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पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क पर कार्रवाई, पंजाब में 5 आरोपी गिरफ्तार, 15 संदिग्धों पर नजर

जालंधर. पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार तीन युवकों से पूछताछ और काल डिटेल रिकार्ड तथा डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल कर पुलिस ने 15 से अधिक ऐसे लोगों को चिन्हित किया है, जो पिछले कुछ समय से आरोपितों के लगातार संपर्क में थे। इनमें आरोपितों के रिश्तेदार, करीबी परिचित और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। संदिग्धों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उनकी तलाश में पंजाब के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों में छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन लोगों का जासूसी नेटवर्क से कोई संबंध था या नहीं। इसी कड़ी में पांच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल हिरासत में लिए गए आरोपितों के मोबाइल से कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिली हैं। पुलिस आरोपितों के बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और विदेशी नंबरों से संपर्क की भी जांच कर रही है। यदि किसी बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो और गिरफ्तारियां संभव हैं। बता दें कि हाल ही में गिरफ्तार किए गए आरोपितों में सचिन खोसला, भारत वर्मा उर्फ सन्नी और प्रदीप सिंह शामिल हैं, जो पाकिस्तान में गैंग्सटर शहजाद भट्टी और हमास गुज्जर के संपर्क में थे। आरोपित सरकारी कार्यालयों और संवेदनशील स्थानों से सूचनाएं जुटाकर पाकिस्तान भेज रहे थे। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए हैं।

सुखना झील मानसून के लिए तैयार, गाद हटाने का काम पूरा, पर्यटकों को मिलेगा बेहतर अनुभव

चंडीगढ़. सुखना झील की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने रेगुलेटरी एंड पर चल रहे डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) अभियान के तहत करीब 34 हजार घनमीटर मिट्टी की खुदाई का लक्ष्य पूरा कर लिया है। हालांकि मानसून आने तक यह कार्य जारी रहेगा। मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि डी-सिल्टिंग परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आईआईटी रुड़की, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की तकनीकी सिफारिशों के आधार पर एक माह पहले झील के सूखे हिस्से में गाद हटाने का कार्य शुरू किया गया था। उन्होंने बताया कि रेगुलेटरी एंड पर लगभग 351 मीटर स्तर तक खुदाई की जा रही है। निकाली गई मिट्टी का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग झील के किनारों (तटबंधों) और पैदल मार्गों को मजबूत एवं ऊंचा करने में किया जा रहा है। कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए हुआ ये काम कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए चार चेन-माउंटेड एक्सकेवेटर, जेसीबी मशीनें और टिप्परों का बेड़ा लगाया गया है। विभाग का मानना है कि डी-सिल्टिंग और तटबंधों को मजबूत करने से झील की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों के लिए भी सुविधाएं बेहतर होंगी। सुखना झील में अंतिम बार डी-सिल्टिंग का कार्य चार वर्ष से अधिक समय पहले किया गया था। गर्मियों में सबसे पहले रेगुलेटरी एंड का हिस्सा सूखता है, जिससे इस क्षेत्र में गाद हटाने का कार्य संभव हो पाता है। गौरतलब है कि गाद जमने से झील की जल भंडारण क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए यूटी प्रशासन ने पिछले वर्ष डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से सुखना झील के समग्र विकास के लिए पांच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन योजना (इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान) तैयार की थी। इस योजना में जल स्तर बनाए रखने, जलीय जीवों के संरक्षण, झील की स्वच्छता, पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार तथा सौर ऊर्जा चालित नौकाओं की संख्या बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। करीब 565 एकड़ क्षेत्र में फैली सुखना वेटलैंड का कैचमेंट एरिया लगभग 10,395 एकड़ है। वर्ष 1988 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय वेटलैंड घोषित किया था। इसके कैचमेंट क्षेत्र में सुखना वन्यजीव अभयारण्य भी स्थित है। यदि चाहें तो इसे और संक्षिप्त कर फ्रंट पेज या सिटी पेज की अखबारी शैली में भी तैयार किया जा सकता है।

भगवंत मान की श्री अकाल तख्त साहिब में पेशी क्यों? जानिए क्या है अकाल तख्त और इसके प्रमुख अधिकार

