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डिलीवरी से मना करते रहे डॉक्टर, दर्द से कराहती रही गर्भवती – अस्पताल की बड़ी लापरवाही

सोनपुर प्रसव पीड़ा से कराहती एक स्वस्थ गर्भवती महिला को एचआईवी पॉजिटिव बताकर प्रसव कराने से इनकार किए जाने पर शनिवार की सुबह सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल में लोग हंगामा करने पर उतारू हो गए। इससे यहां अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। बताया गया है कि नयागांव थाना क्षेत्र की गर्भवती महिला पहले भी यहां जांच के लिए कई बार आ चुकी थी। इस दौरान प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को लेकर जब स्वजन अस्पताल पहुंचे, तो जांच के बाद उसे एचआईवी पॉजिटिव बताया गया। वहीं, प्रसव कराने से इनकार कर दिया गया। इस दौरान महिला दर्द से कराहती रही और स्वजन स्वास्थ्यकर्मियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन अस्पताल का कोई भी कर्मी उसके समीप आने को तैयार नहीं हुए।इस दौरान स्वजनों के हंगामा और आसपास से जुटे लोगों की भीड़ से जब स्थिति बेकाबू होने लगी, तब आशा, ममता और परिवार की महिलाएं उसे अस्पताल के भीतर ले गई। जहां महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। एचआईवी पॉजिटिव नहीं थी महिला बताया गया है कि इसके पहले अस्पताल के तकनीशियन की जांच रिपोर्ट पर विश्वास नहीं होने पर एक निजी लैब से महिला की जांच कराई गई, तो उस रिपोर्ट में महिला को एचआईवी पॉजिटिव नहीं बताया गया।इस संबंध में पूछे जाने पर अनुमंडलीय चिकित्सालय की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने संबंधित कर्मियों को डांट-फटकार लगाई है। महिला के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए, जबकि महिला एचआईवी पॉजिटिव नहीं थी। उन्होंने बताया है कि महिला पहले से भी दो बच्चों की मां है। उसके पति बाहर कमाने गए है। अत्यंत ही गरीब परिवार की महिला आर्थिक अभाव के कारण किसी निजी अस्पताल में इलाज कराने में सक्षम नहीं थी। उसने प्रसव के लिए अनुमंडल चिकित्सालय को ही सुरक्षित समझा। इस घटना से अस्पताल की सेवा भाव के प्रति आम लोगों के बीच एक नकारात्मक संदेश जाएगा। ऐसी ही मरीजों का इलाज करने के लिए सरकार ने चिकित्सालय में सुरक्षित यूनिफार्म तथा एक अलग व्यवस्थित कमरे का सभी तरह का प्रबंध किया है।

