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Bihar Teacher Transfer Policy में बड़ा बदलाव, महिलाओं और बीमार शिक्षकों को राहत

पटना  Bihar Teachers: शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के स्थानांतरण की जो नई नियमावली तैयार की है उसमें 40 से अधिक उम्र की मह‍िला श‍िक्ष‍िकाओं का विशेष ध्‍यान रखा गया है। इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर किसी अविवाहित महिला शिक्षक की उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो स्थानांतरण में उनकी पसंद को वरीयता दी जाएगी। अगर कोई महिला शिक्षक विधिक रूप से अलग रह रहीं तो उन्हें भी स्थानांतरण में वरीयता मिलेगी। नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन विद्यालयों में स्वीकृत शिक्षक की संख्या चार से कम है , वहां वरीयता श्रेणी के शिक्षकों के पदस्थापन पर विचार नहीं किया जाएगा। बीमारी और दिव्यांगता में इस तरह वरीयता बीमारी और दिव्यांगता के तहत शिक्षकों को स्थानांतरण में किस तरह से अधिमानता मिलेगी इसका भी विशेष रूप से स्थानांतरण की नई नियमावली में जिक्र किया गया है। वरीयता श्रेणी के तहत कैंसर रोग से ग्रस्त शिक्षक, ओपन हार्ट सर्जरी, एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट अंग प्रत्यारोपण के मामले में 20 प्रतिशत स्वयं, 10 प्रतिशत पत्नी के मामले में तथा 10 प्रतिशत की वरीयता संबंधित शिक्षक के 18 वर्ष से कम उम्र के आश्रित के संदर्भ में दी जाएगी। इसी तरह की वरीयता एकल किडनी, किडनी ट्रांसप्लांट, व डायलिसिस के मामले में दी जाएगी। ब्रेन ट्यूमर, न्यूरो सर्जरी, बोन टीबी व अन्य अन्य गंभीर टीबी के साथ-साथ पक्षाघात पीड़ित शिक्षकों को भी स्थानांतरण में वरीयता मिलेगी। दिव्यांगता के संदर्भ में यह प्रावधान किया गया है कि 80 से 100 प्रतिशत तक की दिव्यांगता जिसमें दृष्टि, अस्थि अथवा श्रवण बाधा शामिल है, से प्रभावित शिक्षकों को स्थानांतरण में वरीयता दी जाएगी। बीमारी और दिव्यांगता श्रेणी के तहत आए आवेदन की जांच के लिए शिक्षा विभाग के स्तर चिकित्सा बोर्ड का गठन किया जाएगा। यदि कोई शिक्षक वरीयता श्रेणी के तहत आवेदन करता है पर उनका स्थानांतरण नहीं होता है तो वह अगले स्थानांतरण चक्र में वरीयता श्रेणी के तहत स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेगा। वरीयता का दावा गलत होने पर वैधानिक कार्रवाई अगर किसी शिक्षक की वरीयता का दावा गलत निकलता है तो संबंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर से उसकी जांच कराई जाएगी। संबंधित शिक्षक को अपना स्पष्टीकरण दिए जाने को ले सात दिन का समय दिया जाएगा। यदि दावा गलत निकलता है तो संबंधित शिक्षक पर अनुशासनिक के साथ-साथ वैधानिक कार्रवाई भी होगी। वहीं राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार तथा राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को भी स्थानांतरण में क्रमश: 10 व पांच प्रतिशत वरीयता दिए जाने का प्राविधान किया गया है।

झारखंड के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव, फिजिकल एजुकेशन में लागू होंगी NCERT की पुस्तकें

