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बड़े भाई के दही-चूड़ा भोज से नदारद रहे तेजस्वी, तेज प्रताप का आया हल्का-फुल्का बयान

पटना बिहार के पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जिसमें कई नेताओं ने शिरकत की। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी अपने बेटे के आवास पहुंचे और उन्हें आशीर्वाद दिया। हालांकि, तेज प्रताप के छोटे भाई एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। पिता के भोज में आने पर तेज प्रताप खुश नजर आए, तो भाई के नहीं आने पर उन्होंने चुटकी ले ली।   पटना में अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान बुधवार को तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनके दही-चूड़ा भोज में पिता (लालू) और राज्यपाल आए। दोनों ने आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बड़े-बुजुर्ग से आशीर्वाद लेते हुए कुछ नया काम करना है। इसके बाद पूरे बिहार में यात्रा निकालेंगे। खबर लिखे जाने तक तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई के घर भोज में नहीं पहुंचे। जब तेज प्रताप से इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा- तेजस्वी को न्योता भेज दिया, छोटे भाई हैं, थोड़ा लेट से सोकर उठते हैं। घर जाकर तेजस्वी को न्योता दिया था न्योता एक दिन पहले तेज प्रताप अपनी मां राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर गए थे और मां-पिता के साथ ही अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया था। दरअसल, अनुष्का यादव से रिलेशन की बात सामने आने के बाद पिछले साल तेज प्रताप यादव को लालू ने आरजेडी और अपने परिवार से बेदखल कर दिया था। इसके बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई और अकेले बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा। हालांकि, वह खुद महुआ सीट से चुनाव हार गए और उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। अब तेज प्रताप अपनी बिहार समेत अन्य राज्यों में अपनी राजनीतिक जड़ें मजबूत करने में जुटे हैं। इसी क्रम में दही-चूड़ा भोज में उन्होंने एनडीए, महागठबंधन समेत सभी दलों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया।  

लालू से मिलने और तेजस्वी के नहीं पहुंचने पर पर गदगद दिखे तेज प्रताप

पटना. मकर संक्रांति के अवसर पर जनशक्ति जनता दल के मुखिया और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप की दही-चूड़ा पार्टी से बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस पार्टी में न सिर्फ सभी पार्टियों के नेता शिरकत कर रहे हैं, बल्कि लालू परिवार भी एक होता दिखाई दे रहा है। खास बात ये थी कि इस भोज में राजद के प्रमुख लालू यादव शामिल हुए और उन्होंने तेज प्रताप को आशीर्वाद दिया, तो तेज प्रताप ने भी अपनी भावना व्यक्त की। तेज प्रताप ने कहा कि अगर तेजू भैया की दावत सुपर डुपर हिट नहीं होगी, तो किसकी होगी। दही-चूड़ा की शानदार दावत का आयोजन किया गया था। हमारे माता-पिता हमारे लिए भगवान हैं, इसलिए मुझे उनका आशीर्वाद मिलता रहेगा। सब लोग आएंगे। वो थोड़ा लेट सोकर उठते हैं: तेज प्रताप भाई तेजस्वी के अभी तक नहीं पहुंचने पर तेज प्रताप ने कहा कि हमने निमंत्रण पत्र दे दिया है, हमारे छोटे भाई हैं वो थोड़ा लेट सोकर उठते हैं। वह भी आएंगे। तेज प्रताप के इस बयान से यह भी साफ हो गया है कि इस भोज में नेता प्रतिपक्ष और तेज प्रताप के छोटे भाई तेजस्वी यादव भी शिरकत करेंगे। इसको लेकर तेज प्रताप के बड़े मामा प्रभुनाथ यादव ने भी बयान दिया है। प्रभुनाथ यादव ने कहा, "मैं अपने भांजे को आशीर्वाद देने दही-चूड़ा की दावत में आया हूं ताकि वह तरक्की करे और लोगों की सेवा करे। मैं अपने बड़े भांजे को आशीर्वाद देने आया हूं। पूरा परिवार इकट्ठा होगा।"

