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चुनावी प्रचार का शोर बना छात्रों की पढ़ाई में बाधा, अभिभावकों का विरोध तेज

रांची नगर निगम चुनाव के दौरान बज रहे लाउडस्पीकरों का तेज शोर इन दिनों बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। कई इलाकों से शिकायत मिल रही है कि तय समय के बाद भी प्रचार में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जा रहे हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नगर निगम चुनाव प्रचार के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बज रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि इससे बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों को काफी परेशानी हो रही है। देर रात तक शोर रहने से बच्चों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लग पा रहा है। कांके रोड निवासी राजेश कुमार ने बताया कि उनका बेटा इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारी कर रहा है, लेकिन कई बार रात 10 बजे के बाद भी लाउडस्पीकर बजते रहते हैं। दिनभर प्रचार वाहनों से तेज आवाज में अनाउंसमेंट किया जाता है। समझाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। बरियातू की रहने वाली सुनीता देवी ने बताया कि उनकी बेटी मैट्रिक की छात्रा है। परीक्षा के समय इस तरह का शोर बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ा रहा है। डोरंडा इलाके के एक अन्य अभिभावक ने भी कहा कि दिन में स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं और शाम-रात का समय ही पढ़ाई के लिए मिलता है, लेकिन प्रचार का शोर पढ़ाई में बाधा बन रहा है। बोर्ड परीक्षाएं जारी, शांति की जरूरत इस समय राज्य में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (आईसीएसई) की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में स्कूलों और आसपास के इलाकों में शांति और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल तय समय सीमा के अंदर ही किया जा सकता है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह रोक है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए सहयोग करें, ताकि परीक्षा के दौरान उन्हें शांत माहौल मिल सके।  

RJD के 14 सवालों का बिहार सरकार ने दिया जवाब

पटना. 19 फरवरी को आरजेडी के एक्स अकाउंट के जरिए एक पोस्ट शेयर किया गया था. इसमें लड़कियों के साथ राज्य के अलग-अलग जिलों में 14 आपराधिक घटनाओं का जिक्र किया गया. राजद की ओर से कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे. इस पोस्ट का जवाब आज बिहार सरकार की तरफ से दिया गया.     ज़िंदा ही तो हो, कोई मुर्दा तो नहीं!     कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते?     कुर्सी ही तो है, कोई अर्थी तो नहीं!     बेपरवाह भाजपा नीतीश सरकार     और लचर कानून व्यवस्था का हाल!     बिहार की बच्चियों के लिए एक एक साँस है मुहाल!! pic.twitter.com/BNWoP3vpCu     — Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) February 19, 2026 14 घटनाओं में कार्रवाई का किया जिक्र बिहार सरकार की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी किया गया. इस प्रेस रिलीज में उन 14 घटनाओं का जिक्र किया गया, जिसको लेकर राजद ने सवाल उठाया था. इसके साथ ही सभी मामलों में क्या कुछ कार्रवाई की गई, उसे बताया गया. बिहटा में 4 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में अभियुक्त गुड्डू कुमार की गिरफ्तारी की गई. किशनगंज में 6 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में आरोपी को बाल सुधार गृह भेजा गया. इस तरह से एक-एक कार्रवाई गिनवाई गई. राबड़ी देवी ने आज फिर उठाया सवाल बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है. विपक्ष का तरफ से लगातार आपराधिक घटनाओं से जुड़े मुद्दे को उठाया जा रहा है. शुक्रवार को भी लड़कियों के साथ अपराध का मुद्दा राबड़ी देवी ने उठाया. राबड़ी देवी ने कहा, बिहार में छोटी-छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो रहा है. कई मामलों में तो हत्याएं भी की जा रही हैं. इस दौरान राबड़ी देवी ने दावा किया कि 35 लड़कियों के साथ फरवरी महीने में ही ऐसी घटना हुई. इन मामलों में सरकार ने क्या कार्रवाई की? सरकार ने दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाया? इस तरह से राबड़ी देवी ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया. सदन की कार्यवाही से पहले राजद के विधायकों ने हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर हंगामा किया था. आज सत्र की कार्यवाही में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे. लेकिन थोड़ी ही देर बाद वे चले गए.

