए सहमति दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ चुप रहने या केस दायर करने में देरी करने को रजामंदी नहीं माना जा सकता। इस मामले में कोई भी गवाह यह साबित नहीं कर पाया कि जैबुननिशा ने पूरी जायदाद वसीयत करने की इजाजत दी थी। हाईकोर्ट ने निरस्त किया लोअर कोर्ट का आदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अगर सिकंदर की वसीयत असली भी होती, तब भी वह जायदाद का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा नहीं मांग सकता था। हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया और इस बात पर जोर दिया है कि वारिसों के हक की हिफाजत मुस्लिम कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है। कोर्ट ने कहा, 'कानूनी एक तिहाई से ज्यादा की वसीयत वारिसों की मौत के बाद की रजामंदी के बिना प्रभावी नहीं हो सकती।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी विभाग छत्तीसगढ़ और एसटीपीआई के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता

रायपुर छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।आधुनिक अधोसंरचना, प्रभावी ई-गवर्नेंस प्रणाली और निवेश-अनुकूल नीतियों के चलते छत्तीसगढ़ आज आईटी, आईटीईएस एवं इमरजिंग टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के मध्य हुए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) उपरांत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।   मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवाओं में उद्यमिता विकसित करने और उन्हें आईटी एवं आईटीईएस जैसे क्षेत्रों में विश्वस्तरीय अवसर राज्य के भीतर ही उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल की गई है। इस एमओयू के तहत राज्य में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (CoE) एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वन एवं औषधीय उत्पाद आधारित मेडटेक, स्मार्ट सिटी समाधान तथा स्मार्ट कृषि जैसे चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की स्थापना की जाएगी, जो प्रति वर्ष लगभग 30 से 40 हार्डवेयर स्टार्ट-अप और एमएसएमई को प्रोडक्ट डिजाइन, प्रोटोटाइपिंग, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण की सुविधाएं प्रदान करेगा।                मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस पहल से प्रदेश के युवाओं को राज्य के भीतर ही इनक्यूबेशन, मेंटरशिप, फंडिंग और आधुनिक प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे उच्च कौशल वाले युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने एसटीपीआई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्था के सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देशभर में 68 केंद्रों और 24 सेक्टर-विशेष सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से एसटीपीआई का व्यापक अनुभव छत्तीसगढ़ के स्टार्ट-अप और नवाचार इकोसिस्टम को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह एमओयू राज्य के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा और छत्तीसगढ़ को डिजिटल नवाचार, तकनीकी उद्यमिता और स्टार्ट-अप के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, इलेक्ट्रॉनिक और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, निदेशक एसटीपीआई रवि वर्मा, चिप्स के सीईओ प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

‘बस्तर पंडुम’ बस्तर की बदली पहचान का सशक्त प्रतीक : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ बस्तर को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में आयोजित बस्तर पंडुम को बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का भव्य उत्सव बताते हुए इससे जुड़े सभी सहभागियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक समय बस्तर का नाम आते ही माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की छवि उभरती थी, लेकिन आज परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब बस्तर शांति, विकास और स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जा रहा है। उन्होंने कामना की कि बस्तर का आने वाला समय शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव से परिपूर्ण हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर मार्गदर्शन से बस्तर आज सांस्कृतिक गौरव और समावेशी विकास के सशक्त प्रतीक के रूप में अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजन जनजातीय परंपराओं, लोक-संस्कृति और विरासत को सहेजने के साथ-साथ शांति, विश्वास और समावेशी प्रगति का प्रभावी संदेश देते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और आजीविका के अवसरों के विस्तार से क्षेत्र में भरोसे और सहभागिता का नया वातावरण बना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जनजातीय समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ बस्तर को शांति, समृद्धि और विकास की नई ऊँचाइयों तक निरंतर अग्रसर करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

गिरवानी और कन्हर एनीकट के लिए 7.69 करोड़ स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बलरामपुर रामानुजगंज जिले के अंतर्गत दो सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 7.69 करोड़ की राशि स्वीकृत किये गये हैं। स्वीकृत कार्यो में विकासखण्ड-रामचंद्रपुर की रामानुजगंज शहर के कन्हर एनीकट के जीर्णोद्धार व घाट निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 11 लाख 87 हजार  रुपये स्वीकृत किये गये है।  योजना के निर्माण से भू-जल संवर्धन निस्तारी एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी। इसी तरह से विकासखण्ड-रामचंद्रपुर की गिरवानी नदी एनीकट योजना के निर्माण कार्य हेतु 3 करोड़ 57 लाख 60 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। योजना से जल संवर्धन निस्तारी, पेयजल एवं आवागमन के साथ किसानों द्वारा स्वयं के साधनो से 75 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। योजना के अंतर्गत निर्माण कार्यों को कराने मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अम्बिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई हैं।

