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आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि: झारखंड के राज्यपाल व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया नमन

  रांची झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते हुए गंगवार ने कहा कि देश महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए मार्ग और उनके आदर्शों का अनुसरण करना जारी रखेगा। गंगवार ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर लोक भवन, रांची में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। बापू के सत्य, अहिंसा और सेवा के आदर्श हमें सदैव मानवता, शांति और राष्ट्र निर्माण के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देते हैं।'' मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि बापू का सत्य, अहिंसा और न्याय का मार्ग हमारे लोकतंत्र और सामाजिक जीवन की आधारशिला है। सोरेन ने 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, ''महात्मा गांधी का जीवन हमें मानवता, करुणा और नैतिक साहस के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।'' महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।  

पार्टी बचाने की रणनीति! कुशवाहा का मास्टरस्ट्रोक, असंतुष्ट आलोक को सौंपी प्रदेश कमान

पटना पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में चल रही खटपट को दूर करने की कवायद की है। कुशवाहा ने दिनारा से विधायक आलोक सिंह को RLM का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। कुर्मी और कोइरी (लव-कुश) की राजनीति करने वाले कुशवाहा ने राजपूत समाज से आने वाले विधायक को बिहार में पार्टी की कमान सौंपी है। आलोक सिंह पूर्व में पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे थे। कुशवाहा ने इसके अलावा, दो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी बनाए हैं। वहीं, अभी तक प्रदेश अध्यक्ष का प्रभार संभाल रहे मदन चौधरी को RLM के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी गई है। रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। दरअसल, बीते नवंबर में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद से रालोमो में खटपट चल रही थी। उपेंद्र कुशवाहा द्वारा बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने से नाराज होकर कई पदाधिकारियों ने रालोमो छोड़ दी थी। इस्तीफों के सिलसिले के बीच कुशवाहा ने रालोमो की प्रदेश और जिला इकाइयों को भंग कर दिया था। रालोमो के 4 में से तीन विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो के कुशवाहा से नाराजगी की चर्चा भी खूब चली। रालोमो विधायकों की भाजपा से नजदीकी, फिर मनाने की कोशिश तीनों विधायकों ने पिछले दिनों पार्टी अध्यक्ष की लिट्टी पार्टी से किनारा किया था। इसके ठीक बाद उनके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की तस्वीर सामने आई। इसने रालोमो में टूट की आशंका को और बल दे दिया था। 16 जनवरी को हुई बैठक की तस्वीर हालांकि, बीते 16 जनवरी को कुशवाहा ने माधव आनंद और आलोक सिंह को अपने आवास पर बुलाया। बताया जा रहा है कि इस बैठक में रालोमो चीफ ने दोनों विधायकों की नाराजगी दूर करने के प्रयास किए। लेकिन, इस बैठक में तीसरे विधायक रामेश्वर महतो नहीं नजर आए थे। पार्टी को टूट से बचाने के लिए अब उपेंद्र कुशवाहा ने संगठनात्मक बदलाव करने का फैसला लिया है। पूर्व में नाराज चल रहे तीन में से एक विधायक आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। इससे पहले मधुबनी विधायक माधव आनंद को विधानसभा में रालोमो का सचेतक बनाया गया था। कुशवाहा का जातिगत दांव! बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राजनीति पिछड़ा वर्ग में आने वाली कुर्मी और कोइरी जाति पर केंद्रित रही है। इसे लव-कुश समीकरण कहा जाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड की राजनीति भी इन्हीं जातियों पर केंद्रित रहती आई है। बिहार के सियासी गलियारे में लव-कुश को सत्ता के लिए मजबूत समीकरण माना जाता है। 2023 की जाति आधारित गणना के अनुसार बिहार में कुशवाहा यानी कोइरी जाति की आबादी लगभग 4.2 प्रतिशत है, जबकि कुर्मी जाति की 2.87 प्रतिशत आबादी है। सवर्ण वर्ग से आने वाले राजपूत नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने को कुशवाहा का पार्टी में जातिगत संतुलन कायम रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। बिहार में राजूपत की आबादी 3.45 प्रतिशत है।  