पटना जेपी सेतु पर कार से आयकर विभाग ने किए 16.5 लाख नकद बरामद

पटना. पटना दीघा थाना पुलिस ने जेपी सेतु चेक पोस्ट पर वाहन जांच के दौरान एक कार से 16.5 लाख रुपये नकद बरामद किए। पुलिस नियमित जांच अभियान चला रही थी, इसी दौरान संदिग्ध लगने पर कार को रोका गया। कार में पटना से जा रहे तीन लोग सवार थे। पुलिस ने जब वाहन की तलाशी ली तो पिछली सीट पर रखा एक बैग मिला। बैग को खोलने पर उसमें भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। बैग से मिली भारी मात्रा में नकदी नकद राशि की गिनती करने पर कुल 16 लाख 50 हजार रुपये पाए गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत तीनों व्यक्तियों से रकम के बारे में पूछताछ की। पुलिस ने उनसे रुपये से संबंधित दस्तावेज या कोई वैध प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद एहतियातन तीनों को हिरासत में लेकर दीघा थाने लाया गया। आयकर विभाग को दी गई सूचना प्रारंभिक जांच में जब कैश का कोई वैध स्रोत सामने नहीं आया तो पुलिस ने आयकर विभाग को इसकी सूचना दे दी। आयकर विभाग की टीम को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जब तक आयकर विभाग की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक बरामद नकदी को सुरक्षित रखा जाएगा। मामले में आगे की कार्रवाई विभागीय जांच के आधार पर की जाएगी।

विधायकों में तीखी भिड़ंत, विजय सिन्हा ने की विवादित टिप्पणी

पटना बिहार विश्वविद्यालयों में और उच्च शिक्षण संस्थाओं में यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन को लागू करने का प्रस्ताव विपक्ष की ओर से माले विधायक संदीप सौरभ ने पेश किया। इस दौरान में उन्होंने 'ब्राह्मणवाद'  शब्द का जिक्र कर दिया। इस पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक हंगामा करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने 'ब्राह्मणवाद' शब्द को फौरन सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इसके बावजूद पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच आपस में भिड़ंत हो गई। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। विपक्ष की ओर से राजद विधायक आलोक मेहता ने भी पटलवार किया। सदन में क्या-क्या हुआ आइए जानते हैं? पहले जानिए माले विधायक ने क्या कहा?  माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार समेत विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न का मामला सामने आता है। उन्होंने रोहित वेमुला केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी की ओर दी गई रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षक संस्थाओं में जाति आधारित उत्पीड़न के मामलों में 2019 से 2024 में 118 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसके अलोक 2026 में इक्विटी गाइडलाइन की घोषणा की गई। लेकिन, इसे मजबूति से लागू करने की जगह ब्राह्मणवादी मानसिकता से प्रायोजित आंदोलन के बाद इसके स्थगित कर दिया गया। विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण स्थानों में जातीय उत्पीड़न को बिहार सरकार कानून लाकर लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह मांग करती है कि अध्यादेश लाकर इसे कानून का रूप देने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करे। साथ ही यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन को लागू करने का प्रस्ताव पारित करने की मांग करते हैं। डिप्टी सीएम ने कहा- यह लोग गद्दारी करते हैं माले विधायक संदीप सौरभ के बयान का भाजपा विधायक विरोध करने लगे। देखते ही देखते पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच नोंकझों होने लगी। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सदन की कार्यवाही से ब्राह्मण शब्द को हटाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत में सदन में जाति सूचक शब्द का प्रयोग नहीं करें। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि सदस्यों से अपील है कि अगर उन्हें संविधान में विश्वास है तो इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करें। हर समाज का सम्मान होता है। वह संविधान और संवैधानिक संस्था के निर्णय पर प्रश्न कैसे उठा सकते हैं। उनकी मानसिकता साफ झलकती है। हर समाज का मैं सम्मान करता हूं। इस तरह की मानसिकता गलत है। आज देश को कमजोर करने में, समाज में जहर घोलकर वो राष्ट्र के हितैषी नहीं हो सकते हैं। मैं भी टेक्निकल कॉलेज में पढ़ता था। किस तरह से मुजफ्फपुर में रैगिंग करवाई जाती थी। उस समय सत्ता किसकी थी। मैं भूमिहार ब्राह्मण समाज से आता हूं। हॉस्टल से बाहर निकलने पर विवश किया गया। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जातिगत भेदभाव से यह लोग बाबा साहेब के सपनों को तार-तार करना चाहते हैं। यह लोग राष्ट्र के हितैषी नहीं है। यह लोग समाज के साथ गद्दारी करते हैं। विजय सिन्हा की इस बात पर विपक्ष के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। राजद और भाजपा विधायक ने क्या कहा? राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि जातिवादी लोगों की मानसिकता साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि विधायक संदीप सौरभ ने किसी जाति का नाम नहीं लिया। उन्होंने ब्राह्मणवाद का नाम लिया। ब्राह्मणवाद कोई जाति नहीं है। जहां तक जाति की बात है कि पिछड़ा और दलित की बात कही जा रही है। उन्होंने विजय सिन्हा पर तंज कसते हुए कहा कि वह इस तरह की शब्दों का प्रयोग कर बता रहे है कि वह किस तरह की मानसिकता के हैं। जो लोग गलत किए हैं, उन्हें मिर्ची लग रही है। इसके बाद भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विपक्ष के लोग ब्राह्मणवाद को समझते नहीं हैं। लेकिन, इन्हें ब्राह्मणों से काफी तकलीफ है। उन्होंने जिस ब्राह्मण का पैर तीनों लोकों के स्वामी भगवान कृष्ण अपने आंसुओं से करते हैं। जिस ब्राह्मण के बिना न शादी होती है और न श्राद्ध होती है। जिस ब्राह्मण ने भिक्षा मांगकर कासी हिन्दू विश्वविद्यालय बना दिया। आज इन्हें ब्राह्मण से परेशानी हो रही है।

