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अवैध खनन के खिलाफ मोर्चा: कैबिनेट मंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग, किसानों की बर्बादी पर जताया रोष

लुधियाना.  लुधियाना क्षेत्र में अवैध माइनिंग माफिया की सक्रियता ने स्थानीय किसानों और आम जनता की रातों की नींद उड़ा दी है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर डॉक्टर तेजपाल गिल ने अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध तरीके से की जा रही खुदाई के कारण न केवल उपजाऊ भूमि का क्षरण हो रहा है, बल्कि किसानों की तैयार फसलों को भी भारी क्षति पहुँच रही है। माफिया द्वारा की जाने वाली अनियंत्रित माइनिंग ने कृषि प्रधान क्षेत्र के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। सरकारी संपत्ति को पहुँच रहा भारी नुकसान अवैध खनन का प्रभाव केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हो रहा है। डॉक्टर गिल के अनुसार, भारी वाहनों की आवाजाही और अनियंत्रित खुदाई के कारण आसपास की सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की स्थिति जर्जर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया निजी लाभ के लिए सार्वजनिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, जिसकी भरपाई अंततः आम जनता को ही करनी पड़ती है। यह स्थिति क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है। कैबिनेट मंत्री से सख्त हस्तक्षेप की गुहार समस्या की गंभीरता को देखते हुए, डॉक्टर तेजपाल गिल ने कैबिनेट मंत्री से मुलाकात की और उन्हें विस्तार से जमीनी हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने एक औपचारिक मांग पत्र सौंपते हुए आग्रह किया कि इस मामले में तुरंत उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए। उन्होंने मांग की कि जो लोग भी अवैध खनन में लिप्त हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी मशीनों को जब्त किया जाए। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार अवैध माइनिंग को लेकर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाएगी। पर्यावरण और जनहित की रक्षा का संकल्प क्षेत्र में माइनिंग माफिया के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर भी लामबंदी शुरू हो गई है। डॉक्टर गिल ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा और किसानों के हितों को बचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा। यह मांग की गई है कि माइनिंग साइटों की नियमित निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की जाएं ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

सशक्त होंगी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता: कैबिनेट मंत्री ने सुनीं समस्याएं, प्राथमिकता के आधार पर समाधान का आश्वासन

चंडीगढ़.  पंजाब सरकार समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए लगातार काम कर रही है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों का कल्याण विशेष प्राथमिकता है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार इन कार्यकर्ताओं की समस्याओं को हल करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य इन महिला कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण और उनके हक प्रदान करना है। अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान डॉ. बलजीत कौर ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आंगनवाड़ी प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया। इस बैठक में सामाजिक सुरक्षा विभाग की निदेशक शेना अग्रवाल और उप-निदेशक सुमनदीप कौर भी मौजूद रहीं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विभाग की रीढ़ हैं, जो बच्चों और महिलाओं तक सरकारी योजनाओं को पहुँचाने में सेतु का काम करती हैं। प्राथमिकता के आधार पर होगा समस्याओं का निपटारा बैठक में उठाई गई विभिन्न मांगों को सुनने के बाद कैबिनेट मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो मुद्दे प्रशासनिक स्तर पर सुलझाए जा सकते हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि जो मांगें सीधे सरकार के नीतिगत फैसलों से जुड़ी हैं, उन्हें हाल ही में गठित उप-समिति के समक्ष रखा जाएगा। इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समाधान निकाला जाएगा ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहे। समाज की नींव मजबूत करने में अहम योगदान डॉ. बलजीत कौर ने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को बेहतर बनाने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि गाँवों और शहरों में घर-घर जाकर दी जा रही सेवा समाज की मजबूत नींव तैयार करने में सहायक है। पंजाब सरकार कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को बरकरार रखने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आवश्यकतानुसार उचित और बड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।

वर्ल्ड लिवर डे 2026: पंजाब ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत लिवर रोग की स्क्रीनिंग को किया और व्यापक

