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मौसम विभाग का अलर्ट: कई जिलों में झमाझम बारिश के आसार

रायपुर प्रदेश में पिछले 24 घंटों में अनेक स्थानों पर मध्यम वर्षा हुई. सबसे ज्यादा बारिश बीजापुर जिले के भोपालपटनम में दर्ज की गई. इस दौरान सबसे अधिक तापमान रायपुर में 35 डिग्री सेलसियस रिकॉर्ड किया गया. मौसम विभाग ने प्रदेश के अधिकांश इलाकों में आज हल्की से मध्यम बारिश होने की की संभावना है. मौसम विभाग ने कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा के साथ गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई है. वहीं कुछ स्थानों पर अगले 3 दिनों तक भारी वर्षा जारी रह सकता है. यहां हुई बारिश मौसम विभाग की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक, भोपालपटनम-5 सेमी, तखतपुर, कोटा, सन्ना, दंतेवाड़ा, नया बाराद्वार, राजनांदगांव -4 सेमी, लोरमी 3 सेमी, कुंडा, लालपुर थाना, सकरी, रतनपुर, पेंड्रा, पंढरिया, गंडई, मोहला, बेलरगांव, नवागढ़, पत्थलगांव-3 सेमी, प्रेमनगर, बोराई, दाढ़ी, मनोरा, मालखरौदा, पिपरिया, हसौद, बेलगहना, कापू, रेंगाखार कला, कुकदुर, नगरी, छाल, कवर्धा, कांसाबेल, बिलाईगढ़, सरिया, बेलतरा, केशकाल -2 सेमी. इसके अलावा कुछ और स्थानों पर इससे कम वर्ष दर्ज की गई. राजधानी में आज कैसा रहेगा मौसम राजधानी रायपुर में आज बादल छाए रहने की संभावना बनी हुई है. साथ ही बादल गरजने-चमकने के साथ बारिश हो सकती है. अधिकतम तापमान  34 और न्यूनतम तापमान के आसपास बने रहने की आशंका जताई गई है.

बिलासपुर-जबलपुर हाईवे ठप: हजारों यात्रियों की आवाजाही में मुश्किलें

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही बिलासपुर-जबलपुर नेशनल हाइवे पर फिर से जाम लग गया. बीती रात जिले के आखिरी छोर पर स्थित करिआम आरटीओ बेरियर के पास रोड के बीचों-बीच ट्रक और ट्रेलर के फंसने से आगे-पीछे गाड़ियों की लंबी कतार लग गई. दरअसल, बिलासपुर-जबलपुर नेशनल हाइवे का निर्माण कार्य चल रहा है. ऐसे में बारिश की वजह से सड़क के दोनों ओर कीचड़ होने की वजह से सड़क पर गाड़ियों किसी वजह से फंस जाने से गाहे-बगाहे वाहनों की आवाजाही रुक जा रही है. इसी तरह बीती रात से लगे जाम की वजह से बिलासपुर से अमरकंटक, जबलपुर, अनूपपुर, मनेंद्रगढ़ के अलावा उत्तरप्रदेश से आना-जाना करने वाले हजारों यात्री फंसे हुए हैं. जाम खुलवाने के लिए स्थानीय पुलिस और यातायात विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचकर प्रयास कर रहे हैं.

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना से छत्तीसगढ़ के हितग्राहियों को मुफ्त बिजली का लाभ