विधानसभा में सीएम हेमंत बोले- झारखंड का ‘डेवलपमेंट मॉडल’ अपना रहे दूसरे राज्य

रांची. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य सरकार के कार्य कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिख रहे हैं. पहले हम दूसरे राज्यों के कार्यों को सराहते हुए उन्हें अपने राज्य में अपनाते थे. अब दिन पलट गये हैं. झारखंड के डेवलपमेंट का मॉडल दूसरे राज्य अपना रहे हैं. यह छोटी बात नहीं है. कहावत है कि पेड़ लगायेंगे बबूल का, तो आम कहां से फलेगा. लेकिन विपक्ष द्वारा राज्य में लगाये गये बबूल के पेड़ों को हटा कर हमने आम के वृक्ष लगाये. अब उसका लाभ राज्य के हर व्यक्ति को मिल रहा है. वह सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा के बाद सदन में बोल रहे थे. झारखंड में बनेगा अंगदान कानून मौके पर उन्होंने झारखंड सरकार द्वारा अंगदान पर कानून बनाने की घोषणा की. श्री सोरेन ने कहा कि दुर्घटना में ब्रेनडेड हो गयी 10 महीने की बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम का अंगदान उसके परिवार ने किया. उसकी माता शेरिन अब्राहम और पिता अरुण अब्राहम ने अपने जिगर के टुकड़े को देश के लिए समर्पित कर दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार झारखंड में अंगदान को लेकर कानून बनायेगी और इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए काम करेगी. सरकार की उपलब्धियों को मानने लगा है विपक्ष इसके पहले सीएम हेमंत सोरेन सदन में विपक्ष को धन्यवाद दिया. कहा कि सदन में विपक्ष के गिने-चुने लोग ही मौजूद हैं. ऐसा लगता है विपक्ष ने भविष्य में होनेवाली स्थिति को पहले ही भांप लिया है. विपक्ष की उपस्थिति देखकर लग रहा है कि वह भी सरकार की उपलब्धियों को मानने लगा है. इसी कारण विपक्ष ने अभिभाषण में किसी तरह का संशोधन प्रस्ताव भी नहीं लाने की जरूरत नहीं समझी. राज्यपाल ने जिन चीजों को सदन के समक्ष रखा, वह सभी चीजें राज्य की जनता के सामने हैं. देश की सभी डबल इंजन की सरकारें ध्वस्त होंगी सीएम ने कहा कि सबने राज्य ने डबल इंजन की सरकार का हाल देखा. कई दूसरे राज्य अभी देख भी रहे हैं. काफी जल्द देश की सभी डबल इंजन की सरकारें ध्वस्त होंगी. कई चुनौतियों के बाद भी हमने संविधान और परंपराओं को मजबूत करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की. अगर नीयत साफ और संकल्प दृढ़ हो, तो सरकार सीमित संसाधनों में भी काफी काम कर सकती है. 25 सालों के झारखंड में हमने जो लकीर खींची है, उसे मिटाना विपक्ष के बस की बात नहीं है. राज्य सरकार के कार्यों से विपक्ष घबराया मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में हम विपक्ष की बात संयम से सुनते हैं, लेकिन दिल्ली में विपक्ष के नेता को बोलने से रोक दिया जाता है. राज्य सरकार के कार्यों से विपक्ष घबरा गया है. उन्होंने कहा कि हमने झारखंड को अग्रणी बनाने का संकल्प लिया है. यह बहुत बड़ी चुनौती है. केंद्र के साथ हमारे संबंध भी बहुत खुले तौर पर सबके सामने हैं, लेकिन इच्छाशक्ति और दृढृ संकल्प के साथ हर असंभव काम संभव हो सकता है. सरकार की मूल जिम्मेवारी गरीब-गुरबा का सहारा बनना है और हम पूरी सफलता के साथ यह काम कर रहे हैं. केंद्र को किसान और मजदूर के भविष्य की चिंता नहीं श्री सोरेन ने कहा कि देश व राज्य का विकास धरातल पर काम करने से होता है. झाखंड सरकार गांव से चलने वाली सरकार है. हम जानते हैं कि गांव मजबूत होगा, तभी शहर और राज्य मजबूत होगा. दिल्ली में फर्जी एआइ समिट किया जा रहा है. चीन से लाकर सामान वहां दिखाया जा रहा है. विपक्ष के शीर्ष नेताओं की यही हालत है. पूरा देश गिरवी रखा जा रहा है. केंद्र को किसान, मजदूर के भविष्य की चिंता नहीं है. चर्चा धान क्रय के भविष्य पर होनी चाहिए. नमक, तेल, दाल, चावल, आटा सब बाहर से मंगायेंगे, तो यहां के किसान क्या करेंगे. किसान फिर से आत्महत्या करने के लिए मजबूर होंगे. देश के 80% रोज कमाने-खाने वाले लोगों के बारे में नहीं सोचा जा रहा है. सीएम ने कहा कि मणिपुर की हालत बिगड़ती जा रही है. एक राज्य दूसरे राज्य के पुलिस फोर्स से खूनी संघर्ष करता है. हिंदू-मुस्लिम के जहर का समंदर बना दिया गया है. मानवता तार-तार कर दी गयी है. विरोध में आवाज उठानेवालों पर देशद्रोह का आरोप लगा कर चुप कराया जा रहा है. अब तो एआइ समिट का विरोध करने वालों को भी देशद्रोही बताया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस वैश्विक मंच पर शिरकत करने मैं दाओस गया था, उसके मुख्य अतिथि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप थे. वहां उनका भी विरोध हुआ, लेकिन किसी को देशद्रोही नहीं कहा गया. देश ऐसे दौर से गुजर रहा है, कि देश के अंदर ही हम खुद को बेगाना महसूस करते हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों के खाते में 100 करोड़ किए ट्रांसफर

