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नोएडावासियों के लिए बड़ी सौगात: भंगेल एलिवेटेड रोड जल्द होगी शुरू

नोएडा  भंगेल एलिवेटेड रोड और सेक्टर-95 में स्थित नोएडा जंगल ट्रेल पार्क के अक्तूबर में शुरू होने की उम्मीद है. ये दोनों परियोजनाएं शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और इनका लोकार्पण लोगों के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक होगा. हाल ही में शासन ने नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजकर लोकार्पण और शिलान्यास के लिए विभिन्न परियोजनाओं की सूची मांगी है. इससे यह स्पष्ट होता है कि शासन इन परियोजनाओं की प्रगति पर ध्यान दे रहा है, लेकिन इस महीने इनका लोकार्पण होने की संभावना कम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का शुभारंभ करने ग्रेटर नोएडा आएंगे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे. उनके 24 सितंबर को ग्रेटर नोएडा आने की संभावना है. यह ट्रेड शो 29 सितंबर तक चलेगा और इस दौरान कई परियोजनाओं का लोकार्पण भी किया जा सकता था. हालांकि, शुक्रवार को मुख्यमंत्री और उनकी टीम ने अगले सप्ताह किसी परियोजना के लोकार्पण या शिलान्यास कार्यक्रम के लिए हरी झंडी नहीं दी. इससे यह संकेत मिलता है कि भले ही परियोजनाएं तैयार हैं, लेकिन उनका लोकार्पण अभी टल सकता है.

