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31 मार्च डेडलाइन! ये जरूरी प्रक्रिया न की तो बंद हो सकती है आपकी पेंशन

पटना बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ ले रहे लाखों लाभार्थियों के लिए प्रशासन ने सख्त चेतावनी जारी की है। सभी पेंशनधारियों को आगामी 31 मार्च 2026 तक अपना 'जीवन प्रमाणन' कराना अनिवार्य कर दिया गया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी न करने वाले लाभार्थियों की पेंशन तत्काल प्रभाव से रोक दी जाएगी। बांका में 72 हजार से अधिक आवेदन लंबित प्रशासन का यह कदम सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने और मृत व्यक्तियों के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया गया है। बांका जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 2,52,911 पेंशनधारी पंजीकृत हैं। सेवा केंद्रों के माध्यम से 22 दिसंबर 2025 से निःशुल्क प्रमाणीकरण की प्रक्रिया चल रही है। अब तक 1,80,821 लाभार्थियों का सत्यापन पूरा हो चुका है, लेकिन अभी भी 72,390 पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण लंबित है। इसके अलावा, 2,638 ऐसे मामले हैं जहां आधार मैपिंग की समस्या आ रही है। इन 6 प्रमुख योजनाओं पर लागू होगा नियम जीवन प्रमाणन की यह प्रक्रिया निम्नलिखित योजनाओं के लाभार्थियों के लिए अनिवार्य है:     मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना     इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना     विधवा पेंशन योजना     निःशक्तता (दिव्यांग) पेंशन योजना     लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना     अन्य राजकीय सामाजिक सुरक्षा योजनाएं गलत जानकारी पर होगी कड़ी कार्रवाई जिलाधिकारी (DM) नवदीप शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी जीवित व्यक्ति को गलत तरीके से मृत घोषित कर उसकी पेंशन बंद की जाती है, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी। वहीं, मृत पेंशनधारियों के मामले में परिजनों से लिखित पुष्टि अनिवार्य की गई है। पुष्टि न होने की स्थिति में पेंशन अस्थायी रूप से बंद कर इसकी सूचना पंचायत भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा की जाएगी।

सीएम नीतीश कुमार ने बिहार दिवस पर दी शुभकामनाएं, विकास का दोहराया संकल्प

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार दिवस पर प्रदेश एवं देशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने शुभकामना संदेश में कहा है कि बिहार का इतिहास गौरवशाली रहा है और वर्तमान में अपने निश्चय से बिहार का गौरवशाली भविष्य तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि बिहारवासी आपसी एकता, भाईचारा, सामाजिक समरसता एवं सछ्वाव बनाए रखते हुए बिहार के गौरव को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाएंगे। मुख्यमंत्री ने समृद्ध बिहार के संकल्प को पूरा करने के लिए समस्त बिहारवासियों का आह्वान किया है। 