चंडीगढ़ 19 अप्रैल को दुनिया भर में ‘सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रॉन्ग लिवर’ थीम के साथ मनाए जाने वाले वर्ल्ड लिवर डे के मौके पर, ‘द लैंसेट’ की एक चेतावनी में लिवर की बीमारियों में दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ोतरी पर रोशनी डाली गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक ‘मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोइक लिवर डिज़ीज़’ (MASLD) के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस खतरनाक स्थिति के बीच, पंजाब इस चुनौती का डटकर सामना करने के लिए आगे बढ़ रहा है। राज्य ने बढ़ी हुई स्क्रीनिंग और कैशलेस ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के ज़रिए अपनी हेल्थ सेवाओं को मज़बूत किया है, जिससे मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़ी इस तेज़ी से बढ़ती ‘साइलेंट एपिडेमिक’ के खिलाफ भारत की लड़ाई में यह लीडिंग रोल निभा रहा है। लिवर की बीमारियाँ दुनिया भर में एक ‘साइलेंट एपिडेमिक’ के तौर पर उभर रही हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि लगभग तीन में से एक एडल्ट इससे प्रभावित है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण अक्सर तभी दिखते हैं जब गंभीर नुकसान पहले ही हो चुका होता है। ‘द लैंसेट’ की एक स्टडी में चेतावनी दी गई है कि 2023 में मरीज़ों की संख्या 1.3 बिलियन से बढ़कर 2050 तक 1.8 बिलियन हो सकती है, जो 42 परसेंट की बढ़ोतरी है। भारत में भी ऐसा ही ट्रेंड देखा जा रहा है, खासकर शहरी आबादी और हाई-रिस्क ग्रुप्स में। पंजाब के डॉक्टरों के मुताबिक, ‘हेपेटाइटिस-C’ इंफेक्शन, शराब पीने और खाने की बदलती आदतों की वजह से स्थिति और गंभीर होती जा रही है। डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा, “भारत में शराब लिवर की गंभीर बीमारियों का एक बड़ा कारण है और वायरल हेपेटाइटिस के साथ मिलकर यह हालत और खराब कर देती है। फैटी लिवर की बीमारी अब शराब और हेपेटाइटिस-C के साथ एक बड़ा कारण बनकर उभर रही है। लंबे समय तक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना, फ्राइड खाना और ट्रांस-फैट खाने से यह समस्या और बढ़ रही है।” डॉक्टर यह भी चिंताजनक ट्रेंड देख रहे हैं कि कम उम्र के मरीज़ों में लिवर की बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण शराब का बढ़ता सेवन और हेपेटाइटिस-C का फैलना है, जो राज्य में बदलती लाइफस्टाइल और व्यवहार के ट्रेंड को दिखाता है। हेल्थ सर्विसेज़ के बारे में उन्होंने कहा, “पंजाब ने अपने रेफरल सिस्टम को मज़बूत किया है, जिससे लिवर की बीमारियों का पहले पता चल रहा है। गांवों में स्क्रीनिंग और स्पेशलिस्ट सर्विसेज़ तक पहुंच भी बेहतर हुई है, हालांकि फैटी लिवर के ‘साइलेंट’ नेचर की वजह से देर से पता चलने की समस्या अभी भी है।” फाइनेंशियल और पहुंच से जुड़ी रुकावटों को दूर करने के लिए, राज्य ने चीफ मिनिस्टर हेल्थ स्कीम के तहत कवरेज बढ़ाया है, जो सरकारी और लिस्टेड प्राइवेट अस्पतालों में हर परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देती है। डॉ. सिंह बताते हैं कि एक बार मरीज़ के भर्ती होने के बाद, ज़्यादातर टेस्ट और दवाएं इस स्कीम के तहत कवर हो जाती हैं, जिससे मरीज़ का जेब से होने वाला खर्च कम हो जाता है। इस स्कीम में टेस्टिंग, हॉस्पिटल में भर्ती होना और स्पेशलिस्ट सर्विसेज़ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चीफ मिनिस्टर हेल्थ स्कीम ने कई मरीज़ों को बेहतर इलाज दिलाने में मदद की है और यह कई जानें बचाने में अहम साबित हुई है। पंजाब के हेल्थ मिनिस्टर डॉ. बलबीर सिंह ने यह भी कहा, “यह स्कीम जेब से होने वाले खर्च को कम करती है, साथ ही डायग्नोसिस और इलाज में देरी को भी रोकती है।” पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के तहत स्क्रीनिंग बढ़ाने से उम्मीद है कि जल्दी पता लगाने में सुधार होगा और बीमारी का बढ़ना धीमा हो जाएगा। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लिवर की बीमारी के शुरुआती स्टेज को अक्सर लाइफस्टाइल में बदलाव जैसे अच्छी डाइट, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी और शराब कम पीने से ठीक किया जा सकता है।

