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मुसल्लहपुर हाट फायरिंग केस: एलसीआर मांग के बाद टली जमानत पर सुनवाई

 पटना  राजधानी के मुसल्‍लहपुर हाट में कोचिंग विवाद से जुड़े मामले में ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद के भाई और स्‍टाफ को सोमवार को जमानत नहीं मिली। जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश की बेंच में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। एडीजी 33 की अदालत में अभ‍िषेक और गौरव की जमानत पर सुनवाई के दौरान दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने एलसीआर की मांग की है।   फर्स्‍ट क्‍लास मज‍िस्‍ट्रेट के यहां से एलसीआर (लोअर कोर्ट रिकॉर्ड) आने के बाद मामले में अगली तारीख को दोबारा बहस होगी। फर्स्‍ट क्‍लास मज‍िस्‍ट्रेट ने दोनों की बेल खारिज कर दी थी। फैजल खान मामले में 25 जून को सुनवाई 2 जून की रात खान ग्‍लोबल स्‍टडीज पर बवाल के बाद हुए फायरिंग मामले में फैजल खान उर्फ खान सर एवं उनके दो गार्डों की जमानत पर 25 जून को सुनवाई होनी है।   इस मामले में कोर्ट 25 जून तक गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है। पिछली सुनवाई में कोर्ट में पुलिस ने अपडेटेड केस डायरी सबम‍िट की थी।   क्‍या है पूरा मामला? बता दें कि कोचिंग संस्‍थान में हंगामा, मारपीट और फायरिंग मामले में ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद व उनके भाई एवं स्‍टाफ को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस घटना में खान ग्‍लोबल के गार्ड चुनचुन यादव को चोटें आई थीं। इसके बाद फैजल खान के दो गार्डों ने दो-दो राउंड फायरिंग की थी।   पिछले दिनों रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्‍ध परि‍स्‍थ‍ित‍ियों में हुई मौत के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। जमानत पर जेल से बाहर आए रौशन आनंद ने फैजल खान और कोल्‍ड स्‍टोरेज के मालिक पर अपने भाई की हत्‍या का आरोप लगाया था। 

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में अति पिछड़ा सम्मेलन, सीएम ने विपक्ष पर साधा निशाना

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अति पिछड़ा महासम्मेलन के मंच से पूर्व सीएम लालू यादव और रबड़ी देवी पर बड़ा हमला किया है। कहा है कि उनकी सुरक्षा में डेढ़ सौ पुलिस कर्मी आज भी तैनात हैं फिर भी सुरक्षा में कटौती की बात करते हैं। यह भी कहा है कि पटना से लेकर गोपालगंज और दिल्ली तक उनके कितने मकान हैं इसकी गिनती नहीं है। फिर भी परिवार के सभी लोगों को अलग-अलग बंगला चाहिए। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) की ओर से अतिपिछड़ा समाज के सम्मेलन होगा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों का अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा के शीर्ष नेता शामिल हुए। मंच से सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष खासकर लालू परिवार पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों इनके बंगले और सुरक्षा का मामला चर्चा में है। सबको पता होना चाहिए कि आज भी करीब डेढ़ सौ पुलिस कर्मी उनके आवास के बाहर तैनात हैं। अब पूरे बिहार की पुलिस इनकी सुरक्षा में तैनात कर दें तो अति पिछड़ा समाज की सुरक्षा कौन करेगा। उनको बुलेटप्रूफ गाड़ी और जरूरत के मुताबिक पुलिस बल तैनात है। अब और कितना चाहिए। सीएम ने कहा कि लालू परिवार सरकारी बंगला छोड़ने को तैयार नहीं है। अब माताजी, बेटा, बेटी सब को सेपरेट बंगला चाहिए। इनके पास अपना कितना मकान है इसकी गिनती नहीं है। माता और पुत्रों को सरकारी बंगला मिला है। इनका महुआबाग में बड़ा सा मकान है। कौटिल्य नगर में पांच बंगलों को मिलाकर एक मकान है। राजाबाजार में एक अलग घर। गोपालगंज और दिल्ली में कब्जा कर लिए हैं। अब और कितना बंगला चाहिए। सीएम ने राजद प्रमुख के शासन काल का इतिहास निकाला जा रहा है। सबका पूरा हिसाब किया जाएगा। सीएम ने कहा कि बिहार को अपराध मुक्त बनाना हमारा पहला लक्ष्य है। अपराध के मसले पर कोई समझौता नहीं होगा। जब तक मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हूं त अति पिछड़ों का कोई बाल बांका भी नहीं कर सकता। जरूरत होगी तो हम इस समाज के लिए खून भी देंगे। अपराध के खिलाफ हमारा ऑपरेशन आज भी जारी है। नीट परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को जेल भेजा गया है। विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस और राजद ने देश को लूटा है। कर्पूरी ठाकुर के नाम पर राजनीति की लेकिन उनको सम्मान मोदी सरकार ने दिया। अतिपिछड़ा समाज की ओर से भाजपा के केंद्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के प्रति हार्दिक आभार एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के आयोजनकर्ता कला संस्कृति मंत्री डॉ प्रमोद कुमार चंद्रवंशी हैं। थोड़ी देर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी आयेंगे। भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं का आगमन शुरू है। समारोह में अतिपिछड़ा समाज के विधायकों का सम्मान किया जाएगा। समारोह में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय मंत्री राजभूषण निषाद, पूर्व मंत्री राधामोहन सिंह सहित अन्य नेता पहुंचे। समारोह में सीएम को भाषण देने के लिए पोडियम विशेष पोडियम बनवाया गया। सीएम की सुरक्षा में लगे जवानों की देखरेख में इसे तैयार किया गया। बिहार में ऐसा पहली बार हो रहा है जब सीएम के सुरक्षाकर्मी अपनी देखरेख में पोडियम बनवाया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव: 17 नए और 16 निर्माणाधीन अस्पताल PPP मोड में शामिल