बसनारा और पहिया जलाशय योजना के लिए 5.61 करोड़ रूपए स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा सूरजपुर जिले की दो जलाशय योजनाओं के कार्यों के लिए 5 करोड़ 61 लाख 51 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। स्वीकृत कार्यों में विकासखण्ड-ओड़गी की बसनारा जलाशय का मरम्मत (जीर्णोद्वार) कार्य के लिए एक करोड 26 लाख 66 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है।  योजना के प्रस्तावित कार्यो के पूर्ण हो जाने से रूपांकित सिंचाई क्षमता 60 हेक्टेयर के विरूद्ध 30 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इसी तरह विकासखण्ड प्रतापपुर की पहिया जलाशय योजना के निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 34 लाख 85 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के निर्माण से 100 हेक्टेयर खरीफ एवं 30 हेक्टेयर रबी सहित कुल 130 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा होगी। सिंचाई योजनाओं के कार्य पूर्ण कराने मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अंबिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना: 6,412 जोड़ें आज होंगे शादी के बंधन में, मुख्यमंत्री साय देंगे आशीर्वाद

रायपुर  छत्तीसगढ़ में 10 फरवरी को सामाजिक समरसता और जनकल्याण का बड़ा दृश्य देखने को मिलेगा. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 6,412 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधेंगे. राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देंगे. यह आयोजन केवल विवाह समारोह नहीं, बल्कि राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है. राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में सुबह 11 बजे से भव्य सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां 1,316 जोड़े विभिन्न धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करेंगे. कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह अध्यक्षता करेंगे, जबकि उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे. बलौदा बाजार, धमतरी, दुर्ग, महासमुंद और राजनांदगांव जिलों के जोड़े ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ेंगे, जबकि अन्य जिलों में जिला मुख्यालयों पर सामूहिक विवाह आयोजित किए जाएंगे. नवविवाहित जोड़ों को दिया जाएगा आर्थिक सहयोग योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 35 हजार रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में दी जाएगी. इसके अलावा 15 हजार रुपये की उपहार सामग्री और विवाह आयोजन की अन्य व्यवस्थाएं भी सरकार द्वारा की जाएंगी. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलती है और सामाजिक गरिमा के साथ बेटियों का विवाह संभव हो पाता है. हर धर्म, हर समाज की होगी भागीदारी इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सामाजिक विविधता भी दिखाई देगी. कुल विवाहों में से 6,281 हिंदू रीति रिवाज से, 3 इस्लामिक रीति रिवाज से, 113 ईसाई रीति रिवाज से, 5 बौद्ध रीति रिवाज से कराए जाएंगे. इसके अलावा, 10 बैगा समुदाय के जोड़े भी इस कार्यक्रम में शादी के बंधन में बंधेंगे. यानी यह आयोजन सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश भी देगा. इन जिलों के जोड़े कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़ेंगे इस कार्यक्रम से बलौदा बाजार, धमतरी, दुर्ग, महासमुंद और राजनांदगांव जिलों के जोड़े ऑनलाइन माध्यम से राज्य स्तरीय कार्यक्रम से जुड़ेंगे। शेष जिलों में जिला मुख्यालयों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें संबंधित प्रभारी मंत्री एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से राज्य शासन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मानपूर्वक विवाह का अवसर प्रदान कर रहा है। यह वृहद आयोजन सामाजिक समानता, समरसता एवं जनकल्याणकारी शासन के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से दर्शाता है। कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का भी होगा शुभारंभ इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री “कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” का भी शुभारंभ करेंगे. पहले चरण में 6 माह से 52 माह आयु वर्ग के 40 हजार कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोषण सहायता दी जाएगी. इस अभियान की शुरुआत बस्तर संभाग के बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा जिलों से होगी. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता, सम्मान और सुरक्षित भविष्य का संदेश देती है. एक ही मंच पर हजारों जोड़ों का विवाह राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच को दर्शाता है, वहीं कुपोषण मुक्त अभियान भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ बनाने की दिशा में अहम कदम है. छत्तीसगढ़ में 10 फरवरी का दिन सामाजिक उत्सव और जनहित योजनाओं के संगम के रूप में याद किया जाएगा.