राज्य सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी से उपभोक्ताओं को मिल रहा दोगुना फायदा, बिजली बिल में राहत और पर्यावरण संरक्षण की सौगात रायपुर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से छत्तीसगढ़ के हितग्राही हो रहे लाभान्वितप्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत न केवल बिजली बिल में भारी बचत हो रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सब्सिडी के साथ अब राज्य सरकार द्वारा भी अतिरिक्त सब्सिडी दिए जाने से यह योजना आम उपभोक्ताओं के लिए और भी लाभप्रद सिद्ध हो रही है। योजना के अंतर्गत 5 किलोवाट तक के सोलर रूफटॉप सिस्टम पर केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपए और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस पहल से आमजन के बिजली बिल लगभग शून्य हो रहे हैं और अतिरिक्त बिजली उत्पादन से आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। सक्ती जिले के ग्राम पोरथा निवासी श्री कुलदीप कुमार राठौर ने अपने घर की छत पर 2 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित कराया। इसकी कुल लागत लगभग 1 लाख 40 हजार रुपए रही, जिसमें उन्हें केंद्र सरकार से 60 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई। श्री राठौर का कहना है कि राज्य सरकार की सब्सिडी मिलना उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत लाभप्रद है। अब उनके घर का बिजली बिल पहले की तुलना में काफी कम हो गया है, जिससे आर्थिक बोझ घटा है और वे बचत की राशि अन्य जरूरी कार्यों में उपयोग कर पा रहे हैं। इसी तरह महासमुंद जिले के पीटियाझर निवासी श्री महेश पाल, जो राज्य पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, ने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सौर पैनल सिस्टम स्थापित कराया। पिछले दो माह से उनका बिजली बिल शून्य हो गया है और उन्हें क्रेडिट यूनिट का भी लाभ मिल रहा है। श्री पाल का कहना है कि यह योजना न केवल आर्थिक रूप से राहत दे रही है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान करने का अवसर प्रदान कर रही है। प्रदेश में अब तक हजारों उपभोक्ता इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। केवल महासमुंद जिले में ही 583 उपभोक्ता योजना का लाभ ले रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना छत्तीसगढ़ में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय बोले – प्रदेश की 3 करोड़ जनता के आरोग्य के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का सपना करेंगे पूरा

मानव मुस्कान को सुरक्षित रखने और सहेजने में दंत चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश की 3 करोड़ जनता के आरोग्य के साथ हम विकसित छत्तीसगढ़ का सपना साकार करेंगे। पिछले 20 महीनों में प्रदेश की स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करते हुए दुर्गम अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने का कार्य हमारी सरकार ने किया है। मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित तीन दिवसीय डेंटल कॉन्फ्रेंस 2025 का शुभारंभ कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दंत चिकित्सा और दांतों की देखभाल से जुड़े उपयोगी उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा डेंटल एसोसिएशन की वार्षिक स्मारिका का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार बनने के पहले दिन से ही हमने प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति दी गई है, साथ ही फिजियोथैरेपी, नर्सिंग और मदर-चाइल्ड हॉस्पिटल जैसे संस्थानों की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के साथ ही हम प्रगति की भी बात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2000 में जहां केवल एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं आज 15 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं। आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री वय वंदना योजना से मरीजों और बुजुर्गों को निःशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। वहीं, सस्ती जेनेरिक दवाइयां आम जनता को राहत प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पान मसाला, गुटखा और तंबाकू की वजह से मुँह के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि  दाँतों की देखभाल और सुंदर मुस्कान देने में दंत चिकित्सकों की अहम भूमिका है।उन्होंने चिकित्सकों से आह्वान किया कि इस दिशा में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएँ। उन्होंने भावुक होकर अपने संसदीय कार्यकाल की स्मृतियाँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि 1999 में जब श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, उस समय एम्स दिल्ली पर पूरे देश के मरीजों का दबाव था। तब हमने संसद में निवेदन किया था कि छत्तीसगढ़ में भी एम्स की स्थापना हो। सौभाग्य से 1 नवम्बर 2000 को राज्य गठन के बाद पहली किस्त में छह राज्यों को एम्स की सौगात मिली और छत्तीसगढ़ को भी यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ विजन 2047’ डॉक्यूमेंट तैयार किया और 10 मिशन बनाकर प्रदेश को आगे बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। श्री साय ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश का जीएसडीपी 5 लाख करोड़ है, जिसे वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस दिशा में हम पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा से समृद्ध है, मेहनतकश किसान और परिश्रमी जनता इसकी असली ताकत हैं। “छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया” की कहावत को दोहराते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश 2047 तक अपने लक्ष्यों को अवश्य प्राप्त करेगा। जीएसटी सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में जीएसटी के स्लैब को 5 और 18 प्रतिशत में एकरूप किया गया है। इससे व्यापार और कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा तथा व्यावसायिक गतिविधियाँ सरल होंगी। यह प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि को दर्शाता है, जो भारत को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाएगा। मुख्यमंत्री साय ने अंत में कहा कि “मानव की मुस्कान सबसे कीमती है और उसे सुरक्षित रखने व सहेजने में दंत चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दंत चिकित्सक मुँह और दाँत से जुड़ी बीमारियों पर विस्तृत चर्चा करेंगे और उनके उपचार की दिशा में नए संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और नक्सल प्रभावित व दूरस्थ अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर में 20 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है और यह हमारे प्रयासों का प्रमाण है कि सुकमा जिले के चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र को एनक्यूएएस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति के साथ अब कुल 15 मेडिकल कॉलेज होंगे। इसके अलावा बिलासपुर में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, 12 नए नर्सिंग कॉलेज और पाँच फिजियोथैरेपी कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट और दुर्गम क्षेत्रों के लिए बाइक एम्बुलेंस सेवा शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पूरे देश में सबसे अधिक कैशलेस इलाज सुविधा देने वाला राज्य बन चुका है। कॉन्फ्रेंस में इंडियन डेंटल एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रेसिडेंट डॉ. अरविंद कुमार, पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. राजीव सिंह, कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन डॉ. वैभव तिवारी सहित बड़ी संख्या में देशभर से आए दंत चिकित्सक उपस्थित रहे।  

