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नक्सलवाद को करारा झटका: 21 नक्सली हुए आत्मसमर्पण, विजय शर्मा ने किया स्वागत

रायपुर अंतागढ़ क्षेत्र में सक्रिय 21 नक्सलियों के आत्मसमर्पण का उप मुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्वागत करते हुए एक बार से दोहराया कि निर्धारित समय (मार्च 2026) तक नक्सलवाद समाप्त होगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आह्वान किया था. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्ग पर सेंट्रल टीम ने काम किया है. आर्म्ड फोर्स ने काम किया है. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि 21 नक्सलियों ने हथियारों के साथ पुनर्वास किया है. इनमें 13 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं. नक्सलियों से 3 AK 24, 2 इंसास, रायफल, लांचर सहित कुल 18 हथियारों के साथ भी मिले हैं . डीवीसीएम लेवल के 4 नक्सली है. मैं नक्सलियों के आत्मसमर्पण का स्वागत करता हूं. इन लोगों ने सैकड़ों जान को जाने से बचाया. गृह मंत्री ने कहा कि हाल ही में 210 नक्सलियों ने 129 हथियारों के साथ पुनर्वास किया था. 21 लोगों के पुनर्वास करने से पश्चिम बस्तर रीजन में स्थिति स्पष्ट हो गई है. छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को मिलाकर ये स्थिति स्पष्ट हुई. यह पुनर्वास शब्द का उपयोग है. पुनर्वास करने के बाद हथियार आप छोड़े. बस्तर के साथ मिलकर काम करना चाहिए. इसके साथ उन्होंने दोहराया कि आर्म्ड फॉर्स पूरी ताकत के साथ अपना काम करेगी. वहीं छत्तीसगढ़ महतारी के प्रतिमा को अज्ञात द्वारा तोड़ने पर विजय शर्मा ने कहा कि यह एक चिंतन का विषय है. पुलिस इस मामले में जांच कर रही है. वहीं इस मामले में कांग्रेस के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि इटली वालों भारत से क्या लेना-देना है. देख ले अपने आप को, फिर बात करें.

प्रकृति की गोद में बसा रानीदाह जलप्रपात — जहाँ हर बूंद कहती है कहानी

रायपुर, रानीदाह जलप्रपात का सबसे आकर्षक रूप मानसून के दौरान देखने को मिलता है, जब पानी का बहाव चरम पर होता है और चारों ओर हरियाली व वादियां निखर उठती हैं। एडवेंचर, फोटोग्राफी, और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान अद्भुत अनुभव देता है। यहाँ की स्वच्छ बूंदें, हरियाली भरी घाटियाँ और झरने की गूंज हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देती है।       रानीदाह जलप्रपात छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 15 से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह झरना घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों के मध्य स्थित है और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। बरसात के मौसम में यहाँ का नजारा अत्यंत मनोहारी होता है, झरने की धाराएं विशाल चट्टानों से गिरती हैं और एक विशाल जलकुंड में मिल जाती हैं। आसपास जंगल, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, और ऊँची-नीची पहाड़ियाँ इस जगह को रोमांचक बनाते हैं। यहाँ के माहौल में शांति, ताजगी और हरियाली छायी रहती है, जिससे यह पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों का आदर्श स्थल है।       रानीदाह जलप्रपात से जुड़ी एक रोचक किंवदंती भी है। कहा जाता है कि उड़ीसा की रानी शिरोमणि अपने प्रेमी के साथ भागकर जशपुर आई थीं, जहाँ उन्होंने अपने भाईयों से छिपते हुए इसी झरने के समीप आत्मसमर्पण किया। इसी वजह से इस स्थल का नाम रानीदाह पड़ा। आज भी यहाँ रानी की समाधि और पंचमैया नामक स्थल देखने को मिलता है, जो रानी के पाँच भाईयों को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाता है। जलप्रपात के निकट एक शिव मंदिर भी है, जिससे इसका धार्मिक महत्त्व बढ़ जाता है।        यह जलप्रपात वर्ष पर्यन्त विशेष रूप से जून से फरवरी तक चालू रहता है। जशपुर से आरा मार्ग पर लगभग 18 किमी दूरी और मुख्य सड़क से 5 किमी अंदर की ओर स्थित इस स्थल तक सड़क मार्ग, ट्रेन (रांची व अंबिकापुर रेलवे स्टेशन), और हवाई यात्रा (रांची व रायपुर एयरपोर्ट) से पहुँचा जा सकता है। यहाँ जिला प्रशासन ने व्यू प्वाइंट, सीढ़ियाँ, एवं पिकनिक के लिए सुरक्षित व्यवस्था की है ताकि पर्यटक पूर्ण रूप से प्रकृति का आनंद उठा सकें।       रानीदाह जलप्रपात न केवल छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण बिंदु है, बल्कि प्रकृति, इतिहास और रोमांच से भरपूर एक अविस्मरणीय स्थल भी है। यहाँ आकर मनुष्य को प्रकृति के शांत, पवित्र एवं रमणीय स्वरूप का गहरा अहसास होता है।