गोपालगंज में जल-जीवन-हरियाली अभियान में 230 पुराने तालाबों का होगा जीर्णोद्धार

गोपालगंज. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत इस साल 230 तालाबों का जीर्णाेद्धार कराया जाएगा। जिले में पूर्व में चिह्नित किए गए 887 तालाबों में से पहले चरण में 198 तालाबों की दशा को सुधारने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। दूसरे चरण में इन तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के बाद उनका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई है। लगातार गिरते जलस्तर में सुधार की पहल के बाद जिले में जल जीवन हरियाली योजना के तहत जिले में 3100 तालाबों को चिह्नित कर उनका जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया गया था। पहले चरण में एक एकड़ से अधिक 887 तालाबों को चिह्नित कर उनका जीर्णोद्धार करने का काम बीते साल में शुरू किया गया। अब 198 तालाबों के जीर्णोद्धार का काम अंतिम दौर में पहुंच गया है। अब इन तालाबों में पानी भी मौजूद रहने लगा है। इस साल शेष बचे 693 तालाबों में से 230 तालाबों के जीर्णोद्धार करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। सभी पंचायत में एक-एक मॉडल तालाब निर्माण की योजना मनरेगा के तहत जिले की सभी 230 पंचायतों में एक-एक मॉडल तालाब बनाने की योजना पर भी काम प्रारंभ किया गया है। इन तालाबों में साल के 12 माह तक लगातार पानी का स्तर सामान्य बनाए रखने के लिए विद्युत चालित पंप लगाए जाने की योजना है, ताकि तालाबों में कभी भी पानी की कमी जैसी समस्या पैदा नहीं हो। इस योजना के तहत 13 पंचायत में तालाब निर्माण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। पानी भरने के लिए लगेगा विद्युत चालित पंप वैसे तालाब जिनका जीर्णोद्धार किया जा रहा है, वहां गर्मी के दिन भी पानी की कमी नहीं होगी। इसके तहत संबंधित तालाब के आसपास मोटर चालित पंप लगाए जाएंगे। पंप के सहारे ऐसे तालाब में गर्मी के दिन में पानी भरने की व्यवस्था होगी। ताकि इन तालाबों में सालों भर पानी भरा रह सके। भव्य दिखेंगे चिह्नित किए गए पुराने तालाब पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार के दौरान इस बात का भी ख्याल रखने का निर्देश दिया गया है कि तालाब की भव्यता कहीं से भी कम नहीं दिखे। इसके लिए तालाब के चारों ओर पौधों को लगाने की भी योजना है, ताकि पेड़ की छाया के साथ पर्यावरण को भी स्वच्छ रखा जा सके।

सहरसा में 52 करोड़ की लागत से क्वालिटी और टाइम लिमिट में बनाएं सड़क: सांसद

सहरसा. खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजेश वर्मा ने मंगलवार को सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने सबसे पहले निर्माणाधीन एसएच-95 और 412 करोड़ की लागत से बन रहे डेंगराही घाट पुल का निरीक्षण किया। इसके बाद, महिषी प्रखंड के झाड़ा पंचायत में 52 करोड़ की लागत से बनने वाली बहोरबा से बेलडाबर सड़क का जायजा लिया। सांसद ने खगड़िया जिले के प्रसिद्ध मां कात्यायनी मंदिर में पूजा अर्चना की और फिर एसएच-95 का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यस्थल पर मौजूद इंजिनियरों से कार्य की प्रगति की जानकारी ली। सांसद ने कहा कि इस सड़क के बन जाने से खगड़िया और सहरसा का सीधा जुड़ाव होगा। निरीक्षण के दौरान साम्हरखुर्द पंचायत के मुखिया दारा सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सांसद से एसएच-95 को साम्हरखुर्द से जोड़ने की मांग की। सांसद ने इस पर अपने निधि से सड़क देने का आश्वासन दिया। इसके बाद, सांसद का काफिला डेंगराही घाट पहुंचा, जहां पुल निर्माण कर रहे कंपनी के कर्मियों से बातचीत की। ग्रामीणों ने पुल की गुणवत्ता और नक्शे पर आपत्ति जताई, जिस पर सांसद ने पटना में इंजिनियरों से चर्चा करने का आश्वासन दिया। झाड़ा पंचायत में ग्रामीणों ने बहुरबा-बेलडाबर सड़क का मुद्दा उठाया, जिस पर सांसद ने कहा कि यह सड़क एक वर्ष में पूरी कर ली जाएगी।