रायपुर विशेष: महतारियों के सशक्तिकरण में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थापित की एक नई मिसाल

रायपुर स्त्री पुरुष समानता के मामले में छत्तीसगढ़ की मिसाल पूरे देश में रही है लेकिन आर्थिक समानता में फिर भी पुरुषों का पलड़ा अब तक भारी होता था। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी की सरकार आने के बाद इस आर्थिक विषमता को दूर करने का रास्ता भी खुल गया है। अब छत्तीसगढ़ की हर माँ और बहन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है। अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए वे स्वयं निर्णय ले सकती हैं। महतारी वंदन योजना जैसी योजनाएं महिलाओं को उनके श्रम और भागीदारी के लिए सम्मानित करती हैं वहीं साय सरकार की आजीविकामूलक योजनाओं से महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने की राह मिली है। आधी आबादी को सशक्त कर मुख्यमंत्री ने विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला रख दी है। छत्तीसगढ़ ने पिछले 19 महीनों में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य के हर मोर्चे पर मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और त्वरित लाभ पहुंचाने की व्यवस्था स्थापित की गई है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। आर्थिक स्वावलंबन – महतारी वंदन योजना आत्मनिर्भर महिला की ओर कदम  1 मार्च 2024 से लागू इस महत्वाकांक्षी योजना ने राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में क्रांति ला दी है। विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित किए जा रहे हैं।मार्च 2024 से सितम्बर 2025 तक 69.15 लाख से अधिक महिलाओं को 12,376.19 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।यह राशि महिलाओं की आत्मनिर्भरता, पोषण और मूलभूत जरूरतों की पूर्ति में सहायक है।चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए 5, 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।  179 महतारी सदन के निर्माण के लिए 52.20 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक सदन 2,500 वर्गफुट में 29.20 लाख रुपए की लागत से बनेगा, जो महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, बैठक और सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र होगा। स्वरोजगार और उद्यमिता का विस्तार साय सरकार ने महिला श्रमिकों और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं: जिसमें मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष की पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को 7,900 रुपए की सहायता एक सिलाई मशीन के लिए दी जा रही है।दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना से 3 वर्ष से पंजीकृत महिला श्रमिकों को 1 लाख रुपए की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि उन्हें पौष्टिक आहार मिल सके। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना ने पंजीकृत श्रमिकों को अपनी 18-21 वर्ष की अविवाहित पुत्रियों के पढ़ाई लिखाई तथा अन्य आवश्यक खर्चों के लिए 20,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त  और आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी साय सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिसमें महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से  उन्हें बिना जमानत के 25,000 रुपए का ऋण देकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।सक्षम योजना – 2 लाख से कम वार्षिक आय वाली महिलाओं को 3% ब्याज पर 2 लाख रुपए तक ऋण भी दिया जा रहा है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) – 800 करोड़ रुपए का प्रावधान, “लखपति महिला” और “ड्रोन दीदी” जैसी नवाचारी पहलें भी योजनाओं में शामिल है।इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ, उन्हें रोजगार के स्थायी अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं। साय सरकार ने महिला सुरक्षा को नीति के केंद्र में रखा है। नवाबिहान योजना से घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को कानूनी, चिकित्सा, परामर्श और आश्रय सुविधा प्रदान की जाती है।इसके लिए 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ सखी वन-स्टॉप सेंटर में SOP लागू करने वाला देश में पहला राज्य बन गया है। 27 जिलों में सेंटर संचालित, 24×7 सेवा उपलब्ध है।महिला हेल्पलाइन 181 और डायल 112 द्वारा संकट में फंसी महिलाओं को त्वरित सहायता और पुलिस समन्वय की सुविधा प्रदान की जाती है।  शुचिता योजना के तहत 2,000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीनें, 3 लाख से अधिक किशोरियों को स्वच्छता सामग्री प्रदान की जा रही है जिसके लिए 13 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान है।हाई स्कूल छात्राओं के लिए साइकिल वितरण योजना के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान है।  गर्भवती और धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य पूरक और पोषण पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है।   नवा रायपुर में 200 करोड़ रुपए की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है,जहाँ महिला समूहों के उत्पादों की बिक्री होगी।जशप्योर ब्रांड  जशपुर जिला में निवासरत आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित वन-आधारित उत्पाद है,जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहचान बना रहा है, साथ ही“वोकल फॉर लोकल” का सफल उदाहरण भी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महिला एवं बाल विकास विभाग को 8,245 करोड़ रुपए का बजट आबंटित किया गया है। इसमें महतारी वंदन, पोषण, स्वास्थ्य, ऋण और सुरक्षा योजनाओं का विस्तार शामिल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मानना है कि महिला सशक्तिकरण केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर वास्तविक बदलाव लाने से संभव है। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हर योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक समय पर और पारदर्शी ढंग से पहुँचे।     डॉ. दानेश्वरी संभाकर     सहायक संचालक