मुश्किल वक्त में मिला साथ: मुख्यमंत्री सेहत योजना से पटियाला की महिला ने जीती कैंसर की जंग

चंडीगढ़/पटियाला. पटियाला के रहने वाले गुरपिंदर जीत सिंह की जिंदगी पांच महीने पहले अचानक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई, जहां हर रास्ता मुश्किल नजर आने लगा था। उनकी 65 वर्षीय माता बलजीत कौर ने गंभीर बीमारी के कारण धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ दिया था। मजबूर और बेबस बेटे के लिए यह सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि रोज टूटती जा रही उम्मीदों का दर्द था। गुरपिंदर जीत के अनुसार पहले निजी डॉक्टरों के पास दौड़-भाग की गई, फिर मां को राजिंद्रा अस्पताल, पटियाला रेफर कर दिया गया। दवाइयां चलीं, टेस्ट हुए, लेकिन हालत सुधरने की बजाय और गंभीर हो गई। जब रिपोर्ट आई तो जैसे आसमान ही ढह पड़ा- मां को बच्चेदानी का कैंसर था। गुरपिंदर के लिए यह बहुत मुश्किल घड़ी थी, यह उस मां की जिंदगी का सवाल था जिसने उसे जन्म दिया और पाला-पोसा। आज वह जिंदगी और मौत से जूझ रही थी। बिना देरी किए वह मां को संगरूर के टाटा कैंसर अस्पताल ले गया। इलाज शुरू हुआ, लेकिन पहले ही झटके में 60 हजार रुपये से अधिक खर्च हो गए। एक ड्राइवर की सीमित आय के सामने यह राशि पहाड़ जैसी थी। गुरपिंदर के मन में एक ही सवाल था- “मां को कैसे बचाऊं?” कर्ज लेने की नौबत भी आ गई थी। तभी, जैसे अंधेरे में एक रोशनी की किरण उसके सामने आई। अस्पताल में उसे मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के बारे में पता लगा। बिना और देरी किए गुरपिंदर ने वहीं रजिस्ट्रेशन करवा लिया। कुछ समय बाद ही उसके मोबाइल पर मैसेज आ गया और स्मार्ट कार्ड बन गया। इसके बाद जो हुआ, वह उसके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। लाखों रुपये का इलाज- जिसमें महंगे टेस्ट, बार-बार कीमोथेरेपी, दवाइयां, ऑपरेशन, आईसीयू, वेंटिलेटर और अस्पताल में रहने-खाने तक का खर्च शामिल था- सारा खर्च सरकार ने उठाया। गुरपिंदर की आंखें भर आती हैं जब वह कहता है, “मां तो मां होती है… उसे हर हाल में बचाना था। पैसे नहीं थे, लेकिन रब ने इस योजना के रूप में रास्ता दिखा दिया।” डॉक्टरों के लिए भी यह केस बहुत चुनौतीपूर्ण था। कैंसर बच्चेदानी से आगे बढ़कर लीवर और फेफड़ों तक फैल गया था। पहले तीन बार कीमोथेरेपी दी गई, लेकिन शरीर कमजोर होने के कारण साइड इफेक्ट सामने आए। फिर धीरे-धीरे डोज कम करके नौ बार और कीमोथेरेपी दी गई। इलाज के बाद ट्यूमर एक जगह सिमट गया और डॉक्टरों ने लगभग आठ घंटे लंबा ऑपरेशन करके उसे निकाल दिया। 35 से 40 टांकों के साथ मां ने दर्द सहते हुए भी जिंदगी की डोर थामे रखी। मां ऑपरेशन के बाद दो-तीन दिनों के लिए आईसीयू में और वेंटिलेटर पर रहीं, फिर उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। गुरपिंदर हर वक्त मां के पास बैठा रहता—कभी दवाई देता, कभी सिर सहलाता। आठ दिन अस्पताल में बिताने के बाद जब मां की हालत सुधरने लगी, तो जैसे उनकी दुनिया वापस आ गई। 24 नवंबर 2025 से शुरू हुआ यह सफर अभी भी जारी है। अगले इलाज और जांच के लिए वे मुल्लांपुर स्थित अस्पताल में फॉलोअप के लिए जाएंगे। कुछ दवाइयां जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं, उनका खर्च गुरपिंदर ने खुद उठाया, लेकिन बाकी सारा इलाज योजना के तहत मुफ्त हुआ। अस्पताल में गायनेकोलॉजी की डॉ. शिवाली ने सर्जरी के डॉक्टरों के साथ मिलकर ऑपरेशन किया। टाटा मेमोरियल के डॉक्टरों के अनुसार, इस सर्जरी पर दवाइयों को मिलाकर कम से कम 8 से 10 लाख रुपये का खर्च हुआ है। दो बच्चों के पिता और एक साधारण ड्राइवर गुरपिंदर के लिए यह राहत शब्दों से परे है। वह कहता है, “अब सुकून है कि मां बिना इलाज के नहीं मरेगी… सरकार ने हमें उम्मीद दी है।” यह सिर्फ इलाज की कहानी नहीं, बल्कि एक बेटे के संघर्ष, मां के लिए प्यार और एक ऐसी योजना की कहानी है, जिसने मुश्किल वक्त में सहारा बनकर एक परिवार को टूटने से बचा लिया। यह सफर इस परिवार के लिए गंभीर बीमारी की कठोर हकीकत को बयान करता है, साथ ही यह भी दर्शाता है कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और प्रभावशाली सरकारी मदद कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह यकीनी बनाता है कि आर्थिक तंगी किसी भी व्यक्ति के जीवन बचाने वाले इलाज के रास्ते में रुकावट न बने।