शादी में नुकसान पहुंचाने पर पत्नी ने पति की प्रेमिका से मांगा हर्जाना

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया है कि अगर किसी तीसरे व्यक्ति ने जानबूझकर हस्तक्षेप करके शादी को नुकसान पहुंचाया है, तो जीवनसाथी उस प्रेमी/प्रेमिका पर हर्जाने के लिए मुकदमा कर सकता है। यह फैसला तब आया जब कोर्ट ने एक मामले में समन जारी किया, जिसमें एक पत्नी ने अपने पति की कथित प्रेमिका से 'एलियनएशन ऑफ अफेक्शन' (Alienation of Affection) के लिए 4 करोड़ का हर्जाना मांगा है। 'एलियनएशन ऑफ अफेक्शन' (AoA) एक 'टॉर्ट' (Tort) है, जिसका अर्थ है 'सिविल गलती' या 'दीवानी दोष'। यह कानून पुरानी एंग्लो-अमेरिकन कॉमन लॉ व्यवस्था से आया है। यह किसी जीवनसाथी को उस तीसरे पक्ष से पैसों का मुआवज़ा मांगने की अनुमति देता है, जिस पर शादी तोड़ने या प्यार और स्नेह को खत्म करने का आरोप है। इन 'हार्ट बाम' टॉर्ट्स (विवाहित जीवन को भावनात्मक नुकसान पहुंचाने वाले कानूनी दावे) को भारत के किसी भी कानून में संहिताबद्ध (Codified) नहीं किया गया है। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने अपने आदेश में कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम समेत भारत के वैवाहिक कानून, परिवार अदालत (Family Court) में किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ कोई कानूनी उपचार (Remedy) नहीं देते हैं। इसलिए, उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में, गलत हस्तक्षेप से हुए नुकसान के लिए सिविल कोर्ट में मुआवजे का दावा सुना जा सकता है। यह दंपति 2012 में शादी के बंधन में बंधे थे और 2018 में उनके जुड़वां बच्चे हुए। आरोपी प्रेमिका पति की कंपनी में विश्लेषक (Analyst) के रूप में शामिल हुई और यह जानने के बावजूद कि वह शादीशुदा था, उसके साथ घनिष्ठ संबंध बना लिया। 2023 में पति ने क्रूरता (Cruelty) के आधार पर तलाक के लिए अर्जी दी, जिसके बाद पत्नी ने इसी साल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रेमिका से हर्जाना (Damages) मांगा। पत्नी का पक्ष रखते हुए वकील मालविका राजकोटिया ने कहा कि पत्नी ने तर्क दिया कि उसे अपने पति के प्यार और साथ (Affection and Companionship) का अधिकार था, जिसे जानबूझकर उससे छीन लिया गया। पति के वकील प्रभजीत जौहर ने कहा कि इस मुकदमे का विरोध करते हुए कहा कि व्यभिचार (Adultery) का मामला पहले से ही फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है और सिविल कोर्ट का यह केस तलाक की कार्यवाही के खिलाफ केवल एक 'जवाबी हमला' है। प्रेमिका पक्ष के वकील केसी जैन ने मुकदमे की वैधता को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि यह केस एक ही मुद्दे पर समांतर कार्यवाही शुरू करने जैसा है। उन्होंने आगे यह भी तर्क दिया कि वह महिला (पत्नी) उनसे हर्जाना नहीं मांग सकती, क्योंकि पुरुष के साथ बातचीत न करने या संबंध न बनाने की उन पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी। कोर्ट ने इस बात से असहमति जताई और कहा कि तलाक की कार्यवाही चल रही होने के बावजूद भी हर्जाने (Damages) के लिए सिविल दावा करने से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस कौरव ने कहा, "न तो हिंदू विवाह अधिनियम और न ही कोई अन्य वैवाहिक कानून किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ कोई कानूनी उपचार (Remedy) प्रदान करता है।" उन्होंने आगे कहा, "कानूनी रोक (Statutory Bar) न होने की स्थिति में, एक जीवनसाथी तीसरे पक्ष के कथित हस्तक्षेप के लिए सिविल कोर्ट में हर्जाना मांग सकता है।" कोर्ट ने कहा, "यहां, याचिका में एक तीसरे पक्ष की सिविल गलती (Third-Party Tort) का दावा किया गया है और उस गलती के लिए आर्थिक मुआवजा मांगा गया है। ऐसा दावा पूरी तरह से सामान्य सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि केवल फैमिली कोर्ट के। समांतर वैवाहिक कार्यवाही (तलाक का केस) चल रही हो, तब भी यह अलग से दायर किया गया हर्जाने का सिविल मुकदमा रुकावट नहीं बनेगा।" फैसले में यह भी कहा गया कि निजी स्वतंत्रता, जिसमें रिश्ते को समाप्त करना या बदलना शामिल है, अपराध नहीं है, लेकिन इसके नागरिक परिणाम (Civil Consequences) हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा, "जब एक जीवनसाथी शादी टूटने से कानूनी नुकसान का दावा करता है, तो कानून यह मानता है कि उस नुकसान को पहुँचाने वालों से मुआवज़ा मांगा जा सकता है।" अमेरिकी न्यायविद वेस्ली न्यूकॉम्ब होहफेल्ड का हवाला देते हुए कोर्ट ने आगे कहा,"अगर किसी जीवनसाथी का वैवाहिक साथ, अंतरंगता और साहचर्य (Marital Consortium, Intimacy, and Companionship) में एक संरक्षित हित है, तो तीसरे पक्ष का यह कर्तव्य है कि वह जानबूझकर और गलत तरीके से हस्तक्षेप न करे। हालांकि, इसी समय, जीवनसाथी को व्यक्तिगत चुनाव करने की स्वतंत्रता भी बरकरार रहती है। जहां जीवनसाथी का आचरण पूरी तरह से स्वैच्छिक और गैर-मजबूर होता है (यानी, वह अपनी मर्जी से संबंध बनाता है), वहां उसकी यह स्वतंत्रता तीसरे पक्ष की देनदारी (Liability) को खत्म कर देगी।"  

फूड चेन कंपनियों को चेतावनी: नवरात्रि में नॉन-वेज न परोसें – BJP विधायक कर्नैल सिंह

दिल्ली  दिल्ली के शकूरबस्ती से BJP विधायक कर्नैल सिंह ने राजधानी और एनसीआर की बड़ी फूड चेन कंपनियों से खास अपील की है. उन्होंने इन कंपनियों को पत्र लिखकर कहा है कि 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलने वाले नवरात्रि पर्व के दौरान अपने आउटलेट्स पर नॉन-वेज खाने की बिक्री बंद करें. कर्नैल सिंह, दिल्ली BJP की मंदिर सेल के प्रमुख भी हैं. उनका कहना है कि यह कदम धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए जरूरी है. बीजेपी विधायक ने चिट्ठी में लिखा कि नवरात्रि हिंदू समाज के लिए एक गहरा धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व रखता है. इस दौरान लोग मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और खास नियम मानते हैं. ऐसे में उम्मीद है कि फूड आउटलेट्स इस परंपरा का सम्मान करेंगे और इन नौ दिनों तक नॉन-वेज सर्व नहीं करेंगे.

