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एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन स्थल के रूप में ग्राम केरे को किया जाएगा विकसित

रायपुर, जशपुर जिले को एक प्रमुख इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारत के अग्रणी होमस्टे प्लेटफॉर्म होमस्टेज़ ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ शासन और जशपुर जिला प्रशासन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत ग्राम केरे को एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्राम केरे में तैयार किए गए होमस्टे का शुभारंभ किया गया।   एमओयू के अंतर्गत जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य होगा। एक सुव्यवस्थित एवं विस्तार योग्य होमस्टे-आधारित ग्रामीण पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना होगी। इस पहल के माध्यम से स्थानीय परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, सतत आजीविका को सुदृढ़ किया जाएगा तथा क्षमता निर्माण और कौशल विकास के जरिए युवाओं एवं महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस परियोजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना है, ताकि पर्यटन विकास समावेशी, समुदाय-स्वामित्व वाला और पर्यावरण की दृष्टि से सतत बना रहे तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे। मुख्यमंत्री श्री साय की उपस्थिति में हुए इस समझौता का ज्ञापन पर कलेक्टर जशपुर श्री रोहित व्यास तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद वर्मा और होमस्टेज़ ऑफ इंडिया प्रा. लि. के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए।  अधिकारियों ने बताया कि यह पहल राज्य सरकार की इको-पर्यटन, समावेशी विकास एवं समुदाय-नेतृत्व वाले आर्थिक विकास की परिकल्पना के अनुरूप है। स्थानीय संस्कृति और प्रकृति पर आधारित प्रामाणिक पर्यटन अनुभवों के माध्यम से यह परियोजना जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने में सहायक होगी।

रायपुर साहित्य उत्सव में समाज और सिनेमा विषय पर केंद्रित रोचक परिचर्चा में उमड़ी श्रोताओं की भीड़

सिनेमाजगत के प्रसिद्ध निर्देशक अनुराग बसु और चाणक्य सीरियल के निर्माता चंद्रप्रकाश द्विवेदी हुए शामिल लोग रिस्क लेकर सामाजिक सरोकार से जुड़ा सिनेमा बनाते हैं : निर्देशक अनुराग बसु सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है : निर्माता चंद्रप्रकाश द्विवेदी रायपुर,  रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत समाज और सिनेमा विषय पर केंद्रित परिचर्चा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रोता अनिरुद्ध नीरव मंडप में पहुंचे, जिसमें हिंदी सिनेमाजगत के प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक अनुराग बसु, इतिहासकार-पटकथा लेखक एवं निर्माता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी और सिनेमा लेखक अनंत विजय ने हिस्सा लिया। परिचर्चा के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के जाने-माने लेखक-निर्देशक मनोज वर्मा रहे। हिंदी सिनेमाजगत के निर्देशक अनुराग बसु ने परिचर्चा में भाग लेते हुए सिनेमा को एक ऐसा औजार बताया, जो बिगड़े हुए समाज को शेप दे सकता है। उन्होंने कहा कि लोग रिस्क लेकर ऐसे सिनेमा बनाते हैं। अगर हम सिनेमा से सामाजिक सरोकार की अपेक्षा करते हैं, तो बहुत से लेखक-निर्देशक आज भी इस दायित्व को निभाते आ रहे हैं। श्री बसु ने कहा कि 90 के दशक में जितने सिनेमा बनते थे, आज भी उतने ही बनते हैं, बल्कि फिल्मों की संख्या और अधिक है। आज सिनेमा के पास ज्यादा टेक्नोलॉजी है, लेकिन कहानियां भी वही हैं। अब नई कहानियां सामने आ रही हैं, नए विषयों पर फिल्में बन रही हैं। हम यदि किसी लेखक-निर्देशक की बनाई किसी फ़िल्म को अच्छा या बुरा कहते हैं, तो यह हमारा व्यक्तिगत विचार है, क्योंकि उसने पूरी ईमानदारी से फ़िल्म बनाई है और उसके हिसाब से वह फ़िल्म अच्छी बनी है। बसु ने आगे कहा कि हम जब भी फ़िल्मों की बात करते हैं, तो पसंद-नापसंद की बात अपने आप ही सामने आ जाती है। उन्होंने फ़िल्मों को समाज का जरूरी हिस्सा बताया। परिचर्चा में अपने संबोधन के दौरान डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि आज फ़िल्म के हिट और फ्लॉप होने की बात अधिक होती है। सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है। सिनेमा का सामाजिक सरोकार नहीं रहा। सिनेमा आपके प्रश्नों को तभी उठाएगा, जब उससे सिनेमा को बड़ा लाभ होगा। सिनेमा का दौर बदल रहा है। श्री द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में आप चाणक्य नहीं बना सकते। हिंदी सिनेमा में हिंदी का स्तर कहां तक पहुंचा है, यह एक बड़ी चुनौती है। सभी सिनेमा को सरल करने की बात करते हैं, हिंदी में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग होता है। उन्होंने अपने अनुभव से जोड़ते हुए बताया कि बायोग्राफी भी उन्हीं पर बन रही हैं, जिनसे बड़े फायदे हों। उन्होंने उपनिषद गंगा सीरियल का उल्लेख करते हुए बताया कि उपनिषद गंगा में बहुत गंभीर काम है, जबकि चाणक्य में उस समय की सच्चाई दिखाई देती है। इस सत्र पर सिनेमा लेखक अनंत विजय ने कहा कि सिनेमा कोई एलाइट माध्यम नहीं है। जब तक हम फ़िल्म नहीं देखते, तब तक चर्चा नहीं होती। आजकल लोग फ़िल्म देखते नहीं, सिर्फ चर्चा करते हैं। प्रेम में वैज्ञानिकता नहीं ढूंढी जाती। फ़िल्मों की कहानी और पात्रों से लोग भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं। यही जुड़ाव फ़िल्मों की कॉमर्शियल और सोशल वैल्यू तय करता है।  