झारखंड विधानसभा में ₹6450 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश

रांची. झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो चुका है. आज (शुक्रवार, 20 फरवरी) सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 6450 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया. आज की कार्यवाही में प्रश्नकाल के दौरान जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने प्रवासियों के पंजीकरण को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने सदन में सरकार से पूछा कि क्या ये बात सही है कि राज्य में 16 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर हैं, लेकिन सिर्फ 1 लाख 91 हजार ही पंजीकृत है. प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण और सुविधाओं के लिए झारखंड प्रवासी श्रमिक आयोग का गठन करने का विचार कर रही है. प्रवासी मजदूर के निधन पर 5 लाख मिले. जयराम महतो के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री संजय यादव ने बताया कि 2 लाख 29 हजार प्रवासी मजदूर रजिस्टर्ड हैं. प्रचार प्रसार के माध्यम से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी है. इस मामले पर सरकार और विभाग काफी गंभीर है. किसी को भी अगर विदेशों में परेशानी हुई है तो सरकार आगे आई है. प्रवासी नियंत्रण कक्ष रांची में है. कोई लापरवाही नहीं होती, इसीलिए आयोग की कोई जरूरत नहीं है. प्रवासी मजदूरों के निधन पर राशि बढ़ाने पर विचार हो सकता है. वहीं चन्द्रदेव महतो ने पूछा कि क्या प्रवासी नियंत्र कक्ष बनाया गया गया है. सरकार ने अलग से डायरेक्टरेट बनाने का आश्वासन दिया था. अभी काम करने वाले एनजीओ है, पावर सीमित है. इस पर मंत्री ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए जो जरूरी होगा, वो किया जाएगा. बाबूलाल मरांडी ने पूछा कि बाहर राज्यों में भाषा की भी दिक्कत होती है. सरकार से आग्रह है कि उन शहरों में कोई मैकेनिज्म तैयार करें तो मजदूरों की कठिनाई दूर हो सकती है. मृत को 50 हजार मिलता है, लेकिन उनके घर उजड़ जाते हैं. आवास सुनिश्चित हो, सरकारी राशन मिले और शिक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो. हम सब का यह दायित्व बनता है. वहीं अरूप चैटर्जी ने कहा कि काम के बाद भी कई बार मजदूरों को हाजरी नहीं दी जाती. एक अधिकारी अगर उन राज्यों में बैठे तो उन्हें मदद मिलेगी और निदेशालय जल्द से जल्द बने. मानसिक तौर पर प्रताड़ित मजदूर जब आत्महत्या करता है तो उस मजदूर के बॉडी लाने की भी व्यवस्था की जानी चाहिए? इस पर मंत्री संजय यादव ने बताया कि मामला गंभीर हैं. सीएम से बात करके राज्य हित में फैसला लिया जाएगा. विधायक निर्मल महतो ने पूछा कि 10 हजार सहिया धरने पर बैठी हैं. पूरे राज्य में 2007 से 42000 सहिया, सहिया साथी 2500 और 688 टीटी सहिया स्वास्थ्य विभाग में कार कर रहे हैं. कोरोनाकाल में कई सहियाओं की जान गई है. इस सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में लगभग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 64 हजार सहिया हैं. सहिए के प्रति सरकार संवेदनशील है. कोरोनाकाल में सहियाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग दिया. कोरोनाकाल में 1 महिला रेनी देवी की मौत हुई है. सरकार ने हर संभव मदद की है. विधायक ने कहा कि प्रतिमाह मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए. एम्बुलेंस की व्यवस्था बढ़े. धरना पर सरकार बात करे. मंत्री ने कहा कि इंसेंटिव के तहत रखा जाता है. विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि मैया सम्मान में ढाई हजार रुपये स्वास्थ्य सहिया का वेतन बढ़ाया जाए. मंत्री ने कहा कि हर माह इंटेंसिव के तहत काम होता है. जो भी कार्यक्रम चलाए जाते है. उसमें इंटेंसिव मिलता है. प्रति माह 10 से 1 हजार आमदनी होती है. 8 मार्च को एक साल का एकमुश्त राशि महिला दिवस पर सहियाओं को दी जाएगी. 

रोबोडॉग विवाद पर चिराग पासवान का सख्त रुख, समिट खत्म होते ही जांच और एक्शन

पटना केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एआई समिट में प्रदर्शित चीनी रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'बड़ी लापरवाही' बताया। उन्होंने कहा कि समिट समाप्त होने के बाद सरकार इस मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी। गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह विवाद इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान सामने आया, जहां एक रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' द्वारा विकसित बताया गया था। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह प्रोडक्ट चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा विकसित यूनिट्री जीओ2 मॉडल है। पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय द्वारा किसी प्रोडक्ट को प्रदर्शित कर उसका स्वामित्व गलत तरीके से लेना पूरी तरह अनुचित है। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि समिट एक वैश्विक मंच है और पूरी दुनिया की नजर इस पर रहती है। ऐसे घटनाक्रम भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने उस प्रतिनिधि के बयान का भी जिक्र किया, जिसने रोबोटिक डॉग के बारे में जानकारी दी थी। चिराग ने कहा कि वह शब्दों के चयन से स्थिति को उचित ठहराने की कोशिश करती दिखीं और बाद में इसे गलतफहमी बताया गया। जब देश में इतने बड़े स्तर का एआई सम्मेलन हो रहा हो, तब इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बन जाती हैं। केंद्र सरकार ने भी अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा कि ऐसे मंचों पर केवल वास्तविक और प्रमाणिक कार्यों को ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। विवाद उस समय शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय के पवेलियन में मौजूद कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि प्रदर्शित रोबोटिक डॉग विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है और उसका नाम 'ओरियन' बताया। बाद में उन्होंने इसे संचार की गलती बताया। विश्वविद्यालय ने भी आधिकारिक बयान जारी कर भ्रम के लिए माफी मांगी और कहा कि संबंधित प्रतिनिधि को तकनीकी जानकारी नहीं थी और उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति भी नहीं थी।