यात्रियों के लिए चेतावनी: साइबर हमलों के खतरे के बीच यूरोपीय उड़ानों पर असर

दिल्ली  दिल्ली हवाई अड्डे ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की। एक तृतीय-पक्ष सेवा प्रदाता पर साइबर हमले के बाद प्रमुख यूरोपीय हवाई अड्डों पर चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम प्रभावित हुए हैं। दिल्ली एयरपोर्ट एडवाइजरी में यात्रियों से अपडेट के लिए अपनी एयरलाइनों से संपर्क करने को कहा गया है। एडवाइजरी में कहा गया है कि लंदन, हीथ्रो सहित यूरोपीय हवाई अड्डों पर साइबर हमलों के कारण, दिल्ली हवाई अड्डे से आने-जाने वाली यूरोप जाने वाली उड़ानों में कुछ व्यवधान आ सकते हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे उड़ान संबंधी नवीनतम अपडेट के लिए अपनी संबंधित एयरलाइनों से संपर्क करें। एयर इंडिया ने भी शनिवार को साइबर हमले के कारण एक यात्रा एडवाइजरी जारी की। एयर इंडिया ने लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर तृतीय-पक्ष यात्री प्रणाली में व्यवधान के संबंध में एक बयान जारी किया है, जिसमें यात्रियों को चेक-इन प्रक्रिया में संभावित देरी की चेतावनी दी गई है। एयरलाइन के ट्वीट के अनुसार, लंदन में ग्राउंड टीमें असुविधा को कम करने के लिए काम कर रही हैं। एक्स पर पोस्ट किए गए एक अपडेट में, एयर इंडिया ने कहा कि हीथ्रो में थर्ड-पार्टी पैसेंजर सिस्टम में व्यवधान के कारण चेक-इन प्रक्रिया में देरी हो सकती है। लंदन में हमारी ग्राउंड टीमें असुविधा को कम करने के लिए काम कर रही हैं। आज लंदन से हमारे साथ उड़ान भरने वाले यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे हवाई अड्डे पर पहुँचने से पहले अपना वेब चेक-इन पूरा कर लें ताकि एक सुचारू अनुभव सुनिश्चित हो सके। यह सलाह ऐसे समय में जारी की गई है जब ब्रसेल्स, लंदन हीथ्रो और बर्लिन सहित प्रमुख यूरोपीय हवाई अड्डों पर चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम के लिए जिम्मेदार एक ही सेवा प्रदाता पर साइबर हमले के बाद उड़ानों में देरी और रद्दीकरण का सामना करना पड़ रहा है। ब्रसेल्स हवाई अड्डे ने पुष्टि की है कि शुक्रवार देर रात हुए हमले के कारण स्वचालित सिस्टम ऑफलाइन हो गए थे, जिससे केवल मैन्युअल चेक-इन और बोर्डिंग ही संभव हो पाई। हवाई अड्डे ने एक बयान में कहा कि शुक्रवार, 19 सितंबर की रात चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम के सेवा प्रदाता पर एक साइबर हमला हुआ, जिससे ब्रसेल्स हवाई अड्डे सहित कई यूरोपीय हवाई अड्डे प्रभावित हुए। इसमें आगे कहा गया है कि प्रदाता इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इसने यात्रियों से हवाई अड्डे पर जाने से पहले एयरलाइनों से उड़ान की स्थिति की जांच करने का आग्रह किया, और शेंगेन उड़ानों के लिए दो घंटे पहले और अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान के लिए तीन घंटे पहले आगमन की सलाह दी। लंदन हीथ्रो हवाई अड्डे ने कहा कि कई एयरलाइनों को चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम प्रदान करने वाली वैश्विक कंपनी कॉलिन्स एयरोस्पेस, इस व्यवधान से जुड़ी एक तकनीकी समस्या का सामना कर रही है। 