इंटरनेट की इस दुनिया में प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा रहेगा : राज्यपाल डेका

रायपुर साहित्य उत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि  इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर  प्रदान करता है।  समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है। श्री डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवांे के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए। श्री डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।  हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं। समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।   समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार पंकज झा , राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

कोरिया में डांसर पर नोट उड़ाने पर रोजगार सहायक को नौकरी से हटाया

कोरिया. जिले से संस्कृति को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक फुटबॉल प्रतियोगिता के समापन समारोह के नाम पर अश्लीलता का नंगा नाच परोसा गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित रोजगार सहायक जिंदर सोनवानी को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। सोनहत ब्लॉक के ग्राम पंचायत पोड़ी में फुटबॉल टूर्नामेंट का समापन था। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य शिवकुमारी, भाजपा नेता मनोज साहू और जनपद अध्यक्ष आशा सोनपाकर जैसे अतिथि शामिल हुए थे। विवाद तब शुरू हुआ जब अतिथियों के जाने के बाद रात को स्कूल परिसर में ‘सांस्कृतिक कार्यक्रम’ के नाम पर फिल्मी गानों पर डांस पार्टी शुरू हुई। मिली जानकारी के अनुसार, इस डांस प्रोग्राम के लिए कोरबा की एक ‘नाचा पार्टी’ को 10 लाख रुपये के भारी-भरकम खर्च पर बुक किया गया था। जैसे ही डांस और पैसे लुटाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिला प्रशासन हरकत में आया। सोनवानी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।