छत्तीसगढ़ की पंचायतों में हाई-स्पीड इंटरनेट का विस्तार, केंद्र से 3,500 करोड़ के प्रस्ताव की मांग

रायपुर  केंद्र सरकार की भारत नेट योजना के तीसरे चरण (फेज-थ्री) में प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में आप्टिकल फाइबर केबल पहुंचाई जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा लोगों को मिलेगी। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को 3,500 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। इसके साथ प्रदेश में पांच हजार नए मोबाइल टावर भी लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। 11,693 ग्राम पंचायतें हैं त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत 11,693 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2024-25 की स्थिति में पहले और दूसरे चरण को मिलाकर भारत नेट परियोजना के तहत राज्य की 9,804 ग्राम पंचायतों को आप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा जा चुका है। इसके रखरखाव एवं संचालन के लिए 66 करोड़ की पूल निधि के गठन का भी प्रविधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में वाई.फाई के माध्यम से हाट-स्पाट स्थापित कर प्रदेश भर में इंटरनेट की पहुंच बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रथम चरण में 1,000 ग्राम पंचायतों में वाईफाई की सुविधा के लिए पीएमवाणी परियोजना अंतर्गत 37 करोड़ का प्रविधान किया गया है। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा उपयोग किए जा रहे ई. परिसंपत्ति, मोबाइल एप और वेबसाइट की साइबर सुरक्षा के लिए आवश्यक जांच एवं सर्टिफिकेशन की व्यवस्था की जाएगी। बस्तर के माओवाद प्रभावित 735 गांवों में पहुंचाना है कनेक्टिविटी बस्तर संभाग में कुल 3,791 एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्रों में से 3,056 स्थानों पर मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध है, जबकि 735 ग्राम अब भी इससे वंचित हैं। शेष इलाकों में नेटवर्क विस्तार के लिए 481 नए मोबाइल टावरों की आवश्यकता चिन्हित की गई है, जिन्हें स्वीकृति मिल चुकी है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। योजना के अनुसार दिसंबर 2026 तक सभी स्वीकृत मोबाइल टावर स्थापित कर दिए जाएंगे। वर्तमान में टावर स्थलों का सर्वे कार्य प्रगति पर है। इन टावरों की स्थापना और संचालन का कार्य भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) द्वारा किया जा सकता है। फेज टू की कंपनी के साथ कानूनी विवाद जानकारी के मुताबिक पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा चिप्स और टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के बीच 3,056 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ था, जिसका लक्ष्य 6,000 गांवों तक ब्राडबैंड पहुंचाना था। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम न होने के कारण मई 2025 में टाटा प्रोजेक्ट्स ने अनुबंध समाप्त कर दिया गया था। कंपनी ने खुदाई में आने वाली बाधाओं और प्रशासनिक दिक्कतों को इसका मुख्य कारण बताया था। यह मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है। इस कानूनी विवाद और काम की धीमी गति के कारण फेज-दो का काम भी बाधित हुआ। अधिकारियों का क्या कहना अंकित आनंद, सचिव, इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी का कहना है कि राज्य के हर गांव तक मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। भारत नेट योजना के तीसरे चरण में हम सभी ग्राम पंचायतों को कवर कर सकेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

मैनपाट महोत्सव 2026 में बिखरेगा संगीत का जादू, मनोज तिवारी और कनिका कपूर समेत नामी कलाकारों की प्रस्तुति