रांची. राज्य सरकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा कक्षा तीन से आठ के लिए तैयार शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण विषय पर तैयार नई पाठ्यपुस्तकों को लागू कर सकती है। हाल ही में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह की अध्यक्षता में झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) की बैठक में इस पर चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की अनुशंसा के अनुरूप एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू की जाए या झारखंड के लिए राज्य स्तर पर नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की जाएं। इस पर सचिव ने जेसीईआरटी को एनसीईआरटी द्वारा तैयार पुस्तकों की समीक्षा कर एक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि उसपर अंतिम निर्णय लिया जा सके। कक्षा नौ से 12वीं के लिए भी तय हुआ कि एनसीईआरटी द्वारा तैयार की जानेवाली पुस्तकों की समीक्षा के बाद ही उस पर निर्णय लिया जाएगा। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में स्कूलों में शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण (फिजिकल एजुकेशन एंड वेल-बीईंग) की पढ़ाई पर जोर दिया गया है। एनसीईआरटी द्वारा तैयार पाठ्य-पुस्तकों में फिजिकल फिटनेस, खेल, स्वास्थ्य जागरुकता, इमोशनल बैलेंस, टीम स्पिरिट और ज़िम्मेदार लाइफ स्टाइल के ज़रिए बच्चों के समग्र विकास पर जोर दिया गया है। बताते चलें कि राज्य के सरकारी स्कूलों में जेसीईआरटी द्वारा कक्षा एक से आठ तक के लिए तैयार पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं। नौवीं से 12वीं कक्षाओं के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं। राज्य सरकार एनसीईआरटी से कापी राइट लेकर पुस्तकों का प्रकाशन कराती है। राज्य में अभी तक शारीरिक शिक्षा के लिए अपनी पुस्तकें तैयार नहीं की गई हैं। यदि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग एनसीईआरटी की शारीरिक शिक्षा की पुस्तकों को लागूनहीं कर स्वयं पुस्तकें तैयार करने का निर्णय लिया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी जेसीईआरटी को दी जाएगी।

राशन कार्डधारकों के लिए जरूरी अपडेट, नया सदस्य जोड़ने से पहले करानी होगी e-KYC

रांची झारखंड में राशन कार्ड में नया नाम जोड़ने के लिए पहले ई-केवाईसी कराना अब अनिवार्य होगा। राशन वितरण व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी राशन कार्डधारियों के लिए ई-केवाईसी की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है। लाभार्थियों का ई-केवाईसी किए बिना अब राशन कार्ड में किसी भी नए सदस्य का नाम नहीं जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही राशन कार्ड में दर्ज परिवार के सभी सदस्यों का ई-केवाईसी नि:शुल्क कराया जा रहा है। ई-केवाईसी का मुख्य उद्देश्य रांची जिला प्रशासन के अनुसार, ई-केवाईसी का उद्देश्य लाभार्थियों का सत्यापन करना, अपात्र और फर्जी कार्डधारियों की पहचान करना तथा खाद्यान्न वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना है। इसके माध्यम से वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सकेगा। खाद्य आपूर्ति विभाग ने सभी जिला पदाधारियों को दिशा-निर्देश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में ई-केवाईसी के बिना नया नाम जोड़ने की कार्यवाही नहीं की जाए। खाद्य आपूर्ति विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से अपात्र लोगों को लाभ लेने से रोका जा सकेगा और पात्र लाभुकों को समय पर राशन उपलब्ध होगा। ई-केवाईसी की लगातार निगरानी खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने विभाग ने कहा है कि ई-केवाईसी अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए जन वितरण प्रणाली दुकानदारों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ई-केवाईसी नहीं कराने वाले लाभुकों को भविष्य में राशन प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। ई-केवाईसी जल्द पूरा करने की अपील जिला प्रशासन ने बताया कि लाभुक अपने नजदीकी जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान पर आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। अधिकारियों ने सभी कार्डधारियों से अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य का ई-केवाईसी जल्द पूरा कराने की अपील की है।