हत्याकांड का खुलासा : सूरज बिहारी केस में पहला आरोपी दबोचा गया, पुलिस की छापेमारी जारी

पूर्णिया पूर्णिया में चर्चित युवा व्यवसायी और ब्लॉगर सूरज बिहारी हत्याकांड में पुलिस को पहली बड़ी सफलता मिली है। घटना के बाद से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विशाल कुमार के रूप में हुई है, जिसके पास से एक अवैध हथियार भी बरामद किया गया है। मरंगा थानाध्यक्ष कौशल कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी नेवालाल चौक के पास 56-55 गांव में छिपा हुआ है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी कर छापेमारी की और विशाल कुमार को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक लोडेड हथियार बरामद किया गया, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया। पुलिस आरोपी से कड़ी पूछताछ कर रही है, ताकि हत्याकांड में शामिल अन्य मुख्य आरोपियों स्नेहिल झा, ब्रजेश सिंह और नंदू सिंह के ठिकानों का पता लगाया जा सके। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस गिरफ्तारी से मामले की कई अहम कड़ियां जुड़ने लगी हैं और जल्द ही अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी भी संभव है। गौरतलब है कि सूरज बिहारी हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तीन अलग-अलग विशेष जांच टीमें गठित की गई थीं। दर्ज प्राथमिकी में ब्रजेश सिंह, नंदू सिंह, स्नेहिल झा, आदित्य, अमन सिंह, रजनीश सिंह, अंशू सिंह समेत तीन अज्ञात आरोपियों को नामजद किया गया है। मक्का व्यापार से जुड़े 18 गोदामों के मालिक थे बताया जाता है कि मात्र 28 वर्ष की उम्र में सूरज बिहारी लगभग 15 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर वाले व्यवसाय का संचालन कर रहे थे। वे मक्का व्यापार से जुड़े 18 गोदामों के मालिक थे और रियल एस्टेट व बिल्डिंग मैटेरियल के कारोबार में भी सक्रिय थे। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर वे अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल के कारण काफी चर्चित थे। सूरज करीब ढाई करोड़ रुपये की डिफेंडर कार में चलते थे और निजी सुरक्षा गार्ड भी रखते थे। सूरज बिहारी की हत्या से आक्रोश का माहौल सूरज बिहारी की हत्या के बाद से पूरे शहर में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने कैंडल मार्च निकालकर जल्द न्याय की मांग की है। पुलिस पर बढ़ते दबाव के बीच विशाल कुमार की गिरफ्तारी को जांच की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। थानाध्यक्ष ने भरोसा दिलाया है कि पुलिस मामले की तह तक जाकर सभी दोषियों को गिरफ्तार करेगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।  