चंडीगढ़  पंजाब के सीएम भगवंत मान श्री अकाल तख्त साहिब के सामने आज अपना पक्ष रखेंगे. वह पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष के साथ जाएंगे. मान एक वीडियो को लेकर विवाद पर हैं. उन पर गुरु द्रोही औ पंथ विरोधी होने के आरोप हैं. इसके अलावा पंजाब सरकार के ईशनिंदा से जुड़े एक अधिनियम को भी पंथ की सलाह के बिना पारित किए जाने से नाराजगी है।  अकाल तख्त के सामने भगवंत मान इससे पहले भी पेश हो चुके हैं, जब उन्होंने वीडियो को फर्जी बताया था. उन्होंने दावा किया था कि वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से बनाया गया है. हालांकि मामले की सुनवाई के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने 15 जून को एक आदेश जारी करते हुए मान को गुरुद्रोही और खालसा पंथ का विरोधी घोषित किया था. ऐसा दावा किया गया है कि फोरेंसिक जांच में वीडियो सही पाया गया है. इसीलिए पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों विधायकों को अकाल तख्त के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।  श्री अकाल तख्त साहिब क्या है? श्री अकाल तख्त साहिब सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था है.सरल शब्दों में कहें तो यह सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक और नैतिक अदालत है. यह अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में है और सिखों के पांच तख्तों में सबसे प्रमुख मानी जाती है. इसका अर्थ है अकाल का सिंहासन, जिसका उद्देश्य सिर्फ आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, यह समाज, न्याय और समुदाय से जुड़े मामलों में भी फैसला सुनाता है।  सिख नेट के मुताबिक जब गुरु हरगोबिंद के पिता और पांचवें सिख गुरु अर्जन देव को मुगल सम्राट जहांगीर ने शहीद करवाया तो उसके जवाब में गुरु हरगोबिंद ने इसकी स्थापना की थी. जब उन्होंने अकाल तख्त के मंच का अनावरण किया था तो उन्होंने दो तलवारें धारण की थीं. इनमें एक आध्यात्मिक शक्ति पीरी का संकेत देती थी ओर दूसरी सांसारिक शक्ति मीरी का. यह पीरी और मीरी दर्शन ही अकाल तख्त की आत्मा है. जो ये विचार देता है कि धर्म और न्याय अलग नहीं हैं. यानी एक हाथ में आस्था और दूसरे में अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति।  क्या करता है अकाल तख्त?     अकाल तख्त हुक्मनामा यानी धार्मिक आदेश जारी करता है. यह हुक्मनामा दुनिया भर के सिखों पर लागू होता है।      अकाल तख्त सिख हितों के लिए गलत बात करने वाला या हानिकारक कदम उठाने वाले को धार्मिक दंड दे सकती है।      तख्त किसी भी व्यक्ति की सेवा या उसके बलिदानों की सराहना भी कर सकता है जो सिख हितों के लिए काम करते हैं।      यह सिख समुदाय से जुड़े विवादों और महत्वपूर्ण मामलों पर मार्गदर्शन भी देता है।  जत्थेदार होता है अकाल तख्त का मुखिया अकाल तख्त का प्रमुख जत्थेदार ही उसका मुखिया होता है. जत्थेदार को ही दुनिया भर के सिखों का सर्वोच्च प्रवक्ता और प्रमुख माना जाता है. यह एक धार्मिक नेता की तरह होते हैं जिनसे अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें. वर्तमान में कुलदीप सिंह गरगज कार्यवाहक जत्थेदार हैं.इनकी नियुक्त शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से 2025 में की गई थी. हालांकि तकनीकी तौर पर अकाल तख्त एक स्वतंत्र धार्मिक संस्था है।  अकाल तख्त के सामने बुलाए जाने का अर्थ क्या? श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार अगर किसी को पेश होने का आदेश देते हैं तो यह एक तरह का धार्मिक समन है. जो आरेापी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका देता है. जो भी व्यक्ति इसकी अनदेखी करता है वह सिख समुदाय की नजर में अपनी विश्वसनीयता खो देता है. आरोपी अगर पेश होता है तो उसका पक्ष सुनकर अकाल तख्त फैसला करता है कि उसे क्लीनचिट देनी है या फिर प्रायश्चित का आदेश देना है. इसे तनखाह कहा जाता है. यह धार्मिक दंड है. आम तौर पर तनखाह में सेवा कार्य, सार्वजनिक माफी की सजा दी जाती है।  सुखबीर सिंह बादल को मिला था धार्मिक दंड श्री अकाल तख्त साहिब ने 2024 में पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया था. उन्हें तनखाह यानी धार्मिक सजा सुनाई गई थी. उन पर आरोप था कि 2007 से 2027 तक पंजाब की शिरोमणि अकाली दल सरकार में कुछ ऐसे फेसले हुए जिनसे पंथक हितों को नुकसान पहुंचा है. इसमें बेअदबी का माला भी शामिल था. सुखबीर सिंह बादल ने अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी. इसके बाद उने तनखाह सुनाई गई थी. उन्हें स्वर्ण मंदिर के बाद सेवादार की वर्दी पहनकर सेवा करनी पड़ी थी।  अकाल तख्त सबसे ऊपर क्यों? सिखों के पांच तख्त हैं. तख्त का अर्थ सिंहासन या सत्ता का आसन होता है. यह सिख धर्म का आध्यात्मिक और सांसारिक केंद्र है. पहला केंद्र श्री अकाल तख्त साहिब है, जो अमृतसर में है. दूसरा तख्त श्री केशगढ़ साहिब है जो आनंदपुर साहिब में है. तीसरा तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और चौथा तख्त श्री पटना साहिब तथा पांचवां तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ में है. अकाल तख्त सर्वोच्च इसलिए है, क्योंकि ये पहला तख्त है।   