स्मार्ट पुलिसिंग का असर: खोया हुआ फोन अब नहीं होगा गायब, बठिंडा पुलिस ने लौटाए 32 लाख के मोबाइल

बठिंडा. पुलिस ने सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर यानी CEIR पोर्टल के माध्यम से गुम हुए मोबाइल फोन बरामद करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आधुनिक तकनीक के सही इस्तेमाल से पुलिस बल उन डिवाइसों तक पहुँचने में सफल रहा है, जिन्हें लोग खो चुके मान चुके थे। इस साल पुलिस ने अब तक कुल 224 मोबाइल फोन ट्रैक किए हैं, जिनकी बाजार में कीमत लगभग 32 लाख 15 हजार 200 रुपये आंकी गई है। बरामदगी के बाद ये सभी फोन उनके असली मालिकों को सौंप दिए गए हैं। तीन साल के आंकड़ों में बड़ी उपलब्धि एसएसपी डॉ. ज्योति यादव बैंस ने इस सफलता का विवरण साझा करते हुए बताया कि पिछले तीन सालों में पुलिस की सक्रियता और पोर्टल की सटीकता के कारण कुल 1579 मोबाइल बरामद हुए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2023 में 80, 2024 में 262 और साल 2025 में रिकॉर्ड 1013 मोबाइल फोन खोजे गए थे, जिनकी कुल कीमत 1 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक थी। वर्ष 2023 से 2026 के बीच का यह सफर बठिंडा पुलिस की तकनीकी क्षमता और जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। CEIR पोर्टल की कार्यप्रणाली और लाभ भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया CEIR पोर्टल गुम या चोरी हुए फोन को ट्रैक करने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। इस पोर्टल के जरिए आम नागरिक घर बैठे अपने फोन की रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। शिकायत मिलते ही पुलिस और साइबर सेल की टीमें तकनीकी सहायता से फोन की लोकेशन ट्रेस करती हैं। इसके अलावा, इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे खोए हुए फोन को ब्लॉक किया जा सकता है, जिससे डेटा चोरी का खतरा खत्म हो जाता है। त्वरित शिकायत से आसान होती है बरामदगी बठिंडा पुलिस के अनुसार, सीआईए स्टाफ और साइबर क्राइम सेल की टीमें मिलकर इस दिशा में निरंतर काम कर रही हैं। एसएसपी ने आम जनता को संदेश दिया है कि फोन गुम होने की स्थिति में बिना किसी देरी के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय पर दी गई सूचना से तकनीक की मदद लेना आसान हो जाता है और फोन मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। पुलिस विभाग का कहना है कि वे नागरिकों की सुरक्षा और उनकी संपत्ति की रक्षा के लिए भविष्य में भी इसी तरह के अभियान जारी रखेंगे।