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज (शनिवार) 2 लाख से अधिक किसानों के खाते में 100 करोड़ रूपए से अधिक की राशि ट्रांसफर की. जानकारी के मुताबिक, कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत साल 2025 में बारिश से आई बाढ़ और मोन्था तूफान की वजह से बर्बाद हुए फसलों की क्षति के लिए किसानों को डीबीटी के जरिए रुपए ट्रांसफर किए हैं. सीएम नीतीश कुमार ने क्या कहा? कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान इस राशि का उपयोग आगामी फसलों के लिए कर सकेंगे. कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत सभी बाढ़ प्रभावित किसानों को अनुदान राशि दी जा रही है. राज्य सरकार सभी बाढ़ पीड़ित किसानों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. हमलोग किसानों की तरक्की के लिए लगातार काम कर रहे हैं. हमारा मानना है कि राज्य के खजाने पर बाढ़ पीड़ितों का पहला अधिकार है. इन जिलों के किसानों को दिए गए रुपए जानकारी के मुताबिक, साल 2025 में भारी बारिश से आई बाढ़ और मोथा तूफान से राज्य के 13 जिलों (बेगूसराय, भोजपुर, दरभंगा, गयाजी, कैमूर, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, शिवहर, सीतामढ़ी और सुपौल) में काफी फसल क्षति हुई थी. इन जिलों के 53 प्रखंड और 493 पंचायत के किसान प्रभावित हुए थे. जिसके लिए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत प्रभावित किसानों को फसल क्षतिपूर्ति अनुदान दिया जा रहा है. किसानों से मांगे गए थे ऑनलाइन आवेदन कृषि विभाग की तरफ से सभी प्रभावित जिलों के किसानों से ऑनलाइन आवेदन प्राप्त किया गया. इसके बाद जिलों की ओर से इसका सत्यापन किया गया. आज 2 लाख 2 हजार किसानों को 113 करोड़ 16 लाख रूपए सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए. राज्य में किसानों को लेकर कई कार्य सरकार की तरफ से किए जा रहे हैं. इसी क्रम में किसानों की डिजिटल आईडी भी बनाई जा रही है. ताकि हर एक योजना का लाभ उन्हें मिल सके.

अंचल कार्यालयों में सुरक्षा बढ़ाने अब सीसीटीवी से निगरानी: विजय सिन्हा

पटना. राज्य के सभी 537 अंचलों में सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद मानिटरिंग में लगे अधिकारी अंचल कार्यालयों की हरेक गतिविधि को आनलाइन देख सकेंगे। उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी अंचलों में उच्च गुणवत्ता वाले 2 एमपी कलर एवं आडियो सपोर्टेड कैमरे, 16 चैनल एनवीआर तथा 30 दिनों की अनिवार्य रिकार्डिंग की व्यवस्था होगी। ये दिशा निर्देश सीसीटीवी कैमरों की गुणवत्ता और कार्यालय की सुरक्षा बनाये रखने के उद्देश्य से जारी किया गया है। इसका सभी स्तर पर सख्ती से पालन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यालय आने वाले आम लोगों के लिए बैठने, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था रहेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कैमरों को बिहार स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (बिस्वान) अथवा हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़कर रिमोट मानिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी। अंचल अधिकारी कक्ष, प्रशासनिक कक्ष और मुख्य द्वार को अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कवरेज में रखा जाएगा। इसके माध्यम से पटना स्थित सेंट्रल कमांड सेंटर से सभी अंचल कार्यालयों की निगरानी की जा सकेगी। सभी जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता, एसडीओ एवं डीसीएलआर मोबाइल ऐप के जरिए किसी भी समय लाइव फीड देख सकेंगे। अंचल अधिकारी को भी अपने मोबाइल पर सभी कैमरों की निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।