 पटना बिहार को आगामी पांच वर्षों के भीतर चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के एक मेडिकल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सूबे के विभिन्न क्षेत्रों में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार लगातार निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिसमें स्वास्थ्य को मुख्य प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है कि सूबे में मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का कायाकल्प अब लोक निजी साझेदारी (PPP) मॉडल के आधार पर किया जाएगा। इस नीति के तहत बिहार के अलग-अलग जिलों में कुल 33 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का तेजी से विकास किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मिलना संभव हो सकेगा। 17 नए और 16 निर्माणाधीन अस्पताल होंगे शामिल इस योजना के तहत चिन्हित किए गए कुल 33 अस्पतालों का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। इनमें 17 बिल्कुल नए अस्पताल 'ग्रीन फील्ड' के रूप में विकसित किए जाएंगे, जबकि पहले से ही अलग-अलग चरणों में चल रहे 16 'ब्राउन फील्ड' मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को भी इसी पीपीपी मॉडल में शामिल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, नए 'ग्रीन फील्ड' अस्पतालों को 60 साल के लिए और निर्माणाधीन 'ब्राउन फील्ड' अस्पतालों को 30 साल की अवधि के लिए पीपीपी मोड के आधार पर संचालन हेतु निवेशकों को सौंपा जाएगा। इन सभी अस्पतालों के पूर्ण रूप से धरातल पर उतरने के बाद बिहार में कुल सरकारी व पीपीपी संचालित मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की संख्या वर्तमान से बढ़कर सीधे 54 हो जाएगी, जिससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता में भी भारी इजाफा होगा। नेपाल और बांग्लादेश के मरीजों के लिए भी बड़ा केंद्र बनेगा बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने इस योजना के दूरगामी राजनैतिक और सामाजिक प्रभावों को साझा करते हुए बताया कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में इस अभूतपूर्व आधारभूत संरचना के विकास से बिहार न केवल उत्तर-पूर्वी भारत, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश के लिए भी मुख्य चिकित्सा हब के रूप में उभरेगा। इस योजना के साकार होने से बिहार के आम मरीजों की दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे सुदूर महानगरों के नामचीन अस्पतालों पर से निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी और हर बीमारी का त्वरित इलाज राज्य के भीतर ही संभव होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में देश और विदेश के प्रतिष्ठित निवेशकों से निवेश के आधिकारिक प्रस्ताव आमंत्रित कर लिए हैं। निवेशकों की सहूलियत, स्थलीय निरीक्षण और विभिन्न विभागों से त्वरित अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने एक विशेष नोडल पदाधिकारी भी तैनात कर दिया है ताकि इस पूरी प्रक्रिया को बिना किसी प्रशासनिक देरी के पूरा किया जा सके।

बिना कोचिंग की पढ़ाई से रचा इतिहास! श्रद्धा पांडेय ने किया BPSC 70वीं परीक्षा टॉप