पंजाब में बेअदबी कानून को लेकर बड़ा दिन, अकाल तख्त के समक्ष आज अपना पक्ष रखेगी सरकार

अमृतसर. आम आदमी पार्टी ने फैसला किया है कि सोमवार को पार्टी के सभी मंत्री व विधायक श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे। रविवार को पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान की उपस्थिति में पार्टी विधायकों व मंत्रियों की हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए बेअदबी कानून के प्रावधानों में संशोधन नहीं करने पर विधानसभा के सभी सिख विधायकों व पूरी कैबिनेट को 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने के लिए कहा था। रविवार को बैठक के बाद अरविंद केजरीवाल के साथ पत्रकारों से वार्ता करते हुए भगवंत मान कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब से जारी प्रत्येक आदेश का अक्षरशः पालन किया जाएगा। पार्टी के सभी मंत्री, विधायक तथा विधानसभा के स्पीकर, जिन्हें श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा तलब किया गया है, सोमवार को विनम्र सिख के रूप में सरकार की स्थिति स्पष्ट करेंगे तथा अपना पक्ष रखेंगे। वीडियो से संबंधित विवरण भी श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपेंगे इसके अलावा उनकी नकल करने वाले व्यक्ति के फर्जी वीडियो से संबंधित समस्त विवरण भी श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपेंगे। मान ने कहा कि उन्हें पेश होने के लिए कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 70 वर्ष पुराने "नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम, 1956" को निरस्त करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री ने कहा, "महाराष्ट्र सरकार को सिख कौम के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। महाराष्ट्र की भाजपा सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जिनसे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हों। राजनीति और धर्म दोनों अलग-अलग विषय हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए। 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने दिया था करार उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के कथित वीडियो को लेकर 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने गुरु व पंथ दोखी (गुरु व पंथ के दोषी) करार दिया था। इसी कारण मान को पेश होने के लिए नहीं कहा गया है। मान ने कहा कि एसजीपीसी ने अब गुरुद्वारों के बाहर मेरे सामाजिक बहिष्कार के पोस्टर लगाने का आदेश दिया है। उन्होंने सवाल किया कि शिरोमणि अकाली दल अथवा सुखबीर बादल के खिलाफ ऐसे पोस्टर कभी क्यों नहीं लगाए गए, जबकि उन्होंने स्वयं बेअदबी की घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार की थी? मान ने कहा कि संगत समझदार है और जनता सर्वोच्च है। आरोप लगाया कि भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल मुझे धार्मिक रूप से बदनाम कर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं।

सिख धर्म के खिलाफ कथित टिप्पणी पर लुधियाना में निहंग सिंहों का प्रदर्शन, सड़क जाम

