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प्रशासनिक बदलाव: बिहार में 17 अफसर बने DTO, परिवहन विभाग में नई पोस्टिंग

पटना. बिहार परिवहन विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 17 अधिकारियों को पदोन्नति का तोहफा दिया है। लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करते हुए अपर जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) और मोटरयान निरीक्षक (MVI) को जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) के पद पर प्रोन्नत किया गया है। अधिसूचना जारी, विभाग में बढ़ी हलचल मंगलवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। आदेश जारी होते ही विभाग में हलचल तेज हो गई और प्रमोट हुए अधिकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। कौन-कौन हुए प्रमोट, जानें आंकड़े प्रमोशन पाने वाले 17 अधिकारियों में 12 अपर जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) और 5 मोटरयान निरीक्षक (MVI) शामिल हैं। सभी को अब जिला परिवहन पदाधिकारी के समकक्ष जिम्मेदारी दी गई है, जिससे उनकी भूमिका और अधिकार दोनों बढ़ गए हैं। प्रशासनिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती सरकार के इस फैसले से जिला स्तर पर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और मजबूत होने की उम्मीद है। नए DTO बनने से विभागीय कामकाज में तेजी आएगी और लोगों को सेवाएं बेहतर तरीके से मिल सकेंगी। लंबित मामलों के निपटारे में आएगी तेजी जानकारों का मानना है कि अधिकारियों की संख्या बढ़ने से लाइसेंस, वाहन रजिस्ट्रेशन और अन्य लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। इससे आम लोगों को भी राहत मिलने की संभावना है। सरकार का संदेश: काम के आधार पर मिलेगा हक इस प्रमोशन के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अधिकारियों की मेहनत और अनुभव का सम्मान किया जाएगा। साथ ही, विभागीय ढांचे को मजबूत कर बेहतर सेवा देने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।

अब आसमान से देखिए बिहार: हेली टूरिज्म प्लान तैयार, 8 बड़े स्थलों को जोड़ा जाएगा

पटना. बिहार में पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार अब ऐसी सुविधा शुरू करने जा रही है, जिससे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान ही नहीं, बल्कि बेहद तेज भी हो जाएगा। हेली टूरिज्म से बदलेगा यात्रा का अनुभव नागरिक उड्डयन विभाग की पहल पर बिहार में हेली टूरिज्म सेवा शुरू करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत राज्य के आठ प्रमुख पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे लंबी और थकाऊ यात्राओं से राहत मिलेगी। इन प्रमुख स्थलों को जोड़ा जाएगा इस सेवा में बोधगया, नालंदा, वैशाली, राजगीर, पटना साहिब, पावापुरी, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और विक्रमशिला जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल शामिल होंगे। सीनियर सिटिजन और विदेशी पर्यटकों को खास फायदा हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से इन जगहों तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। यह सुविधा खासतौर पर सीनियर सिटिजन, विदेशी पर्यटकों और वीआईपी यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। 5 साल का होगा अनुबंध, बनेंगे नए हेलीपैड नागरिक उड्डयन विभाग ने इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित कर चुकी है। हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनी के साथ पांच वर्षों का अनुबंध किया जाएगा, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इसके तहत हेलीपैड समेत अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। प्रत्येक हेलीकॉप्टर में 5-6 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। एयर कनेक्टिविटी भी होगी मजबूत राज्य सरकार हवाई बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। माना जा रहा है कि विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से बिहार की पहचान अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत होगी। यह रोजगार के अवसर बढ़ाने और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

झारखंड हाईकोर्ट का कड़ा संदेश: ड्रग्स माफिया के खिलाफ सख्ती, बड़े गिरोहों पर कसें शिकंजा