पटना  बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का फाइनल रिजल्ट आ गया है. इसके बाद से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गई है.  जिले के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहने वाली श्रद्धा पांडेय ने 593 अंक हासिल कर पूरे बिहार में पहला स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग मिठाइयां बांटकर जश्न मना रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस उपलब्धि के बाद उन्हें SDM का पद मिल सकता है. खास बात यह है कि श्रद्धा पहले से ही उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर लखनऊ में तैनात हैं और अब उन्होंने BPSC में टॉप कर एक और बड़ी उपलब्ध हासिल की है।  शनिवार को जारी हुआ रिजल्ट  बिहार लोक सेवा आयोग ने शनिवार को 70वीं CCE का फाइनल रिजल्ट जारी किया. इस परीक्षा में श्रद्धा पांडेय ने कुल 593 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया. उन्हें SDM पद मिल सकता है. श्रद्धा प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहने वाली हैं.उन्होंने UPPSC संयुक्त राज्य सेवा परीक्षा 2024 में EWS कैटेगरी से 153वीं रैंक हासिल की थी. पहले ही अटेम्प्ट में यूपी PCS क्वालीफाई करने वाली श्रद्धा ने अब BPSC में भी परचम लहरा दिया।  दूसरे प्रयास में किया टॉप  श्रद्धा पांडेय की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि वह लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने UPPSC संयुक्त राज्य सेवा परीक्षा 2024 में EWS श्रेणी से 153वीं रैंक हासिल कर पहले ही प्रयास में यूपी PCS परीक्षा पास की थी. इसके बाद वह असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर नियुक्त हुईं. अब उन्होंने एक और कमाल कर दिखाया है. दूसरे प्रयास में BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में पहला स्थान हासिल कर उन्होंने अपनी मेहनत और तैयारी का एक और उदाहरण पेश किया है।  क्या करते हैं श्रद्धा के पिता?  श्रद्धा के पिता संतोष पांडेय वकील होने के साथ किसान भी हैं,जबकि मां सुनीता पांडेय हाउस वाइफ हैं.  श्रद्धा की शुरुआती पढ़ाई रानीगंज के मनीष मेमोरियल स्कूल से इंटर, संगम इंटरनेशनल स्कूल से और ग्रेजुएशन स्वामी करपात्री जी महाराज राजकीय महाविद्यालय से हुआ. खास बात यह कि श्रद्धा ने कही भी कोचिंग नहीं ली है और पहले ही कामयाबी में उन्होंने असिस्टेंट कमिश्नर निकला तो दूसरे प्रयास में बिहार पीसीएस टॉप कर दिया।  परिवार में खुशी की लहर  श्रद्धा की इस सफलता पर परिवार के लोग बेहद खुश हैं. घर पर मिठाइयां बांटी जा रही हैं और रिश्तेदार व शुभचिंतक लगातार बधाई देने पहुंच रहे हैं. बेटी की इस उपलब्धि पर पिता ने कहा कि बेटी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. उसने कभी कोचिंग की मदद नहीं ली है और हमेशा खुद पर भरोसा रखा. उसकी सफलता से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है. वहीं, गांव के लोगों का भी कहना है कि श्रद्धा की सफलता से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है। 

खातीपुरा मेगा कोचिंग टर्मिनल का उद्घाटन, रेल सुविधाओं को मिला नया आयाम

पटना जयपुर (खातीपुरा)-दरभंगा अमृत भारत एक्सप्रेस रेल सेवा का शुभारंभ हो गया है। यह ट्रेन यात्रा को एक नया आयाम देगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा तथा बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने रविवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर खातीपुरा में देश के पहले मेगा कोचिंग टर्मिनल और विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर विकसित यात्री सुविधाओं का भी उद्घाटन किया गया। राजस्‍थान और म‍िथ‍िला के संबंधों को मजबूती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नई ट्रेन राजस्थान और बिहार के मिथिला क्षेत्र के बीच सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि खातीपुरा में 205 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा कोचिंग टर्मिनल देश का पहला ऐसा आधुनिक केंद्र है, जहां वंदे भारत, एलएचबी, डेमू सहित विभिन्न प्रकार की ट्रेनों का अनुरक्षण एक ही स्थान पर किया जा सकेगा। बिहारवासियों को होगा विशेष लाभ इसकी क्षमता प्रति माह लगभग 450 ट्रेनों के रखरखाव की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस ट्रेन से राजस्थान में कार्यरत प्रवासी बिहारवासियों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि यह ट्रेन बिहार के लोगों के लिए एक सौगात की तरह है। सप्ताह में छह दिन चलने वाली यह अमृत भारत एक्सप्रेस रोजगार, शिक्षा, व्यापार और पारिवारिक कारणों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सुविधाजनक विकल्प साबित होगी। इसके साथ ही उत्तर पश्चिम रेलवे के 41 छोटे और मध्यम स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे रेल यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।