मंत्री टंक राम वर्मा बोले – किसान हैं विकसित भारत की रीढ़, तिलहन उत्पादन से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सारंगढ़ कृषि उपज मंडी प्रांगण में ‘‘तिलहन कृषक मेला सह सम्मेलन’’ का आयोजन किया गया। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के अंतर्गत कृषि कार्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्व, आपदा प्रबंधन, पुनर्वास एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा शामिल हुए।        मंत्री वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर अग्रसर हैं। इस दिशा में दलहन-तिलहन का अधिक उत्पादन देश को खाद्य तेल के आयात से मुक्ति दिलाएगा और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करेगा।     इस अवसर पर मंत्री वर्मा ने कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी एवं मत्स्य विभाग द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन करते हुए हितग्राहियों, महिला स्व-सहायता समूहों और विभागीय अधिकारियों से उत्पादों एवं तकनीकों की जानकारी ली। उन्होंने किसानों को नई कृषि तकनीकें अपनाने, मृदा परीक्षण शिविरों में भाग लेने तथा कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि सारंगढ़ क्षेत्र की मिट्टी तिलहन उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। तिलहन नगदी फसल है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार किसानों के लिए घोषित अधिकांश वादों को पूरा कर चुकी है, जिनमें भूमिहीन कृषकों को 10 हजार रुपये की सहायता राशि एक प्रमुख उपलब्धि है।      कार्यक्रम में जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडेय एवं कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों को संबोधित किया। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया तथा अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।      इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय, अपर कलेक्टर  प्रकाश सर्वे, पूर्व विधायक केराबाई मनहर तथा कृषि, मत्स्य, उद्यानिकी एवं पशुधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय: बस्तर में शांति की स्थापना, जनविरोधी माओवादी विचारधारा पर रोक

कांकेर जिले में 21 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर किया आत्मसमर्पण रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में माओवाद की समाप्ति अब  वास्तविकता बनने की ओर अग्रसर है। “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी जनोन्मुख पहल ने बस्तर में शांति और विश्वास की नई बयार बहा दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज कांकेर जिले में 21 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया, जो प्रदेश में चल रही “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति – 2025” तथा “नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता का सशक्त प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवाद की झूठी और भ्रामक विचारधारा से भटके युवा अब समझने लगे हैं कि बंदूक नहीं, विकास की राह ही भविष्य का सही विकल्प है। सरकार इन आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, पुनर्प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्संस्थापन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है, ताकि वे मुख्यधारा से जुड़कर समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। मुख्यमंत्री ने  कहा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के लोगों का विश्वास जीता है। यही कारण है कि अब माओवादी संगठन तेजी से कमजोर पड़ रहे हैं और बड़ी संख्या में हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति को स्वीकार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में अब नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और क्षेत्र तेजी से शांति, विकास और सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सलमुक्त बनाना है और छत्तीसगढ़ इस दिशा में तेजी से अग्रसर है।