लुधियाना. महानगर में सोशल मीडिया पर सिख गुरु साहिबान और धर्म के खिलाफ कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक व गलत शब्दावली का इस्तेमाल करने वाले आरोपी चेतन शर्मा की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आज माहौल पूरी तरह गरमा गया। आरोपी की गिरफ्तारी न होने से रोष में आए निहंग सिंहों ने समराला चौक से बस्ती जोधेवाल जाने वाले मुख्य मार्ग पर सरेराह धरना देकर रोड को पूरी तरह जाम कर दिया। इस चक्का जाम के कारण हाईवे और आसपास के लिंक रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई। धरना प्रदर्शन कर रहे निहंग सिंहों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरोपी चेतन शर्मा ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गंभीर ठेस पहुंचाई है। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक उसकी आधिकारिक गिरफ्तारी नहीं की गई है। निहंग सिंहों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक पुलिस आरोपी को सलाखों के पीछे नहीं धकेलती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन शांत नहीं होगा। सड़क के बीचों-बीच लगे इस भारी जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निहंग सिंहों से बातचीत शुरू की। पुलिस द्वारा उन्हें लगातार समझाने-बुझाने और आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का भरोसा दिया जा रहा था ताकि बंद पड़े रास्ते को खुलवाया जा सके। हालांकि, खबर लिखे जाने तक दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ था और निहंग सिंहों का धरना सड़क पर लगातार जारी था। 

बारिश के इंतजार में पंजाब, बढ़ी उमस ने बढ़ाई मुश्किलें, कूलर-पंखे हुए बेअसर

अमृतसर. शहर में भीषण गर्मी एवं उमस ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सुबह से ही वातावरण में नमी अधिक होने के कारण लोग पसीने से तरबतर रहे। उमस के चलते घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों की अपेक्षा कम रही। दिनभर गर्म हवाओं के साथ उमस ने लोगों को बेहाल रखा। कूलर और पंखे भी राहत देने में नाकाम नजर आए, जबकि एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बढ़ने से बिजली की मांग में भी इजाफा हुआ। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, ओ.आर.एस. और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने, हल्के सूती कपड़े पहनने तथा धूप और उमस से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अत्यधिक उमस के कारण शरीर में पानी की कमी, थकान और हीट स्ट्रैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार 39 डिग्री तापमान नोट किया गया। वहीं अगले कुछ दिनों तक उमस भरा मौसम बने रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। मजदूर वर्ग के लिए इस समय काम करना बड़ा मुश्किल है।

पंजाब में बोर्ड छात्रों के लिए नया नियम, डिजिटल बर्थ सर्टिफिकेट जरूरी होते ही सेवा केंद्रों पर लंबी कतारें

लुधियाना. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा बोर्ड क्लासों के लिए डिजिटल बर्थ सर्टीफिकेट को अनिवार्य किया गया है, परंतु सेवा केंद्रों में यह सर्टीफिकेट न बन पाने के कारण विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूल संचालकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। परीक्षा फॉर्म और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के लिए यह दस्तावेज अति आवश्यक है लेकिन सेवा केंद्रों में जारी भारी रश के कारण इसे समय पर बनवाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। वर्तमान में पंजाब सरकार की ‘मुख्य मंत्री धीयां-भैणा सत्कार स्कीम’ के तहत लाभ लेने के लिए जाति सर्टीफिकेट और अन्य दस्तावेज बनवाने वाले आवेदकों की सेवा केंद्रों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इस योजना के कारण हर छोटे-बड़े सेवा केंद्र पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इस भारी भीड़ के कारण सेवा केंद्रों का पूरा स्टाफ और डिजिटल सिस्टम केवल स्कीम के दस्तावेज तैयार करने में व्यस्त है, जिसके चलते बोर्ड क्लासों के विद्यार्थियों के डिजिटल बर्थ सर्टीफिकेट नहीं बन पा रहे हैं। दिहाड़ी छोड़कर चक्कर काटने को मजबूर हैं अभिभावक डिजिटल सर्टीफिकेट न बनने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को झेलनी पड़ रही है। दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले अभिभावक अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी रोजाना की दिहाड़ी छोड़कर सुबह से ही सेवा केंद्रों के बाहर लंबी लाइनों में खड़े होने को मजबूर हैं। दिनभर इंतजार करने के बाद भी जब काऊंटरों पर उनका नंबर आता है, तो भारी रश या सर्वर डाऊन होने का हवाला देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है, जिससे विद्यार्थी और उनके अभिभावक लगातार मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। स्कूल संचालकों और अध्यापकों के सामने खड़ी हुई बड़ी समस्या शिक्षा बोर्ड के नियमों के मुताबिक बिना डिजिटल बर्थ सर्टीफिकेट के विद्यार्थियों के बोर्ड परीक्षाओं के रजिस्ट्रेशन फॉर्म और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन सबमिट नहीं किए जा सकते। स्कूल संचालकों और अध्यापकों का कहना है कि वे लगातार विद्यार्थियों को सर्टीफिकेट जमा करने के लिए कह रहे हैं लेकिन सेवा केंद्रों में सर्टीफिकेट न बनने के कारण वे भी बेबस नजर आ रहे हैं। यदि समय रहते ये डिजिटल सर्टीफिकेट बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड नहीं हुए, तो रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बड़ी समस्या आ सकती है।

