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IGIMS अस्पताल में शुरू हुई डिजिटल हेल्थकेयर सुविधा, AI करेगा मरीजों की जांच

पटना पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में मरीजों को बेहतर और सटीक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। अब अस्पताल में मरीजों के सटीक उपचार के लिए एआई आधारित जांच और इलाज की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। IGIMS में रोबोटिक्स फिजियोथेरेपी की शुरुआत अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि हाल ही में संस्थान में 164 बेड के आई हॉस्पिटल का निर्माण किया गया है। इसके अलावा मरीजों के लिए रोबोटिक्स फिजियोथेरेपी सेवा शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि रोबोटिक्स तकनीक के माध्यम से जनरल सर्जरी, यूरो सर्जरी, ऑन्को सर्जरी, गायनी सर्जरी समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इससे जटिल सर्जरी अधिक सटीकता और कम समय में संभव हो सकेगी। 1200 बेड का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल निर्माणाधीन राजधानी के प्रमुख अस्पतालों में शामिल इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में 1200 बेड का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल भी निर्माणाधीन है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष दिसंबर तक इस नए अस्पताल की शुरुआत कर दी जाएगी। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, निर्माणाधीन अस्पताल में अत्याधुनिक आईसीयू और इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को उन्नत और बेहतर उपचार मिल सकेगा। वर्तमान में 1700 बेड की सुविधा संस्थान में वर्तमान में लगभग 1500 से 1700 बेड की सुविधा उपलब्ध है। हाल ही में 500 बेड वाले नए अस्पताल भवन का उद्घाटन किया गया है। इसमें फिलहाल 100 बेड पर मरीजों का इलाज शुरू हो चुका है, जबकि शेष 400 बेड को भी जल्द ही चालू करने की तैयारी है। इन सुविधाओं के शुरू होने से मरीजों को सभी प्रकार की चिकित्सीय सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो सकेंगी।

रांची हेल्थॉन 2026 हाफ मैराथन के अमरदीप और बिरसी बने चैंपियन

रांची. सुबह के 5 बजे से ही मोरहाबादी मैदान में कदमों की थाप और जोश की लहरें गूंजने लगीं। वजह थी दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की ओर से आयोजित हेल्थॉन 2026 हाफ मैराथन। सूरज की पहली किरण के साथ हजारों धावक- युवा, बुजुर्ग, प्रोफेशनल रनर्स से लेकर आम फिटनेस लवर तक एक साथ मैदान पर उतर आए। यह सिर्फ दौड़ नहीं थी, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता का महोत्सव था, जहां हर कदम ने संदेश दिया- फिट रहो, जिंदगी जियो। झारखंड की शान मिस यूनिवर्स झारखंड 2025 रिया तिर्की ने किया धमाकेदार फ्लैग-ऑफ। अपनी खूबसूरती और आत्मविश्वास से रिया ने सभी धावकों का हौसला बढ़ाया। कार्यक्रम में काफी देर तक रहीं और कहा, यह पहल कमाल की है। हर किसी को अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहना चाहिए। रेगुलर एक्सरसाइज से जिंदगी बदल सकती है। रिया के अलावा रांची म्यूनिसिपल कमिश्नर आईएएस सुशांत गौरव, अडानी एसीसी के रीजनल ट्रेड सेल्स मैनेजर अंजन मंडल, कृष्णा कच्ची घानी मस्टर्ड आयल के डिप्टी मैनेजर अरुण गुप्ता, दैनिक जागरण के जीएम पारितोष झा, आईनेक्स्ट के डिप्टी एडिटर सौरभ सुमन, संपादकीय प्रभारी नदीम अख्तर भी इस उत्सव में शामिल रहे। चार कैटेगरी में हजारों ने रचा इतिहास  टोप्पो होटल से यूटर्न वाली इस रोमांचक दौड़ में सुबह 6:25 बजे 21 किमी की हाफ मैराथन शुरू हुई। उसके 5 मिनट बाद 10 किमी, फिर 5 किमी और आखिर में 2 किमी फन रन के धावक मैदान पर छा गए। पूरा रास्ता ऊर्जा, हंसी और प्रेरणा से भरा रहा। विजेताओं की चमकती ट्रॉफी और गर्व भरी जीत   21 किमी बॉयज में अमरदीप उरांव ने बाजी मारी—1 घंटा 13 मिनट 24 सेकंड में फिनिश। देवी दयाल कसना दूसरे और अनूप उरांव तीसरे रहे।   21 किमी गर्ल्स में बिरसी कुमारी ने कमाल किया—1 घंटा 31 मिनट 11 सेकंड। सुमन दूसरे और आरती कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं।   10 किमी बॉयज में सतीश कुमार महतो पहले, हेमंत कुमार महतो दूसरे, सुरेश उरांव तीसरे रहे।   10 किमी गर्ल्स में सीमा कुमारी पहले, अंजू कुमारी दूसरे, प्रज्ञा नीलम तीरू तीसरे स्थान पर रहीं।   5 किमी बॉयज में राजू कुमार पहले, प्रकाश मुंडा दूसरे, करण पाहन तीसरे रहे।   5 किमी गर्ल्स में रीतू कुमारी टॉप पर, दीपा पासवान और सीखा मंडी क्रमशः दूसरे-तीसरे स्थान पर रहीं। हर विजेता को पुरस्कार और सम्मान से नवाजा गया। यह दौड़ सिर्फ स्पीड की नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति, एकजुटता और स्वस्थ जीवन की जीत थी।