शिवहर ने मारी बाजी: ई-KYC और VBG राम जी योजना में हजारों मजदूर जुड़े

शिवहर. शिवहर जिले ने जिले के कुल 72 हजार 193 मजदूरों का ई-केवाइसी करा 83.14 प्रतिशत उपलब्धि के साथ बिहार में पहला स्थान प्राप्त किया है। 13 दिसंबर 2025 को शिवहर जिला 56.28 प्रतिशत उपलब्धि के साथ राज्य में 15 वें स्थान था। शिवहर में योगदान के साथ ही जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने पूरी ताकत झोंक दी। जिलाधिकारी के लगातार निरीक्षण, अनुश्रवण एवं मार्गदर्शन के बाद शिवहर जिला अब बिहार में पहले स्थान पर पहुंच गया है। 83.14 प्रतिशत सक्रिय मजदूरों का हो चुका ई-केवाइसी जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने बताया है कि शिवहर जिले में 83. 14 प्रतिशत सक्रिय मजदूरों का ई-केवाइसी हो चुका है। जिले में कुल 86 हजार 830 सक्रिय मजदूर है। इनमें 72 हजार 193 मजदूरों का ई-केवाइसी कराया जा चुका है। बताया कि वीबी जी राम जी के तहत उन्हीं को काम मिलेगा। जिनका ई-केवाइसी होगा। जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन का यह प्रयास है कि कोई भी मौजूद मजदूर ई-केवाइसी से वंचित नहीं रहे। अन्यथा उनको बीवी जी राम जी के तहत काम मिलने में कठिनाई होगी। इसका पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार भी कराया जा रहा है ताकि कोई मजदूर छूटे नहीं। घर-घर जाकर किया जा रहा ई-केवाइसी बताया कि ई-केवाइसी के लिए प्रारंभ में पंचायत स्तर व फिर वार्ड स्तर पर कैंप लगाया गया था। अब कर्मी मनरेगा मजदूरों के घर-घर जा रहे हैं तथा उनका ई-केवाइसी कर रहे हैं। कुछ मजदूर अस्थायी रूप से बाहर रह रहे हैं, उनके परिवार के सदस्यों से उन्हें बुलवाकर ई-केवाइसी कराने को भी कहा जा रहा है। आवास सर्वे में शामिल लोगों व मजदूरों का भी ई-केवाइसी किया जा रहा है। अच्छे काम करने वाले कर्मचारियों को किया गया सम्मानित जिलाधिकारी प्रतिभा रानी द्वारा बताया गया कि ई-केवाइसी का कार्य बढ़ाने के लिए उप विकास आयुक्त बृजेश कुमार तथा निदेशक, एनईपी डीआरडीए हरि मोहन कुमार को निदेश दिया गया है। बताया कि विगत दिनों अच्छे कार्य करने वाले कर्मी एवं पदाधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया है। पुनः भविष्य में बेहतर काम करने वाले पदाधिकारी व कर्मियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही खराब प्रदर्शन करने वाले पदाधिकारी और कर्मी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

पटना-रांची जनशताब्दी में अफरा-तफरी: चलते ट्रेन के पहिये से धुआं, समय रहते टला हादसा

गयाजी गया-कोडरमा रेलखंड पर रविवार की सुबह उस समय अफरातफरी मच गई, जब पटना से रांची जा रही जनशताब्दी एक्सप्रेस के एक कोच के पहिये के पास से अचानक धुआं उठने लगा। घटना सुबह करीब 8:40 बजे की है, जब ट्रेन गया जंक्शन से खुलने के कुछ ही देर बाद बंधुआ रेलवे क्रासिंग के पास पहुंची थी। धुआं उठते देख यात्रियों में दहशत फैल गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। तकनीकी खराबी बनी वजह रेल सूत्रों के अनुसार, गार्ड से तीसरे डिब्बे के ब्रेक में तकनीकी खराबी के कारण जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। ब्रेक जाम होने से पहिये में अत्यधिक घर्षण पैदा हुआ, जिससे तेज धुआं निकलने लगा। पास के मानपुर-रसलपुर गेट से इसकी सूचना तत्काल चालक और गार्ड को दी गई। चालक की सतर्कता से टला हादसा स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चालक ने बिना देर किए ट्रेन को तुरंत रोक दिया। ट्रेन रुकते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कई यात्री एहतियातन अपने-अपने डिब्बों से उतरकर पटरी किनारे खड़े हो गए। हालांकि, मौके पर पहुंचे रेलकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए यात्रियों को शांत कराया। अग्निशामक यंत्र से पाया गया काबू रेलवे कर्मियों ने तत्काल अग्निशामक यंत्र का उपयोग कर पहिये के पास उत्पन्न गर्मी और धुएं पर काबू पा लिया। समय रहते कार्रवाई होने से एक बड़ा हादसा टल गया। अग्निशामक यंत्र से आग पर पाया गया काबू। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है, हालांकि कुछ समय तक भय का माहौल बना रहा। 30 मिनट तक बंद रहा क्रासिंग इस घटना के कारण बंधुआ रेलवे क्रासिंग करीब 30 मिनट तक बंद रहा, जिससे सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। स्थिति सामान्य होने के बाद लगभग 9:05 बजे ट्रेन को पुनः आगे के लिए रवाना किया गया। मरम्मत के बाद रवाना हुई ट्रेन रेल तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर ब्रेक की खराबी को ठीक किया। इसके बाद ट्रेन को सुरक्षित रूप से पहाड़पुर और कोडरमा की ओर रवाना कर दिया गया। रेल प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और यात्रियों को भरोसा दिलाया कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रियों ने ली राहत की सांस घटना के बाद कुछ देर तक दहशत में रहे यात्रियों ने स्थिति सामान्य होने पर राहत की सांस ली। यात्रियों ने चालक और रेलकर्मियों की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, जिनकी सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया।  