गवर्नर एस. गुरमीत सिंह ने श्री दरबार साहिब में माथा टेका, एडवोकेट धामी ने गोल्डन मॉडल देकर किया सम्मान

अमृतसर उत्तराखंड के गवर्नर एस. गुरमीत सिंह ने आज सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका। गुरु घर के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा दिखाते हुए उन्होंने दिव्य भजनों का कीर्तन सुना और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इन्फॉर्मेशन सेंटर में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह भी पढ़ें उत्तराखंड के गवर्नर गुरमीत सिंह ने सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका सिख विरासत और पवित्र स्थानों पर चर्चा यह भी पढ़ें ढुलक स्कूल की पायलप्रीत अव्वल श्री दरबार साहिब के इन्फॉर्मेशन सेंटर में हुए एक खास सम्मान समारोह के दौरान, एडवोकेट धामी ने गवर्नर को सिरोपा, श्री हरमंदिर साहिब का एक सुनहरा मॉडल और धार्मिक किताबें भेंट कीं। पड़ोसी राज्य के साथ सहयोग: एडवोकेट धामी ने कहा कि उत्तराखंड में सिखों के पवित्र स्थानों (जैसे श्री हेमकुंट साहिब) के बारे में गवर्नर के साथ ज़रूरी चर्चा हुई। पॉजिटिव जवाब: गवर्नर गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड में सिख विरासत को बचाने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हर मुमकिन मदद का भरोसा दिया। "यह गेट पूरी इंसानियत को एकता और विनम्रता का संदेश देता है। यहां मत्था टेककर मुझे एक नई स्पिरिचुअल एनर्जी मिली है।" — एस. गुरमीत सिंह, गवर्नर (उत्तराखंड) गवर्नर अमृतसर के रहने वाले हैं एडवोकेट धामी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि अमृतसर जिले के रहने वाले एस. गुरमीत सिंह आज एक ऊंचे संवैधानिक पद पर सेवा कर रहे हैं और अपनी कामयाबी के लिए गुरु साहिब का शुक्रिया अदा करने आए हैं। इस मौके पर मौजूद जानी-मानी हस्तियां शिरोमणि कमेटी के चीफ सेक्रेटरी कुलवंत सिंह मनन, सेक्रेटरी बलविंदर सिंह काहलवां, डिप्टी सेक्रेटरी हरभजन सिंह वक्ता, मैनेजर नरिंदर सिंह मथरेवाल और इन्फॉर्मेशन ऑफिसर अमृतपाल सिंह के साथ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर ADC अमित श्रीवास्तव, AIG जगजीत सिंह वालिया और ADCP हरपाल सिंह भी इस मौके पर मौजूद थे।