भीषण सड़क हादसा: बसों की भिड़ंत में टेंपो के उड़े टुकड़े, 2 लोगों ने तोड़ा दम

पटना बिहार के दरभंगा में गुरुवार को तेज रफ्तार और लापरवाही ने दो जिंदगियां खत्म कर दी। ओवरटेक के दौरान दो तेज रफ्तार बसों की टक्कर से टेंपो के परखच्चे उड़ गए और उस पर सवार दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। मंजर देख लोग सिहर उठे। बसों के बीच ओवरटेक की वजह से हुआ हादसा मिली जानकारी के अनुसार, घटना सोनकी थाना क्षेत्र के ग्रीन सिटी के समीप की है। मृतकों की पहचान बहेड़ा थाना क्षेत्र के रढ़ियाम गांव निवासी गंगा साफी (37 वर्ष) और जमालपुर के खैसा गांव निवासी टेंपो चालक जदी अहमद (30 वर्ष) के रूप में हुई है। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि  कुशेश्वरस्थान से दरभंगा की ओर आ रही दो बसें दरभंगा–बेनीपुर स्टेट हाईवे-56 पर खतरनाक तरीके से एक-दूसरे को ओवरटेक कर रही थीं। इसी दौरान संतुलन बिगड़ा और तेज रफ्तार बस ने आगे चल रहे टेंपो को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि टेंपो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार दोनों व्यक्तियों ने मौके पर दम तोड़ दिया। पुलिस ने दोनों बसों और क्षतिग्रस्त टेंपो को कब्जे में लिया हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही सोनकी थानाध्यक्ष शशिकांत झा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों बसों और क्षतिग्रस्त टेंपो को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए दरभंगा मेडिकल  पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और दोषी बस चालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

20 फरवरी के बाद झारखंड में ‘मई जैसी’ तपिश, पारा 34°C तक चढ़ने का अनुमान

रांची झारखंड में अब मौसम तेजी से बदल रहा है। दिन में तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, तो शाम होते ही ठंड का अहसास होने लगता है। राज्य के कई जिलों में दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर देखा जा रहा है, जिससे लोगों को सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान झारखंड में धीरे-धीरे गर्मी बढ़ने लगी है। खासकर दोपहर के समय कड़ी धूप निकल रही है, जिससे गर्मी महसूस हो रही है, लेकिन जैसे ही शाम होती है, मौसम अचानक ठंडा हो जाता है। कई जगहों पर तो लोगों को सुबह-शाम अब भी स्वेटर पहनना पड़ रहा है। रांची, खूंटी, लोहरदगा, पलामू और राज्य के मध्य व पश्चिमी हिस्सों में ऐसा मौसम ज्यादा देखने को मिल रहा है। उत्तर-पूर्वी झारखंड के देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो रही है। इन इलाकों में अधिकतम तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। गोड्डा और पाकुड़ में 20 फरवरी तक तापमान 34 डिग्री तक पहुंच सकता है। वहीं, न्यूनतम तापमान 12 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। सुबह के समय हल्का कुहासा छाए रहने की संभावना है, जिससे दृश्यता पर असर पड़ सकता है। उत्तर-पश्चिमी जिलों में दिन-रात के तापमान में बड़ा अंतर पलामू, कोडरमा, गढ़वा, लातेहार और लोहरदगा में दिन का तापमान 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। जबकि रात में तापमान 10 से 12 डिग्री तक गिर सकता है। दिन और रात के तापमान में ज्यादा अंतर होने के कारण लोगों को सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस बदलाव से सर्दी-जुकाम या अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। दक्षिणी जिलों में गर्मी का असर ज्यादा जमशेदपुर, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस या उससे थोड़ा ज्यादा रह सकता है। यहां के लोगों को अभी से गर्मी का एहसास होने लगा है। हालांकि शाम के समय हल्की ठंड राहत दे रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो-तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है।  