रांची. झारखंड में नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि नशे के सौदागरों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि धरातल पर सख्त एक्शन दिखना चाहिए। NCB और CID मिलकर तोड़ें तस्करों का नेटवर्क अदालत ने सोमवार को स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), सीआइडी और झारखंड पुलिस को आपसी तालमेल (Coordination) के साथ काम करने की हिदायत दी। कोर्ट ने कहा कि जब तक ये एजेंसियां एक साथ मिलकर कार्रवाई नहीं करेंगी, तब तक अंतरराज्यीय सिंडिकेट को तोड़ना मुश्किल होगा। सिर्फ छोटे मामलों से नहीं चलेगा काम, वित्तीय स्रोतों की हो जांच। खंडपीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ड्रग्स के छोटे-मोटे मामलों तक सीमित रहने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। अदालत ने निर्देश दिया कि:- ड्रग्स नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों (Financial Sources) की गहन जांच हो। अवैध कारोबार के असली सरगनाओं (Kingpins) को गिरफ्तार किया जाए। बाहरी राज्यों से हो रही ड्रग्स सप्लाई की कड़ी से कड़ी जोड़ी जाए। स्कूलों-कॉलेजों में जागरूकता और SOP पर जोर सुनवाई के दौरान सीआइडी ने कोर्ट में दो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) पेश किए। अदालत ने सरकार को इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने का आदेश दिया। साथ ही, युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान को तेज करने की जरूरत बताई। इसके साथ ही कोर्ट ने इस याचिका को निष्पादित कर दिया है। बता दें कि रांची और जमशेदपुर में तेजी से युवा पीढ़ी को ड्रग्स के कारोबारी अपने शिकंजे में ले रहे हैं। फौरी तौर पर पुलिस कार्रवाई करती है और सिंडिकेट अपना काम बदस्तूर करता रहता है।

भूमि मामलों पर मंथन: पटना में DCLR की अहम बैठक, दाखिल-खारिज और लैंड बैंक एजेंडे में शामिल

पटना. भूमि सुधार उप समाहर्ताओं की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक सात अप्रैल को पटना में होगी। यह जानकारी उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को दी। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों को त्वरित और पारदर्शी न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। दाखिल-खारिज, अपील वाद, राजस्व वसूली और लैंड बैंक से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा से प्रशासनिक व्यवस्था और मजबूत होगी। अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए लंबित मामलों के तेजी से निष्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण जिन नए लोगों को चार्ज दिया गया है, उन्हें भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। लोगों के कार्य की गति बढ़ाने का दिशा निर्देश देने के साथ–साथ कोई काम बाधित नहीं हो, इसकी तैयारी की जा रही है। सिन्हा ने निर्देश दिया है कि भूमि से जुड़े मामलों में निर्धारित प्राथमिकता का हर हाल में पालन किया जाए। अनुसूचित जाति, जनजाति, विधवा, सेना में कार्यरत या सेवानिवृत्त जवान, बाहर कार्यरत सुरक्षाकर्मियों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामलों का तुरंत निबटारा किया जाए। विशेष श्रेणी के आवेदन को प्राथमि‍कता  उन्होंने कहा कि फि‍फो व्यवस्था स्थगित है इसलिए विशेष श्रेणी के आवेदनों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े। आवश्यक होने पर उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देकर उनके प्रतिनिधि या अधिवक्ता के माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था की जाए। दिनभर होगा मंथन और मूल्‍यांकन  बताया जाता है कि पुराना सचिवालय में होनेवाली बैठक दिनभर चलेगी। पहले सत्र में प्रधान सचिव सीके अनिल वित्‍तीय वर्ष के कार्यों का मूल्‍यांकन करेंगे। दूसरे सत्र में तकनीकी और कौशल विकास पर मंथन होगा। इसमें कोर्ट केस लिखने का टेस्‍ट भी डीसीएलआर देंगे। इसका उद्देश्‍य आदेश की सटीकता परखना है। सभी डीसीएलआर को लैपटॉप, डोंगल और पांच कोर्ट केस के डिटेल के साथ आने का निर्देश दिया गया है।

नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा, बिहार के नए सीएम के लिए गूंजा निशांत कुमार का नाम