गोबर से सोना: नंगली डेयरी में शुरू हुआ 200 टन का बायोगैस प्लांट

दिल्ली  नजफगढ़ के नंगली सकरावती में शनिवार को सीएम रेखा गुप्ता ने गोबर बायोगैस प्लांट का उद्घाटन किया। प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 200 टन गोबर ट्रीट करने की है। इस दौरान वेस्ट दिल्ली सांसद कमलजीत सहरावत, दिल्ली सरकार में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, एमसीडी मेयर राजा इकबाल सिंह, एमसीडी कमिश्नर अश्विनी कुमार भी मौजूद रहे। सीएम ने कहा कि यह दिल्ली का पहला ऐसा गोबर बायोगैस प्लांट है, जिसमें डेयरी ओनर्स गोबर से पैसे भी कमा सकते हैं। गोबर की कीमत प्रति किलो 65 पैसे तय की गई है। नालियों में न जाए गोबर सीएम ने कहा कि नंगली डेयरी में यह पहला बायोगैस प्लांट है, जो 2.72 एकड़ एरिया में बना है। गोबर से गैस बनाने के लिए प्लांट में तीन डाइजेस्टर लगे हैं। एक डाइजेस्टर 27 मीटर चौड़ा और 12 मीटर ऊंचा है। बाकी दो डाइजेस्टर में से एक 18 मीटर चौड़ा और 12 मीटर ऊंचा है। इस प्लांट के निर्माण का खास मकसद यह है कि यहां जितनी भी डेयरियां हैं, उनका गोबर नालियों में न जाए। यमुना की सफाई का नया आयाम बनेगा। नांगली डेयरी में करीब 13,000 और ककरौला डेयरी में करीब 7,000 मवेशी हैं। अनुमान है कि एक दिन में एक मवेशी से 10 किलो गोबर निकलता है। इस हिसाब से 20,000 मवेशियों से 200 टन गोबर प्राप्त होगा। इतनी लागत से बना प्लांट एमसीडी कमिश्नर अश्विनी कुमार ने कहा कि घोघा डेयरी में एक और नया बायोगैस प्लांट का उद्घाटन जल्द होगा। इसके अलावा दिल्ली में दो और नए बायोगैस प्लांट बनाने की योजना है। नंगली डेयरी के प्लांट की लागत 16 करोड़ रुपये है। इस प्लांट से रोजाना करीब 14,000 घन मीटर कच्ची गैस (सीएनजी) और 5.6 टन बायोगैस का निर्माण होगा। इसे एमसीडी आईजीएल को उपलब्ध कराएगी। आशीष सूद, कमलजीत सहरावत और राजा इकबाल सिंह ने कहा कि बायोगैस प्लांट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हरित क्रांति का परिणाम है। इस प्लांट से क्या होगा फायदा? दिल्ली में वैध डेयरियों की संख्या तो कम है, लेकिन अवैध डेयरियां काफी है। सभी डेयरियों को मिलाकर रोजाना सैकड़ों टन गोबर निकलता है। इतने बड़े पैमाने में निकलने वाले गोबर के निस्तारण के लिए इसके पहले कोई व्यवस्था नहीं थी। गोबर गैस प्लांट के बनने के बाद एक तो उन इलाकों में सफाई व्यवस्था बेहतर होगी। दूसरा, यह बायोगैस प्लांट यमुना की सफाई में काफी मददगार साबित होगा। क्योंकि ज्यादातर डेयरियों का गोबर नालों के जरिए यमुना में जाता है।

GST में बड़े बदलाव की तैयारी? पीएम मोदी आज करेंगे देश को संबोधित

दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 5 बजे देश को संबोधित करेंगे. माना जा रहा है कि पीएम मोदी जीएसटी सुधारों पर जानकारी दे सकते हैं. इसके साथ ही कल यानी 22 सितंबर से नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है, इसे लेकर भी पीएम मोदी चर्चा कर सकते हैं. हालांकि, उनके संबोधन को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. बता दें कि सरकार ने GST 2.0 के तहत कई उत्पादों पर जीएसटी की दरों में कमी की है. अब सिर्फ 2 जीएसटी स्‍लैब 5% और 18% ही रखे गए हैं, जबकि 12 फीसदी और 28 फीसदी टैक्‍स स्लैब को खत्‍म कर दिया गया है. 12 फीसदी स्‍लैब में शामिल ज्‍यादातर प्रोडक्‍ट्स को 5 फीसदी स्लैब की कैटेगरी में रखा गया है, जबकि 28 फीसदी वाले ज्‍यादातर प्रोडक्‍ट्स को 18% वाले स्‍लैब में रखा गया है. वहीं कुछ चीजों पर जीएसटी रेट को शून्‍य कर दिया गया है. इसका मतलब है कि 22 सितंबर के बाद इन प्रोडक्‍ट्स पर '0' जीएसटी लागू होगा, जिससे ये सभी चीजें बेहद सस्ती हो जाएंगी. पीएम मोदी का ये संबोधन ऐसे समय में हो रहा है, जब पिछले कुछ महीनों में अमेरिका के साथ भारत के संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं. इसका कारण अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद पर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना है, जिसमें 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है.  साथ ही ट्रंप प्रशासन ने नए एच-1बी वीज़ा आवेदनों पर सालाना शुल्क बढ़ाकर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) कर दिया है, जिससे भारतीयों खासकर एच-1बी धारकों में चिंता और अस्थिरता फैल गई है.  हालांकि ट्रंप प्रशासन ने कहा कि एच-1बी वीज़ा पर नया 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क केवल नए आवेदनों पर लागू होगा. मौजूदा वीज़ा धारकों को यह भुगतान नहीं करना पड़ेगा. साथ ही जो वीज़ा धारक वर्तमान में अमेरिका से बाहर हैं, उन्हें अमेरिका में लौटने के लिए भी यह शुल्क नहीं देना होगा. टैरिफ और एच-1बी वीज़ा पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर की भारी फीस के अमेरिकी फैसले का अप्रत्यक्ष रूप से जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को कहा था कि भारत का सबसे बड़ा विरोधी अन्य देशों पर उसकी निर्भरता है. उन्होंने सेमीकंडक्टर से लेकर जहाज निर्माण तक के क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की बात कही.