मानसून में वन संरक्षण को प्राथमिकता, झारखंड में एक करोड़ से अधिक पौधारोपण की तैयारी

रांची राज्य के वनों में होने वाली पर्यटन समेत अन्य गतिविधियां एक जुलाई से 30 सितंबर तक बंद रहेंगी। वन क्षेत्र में रहने वाले जीवों की सुरक्षा और नए लगने वाले पौधों को बारिश में पनपने के लिए गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है। पलामू टाइगर रिजर्व, दलमा समेत सभी वन क्षेत्र में इस दौरान सड़क निर्माण, बिजली के टावर लगाने जैसे कार्य भी बंद रहेंगे। मानसून और बारिश के इन तीन महीनों में वनक्षेत्र में दस लाख से ज्यादा नए पौधे भी लगाए जाएंगे। कच्ची संरचना में होगा पानी का संचयन वन एवं पर्यावरण विभाग ने इस दौरान वनों के विकास और नए पौधों के संरक्षण उपाय किए हैं। वर्षा के समय कच्ची संरचना में पानी का संचयन किया जाएगा। जून तक पलामू क्षेत्र में औसत से कम बारिश हुई है। ऐसे में नए लगने वाले पौधों की सिंचाई के लिए स्थानीय स्तर पर उपाय किए जा रहे हैं। कृषि वानिकी विशेषज्ञ संजय पांडे ने बताया कि राज्य के वनों में जुलाई से सितंबर कर ज्यादा बारिश होती है। लेकिन जून में लगने वाले पौधों को बचाने के लिए टैंकरों या अन्य माध्यम से पानी पहुंचाना ही विकल्प है। इको टूरिज्म का बढ़ेगा दायरा राज्य के वन क्षेत्र में मानसून के बाद होने वाली पर्यटन गतिविधियों में इको टूरिज्म का दायरा बढ़ाया जाएगा। जंगल सफारी के लिए बैट्री चालित वाहनों की संख्या 25 तक करने की योजना है। इसके अलावा वन क्षेत्र में आवासीय क्षेत्र में सोलर आधारित विद्युत व्यवस्था की जाएगी। पलामू टाइगर रिजर्व के साथ लातेहार में बनने वाली सफारी का काम भी मानसून के बाद तेज किया जाएगा।

पश्चिमी सिंहभूम में वोटर लिस्ट अपडेट को लेकर विशेष पुनरीक्षण अभियान युद्धस्तर पर शुरू

पश्चिमी सिंहभूम  झारखंड में मतदाता सूची (Voter List) को पूरी तरह त्रुटिहीन, पारदर्शी और अपडेटेड बनाने के लिए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं. इसी सिलसिले में निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी-सह-अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) श्रुति राजलक्ष्मी ने सोमवार को कराईकेला में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) के साथ एक हाई-लेवल बैठक की. बैठक में उन्होंने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया की बारीकियों को साझा करते हुए सख्त निर्देश दिए कि इस बार लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी और हर पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ना सुनिश्चित किया जाएगा. घर-घर दस्तक देंगे बीएलओ, दरवाजे पर चिपकेगा स्टिकर एसडीओ श्रुति राजलक्ष्मी ने साफ शब्दों में कहा कि इस पूरे महा-अभियान की सबसे मजबूत कड़ी बीएलओ की ‘घर-घर दस्तक’ होगी. इस बार प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बनाया जा रहा है. इसके मुताबिक इन्यूमरेशन फॉर्म का वितरण बीएलओ हर घर जाकर फॉर्म बांटेंगे. मतदाता उसे मौके पर ही भरवाकर वापस कलेक्ट करेंगे. पहचान के तौर पर हर घर के बाहर एक विशेष स्टिकर चिपकाया जाएगा. इस स्टिकर पर न सिर्फ मकान संख्या दर्ज होगी, बल्कि संबंधित बीएलओ का नाम और उनका मोबाइल नंबर भी साफ-साफ लिखा होगा. एसडीओ ने बताया कि चुनाव आयोग की इस अनूठी पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आम जनता को वोटर कार्ड या लिस्ट से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. लोग अपने घर के बाहर लगे स्टिकर से नंबर देखकर सीधे अपने बीएलओ से संपर्क कर सकेंगे. पारदर्शिता से ही बनेगी सटीक सूची: बीडीओ बैठक में मौजूद प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) भीषम कुमार ने भी बीएलओ को दो टूक लहजे में अपनी कार्यशैली सुधारने और पूरी जिम्मेदारी से काम करने की हिदायत दी. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन (Updated) बनाने का पूरा दारोमदार बीएलओ के कंधों पर है. राज्य स्तर पर पिछले गहन पुनरीक्षण की सूची से मैपिंग का काम शुरू हो चुका है, इसलिए फील्ड वर्क में किसी भी तरह की गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ जाएगी. इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में बीडीओ भीषम कुमार के अलावा प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सदानंद होता, कृषि पदाधिकारी विजय सिंह जोंकों सहित बंदगांव प्रखंड क्षेत्र के बड़ी संख्या में बीएलओ और निर्वाचन कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित थे.