नशे का बड़ा खेल बेनकाब: साबूदाने की आड़ में हेरोइन तस्करी, 2 आरोपी गिरफ्तार; असम से बिहार तक नेटवर्क

समस्तीपुर बिहार के समस्तीपुर जिले में पुलिस और नारकोटिक्स सेल के एक संयुक्त अभियान ने एक नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके परिणामस्वरूप दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और लगभग 6 लाख रुपए मूल्य की हेरोइन जब्त की गई है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 21 मार्च, 2026 की सुबह एक विशेष खुफिया जानकारी मिली थी कि एक नशीले पदार्थों के गिरोह के सदस्य हेरोइन की एक खेप लेकर शाहपुर पटोरी रेलवे स्टेशन पर पहुंचेंगे। तेजी से कार्रवाई करते हुए, स्थानीय पुलिस अधिकारियों और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को मिलाकर एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने एक जाल बिछाया और स्टेशन के पास के इलाके की घेराबंदी कर दी। 4 डिब्बों में छिपाकर रखी थी हेरोइन अभियान के दौरान, दो व्यक्तियों (एक पुरुष और एक महिला) को स्टेशन के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में घूमते हुए पकड़ा गया। आरोपियों की पहचान वैशाली निवासी राहुल कुमार (26) और असम निवासी शांति देवी के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान, पुलिस ने हेरोइन जिसे स्थानीय रूप से 'कोटा' कहा जाता है बरामद की, जिसे साबूदाना (sago) के चार डिब्बों के अंदर छिपाकर रखा गया था। इसके अलावा, उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन, नकदी, रेलवे टिकट और पहचान पत्र भी जब्त किए गए। बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क की संलिप्तता का संदेह शुरुआती पूछताछ में पता चला कि आरोपी पूर्वोत्तर राज्यों से बिहार में नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थे। पुलिस को एक बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क की संलिप्तता का संदेह है और वह गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने तथा उनके आपराधिक संपर्कों का पता लगाने पर काम कर रही है। पटोरी पुलिस स्टेशन में NDPS अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज किया गया है, और आगे की जांच जारी है।  

संभल जाएं लोग! अगले 48 घंटों में इस राज्य में मौसम का कहर, विभाग ने दी चेतावनी

रांची झारखंड में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने लोगों को चौंका दिया है। आमतौर पर मार्च में गर्मी बढ़ने लगती है, लेकिन इस बार ठंड ने फिर से वापसी कर ली है। राजधानी रांची में न्यूनतम तापमान गिरकर 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि लातेहार में यह 12 डिग्री दर्ज किया गया है, जिससे लोगों को ठंड का एहसास होने लगा है। मौसम में इस बदलाव की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ है, जिसका असर पूरे राज्य में देखा जा रहा है। इसके कारण ठंडी हवाएं चल रही हैं और तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों तक ऐसा ही मौसम बने रहने की संभावना है। राज्य में येलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि स्थिति पहले की तुलना में थोड़ी बेहतर हुई है, लेकिन लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है, जिससे ठंड और बढ़ सकती है। इन जिलों में वज्रपात की संभावना अधिक लातेहार, लोहरदगा, पलामू और गढ़वा जिलों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। इन इलाकों में बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना अधिक है, क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव सबसे पहले इन्हीं क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इधर, पाकुड़ जिले में पिछले 24 घंटों के दौरान जोरदार बारिश दर्ज की गई है, जिससे मौसम पूरी तरह बदल गया है। कई स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। राज्य के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री के बीच बना हुआ है, लेकिन दिन में चल रही ठंडी हवाएं लोगों को राहत दे रही हैं। जहां एक ओर आम लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फिलहाल झारखंड में मौसम का यह बदला हुआ रूप चर्चा का विषय बना हुआ है।  

स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव: RIMS में पूरी जांच सुविधा, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