न्यायालय की दखल से खुला रास्ता, पैरा एथलीट को मिली चैंपियनशिप में खेलने की मंजूरी

दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट के दखल की वजह से एक एथलीट वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग ले पाएगा। यह चैंपियनशिप 22 सितंबर से नई दिल्ली में शुरू हो रही है। पैरा ओलिंपिक कमिटी ऑफ इंडिया की चूक की वजह से इस खिलाड़ी का नाम चैंपियनशिप के लिए चुने गए एथलीटों की सूची में नहीं आ पाया था। निकल चुकी लास्ट डेट जस्टिस सचिन दत्ता ने 18 सितंबर को श्रवण कुमार की याचिका पर पारित आदेश में कहा कि वैसे तो एथलीटों की लिस्ट जमा करने की अंतिम तारीख पहले ही निकल चुकी है। पर, यह देखते हुए कि यह इवेंट नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है, उम्मीद है कि संबंधित आयोजन समिति वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भागीदारी के मकसद से याचिकाकर्ता का नाम शामिल कराने के लिए गंभीर प्रयास करेगी। कोर्ट ने कमिटी को दिए निर्देश कोर्ट ने पैरा ओलंपिक कमिटी ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि वह संबंधित इंटरनेशनल बॉडी के साथ इस मामले को सख्ती से आगे बढ़ाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि याचिकाकर्ता का नाम आगामी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम में शामिल हो। केंद्र से भी इसमें मदद की उम्मीद जताई गई है। मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष एडवोकेट स्वास्तिक सिंह ने रखा तो केंद्र और अन्य प्रतिवादियों के लिए एडवोकेट रुचिर मिश्रा और नवीन कुमार चौधरी पेश हुए। इस कारण से नहीं अपडेट हुआ खिलाड़ी का नाम याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि उक्त चैंपियनशिप के लिए चुने गए खिलाड़ियों की सूची से उसके नाम को गलत तरीके से बाहर कर दिया गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पैरा ओलिंपिक कमिटी ऑफ इंडिया ने डिस्कस थ्रो कैटिगरी में उसकी रैंकिंग नहीं भेजी जिसकी वजह से वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स बॉडी ने याचिकाकर्ता की रैंकिंग अपडेट नहीं की। यह चैंपियनशिप 22 सितंबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक चलेगी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दी दलील 2025 दलील दी गई कि याचिकाकर्ता ने 7वीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में 41.34 मीटर का थ्रो किया, जो तय मिनिमम एलिजिबिलिटी स्टैंडर्ड (एमईएस) 29.80 मीटर से काफी ज्यादा है। प्रदर्शन-आधारित एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करने के बावजूद, याचिकाकर्ता को आगामी वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए नहीं चुना गया ।