संवेदनशील फैसला: हाथियों के झुंड के कारण रोकी गईं 6 ट्रेनें, बड़ा हादसा टला

चक्रधरपुर हावड़ा–मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर रेलवे ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए हाथियों की जान बचाने के लिए देर रात ट्रेनों का परिचालन रोक दिया। चक्रधरपुर रेल मंडल की सतर्कता से एक हाथी के बच्चे समेत पूरे झुंड को सुरक्षित जंगल की ओर जाने का मौका मिला। मंगलवार देर रात चक्रधरपुर रेल मंडल ने बड़ा और संवेदनशील फैसला लेते हुए हावड़ा–मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन करीब आधे घंटे के लिए पूरी तरह रोक दिया। जानकारी के अनुसार, भालूलता–जरायकेला रेलखंड के महपानी गेट (किमी 389/5-7) के पास रेलवे ट्रैक पर पांच हाथियों का झुंड घूमता हुआ देखा गया। इस झुंड में एक छोटा बच्चा भी शामिल था। रात करीब 2:50 बजे ट्रैक पर हाथियों की सूचना मिलते ही रेलवे ने तुरंत कार्रवाई की। मुंबई मेल, हावड़ा मेल, बिलासपुर–टाटानगर एक्सप्रेस समेत छह मालगाड़ियों को रोक दिया गया। इससे किसी भी बड़े हादसे को टाल दिया गया। पेट्रोलमैन की सतर्कता से बची जान रेल मंडल के एलीफेंट जोन में तैनात कोल्ड वेदर ट्रैक पेट्रोलमैन नियमित गश्त पर थे। गश्त के दौरान उन्होंने ट्रैक पर हाथियों को देखा और तुरंत वरीय अनुभाग अभियंता को सूचना दी। सूचना मिलते ही ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। पेट्रोलमैन की सतर्कता के कारण हाथियों, खासकर बच्चे की जान बच सकी। हालांकि अचानक ट्रैक पर हाथियों के आने से ट्रैकमेंटनर, गेटमैन और की-मैन में डर का माहौल है। रेलकर्मियों ने रात में ड्यूटी के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। चार घंटे तक धीमी रफ्तार से चली ट्रेनें हाथियों के ट्रैक से हटने के बाद भी एहतियात के तौर पर रेलवे ने कॉशन ऑर्डर जारी किया। रात 12:20 बजे से सुबह 4:00 बजे तक इस रेलखंड पर सभी ट्रेनों को 20 किमी प्रति घंटे की धीमी रफ्तार से चलाया गया। लोको पायलट लगातार हॉर्न बजाते हुए और सतर्क नजर रखते हुए ट्रेनें चलाते रहे। हाथियों की मौजूदगी के कारण महपानी गेट को रात में बंद कर दिया गया, जिससे सड़क यातायात भी प्रभावित रहा। गेट पर तैनात रेलकर्मी भी सुरक्षित स्थानों पर चले गए। सुबह होते-होते हाथियों का झुंड पास के जंगल में चला गया। रेलवे की इस मानवीय पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। यह घटना दिखाती है कि रेल परिचालन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।  

रेलवे कर्मचारी की बेरहमी से हत्या: छुट्टी पर घर लौटते ही बदमाशों ने बरसाईं गोलियां

रांची बिहार में अपराधियों के बढ़ते मनोबल ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला लखीसराय जिले के पीरी बाजार थाना अंतर्गत घोंघी गांव का है, जहां बुधवार शाम बेखौफ बदमाशों ने रेलवे के एक कर्मचारी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल व्याप्त है। छुट्टी पर गांव आए रेलकर्मी को बनाया निशाना मृतक की पहचान 35 वर्षीय संतोष कुमार के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल के अंडाल में रेलवे ग्रुप डी विभाग में कार्यरत थे। संतोष इन दिनों छुट्टी लेकर अपने गांव आए हुए थे। घटना के समय वे अपने खेत में सरसों की फसल की कटाई की देखरेख कर रहे थे। इसी बीच घात लगाए अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम परिजनों और ग्रामीणों ने लहूलुहान स्थिति में संतोष को तुरंत सदर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन घाव गहरे होने के कारण उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। हत्या को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से फरार होने में सफल रहे।