रांची. झारखंड की राजधानी रांची के रिम्स में अब मरीजों को लगभग हर तरह की जांच की सुविधा एक ही जगह मिलने जा रही है। ट्रामा सेंटर लैब में पहले से 24 घंटे जांच की सुविधा उपलब्ध है, वहीं अब कई नई और महंगी जांचें भी शुरू की जा रही हैं। इन जांचों के शुरू होने से मरीजों को समय पर बीमारी का पता चलेगा और इलाज जल्दी शुरू हो सकेगा। इससे खासकर गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक निजी लैब में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। रिम्स प्रबंधन के अनुसार, कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों की जांच अब यहीं संभव होगी। जिन जांचों के लिए निजी लैब में 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते थे, वे फिलहाल फ्री या बहुत कम दर पर उपलब्ध कराई जाएंगी। आगे चलकर इन जांचों की दरें बाजार से 90 प्रतिशत तक कम रखने की तैयारी है। ये 6 नई जांचें होंगी शुरू, मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ CA-125 जांच: यह महिलाओं में अंडाशय (ओवरी) के कैंसर की पहचान के लिए महत्वपूर्ण जांच है। CA-19-9 जांच: अग्न्याशय (पैंक्रियाज) और पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर का पता लगाने में सहायक। एंटी-TPO जांच: थायरायड ग्रंथि से जुड़ी बीमारियों की पहचान के लिए उपयोगी। एंटी-CCP जांच: जोड़ों की बीमारी (रूमेटाइड आर्थराइटिस) की शुरुआती पहचान में सहायक। मूत्र प्रोटीन जांच: किडनी से जुड़ी बीमारियों और शरीर में प्रोटीन की कमी या लीकेज का पता लगाने के लिए जरूरी। RF (रूमेटाइड फैक्टर) जांच: गठिया रोग की पुष्टि और उसकी गंभीरता जानने में सहायक। ट्रामा सेंटर लैब में 24 घंटे मिल रही ये सुविधाएं  रिम्स के ट्रामा सेंटर स्थित अत्याधुनिक लैब में पहले से ही 24×7 जांच की सुविधा उपलब्ध है। यहां 4-5 घंटे के भीतर रिपोर्ट मिल रही है। उपलब्ध प्रमुख जांचों में शामिल हैं: रक्त शर्करा जांच (ब्लड शुगर), गुर्दा कार्य जांच (यूरिया, क्रिएटिनिन), यकृत कार्य जांच (लिवर फंक्शन), इलेक्ट्रोलाइट जांच (सोडियम, पोटैशियम), कोलेस्ट्राल जांच (लिपिड प्रोफाइल), हार्मोन जांच (टी3, टी4, टीएसएच, कोर्टिसोल), कैंसर संबंधी जांच (सीईए, एएफपी, एचसीजी, एलडीएच), गंभीर संक्रमण जांच (सीआरपी, प्रोकैल्सीटोनीन, डी-डाइमर, ट्रोपोनिन), संक्रामक रोग जांच (एचआईवी,हेपेटाइटिस बीवसी), सामान्य पैथोलाजी जांच (सीबीसी, पीटी,आइएनआर, मूत्र जांच, शरीर के तरल की जांच) आदि। निजी लैब पर निर्भरता होगी कम इन सुविधाओं के विस्तार से अब मरीजों को निजी लैब का रुख नहीं करना पड़ेगा। जहां पहले एक जांच के लिए हजारों रुपये खर्च होते थे, वहीं अब रिम्स में सस्ती या मुफ्त जांच उपलब्ध होगी। रिम्स के डाक्टरों का मानना है कि इससे गरीब मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा और समय पर जांच व इलाज से गंभीर बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। पहले भी उठती रही है जांच सुविधा बढ़ाने की मांग रिम्स में महंगी जांचों की सुविधा शुरू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। कई बार मरीजों और जनप्रतिनिधियों ने यह मुद्दा उठाया कि सरकारी अस्पताल में इलाज के बावजूद जांच के लिए निजी लैब पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे इलाज महंगा हो जाता है। खासकर कैंसर और हार्मोन से जुड़ी जांचों के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता था। इन नई सुविधाओं के शुरू होने से आयुष्मान भारत योजना और बीपीएल श्रेणी के मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा। अब उन्हें जांच के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ेगा। एक ही परिसर में जांच और इलाज दोनों की सुविधा मिलने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी।