जहां मर्द भी गांव छोड़ते थे, अब सुरक्षा बलों की कार्रवाई से हुई बदलाव

जमुई  बिहार के जमुई जिला का वो इलाका जिसे नक्सल समस्या के कारण लाल गलियारा की संज्ञा दी जाती थी. जिस इलाके से सटे जंगल में मुंगेर के तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू विस्फोट में शहीद हो गए थे. जिस इलाके के मर्द नक्सली खौफ के कारण दूसरे जगहों पर पलायन कर जाते थे. वहां अब सूरत बदलने लगी है. सीआरपीएफ के कैम्प आने के बाद तीन नक्सलियों के सरेंडर से लाल गलियारा में चहल पहल बढ़ गई. पलायन किए लोग गांव लौट आए हैं अब इंतजार है विकास का. सुरक्षा के बाद अब यहां बात होने लगी है बिजली, सड़क, शिक्षा और संचार सुविधा की. जमुई जिले के बरहट इलाके का चौरमारा गांव जो जंगलों और पहाड़ों से घिरा है. जहां दशकों से नक्सलियों का बोलबाला था. लाल गलियारे कहे जाने वाले इसी जंगली इलाके की सड़क पर नक्सलियों द्वारा किए गए एक विस्फोट में मुंगेर के तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू शहीद हो गए थे. अब वहां नक्सल समस्या खत्म हो चली है, चौरमारा वाले इस इलाके में अब विकास की बात की जा रही है. नक्सलियों के खौफ के कारण जो लोग पलायन कर गए थे वह गांव लौट आए हैं. चौरमारा गांव के नागेश्वर कोड़ा की कहानी भी ऐसी ही है. नक्सलियों के डर और खौफ के कारण नागेश्वर गांव छोड़कर दूसरे महानगर में चले गए थे, जबकि उनकी पत्नी संगीता देवी गांव में ही रही. लोगों को बुरी तरह पीटते थे नक्सली  संगीता देवी का सामना कई बार नक्सलियों के दस्ते से हुआ, जो गांव में अक्सर आकर अत्याचार करते थे. नक्सली खौफ के खात्मे के बाद यह दंपति उन घटनाओं को याद कर अभी भी सहम जाते हैं. संगीता बताती हैं कि कई बार हमारे सामने ही नक्सली लोगों को मारते-पीटते थे. जबरन साथ में बंधक बनाकर ले जाते और अपना काम कराते थे. मना करने पर लोगों को पीट-पीटकर घायल कर देते थे. उनके पति नागेश्वर बताते हैं कि मारपीट और अत्याचार की घटनाओं से डरकर उन्हें गांव छोड़ना पड़ गया था. कई लोगों ने छोड़ दिया था गांव  सिर्फ नागेश्वर कोड़ा ही नहीं गांव के अधिकांश मर्द जान जाने के डर और नक्सलियों की पिटाई के खौफ के कारण गांव से पलायन कर गए थे, अब वापस आ चुके हैं. यह सब संभव हुआ जब गांव में सरकार ने सीआरपीएफ कैंप लगा दी. पैरा मिलिट्री फोर्सेज की तैनाती के बाद इस इलाके में नक्सलियों का खौफ तब और खत्म हो गया जब यहां के हार्डकोर तीन नक्सली कमांडर ने सरेंडर कर दिया. सुरक्षा के बाद अब यहां के लोग विकास मांग रहे हैं, गांव में अभी तक बिजली नहीं, संचार की कोई सुविधा नहीं, गांव जाने वाली सड़क कच्ची है. हालांकि कई दशक के बाद यहां के लोग पहली बार अपना वोट गांव में डालें, सरकारी अनाज अब गांव तक पहुंचने लगा, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरी की मांग हो रही है. जंगल में बसे चोरमारा की आबादी लगभग 4 हजार है. नक्सली खौफ के खात्मे के बाद विकास की मांग पर सरकार और जिला प्रशासन की गंभीर है. जिले के डीएम का कहना है कि बिजली संचार सड़क शिक्षा जैसी चीजों पर काम हो रही है आने वाले दिनों में जल्द ही बेहतर परिणाम देखे जाएंगे.

धोखा खाई पत्नी ने उठाया हृदयविदारक कदम, साली से शादी करने वाले पति के घर का माहौल हुआ बेहाल