रायपुर  छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मैनपाट महोत्सव 2026 का आयोजन 13 से 15 फरवरी तक किया जाएगा। यह महोत्सव तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी, बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर सहित कई नामी कलाकार होंगे शामिल होंगे।  महोत्सव के दौरान एडवेंचर गेम्स, बोटिंग, झूले, भव्य मेला और दंगल जैसे आकर्षक आयोजन भी किए जाएंगे। मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे। आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। लंबे समय बाद इस महोत्सव की रौनक फिर से लौटती नजर आ रही है। पिछले कुछ सालों में आयोजन औपचारिकता तक सीमित रह गया था, लेकिन इस बार इसे भव्य रूप दिया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा इस महोत्सव के लिए 10 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। आयोजन का मुख्य उद्देश्य मैनपाट में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और सैलानियों को आकर्षित करना है। पहले दिन भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी बांधेगे शमा 13 फरवरी (शुक्रवार) को महोत्सव का शुभारंभ होगा। पहले दिन भाजपा सांसद और भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार मनोज तिवारी मंच पर प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा पहले दिन छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और ओडिशा के प्रसिद्ध छउ नृत्य कलाकार हरिपद मोहंता भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही स्थानीय कलाकार भी रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। दूसरा दिन छत्तीसगढ़ के कलाकार देंगे प्रस्तुति आयोजन के दूसरे दिन 14 फरवरी शनिवार को सरगुजा के मशहूर गायक स्वप्निल जायसवाल, छत्तीसगढ़ी गायिका अलका चंद्राकर, इंडियन आइडल और सारे-गा-मा-पा जैसी रियलिटी शोज की फेम वैशाली रायकवार अपनी प्रस्तुति देंगे। ओडिशा के कलाकारों की भागीदारी भी इस दिन विशेष रहेगी। अन्य रंगारंग कार्यक्रम माहौल को मनोरंजक बनाएंगे। तीसरे दिन कनिका कपूर बिखेरेंगी जादू महोत्सव का समापन 15 फरवरी रविवार को होगा। अंतिम दिन बॉलीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर अपनी प्रस्तुति देंगी। उनके अलावे रायगढ़ घराने की कत्थक नृत्यांगना ज्योतिश्री वैष्णव, छत्तीसगढ़ के उभरते गायक आयुष नामदेव भी अपनी प्रस्तुति देंगे। एडवेंचर करेगा सैलानियों को आकर्षित मैनपाट की सुरम्य वादियां सैलानियों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती हैं। सालभर यहां सैलानी पहुंचते हैं। खासकर ठंड के दिनों में मैनपाट में सैलानियों की सर्वाधिक संख्या होती है। बसंत के आगमन के बावजूद मैनपाट में रातें सर्द हैं। मैनपाट महोत्सव में सैलानियों को रोमांचक गेम्स भी आकर्षित करेंगे। पैरा सेलिंग, नौका विहार के साथ एडवेंचर एक्टिविटी का आयोजन किया गया है। इसके अलावे यहां आयोजित भव्य मेला भी सैलानियों को आकर्षित करेगा। स्थानीय कलाकारों को दें अधिक अवसर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि, आयोजन में स्थानीय कलाकारों, स्कूल कॉलेज के छात्र-छात्राओं को अधिक से अधिक अवसर मिले। उन्होंने स्थानीय दुकानदारों को कार्यक्रम स्थल पर स्टॉल के लिए स्थान देने का निर्देश दिया। इसमें निजी संस्थान भाग ले सकते हैं। मंत्री ने कहा कि मनोरंजन एवं खेल गतिविधियों, स्टॉल आदि के लिए स्थान प्रदान किया जाएगा। मंत्री अग्रवाल ने लोक निर्माण विभाग, वन विभाग सहित अन्य विभागों को गरिमामयी आयोजन के लिए सहभागिता के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर अजीत वसंत, एसपी राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ विनय अग्रवाल, अपर कलेक्टर सुनील नायक सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे। महोत्सव के लिए मिलेंगे 50 लाख मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि, महोत्सव के लिए 50 लाख रुपए की घोषणा की गई है। पिछले साल चुनाव के कारण मैनपाट महोत्सव का आयोजन नहीं किया गया था। पहले मैनपाट महोत्सव के लिए प्रशासन की तरफ से अधिकारियों और व्यापारिक संगठनों से वसूली की जाती थी। मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि इस साल ऐसी स्थिति नहीं बनेगी। राज्य सरकार मैनपाट महोत्सव के लिए राशि देगी। कुछ राशि की व्यवस्था डीएमएफ और अन्य मदों से किए जाएंगे।

डिजिटल राजस्व सेवाओं को बढ़ावा: भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट व ऑटो-डाइवर्ज़न लॉन्च