संस्कृति से राजनीति तक: बिहार दिवस पर PM मोदी और शाह ने दिलाई आपातकाल की याद

पटना. बिहार दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दी गई शुभकामनाएं राजनीतिक रूप से भी कई संकेत छोड़ गई हैं। अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को रेखांकित करते हुए इसे देश के लिए मार्गदर्शक बताया। मोदी एक्स पर बिहार दिवस के अवसर पर राज्य के अपने सभी परिवारजनों को अनेकानेक शुभकामनाएं दीं। PM मोदी ने लिखा, "भारतीय विरासत को भव्यता और दिव्यता प्रदान करने वाला हमारा यह प्रदेश आज प्रगति के नित-नए अध्याय गढ़ने में जुटा है।" मुझे विश्वास है कि विकसित बिहार के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में यहां के कर्मठ एवं ऊर्जावान लोगों का समर्पण और सामर्थ्य बहुत काम आएगा। बिहार को बताया बौद्धिक चेतना की भूमि गृह मंत्री ने जिस तरह बिहार को सामाजिक न्याय और बौद्धिक चेतना की भूमि बताया, उसे राज्य की राजनीति के मौजूदा विमर्श से जोड़कर देखा जा रहा है। खासकर जब बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति लंबे समय से केंद्र में रही है, ऐसे में उनका यह बयान भाजपा के व्यापक सामाजिक विस्तार के प्रयास का संकेत माना जा रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसी ऐतिहासिक शिक्षण परंपराओं का उल्लेख कर उन्होंने बिहार के गौरवशाली अतीत को राष्ट्रीय पहचान से जोड़ा। यह भी संदेश देने की कोशिश रही कि केंद्र सरकार बिहार की बौद्धिक विरासत को सम्मान देने के साथ उसे विकास के एजेंडे में शामिल कर रही है। स्वतंत्रता संग्राम और आपातकाल का जिक्र करते हुए शाह ने बिहार की राजनीतिक जागरूकता और संघर्षशीलता को रेखांकित किया। इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती से जोड़ते हुए उन्होंने राज्य की भूमिका को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने का प्रयास किया। सामाजिक संदेश देने की कोशिश बिहार में आगामी सत्ता परिवर्तन समीकरणों को देखते हुए इस तरह के संदेशों के जरिए भाजपा लोगों के बीच भावनात्मक और वैचारिक जुड़ाव मजबूत करना चाहती है। विकास, विरासत और सामाजिक समरसता को एक साथ रखकर पार्टी अपने एजेंडे को व्यापक बनाने में जुटी है। संदेश के अंत में गृह मंत्री ने बिहार के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इंटरनेट मीडिया पर इस पोस्ट को व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है, जो यह दर्शाता है कि बिहार दिवस जैसे अवसर अब राजनीतिक संवाद का भी महत्वपूर्ण मंच बनते जा रहे हैं।

बिहार की राजनीति में हलचल: प्रशांत किशोर बोले- CM नीतीश कुमार छोड़ सकते हैं कुर्सी, BJP की बढ़ी दावेदारी

