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सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत, सौरभ भारद्वाज बोले—‘प्रणाली को ठीक करना जरूरी’

नई दिल्ली  आम आदमी पार्टी के नेताओं ने रियलिटी चेक कर दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया कि दिल्ली में भाजपा सरकार आने के बाद सरकारी अस्पतालों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। मुफ्त दवा, टेस्ट और सर्जरी जैसी मूलभूत सुविधाएं अब केवल नाम मात्र की रह गई हैं। 'आप' दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने बीते गुरुवार को राजीव गांधी अस्पताल का निरीक्षण किया था, वहीं शुक्रवार को कोंडली के विधायक कुलदीप कुमार ने लाल बहादुर शास्त्री (एलबीएस) अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने दावा किया कि यहां मरीजों को निर्धारित दवाइयों का आधा हिस्सा भी अस्पताल से नहीं मिल रहा है और ज्यादातर महंगी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। कुलदीप कुमार ने बताया कि डॉक्टरों द्वारा मरीजों को 8 से 10 दवाइयां लिखी जा रही हैं, लेकिन अस्पताल से केवल 1 या 2 सस्ती दवाइयां ही दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भाजपा सरकार की नाकामी को उजागर करती है। केजरीवाल सरकार के समय में महंगी से महंगी दवाइयां, टेस्ट और सर्जरी पूरी तरह मुफ्त हुआ करती थीं। आम आदमी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान कई मरीजों ने अपनी शिकायतें बताईं। एक बुजुर्ग मरीज ने कहा कि उन्हें केवल दो दवाइयां दी गईं, जबकि बाकी पर ‘कट’ लगाकर बाहर से लाने को कहा गया। एक अन्य मरीज ने शिकायत की कि सात दवाइयों में से केवल एक मिली, बाकी छह बाहर से खरीदनी पड़ीं। कुछ मरीजों ने यह भी बताया कि पहले सभी दवाइयां अस्पताल में मिल जाती थीं, पर अब 'बाहर से लो' कहकर भेज दिया जाता है। कुलदीप कुमार ने कहा कि इमरजेंसी में भी दवाइयों की भारी कमी है और मरीजों को जन औषधि केंद्र की ओर भेजा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इन दुकानों को अस्पतालों के बाहर जानबूझकर खुलवाया है ताकि गरीब मरीजों से पैसे वसूले जा सकें। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा राज में सरकारी अस्पताल खुद बीमार हो गए हैं। प्रदूषण से बढ़ती बीमारियों और अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिलने से दिल्लीवासियों पर दोहरी मार पड़ रही है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार में मरीजों को दवा, टेस्ट और सर्जरी सब कुछ मुफ्त मिलता था, जबकि अब वर्तमान सरकार ने गरीबों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि जमीनी सच्चाई यह है कि मरीजों को न दवाइयां मिल रही हैं, न टेस्ट फ्री हो रहे हैं। गरीब लोग सुबह से लाइन में लगते हैं और दोपहर तक दवा के लिए भटकते रहते हैं। 

ED का समन रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लगाम — अब इन नए नियमों से चलेगी एजेंसी