बेंगलुरु की पहल: 59 भाषाओं में किताब पढ़कर सुनाने वाला AI स्मार्ट चश्मा तैयार

 बोकारो Blind Vision Foundation Bangalore की ओर से दृष्टिबाधित बच्चों की सुविधा के लिए स्मार्ट विजन चश्मा बनाया गया है। एआई व मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित यह चश्मा बच्चों की शिक्षा में सहयोग करेगा। वह बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी सहित 59 भारतीय भाषाओं में लिखित पुस्तकों को पढ़ कर सुनाएगा। उन्हें न केवल पाठ्य पुस्तकों, बल्कि जनरल नालेज की भी जानकारी देगा। यह चश्मा बच्चों को रास्ते में आने वाली बाधा, वाहन आदि की भी जानकारी देगा। साथ ही उनके स्वजनों को उनके सही लोकेशन की भी जानकारी उपलब्ध कराएगा। यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों का सहारा बनेगा। उनके जीवन की राह को आसान करेगा। इसके माध्यम से बच्चे न केवल बेहतर तरीके से शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे, अपितु जीवन की राह पर मजबूती से आगे कदम बढ़ा सकेंगे। ऐसे काम करता है स्मार्ट विजन चश्मा ब्लाइंड विजन फाउंडेशन बेंगलुरु के प्रोजेक्ट मैनेजर राहुल ने कहा कि इस चश्मा के बीच में कैमरा लगा रहता है। चश्मा में सेंसर, बजर, बैटरी, फ्लैश लाइट, स्पीकर आदि लगा रहता है। स्मार्ट फोन में इससे संबंधित एप्लीकेशन डाउनलोड किया जाता है। इसमें लगे कैमरे व सेंसर उपयोगकर्ता के परिवेश को स्कैन करते हैं और एआई तकनीक के माध्यम से उसे आडियो (आवाज) के रूप में बदलकर बताते हैं। चश्मे में लगा फ्रंट कैमरा उपयोगकर्ता के सामने की तस्वीर खींचता है, जबकि लिडार सेंसर आसपास की दूरी और बाधाओं का पता लगाते हैं। कैप्चर की गई छवियों और डेटा को एआई माडल द्वारा प्रोसेस किया जाता है। यह बाब्जेक्ट्स (कुर्सी, मेज आदि) लोगों के चेहरों और लिखित शब्दों को पहचानता है। चश्मे में लग बजर सक्रिय हो जाता है। स्पीकर से बीप की आवाज आने लगती है। उपयोगकर्ता को बताया जाता हैं कि उनके सामने दीवार, गड्ढ़ा, वाहन आदि हैं। वे किसी किताब के लिखे हुए शब्दों को पढ़कर सुनाते हैं। जैसे ही दृष्टिबाधित विद्यार्थी चश्मे के आगे पुस्तक को रखते हैं, वैसे ही चश्मे में लगा कैमरा उसकी तस्वीर खींच लेता है। इसके बाद एआई तकनीक के माध्यम से उसे आडियो के रूप में बदल देता है। स्पीकर के जरिए उपयोगकर्ता को पुस्तक में लिखे शब्द सुनाए जाते हैं। वह इस डाटा को सुरक्षित रख सकता है। इसके माध्यम से परीक्षा की तैयारी कर सकता है। यह चश्मा भारत सहित विभिन्न देशों की करेंसी की भी पहचान करता है। बच्चों को जनरल नालेज से संबंधित जानकारी देता है। इसमें इमरजेंसी मोड होता है, जो उपयोगकर्ता का फोटो व लाइव लोकेशन स्वजनों को वाट्स एप पर उपलब्ध कराता है। साथ ही मोबाइल फोन से उनके लोकेशन की जानकारी देता है। उपयोगकर्ता अपनी पसंद के गाने भी सुन सकते हैं। यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक है। कहा कि कारपोरेट सीएसआर के सहयोग से यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों को निश्शुल्क उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। आशा लता केंद्र के निदेशक भवानी शंकर जायसवाल व प्राचार्य प्रमोद दुबे ने कहा कि इस चश्मा से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा। इसके सहारे बच्चे न केवल बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकेंगे, बल्कि बेहतर तरीके से रोजमर्रा के काम कर सकेंगे।