पटना जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपना पद छोड़ रहे हैं क्योंकि केंद्र में सत्ता में मौजूद भाजपा, जिसने पिछले विधानसभा चुनाव में NDA को “तैयार किया हुआ जनादेश” दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी, अब बिहार में अपना हिस्सा चाहती है। ईद के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने दोहराया कि जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार राज्य का नेतृत्व करने के लिए “शारीरिक और मानसिक रूप से अयोग्य” हैं। ‘मेरी भविष्यवाणी सही साबित हुई’ प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि नीतीश कुमार अपनी मर्जी से पद छोड़ रहे हैं या किसी दबाव में ऐसा कर रहे हैं। लेकिन एक तरह से मेरी बात सही साबित हुई है। विधानसभा चुनाव से पहले जब मैंने कहा था कि NDA जीत भी जाए, तब भी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा, तब मेरी आलोचना हुई थी।” 47 वर्षीय किशोर ने आगे कहा, “मेरी यह भविष्यवाणी कि NDA हार सकती है, भले ही गलत साबित हुई हो, लेकिन नीतीश कुमार के बारे में मेरी बात सही निकली। जो व्यक्ति स्पष्ट रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से अयोग्य है, वह कैसे कुछ ही महीनों में, जब गठबंधन को भारी बहुमत मिला हो, मुख्यमंत्री पद छोड़ सकता है?” ‘जनादेश तैयार किया गया था’ IPAC के संस्थापक रहे किशोर, जिन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियान को संभालकर बड़ी सफलता हासिल की थी, ने आरोप लगाया कि पिछले बिहार चुनाव में NDA को जो जनादेश मिला, वह “तैयार किया हुआ” था। उन्होंने कहा, “वोट 10,000 रुपये बांटकर खरीदे गए।” उनका इशारा चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की ओर था, जिसके तहत करीब 1.50 करोड़ महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए गए थे। भाजपा और केंद्र की भूमिका पर सवाल हल्के-फुल्के अंदाज में किशोर ने यह भी कहा, “केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा, केंद्रीय गृह मंत्री और चुनाव आयोग ने NDA को बड़ा जनादेश दिलाने में अपनी-अपनी भूमिका निभाई होगी। इसलिए यह स्वाभाविक है कि केंद्र की पार्टी अब बिहार में अपना हिस्सा चाहती है।” राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए नीतीश कुमार दिल्ली जा सकते हैं और उनके बाद बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बन सकता है। कौन बनेगा मुख्यमंत्री? जवाब टाला हालांकि जब किशोर से पूछा गया कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठ सकता है, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “मेरी अपनी पार्टी को लेकर की गई भविष्यवाणी ही गलत साबित हुई थी इसलिए इस पर कुछ कहना ठीक नहीं होगा।” ‘बिहार मेरा मिशन, अन्य राज्यों पर नहीं ध्यान’ राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले किशोर, जिन्होंने 2021 में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार भारी बहुमत दिलाने के बाद कंसल्टेंसी छोड़ दी थी, ने पड़ोसी राज्यों के चुनावों पर कोई भविष्यवाणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने गृह राज्य बिहार के लिए एक मजबूत विकल्प तैयार करने के उद्देश्य से राजनीति में सक्रिय भूमिका अपनाई है। पिछले चुनाव में मैंने पूरी कोशिश की, और जन सुराज पार्टी की हार को स्वीकार करते हुए अब फिर से जनता के बीच जा रहा हूं। जब तक बिहार में मेरा मिशन पूरा नहीं होता, मैं दूसरे राज्यों के बारे में नहीं सोचूंगा।” निशांत की एंट्री पर क्या बोले? नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री को लेकर पूछे गए सवाल पर किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को सार्वजनिक जीवन में आने का अधिकार है। उन्होंने कहा, “हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं, हालांकि यह बिहार में किसी नेता द्वारा अपने परिवार को आगे बढ़ाने का एक और उदाहरण है।”

Bihar Schools Update: नए सत्र की शुरुआत अप्रैल से, 1.33 करोड़ बच्चों को किताबों का वितरण

पटना. राज्य के सभी 70 हजार सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में अप्रैल से नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होगी। इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को एक से दस अप्रैल के बीच पाठ्य-पुस्तकों को वितरित करने का निर्देश दिया है। इससे एक करोड़ 33 लाख बच्चे लाभान्वित होंगे। बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक प्रकाशन निगम के एक उच्च पदाधिकारी ने बताया कि सभी 38 जिलों को किताबों के सेट यानी किट उपलब्ध करा दिया गया है। ये किताबें संकुल संसाधन केंद्रों से संबंधित विद्यालयों में उपलब्ध करायी जा रही है। एक करोड़ से ज्यादा सेट तैयार प्रधान शिक्षकों या प्रधानाध्यापकों के साथ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी बच्चों के बीच पुस्तकों के वितरण सुनिश्चित करेंगे। पुस्तकों का एक करोड़ 33 लाख 85 हजार सेट तैयार कराया गया है। शिक्षा विभाग के मुताबिक, सरकारी विद्यालयों में पहली से पांचवीं कक्षा तक नामांकित बच्चों की संख्या 83,21,515 है। सत्र के शुरूआत में ही बच्चों को मिलेगी किताबें वहीं कक्षा छह से आठ तक के नामांकित बच्चों की कुल 50,51,769 है। बच्चों की जरूरत के हिसाब से पुस्तकों का सेट तैयार कर उसे विद्यालयों तक उपलब्ध करायी जा रही है। इसके लिए संकुल संसाधन केंद्रों को समन्वयक की भूमिका दी गई है। लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सत्र की शुरुआत में ही सभी बच्चों के पास अपनी किताबें हों ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।