जीविका दीदी ने CM नीतीश कुमार को सुनाई रियल स्टोरी

मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड के मोहद्दीपुर की रहने वाली चंदू भारती ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सोमवार को लाइव संवाद किया। यह कार्यक्रम समाहरणालय सभागार में आयोजित किया गया था। चंदू भारती ने जीविका से जुड़ने के बाद अपने जीवन में आए बदलाव की चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्री को नीतीश भैया कहकर संबोधित किया। उन्होंने बताया कि जीविका से जुड़ने के बाद आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो रही हैं। नल जल योजना का लाभ मिला, बच्चों को नियमित पोशाक की राशि मिल रही है। दस हजार रुपये उन्हें पिछली बार मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिले थे। उन्होंने इसमें कुछ राशि मिलाकर गाय खरीदी और अब इससे रोजगार कर रही हैं। उनका सपना है कि इस योजना से दो लाख रुपये मिलेंगे तो इससे सिलाई सेंटर अपने दरवाजे पर खोलेंगी। जीविका दीदी ने सीएम को दिया धन्यवाद कार्यक्रम के दौरान सकरा प्रखंड के महदीपुर निवासी जीविका दीदी चंदू भारती ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री के समक्ष अपना अनुभव साझा किया। सीएम को भैया संबोधित करते हुए इस योजना को महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने वाली पहल बताया और सभी जीविका दीदियों की ओर से धन्यवाद दिया। चंदू भारती ने कहा कि सरकार की इस पहल से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। वे अब अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इस योजना से हमारे जैसे लोगों को बहुत फायदा हुआ है इस योजना से गांव की महिलाओं की स्थिति सुधर रही है। पहले से ज्यादा सशक्त बन रही हैं। अब हमलोग दूसरों के बारे में सोच रहे हैं। पहली बार 10 हजार रुपए मिला तो उसमें कुछ अपना पैसा मिलाकर गाय खरीदी। इससे रोजगार कर रही हूं। 2 लाख रुपए मिलने पर अपने घर पर ही सिलाई सेंटर खोलने की योजना है। यहां गांव की महिलाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार मुहैया कराने की कोशिश रहेगी। महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक जीवन में परिवर्तन जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने सभी जीविका दीदियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक जीवन में व्यापक परिवर्तन आया है। पहले जो महिलाएं केवल लाभार्थी के रूप में देखी जाती थीं, आज वे सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। वे न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराकर सामूहिक सशक्तिकरण की मिसाल कायम कर रही हैं। यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक है। गांव से लेकर शहर तक महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर नई कहानी गढ़ रही हैं और बिहार की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रशासन की ओर से जीविका दीदियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनके स्वरोजगार कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। अब तक भेजी गई राशि का विवरण योजना के तहत 26 सितंबर 2025 को 3,41,211 लाभार्थियों के खातों में 341.21 करोड़, 3 अक्टूबर 2025 को 97,448 लाभार्थियों को 97.44 करोड़, 24 अक्टूबर 2025 को 1,60,585 महिलाओं के खातों में 160.58 करोड़, 31 अक्टूबर 2025 को 7,548 लाभार्थियों को 7.54 करोड़ रुपए मिले। इसके अतिरिक्त, 28 नवंबर 2025 को 50,547 लाभार्थियों के खातों में 50.54 करोड़ और 11 दिसंबर 2025 को 17,670 लाभार्थियों को 17.67 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई। यहां पर स्वयं और गांव की महिला और युवतियों को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें भी रोजगार मुहैया कराएंगी। उन्होंने कहा कि जीविका से जुड़ने के बाद उनकी सोच भी विकसित हुई है। अब वे अपने साथ दूसरे महिलाओं के बारे में भी सोच रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया और कहा कि इस योजना से गांव-गांव की महिलाओं की स्थिति तेजी से सुधर रही है और वे सशक्त बन रही हैं।