बिहार में आम महोत्सव का भव्य आगाज, स्वर्णरेखा और मल्लिका किस्म के आम बने आकर्षण

पटना  बिहार के आम उत्पादकों को सीधे बाजार से जोड़ने और उपभोक्ताओं तक रसायन-मुक्त आम पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित नाबार्ड आम महोत्सव-2026 का गुरुवार को भव्य आगाज हुआ। पटना के बिहार राज्य सहकारी संघ परिसर में शुरू हुए दो दिवसीय महोत्सव में जहां किसानों को बड़े खरीदारों और निर्यातकों से जुड़ने का अवसर मिला, वहीं आम प्रेमियों ने विभिन्न प्रजातियों के स्वादिष्ट आमों की खरीदारी कर मेले को जीवंत बना दिया। महोत्सव में स्वर्णरेखा और मल्लिका प्रजाति के   बड़े आकार के आम आकर्षण का केंद्र बने रहे। बिहार के आमों को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि आम केवल फलों का राजा नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जर्दालु, लंगड़ा, चौसा, दशहरी और फजली जैसी किस्में देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी विशेष गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने किसानों से आधुनिक खेती तकनीक अपनाने, गुणवत्ता सुधारने और विपणन के नए अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसानों और खरीदारों के बीच सीधा संपर्क नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि आम महोत्सव का उद्देश्य किसानों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है जहां वे अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं, थोक व्यापारियों और बड़े खरीदारों तक पहुंचा सकें। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा। उन्होंने बताया कि बिहार में नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत बागवानी और जनजातीय विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में 33 वाडी (बगीचा) परियोजनाएं संचालित हैं, इनसे करीब 19 हजार परिवारों को स्थायी आजीविका मिली है। इसके अलावा 302 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किए गए हैं, जिनसे लगभग 1.40 लाख किसान जुड़े हैं। कार्बाइड-मुक्त आमों की रही मांग महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता किसानों द्वारा सीधे लाए गए कार्बाइड-मुक्त आम हैं। उपभोक्ताओं ने इन प्राकृतिक तरीके से पकाए गए आमों को हाथोंहाथ लिया। लोगों ने इसे सुरक्षित और स्वादिष्ट विकल्प बताते हुए खरीदारी में विशेष रुचि दिखाई। आयोजकों के अनुसार आम प्रेमियों को बागवानों से सीधे आम खरीदने का अवसर मिल रहा है, जिससे उन्हें ताजा और गुणवत्तापूर्ण फल उचित कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं। स्वर्णरेखा और मल्लिका बने आकर्षण का केंद्र महोत्सव में प्रदर्शित आमों की विविधता ने आगंतुकों को खूब लुभाया। दूधिया मालदा, सफेद मालदा, बम्बईया, आम्रपाली, हेमसागर, जर्दालु, गुलाबखास, बीजू, बेलखास, लाल मोहन और लोकनायक जैसी किस्मों के बीच स्वर्णरेखा और मल्लिका ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। कई स्टालों पर एक किलोग्राम तक वजन वाले बड़े-बड़े आम लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने रहे। आगंतुक पहले इन आमों को देखने पहुंचे, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता की जानकारी मिलने के बाद खरीदार भी बन गए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इन दुर्लभ किस्मों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। आम के साथ अचार की भी खूब बिक्री महोत्सव में केवल ताजे आम ही नहीं, बल्कि विभिन्न किस्मों के आम के अचार भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। महिलाओं और गृहिणियों ने स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए पारंपरिक अचारों में विशेष रुचि दिखाई। इससे किसानों और स्वयं सहायता समूहों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। बड़ी संख्या में पहुंचे किसान और अधिकारी कार्यक्रम में बिहार स्टेट को-ऑपरेशन फेडरेशन के अध्यक्ष विनय कुमार शाही, बिहार स्टेट को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे, एनसीसीएफ एवं बिस्कोमान के अध्यक्ष विशाल सिंह, मुजफ्फरपुर को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष अमरनाथ पांडेय, गोपालगंज को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष महेश राय, हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश सिंह तथा बिहार ग्रामीण बैंक के महाप्रबंधक दीपक कुमार सहित बैंकिंग एवं सहकारिता क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नाबार्ड के एजीएम डॉ. अनुपम लाल कुसमाकर ने किया जबकि सहायक महाप्रबंधक नवीन चंद्र झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आज भी जारी रहेगा महोत्सव आम महोत्सव 26 जून तक जारी रहेगा। समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। आयोजकों ने आम जनता से बड़ी संख्या में पहुंचकर बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध आमों का स्वाद लेने और किसानों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है

बिहार में 100 साल पुराने जमीन के दस्तावेज़ खंगाले जाएंगे, रियासतों से मांगे गए कैडस्ट्रल खतियान