नई दिल्ली  उच्चतम न्यायालय ने ED यानी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दो वरिष्ठ वकीलों को जारी समन को रद्द कर दिया तथा जांच एजेंसियों को मुवक्किलों को दी गई कानूनी सलाह के बारे में पूछताछ के लिए वकीलों को बुलाने से रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए। भारत के प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन तथा न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने ईडी द्वारा धन शोधन जांच के सिलसिले में वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को तलब किए जाने के बाद स्वत: संज्ञान मामले में यह फैसला सुनाया।   फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि पीठ ने वकीलों की सुरक्षा के लिए 'नियम में छूट को सुसंगत बनाने' का अनुरोध था और जांच एजेंसियों के अनुचित दबाव से कानूनी पेशे की रक्षा के लिए नए निर्देश जारी किए। पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियां ​​किसी भी वकील को मुवक्किलों का विवरण मांगने के लिए समन जारी नहीं करेंगी, जब तक कि यह संबंधित कानून के दायरे में न आता हो। उसने कहा कि वकीलों के डिजिटल उपकरणों को केवल संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली अदालत के समक्ष ही जब्त किया जा सकता है और आपत्तियों के खारिज होने के बाद ही उन्हें उनकी उपस्थिति में तथा पक्षकारों के समक्ष ही खोला जा सकता है। ईडी द्वारा वकीलों को भेजे गए समन को खारिज करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यह उन आरोपियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है जिन्होंने वकीलों को अपनी पैरवी के लिए चुना था। पीठ ने कहा, 'समन के परिणामस्वरूप उन आरोपियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है, जिन्होंने वकील पर भरोसा जताया था।' पीठ ने ऐसी कार्रवाई को वैधानिक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन बताया। न्यायालय ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 का हवाला देते हुए कहा, 'जांच अधिकारी किसी भी वकील को मुवक्किल का विवरण मांगने के लिए समन जारी नहीं करेंगे, जब तक कि यह धारा 132 के अपवादों के अंतर्गत न आता हो।' उच्चतम न्यायालय ने 12 अगस्त को खुद को देश के सभी नागरिकों का 'संरक्षक' बताया था और मामलों में मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करते समय जांच एजेंसियों द्वारा वकीलों को तलब किए जाने के संबंध में स्वत: संज्ञान मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। ईडी द्वारा दातार और वेणुगोपाल को तलब किए जाने के बाद न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई शुरू की थी। दातार और वेणुगोपाल को समन भेजे जाने की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने तीखी आलोचना की थी और इसे कानूनी पेशे को कमजोर करने के लिए 'परेशान करने वाली प्रवृत्ति' बताया था। विवाद के बाद ईडी ने 20 जून को आंतरिक निर्देश जारी कर अपने अधिकारियों को निदेशक की पूर्व स्वीकृति और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132 के अनुपालन के अलावा धन शोधन के मामलों में वकीलों को तलब करने से रोक दिया था।  

हाई कोर्ट ने कहा, बहू को घर में रहने का अधिकार, संपत्ति का नहीं

 नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसा फैसला सुनाया जो परिवार के झगड़ों में बुजुर्ग माता-पिता की शांति को सबसे ऊपर रखता है। कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों को अपने घर में शांति और गरिमा से रहने का पूरा अधिकार है। परिवारिक विवाद में भी यह हक कोई नहीं छीन सकता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। इसमें बहू को सास-ससुर के स्व-अर्जित घर से बाहर निकालने का निर्देश था। बहू का घर में रहने का हक कोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिलाओं की रक्षा कानून (PWDV एक्ट) के तहत बहू के रहने के अधिकार को माना, लेकिन जोर देकर कहा कि यह सिर्फ 'कब्जे का हक' है, मालिकाना हक नहीं। जजों की बेंच ने टिप्पणी की, "कानून को ऐसा चलना चाहिए कि सुरक्षा भी बनी रहे और शांति भी।" अदालत ने दोनों पक्षों के हक को संतुलित करने पर जोर दिया गया। क्या है मामला? विवादित संपत्ति एक ही मकान थी। इसमें सीढ़ियां और रसोई साझा थे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में अलग रहना व्यावहारिक नहीं है। बुजुर्ग दंपति ने बहू के लिए वैकल्पिक घर का प्रस्ताव दिया। इसमें 65,000 रुपये मासिक किराया, मेंटेनेंस, बिजली-पानी बिल और सिक्योरिटी डिपॉजिट शामिल थे। सब खर्च वे खुद वहन करेंगे। कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा, “हक टकराने पर नाजुक संतुलन जरूरी है। किसी की गरिमा या सुरक्षा प्रभावित न हो।” PWDV एक्ट महिलाओं को बेघर होने से बचाता है। लेकिन बुजुर्गों को जीवन के अंतिम वर्ष शांतिपूर्वक बिताने का हक भी मजबूत है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि चार हफ्तों में बहू के लिए दो कमरों वाला फ्लैट ढूंढा जाए। इलाका पुराने घर जैसा हो। उसके दो हफ्ते बाद बहू को विवादित घर खाली करना होगा।