झारखंड में 50 करोड़ की सरकारी जमीन पर गरजा बुलडोजर

धनबाद. धनबाद में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भू माफिया की हिम्मत इतनी बढ़ी हुई है कि दिन के उजाले में बिनोद बिहारी चौक पर सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दस पक्की दुकानें खड़ी कर दीं। लगभग 50 करोड़ रुपए की इस सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल पिछले एक महीने से चल रहा था। डीसी को सूचना मिलने पर धनबाद अंचल कार्यालय की टीम ने धनबाद थाने की टीम के साथ मिलकर सभी दस अवैध दुकानों को तोड़ दिया। डीसी आदित्य रंजन के निर्देश पर एवं एसडीओ लोकेश बारंगे के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर आठ लेन रोड के बिनोद बिहारी महतो चौक को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इस दौरान कार्यपालक दंडाधिकारी नारायण राम तथा धनबाद सीओ रामप्रवेश कुमार ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाई गई दुकानें, अस्थाई निर्माण तथा पक्के निर्माण को हटाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया। जिला प्रशासन के इस अभियान से आसपास अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। विरोध करने पहुंची महिला को हिरासत में लिया: जिस समय दुकानों को तोड़ा जा रहा था, उसी समय एक महिला वहां पहुंचकर हंगामा करने लगी। महिला ने इसे अपनी जमीन बताकर हंगामा करना शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद महिला पुलिस की टीम ने उसे हिरासत में लेकर धनबाद थाने के हवाले कर दिया। देर शाम उसे थाने से छोड़ा गया। जिला प्रशासन को सूचना मिली है कि किसी ने इस जमीन को बेचा भी है। इसकी जांच होने के बाद ही पूरा मामले सामने आएगा। सरकारी जमीन पर अवैध रूप से लिया बिजली कनेक्शन : अभियान के दौरान यह भी उजागर हुआ कि सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने वालों ने बिजली कनेक्शन भी ले रखा था। इसकी भी जांच की जाएगी। मौके से करीब 50 बोरी सीमेंट, स्टोन चिप्स सहित कुछ अन्य निर्माण सामग्री भी जप्त की गई है। डीसी ने सभी सीओ को अपने-अपने अंचल में ऐसा अभियान चलाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने का निर्देश दिया है। विशेषकर अंचल के प्रमुख स्थान तथा उन स्थानों पर, जिसके कारण हमेशा ट्रैफिक जाम होता है। ट्राफिक जाम के कारण अक्सर स्कूली वाहन, एम्बुलेंस सहित जिले की बड़ी आबादी प्रभावित होती है। इस मामले की जानकारी देते हुए धनबाद के कलेक्टर आदित्य रंजन ने बताया कि बिनोद बिहारी चौक के समीप सरकारी जमीन पर कब्जे करने की शिकायत जिला प्रशासन को मिली थी। कई बार लोगों को उस सरकारी जमीन को खाली कर देने की सूचना भी दी गई थी। नोटिस के बाद भी किसी अवैध कब्जाधारी ने अतिक्रमण नहीं हटाया। जिसके बाद आज यह कार्रवाई की गई।