मेले में गोलगप्पे खाने से 25 से अधिक बच्चे बीमार

पलामू. पांकी थाना क्षेत्र के द्वारिका इलाके में महाशिवरात्रि मेले के दौरान गोलगप्पा खाने के बाद 25 से अधिक बच्चे बीमार हो गए। सभी बच्चों को उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन की शिकायत है। अधिकांश बच्चों का इलाज ग्रामीण स्तर पर ही कराया जा रहा है। मामले की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव के लिए रवाना हो गई। एंबुलेंस भी भेजी गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया जा सके। जानकारी के अनुसार, द्वारिका के रघुआखाड़ में महाशिवरात्रि के मौके पर मेला लगा था। मेले में द्वारिका, यादव टोला, जमुआटांड़ समेत आसपास के गांवों के बच्चों ने गोलगप्पा खाया था। रविवार रात से एक-एक कर बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। सोमवार सुबह कई बच्चों की स्थिति और खराब हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पांकी को सूचना दी। अलर्ट पर स्वास्थ्य विभाग द्वारिका निवासी ध्रुव कुमार गुप्ता ने बताया कि उनके बेटे ने भी मेले में गोलगप्पा खाया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। स्थानीय स्तर पर उसका इलाज कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गांव के कई अन्य बच्चे भी बीमार पड़े हैं। इधर, पांकी के चिकित्सा प्रभारी डॉ. महेंद्र प्रसाद ने बताया कि कई बच्चों के बीमार होने की सूचना मिली है। स्वास्थ्य विभाग की टीम और एंबुलेंस को मौके पर भेजा गया है। मामले की जांच की जा रही है। कुछ ग्रामीण अपने स्तर पर भी बच्चों का इलाज करा रहे हैं।

झारखंड के स्कूल में आग का तांडव, कमरे से उठती लपटें देख अफरा-तफरी

धनबाद झारखंड के धनबाद में रविवार शाम एक स्कूल के स्टोर रूम में अचानक आग लग गई। आग लगते ही इलाके में हड़कंप मच गया। राहत की बात यह रही कि उस समय स्कूल बंद था, इसलिए कोई हताहत नहीं हुआ। आसपास के लोगों में अफरा-तफरी जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित हीरापुर के एचई हाई स्कूल में रविवार शाम अचानक आग लग गई। आग स्कूल के स्टोर रूम में लगी थी। देखते ही देखते कमरे से तेज धुआं और लपटें निकलने लगीं, जिससे आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत अग्निशमन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। दमकल कर्मियों की सतर्कता से आग स्कूल के अन्य हिस्सों में फैलने से बच गई। अगर स्कूल खुला होता तो… बताया जा रहा है कि स्टोर रूम में पुरानी किताबें, फर्नीचर और अन्य बेकार सामान रखे हुए थे। यही वजह रही कि आग तेजी से फैल गई और कमरे का अधिकतर सामान जलकर राख हो गया। स्कूल के एक छात्र ने बताया कि रविवार होने के कारण स्कूल बंद था। अगर स्कूल खुला होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। पुलिस और अग्निशमन विभाग मामले की जांच में जुटे हैं।  