रायपुर. राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस को और अधिक सशक्त बनाते हुए आज नागरिक सुविधा के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण और अभिनव पहल का शुभारंभ किया गया।  राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने अपने निवास कार्यालय में भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट सेवा तथा ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा का औपचारिक राज्यव्यापी शुभारंभ किया। ये दोनों डिजिटल पहल राज्य में ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन सेवाओं के माध्यम से नागरिकों को अब राजस्व संबंधी सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और कार्यवाही पूरी तरह सरल, तेज़ और पारदर्शी होगी। भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट सेवा के माध्यम से छत्तीसगढ़ के नागरिक अब अपने मोबाइल फोन पर ही विभिन्न राजस्व सेवाओं की जानकारी और सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। यह सेवा नागरिकों को डिजिटल माध्यम से सीधे शासन से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास है, जो राज्य की डिजिटल रूपांतरण यात्रा को नई गति प्रदान करेगी। इस चैटबॉट सेवा के अंतर्गत नागरिकों को जमीन संबंधी जानकारी, राजस्व न्यायालय से संबंधित जानकारी, मोबाइल नंबर जोड़ने की सुविधा, आधार नंबर जोड़ने हेतु ऑनलाइन आवेदन, किसान किताब हेतु आवेदन, नामांतरण हेतु आवेदन सहित अन्य नागरिक हितैषी राजस्व सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। नागरिक इन सभी सेवाओं का लाभ घर बैठे केवल एक व्हाट्सऐप संदेश के माध्यम से ले सकते हैं। इस सेवा का उपयोग करने के लिए नागरिक +91 7289056060 नंबर को अपने मोबाइल में सेव कर व्हाट्सऐप पर संदेश भेज सकते हैं, जिसके पश्चात चैटबॉट तुरंत आवश्यक जानकारी एवं सेवाएँ उपलब्ध कराएगा। इसी क्रम में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने एक और महत्वपूर्ण डिजिटल पहल के रूप में ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा का भी शुभारंभ किया। यह सुविधा भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाकर नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करेगी।इस नई व्यवस्था के अंतर्गत अब नागरिक बिना किसी कागजी कार्रवाई और कार्यालयों के चक्कर लगाए अपने भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल पर भूमि चयन से लेकर प्रीमियम एवं शुल्क की गणना तक की पूरी प्रक्रिया स्वचालित और सहज बनाई गई है। भुगतान प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए ई-चालान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आवेदन के साथ छह आवश्यक दस्तावेजों का ऑनलाइन अपलोड अनिवार्य किया गया है, जिससे प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। आवेदन जमा होते ही वह स्वतः संबंधित सक्षम अधिकारी के पास परीक्षण हेतु प्रेषित हो जाएगा। सक्षम अधिकारी को 15 दिनों के भीतर आवेदन पर निर्णय लेना अनिवार्य होगा, जिससे अनावश्यक विलंब समाप्त होगा और कार्यवाही समयबद्ध रूप से पूर्ण हो सकेगी। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई निर्णय नहीं होता है, तो नागरिक को डिम्ड डाइवर्ज़न प्रमाणपत्र स्वतः जारी कर दिया जाएगा, जिससे नागरिकों को लंबे इंतजार से मुक्ति मिलेगी और शासन की जवाबदेही और अधिक मजबूत होगी। नागरिक हितों की सुरक्षा के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि नागरिक द्वारा गणना की गई राशि वास्तविक देय राशि से कम पाई जाती है, तो सक्षम अधिकारी द्वारा इसकी सूचना दी जाएगी। नागरिक को 60 दिनों के भीतर शेष राशि जमा करनी होगी, अन्यथा विलंब की स्थिति में अर्थदंड का प्रावधान लागू होगा।  नागरिक https://revenue.cg.nic.in/citizenrequest/ पोर्टल के माध्यम से इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। इस अवसर पर राजस्व सचिव मती रीना बाबासाहेब कंगाले तथा संचालक राजस्व  विनीत नंदनवार सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे। "तकनीक के माध्यम से शासन को सीधे नागरिकों से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है, ताकि समय, संसाधन और श्रम की बचत हो तथा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। छत्तीसगढ़ सरकार नागरिकों को तेज़, सरल और पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल गवर्नेंस को निरंतर सशक्त बना रही है। भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) जैसी पहल इसी सोच का परिणाम हैं, जिनसे आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ये डिजिटल सेवाएँ छत्तीसगढ़ को सुशासन और डिजिटल रूपांतरण की दिशा में एक नई ऊँचाई प्रदान करेंगी।"-मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय "भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऑटो-डाइवर्ज़न व्यवस्था से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया स्पष्ट समय-सीमा में पूरी होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को त्वरित राहत मिलेगी। यह पहल छत्तीसगढ़ में सुशासन, तकनीकी दक्षता और नागरिक सुविधा को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।" -राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा "भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार है। इन पहल के माध्यम से नागरिकों को सूचनाओं और सेवाओं तक त्वरित, पारदर्शी और भरोसेमंद पहुँच सुनिश्चित की गई है। ऑटो-डाइवर्ज़न व्यवस्था में तय समय-सीमा, ऑनलाइन भुगतान और डिम्ड डाइवर्ज़न जैसे प्रावधानों से प्रक्रियाओं में जवाबदेही बढ़ेगी और अनावश्यक विलंब समाप्त होगा। यह पहल राजस्व प्रशासन को अधिक कुशल, तकनीकी रूप से सक्षम और नागरिक-अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होगी।" -राजस्व सचिव मती रीना बाबासाहेब कंगाले