पटना बिहार के नालंदा जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां बिहार थाना क्षेत्र के पतुआना गांव में एक महिला और उसकी छह साल की बेटी की जहर खाने से मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में सनसनी फैल गई और परिजनों में कोहराम मच गया। पति ने कर ली थी साली से शादी मिली जानकारी के अनुसार, मृतक महिला की पहचान 27 वर्षीय मालो देवी के रूप में हुई है। वहीं मृत बच्ची का नाम प्रिया बताया गया है। बताया जा रहा है कि जहर खाने से दोनों की तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि उसके पति पिंटू कुमार ने अपनी ही साली से प्रेम संबंध के बाद शादी कर ली थी, जिससे उनकी बेटी मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगी थी। इसी विवाद को लेकर मालो देवी ने अपने पति के खिलाफ पहले भी मामला दर्ज कराया था, जिसमें पिंटू कुमार को जेल जाना पड़ा था। मायके पक्ष ने जताई हत्या की आशंका हालांकि प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन महिला के मायके पक्ष ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार किया है। मृतका के पिता ने  दामाद और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया है। पुलिस कर रही घटना की  जांच घटना की सूचना मिलते ही बिहार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच जारी है और सभी पहलुओं की बारीकी से छानबीन की जा रही है।

झारखंड में फिल्म शोले जैसे टावर पर चढ़कर बोला- कूदकर मर जाऊंगा

बोकारो. झारखंड में एक सीन को देखकर फिल्म शोले की याद आ गई। प्यार में असफल होने पर एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़कर सुसाइड करने की धमकी देने लगा। पुलिस ने करीब दो घंटे तक समझाने-बुझाने के बाद उसे सुरक्षित नीचे उतारा। वह अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने यहां आया था, लेकिन उसके परिवार ने मिलने की इजाजत नहीं दी। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि मध्य प्रदेश का एक युवक झारखंड के बोकारो जिले में 150 फुट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। प्यार में असफल होने के कारण वह टावर से कूदकर सुसाइड करने की धमकी देने लगा। यह घटना बुधवार को हरला थाना क्षेत्र के बसंती मोड़ पर घटी। पुलिस ने बताया कि युवक की पहचान भोजराज चंदेल के रूप में हुई है। वह मध्य प्रदेश के गुना थाना क्षेत्र के जौहरी गांव का निवासी है। हरला थाना के प्रभारी खुर्शीद आलम ने बताया कि चंदेल को करीब दो घंटे तक समझाने-बुझाने के बाद सुरक्षित नीचे उतारा गया। चंदेल ने पुलिस को बताया कि वह पिछले चार सालों से हरला थाना क्षेत्र की एक महिला के साथ रिश्ते में था। युवक ने अधिकारियों को बताया कि उनकी जान-पहचान सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। वह उससे मिलने यहां आया था, लेकिन उसके परिवार ने मिलने की इजाजत नहीं दी। इस बीच, घटना का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें वह युवक 'मैं मर जाऊंगा' कहते हुए सुनाई दे रहा है। हालांकि, पीटीआई वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद चंदेल बेहद परेशान था और मोबाइल टावर पर चढ़ गया। उसे बाद में पुलिस ने बचा लिया। पुलिस ने बताया कि उस युवक से पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की जांच जारी है।