सारण में ऑनलाइन क्लास के लिए शिक्षा विभाग ने मांगे आवेदन

छपरा. सारण जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को डिजिटल माध्यम से नई मजबूती देने की दिशा में एक बार फिर 'सारण गुरु ऑनलाइन क्लास' का नया शैक्षणिक सत्र- 2026-2027 शुरू होने जा रहा है। इस पहल को नई ऊर्जा, उत्साह और पूर्ण समर्पण के साथ प्रभावी ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से विषयवार दक्ष एवं इच्छुक शिक्षकों की आवश्यकता जताई गई है। यह कार्यक्रम जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी निशांत किरण के मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। वहीं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) अजीत अमर द्वारा के नेतृत्व में ऑनलाइन कक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन देने के लिए ऑनलाइन मंच एक मजबूत सहारा बन सकता है। डिजिटल शिक्षा को मिलेगा मजबूत आधार सारण गुरु ऑनलाइन क्लास जिले के विद्यार्थियों के लिए लगातार उपयोगी साबित हो रहा है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी, विषयगत शंकाओं का समाधान और नियमित अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने में इस प्लेटफॉर्म की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। अब नए सत्र में इसे और व्यवस्थित तथा प्रभावशाली बनाने के लिए शिक्षकों की नई सूची तैयार की जा रही है, ताकि प्रत्येक विषय के लिए योग्य शिक्षक उपलब्ध रह सकें। कौन शिक्षक कर सकते हैं आवेदन जिला शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सारण जिले के वे सभी शिक्षक, जो ऑनलाइन कक्षा के माध्यम से अध्यापन कार्य करना चाहते हैं, वे इस पहल से जुड़ सकते हैं। विशेष रूप से ऐसे शिक्षक जो अपने विषय में दक्ष हों, विद्यार्थियों को समझाने की क्षमता रखते हों और डिजिटल माध्यम से पढ़ाने में रुचि रखते हों, उनसे प्राथमिकता के आधार पर जानकारी मांगी गई है। मांगी गई जानकारी: यह विवरण देना होगा अनिवार्य इच्छुक शिक्षकों को अपनी संपूर्ण जानकारी जल्द उपलब्ध क् होगी। इसके अंतर्गत शिक्षक का नाम,विद्यालय का नाम, विषय,अध्यापन हेतु कक्षा (कौन-कौन सी कक्षाएं पढ़ा सकते हैं),मोबाइल नंबर, शैक्षणिक अनुभव (विस्तारपूर्वक) देना होगा। सारण के विद्यार्थियों को मिलेगा सीधे लाभ इस ऑनलाइन कक्षा व्यवस्था से जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। कई बार संसाधनों की कमी या विशेषज्ञ शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण विद्यार्थियों को कठिनाई होती है। ऐसे में यह पहल उन्हें बेहतर मार्गदर्शन, नियमित पढ़ाई और परीक्षा केंद्रित तैयारी उपलब्ध कराएगी। शिक्षकों को अपनी जानकारी एवं संपर्क में नंबर देना होगा इच्छुक शिक्षक अपनी पूरी जानकारी समय रहते टीम लिडर मृणाभ कुमार अथवा अभिषेक कुमार सिंह को उपलब्ध करा सकते हैं। सारण गुरु ऑनलाइन क्लास के जरिए जिला शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि 2026-27 सत्र में विद्यार्थियों को विषयवार गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई, नियमित ऑनलाइन मार्गदर्शन और परीक्षा तैयारी का मजबूत प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाए।

बिहार में पशुपालन मित्रों की नियुक्ति से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा रोजगार

जहानाबाद. पशु पालन विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक अहम पहल की जा रही है। सरकार की पशुपालन मैत्री योजना अब धरातल पर उतरने वाली है। जिसके तहत पंचायत स्तर पर स्थानीय युवाओं को जोड़कर न केवल उन्हें रोजगार दिया जाएगा, बल्कि पशुपालकों को भी प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य पशुपालन को वैज्ञानिक आधार पर सशक्त बनाना और गांवों में ही पशु स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित युवाओं को पशुओं के कृत्रिम गर्भधारण तथा सामान्य पशु रोगों की पहचान और प्राथमिक उपचार का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में सेवाएं दे सकें। वर्तमान में जिले में पशुपालन विभाग से जुड़े केवल 16 कर्मी कृत्रिम गर्भधारण का कार्य कर रहे हैं,जो बढ़ती मांग के अनुरूप अपर्याप्त माने जा रहे हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए अब पंचायत स्तर पर इस योजना का विस्तार किया जा रहा है। प्रावधान के अनुसार,प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक और अधिकतम तीन पशुपालन मैत्री नियुक्त किए जाएंगे। चयनित युवा अपने ही गांव अथवा आसपास के क्षेत्रों में कार्य करेंगे,जिससे पशुपालकों को गर्भधारण सेवाओं के लिए दूर-दराज भटकना नहीं पड़ेगा। समय पर सेवा मिलने से पशुओं की दूध उत्पादन में सुधार होगा और पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया की इस योजना उद्देश्य दोहरा है। एक ओर पशुपालकों को सुलभ, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना,वहीं दूसरी ओर ग्रामीण स्तर पर शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जुड़ने का मौका मिलेगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पशुपालन मैत्री पंचायत में पशुपालकों के लिए संपर्क सूत्र की तरह कार्य करेंगे और विभाग की योजनाओं को गांव तक पहुंचाने में भी सहायक बनेंगे। पशुपालन मैत्री योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल बेरोजगारी कम होगी,बल्कि पशुपालन एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में और अधिक विकसित होगा। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जल्द ही जिले में इस योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा।