सहरसा. बिहार के विभिन्न जिलों में जमीन के कैडस्ट्रल सर्वे के दौरान तैयार खतियान सरकार के पास नहीं होने के कारण राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आम सूचना जारी कर रैयतों से अपील की है कि अगर उनके पास यह है तो उसे उपलब्ध कराएं। खतियान को अंचल कार्यालयों और जिला अभिलेखागार में संरक्षित किया जाएगा। बिहार में ब्रिटिश काल में जमीन का सर्वे किया गया था। इसे कैडस्ट्रल सर्वे का नाम दिया गया था। इसके आधार पर खतियान तैयार किया गया। इसके बाद रीविजनल सर्वे किया गया। इससे नया खतियान बना। अब भी जमीन के पुराने विवाद पर दोनों खतियान का मिलान किया जाता है। इसके आधार पर भी मालिकाना हक मिलता है। सीओ मौनी बहन ने बताया कि सरकार ने सभी खतियान को डिजिटाइज्ड कर दिया है। इस क्रम में राज्य के 9334 मौजे का कैडस्ट्रल सर्वे उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। सौ साल से अधिक समय पहले का खतियान कैडस्ट्रल सर्वे ब्रिटिश शासनकाल के दौरान साल 1900 से 1910 के बीच किया गया था। कुछ क्षेत्रों में यह 1892 से 1920 तक चला था। यह बंगाल काश्तकारी अधिनियम, 1885 के तहत पहला व्यापक भू-सर्वेक्षण था। यह दस्तावेज काफी महत्वपूर्ण है। जिले में खासमहाल की जमीन को लेकर कैडस्ट्रल सर्वे से ही कई निर्णय लिए जा रहे हैं। इसके अलावा बड़े जमींदारों की जमीन का खतियान भी इसमें शामिल है।

डिग्री की देरी खत्म होगी, बिहार सरकार विश्वविद्यालय व्यवस्था में करेगी बड़ा बदलाव

पटना बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विश्वविद्यालयों के लिए नया कानून लाया जाएगा। नया अधिनियम दूसरे राज्यों एवं केंद्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठ प्रणालियों पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सय्यद अता हसनैन की अध्यक्षता में पटना स्थित लोक भवन में शुक्रवार को हुई बैठक में यह सहमति बनी। इस बैठक में उच्च शिक्षा के विकास को लेकर कई फैसले लिए गए। यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स की डिग्री की लेटलतीफी को भी जल्द खत्म किया जाएगा, इस पर मिशन मोड में काम चल रहा है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में शुक्रवार को करीब 1 घंटे तक चली इस बैठक में यूनिवर्सिटी के पठन-पाठन, नामांकन, नियुक्ति, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। लोक भवन के द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से नई पहल की जानकारी दी गई। इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर भी मौजूद रहे। नए डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की संविदा पर नियुक्ति सीएम सम्राट ने कहा कि राज्य में ऐसी व्यवस्था हो कि उच्च शिक्षा के लिए बिहार के बच्चों को बाहर नहीं जाना पड़े। वहीं, राज्यपाल सय्यद अता हसनैन ने 31 दिसंबर तक विश्वविद्यालय समर्थ पोर्टल के 26 मॉड्युल्स पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए। बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य में खुले 211 नए डिग्री कॉलेजों में केंद्रीयकृत तरीके से सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की संविदा पर नियुक्ति की जाएगी। डिग्री की लेटलतीफी बंद होगी विद्यार्थियों की लंबित डिग्रियों के जल्द और समयबद्ध वितरण के लिए मिशन मोड में किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि इस कार्य को 30 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनुशासन एवं नियमितता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों एवं कर्मचारियों के ट्रांसफर और पदोन्नति के लिए समय-सीमा निर्धारित करने संबंधी जानकारी भी दी गई। सामान्य स्थानान्तरण केवल जून माह में होंगे तथा इससे इतर ट्रांसफर केवल अति आवश्यक होने पर ही कुलाधिपति के पूर्वानुमोदन से हो सकेगा। सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) एवं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बिहार लोक भवन में आज राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार एवं प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई पहलों की समीक्षा की गई तथा शिक्षा की गुणवत्ता, सुशासन और संस्थागत मजबूती सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, दक्षता, डिजिटल प्रशासन एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के लिए संचालित विभिन्न सुधारात्मक पहलों की विस्तृत समीक्षा की गई।

एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी प्रमाणपत्रों पर कार्रवाई के आदेश, मतदाता सूची सुधार पर जोर