पटना बिहार की सियासत में एक नया नाम तेजी से उभरता दिख रहा है. वह नाम है निशांत कुमार है. अब ये सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि अब ये खुले मंच पर है. मांग उठ रही है कि निशांत कुमार को बिहार का मुख्‍यमंत्री बनाया जाए. सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब विधान परिषद के अतिथि निवास का उद्घाटन करने पहुंचे, तो वहां का माहौल अचानक सियासी संदेश में बदल गया. उनके सामने ही ‘निशांत कुमार जिंदाबाद’ और ‘बिहार के सीएम निशांत कुमार जिंदाबाद’ के नारे गूंजने लगे. सत्ता के गलियारों में नया संकेत! सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इन नारों को न तो रोका गया और न ही किसी तरह की नाराजगी दिखाई दी. खुद नीतीश कुमार शांत रहे, हाथ जोड़कर अभिवादन किया और आगे बढ़ गए. दरअसल, नीतीश कुमार के सामने ही “निशांत कुमार जिंदाबाद” और “बिहार के सीएम निशांत कुमार जिंदाबाद” के नारे गूंजने लगे. इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिल्कुल शांत नजर आए. उन्होंने लोगों को हाथ जोड़कर अभिवादन किया और आगे बढ़ते रहे. गर्म हो सकती है राजनीति जानकारों की मानें तो यह नारेबाजी भी बिहार की आगे की राजनीति को गर्म करने के लिए काफी है. दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं. 10 अप्रैल को वह राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे. उसके बाद वह बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार के सीएम की कुर्सी पर बीजेपी का मुख्यमंत्री बैठेगा, ऐसा फिलहाल तय माना जा रहा है. असल में, यह नारे इसी वजह से लगाए जा रहे हैं. जेडीयू के कार्यकर्ताओं की मांग है कि बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार बैठें. ऐसे में बीजेपी और जेडीयू के कार्यकर्ताओं की यह चाह अब बिहार की राजनीति का नया अखाड़ा बनने वाली है. … पर CM कुर्सी अब भी दूर! बिहार में बीजेपी कार्यकर्ता और शीर्ष नेतृत्व लगभग 10 वर्षों से सीएम की कुर्सी पर अपना मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश में हैं. इसी सपने को पूरा करने के लिए बिहार में नीतीश कुमार के सबसे करीबी कहे जाने वाले बीजेपी के डिप्टी सीएम स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी को डिप्टी सीएम को रिप्‍लेस कर दिया गया. सीएम की कुर्सी की राह तैयार करने के लिए रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को डिप्‍टी सीएम बनाया गया. रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को भी बदलकर सीएम नीतीश को चुनौती दे सकने वाले चेहरों को आगे किया गया. विजय सिन्‍हा और सम्राट चौधरी को डिप्‍टी सीएम बनाया गया। बावजूद बीजेपी अपने इस प्रयास में सीधे-सीधे अब तक सफल नहीं हो सकी है। डिप्टी CM बदलते रहे बिहार में सीएम की कुर्सी की राह बनाने के लिए नीतीश कुमार के साथ रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को डिप्टी सीएम बनाया गया. इसी कड़ी में रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को हटाकर, सीएम नीतीश को चुनौती दे सकने वाले विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया. बावजूद इसके, बीजेपी अपने इस प्रयास में सीधे-सीधे अब तक सफल नहीं हो सकी है. अब ट्रांजिशन मोड में बिहार मगर अब नीतीश कुमार 75 साल के हो गए हैं. उम्र का असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है. ऐसे में अब वह राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं. लेकिन इस बीच बिहार एक ट्रांजिशन मोड में है. अब देखने वाली बात यह होगी कि यह बदलाव का दौर बिहार की राजनीति पर क्या असर डालता है. राजनीतिक जानकार रमाकांत चंदन का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री की गद्दी पर निशांत को काबिज करने की मांग तेज हुई, तो यह बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों पर असर डाल सकता है. गेमचेंजर बनेगा नारा या बिगाड़ेगा गणित? अब देखने वाली बात यह होगी कि ‘बिहार के सीएम निशांत कुमार जिंदाबाद’ का जो नारा नीतीश कुमार के सामने लगाया गया, वो गेमचेंजर साबित होता है या NDA का गणित बिगाड़ देता है. जेडीयू कार्यकर्ताओं ने आज खुलकर अपनी उस मांग को नीतीश कुमार के सामने जाहिर कर दी, इसके लिए अभी दो दिन पहले ही पार्टी कार्यालय में पोस्टर लगाए गए थे. इन पोस्टरों में निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग रखी गई थी. यह भी कहा गया कि बिहार के विकास को लेकर जो संकल्प है, उसे निशांत कुमार पूरा करने के लिए तैयार हैं. ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि बीजेपी और जेडीयू के कार्यकर्ताओं की यह मांग बिहार की राजनीति को किस करवट ले जाती है.