झारखंड सरकार ने कहा- नहीं बढ़ेगी रिटायरमेंट की उम्र

रांची. झारखंड में सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की खबरों पर विराम लग गया है।   संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने विधानसभा में बताया है कि सरकार के पास कोई ऐसा प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इससे पहले विधायक जनार्दन पासवान ने बड़ी संख्या में पदों को रिक्त होने का हवाला देते हुए सेवानिवृति की आयु 62 वर्ष करने की मांग की। जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार रिक्त पदों पर शिक्षित और कुशल युवाओं को मौका देगी। मंत्री ने यह भी कहा कि आउटसोर्स कर्मियों को एजेंसी पूरा वेतन भुगतान करे, सरकार इसे सुनिश्चित करेगी। साथ ही आउटसोर्स से बहाली में स्थानीय को ही मौका दिया जायेगा तथा आरक्षण नीति भी लागू करनी होगी। पिछले वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट राज्य की प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2024-25 में स्थिर मूल्य पर 68,612 रुपये से बढ़कर वर्तमान मूल्य पर 1,14,271 रुपये हो गई है। इस साल वर्तमान मूल्य पर राज्य की प्रति व्यक्ति आय 1,24,079 होने का अनुमान जताया गया था। राजकीय अर्थव्यवस्था में लगातार वृद्धि हुई है। साल 2021-22 और 2023-24 के बीच राज्य के स्थिर मूल्य पर जीएसडीपी में औसतन वार्षिक 7.7% और वर्तमान मूल्य पर जीएसडीपी में 10.7% की दर से वृद्धि, वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्थिर मूल्य पर 6.7% और वर्तमान मूल्य पर 9.8% की वृद्धि होने का अनुमान। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से राज्य की तुलना करें तो राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में झारखंड के जीएसडीपी में पिछले वर्षों में सुधार हुआ है। 