बिहार में शिक्षक भर्ती का नया नियम, अब सिर्फ CTET पास उम्मीदवारों को मिलेगा मौका

पटना  बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने फैसला लिया है कि राज्य में अब प्रारंभिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 8) के लिए 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) का आयोजन नहीं किया जाएगा। विभाग के इस निर्णय के बाद, अब बिहार के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए केवल 'केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा' (CTET) के आधार पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली सीटेट (CTET) परीक्षा हर साल नियमित रूप से होती है। राज्य सरकार का मानना है कि सीटेट उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या पर्याप्त है, जिससे शिक्षक बहाली की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने लगभग तीन साल पहले ही टीईटी के आयोजन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उस समय विभाग ने कहा था कि तत्काल प्रभाव से यह परीक्षा नहीं ली जाएगी, लेकिन भविष्य में इसके आयोजन की संभावना खुली रखी गई थी। हालांकि, अब विभाग ने पूर्ण रूप से यह तय कर लिया है कि सीटेट से ही योग्य शिक्षक मिल रहे हैं, इसलिए अलग से राज्य स्तरीय टीईटी कराने की आवश्यकता नहीं रह गई है। राज्य में टीईटी का इतिहास बिहार में अब तक केवल दो बार ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के माध्यम से टीईटी का आयोजन किया गया है। पहली बार वर्ष 2011 में और दूसरी बार वर्ष 2017 में यह परीक्षा हुई थी। इस परीक्षा के जरिए दो स्तरों पर शिक्षकों की योग्यता जांची जाती थी: प्राथमिक कक्षा (1 से 5): छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों का मूल्यांकन। उच्च प्राथमिक कक्षा (6 से 8): मध्य विद्यालयों के लिए शिक्षकों की पात्रता का निर्धारण। छात्रों और अभ्यर्थियों पर क्या होगा असर? इस फैसले का सबसे सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जो विशेष रूप से बिहार टीईटी (BTET) की तैयारी कर रहे थे। अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी और केंद्र सरकार द्वारा आयोजित होने वाली सीटेट (CTET) परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सरकार के इस फैसले से चयन प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और बार-बार परीक्षा आयोजित करने का प्रशासनिक बोझ भी कम होगा। शिक्षा विभाग के इस कदम से यह भी स्पष्ट हो गया है कि आने वाली शिक्षक बहालियों में केवल वही छात्र हिस्सा ले पाएंगे जिन्होंने सीटेट के पेपर-1 (कक्षा 1-5 के लिए) या पेपर-2 (कक्षा 6-8 के लिए) में सफलता हासिल की है।

टिकट के लिए नहीं करनी पड़ेगी जद्दोजहद! होली पर 26 अतिरिक्त ट्रेनें चलेंगी, सफर होगा आसान