रायपुर का अमातालाब जहां छठ महापर्व की होती है भव्य पूजा

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय दिखता है दिव्यता और आस्था का अद्भुत संगम रायपुर  छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पवित्र पर्व है, जो पूरे देश में भक्ति और आस्था के साथ मनाया जाता है। राजधानी रायपुर के आमातालाब के घाट में इस पर्व की भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली मनाने के बाद मनाये जाने वाले इस चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन और महत्त्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी की होती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को यह व्रत मनाये जाने के कारण इसका नामकरण छठ व्रत पड़ा। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि, पंचमी तिथि, षष्ठी तिथि और सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। रायपुर विश्वकर्मा समाज के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ने बताया कि नहाय खाय के साथ ही निर्जला व्रत भी शुरू हो जाता है। छठ महापर्व का शुभारंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी शनिवार 25 अक्टूबर से हो गया है। इस दिन व्रती स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। राजधानी रायपुर की महिलाओं ने नहाय-खाय वाले दिन से ही पवित्र पर्व छठ का प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। व्रती के साथ घर के सदस्य मिलकर इसकी तैयारी रहे हैं। छठ का प्रसाद बनाने के लिए चूल्हा और बर्तन बिल्कुल अलग होता है। इसके अलावा व्रती और परिवार के सदस्यों को लहसुन, प्याज इत्यादि खाना वर्जित होता है। छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पवित्र पर्व है, जो पूरे देश में भक्ति और आस्था के साथ मनाया जाता है। राजधानी रायपुर के आमातालाब के घाट में इस पर्व की भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। कल दिनांक 27 अक्टूबर कार्तिक शुक्ल षष्ठी सोमवार को शाम 6.30 बजे डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। दिनांक 28 अक्टूबर कार्तिक शुक्ल सप्तमी को प्रातः 6 बजे उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त किया जाएगा। रायपुर के आमातालाब में छठ पूजन हेतु घाट की साफ सफाई, विद्युत व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रम,पूजन व्यवस्था हेतु समाज के सदस्यों ने विशेष व्यवस्था की गई है। विशेष व्यवस्था हेतु समाज के युवा वर्ग से सुरज शर्मा,विनय शर्मा,रोहित,विश्वकर्मा संतोष विश्वकर्मा,शंकर शर्मा,सुनील शर्मा,सन्नी शर्मा,आकाश शर्मा एवं अन्य सदस्यों ने अपना योगदान दिया है। और समाज के सभी वर्ग के सदस्य,महिलाओं,बच्चों को इस आयोजन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए आग्रह किया है।

सांसद रूपकुमारी चौधरी और जनप्रतिनिधि होंगे पदयात्रा में शामिल, कलेक्टर ने सहभागिता का किया आग्रह

7 नवम्बर को नागाबुड़ा से गरियाबंद तक निकलेगी एकता पदयात्रा सरदार पटेल की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि व आत्मनिर्भर भारत शपथ का आयोजन गरियाबंद, लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150 वीं जयंती 31 अक्टूबर के अवसर पर आयोजित होने वाले विविध गतिविधियों एवं कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन एवं सफलतापूर्वक आयोजन के लिए कलेक्टर श्री बी एस उइके एवं जिला पंचायत सीईओ श्री प्रखर चन्द्राकर ने नागाबुड़ा, कोकड़ी सहित अन्य स्थलों का निरीक्षण किया। उल्लेखनीय है कि 7 नवम्बर को पदयात्रा सुबह 9 बजे नागाबुड़ा से प्रारम्भ होकर जिला मुख्यालय गरियाबंद तक लगभग 9 किलोमीटर चलेगा। पदयात्रा से पहले स्थानीय लोगों में जागरूकता के लिए विविध कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं के बीच नशामुक्त भारत शपथ, संस्थानों में स्वदेशी मेलों का आयोजन एवं गर्व से स्वदेशी संकल्प भी दिलवाए जाएंगे। इस दौरान योग एवं हेल्थ शिविरों के साथ क्षेत्र में स्वच्छता अभियान का भी आयोजन किया जाएगा। सरदार पटेल के उद्धरण और राष्ट्रीय एकता दिवस पदयात्रा से संबंधित संदेशों वाले साइन बोर्ड लगाये जायंगे। यात्रा पथ पर सार्वजनिक सुविधा स्थल बनवाएँ जिसमें पानी, शौचालय, हल्का भोजन आदि मूलभूत सुविधाएं शामिल किया जाएगा। यात्रा के दौरान सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि, आत्मनिर्भर भारत शपथ और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। कार्यक्रम में महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक श्री रोहित साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, अधिकारी-कर्मचारी एवं ग्रामीणजन शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती को समर्पित इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में एकता, देशभक्ति और कर्तव्य भावना को जागृत करना है। यह पदयात्रा नहरगांव, कोकड़ी होते हुए गरियाबंद में वृहद कार्यक्रम कर समापन किया जायेगा। कलेक्टर ने गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधियों एवं मीडियाकर्मियों को शामिल होने का आग्रह किया है।