खरसिया के 29 एकल शिक्षकीय और शिक्षक विहीन शालाओं में हुई शिक्षकों की व्यवस्था

रायपुर वर्षों से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे  रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड की विद्यालयों में अब नई उम्मीद दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया ने न केवल एकल शिक्षकीय व शिक्षकविहीन विद्यालयों की दशा सुधरी है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में ठोस पहल भी साबित हो रही है। प्राथमिक शाला धांगरपारा सरवानी, जहाँ लंबे समय से शिक्षक नहीं थे, अब दो शिक्षकों की तैनाती से बच्चों की पढ़ाई नए उत्साह के साथ शुरू हो चुकी है। इसी प्रकार खरसिया विकासखंड के 29 एकल शिक्षकीय शालाओं में भी शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है, जिससे इन स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत हुई है।         युक्तियुक्तकरण से सिर्फ प्राथमिक ही नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय शिक्षा व्यवस्था भी सुदृढ़ हुई है। हाईस्कूल पामगढ़, छोटे मूड़पार और नगरपालिका कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय जो वर्षों से विषयवार शिक्षकों की कमी से जूझ रहे थे, अब व्याख्याता शिक्षकों की पदस्थापना से लाभान्वित हो रहे हैं। इससे विद्यालय के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ हो रही है। शासन की इस महत्वपूर्ण पहल से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के सैकड़ों विद्यालयों में आवश्यकता अनुरूप शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हुआ है।            गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। इस पहल से दूरस्थ, आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता का नया संतुलन कायम हो रहा है। यह पहल न केवल खरसिया, बल्कि पूरे रायगढ़ जिले की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। युक्तियुक्तकरण के लिए पालकों एवं छात्रों ने शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार युक्तियुक्तकरण से पालकों और विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल। ग्राम कोलम चितवाही के पालकों का कहना है कि लंबे समय से जिस बदलाव की प्रतीक्षा थी, वह अब पूरी हो गई है। इससे बच्चों को न केवल नियमित शिक्षा मिल रही है, बल्कि बेहतर वातावरण और सुविधाएँ भी उपलब्ध हो रही है। पालक महेश अगरिया ने बताया कि उनकी दो बालिकाएं है, वे दोनों ग्राम के शासकीय स्कूल में अध्ययन के लिए जाती है। पहले शिक्षक के कमी के कारण उनके दोनों बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही थी, लेकिन युक्तियुक्तकरण से स्कूल में शिक्षकों की पदस्थापना के फलस्वरूप उनकी बच्चियों की पढ़ाई में काफी सुधार आया है। वहीं बालिकाओं ने बताया कि स्कूल में शिक्षक के आ जाने से सभी कक्षाएं नियमित रूप से लग रही है और उन्हें विषयवार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है। उन्होंने स्कूल में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

दंतेवाड़ा: आदि कर्मयोगी अभियान के लिए जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त, क्रियान्वयन होगा तेज