रायगढ़ में ग्रामीणों ने असली के पैकेट में पकड़ा नकली दही

रायगढ़. जिले में गुरुवार शाम पिकअप लोड दही के डिब्बे व दूग्ध उत्पाद के पैकेट में ब्रांड का लेबल चेंज किया जा रहा था। तभी मोहल्लेवासियों की सूचना में इसे पकड़ लिया गया है। इस मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने दो दिनों में जांच पूरी की। जहां नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 2 लाख मिलावटी दूग्ध उत्पाद को जब्त किया गया है। चक्रधर नगर पुलिस को सूचना मिली थी कि जिला दुर्ग से एक संदिग्ध पिकअप वाहन के माध्यम से रायगढ़ शहर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भारी मात्रा में दुग्ध उत्पादों का विक्रय किया जा रहा है। इन उत्पादों में खाद्य लेबल और रैपर से छेड़छाड़ की जा रही है। नदंनम की जगह वैद्य फूड्स का लेबल लगाया जा रहा है। पिकअप वाहन में दही व कॉटेज एनालॉग जैसे दुग्ध उत्पाद 5 व 15 किलोग्राम के बंद प्लास्टिक जारों एवं पैकेटों में थे। इसके बाद पुलिस ने पिकअप को थाने लाकर मामला फूड एंड सेफ्टी विभाग के सुपुर्द किया। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम तत्काल थाना परिसर पहुंची। वाहन में भरे दुग्ध उत्पादों की जांच शुरू की।जांच के दौरान यह बात सामने आया कि छोटे अतरमुड़ा गांधी नगर, केलोविहार की रहने वाली कस्तूरी डेयरी की प्रोपराइटर सोनिया जायसवाल के द्वारा बिक्री के लिए वैद्य फूड्स प्रोडक्ट्स शंकर नगर भिलाई-3, कुम्हारी, जिला दुर्ग से मंगाए गए थे।

पेंड्रा में प्रेमी संग भागी विधवा महिला, को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया

पेंड्रा. जिले से हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है। खोडरी चौकी क्षेत्र के रानीझाप गांव में एक गंभीर और सनसनीखेज घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, एक विधवा महिला को कथित तौर पर अर्ध नग्न कर गांव में घुमाया गया। यह घटना तब हुई जब महिला शादीशुदा एक पुरुष के साथ भागी थी। दरअसल, पेंड्रा के रानीझाप गांव में एक विधवा महिला को निर्वस्त्र कर पीटा गया। महिला लगभग तीन महीने पहले एक शादीशुदा व्यक्ति के साथ भाग गई थी। गांव लौटने पर उस व्यक्ति के परिजनों ने महिला के साथ यह बर्ताव किया। ग्रामीणों और महिला के परिजनों ने उसे बचाया और पुलिस को सूचना दी। यह घटना खोडरी चौकी अंतर्गत ग्राम रानीझाप में शनिवार सुबह करीब 10 बजे हुई। 35 वर्षीय पीड़ित महिला लगभग एक साल पहले अपने पति के निधन के बाद विधवा हो गई थी। उसका गांव के ही 35 वर्षीय शादीशुदा व्यक्ति हरि प्रसाद राठौर से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों 29 अक्टूबर को घर से भाग गए थे और मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ग्राम मालाचुवा में रह रहे थे। शुक्रवार को जब वे गांव वापस लौटे, तो विवाद की स्थिति बन गई। इसके बाद महिला और हरि प्रसाद के परिजन खोडरी चौकी पहुंचे थे। चौकी में महिला ने हरि प्रसाद के साथ रहने की इच्छा जताई, जिसके बाद सभी अपने गांव रानीझाप लौट आए। हरि प्रसाद और महिला को गांव के भुल्लन गोंड़ ने शुक्रवार रात को अपने घर में शरण दी थी। शनिवार सुबह करीब 10 बजे हरि प्रसाद की पत्नी सरोज राठौर, भाई मनोज और यशोदा राठौर सहित अन्य लोग इकट्ठा हुए। उन्होंने महिला को पीटना शुरू कर दिया, उसे निर्वस्त्र किया और पूरे गांव में घुमाया। हमलावरों ने महिला पर गोबर भी पोता और उसे पीटते हुए गांव के मुख्य मार्ग पर स्थित काली मंदिर तक ले गए। इसके बाद पीड़ित महिला के परिजनों और ग्रामीणों, जिनमें अमर सिंह धुर्वे और दशरथ विश्वकर्मा शामिल थे, ने उसे बचाया। उन्होंने महिला को कपड़े पहनाए और पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस गांव पहुंची और घायल महिला को अपने साथ ले गई। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।  