नशे के बड़े गिरोह पर वार: 448 करोड़ की हेरोइन जब्त, पाकिस्तान लिंक का खुलासा

चंडीगढ़. पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। डीजीपी गौरव यादव ने शनिवार को बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि काउंटर इंटेलिजेंस और राज्य विशेष अभियान इकाई अमृतसर की संयुक्त कार्रवाई में 64.62 किलो हेरोइन बरामद की गई है। इसके साथ ही एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी नेटवर्क को भी ध्वस्त कर दिया गया है, जिसके तार पाकिस्तान से लेकर यूरोप तक जुड़े पाए गए हैं। जब्त हेरोइन की इंटरनेशनल वेल्यू तकरीबन 448 करोड़ रुपए आकी जा रही है। डीजीपी के अनुसार यह कार्रवाई सामान्य नहीं है, बल्कि सीमा पार से संचालित एक संगठित और मजबूत तस्करी नेटवर्क पर सीधा प्रहार है। जांच के दौरान सामने आया कि पाकिस्तान में बैठा तस्कर मूसा इस पूरे गिरोह का मुख्य संचालक है। यह वही व्यक्ति है, जिसका नाम पहले 532 किलो हेरोइन की बड़ी खेप के मामले में भी सामने आ चुका है। पुर्तगाल तक पहुंचे लिंक इस बार मूसा ने अपने नेटवर्क को और विस्तार देते हुए यूरोप, विशेष रूप से पुर्तगाल में बैठे अपने साथियों के जरिए पंजाब के स्थानीय तस्करों को जोड़ रखा था। इस तरह यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होकर नशे की आपूर्ति का एक बड़ा चैनल बना चुका था। पुलिस ने अमृतसर के अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए स्वर्ण सिंह, मखन सिंह और शमशेर सिंह को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि ये आरोपी सीमा पार से आई हेरोइन की खेप को प्राप्त कर उसे आगे विभिन्न स्थानों पर सप्लाई करते थे। कड़ियों को जोड़ने की प्रयास में जुटी पुलिस डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि यह पूरा अभियान गुप्त सूचनाओं के आधार पर चलाया गया था। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले समय में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि पुलिस अब इस नेटवर्क के आगे और पीछे जुड़े सभी कड़ियों की गहराई से जांच कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंजाब पुलिस राज्य को नशा मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी तस्कर या गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका संबंध देश के भीतर हो या विदेश से जुड़ा हो। इस बड़ी कार्रवाई के बाद पंजाब में नशा तस्करी के खिलाफ चल रही मुहिम को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

एक दिन में तीन मौसम: पंजाब में बारिश, तेज धूप और धूल भरी आंधी का असर

जालंधर. जालंधर. अप्रैल में मौसम में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिला है। वीरवार को सुबह बूंदाबांदी हुई, लेकिन दोपहर को धूप निकलने से गर्मी बढ़ गई। वहीं शाम को शाम को धूल भरी आंधी चलने से गर्मी से राहत मिली। पहाड़ी इलाकों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव होने की वजह से सीधा असर मैदानी इलाकों पर पड़ सकता है। मौसम विभाग की ओर से शुक्रवार को बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम में बदलाव से गर्मी से भले ही राहत मिली है, परंतु गेहूं की फसल तकरीबन तैयार है और कटाई का काम शुरू हो चुका है। मौसम के मिजाज को लेकर किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। कृषि विभाग से सेवानिवृत्त डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नरेश गुलाटी का कहना है कि अभी तेज हवा और वर्षा गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। इससे खेतों में पानी खड़ा हो सकता है और तना जमीन पर झुकने से दाना खाला हो सकता है। देश के कई राज्यों में प्रचंड लू का दौर जारी है. बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, से लेकर मध्य प्रदेश के कई शहरों में तापमान 40 को छू रहा है और कई शहरों में तो 40 के पार जा रहा है. हालांकि कई जगहों पर दोहरे मौसम का भी अनुभव किया जा रहा है. शुक्रवार को देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में हल्की बूंदाबादी भी हुई जिसने लोगों को गर्मी से राहत दी है. मौसम विभाग (IMD) के नए अलर्ट से भी कई राज्यों में दो से तीन दिनों तक राहत मिलने की उम्मीद है. IMD के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और स्थानीय गर्मी मिलकर ऐसा माहौल बना रही हैं, जिसमें कुछ ही घंटों में तेज धूप से मौसम आंधी-बारिश में बदल सकता है. यही वजह है कि लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. मौसम अब स्थिर नहीं रहा, बल्कि हर दिन नया रूप दिखा रहा है. 13 राज्यों में झमाझम बारिश होने के साथ-साथ बिजली गिरने का भी अलर्ट है. इन राज्यों में धूल भरी आंधी के साथ 70 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से हवाएं भी चल सकती हैं.