छठी मैया का अपमान नहीं सहेगा देश — राहुल गांधी के बयान पर सीएम रेखा गुप्ता का करारा जवाब

दरभंगा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के छठ महापर्व संबंधी बयान पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति छठी मैया का अपमान कर और पूर्वांचल के भाइयों-बहनों का अनादर कर वोट बैंक की राजनीति करना चाहता है तो अब भारत में यह राजनीति नहीं चलेगी। सीएम रेखा गुप्ता ने बातचीत में कहा कि देश की जनता, पूर्वांचल की जनता और बिहार की जनता समझती है कि राहुल गांधी वोट बैंक की राजनीति के लिए छठी मैया का अपमान कर रहे हैं। यह त्योहार आस्था, श्रद्धा और संस्कृति का प्रतीक है और इसके अपमान को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को इस बात की तकलीफ है कि पिछले 27 सालों में जो काम कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) की सरकारों में नहीं हो पाए, वे अब भाजपा सरकार में हो रहे हैं, उनकी तकलीफ जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हम दिल्ली की जनता की सेवा कर रहे हैं और करते रहेंगे। जनता की समस्याओं का समाधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी पर भी सीएम गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया दी।  उन्होंने कहा कि पीएम मोदी लगातार देश की सेवा में जुटे हुए हैं। कई लोग इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि भारत आज वैश्विक स्तर पर एक सशक्त नेतृत्व के रूप में उभर रहा है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे चुनावी मौसम के मेंढक की तरह हैं, जो केवल चुनाव के समय थोड़ी देर के लिए बाहर आते हैं, बयान देते हैं और फिर गायब हो जाते हैं, लेकिन देश की जनता, खासकर बिहार की जनता, उनके असली चरित्र को भलीभांति जानती है। उन्होंने न पहले कभी जनता के हित में काम किया, न आगे करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का दावा – देशभर में दंगा भड़काने और गैर-मुसलमानों को मारने की थी योजना