राजधानी में बढ़ी महिला कामगारों की भागीदारी, मजदूरी असमानता दूर करने की तैयारी

दिल्ली  दिल्ली में बीते कई साल के मुकाबले महिला कामगारों की आबादी में इजाफा हुआ है लेकिन मजदूरी पुरुषों से कम है। दिल्ली सरकार की दिल्ली राज्य फ्रेमवर्क इंडिकेटर रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की श्रम बल भागीदारी बढ़ी है लेकिन उनकी दैनिक मजदूरी पुरुषों से कम बनी हुई है। यह रिपोर्ट सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) की प्रगति पर नजर रखने के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स ने जारी की है। दिल्ली राज्य फ्रेमवर्क इंडिकेटर रिपोर्ट सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स की स्थिति पर आधारित है और हाल ही में अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय ने इसे जारी किया है। रिपोर्ट दिखाती है कि 2017-18 में महिलाओं और पुरुषों की श्रम बल भागीदारी दर का अनुपात 0.19 था। यह आंकड़ा 2023-24 में बढ़कर 0.28 हो गया। यह वृद्धि सकारात्मक है लेकिन 0.28 का अनुपात यह भी दिखाता है कि लैंगिक असमानता अभी बनी हुई है। इसके अतिरिक्त रिपोर्ट दिखाती है कि महिला श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 में 11.2 फीसदी थी, 2023-24 में बढ़कर 14.5 फीसदी हो गई। यह 2018-19 में 13.7 फीसदी, 2019-20 में 12.8 फीसदी, 2020-21 में 10.7 फीसदी, 2021-22 में 9.4 फीसदी और 2022-23 में 11.3 फीसदी थी। मजदूरी के आंकड़े चिंताजनक गैर-सार्वजनिक कामों में 2017-18 की जुलाई-सितंबर तिमाही में पुरुषों को 403 रुपये हर दिन और महिलाओं को 300 रुपये मिल रहे थे। 2017-18 की अप्रैल-जून तिमाही में पुरुषों को 376 रुपये हर दिन व महिलाओं को 400 हर दिन, 2023-24 में पुरुषों को 556 रुपये हर दिन व महिलाओं को 500 रुपये हर दिन मिल रहे थे। 2023-24 में यह 548 और 500 रुपये मिल रहा था। इसमें दिखता है कि महिलाओं की मजदूरी बढ़ी लेकिन मजदूरी का अंतर 48 से 100 रुपये का बरकरार है। पेशेवर क्षेत्र में महिलाओं की संख्या घटी पेशेवर और तकनीकी क्षेत्र में महिला कामगारों की संख्या घटी है। इस क्षेत्र में 2020-21 में महिलाओं का अनुपात 28.5 फीसदी था, जोकि 2022-23 में 21.3 फीसदी रह गया है। रिपोर्ट में महिलाओं के आर्थिक संसाधनों में हिस्सेदारी का मूल्यांकन किया गया है। इसमें जमीन, संपत्ति, बैंक सेवाएं, उत्तराधिकार और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण को शामिल किया है। लेकिन इसमें ये भी कहा गया है कि महिला कामगारों के लिए दिल्ली सरकार कानूनों में सुधार कर रही है।

पीएम पर केंद्रित विशेष गैलरी: दिल्ली विधानसभा में विभिन्न भाषाओं की किताबों का संग्राहलय

दिल्ली  विधानसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखे साहित्य पर सबसे बड़ी किताब गैलरी बनाई गई है। ये पीएम के प्रेरक जीवन, शासनकाल, उपलब्धियों को एक छत के नीचे समेटे हुए है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सेवा पखवाड़े के तहत इस गैलरी का उद्घाटन किया। दो अक्तूबर तक आम नागरिकों के लिए गैलरी खुली रहेगी। ये युवाओं व शोधकर्ताओं के पास पीएम के विजन से प्रेरणा लेने का खास मौका है। शीर्षक अपने प्रधानमंत्री को जानें किताब गैलरी पीएम के जीवन, शासन व भारत को विकसित बनाने के उनके संकल्प को समर्पित की गई है। विधानसभा पुस्तकालय में इसके लिए खास गैलरी बनाई गई है। इसके उद्घाटन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट और कई विधायक मौजूद रहे। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह गैलरी पीएम की प्रेरक यात्रा को एक पुस्तकालय में समेटने का अनोखा प्रयास है। यह न केवल उनकी उपलब्धियों को दर्शाती है बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। विज्ञापन 200 से ज्यादा खास किताबें विजेंद्र ने कहा कि यह एक जीवंत दस्तावेज है जो पीएम के विजन और भारत के विकास की कहानी बयां करती है। इस संग्रह को समय के साथ और समृद्ध बनाएंगे। ये छात्रों, शोधकर्ताओं और विधायकों के लिए उपयोगी है। गैलरी में पीएम की लिखी और उनके जीवन पर आधारित करीब 200 से ज्यादा खास किताबें हैं। इनमें एग्जाम वारियर्स, मोदी एट द रेट 20, मन की बात एट द रेट 100, ज्योतिपुंज, सामाजिक समरसता और द मोदी इफैक्ट जैसी किताबें शामिल हैं। ये किताबें देशभर से जुटाई गई हैं और कई भाषाओं में उपलब्ध हैं। अगर दिल्लीवासियों के पास पीएम पर लिखी कोई किताब है तो उसे इस गैलरी में जोड़ा जाएगा।