पटना होली को लेकर बिहार को जाने वाले यात्रियों को लेकर रेलवे शनिवार को एक बड़ी घोषणा किया है। होली में यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पूर्व मध्य रेलवे ने कोलकाता और नई दिल्ली से बिहार के लिए 26 होली स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला लिया है। ये ट्रेनें 20 फरवरी से 14 मार्च के बीच चलेगी। रेलवे ने होली में बिहार आने जाने वाले यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसको लेकर शुरू किया गया है। रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों की लिस्ट जारी करते समय यात्रियों से अपील किया है कि वे अपनी यात्रा से पहले ट्रेन की तिथि और समय की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से अवश्य जांच लें। रेलवे ने होली को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। कोलकाता से बिहार के लिए होली स्पेशल ट्रेन कोलकाता रूट पर रेलवे की ओर से हावड़ा जंक्शन-रक्सौल, सियालदह स्टेशन-मधुबनी और कोलकाता-मधुबनी के बीच स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला लिया गया है। इन ट्रेनों के परिचालन से बिहार, झारखंड और राजस्थान के यात्रियों को लाभ मिलेगा।   03043 / 03044 और 03045/03046 हावड़ा-रक्सौल स्पेशल ट्रेन सीतामढ़ी, दरभंगा, समस्तीपुर, बरौनी और झाझा के रास्ते चलेगी। 03183 / 03184 सियालदह-मधुबनी स्पेशल। 03185 / 03186 और 03187/03188 कोलकाता-मधुबनी स्पेशल दरभंगा-समस्तीपुर-बरौनी-झाझा मार्ग से परिचालित होंगी।   08753/08754 दुर्ग-मधुबनी स्पेशल  03007 / 03008 हावड़ा-खातीपुरा (जयपुर) स्पेशल नई दिल्ली और आनंद विहार रूट बिहार के लिए होली स्पेशल ट्रेन 04070 / 04069 आनंद विहार-शेखपुरा 04054 / 04053 नई दिल्ली-बरौनी 04060 / 04059 नई दिल्ली-सुपौल  04010 / 04009 दिल्ली-सीतामढ़ी, 04014 / 04013 आनंद विहार-लौकहा बाजार  04066 / 04065 आनंद विहार-खोरधा रोड जंक्शन ये ट्रेनें गोरखपुर, छपरा, हाजीपुर, गया, गोमो और भुवनेश्वर जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। हमसफर क्लोन एक्सप्रेस की समय बढ़ी रेलवे ने इसके साथ ही जयनगर-अमृतसर हमसफर क्लोन एक्सप्रेस (04651 / 04652) की परिचालन 1 मार्च से 31 मार्च तक बढ़ाने का फैसला किया है। इससे पंजाब में रह रहे मिथिलांचल के यात्रियों को विशेष सुविधा मिलेगी।

बिहार की सड़कों में लगेगा ठेकेदारों का 70% पैसा

पटना. बिहार में सड़क बनाने वाले ठेकेदारों के लिए नियम अब बदलने वाले हैं. पथ निर्माण विभाग एक नई नियमावली तैयार कर रहा है, जिससे काम में पारदर्शिता और जिम्मेदारी दोनों बढ़ेंगी. अभी तक ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन साल 2007 की नियमावली के तहत होता था, लेकिन अब उसकी जगह बिहार संवेदक निबंधन नियमावली 2026 लाने की तैयारी चल रही है. सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि ठेकेदारों की एक नई कैटेगरी बनाई जाएगी. इसे केटेगरी-1 कहा जाएगा. इस केटेगरी में वही कंपनियां शामिल हो सकेंगी जो 50 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा के प्रोजेक्ट में हिस्सा लेना चाहती हैं. अभी ऐसी कोई अलग केटेगरी नहीं थी, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं बन पाती थी. देना होगा जुर्माना नई नियमावली में यह भी साफ-साफ लिखा जाएगा कि अगर कोई कंपनी काम में लापरवाही करती है तो उसे कितना जुर्माना देना होगा. कितने समय तक उसे ब्लैकलिस्ट में रखा जाएगा, इसका भी स्पष्ट प्रावधान रहेगा. अभी तक इन मामलों में साफ नियम नहीं थे. इससे कई बार कार्रवाई में दिक्कत आती थी. विभाग की कोशिश जल्द लागू हो नियमावली विभाग की कोशिश है कि नई वित्तीय वर्ष में यह नियमावली लागू कर दी जाए. इसके साथ ही विभाग अपने मॉडल बिडिंग डॉक्यूमेंट में हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल भी जोड़ने जा रहा है. इस मॉडल को अक्टूबर 2025 में बिहार कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है. इस मॉडल के तहत सड़क परियोजना में कुल लागत का 70 प्रतिशत पैसा कंपनी लगाएगी, जबकि बाकी 30 प्रतिशत सरकार देगी. जरूरत के हिसाब सेटेंडर में खास शर्तें भी जोड़ी जा सकेंगी. विभाग की योजना है कि कुछ चुनिंदा सड़कों पर इस मॉडल से काम शुरू किया जाए.