रांची से लापता दोनों बच्चे स्लम बस्ती से बरामद

रांची. रांची में बीते कई दिनों से लापता बच्चे रामगढ़ के चितरपुर की स्लम बस्ती से बरामद कर लिए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए संदिग्धों से पुलिस पूछताछ कर रही है। इस मामले की जानकारी देते हुए स्थानीय लोगों ने बताया कि लड़का को बजरंग दल के युवकों ने देखा उसके बाद उसे अपने पास रखकर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस पहुंची और दोनों बच्चों को बरामद कर लिया। बच्चों के साथ पकड़े गए आरोपियों से रामगढ़ एसपी पूछताछ कर रहे हैं। बता दें कि रांची के जगन्नाथपुर मौसीबाड़ी खटाल से दो जनवरी को अंश और अंशिका लापता हुए थे। दोनों बच्चे की तलाश में रांची पुलिस की टीम दिल्ली, मुंबई, बंगाल, बिहार और यूपी के इलाके में लगातार छापेमारी कर रही थी। क्या बोले सीएम सोरेन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अपहरणकर्ताओं के चंगुल से दो मासूम बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराना बेहद राहत भरा और सराहनीय कार्य है। पिछले कुछ दिन व्यक्तिगत रूप से काफी परेशान करने वाले रहे, लेकिन अंततः पुलिस को सफलता मिली। दूसरे राज्य में हुई समान घटनाओं के तार जोड़कर रांची पुलिस ने अपराधियों तक पहुंच बनाई। रांची पुलिस व झारखंड पुलिस की टीम को बधाई और अंश और अंशिका के परिवार को शुभकामनाएं। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने टीम को ‘डीजी डिस्क’ देने की घोषणा की झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने रांची पुलिस को इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई दी है। एडीजी मनोज कौशिक के नेतृत्व में गठित रांची पुलिस की विशेष टीम ने अपहरण किए गए दोनों बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया है। डीजीपी ने कहा कि इस सफलता के पीछे पुलिस टीम की कड़ी मेहनत और ठोस रणनीति रही है। बच्चों की तलाश के लिए पुलिस ने सघन अभियान चलाते हुए ऑटो, ट्रेन और निजी वाहनों सहित सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर लगाए थे। साथ ही, अपराधियों की सूचना देने पर दो-दो लाख रुपये के इनाम की भी घोषणा की गई थी। डीजीपी ने बताया कि मीडिया में हुए व्यापक प्रचार-प्रसार और पुलिस की सक्रियता के कारण अपराधियों पर भारी दबाव बन गया था। इसी वजह से वे बच्चों को लेकर झारखंड से बाहर भागने में असफल रहे और अंततः पुलिस ने उन्हें रामगढ़ से बरामद कर लिया। इस सराहनीय कार्य के लिए ऑपरेशन में शामिल पूरी टीम को ‘डीजी डिस्क’ से सम्मानित किया जाएगा। मामले का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि इस अपहरण के पीछे मानव तस्करी में शामिल एक बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय था। पुलिस ने इस मामले में अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है, जो झारखंड के बाहर के रहने वाले हैं। फिलहाल पकड़े गए आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है ताकि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क और इनके संपर्कों का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके।

बिहार के 10 शहरों की हवा हुई सबसे जहरीली

पटना. बिहार के छोटे शहरों में हवा लगातार खराब रह रही है। राज्य के 10 शहरों की हवा में पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 की मात्रा बढ़ी रहती है। जिन छोटे शहरों की हवा ज्यादा जहरीली है, उनमें आरा, हाजीपुर, कटिहार, मोतिहारी, अररिया, बेगूसराय, बेतिया, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर और बक्सर शामिल है। आरा और हाजीपुर का राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से अधिक रहा। इस बीच पटना में हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। खुले नाले से निकलने वाले अमोनिया गैस भी हवा में पीएम 2.5 बना रही है। इससे वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। छोटे शहरों में भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने में खुले नालों की महत्वपूर्ण भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। आईआईटी बीएचयू के अध्ययन के अनुसार खुले नाले से अमोनिया गैस निकल रही है। यह वाहनों से निकलने वाले सल्फर डाईऑक्साइड(एसओ2) से मिलकर पीएम 2.5 बन रहा है। पीएम2.5 यानी महीन धूलकण। दोनों गैस के आपस में मिलने से महीन कण बन रहे हैं। इसके कारण पीएम2.5 की मात्रा लगातार बढ़ी हुई पायी जा रही है। पटना के वायु प्रदूषण में कमी जरूर आयी है, लेकिन पीएम2.5 अक्सर बढ़ा हुआ रहता है। ऐसी ही स्थिति सूबे के अन्य छोटे शहरों की भी है। खुले नालों को बंद करना होगा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डॉ. डीके शुक्ला ने बताया कि अध्ययन की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि पटना के खुले नाले से निकल रही अमोनिया गैस से भी पीएम 2.5 बढ़ रहा है। अभी अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है। शहरों के खुले नालों को बंद करने से ही पीएम2.5 में कमी आएगी। हालांकि कई खुले नालों को बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद इस संबंध में कार्ययोजना बनाकर सरकार को भेजा जाएगी। खुले नाले में आर्गेनिक मेटेरियल होते हैं। गंदगी और कचरा के कारण अमोनिया गैस निकलती है। शहर के वायु में पहले से ही वाहनों से निकलने वाले सल्फरडाई ऑक्साइड मौजूद रहता है। दोनों के मिलने से भी पीएम2.5 बन रहा है। धूप निकलने पर अमोनिया हवा में प्रवेश कर जाता है। अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने और लगेंगे बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने आईआईटी बीएचयू को पटना में वायु प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए अध्ययन करने को लेकर समझौता किया था। अध्ययन के लिए एक साल का समय निर्धारित था, जो अब पूरा हो चुका है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने का समय और लगेगा। आईआईटी बीएचयू की टीम ने पटना के खुले नाले का सैंपल लेकर उसकी जांच की थी। अभी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि खुले नाले से निकलने वाली अमोनिया गैस के कारण भी वायु में पीएम2.5 की मात्रा बढ़ रही है।