पटना नगर निगम में विज्ञापन संशोधन विनियम पारित

पटना. पटना नगर निगम पर्षद की चतुर्थ विशेष बैठक शुक्रवार को होटल मौर्य में हुई। इसमें बिहार नगरपालिका क्षेत्र विज्ञापन नियमावली 2023 एवं बिहार नगरपालिका क्षेत्र विज्ञापन (संशोधन) नियमावली 2025 के प्रविधानों के आलोक में पटना नगर निगम विज्ञापन (संशोधन) विनियम 2025 के प्रारूप पर विमर्श किया गया। सुझावों के बीच विज्ञापन संशोधन विनियम पारित किया गया। अध्यक्षता महापौर सीता साहू ने की। सदस्यों ने ध्वनिमत से नए वित्तीय वर्ष से इसके क्रियान्वयन की मांग की। वर्ष 2014 से विज्ञापन शुल्क की वसूली नहीं होने के कारण नगर निगम को प्रतिवर्ष लगभग 70 से 120 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब तक अनुमानित 840 से 1440 करोड़ रुपये के विज्ञापन शुल्क की क्षति का अनुमान है। विज्ञापन एवं होर्डिंग से संबंधित 22 मामले अभी न्यायालय में लंबित हैं। पार्षदों ने कहा, सशक्त स्थायी समिति ने विनियम बनाने पर अपना काम सही से नहीं किया। सात फरवरी को आयोजित निगम पर्षद की 10वीं साधारण बैठक में कई पार्षदों ने प्रस्तावित विज्ञापन नियमावली पर असहमति जताई थी। इसके बाद विशेष बैठक बुलाई गई थी। पार्षद विनय कुमार पप्पू ने अवैध विज्ञापनों को जनप्रतिनिधियों के प्रचार को संरक्षण का संकेत बताते हुए 20 वर्षों के राजस्व का श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। एजेंसियों की जांच, बकाया वसूली, अवैध होर्डिंग हटाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग की। पार्षद सतीष गुप्ता ने पुराने डिफाल्टरों से पैसा सख्ती से वसूल करने की मांग की। सशक्त स्थायी समिति के सदस्य बिनोद कुमार ने कहा कि सार्वजनिक परिसंपत्तियों पर लगने वाले विज्ञापन की भी दर तय हो। पार्षद इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी ने अवैध होर्डिंग पर कार्रवाई करते हुए पुलिस चौकी व ट्रैफिक पुलिस पोस्ट के विज्ञापन को भी देखने को कहा। बैठक में उप महापौर रेशमी कुमारी भी मौजूद रहीं। ई-निविदा से होगा एजेंसी का चयन, मनमानी पर 200 प्रतिशत जुर्माना विज्ञापन के लिए नगर निगम अंतर्गत वर्गीकृत प्रधान मुख्य सड़क, मुख्य सड़क एवं अन्य सड़कों के लिए जोन निर्धारण किया गया है। पंजीकरण शुल्क तीन साल के लिए 1,50,000 रुपये है, जबकि नवीकरण शुल्क 60,000 रुपये रखा गया है। एजेंसी का चयन ई-निविदा के माध्यम से होगा। मनमानी करने पर 200 प्रतिशत जुर्माना लगेगा। पार्षद डॉ. आशीष कुमार सिन्हा के प्रस्तावों ने अनुसार, जोन के भौतिक सत्यापन के साथ ही सब जोन का भी निर्धारण होगा। सार्वजनिक स्थलों तथा निजी भूमि/भवन पर विज्ञापन दर कम से कम 50 रुपये वर्गफीट निर्धारित किया जाएगा। डा. आशीष ने जुर्माना का प्रविधान सख्त और स्पष्ट करने पर जोर दिया। कहा कि 2007 नहीं, विज्ञापन नियमावली 2023 के प्रविधानों को शामिल किया जाए। विज्ञापन (संशोधन) विनियम का उद्देश्य अवैध होर्डिंग्स पर नियंत्रण : यूनिपोल सहित सभी अनधिकृत संरचनाओं पर पूर्ण रोक। राजस्व वृद्धि : नगर निकायों के लिए स्थायी एवं पारदर्शी आय सुनिश्चित करना। सड़क सुरक्षा : यातायात नियमों का कड़ाई से पालन एवं दुर्घटनाओं में कमी। शहरी सुंदरीकरण : सुव्यवस्थित एवं आकर्षक नगर छवि का निर्माण। पारदर्शी प्रक्रिया : समस्त अनुमति प्रक्रिया पूर्णतः आनलाइन एवं पारदर्शी। विज्ञापन की चार श्रेणियां बड़े होर्डिंग्स/यूनिपोल : सार्वजनिक भूमि या निजी संपत्ति पर स्थापित बड़े आकार के विज्ञापन बोर्ड। सार्वजनिक सुविधा स्थल : बस शेल्टर, पार्क, फुटपाथ जैसी सुविधाओं पर विज्ञापन। वाहन-आधारित विज्ञापन : बसों, आटो, अन्य वाहनों पर प्रदर्शित विज्ञापन सामग्री। स्व-विज्ञापन : व्यवसाय/प्रतिष्ठान द्वारा अपने परिसर पर लगाए गए नाम/पहचान बोर्ड। (नोट : उपरोक्त चार श्रेणियों के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के विज्ञापन की अनुमति नहीं है।) प्रतिबंधित विज्ञापन सामग्री     अश्लील सामग्री : आपत्तिजनक या अभद्र विषय-वस्तु पर पूर्ण प्रतिबंध।     सांप्रदायिक विद्वेष : जातीय या धार्मिक भेदभाव फैलाने वाली सामग्री वर्जित।     नशीले पदार्थ : शराब, तंबाकू एवं मादक पदार्थों का प्रचार निषिद्ध।     हिंसा एवं हथियार : हिंसा या शस्त्रों को प्रोत्साहित करने वाली सामग्री प्रतिबंधित।     कानूनी रूप से निषिद्ध वस्तुएं : विधि द्वारा प्रतिबंधित वस्तुओं या सेवाओं का विज्ञापन वर्जित। निगम में बनेगी विज्ञापन प्रबंधन इकाई विशेष बैठक में सर्वसम्मति से विज्ञापन प्रबंधन इकाई के गठन का निर्णय लिया गया। निगम क्षेत्र में विज्ञापनों से जुड़े सभी कार्यों की देखरेख, समन्वय और निगरानी करेगी। साथ ही नियमों के अनुपालन, राजस्व संग्रह और अवैध विज्ञापनों पर नियंत्रण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाएगी। रेलवे के बाद मेट्रो व एयरपोर्ट विज्ञापनों से भी निगम वसूलेगा 25 प्रतिशत शुल्क रेलवे की तर्ज पर अब मेट्रो और एयरपोर्ट परिसरों में होने वाले विज्ञापनों से भी नगर निगम 25 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा। वर्तमान में निगम अपने क्षेत्राधिकार के रेलवे स्टेशनों पर प्रदर्शित विज्ञापनों से 25 प्रतिशत शुल्क रेलवे से प्राप्त कर रहा है, और इसी व्यवस्था को मेट्रो व एयरपोर्ट पर भी लागू करने की तैयारी है। 10 दिनों में जारी होगा अंतिम प्रारूप निगम पर्षद की चौथी विशेष बैठक में सदस्यों के सुझावों पर विचार करते हुए उन्हें सम्मिलित कर विज्ञापन संशोधन विनियम पारित करने की घोषणा की गई। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि प्राप्त सभी सुझावों को विनियम में शामिल किया जाएगा। 10 दिनों के भीतर अंतिम विनियम की प्रति सभी सदस्यों को उपलब्ध करा दी जाएगी। सहमति बनने के बाद इसे स्वीकृति हेतु विभाग और सरकार को भेजा जाएगा। ई-निविदा का विरोध नगर निकाय के कार्यों के लिए ई-निविदा नियम का पार्षदों ने एकस्वर में विरोध किया। मांग की कि पुरानी निविदा व्यवस्था लागू की जाए। छोटे कार्यों के लिए ई-निविदा उचित नहीं है। मेयर ने आश्वासन दिया किया मंत्री व मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी।