झारखंड में कोयले का भंडार घटने से कई पुरानी खदानें होंगी बंद

रांची. झारखंड में आने वाले 10 सालों में कोयले की कई पुरानी खदानें बंद हो जाएंगी. राज्य में करीब 44 हजार हेक्टेयर जमीन से कोयले की खुदाई बंद हो जाने की आशंका जताई गई है. यह ऐसी जमीन है, जिनसे क्षमता का 68% से भी कम कोयले की खुदाई हो रही है. कुछ जगह पर तो कंपनियों के लिए कोयले की खुदाई करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है. कोयले की पुरानी खदानों के बंद हो जाने की वजह से राज्य के लाखों कोल श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा. कोयले की खुदाई के लिए 62 हजार हेक्टेयर जमीन झारखंड में करीब 62 हजार हेक्टेयर जमीन कोयले की खुदाई के लिए आवंटित की गई थी. अभी करीब 50 हजार हेक्टेयर में कोयले की खुदाई की जा रही है. इसमें कोल इंडिया की कंपनियों के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों के कैप्टिव माइंस हैं. इससे करीब 300 मिलियन मीट्रिक टन कोयला प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) निकल रहा है. इसमें 288 एमएमटीपीए कोयला ओपेन कॉस्ट और करीब 12 मिलियन टन अंडर ग्राउंड से निकल रहा है. इसमें प्रत्यक्ष तौर पर करीब 85 हजार से अधिक मजदूर लगे हुए हैं. बंद खदानों के पास पड़ी है 11 हजार हेक्टेयर जमीन राज्य में बंद खदानों के पास करीब 11185 हेक्टेयर जमीन पड़ी हुई है. इसमें ओपेन कास्ट की 4720 और अंडर ग्राउंड माइंस की करीब 6485 हेक्टेयर जमीन शामिल है. इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरमेंट, सस्टनेब्लिटी एंड टेक्नोलॉजी (आइ-फॉरेस्ट) ने झारखंड में ग्रीन ग्रोथ और ग्रीन जॉब्स की संभावना पर स्टडी कराया है. इसमें अगले 10 सालों में झारखंड में खदानों के बंद होने के बाद उपलब्ध जमीन को इसका सबसे बड़ा स्रोत बताया है. किसने तैयार की रिपोर्ट ह्यूस्टन, टेक्सास (यूनाइटेड स्टेट) की संस्था स्वनिति ग्लोबल ने भारत के कोयला प्रभावित जिलों में होनेवाले संभावित बदलाव पर रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की ”कोयला राजधानी” कहे जाने वाले झारखंड के लिए आने वाले दशक बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं. झारखंड के 24 में से 18 जिले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयला अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं. झारखंड में धनबाद, गिरिडीह, बोकारो और रामगढ़ जैसे पुराने कोयला जिलों में यह चुनौती सबसे गंभीर है. 2030 तक बंद हो जाएंगी धनबाद की आधी खदानें रिपोर्ट में कहा गया है कि धनबाद की करीब आधी कोयला खदानें इस समय चालू हैं या तो बंद हैं या निष्क्रिय हैं. अनुमान है कि 2030 तक इस क्षेत्र की 80% खदानें या तो समाप्त हो जाएंगी या आर्थिक तौर पर घाटे का सौदा हो जाएंगी. लाखों श्रमिकों की आजीविका पर खतरा धनबाद के कोयला खदानों के बंद हो जाने से न केवल राजस्व की हानि होगी, बल्कि लाखों श्रमिकों की आजीविका पर भी खतरा मंडरा रहा है. सीसीएल वाले इलाके में रामगढ़ जिला इस संक्रमण के दौर का महत्वपूर्ण केंद्र होगा. रामगढ़ को जलवायु परिवर्तन के जोखिमों के मामले में दूसरे जिलों के मुकाबले में कम संवेदनशील पाया गया है. लेकिन, यहां की कोयला निर्भरता अभी भी बड़ी चुनौती है. राज्य के चार जिलों में 73% कोयला खदानें झारखंड में करीब 85 ओपेन कॉस्ट हैं, जबकि 13 अंडर ग्राउंड माइंस चल रहे हैं. राज्य के 18 जिलों में कोयला खनन हो रहा है. इसमें 73% कोयला खदानें धनबाद, हजारीबाग, चतरा और बोकारो जिले में हैं. केंद्र ने पूरे देश में 147 कोयला खदानों को आनेवाले कुछ वर्षों में फेज आउट (खनन लायक नहीं पाने ) की संभावना जतायी है. झारखंड में 2.3 लाख ग्रीन जॉब्स की संभावना झारखंड में कोयला खदानों के बंद हो जाने से श्रमिकों के सामने आजीविका संकट खड़ा हो तो जाएगा, लेकिन अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में संभावनाएं भी काफी हैं. आई-फॉरेस्ट की निदेशक श्रेष्ठा बनर्जी ने कहा कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में झारखंड के पास 77 गीगावॉट की विशाल क्षमता है. जिसमें 59 गीगावॉट सौर, 15 गीगावॉट पवन और 2.8 गीगावॉट बायोमास ऊर्जा शामिल है. इस क्षमता का पूर्ण उपयोग करने से राज्य में लगभग 2.3 लाख पूर्णकालिक ग्रीन जॉब्स पैदा हो सकती है. इनमें से 68% के करीब नौकरियां सौर ऊर्जा क्षेत्र में होने की उम्मीद हैं. अगले कुछ वर्षों में बंद होनेवाली कोयला खदान एक संभावना लेकर आ सकती है. रोजगार के नये अवसर पैदा करने होंगे झारखंड जस्ट ट्रांजिशन टॉस्क फोर्स के अध्यक्ष एके रस्तोगी ने कहा कि खदानें बंद होने लगी हैं. सबसे पहले गिरिडीह में खदानें बंद होगी. यहां एक सामूहिक कोशिश की जरूरत है. इसमें कोल इंडिया, भारत सरकार और राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा. वहां रोजगार के नये अवसर पैदा करने होंगे. समय आ गया है कि जमीन पर योजनाओं को उतारा जाये. खाली जमीन रहने पर कब्जा होगा. जब काम होने लगेगा, तो लोगों को विश्वास होगा. कुछ सही होगा. कुछ गलत होगा. इससे आगे का रास्ता निकलेगा.  