महतारी अपमान मामला: बघेल- जोगी ने की निंदा, CM साय बोले— दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी

रायपुर छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा तोड़े जाने पर राजधानी में बवाल मच गया है। मूर्ति तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने वीआईपी चौक पर विरोध-प्रदर्शन किया। वहीं पक्ष और विपक्ष के तमाम नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा की है। सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन इस घटना को लेकर सियासी वार और पलटवार भी जारी है। छत्तीसगढ़ी अस्मिता पर सीधा हमला है – अमित जोगी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा कि आज का दिन हमारे लिए बेहद दुखद और शर्मिंदा करने वाला है। राजधानी रायपुर के तेलीबांधा जैसे विशिष्ट चौक पर स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को कुछ असामाजिक तत्वों ने खंडित कर दिया है। यह देखकर हृदय रो पड़ता है कि जिस “महतारी” के नाम पर सरकारें सत्ता में आती हैं और योजनाएं बनाती हैं, उसी महतारी की प्रतिमा की सुरक्षा तक नहीं कर पा रही हैं। यह केवल एक मूर्ति का टूटना नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक आस्था और छत्तीसगढ़ी अस्मिता पर सीधा हमला है। छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को तोड़ना जनता का अपमान – भूपेश बघेल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की स्थापना की रजत जयंती पर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ दी गई। राजधानी रायपुर के VIP रोड स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को तोड़ा जाना जनता का अपमान है। हर एक छत्तीसगढ़िया बेहद ग़ुस्से में है. यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। कहीं यह शासन-प्रशासन के कार्यक्रमों से छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीरों को हटाने वाली भाजपा सरकार की करतूत तो नहीं? भाजपा समझ ले कि अगर जनआक्रोश को अनदेखा किया, तो अच्छा नहीं होगा। घटना अत्यंत दुखद और निंदनीय – कांग्रेस कांग्रेस ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना अत्यंत दुखद और निंदनीय है। यह कृत्य छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और हमारी मातृभूमि के सम्मान पर सीधा प्रहार है। कांग्रेस पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है और मांग करती है कि दोषियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए, साथ ही उसी स्थान पर नई छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तुरंत स्थापित की जाए। भाजपा सरकार के शासन में लगातार छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा, तीज-त्योहार और पहचान को मिटाने की कोशिशें की जा रही हैं। महतारी के प्रतीक पर हुआ यह वार, पूरे प्रदेश की भावनाओं को आहत करने वाला है। गृह मंत्री विजय शर्मा का बयान गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह एक चिंतन का विषय है और पुलिस जांच कर रही है। उन्होंने इस मामले में कांग्रेस के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि इटली वालों का क्या लेना-देना भारत से। पहले अपने आप को देख लें, फिर बात करें। आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा – मुख्यमंत्री साय इस घटना पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत निंदनीय कृत्य है। आरोपियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

Probation पूरा होना ही नहीं, परफॉरमेंस और आचरण भी तय करेंगे नौकरी की परमानेंटिटी: Chhattisgarh HC

बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक सर्विस संबंधी मामले में महत्वपूर्व आदेश देते हुए कहा है कि सिर्फ परिवीक्षा अवधि (Probation period) पूरी होने पर स्थायीकरण और पदोन्नति का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता। प्रतिकूल कार्य एवं आचरण रिपोर्ट के आधार पर प्रमोशन दिया जाना, या नहीं देना भेदभाव नहीं माना जाएगा। प्रकरण के अनुसार हाई कोर्ट ने अनुवादक के पद को भरने के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था। अपीलकर्ता शैलेन्द्र सोनी और अन्य उम्मीदवारों ने पद के लिए आवेदन किया। परीक्षा के बाद अपीलकर्ता और अन्य प्रतिवादी को 29 फरवरी 2012 को अनुवादक के पद पर नियुक्त किया गया। प्रतिवादी अपीलकर्ता से कनिष्ठ था। दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद शैलेन्द्र के साथ के अन्य परिवीक्षा कर्मी को सात मार्च 2014 से पद पर स्थायी कर दिया गया। 27 जनवरी 2015 को उसको सहायक ग्रेड-1 के पद पर पदोन्नत किया गया। हालांकि अपीलकर्ता की सर्विस की उस समय पुष्टि नहीं की गई। देर से स्थायी होने के कारण प्रमोशन से वंचित शैलेन्द्र का अनुवादक के पद पर स्थायीकरण देर से हुआ। इस कारण उसके सहकर्मी को दी गई पदोन्नति के लिए वह अयोग्य हो गया। व्यथित होकर उसने 29 अप्रैल 2015 को एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया, जिसमें प्रतिवादी से अपनी वरिष्ठता बनाए रखने के लिए पूर्वव्यापी प्रभाव से स्थायीकरण और पदोन्नति का अनुरोध किया।अभ्यावेदन पर विचार नहीं किया गया। इस पर शैलेंद्र ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने 16 जुलाई 2025 को याचिका खारिज कर दी। इससे व्यथित होकर अपीलकर्ता कर्मचारी ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। कार्य और आचरण रिपोर्ट अलग-अलग, इसलिए भेदभाव नहीं डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद सिंगल बेंच के निष्कर्ष को उचित माना, जिसमें कहा गया था कि कार्य और आचरण रिपोर्ट और एसीआर अलग-अलग हैं। हाई कोर्ट प्रशासन ने तर्क दिया कि मार्च 2014 में अपीलकर्ता की दो साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर उसके कार्य और आचरण पर रिपोर्ट अच्छी और औसत नहीं पाई गई।

कुछ दिन से लापता छात्र का शव मिला GGU तालाब में, कारण तलाश जारी

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी परिसर स्थित तालाब में मिली लाश लापता हुए छात्र की ही निकली. मृतक की पहचान छात्र असलम अंसारी के भाई अयूब अंसारी ने की है. इस मामले में एसएसपी रजनेश सिंह ने जांच के लिए 6 सदस्यीय जांच दल का गठन किया है. जानकारी के मुताबिक, जीजीयू परिसर स्थित एक तालाब में गुरुवार की शाम एक युवक की लाश मिली थी. शव को तालाब से बाहर निकालकर पुलिस ने मरच्यूरी में रखवाया था. इस बीच शुक्रवार को विवि परिसर में एक छात्र के दो दिनों से लापता होने की जानकारी सामने आने से सनसनी फैल गई. लापता छात्र के छोटे भाई को शिनाख्ती के लिए बुलाया गया. उसने टी शर्ट से अपने बड़े भाई के रूप में पहचान की. घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं सेंट्रल यूनिवर्सिटी की सुरक्षा भी संदेह के दायरे में है. अब पुलिस की  6 सदस्य टीम छात्र की मौत मामले में की जांच करेगी.

अबकी बार अंतागढ़: 20 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के समक्ष किया आत्मसमर्पण

कांकेर सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव और सरकार के बेहतर पुनर्वास नीति का असर एक बार फिर देखने को मिला है. आज अंतागढ़ क्षेत्र में सक्रिय 20 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. अंतागढ़ के बर्रेबेड़ा गांव से 20 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. यह एएसपी आशीष बंसोड और एसडीओपी शुभम तिवारी के प्रयासों का परिणाम है. कुछ दिन पहले कामतेड़ा कैंप में 50 नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया था. ताड़ोकी पुलिस नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने में जुटी है. नक्सलियों का समर्पण अंतागढ़ क्षेत्र के नक्सलमुक्त होने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.