दंतेवाड़ा: आदि कर्मयोगी अभियान के लिए जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त, क्रियान्वयन होगा तेज आदि कर्मयोगी अभियान में दंतेवाड़ा जिला को मिली नोडल अधिकारी नियुक्ति, अभियान को मिलेगा नया प्रोत्साहन कलेक्टर द्वारा आदि पर्व सेवा के रूपरेखा के संबंध में अधिकारियों को दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश आदि कर्मयोगी अभियान का मूल उद्देश्य जनजातीय गांवों में विजन निर्माण एवं परिवर्तनकारी प्रक्रिया, मूलभूत सेवा प्रदाय को उत्कृष्ट बनाने के लिए नोडल अधिकारी गंभीरता से दायित्वों का निर्वहन करें-कलेक्टर दुदावत इसके अंतर्गत आदि सेवा पर्व 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक चलेगा दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ शासन, आदिम जाति विकास विभाग, अनुसूचित जाति विकास विभाग पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के द्वारा सभी ग्रामों में आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत कलस्टर का आयोजन कर शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं को प्रत्येक ग्राम के जन तक पहुंचाना है। ज्ञात हो कि अभियान के अतंर्गत  आदिसेवा पर्व/पखवाड़ा (17 सितंबर से 02 अक्टूबर) जिले के सभी ग्राम पंचायतों में मनाया जायेगा। शासन के निर्देशानुसार जिला कार्यालय द्वारा अभियान के सुचारू क्रियान्वयन के तहत जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त कर दायित्व सौंपे गए है। इस संबंध में संपूर्ण अभियान की रूपरेखा निर्धारण के संबंध में कलेक्टर कुणाल दुदावत द्वारा आज जिला पंचायत सभाकक्ष में महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक में अभियान पर प्रकाश डालते हुए कलेक्टर ने कहा कि जनजातीय गांवों में विजन निर्माण एवं परिवर्तनकारी प्रक्रिया है जो जनजातीय समुदायों को अपनी आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और विकास की दिशा में एक स्थायी मार्ग निर्धारित करने में सक्षम बनाती है। इसमें सामूहिक लक्ष्यों की पहचान करने, स्थानीय चुनौतियों का समाधान करने और प्रगति के लिए पारंपरिक ज्ञान का लाभ उठाने हेतु सहभागी संवाद को बढ़ावा देना शामिल है। इसके तहत ब्लॉक टीम का गठन, गांव के दौरे के लिए रोस्टर,सामुदायिक लामबंदी के लिए जिले के द्वारा सीएसओ की पहचान, सीएसओ द्वारा प्रवेश बिंदु गतिविधि,ट्रांसेक्ट वॉक की घोषणा, प्रारूप भरना, संसाधन मानचित्रण, विजन निर्माण तथा सीएसओ और ब्लॉक टीम द्वारा गांव की जरूरतों को सारणीबद्ध किये जाने जैसे व्यापक चरण शामिल रहेगें। नागरिक समाज संगठन (सीएसओ) इस प्रक्रिया में सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करके, समुदायों और बाहरी संसाधनों के बीच के अंतरालों को पाटकर और समावेशी नीतियों की हिमायत (एडवोकेसी) करके महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। क्षमता निर्माण पहलों, जागरूकता सृजन और सहयोगात्मक साझेदारियों के माध्यम से, नागरिक समाज संगठन जनजातीय गाँवों को आत्मनिर्भर, समतामूलक और सांस्कृतिक रूप से निहित विकास योजनाओं की कल्पना करने और उन्हें साकार करने के लिए सशक्त बनाएंगे। गांव के मानचित्रण के तहत आवास,पानी,बिजली जैसे सेवाओं की उपलब्धता, सामुदायिक संस्थान,पहुंच सेवाएं,आजीविका के संसाधन को सम्मिलात किया जायेगा। जल संसाधन के तहत झरने, तालाब, नदी,नाला,कुएं,बावड़ी, बांध, सिंचाई में सुधार की संभावनाएं परिवर्तन को प्रमुखता से इंगित किये जायेगे। साथ ही आवास,जलापूर्ति,स्वास्थ्य एवं पोषण देखभाल, शिक्षा,सड़क एवं परिवहन, बिजली,सामुदायिक एवं धार्मिक सुविधाएं, संचार, बाजार और व्यापार जैसी मूलभूत सेवाओं में आगामी 5 वर्षों में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी फीडबैक पर भी नोडल अधिकारियों के सुझाव भी शामिल होगें। इसके साथ ही कलेक्टर दुदावत ने कहा कि आदि कर्म योगी अभियान वस्तुतः स्थानीय समुदाय के परिकल्पना को आदर्श ग्राम के रूप में साकार करना है। क्योकि परिवर्तन में शहरी क्षेत्र में जो विकास के उच्च स्तर के मानक है भविष्य में वे ग्रामीण क्षेत्रों के मानक होगें। अतः इसके लिए नियुक्त नोडल अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायतों में जाकर दिये गए विकास के बिंदुओं की गहन जांच पड़ताल करके प्रारूप को भरे जायेगे। कुल मिलाकर यह व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की कोशिश है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदाय सेवाओं को उत्कृष्ट बनाया जा सके। बैठक के दौरान अपर कलेक्टर राजेश पात्रे, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त राजीव नाग सहित जिला प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