जमशेदपुर में 24 अवैध बिल्डिंग ध्वस्त करने का हाई कोर्ट ने दिया आदेश

रांची. झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में जमशेदपुर में अवैध निर्माण मामले कोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी की याचिका खारिज करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि अगर अवैध निर्माण करने वाला कोई भी व्यक्ति कोर्ट में याचिका दाखिल करता है तो उसपर जुर्माना लगाया जाएगा। अदालत ने कहा कि किसी ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है, जिससे यह पता चल सके कि उन्होंने नियमानुसार निर्माण किया है। अवैध निर्माण को बचाने का अधिकार क्यों चाहिए? इनके चलते किसी को पानी और किसी को सूर्य की रोशन नहीं मिली रही है। ईमानदार लोगों का जीवन बर्बाद हो रहा है। कोर्ट इन्हें राहत नहीं दे सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व का आदेश हाई कोर्ट की बनाई अधिवक्ताओं की कमेटी, प्रार्थी और प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के बाद ही दिया गया है। वकीलों की कमेटी ने कहा है कि शहर में हुए अवैध निर्माण को तोड़ना ही एक मात्र विकल्प है। जेएनएसी की सांठगांठ पर फटकार कोर्ट ने एक बार फिर कहा कि ऐसा करने के लिए जेएनएसी की भरपूर सांठगांठ रही है। अदालत ने कहा कि नौ मार्च तक जेएनएसी 24 अवैध निर्माण को ध्वस्त कर शपथ पत्र दाखिल करे। अगली सुनवाई नौ मार्च को होगी। आदेश के खिलाफ 10 भवन मालिकों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जमशेदपुर में अवैध निर्माण हटाने की मांग को लेकर राकेश कुमार झा की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। उनकी ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण एक माह में ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जेएनएसी को हर संभव सहयोग प्रदान करे। कोर्ट ने नगर विकास सचिव, जमशेदपुर के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को जेएनएसी को सहयोग देने में किसी भी प्रकार की कमी के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। अवैध निर्माणों के प्रति किसी प्रकार की दया नहीं खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर यह कहा है कि अब अवैध निर्माणों के प्रति किसी भी प्रकार की दया दिखाने का समय नहीं है। इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण संबंधित वैधानिक प्राधिकरणों की मिलीभगत या कम से कम उनकी घोर निष्क्रियता के बिना संभव नहीं हैं। कुछ निर्णयों में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में उन नगर निकायों या प्राधिकरणों के विरुद्ध भी आदेश पारित किए जाने चाहिए, जिन्हें इस तरह के अवैध निर्माणों को रोकने का दायित्व सौंपा गया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने जांच के लिए तीन अधिवक्ताओं की एक समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निजी प्रतिवादियों द्वारा किए गए निर्माण कानून के अनुरूप नहीं हैं। समिति ने यह भी पाया कि भवन उपनियमों का पालन नहीं होना और संबंधित अधिकारियों की प्रभावी निगरानी नहीं होना ही इस स्थिति के मुख्य कारण हैं, जिसके चलते ईमानदार और कानून का पालन करने वाले नागरिक पीड़ित हो रहे हैं।