 रांची राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर को लेकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश सभी जिलों के उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एसआइआर की प्रक्रिया में कई प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता मतदाताओं को हो सकती है। पाकुड़ एवं गढ़वा जिले में ऐसे मामलों की सूचना विभिन्न माध्यमों से आई है। इसलिए ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध कानून की संगत धाराओं के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी कहा है कि एसआइआर के दौरान जितने भी दस्तावेज जमा किए जाएंगे, उनका सत्यापन का दायित्व जिला निर्वाचन पदाधिकारी का है। इसलिए एसआइआर के लिए कोई भी नागरिक फर्जी अनधिकृत दस्तावेज न बनवाए और न ही ऐसा प्रयास किसी के द्वारा किया जाए। उन्होंने इसका पूर्णरूप से प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यमों से करने को कहा है। साथ ही ऐसे मामलों में उपायुक्तों को पूर्ण सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने राजनीतिक दलों से की सहयोग की अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर उत्पन्न होनेवाली शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई विभिन्न पृच्छाओं और शंकाओं का समाधान पीपीटी के माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि एसआइआर का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर की चरणबद्ध विस्तृत कार्ययोजना और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश को साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण एवं मुद्रण का कार्य 29 जून तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 30 जून से 29 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर भ्रमण कर गणना प्रपत्र भरने का का कार्य किया जाएगा। मतदान केंद्रों का युक्तीकरण 29 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पांच अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन होगा, जिस पर चार सितंबर तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। दावों और आपत्तियों के निष्पादन के बाद सात अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। उनके अनुसार, 30 जून से शुरू होने वाले गणना चरण के दौरान बीएलओ अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर नागरिकों को आंशिक रूप से पहले से भरा हुआ गणना प्रपत्र दो प्रतियों में वितरित करेंगे। यदि कोई घर बंद मिलता है, तो बीएलओ को प्रपत्र इकट्ठा करने के लिए कम से कम तीन बार जाना होगा। इस चरण के शुरुआती दिनों में मतदान केंद्रों पर कोई कैंप नहीं लगेगा, बल्कि यह सेवा पूरी तरह घर-घर जाकर दी जाएगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि मतदाताओं से दस्तावेजों की आवश्यकता को कम करने के लिए ''सेल्फ'' या ''पैरेंटल'' मैपिंग की जा रही है। यदि किसी मतदाता का नाम पिछले एसआइआर रोल में दर्ज है, तो उसे किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और सिविल व सैन्य क्षेत्र के सभी वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान पहले से कर प्राथमिकता के आधार पर उनकी गणना की जाएगी। मैपिंग के दौरान सामने आने वाली 15 प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए बीएलओ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

ग्रामीण विकास को मिलेगी रफ्तार: जिला परिषद अध्यक्ष ने कई योजनाओं की रखी आधारशिला

खरसावां झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने शुक्रवार को अलग-अलग पंचायतों में करीब 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाली विकास योजनाओं का शिलान्यास किया. इस दौरान उनके साथ जिला परिषद सदस्य काली चरण बानरा और सावित्री बानरा भी मौजूद रहे. जनप्रतिनिधियों ने शिलापट्ट का अनावरण और नारियल फोड़कर योजनाओं की शुरुआत की. इन योजनाओं की हुई शुरुआत शिलान्यास के तहत लाखनडीह और बाडामशाल में जलमीनार, मोहनबेड़ा और छोटा आमदा में पीसीसी सड़क, तेलाईडीह और सिंगाडीह में नहाने के घाट और पदमपुर में नाली निर्माण काम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और विकास कार्यों के लिए जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया. इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार उनकी प्राथमिकता है. पेयजल, सड़क, जल निकासी एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि सभी विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराया जाएगा जिससे कि ग्रामीणों को इसका सीधा फायदा मिल सके. समय पर कार्य पूरा नहीं करने वाले संवेदकों पर होगी कार्रवाई : सोनाराम बोदरा सोनाराम बोदरा ने स्पष्ट कहा कि विकास योजनाओं को पूरा करने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि सभी संवेदकों (ठेकेदारों) को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूरा करना होगा. समय पर काम पूरा नहीं करने वाले संवेदकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को भी योजनाओं की नियमित निगरानी करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनी और संबंधित अधिकारियों को जरूरी पहल करने का निर्देश देने की बात कही. मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे.