छात्र राजनीति में करारी हार: NSUI की नाकामी से कांग्रेस के लिए दिल्ली अब भी दूर

नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के नतीजों से संकेत मिला है कि राजधानी की राजनीति में कांग्रेस की वापसी की राह अभी लंबी है। एबीवीपी की प्रचंड जीत और एनएसयूआई की कमजोर मौजूदगी से कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली छात्र राजनीति उससे लगभग पूरी तरह छिन चुकी है। इस बार कांग्रेस का छात्र संगठन केवल उपाध्यक्ष पर पर ही जीत सका, जबकि गत वर्ष वह अध्यक्ष व संयुक्त सचिव पद जीतने में सफल हो गया था। डूसू में कभी निर्णायक भूमिका निभाने वाली एनएसयूआई लगातार हाशिये पर जा रही है। इस बार के चुनाव में भी वह छात्रों के बीच प्रभावशाली प्रदर्शन करने में नाकाम रही। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल चुनावी नतीजे नहीं, बल्कि दिल्ली की जमीनी राजनीति का संकेत भी है।  छात्र राजनीति से ही भविष्य के नेता तैयार होते हैं और कांग्रेस के लिए लोकसभा, विधानसभा व एमसीडी चुनाव के बाद इस मोर्चे पर लगातार पराजय चिंता का विषय है। एनएसयूआई की लगातार हार से स्पष्ट है कि कांग्रेस का संगठन युवाओं के बीच पकड़ बनाने में असफल रहा है। दिल्ली में लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान छात्र राजनीति उसका महत्वपूर्ण सहारा हुआ करती थी। विश्वविद्यालय की राजनीति से ही कांग्रेस ने कई मजबूत चेहरे तैयार किए, लेकिन पिछले एक दशक में उसका यह आधार तेजी से कमजोर हो रहा है। इस पराजय का असर  आने वाले एमसीडी चुनाव में भी देखा जा सकता है। एनएसयूआई के पास    न तो प्रभावी नेतृत्व दिख रहा है न ही कैंपस में सक्रिय संगठनात्मक  ताकत है।  राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने समय रहते अपनी छात्र इकाई को पुनर्जीवित करने और युवाओं से जुड़ने की ठोस रणनीति नहीं बनाई तो दिल्ली की राजनीति में उसकी स्थिति सुधरनी मुश्किल है।  ‘आरएसएस-भाजपा के खिलाफ बहादुरी से लड़े’ एनएसयूआई ने कहा कि आरएसएस-भाजपा और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। डूसू चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर राहुल झांसला ने जीत हासिल की है। यह जीत एक कठिन संघर्ष के बाद मिली है। एनएसयूआई ने केवल एबीवीपी का ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, आरएसएस-भाजपा और दिल्ली पुलिस जैसी संयुक्त ताकतों का भी डटकर मुकाबला किया। एनएसयूआई के अनुसार भारी पैमाने पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के बावजूद हजारों छात्रों ने एनएसयूआई और उसके उम्मीदवारों का मजबूती से साथ दिया। एनएसयूआई अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि हमें अपने उम्मीदवारों पर गर्व है जिन्होंने यह चुनाव साहस और ईमानदारी के साथ लड़ा। आरएसएस-भाजपा समर्थित एबीवीपी ने चुनाव अधिकारियों की मदद से ईवीएम में गड़बड़ी और प्रोफेसरों को शामिल कर चुनाव चोरी करने की शर्मनाक कोशिश की। अदालत ने विजय जुलूस पर लगा दी थी रोक  अदालत ने अपने 17 सितंबर के आदेश में दिल्ली विश्वविद्यालय के उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को डूसू चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय राजधानी में कहीं भी विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता, अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने पीठ के सामने कई तस्वीरें और समाचार रिपोर्ट साझा कीं और न्यायिक आदेश और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन का दावा किया।