पटना एम्स में बन रहा बिहार का पहला स्किन बैंक

पटना. अब जले हुए मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी. पटना एम्स में बनने जा रहा नया भवन बिहार में बर्न ट्रीटमेंट की तस्वीर बदलने वाला है. मार्च 2026 से एम्स पटना में अत्याधुनिक बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग का नया भवन पूरी तरह चालू हो जाएगा. नया भवन पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित होगा. इसमें कुल 50 बेड की व्यवस्था की गई है, जिसमें 12 आईसीयू बेड शामिल होंगे. मरीजों के ऑपरेशन के लिए मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं. इसके अलावा स्किन बैंक, डरमाटोम मशीन, हाइड्रोथेरेपी टब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी होंगी, जो अब तक राज्य के किसी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं. बिना हाथ लगाए होगी जख्मों की सफाई इस केंद्र की सबसे खास बात हाइड्रोथेरेपी टब है, जिससे मरीजों के जख्मों की सफाई बिना हाथ लगाए की जा सकेगी. इससे संक्रमण का खतरा कम होगा और मरीज को कम दर्द का सामना करना पड़ेगा. माइक्रोस्कोप की मदद से सर्जरी की जाएगी, जिससे सटीक और सुरक्षित ऑपरेशन संभव होगा. कॉस्मेटिक सर्जरी की भी मिलेगी सुविधा यह केंद्र सिर्फ बर्न मरीजों तक सीमित नहीं रहेगा. यहां कॉस्मेटिक सर्जरी और अन्य तरह की प्लास्टिक सर्जरी की सुविधा भी मिलेगी. माइक्रोवस्कुलर सर्जरी, एंडोस्कोपिक सर्जरी और लेजर सेवाएं भी यहां उपलब्ध कराई जाएंगी. इससे बिहार के मरीजों को इलाज के लिए बाहर के बड़े शहरों में जाने की मजबूरी नहीं रहेगी. भवन में इलाज के साथ-साथ मरीजों की संपूर्ण देखभाल की भी व्यवस्था होगी. यहां नर्सिंग स्टाफ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, तकनीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, सोशल वर्कर, हैंड थेरेपी विशेषज्ञ और डाइटिशियन की तैनाती की जाएगी. इसका उद्देश्य सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि मरीजों को शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ करना है. मार्च से शुरू होने की उम्मीद बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा सिंह के अनुसार भवन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. जिन मशीनों का ऑर्डर दिया गया है, उनकी आपूर्ति जल्द हो जाएगी. उम्मीद है कि मार्च महीने से मरीजों को यहां आधुनिक और समर्पित इलाज की सुविधा मिलने लगेगी.