नई दिल्ली  दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर जमानत याचिका का विरोध करते हुए पुलिस ने कई बड़े दावे किए हैं। दिल्ली पुलिस ने 389 पन्नों का हलफनामा दायर करते हुए दलीलें पेश की हैं कि क्यों आरोपियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने दस्तावेजी और तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोप लगाया है कि सांप्रदायिक आधार पर पूरे देश में दंगों की साजिश रची गई थी। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने 8 बड़े आरोप लगाते हुए जमानत का विरोध किया है।   1. सत्ता परिवर्तन का ऑपरेशन दिल्ली पुलिस ने कहा है कि आरोपियों ने सांप्रदायिक सद्भाव को खत्म करके देश की एकता और संप्रभुता पर चोट करने के लिए साजिश रची थी। वे भीड़ को ना सिर्फ सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के लिए उकसाना चाहते थे बल्कि सशस्त्र विद्रोह चाहते थे। गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित इस तरह की थ्योरी को 'रिजीम चेंज ऑपरेशन' कहा जाता है। पुलिस का यह भी कहना है कि दंगे को पूरे देश में फैलाने की साजिश थी। 2 सोच-समझकर ट्रंप दौरे वाला समय चुना गया पुलिस ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद चैट्स से साबित होता है कि सोच-समझकर इसे उस समय अंजाम देने की साजिश रची गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आने वाले थे। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचकर CAA को वैश्विक मुद्दा बनाना था और इसे मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के रूप में पेश करना था। 3. यूएपीए मामलों में ‘जेल ही नियम है’ पुलिस ने यह भी दलील दी है कि यूएपीए जैसे अपराध में 'जेल ही नियम' माना गया है। अदालत के अनुसार आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं और इन्हें गलत साबित करने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ताओं पर थी, जो वे नहीं कर सके। अपराध की गंभीरता देखते हुए सिर्फ देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। 4. सुनवाई में देरी के लिए आरोपी खुद जिम्मेदार पुलिस ने कहा कि हाई कोर्ट और विशेष अदालत दोनों ने पाया कि आरोपियों ने मिलकर आरोप तय होने की प्रक्रिया में लगातार अड़चनें डालीं। सेक्शन 207 की प्रक्रिया भी अपीलीय अदालत के हस्तक्षेप से मुश्किल से पूरी हो सकी। रोजाना सुनवाई के आदेश के बावजूद आरोपियों ने दो साल तक ट्रायल को टालते रहे। 5. 900 नहीं, सिर्फ 155 गवाह पुलिस ने कहा कि 900 गवाहों के होने की वजह से ट्रायल जल्दी पूरा नहीं होने की दलील ना केवल अपरिपक्व है, बल्कि जमानत प्राप्त करने के लिए बनाया गया एक भ्रामक तर्क भी है। पुलिस ने कहा कि रिकॉर्ड में करीब 155 सार्वजनिक गवाह हैं, जिनमें से 58 ने अदालत में बयान दिए हैं। 47 गवाहों को सुरक्षा दी गई है, जिनमें 38 ने धारा 164 और बाकी ने धारा 161 के तहत बयान दर्ज कराए हैं। 6. उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस ली थी पुलिस ने कहा कि फरवरी 2024 में उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस ले ली थी। इसलिए हाई कोर्ट के निष्कर्ष अब अंतिम हो चुके हैं और उन्हें दोबारा खोलने या नई जमानत अर्जी के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती। 7. चक्का जाम का उद्देश्य गैर-मुसलमानों पर हमला दिल्ली पुलिस के अनुसार चक्का जाम का असली मकसद पुलिसकर्मियों और गैर-मुसलमानों को निशाना बनाकर दंगे भड़काना और सरकारी-संपत्ति को नुकसान पहुंचाना था। पुलिस ने कहा कि शरजील इमाम ने दंगों पर थीसिस लिखी थी और उनके भाषणों में इसका असर साफ दिखता है। 8. व्हाट्सऐप ग्रुप और बैठकें पुलिस ने कहा कि JCC नामक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया, जो फर्जी दस्तावेजों से लिए गए नंबर पर चलाया गया था। इसके अलावा 'मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑफ JNU' नाम से भी एक सांप्रदायिक ग्रुप बनाया गया था, जिसे उमर खालिद के निर्देश पर शुरू किया गया।  

दिल्ली में पार्किंग फीस में उछाल: NDMC ने ऑफ-रोड व इनडोर पार्किंग का शुल्क दोगुना किया — 29 अक्टूबर से