झारखंड निकाय चुनाव में आज से शराब दुकानें सील

रांची. नगर निकाय चुनाव के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर झारखंड पुलिस-प्रशासन व संबंधित विभागों ने आपसी सहमति से सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में निगम चुनाव में मतदान के दो दिन पहले से झारखंड में शराब की बिक्री बंद करने पर सहमति बनी है, ताकि मतदान के दौरान शराब के नशे में विधि व्यवस्था बाधित नहीं की जा सके। झारखंड में 23 फरवरी को मतदान होना है। शराब की बिक्री बंद करने से संबंधित आदेश भी जारी हो चुका है। जारी आदेश के अनुसार 21 फरवरी की शाम पांच बजे से झारखंड में शराब की दुकानें बंद रहेंगी जो 24 फरवरी की सुबह सात बजे तक रहेंगी। यानी इस अवधि में ड्राई डे रहेगा। इस दरम्यान सभी संबंधित मतदान क्षेत्रों में शराब की बिक्री एवं परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रशासनिक आदेश के तहत उक्त अवधि में सभी खुदरा शराब दुकानें, बार, रेस्टोरेंट, खुदरा कैंटीन तथा झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेडे के डिपो एवं गोदाम बंद रहेंगे। होटल और क्लबों में भी प्रतिबंध इस अवधि में राज्य के किसी भी होटल, क्लब या अन्य लाइसेंस प्राप्त परिसर से भी शराब की बिक्री या उपलब्धता पूरी तरह निषिद्ध रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय चुनावी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मतदाताओं को शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध संबंधित प्रविधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सामान्य दिनों में राज्य में शराब की खुदरा दुकानें हर दिन सुबह दस बजे से रात के 11 बजे तक खुलती हैं, जबकि बार व रेस्टोरेंट रात को 12 बजे तक खाेलने की अनुमति है।

सम्राट चौधरी का पप्पू यादव पर तंज- ‘हाथी’ भी हो रहे बीमार

पटना. राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग एयरपोर्ट पर उतरते ही दावा करते हैं कि बिहार पुलिस 'चींटी भी नहीं मार पाती।' लेकिन हकीकत उनसे दो घंटे बाद मिलती है-जब वही लोग कानून के शिकंजे में आ जाते हैं। सम्राट ने तंज कसते हुए कहा कि गिरफ्तारी के बाद अचानक तबीयत बिगड़ जाती है और अस्पताल का रास्ता ज्यादा सुरक्षित लगने लगता है। उनका इशारा उन नेताओं की ओर था जो गिरफ्तारी से पहले सख्त बयान देते हैं और बाद में मेडिकल कारणों का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा, 'अब तो हाल यह है कि हाथी भी बीमार होकर अस्पताल जाना पसंद करने लगे हैं।' यह टिप्पणी साफ तौर पर राजनीतिक प्रतीकवाद के जरिए विपक्ष पर निशाना थी। 'एयरपोर्ट पर दावे, दो घंटे में हकीकत' सम्राट ने कहा कि बिहार की कानून-व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश की जाती है। कुछ नेता बाहर से आकर बड़े-बड़े दावे करते हैं और राज्य की पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। लेकिन कानून अपना काम करता है और कार्रवाई होते देर नहीं लगती। उन्होंने दावा किया कि बिहार पुलिस पूरी तरह सतर्क और सक्षम है। अपराधियों के खिलाफ सख्ती से अभियान चल रहा है। इसलिए 'चींटी' वाला बयान सिर्फ राजनीतिक ड्रामा है, हकीकत नहीं। 'गिरफ्तारी के बाद बीमारी' पर तंज उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कार्रवाई होते ही कुछ लोगों की सेहत अचानक बिगड़ जाती है। अस्पताल में भर्ती होना उन्हें ज्यादा सुविधाजनक लगता है। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि यह नई राजनीतिक परंपरा बन गई है। 'कानून का सामना करने से बेहतर लोग मेडिकल रिपोर्ट का सहारा लेते हैं,' उन्होंने कहा। उनकी टिप्पणी को विपक्ष पर सीधा हमला माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान की खूब चर्चा हो रही है। 'बिहार की छवि खराब करने की कोशिश' सम्राट ने आरोप लगाया कि विपक्ष बिहार की छवि खराब करने में लगा है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून का राज है और सरकार अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। विपक्ष के बयान तथ्यों से परे हैं और जनता सब समझती है। उन्होंने कहा कि विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार मजबूत है। राजनीतिक बयानबाजी से सच्चाई नहीं बदलती। बिहार की व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को पहले हकीकत देखनी चाहिए।