जमशेदपुर में नई पहल, बुके के बजाय किताब और पौधों से होगा स्वागत और फिजूलखर्ची पर लगेगी रोक

जमशेदपुर जमशेदपुर स्थित मानगो नगर निगम की नवनिर्वाचित मेयर सुधा गुप्ता ने पदभार ग्रहण करते ही सादगी और सेवा की अनूठी मिसाल पेश की है. सोमवार को उन्होंने नगर निगम के उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार को पत्र लिखकर अपनी सभी सरकारी सुविधाओं में कटौती करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि वह नगर निगम में सुविधाओं का लाभ लेने नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने आई हैं. तत्काल प्रभाव से वापस ली जाएं गाड़ी मेयर सुधा गुप्ता ने अपने पत्र में कहा है कि उनके लिए आवंटित सरकारी गाड़ी को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए. उन्होंने घोषणा की है कि वह जनसेवा का कार्य अपने प्राइवेट गाड़ी से ही करेंगी. इसके अलावा, उन्होंने निगम के कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची रोकने के लिए गुलदस्ता परिपाटी को खत्म करने को कहा है. अब अतिथियों का स्वागत बुके के बजाय पौधे या किताब देकर किया जाएगा. मेयर ने मानदेय का किया परित्याग मेयर पद के लिए मिलने वाले मासिक मानदेय को सुधा गुप्ता ने स्वेच्छा से त्याग दिया है. यह राशि अब मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा होगी. उन्होंने अपने पत्र में कार्यालय के लिए किसी विशेष सजावट या अतिरिक्त फंड के खर्च पर रोक लगाने की बात कही है. उन्होंने सादगीपूर्ण कार्यस्थल की इच्छा जतायी है. उन्होंने कहा है कि टैक्स पेयर्स के पैसे का दुरुपयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मेयर ने निगम के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे भी इसी सेवा भाव के साथ कार्य करें और जनहित को प्राथमिकता दें. फिजूलखर्ची की निगम में जगह नहीं: सुधा गुप्ता उन्होंने कहा कि मैं इस पद पर सेवा भाव से कार्य करने आई हूं न कि सुविधाओं का लाभ लेने के लिए. जनता के पैसे का एक-एक पाई सिर्फ विकास कार्यों में खर्च होना चाहिए. दिखावे और फिजूलखर्ची की निगम में कोई जगह नहीं होगी.

बिहार में शराबबंदी को चुनौती, फाइल और ट्रेन की छतों से हो रही शराब की अनोखी तस्करी