छत्तीसगढ़ में 15 हजार युवाओं को जल्द मिलेगी नौकरी

जांजगीर. भाजपा सरकार युवाओं के भरोसे पर पूरी तरह खरी उतरी है। पहले युवाओं का भविष्य असुरक्षित हो गया था और इंजीनियरिंग से उनका मोहभंग हो रहा था लेकिन इस साल स्थिति बदली है और इंजीनियरिंग की सीटों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को हुनरमंद बनाना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के युवा मांगने वाले नहीं, बल्कि देने वाले बनें। इसी दिशा में 28 से 31 जनवरी तक रायपुर में रोजगार मेला आयोजित किया जा रहा है जहां 15 हजार से अधिक युवाओं को ऑफर लेटर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार हर सेक्टर में सक्रियता से काम कर रही है और अब तक करीब साढ़े 8 हजार करोड़ रुपये के एमओयू किए जा चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के युवा खेल के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व की बात है। भ्रष्टाचार पर सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। आगे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में रोजगार, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में और भी बड़े कदम उठाए जाएंगे, ताकि छत्तीसगढ़ के युवाओं को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जा सके। कौशल विकास, रोजगार और तकनीकी शिक्षा मंत्री खुशवंत साहेब ने जांजगीर दौरे के दौरान यह जानकारी दी है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तृतीय चरण का सीएम साय ने वर्चुअल किया शुभारंभ

बीजापुर. मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तृतीय चरण का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ करते हुए बीजापुर जिले को दो नई बस सेवाओं की सौगात दी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण एवं सुदूर अंचलों में आवागमन को सुगम बनाते हुए परिवहन सुविधाओं का विस्तार करना है। शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने बीजापुर जिलेवासियों एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को बस सेवा प्रारंभ होने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सेवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। तृतीय चरण के अंतर्गत बीजापुर जिले में जिन बस मार्गों पर संचालन प्रारंभ किया गया, उनमें कचलारम से जगदलपुर (तोयनार-धनोरा मार्ग होते हुए), कोतापाल-बीजापुर-नैमेड, भैरमगढ़-गीदम (एक फेरा वापसी) प्रतिदिन कुल 190 किलोमीटर, तथा पामेड़ से बीजापुर (कोण्डापल्ली-तर्रेम-बासागुड़ा-आवापल्ली मार्ग होते हुए) कुल 104 किलोमीटर शामिल हैं। वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान सीईओ जिला पंचायत नम्रता चौबे ने बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारीगण एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। ग्रामीण बस सेवा के प्रारंभ होने से बीजापुर जिले के सुदूर एवं आदिवासी क्षेत्रों के नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ एवं नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

रायपुर: स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं, साधारण जीवन के असाधारण दस्तावेज

रायपुर : स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं साधारण मनुष्य के असाधारण जीवन का दस्तावेज रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण 'स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां' विषय पर हुई परिचर्चा छत्तीसगढ़ ने बीते 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार नई दिशा दी, इनमें  शुक्ल भी शामिल : डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी रायपुर   नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन  देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने  उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने  शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया। रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि  शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है। नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार सु आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि  शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं। जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार  सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने  शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग  शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक  अनुभव शर्मा ने कहा कि  विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि  शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं। अभिनेत्री सु टी.जे. भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार  विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को  शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं। परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिले सुप्रसिद्ध अभिनेता नीतिश भारद्वाज

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध फिल्म एवं टीवी अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  नीतीश भारद्वाज का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट से निर्मित महुआ वृक्ष की कलाकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट की।मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की जानकारी भी साझा की।  इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा,मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।