नई दिल्ली  पलूशन की मार के बीच दिल्लीवालों के लिए ये खबर टेंशन बढ़ा सकती है। CAQM के आदेश को मानते हुए नई दिल्ली नगर पालिका परिषद ने पार्किंग शुल्क को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। नई दरें आज यानी 29 अक्टूबर से ही लागू हो गई हैं। आदेश के अनुसार,यह तब तक लागू रहेगा जब तक ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चरण-II हटाया नहीं जाता।   यह बढ़ोतरी NDMC क्षेत्र के सभी ऑफ-रोड और इनडोर पार्किंग स्थलों पर लागू होगी। यह फैसला ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-II के लागू होने के बाद लिया गया है,जो राजधानी में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के कारण शुरू हुआ है। एक नोटिस के अनुसार वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में चरण-II ('बहुत खराब' हवा की गुणवत्ता) के उपायों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। एक वरिष्ठ एनडीएमसी (NDMC) अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से जारी आदेश के पालन में NDMC की तरफ से प्रबंधित पार्किंग (ऑफ-रोड/इनडोर) के लिए पार्किंग शुल्क को मौजूदा दरों से दोगुना कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी 29 अक्टूबर से GRAP के चरण-II के हटने तक जारी रहेगी। कहां लागू होगा यह फैसला? अधिकारी ने बताया कि NDMC वर्तमान में 126 पार्किंग स्थलों का प्रबंधन करती है। इन 126 साइट्स में 99 ऑफ-रोड, 3 इनडोर/मल्टी-लेवल कार पार्क और 24 ऑन-स्ट्रीट साइट्स शामिल हैं। अधिकारी ने कहा,"पार्किंग शुल्क बढ़ाने के फैसले से कुल 102 पार्किंग स्थल प्रभावित होंगे।" वाहन प्रकार     वर्तमान फीस (रुपये में)    नई फीस (रुपये में) चार पहिया वाहन     20    40 दो पहिया वाहन     10    20 बस                             150    300 कार (इंडोर)            10    20 स्कूटर (इंडोर)            5    10

वोटर सुविधा में बड़ा कदम: अब कॉल पर मिलेगा बीएलओ से तुरंत समाधान

नई दिल्ली  भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतदाताओं की चुनाव संबंधी हर छोटी-बड़ी शिकायत और सवालों के त्वरित निपटारे के लिए दो प्रमुख सुविधाओं को और मजबूत किया है। राष्ट्रीय मतदाता हेल्पलाइन 1950 और नई 'बीएलओ के साथ बुक-अ-कॉल' सुविधा अब पूरे देश में सक्रिय हैं, जिसका उद्देश्य यह है कि कोई भी मतदाता चुनाव प्रक्रिया में असमंजस या परेशानी का शिकार न हो। आयोग के अनुसार टोल-फ्री नंबर 1800-11-1950 पर सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक प्रशिक्षित अधिकारी मतदाताओं के फोन का जवाब देते हैं। चाहे नाम जोड़ना हो, वोटर आईडी में सुधार, मतदान केंद्र की जानकारी या कोई शिकायत, सब कुछ यहीं सुलझाया जाता है। यह केंद्र सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीय हेल्पलाइन का काम करता है। समय पर और स्थानीय स्तर की प्रतिक्रिया के लिए हर राज्य में राज्य संपर्क केंद्र (एससीसी) और हर जिले में जिला संपर्क केंद्र (डीसीसी) स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र कार्य दिवसों में कार्यालय समय के दौरान खुले रहते हैं और क्षेत्रीय भाषाओं में सहायता देते हैं ताकि कोई मतदाता भाषा की बाधा से वंचित न रहे। हर शिकायत और सवाल को राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (एनजीएसपी 2.0) पर दर्ज किया जाता है। मतदाता ऑनलाइन स्टेटस चेक कर सकते हैं। आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ), जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिए हैं कि 48 घंटे के अंदर हर अनुरोध का निपटारा हो। अब मतदाता ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म या ईसीआईनेट ऐप के जरिए अपने बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। 'बुक-अ-कॉल विद बीएलओ' सुविधा से घर बैठे बीएलओ से फोन पर बात हो जाएगी। यह खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के मतदाताओं के लिए उपयोगी है। यदि फोन नहीं करना चाहते, तो आयोग के आधिकारिक कंप्लेंट ईमेल पर शिकायत भेजें। हर मैसेज का जवाब दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि चुनाव से जुड़ी कोई भी जानकारी, सुझाव, फीडबैक या शिकायत के लिए 1950 हेल्पलाइन या बीएलओ अपॉइंटमेंट का इस्तेमाल करें। आयोग का दावा है कि यह पहल लोकतंत्र को और मजबूत बनाती है, जहां हर मतदाता की आवाज सुनी जाए।

ISIS मॉड्यूल के बाद दिल्ली पुलिस की एक और बड़ी कामयाबी, पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा युवक गिरफ्तार