रांची फ्लाइंग इंस्टिट्यूट में बड़ा विस्तार, पीपीपी मॉडल पर शुरू होंगे एविएशन कोर्स

रांची  झारखंड सरकार ने राज्य में विमानन क्षेत्र को सशक्त बनाने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (नागर विमानन प्रभाग) के तहत स्थापित झारखंड फ्लाइंग इंस्टिट्यूट में एयर होस्टेस के अलावा केबिन क्रू एवं ग्राउंड हैंडलर के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण हेतु पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मोड पर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर लिया गया है। इसके साथ ही रांची में जल्द ही एयर होस्टेस, केबिन क्रू ट्रेनिंग (डिप्लोमा अथवा सर्टिफिकेट कोर्स) और ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। प्रशिक्षण पीपीपी मोड पर निजी भागीदार के साथ संचालित होगा, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा, केबिन माक-अप और प्रतिष्ठित संस्थानों से मान्यता शामिल होगी। पहले चरण में सितंबर से सैकड़ों युवाओं, विशेषकर महिलाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है, जिसके लिए प्रशिक्षण शुल्क निर्धारित किया गया है। 60 हजार से 1.20 लाख तक खर्च का अनुमान इंस्टिट्यूट द्वारा पहले से ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के मानकों के अनुरूप कामर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) को लेकर आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब एयर होस्टेस और ग्राउंड स्टाफ प्रशिक्षण जुड़ने से यह संस्थान पूर्वी भारत में विमानन प्रशिक्षण का अग्रणी केंद्र बनकर उभरेगा। प्रारंभिक तौर पर राज्य सरकार और परिवहन विभाग किसके लिए 60 हजार एवं 1,20,000 रुपये फीस निर्धारित करने का निर्णय ले सकता है। डिप्लोमा कोर्स के लिए 60,000 रूपये का फीस होगा जबकि सर्टिफिकेट कोर्स के लिए यह राशि 1.2 लाख रुपये हो सकती है। सरकार इस मामले में कमजोर वर्गो के विद्यार्थियों को राहत देने का मन बना रही है। इंडस्ट्री लिंक्ड सिलेबस लागू होगा अधिकारियों के अनुसार, निजी भागीदारी के सहयोग से अत्याधुनिक ट्रेनिंग सुविधा, लाइब्रेरी और इंडस्ट्री-लिंक्ड सिलेबस लागू किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में बेहतर वेतनमान वाली नौकरियों में प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे। जेएफआई के प्रबंध निदेशक कैप्टन एस.पी. सिन्हा ने कहा, यह पहल सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जो न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि झारखंड को विमानन क्षेत्र में पसंदीदा गंतव्य भी बनाएगी। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में सैकड़ों स्थानीय युवा एयर होस्टेस, केबिन क्रू और ग्राउंड हैंडलिंग पदों पर काम करते नजर आएंगे। यह कदम राज्य के ग्रामीण एवं शहरी युवाओं को समान अवसर प्रदान करेगा और विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1.25 करोड़ रुपये के SBI घोटाले का आरोपी नेपाल से लौटकर छिपा था, CBI ने दबोचा