बिहार में भी घर बैठे मिलेगा पाइप लाइन गैस कनेक्शन

दरभंगा. भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) द्वारा संचालित पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) सेवा के लिए अब दरभंगा में ऑनलाइन ग्राहक पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही दरभंगा बिहार का पहला जिला बन गया है, जहां पाइपलाइन गैस कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था लागू की गई है। इस ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली का उद्घाटन सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने लहेरियासराय स्थित अपने संसदीय कार्यालय में किया। उन्होंने बीपीसीएल के गैस बिजनेस यूनिट (जियोग्राफिकल एरिया) द्वारा शुरू की गई इस डिजिटल सेवा का बटन दबाकर शुभारंभ किया। बीपीसीएल की ओर से दरभंगा शहर के साथ-साथ बहेड़ी और बेनीपुर क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। जल्द ही ग्रामीण इलाकों में भी इस योजना को विस्तार देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सांसद डॉ. ठाकुर ने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली आम लोगों के लिए वरदान साबित होगी। अब नागरिक घर बैठे आवेदन कर सकेंगे, अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी ले सकेंगे और कम समय में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। पीएनजी का अर्थ है पाइप्ड नेचुरल गैस। इसमें गैस सिलेंडर के बजाय पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों के किचन तक गैस पहुंचाई जाती है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन गैस का उपयोग होता है, जो हवा से हल्की और सुरक्षित मानी जाती है।

48 नगर निकायों में चुनाव के आज से चार फरवरी तक होंगे नामांकन

रांची. राज्य के 48 नगर निकायों में चुनाव को लेकर सभी जिलों में बुधवार को अधिसूचना जारी हो गई। उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों ने पूर्वाह्न 11 बजे अपने-अपने जिले के निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव की अधिसूचना जारी की। अब सभी निकायों में गुरुवार से नामांकन शुरू हो जाएगा। नामांकन की अंतिम तिथि चार फरवरी निर्धारित की गई है। सभी निकायों में नामांकन पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक संपन्न होगा। उम्मीदवार निर्वाची या सहायक निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। आयोग ने नामांकन प्रक्रिया को भी लेकर पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत किसी उम्मीदवार के नामांकन के समय निर्वाची पदाधिकारी कार्यालय की 100 मीटर की परिधि में महज तीन वाहनों का ही प्रवेश होगा। वहीं, नामांकन के समय अधिकतम पांच व्यक्ति का ही इस परिधि में प्रवेश हो सकेगा। निर्वाची पदाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि नामांकन पत्र दाखिल करने के समय ही नामांकन पत्रों की प्रारंभिक जांच कर ली जाए। जैसे उम्मीदवार और उनके प्रस्ताव के नाम मतदाता सूची में है या नहीं। सभी आवश्यक दस्तावेज नामांकन पत्र के साथ संलग्न है या नहीं। उम्मीदवार के साथ-साथ प्रस्ताव का भी मतदाता सूची में अनिवार्य रूप से होना चाहिए। नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाएगी तथा प्रतिदिन की रिपोर्ट आयोग को भेजी जाएगी। बताते चलें कि पांच फरवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी तथा छह फरवरी तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। सात फरवरी को उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित किया जाएगा। आयोग ने पहले ही चुनाव चिह्न निर्धारित कर दिए हैं। 23 फरवरी को मतदान होगा तथा 27 फरवरी को सुबह आठ बजे से मतगणना होनी है।