NEET UG Re-Exam में 8 बोनस मार्क्स का ऐलान, आज ही दर्ज करें आपत्ति, फिर नहीं मिलेगा मौका

लुधियाना. नेशनल टेस्टिंग एजैंसी (एन.टी.ए.) द्वारा आयोजित की गई नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट आने से पहले ही विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है और परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों के 4 नंबर एडवांस में पक्के हो गए हैं। 21 जून को हुए री-एग्जाम की प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी गई है जिसमें फिजिक्स के एक सवाल को 'ड्रॉप' यानी हटा दिया गया है। इस हटाए गए सवाल के बदले परीक्षा में बैठने वाले सभी विद्यार्थियों को पूरे 4 बोनस नंबर दिए जाएंगे, भले ही किसी विद्यार्थी ने उस सवाल को हल करने की कोशिश की हो या नहीं। चूंकि यह परीक्षा एक ही शिफ्ट में हुई थी इसलिए देशभर के सभी 20 लाख विद्यार्थियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा फिजिक्स के ही एक अन्य सवाल के 2 जवाब सही पाए गए हैं। जिन विद्यार्थियों ने उन दोनों विकल्पों में से किसी एक को भी चुना होगा, उन्हें भी पूरे 4 नंबर मिलेंगे। इलैक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स और वर्नियर कैलिपर्स से जुड़े सवालों को लेकर आपत्ति दर्ज करवाई गई थी। विशेषज्ञ अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि उच्च स्तरीय तैयारियों के बावजूद री-एग्जाम के प्रश्नपत्र में भी ऐसी नौबत क्यों आई और क्या प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कोई बड़ी कमी रह गई थी। आपत्तियां दर्ज कराने का मौका एन.टी.ए. द्वारा जारी प्रोविजनल आंसर-की में यदि किसी विद्यार्थी को किसी सवाल के जवाब को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह उसे 28 जून तक चैलेंज कर सकता है। एक सवाल को चैलेंज करने की फीस 200 रुपए तय की गई है। अगर आपत्ति सही पाई जाती है, तो यह फीस वापस कर दी जाएगी। फाइनल आंसर-की आने के बाद ही साफ होगा कि क्या कोई और सवाल भी हटाया गया है। फिजिक्स के साथ-साथ कैमिस्ट्री, बायोलॉजी और जूलॉजी में भी कुछ सवालों के गलत होने की आशंका जताई जा रही है।