 सोनपुर बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं. हाल के दिनों में तस्करी के कुछ ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जिसने उत्पाद विभाग और पुलिस को भी हैरान कर दिया है. तस्करों की चालाकी देखकर जांच एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं. तरबूज के अंदर छिपाई शराब, जांच में हुआ खुलासा सोनपुर रेलवे स्टेशन के पास जांच के दौरान एक अनोखा मामला सामने आया. बरौनी एक्सप्रेस में तलाशी के दौरान लावारिस हालत में रखे गए तरबूज से शराब बरामद की गई. तस्करों ने बड़ी सफाई से तरबूज को काटकर उसके अंदर शराब की बोतलें छिपा दी थीं, ताकि किसी को शक न हो. लेकिन जांच के दौरान यह चालाकी पकड़ी गई और पूरा खेल सामने आ गया. एग्जीक्यूटिव फाइल में भी छिपाकर ले जा रहे थे शराब इतना ही नहीं, एक अन्य मामले में तस्करों ने एग्जीक्यूटिव फाइल के अंदर शराब छिपाकर ले जाने की कोशिश की. फाइल के भीतर खास तरीके से जगह बनाकर बोतलें रखी गई थीं. हालांकि, उत्पाद विभाग की सतर्कता के चलते इस तस्करी का भी पर्दाफाश हो गया. इन घटनाओं से साफ है कि तस्कर हर संभव तरीका अपनाकर शराब की सप्लाई करने में जुटे हैं. ट्रेन की छत से गिरने लगी शराब की बोतलें वहीं, कुछ दिन पहले सत्याग्रह एक्सप्रेस में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई. ट्रेन संख्या 15274 रक्सौल की ओर जा रही थी, तभी अचानक कोच की छत से शराब की बोतलें गिरने लगीं. यह घटना उत्तर प्रदेश के पिपराइच और कप्तानगंज स्टेशन के बीच हुई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्लीपर कोच S4 और S5 के बीच बाथरूम के ऊपर लगे सीलिंग पैनल से करीब 20 से अधिक बोतलें एक-एक कर नीचे गिरीं. तस्करों की नई चाल से पुलिस भी हैरान पहले तो यात्रियों को समझ नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है, लेकिन कुछ ही देर में मामला साफ हो गया कि यह शराब तस्करी का नया तरीका है. इस घटना ने रेलवे और पुलिस प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है. लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बाद उत्पाद विभाग और पुलिस ने जांच और निगरानी बढ़ा दी है. अधिकारियों का कहना है कि तस्करों के हर नए हथकंडे पर नजर रखी जा रही है और उन्हें पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

250 एकड़ में फैलेगा आधुनिक शिक्षा का हब, नीतीश सरकार ने 547 करोड़ के प्रोजेक्ट को दी रफ्तार

पटना बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के करीब साढ़े तीन महीने बाद अब राज्य सरकार प्रस्तावित ‘एजुकेशन सिटी’ को लेकर पूरी तरह एक्टिव हो गई है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है और इसे वैश्विक स्तर के मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. जापान-सिंगापुर के मॉडल पर होगा निर्माण सरकार इस एजुकेशन सिटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए जापान और सिंगापुर जैसे देशों के मॉडल का अध्ययन कर रही है. साथ ही विदेशी कंसल्टेंट्स की मदद से डीपीआर को और बेहतर बनाया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, अगले दो महीने में इसका फाइनल इंटरनेशनल मॉडल सामने आ सकता है. 250 एकड़ में बनेगा आधुनिक एजुकेशन हब यह एजुकेशन सिटी पटना के आसपास लगभग 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाएगी. इसे ‘शेयर्ड कैंपस मॉडल’ पर बनाया जाएगा, जहां अलग-अलग विश्वविद्यालय और कॉलेज अपनी पहचान के साथ एक ही परिसर में मौजूद रहेंगे और कई सुविधाएं शेयर करेंगे. वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस होगा कैंपस इस एजुकेशन सिटी में छात्रों को अत्याधुनिक सुविधाएं देने की तैयारी है. इसमें स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, हाईटेक लैब, रिसर्च सेंटर, सेमिनार हॉल, हॉस्टल, गेस्ट हाउस, स्पोर्ट्स स्टेडियम, इंडोर स्टेडियम और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. साथ ही फैकल्टी और स्टाफ के लिए आवासीय परिसर भी बनाए जाएंगे. 547 करोड़ से अधिक का बजट, रोजगार के नए अवसर इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए 547 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, हालांकि आगे यह राशि बढ़ भी सकती है. सरकार का मानना है कि यह एजुकेशन हब न केवल शिक्षा के स्तर को ऊंचा करेगा, बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा. शेयर्ड कैंपस मॉडल से मिलेगा बड़ा फायदा शेयर्ड कैंपस मॉडल के तहत एक ही परिसर में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे छात्रों और शिक्षकों का समय बचेगा. साथ ही एक मजबूत रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार होगा. इंडस्ट्री कनेक्शन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विभिन्न कोर्स की उपलब्धता से यह परिसर शिक्षा का बड़ा केंद्र बन सकता है. बिहार बनेगा शिक्षा का मजबूत केंद्र सरकार की योजना है कि इस एजुकेशन सिटी के जरिए बिहार को देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल किया जाए. यहां देशभर के छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन मिलेगी और राज्य शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा.