मुजफ्फरपुर के नए निगम आयुक्त ऋतुराज ने स्वच्छ गंगा मिशन और एआइ से निगरानी को बताया प्राथमिकता

मुजफ्फरपुर. ऋतुराज प्रताप सिंह ने नगर आयुक्त का पदभार संभाल लिया। उपनगर आयुक्त अमीत कुमार ने उनको प्रभार सौंपा। पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि शहर का स्वच्छ, स्वस्थ एवं सुंदर बनाना उनका लक्ष्य होगा। शहर की विकास योजनाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को संज्ञान में लेकर तत्काल दूर किया जाएगा। पदभार संभालने के बाद महापौर निर्मला देवी से औपचारिक मुलाकात की। महापौर ने भी बुके देकर उनका स्वागत किया। वहीं, एक दर्जन पार्षदों ने भी नगर आयुक्त को बुके देकर स्वागत किया। इसके बाद नगर आयुक्त ने कार्यालय के सभी शाखा का निरीक्षण किया और कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया। बताते चलें कि विक्रम विरकर के तबादले के बाद एक माह तक नगर आयुक्त का पद खाली था। निगम कार्यालय से निकलने के बाद नगर आयुक्त ने कंपनीबाग स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर पहुंच मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी कंपनी के प्रबंध निदेशक का कार्यभार भी संभाला। उन्होंने कमांड सेंटर का निरीक्षण किया। नए नगर आयुक्त के सामने होंगी कई चुनौतियां पदभार संभालने के बाद नए नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह के सामने कई चुनौतियां होंगी। सबसे बड़ी चुनाैती नगर निगम बोर्ड एवं सशक्त स्थायी समिति की बैठकों में लिए गए लंबे समय से लंबित निर्णयों के अनुपालन की होगी। उनके सामने नगर निगम आडिटोरियम के विकास के लिए 13.67 करोड़ एवं घिरनी पोखर के विकास के लिए 2.62 करोड़ रुपये की योजना को जमीन पर उतारने की होगी। पूर्व नगर आयुक्त ने शहरवासियों को नये साल पर एआइ आधारित स्मार्ट निगरानी व्यवस्था देने की घोषणा की थी जिसे पूरा करने की कवायद करनी होगी। मुजफ्फरपुर में स्वच्छता सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए 3.86 करोड़ रुपये से शौचालय का निर्माण कार्य में पूरा करना होगा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन-2 के अंतर्गत 77.40 करोड़ रुपये से फरदो नाला के पानी का उपचार कर व्यवसायिक उपयोग के लिए किए जा रहे प्रयास को पूरा कराना होगा। शहरवासियों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन की दिशा में 50 टन प्रतिदिन क्षमता वाले मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी के निर्माण की कवायद करनी होगी। स्मार्ट सिटी की बची योजनाओं को तेजी से पूरा कराने के लिए उनको प्रयास करना होगा। सिटीज-2.0 योजना को जमीन उतारने की बड़ी चुनौती उनके सामने होगी।

राजधानी पटना होगी तारों से मुक्त, अंडरग्राउंड पावर सप्लाई को मिली हरी झंडी

पटना बिहार की राजधानी पटना के लोगों को बिजली के खंभों एवं तारों के जाल से मुक्ति मिलने वाली है। शहर में अब बिजली की सप्लाई अंडरग्राउंड होगी। इसके लिए जमीन के अंदर केबल बिछाई जाएगी। नीतीश कैबिनेट से इस परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। बैठक में कुल 41 एजेंडे पारित हुए।   जानकारी के अनुसार, पटना शहर में अंडरग्राउंड केबलिंग के जरिए घरों में बिजली आपूर्ति की परियोजना का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत किया गया। इस परियोजना पर कुल 653 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। परियोजना के तहत पटना इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग (पेसू) के अंतर्गत 13 प्रमंडलों में भूमिगत केबलिंग के जरिए बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस परियोजना पर 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार द्वारा खर्च की जाएगी। जबकि शेष 40 फीसदी बजट बिहार सरकार खर्च करेगी। क्या होती है अंडरग्राउंड केबलिंग? अभी पटना में बिजली की सप्लाई खंभों पर लटके तारों से होती है। नई परियोजना में जमीन के अंदर भूमिगत केबल बिछाई जाएगी, जिससे विद्युत आपूर्ति की जाएगी। इससे आंधी-तूफान के समय बिजली की कटौती से छुटकारा मिलेगा। साथ ही तंग गलियों और चौक-चौराहों पर तार हवा में लटके रहने से हादसों का जोखिम भी कम होगा। इससे शहर की सौंदर्यता बढ़ेगी और बिजली चोरी से विद्युत विभाग को होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।