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक पाकिस्तानी जासूस को गिरफ्तार कर बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जासूस की पहचान आदिल के तौर पर हुई है जो फेक पासपोर्ट रैकेट से जुड़ा था। उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। वह पिछले कुछ सालों से दिल्ली में ही रह रहा था। सामने आई जानकारी के मुताबिर उसके पास से पुलिस ने फेक पासपोर्ट भी बरामद किए हैं। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान और अन्य कुछ देशों की यात्रा भी कर चुका है। रिपोर्ट्स की मानें तो उसके कुछ विदेश न्यूक्लियर एजेंसियों से भी लिंक की खबर है। ये गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब पुलिस ने कुछ दिनों पहले ही आईएसआईएस से जुड़े संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा दिल्ली में गिरफ्तार किए गए आईएसआईएस के संदिग्ध आतंकी अदनान खान उर्फ अबू मोहम्मद और अदनान खान से यूपी एटीएस पूछताछ में जुट गई है। अदनान यूपी के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद मामले की सुनवाई कर रहे जज को धमकी देने का आरोप था। जिसके आरोप में वह जेल भी गया था। सितंबर 2024 से वह जमानत पर चल रहा था। सोमवार को लोकभवन में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था एल आर कुमार ने बताया कि अदनान खान किदवई नगर, एटा जनपद का रहने वाला है। उसके पिता दूरदर्शन में ड्राइवर हैं और दिल्ली के सादिक नगर स्थित सरकारी आवास में रहते हैं। उन्होंने कहा कि वह आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़ी विचारधारा से प्रभावित होकर ऑनलाइन माध्यम से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहा था। उन्होंने बताया कि अदनान दिल्ली में फिदायीन हमले की फिराक में था। यूपी एटीएस की एक टीम उससे पूछताछ कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया है कि अदनान दिल्ली में एक बड़े मॉल की रेकी कर चुका था और उसने दिवाली के दौरान धमाका करने की योजना बनाई थी। एजेंसियों का मानना है कि उसका उद्देश्य त्योहार के समय अधिक भीड़ वाले स्थान पर हमला कर दहशत फैलाना था। श्री कुमार ने कहा कि अदनान सोशल मीडिया के जरिये आईएसआईएस के संपर्क में आया था। धीरे-धीरे वह कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और फिर विदेशी हैंडलरों के संपर्क में जाकर आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया।  

दिल्ली में बादल तो बने, बारिश गायब! क्लाउड सीडिंग पर AAP का तंज– ‘सरकार की सीडिंग फुस्स’