कोयला गैसीकरण परियोजनाओं से बिहार में बड़े निवेश की संभावना, केंद्र ने जताया भरोसा

पटना  कोयला गैसीकरण से संबंधित परियोजनाओं के माध्यम से बिहार में 8000 से 12000 करोड़ के निवेश की संभावना है। यह आकलन केंद्र सरकार का है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर केंद्रीय कोयला व खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे इस संदर्भ में विचार-विमर्श भी कर चुके हैं। आकलन है कि इस परियोजना के क्रियान्वयन से बिहार में 2500 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। देश में कोयले का प्रचुर भंडार है, लेकिन कच्चा तेल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस, मेथनाल आदि के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भरता है। वित्त वर्ष 2025 में मेथनाल, अमोनिया, अमोनियम नाइट्रेट और अन्य प्रतिस्थापन योग्य उत्पादों के लिए भारत का आयात बिल 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा था। कोयला गैसीकरण सीधे तौर पर इस बिल को प्रभावित करेगा। ऐसे में सरकार यह मानकर चल रही कि अगले दशक में कोयला गैसीकरण भारत के सबसे उभरते क्षेत्रों में से एक होगा। कई प्रकार के उत्पाद देने वाली इस तकनीकी के जरिये तीन लाख करोड़ तक के आयात को प्रतिस्थापित करने की क्षमता है। इसीलिए सरकार ने भी खजाने का मुंह खोल दिया है। इस वर्ष 37500 करोड़ से पहले जनवरी, 2024 में 8500 करोड़ रुपये के पैकेज को स्वीकृति दी गई थी। बिहार से विशेष अपेक्षा दुबे ने बताया कि भारत में 2021 में राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन शुरू हुआ। 2030 तक प्रतिवर्ष 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित है। बहरहाल परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने आरएफपी को सार्वजनिक किया है और सभी हितधारकों से सुझाव मांगा है। इसी क्रम में बिहार से भी अपेक्षा है। जोखिम भी अधिक वर्ष 2024 में कोयला मंत्रालय ने झारखंड में भारत की पहली भूमिगत कोयला गैसीकरण पायलट परियोजना शुरू की थी। 2030 तक 25 परियोजनाओं की स्थापना का लक्ष्य है। इसका आशय यह नहीं कि सब कुछ सहजता से हो जाएगा। इसमें पूंजीगत लागत अधिक है, क्रियान्वयन का जोखिम वास्तविक है और नीतिगत समर्थन महत्वपूर्ण। कोयला गैसीकरण संयंत्रों का निर्माण एक लंबी प्रक्रिया है और बड़े पैमाने पर इन्हें स्थापित करने में 10 से 15 वर्ष लग सकते हैं। बहरहाल इस मिशन को गति देने और उद्योग जगत की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 18 जून को मुंबई में तीसरा रोड-शो भी हो चुका है। क्या है कोयला गैसीकरण इसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे सिंथेटिक गैस (मुख्य रूप से कार्बन मोनोआक्साइड और हाइड्रोजन) में बदला जाता है। उस गैस का उपयोग ईंधन, उर्वरक और रसायन बनाने में होता है। जैसे कि मेथनाल, अमोनिया, यूरिया, हाइड्रोजन, तरल ईंधन आदि। संभावना कभी बिहार का अंश रहे झारखंड में भी कोयला के बड़े खदान हैं। ओडिशा भी निकटवर्ती है। बिहार तक कोयला आपूर्ति में अपेक्षाकृत कम लागत आएगी, लिहाजा उत्पाद का मूल्य नियंत्रण में होगा। l कोयले के गैसीकरण में पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। बिहार जल संसाधन से समृद्ध है। कमी यहां पानी के संचयन की है। संरचना बनाकर बाढ़ का पानी संचय किया जा सकता है। समस्या 20 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता वाले संयंत्र की स्थापना पर 600 करोड़ से 2000 करोड़ रुपये के बीच लागत आती है। इतनी बड़ी पूंजी लगाने से पहले निवेशक औद्योगिक परिवेश का आकलन करेंगे। बड़े व्यावसायिक संयंत्र के लिए लगभग 250 से 500 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। बिहार की विपुल जनसंख्या और कृषि पर निर्भरता के कारण भूमि अधिग्रहण तनिक दुरुह है।