बीएसएफ का बड़ा ऑपरेशन: नक्सली नागेश का विशाल स्मारक जमींदोज

कांकेर कांकेर जिले में नक्सल मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में 47 बटालियन बीएसएफ पखांजूर के जवानों ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. जवानों ने भारी बारिश और दुर्गम रास्तों की चुनौती के बीच परतापुर थाना क्षेत्र के गांव वाट्टेकल व परालमस्पी के घने जंगलों में नक्सलियों के बनाए गए लगभग 14 फीट ऊंचे स्मारक को ध्वस्त कर दिया गया है. जानकारी के अनुसार, 47 बटालियन कमांडेंट विजेंद्र नाथ गंगोली के निर्देश पर विशेष ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी. 12 जुलाई 2025 की रात को विभिन्न टीमें वालेर नदी और कठिन नालों को पार करते हुए अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पहुंची. गश्त के दौरान जवानों को मृत नक्सली नागेश का बनाया स्मारक मिला, जिसे मौके पर ही उखाड़कर नष्ट कर दिया गया. गौरतलब है कि नक्सली अपने मारे गए साथियों की याद में जगह-जगह स्मारक खड़े करते हैं. इन्हीं स्मारकों के जरिए वे ग्रामीणों पर प्रभाव जमाने और अपनी विचारधारा फैलाने की कोशिश करते हैं.

रायपुर : पीएम सूर्य घर योजना: सूरज की रोशनी से रोशन हुए घर, बिजली बिल शून्य

रायपुर ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई “पीएम सूर्य घर योजना” से प्रदेश के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। योजना के अंतर्गत घरों की छत पर रूफटॉप सोलर पैनल लगने से अब लोग न केवल अपनी बिजली की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक भी बन रहे हैं। मुंगेली जिले के विकासखण्ड पथरिया के सरगॉव ग्राम निवासी श्री लक्की पाड़े इसका उदाहरण बने हैं। उन्होंने योजना का लाभ उठाकर अपने घर पर 3 किलोवॉट का सोलर पैनल स्थापित किया। इससे उनका बिजली बिल शून्य हो गया। श्री पाड़े ने बताया कि पहले हर माह बिजली बिल की चिंता रहती थी, लेकिन अब सूरज की रोशनी से घर रोशन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि योजना में उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा आसान किश्तों में बैंक फाइनेंस और कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। योजना से न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश में इस योजना का तेजी से विस्तार हो रहा है और लोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

रायपुर : पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: सूरज की रोशनी से आत्मनिर्भरता की राह पर बाबा साहू

रायपुर रायगढ़ निवासी बाबा साहू की कहानी सिर्फ एक घर को रोशन करने की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के जरिए आत्मनिर्भरता और हरित भविष्य की एक मिसाल है। अगस्त 2025 में बाबा साहू ने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित करके इसकी शुरुआत की। बाबा साहू ने बताया कि सरकारी बैंक से उन्हें लोन की सुविधा आसानी से मिल गई और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने कुछ ही दिनों में प्लांट का संचालन शुरू कर दिया। इस सरल और पारदर्शी प्रक्रिया ने योजना पर उनका भरोसा और भी मजबूत किया। आज उनके सोलर प्लांट से प्रतिदिन 20-25 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिससे उनके मासिक बिजली बिल में 80-90 प्रतिशत तक की भारी कमी आई है। बाबा साहू ने बताया कि सोलर प्लांट रख-रखाव बहुत कम है। वे बताते हैं कि यह योजना सिर्फ बिजली बिल कम करने का साधन नहीं है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का एक सशक्त माध्यम भी है। बाबा साहू शहरवासियों से कहते हैं कि हर परिवार को अपनी छत को ऊर्जा उत्पादन का साधन बनाना चाहिए, ताकि वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनें, बल्कि एक हरित और सशक्त भविष्य के निर्माण में भी योगदान दे सकें।