डांस ग्रुप के खिलाफ नस्लीय आपत्ति, पटना में महिला की अनुचित हरकत वीडियो में कैद

पटना. पटना में नॉर्थ-ईस्ट से आई महिलाओं और युवतियों के साथ कथित नस्लीय टिप्पणी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो का सटीक स्थान स्पष्ट नहीं है, लेकिन आसपास के दृश्य के आधार पर इसे पटना जंक्‍शन या राजेंद्रनगर टर्मिनल का बताया जा रहा है। वीडियो में अरुणाचल प्रदेश से आई महिलाओं को ‘चिंकी’, ‘मोमो’ जैसे शब्दों से संबोधित किया जा रहा है, जिससे वे नाराज नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि ये आपत्तिजनक टिप्पणियां किसी पुरुष ने नहीं, बल्कि स्टेशन परिसर में मौजूद एक महिला द्वारा की जा रही थीं। बताया जा रहा है कि यह घटना वॉशरूम के पास हुई, जहां किसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई और फिर टिप्पणीबाजी शुरू हो गई। वीडियो बना रही एक युवती कहती सुनाई देती है कि वे लोग काफी दूर से यहां आए हैं, लेकिन उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। युवती यह भी आरोप लगाती है कि इस तरह की हरकतें देश की छवि को खराब करती हैं। विवाद के दौरान संबंधित महिला यह सफाई देती सुनी गई कि ‘मोमो’ उसका पसंदीदा भोजन है, लेकिन इसके बावजूद वह लगातार टिप्पणी करती रही। अरुणाचल की युवत‍ियों ने कहा-उन्‍हें नीचा दि‍खाने की कोश‍िश इस पर युवतियों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, शौचालय उपयोग को लेकर हुए विवाद के बाद यह मामला बढ़ा। फिलहाल, आतिथ्य सत्कार के लिए प्रसिद्ध बिहार में इस तरह की घटना की व्यापक स्तर पर निंदा हो रही है। पुलिस ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

अवैध कब्जों पर चला प्रशासन का डंडा, पश्चिमी चंपारण में 60 अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम

बगहा/चंपारण. बगहा प्रखंड एक के मझौवा गांव में बेतिया राज की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अंचल प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रशासन की ओर से चिह्नित 60 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर उनसे भूमि संबंधी कागजात प्रस्तुत करने और जवाब देने को कहा गया है। अंचल प्रशासन के अनुसार, मझौवा क्षेत्र में लंबे समय से बेतिया राज की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिल रही थी। नोटिस मिलने के बाद गांव के लोग अंचल कार्यालय पहुंचे। प्रभारी सीओ सह बीडीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि यदि संबंधित लोग निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब या वैध कागजात प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो कब्जे वाली जमीन को खाली कराया जाएगा। इसके लिए आवश्यक होने पर प्रशासनिक बल का भी प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले भी नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अधिकांश लोगों ने न तो जवाब दिया और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया। इसी को देखते हुए इस बार प्रशासन ने सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निष्पक्ष कार्रवाई से सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कर जनहित में उपयोग किया जा सकेगा। समय रहते प्रस्तुत करें कागजात वहीं, कुछ लोगों ने प्रशासन से पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक पात्रों को परेशान नहीं करने की मांग की है। अंचल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपने कागजात प्रस्तुत करें, ताकि अनावश्यक कार्रवाई से बचा जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।