अकाली दल को बड़ा झटका, पूर्व विधायक दर्शन सिंह ने थामा वारिस पंजाब दे का दामन

लुधियाना. पंजाब की राजनीति में रविवार को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। शिरोमणि अकाली दल को उस समय बड़ा झटका लगा, जब गिल विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक दर्शन सिंह शिवालिक ने पार्टी छोड़कर वारिस पंजाब दे का दामन थाम लिया। एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर संगठन के प्रमुख नेता और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह तथा वरिष्ठ नेता मनप्रीत सिंह अयाली भी मौजूद रहे।पार्टी में शामिल होने के बाद दर्शन सिंह शिवालिक ने अपने फैसले के पीछे दो प्रमुख कारण बताए। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पंथ की रक्षा और उससे जुड़े मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाना भी उनके इस निर्णय का प्रमुख आधार है। कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं शिवालिक ने शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में लंबे समय से काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं और नेताओं को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे कई नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों के चलते उन्होंने अकाली दल छोड़ने का फैसला लिया। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने भी अकाली दल के वर्तमान नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल निजी हितों और स्वार्थों से ऊपर उठकर निर्णय लें तो अकाली दल के अलग-अलग धड़ों को दोबारा एकजुट किया जा सकता है। अयाली ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर मतभेदों का प्रमुख कारण नेतृत्व शैली और निर्णय लेने का तरीका रहा है। चुनौतियों को सामना कर रही अकाली दल अयाली के इस बयान को पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अकाली दल पहले ही कई नेताओं के अलग होने और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में गिल क्षेत्र से लंबे समय तक सक्रिय रहे पूर्व विधायक दर्शन सिंह शिवालिक का पार्टी छोड़ना संगठन के लिए एक और झटका माना जा रहा है। दर्शन सिंह शिवालिक का गिल विधानसभा क्षेत्र में अपना राजनीतिक आधार रहा है। ऐसे में उनके वारिस पंजाब दे में शामिल होने से स्थानीय स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आने वाले समय में इसका चुनावी और संगठनात्मक असर कितना होगा, यह राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। वारिस पंजाब दे कर रही संगठन विस्तार वारिस पंजाब दे लगातार अपने संगठन के विस्तार में जुटी हुई है और विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल के सामने संगठन को मजबूत बनाए रखने और कार्यकर्ताओं के विश्वास को कायम रखने की चुनौती बनी हुई है। दर्शन सिंह शिवालिक के इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीतिक हलचल और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अन्य नेता भी इसी तरह दल बदलते हैं, तो इसका असर प्रदेश की सियासी तस्वीर पर पड़ सकता है। फिलहाल, शिवालिक के वारिस पंजाब दे में शामिल होने और मनप्रीत सिंह अयाली के बयान ने पंजाब की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

AAP नेताओं की आज अकाल तख्त में पेशी, CM मान का बड़ा बयान- हर फैसला सिर माथे पर

अमृतसर. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा पार्टी के मंत्रियों और विधायकों को तलब किए जाने के मामले में अपना पक्ष सार्वजनिक किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट कहा कि पार्टी अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता का सम्मान करती है। इसलिए जिन मंत्रियों और विधायकों को बुलाया गया है, वे सभी निर्धारित समय पर श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष उपस्थित होंगे और मांगा गया लिखित जवाब भी सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि जो भी फैसला आएगा, उसे पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वीकार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब नहीं किया गया है, इसलिए सरकार का पक्ष पार्टी के मंत्री और विधायक रखेंगे। उन्होंने बताया कि कुछ मंत्रियों से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया है, जिसे वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सौंपेंगे। इस दौरान पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। सीएम मान का दावा- वीडियो फर्जी भगवंत मान ने उस कथित वायरल वीडियो का भी उल्लेख किया, जिसे इस पूरे विवाद का आधार बताया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वीडियो फर्जी है और उसे कृत्रिम तरीके से तैयार किया गया है। उनके अनुसार वीडियो में मास्क तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में पूरा पत्र और संबंधित वीडियो श्री अकाल तख्त साहिब को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार या पार्टी कभी भी श्री अकाल तख्त साहिब के साथ किसी प्रकार के टकराव की कल्पना भी नहीं कर सकती। उन्होंने दोहराया कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था है और उसके प्रति पूरा सम्मान बनाए रखा जाएगा। अनावश्यक विवाद बढ़ाया जा रहा मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर गुरुद्वारों के बाहर उनके विरोध में बोर्ड लगाए जा रहे हैं और उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब पूर्व मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को धार्मिक दंड सुनाया गया था, तब इस तरह का माहौल नहीं बनाया गया था। उनके अनुसार इस प्रकार की गतिविधियां अनावश्यक विवाद को बढ़ावा देती हैं। भगवंत मान ने कहा कि पंथक एकत्रीकरण बुलाने का अधिकार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पास है और वह अपने अधिकारों के अनुसार ऐसा कर सकती है। उन्होंने कहा कि सिख परंपरा में सबसे बड़ा सम्मान संगत को दिया गया है। उनका दावा था कि कई बार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधित गुरुद्वारों में उनके खिलाफ बोर्ड लगाए गए, लेकिन वहां पहुंचने पर संगत ने उन्हें सम्मान दिया। अमृतसर में बनेगा लव-कुश व माता जानकी का मंदिर इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अमृतसर में भगवान लव-कुश और माता जानकी के नाम पर एक भव्य मंदिर बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अमृतसर विश्व की सबसे पवित्र धार्मिक धरती में से एक है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग और उनके प्रमुख धार्मिक स्थल मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण की विस्तृत रूपरेखा और अन्य जानकारियां बाद में साझा की जाएंगी। अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में केवल छोटे स्तर के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि बड़े जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंची। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।