नई दिल्ली  दिल्ली में आज दोपहर क्लाउड सीडिंग के कई ट्रायल किए गए. लेकिन रेखा सरकार का यह ट्रायल फिलहाल सवालों के घेरे में है. दो घंटे बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं हुई है, जिस पर आप (AAP) ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है. AAP ने इसे आर्टिफिशियल रेन के नाम पर फर्जीवाड़ा बताया है. क्लाउड सीडिंग के बाद अधिकारियों ने दावा किया था कि 15 मिनट से 4 घंटे के भीतर बारिश शुरू हो सकती है, लेकिन तीन घंटे बाद भी आसमान साफ नजर आ रहा है. AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने वीडियो बनाकर दिल्ली सरकार के इस ट्रायल पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने लिखा, 'बारिश में भी फर्ज़ीवाड़ा, कृत्रिम वर्षा का कोई नामुनिशान नहीं दिख रहा है. इन्होंने सोचा होगा देवता इंद्र करेंगे वर्षा. सरकार दिखाएगी खर्चा.'   'देवता इंद्र करेंगे वर्षा, सरकार दिखाएगी खर्चा' सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'इंद्र देवता भी सरकार का साथ नहीं दे रहे. कल शाम को थोड़ी बहुत बारिश हो भी रही थी लेकिन अब तो जो थोड़े बहुत बादल दिख रहे थे, वो भी चले गए.' दिल्ली में हुआ ट्रायल बता दें कि राजधानी दिल्ली में आज क्लाउड सीडिंग का सफल ट्रायल किया गया. अब इसके तीन ट्रायल हो चुके हैं. इसके लिए IIT कानपुर के Cessna एयरक्राफ्ट ने मेरठ से उड़ान भरी और खेकरा, बुराड़ी, नार्थ करोल बाग, मयूर विहार, सड़कपुर और भोजपुर जैसे इलाकों में क्लाउड सीडिंग का ट्रायल किया. इस दौरान पायरो तकनीक का उपयोग करते हुए 8 क्लाउड सीडिंग फ्लेयर्स छोड़े गए.  मंत्री सिरसा ने दी क्लाउड सीडिंग की जानकारी दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिरसा ने इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 8 फ्लेयर्स को यूज किया गया. एक फ्लेयर 2.5 kg की है और लगभग दो से ढाई मिनट तक चलती है. इस पूरे प्रोसेस में आधा घंटा लगा था. इस ट्रायल के बाद बाहरी दिल्ली के इलाकों में हल्की बूंदाबांदी के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई थी. लेकिन यह बादलों में नमी पर निर्भर करता है. फिलहाल नमी कम है, क्योंकि दिल्ली में मौसम विभाग द्वारा अनुमानित तापमान सामान्य से 3 डिग्री कम है. 