खेतों में आग से तबाही: पंजाब के चार गांवों में 400 एकड़ फसल जलकर खाक

अबोहर. मलोट के गांव कबरवाला में शुक्रवार सुबह खेतों में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि अबोहर के गांव जोधपुर तक चार गांवों में करीब 400 एकड़ फसल जलकर राख हो गई। इस दौरान मलोट व अबोहर से पहुंची फायर ब्रिगेड के अलावा किसानों की ओर से कड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया गया। जानकारी के अनुसार आग मलोट के गांव कबरवाला में सुबह 11 खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को आग लग गई, जोकि तेज हवा के कारण पक्की टिब्बी और गुरपुसर से फैलते हुए बललूआना क्षेत्र के गांव जोधपुर तक पहुंच गई। देखते ही देखते आग ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को अपनी चपेट में ले लिया और किसानों की साल भर की मेहनत मिनटों में राख हो गई। सूचना मिलने पर मलोट और अबोहर से फायर ब्रिगेड की लगभग 4 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए अभियान शुरू किया। इसके साथ ही किसानों ने भी हिम्मत दिखाते हुए ट्रैक्टरों से मिट्टी डालकर और खेत जोतकर आग के फैलाव को रोकने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी राजकुमार व किसानों ने बताया कि आग लगने के कारणों का तो पता नहीं चला है, लेकिन अनुमान है कि इस आग से करीब 400 एकड़ के करीब गेहूं की फसल राख हो गई है। उन्होंने बताया कि इनमें कई छोटे किसान भी शामिल है जिनकी पांच से 10 एकड़ तक फसल राख हो गई, व जबकि कई लोगों ने ठेके पर जमीन लेकर भी बिजाई कर रखी थी। इस दौरान सरपंच सतनाम सिंह जोधपुर, साहिब सिंह नंबरदार, सुरजीत सिंह, हरि कृष्ण सिंह, प्रीतम सिंह, दर्शन सिंह और बूटा सिंह ने कहा कि आग के कारण उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई है। इसलिए सरकार और प्रशासन से मांग की गई है कि हुए नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने कहा कि अगर समय रहते आग पर काबू न पाया जाता तो आग गांव मलूकपुरा में फैल सकती थी। इसके अलावा गांव राजपुरा में सरकंडी को आग लगने से आग घरों तक फैलने का खतरा पैदा हो गया, जिस पर समय रहते काबू पा लिया गया।

हाईकोर्ट का अहम निर्णय: हिरासत में लेना ही माना जाएगा गिरफ्तारी

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि किसी व्यक्ति को जैसे ही पुलिस या जांच एजेंसी उसके जाने की आजादी से रोक देती है, उसी क्षण से उसे गिरफ्तार माना जाएगा। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की 24 घंटे की संवैधानिक समय सीमा भी उसी पल से शुरू होती है, न कि उस समय से जब कागजों में गिरफ्तारी दर्ज की जाती है। यह मामला अमृतसर में ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से जुड़ी जांच से सामने आया। याचिकाकर्ता को 31 अक्टूबर 2025 की रात देहरादून से करीब 11 बजे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपने साथ रखा। हालांकि, उसकी औपचारिक गिरफ्तारी 1 नवंबर की रात 9 बजे दिखाई गई और अगले दिन दोपहर करीब 2 बजे उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जस्टिस सुमित गोयल ने एनसीबी द्वारा हिरासत में रखे गए याची की रिहाई का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि संबंधित व्यक्ति को न्यायिक अनुमति के बिना 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया, जो संविधान के प्रविधानों का उल्लंघन है। अदालत ने उस प्रचलित व्यवस्था को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें एजेंसियां पूछताछ के लिए हिरासत या जांच के लिए रोककर रखना जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर औपचारिक गिरफ्तारी को टालती हैं। गिरफ्तारी एक तथ्यात्मक स्थिति है, जिसे शब्दों के सहारे बदला नहीं जा सकता। यदि किसी व्यक्ति की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है और वह अपनी इच्छा से कहीं जा नहीं सकता, तो वह गिरफ्तारी ही मानी जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी मेमो या पुलिस रिकार्ड में दर्ज समय अंतिम सत्य नहीं हो सकता। न्यायालय ने कहा कि यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है, जिसे वास्तविक गिरफ्तारी के समय का निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता। साथ ही अदालत ने मजिस्ट्रेटों को भी सचेत किया कि वे केवल दस्तावेजों पर निर्भर न रहें, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए यह तय करें कि गिरफ्तारी कब हुई। अदालत ने यह भी माना कि गिरफ्तारी के सही समय का निर्धारण किसी तय फार्मूले से नहीं किया जा सकता। इसके लिए प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को देखना होगा जैसे व्यक्ति को रातभर थाने में रखा गया या नहीं, क्या उसे बाहर जाने की अनुमति थी, क्या वह स्वजन या मित्रों से मिल सकता था और क्या वह अपनी मर्जी से वहां से जा सकता था या नहीं।