आज खत्म होगा झारखंड निकाय चुनाव का प्रचार, 23 फरवरी को मतदाता करेंगे फैसला

रांची झारखंड के 48 नगरीय निकायों में होने वाले चुनाव के तहत सोमवार 23 फरवरी को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक वोटिंग होगी। इससे पहले चुनाव प्रचार की समय सीमा शनिवार 21 फरवरी की शाम को समाप्त हो जाएगी। यानी इसके बाद चुनाव प्रचार थम जाएगा, हालांकि उम्मीदवार इसके बाद मतदाताओं से व्यक्तिगत रूप से घर-घर पहुंचकर जनसंपर्क कर सकेंगे। उधर धनबाद में इंडिया गठबंधन के दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं जिससे मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है। झारखंड में नगरीय निकायों के चुनाव के लिए प्रचार का सिलसिला चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को शाम 5 बजे प्रचार का शोर थम जाएगा। वोटिंग 23 फरवरी को होगी। झारखंड में 48 नगरीय निकायों के चुनाव 23 फरवरी को होने हैं। इन निकायों में राजधानी रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो और देवघर जैसे बड़े शहरों के नगर निगम भी शामिल हैं। नगरीय निकायों के चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन चुनावों के नतीजों से इस बात का परीक्षण होगा कि राज्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाला सत्ताधारी इंडिया गठबंधन जिसमें कांग्रेस सहित कुछ और दल शामिल है, किस स्थिति में है। बीजेपी इस चुनाव में काफी जोर लगा रही है। धनबाद नगर निगम के चुनाव में राज्य के सत्ताधारी इंडिया गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार तय करने के बजाय अपने-अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। यानी राज्य की सत्ता में शामिल ये सभी दल धनबाद में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति कुछ अन्य निकायों के चुनाव में भी देखी जा रही है। उम्मीदवार राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि सभी को अलग चिह्न आवंटित किए गए हैं। खास तौर पर नगर निगमों की सत्ता पर कब्जा करने के लिए सभी मुख्य पार्टियां जोर लगा रही हैं। निकाय चुनाव घोषित तौर पर तो गैर दलीय आधार पर हो रहे हैं, लेकिन वास्तव में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से समर्थित उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हो रहा है।

शून्यकाल में वित्त मंत्री का बजट प्रस्तुतीकरण, छात्रों और रैयतों समेत कक्षपालों की समस्याएं उठीं

रांची झारखंड विधानसभा के शून्यकाल में शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 6450 करोड़ रुपए का तृतीय अन्नपूर्णक बजट पेश किया। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने सरकार से आग्रह किया कि जेपीएससी की कट ऑफ डेट पर तुरंत निर्णय लिया जाए, क्योंकि आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो छात्रों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि B.Ed की छात्राओं को छात्रवृत्ति मिलने तक फीस जमा करने की बाध्यता से राहत दी जाए। लोजपा विधायक जनार्दन पासवान ने रैयतों के मुआवजे का भुगतान होने तक एनटीपीसी और अडानी के खनन पर रोक लगाने की मांग की और कहा कि विवादित मामलों को रैयतों की सहमति से हल किया जाना चाहिए। विधायक अमित महतो ने कक्षपाल नियुक्ति में उम्र सीमा में छूट देने की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि सरकार ने पहले ही इस छूट का प्रावधान किया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।