दिल्ली में केजरीवाल की अग्निपरीक्षा: 3 झटकों के बाद अब 12 सीटों पर साख दांव पर

नई दिल्ली  दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के 8 महीने बाद पार्टी को पहली चुनावी परीक्षा का सामना करना होगा। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के लिए भी यह नाक की लड़ाई होगी। दरअसल, दिल्ली नगर निगम के 12 वार्डों में उपचुनाव की घोषणा राज्य चुनाव आयोग ने कर दी है। 30 नवंबर को चुनाव होंगे और मतों की गिनती 3 दिसंबर को होगी। निगम के 12 वार्डों के उपचुनाव में हार-जीत से सदन की सरकार भले ही ना बदले लेकिन भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच यह नाक की लड़ाई जरूर होगी। वहीं कांग्रेस के पास भी अपनी स्थिति बेहतर करने का मौका होगा। इस चुनाव को सबसे अहम 'आप' के लिए माना जा रहा है, जिसे अपने सबसे बड़े गढ़ में लगातार तीन बड़े झटकों का सामना करना पड़ा है। पहले 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से गठजोड़ के बावजूद पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई तो इस साल की शुरुआत में उसे विधानसभा की सत्ता भी गंवानी पड़ी। बात यहीं खत्म नहीं हुई और आपसी फूट की वजह से निगम की सरकार भी हाथ से चली गई। ऐसे में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी पूरी ताकत झोंककर दमदार तरीके से वापसी करना चाहेगी। इन मुद्दों पर लड़ा जाएगा चुनाव यह चुनाव दिल्ली नगर निगम के कामकाज के ऊपर और दिल्ली में कूड़े व कचरे के निस्तारण, बाजारों में सफाई व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों पर चुनाव लड़ा जाएगा। इसके अलावा तीनों लैंडफिल साइट में स्थित वर्षों पुराने कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के मुद्दें पर भी चुनाव में अहम भूमिका निभाएगा। इसके अतिरिक्त सभी निगम के 12 जोन के 250 वार्डों में सप्ताह विभिन्न बार कूड़ा एकत्रित करने के लिए आने वाले ऑटो टिप्पर के मुद्दे भी स्थानीय स्तर पर अहम है। सड़क किनारे मलबा डालने, निगम की सभी सेवाएं जैसे स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस, फैक्ट्री लाइसेंस की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे, सीलिंग जैसे मुद्दे व्यापारियों के लिए अहम है। अभी सदन में 238 सदस्य हैं निगम के सदन में कुल 250 पार्षदों में से अभी 238 पार्षद सदन के सदस्य हैं। इसमें भाजपा के 117 पार्षद, आम आदमी पार्टी के 99 पार्षद, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) के 15 पार्षद और कांग्रेस के 7 पार्षद हैं। सदन में बहुमत के लिए कुल 126 सदस्य चाहिए होते हैं। अभी मौजूदा समय में आईवीपी, भाजपा को बाहर से समर्थन कर रही है। इन वार्ड पर होंगे उपचुनाव मुंडका, शालीमार बाग बी, अशोक विहार, चांदनी चौक, चांदनी महल, द्वारका बी, दिचाऊं कलां, नारायणा, संगम विहार-ए, दक्षिण पुरी, ग्रेटर कैलाश और विनोद नगर में उपचुनाव होंगे। इन सभी 11 वार्डों के पार्षद फरवरी 2025 के विधानसभा चुनाव में विधायक का चुनाव जीत गए थे। जिसके बाद यह 12 वार्ड खाली हो गए हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा के आठ विधायक जीते थे। जबकि चांदनी चौक, चांदनी महल और दक्षिणपुरी से आम आदमी पार्टी के पार्षद विधानसभा चुनाव जीते थे। भाजपा की द्वारका बी वार्ड से पार्षद रहीं कमलजीत सहरावत वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव में पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद का चुनाव जीती थीं। जिसके बाद से यह वार्ड खाली है। यह है वार्डों की स्थिति शालीमार बाग-बी ( वार्ड संख्या 56), अशोक विहार (वार्ड संख्या 65) , द्वारका-बी (वार्ड संख्या 120) , ढिचाऊं कलां (वार्ड संख्या 128) और ग्रेटर कैलाश (वार्ड संख्या 173) महिला वार्ड हैं। मुंडका (वार्ड संख्या 25), चांदनी चौक (वार्ड संख्या 74), चांदनी महल (76), नारायणा (वार्ड संख्या 139) , संगम विहार-ए (वार्ड संख्या 163) , विनोद नगर ( वार्ड संख्या 198) सामान्य वार्ड और दक्षिण पुरी (वार्ड संख्या 64) अनुसूचित जाति (एससी) वार्ड है। इन वार्डों में सत्ता पक्ष को मजबूती शालीमार बाग-बी वार्ड से वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पार्षद का चुनाव जीती थीं। इस वर्ष दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में शालीमार बाग विधानसभा से जीत दर्ज कर वह विधायक बनी थी। इसके मुंडका, अशोक विहार, द्वारका बी, दिचाऊं कलां, नारायणा, संगम विहार-ए, ग्रेटर कैलाश और विनोद नगर में भाजपा के पार्षद रह चुके हैं। इन कारणों से इन वार्डों में सत्ता पक्ष ने मजबूती की उम्मीद जताई है। हालांकि, दिल्ली में कूड़े के निस्तारण और अवैध रूप से फैंके जा रहे कूड़े के मुद्दे, सीलिंग के मुद्दे पर सत्ता पक्ष को विपक्ष घेर सकता है। कई कार्यों से हम चुनाव जीतेंगे: योगेश वर्मा सत्ता पक्ष से निगम के केशवपुरम वार्ड से पार्षद और निगम की शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने कहा कि हम चुनाव की घोषणा का स्वागत करते हैं। सितंबर महीने में दिल्ली के नागरिकों के लिए ग्रेटर कैलाश, पंजाबी बाग में नई मल्टी लेवल कार पार्किंग को शुरू किया। इसके अलावा रिहायशी इलाकों में स्पा सेंटरों को संचालन न करने समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। गोयला डेयरी समेत कई स्थानों पर बायोगैस सीएनजी प्लांट जैसे कार्य शुरू हो गए। इन सब कार्यों को लेकर हमें उम्मीद है कि हम मजबूती से सभी वार्डों में चुनाव की जीत दर्ज करेंगे।