 धनबाद  Dhanbad SBI Scam स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की मुख्य शाखा, बैंक मोड़ में करीब दो दशक पहले हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को बड़ी सफलता मिली है। रविवार को चलाए गए समन्वित अभियान में सीबीआई ने बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव से तथा करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गिरफ्तार कर लिया। करीब 20 वर्षों की फरारी के बाद हुई इन गिरफ्तारियों को सीबीआई एसीबी धनबाद की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दोनों आरोपियों में एक को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए धनबाद न्यायालय में पेश किया गया जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वर्ष 2005 से फरार चल रहे दोनों आरोपी लंबे समय तक नेपाल में छिपे रहे और बाद में भारत लौटकर पहचान बदलकर अलग-अलग राज्यों में रह रहे थे। CBI के अनुसार, आरसी-11(ए)/2005-डी के तहत 31 अगस्त 2005 को मामला दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया था कि नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच एसबीआई की मुख्य शाखा, बैंक मोड़, धनबाद से करीब 1.25 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और गबन किया गया था। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान आरोपी बृजभूषण प्रसाद और करतार सिंह फरार हो गए थे। सीबीआई की कार्रवाई तेज होने पर दोनों नेपाल भाग गए। न्यायालय ने उन्हें घोषित अपराधी करार दिया था। उनकी गिरफ्तारी के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था तथा नकद इनाम की भी घोषणा की गई थी। सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल से लौटने के बाद दोनों आरोपी अपनी असली पहचान छिपाकर अलग-अलग राज्यों में रह रहे थे, ताकि गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई से बच सकें। पिछले तीन-चार महीनों से सीबीआई एसीबी धनबाद की टीम मानव स्रोतों और तकनीकी निगरानी के जरिए उनके ठिकानों का पता लगाने में जुटी थी। धनबाद सीबीआइ के सूत्रों ने बताया कि दूसरे आरोपित को भी लाया जा रहा है। न्यायालय में पेश करने के बाद उसे भी न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाएगा।  

हाईवे सुरक्षा के लिए बड़ा कदम, राष्ट्रीय राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने को लेकर नई गाइडलाइन

पटना  बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) के दोनों ओर अब मनमाने ढंग से मकान, दुकान या किसी भी तरह का व्यावसायिक ढांचा खड़ा करना मुमकिन नहीं होगा। सूबे में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए सम्राट सरकार एक बेहद सख्त नीति बनाने की तैयारी में जुट गई है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस नई नीति के तहत बिहार के भीतर राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों तरफ 15-15 मीटर की तय दूरी तक किसी भी प्रकार के नए निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। राज्य सरकार का पथ निर्माण विभाग इस बड़े प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार कर चुका है, जिस पर अमल करने के लिए अब शासन स्तर पर काफी तेज कवायद शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव यह बड़ी पहल सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने और उसके किनारे निर्माण कार्यों पर पाबंदी लगाने को लेकर दिए गए कड़े निर्देशों पर की जा रही है। पथ निर्माण विभाग द्वारा तैयार किए गए इस नीतिगत प्रस्ताव पर राज्य के विभिन्न संबंधित विभागों से परामर्श लिया जा रहा है। चूंकि अतिक्रमण और सड़कों की सुरक्षा का यह गंभीर मामला सीधे तौर पर ट्रैफिक पुलिस, विधि विभाग और परिवहन विभाग से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी तकनीकी और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पर विधि विभाग समेत विभिन्न विभागों से गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही इसे पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर लागू होगा नियम यह नया नियम बिहार से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर समान रूप से प्रभावी होगा। नीति के लागू होने के बाद हाईवे के किनारे जिसकी भी निजी जमीन होगी, वह 15 मीटर के इस दायरे के भीतर केवल रास्ता बनाने, पेड़ लगाने या खेती करने जैसे कार्यों के लिए ही भूमि का उपयोग कर सकेगा। लेकिन, इस 15 मीटर की नो-कंस्ट्रक्शन जोन की सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का पक्का या कच्चा निर्माण कार्य करने की इजाजत कतई नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस नीति के प्रभावी होने से हाईवे पर विजिबिलिटी बेहतर होगी और हादसों में भारी कमी आएगी। मालूम हो कि वर्तमान में भी पूरे राज्यभर में एनएच से अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन द्वारा लगातार बुलडोजर अभियान चलाया जा रहा है।