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कृषि मंत्री विजय सिन्हा की घोषणा: स्कूलों में सॉयल टेस्टिंग लैब से बढ़ेगी वैज्ञानिक सोच और कृषि जागरूकता

पटना बिहार के 629 सरकारी विद्यालयों में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने यह घोषणा की है। सोमवार को कृषि भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना तथा मुख्यमंत्री बागवानी मिशन अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, छात्रों में अनुसंधान एवं प्रयोगात्मक क्षमता विकसित करने और किसानों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने संबंधी योजनाओं पर चर्चा हुआ। कृषि मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के अंतर्गत संचालित स्कूल सॉयल हेल्थ प्रोग्राम के तहत राज्य के कुल 160 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा चुकी है। इस पहल का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर छात्रों को मृदा परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया से जोड़ना तथा कृषि एवं पर्यावरण के प्रति उनकी समझ को विकसित करना है। अब आगे वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस कार्यक्रम का व्यापक विस्तार करते हुए राज्य के कुल 629 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी और इस योजना को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से कक्षा 7, 8, 9 एवं 11 के छात्र-छात्राएं मृदा परीक्षण, नमूना संग्रहण तथा मृदा स्वास्थ्य संबंधी व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लेंगे। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल एवं अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित होगी। एक लाख रुपये की लगात आएगी कृषि मंत्री ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय में मिनी सॉयल टेस्टिंग प्रयोगशाला की स्थापना के लिए एक लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है, जिसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार तथा 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी। भारत सरकार द्वारा प्रत्येक विद्यालय को 50 मिट्टी नमूनों का संग्रहण, परीक्षण तथा किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहल छात्रों, विद्यालयों और किसानों के बीच एक प्रभावी समन्वय स्थापित करेगी तथा संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की पहल कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को नई दिशा प्रदान करेगी। छात्रों को इसका लाभ सबसे ज्यादा मिले समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने चतुर्थ कृषि रोड मैप के अंतर्गत तैयार डीपीआर के आधार पर संचालित ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के अंतर्गत पिछले तीन वित्तीय वर्षों के लिए कुल तीन करोड़ रुपये की लागत से इस योजना के क्रियान्वयन को स्वीकृति प्रदान की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत 60 लाख रुपये की राशि के अंतर्गत कुल 13.62 लाख रुपये की निकासी और व्यय को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया ताकि किसानों और विद्यार्थियों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।  

झारखंड सरकार का बड़ा कदम, JSW स्टील को खनन पट्टा; बोकारो-धनबाद बेल्ट में बढ़ेंगी संभावनाएं

बोकारो. झारखंड सरकार ने जिले के चंदनकियारी स्थित पर्वतपुर कोल ब्लॉक और सीतानाला कोल ब्लॉक के खनन पट्टा को स्वीकृत कर लिया है। इससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और जश्न का माहौल है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को मंजूरी मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं में नई आशा जगी है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि कोयला खनन शुरू होने से चंदनकियारी में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। विधायक उमाकांत रजक ने इसे ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए कहा कि इससे रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विकास और स्थानीय व्यापार-व्यवसाय को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला चंदनकियारी को विकास और आत्मनिर्भरता की नई दिशा देगा। विधायक का कहना है केि विकास के कार्यो से संबंधित फाइलों की धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं। विदित हो कि यह दोनों कोल ब्लाक जेएसडब्ल्यू स्टील को वर्ष 2023 में नीलामी के माध्यम से दिया गया था। तब से खनन पट्टा एवं अन्य स्वीकृति को लेकर उत्पादन प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। अब खनन पट्टा मिलने के बाद जल्द ही उत्पादन प्रारंभ होने की संभावना है। अब निवेश, रोजगार और विकास पर नजर कैबिनेट की स्वीकृति के बाद पर्वतपुर कोल ब्लॉक के 2174.52 एकड़ तथा सीतानाला कोल ब्लॉक के लगभग 792 एकड़ क्षेत्र में खनन गतिविधियां शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा। खनन कार्य शुरू होने के साथ परिवहन, मशीनरी, ठेका कार्य, छोटे व्यापार, होटल और सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा सड़क, बिजली, जलापूर्ति और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि वर्षों से कागजों में अटकी परियोजनाएं धरातल पर उतरेंगी और चंदनकियारी कोयला आधारित औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में उभरेगा। वर्षों के इंतजार के बाद खुला रास्ता: पर्वतपुर कोल ब्लॉक का सफर पिछले कई वर्षों से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर इसके संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) को सौंपने का निर्णय लिया था। उस समय यह माना गया था कि बंद पड़ी खदान के चालू होने से करीब चार हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। लगभग नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस कोल ब्लॉक को भूमिगत (अंडरग्राउंड) खनन के रूप में विकसित करने की योजना थी ताकि आसपास के गांवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। हालांकि, कोल ब्लॉक आवंटन नीति, कानूनी प्रक्रियाओं और स्वामित्व हस्तांतरण की जटिलताओं के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। पहले सेल इसकी देखरेख करता रहा, बाद में ब्लॉक बीसीसीएल के पास पहुंचा और अंततः वर्ष 2023 में जेएसडब्ल्यू स्टील ने नीलामी के माध्यम से इसे हासिल कर लिया। पर्वतपुर-सीता नाला परियोजना को संचालन की मंजूरी, दुगदा वाशरी को मिलेगा कच्चा कोयला सरकार से संचालन की अनुमति मिलने के बाद जेएसडब्ल्यू स्टील की पर्वतपुर एवं सीता नाला कोकिंग कोल परियोजना में उत्पादन शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। परियोजना से निकाले जाने वाले कोकिंग कोयले का उपयोग दुगदा कोल वाशरी में किया जाएगा, जिसका संचालन भी हाल ही में जेएसडब्ल्यू स्टील को सौंपा गया है। जानकारी के अनुसार, पांच वर्षों से अधिक समय से बंद पड़ी दुगदा कोल वाशरी को पुनः चालू करने की तैयारी तेज हो गई है। कंपनी वाशरी की मशीनरी और आधारभूत संरचना का आकलन कर रही है। वाशरी की वर्तमान क्षमता सालाना दो मिलियन टन वाश्ड कोल उत्पादन की है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर चार मिलियन टन तक ले जाने की योजना है। पर्वतपुर और सीता नाला परियोजना से मिलने वाला कच्चा कोयला दुगदा वाशरी के लिए स्थायी फीड का काम करेगा। इससे वाशरी के नियमित संचालन में मदद मिलेगी और कोकिंग कोल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि खदान और वाशरी दोनों के संचालन की जिम्मेदारी एक ही कंपनी के पास होने से उत्पादन, परिवहन और प्रसंस्करण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। दुगदा वाशरी के पुनः संचालन से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ इस्पात उद्योग को गुणवत्तापूर्ण वाश्ड कोकिंग कोल उपलब्ध होगा। इससे आयातित वाश्ड कोल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। बोकारो-धनबाद कोल बेल्ट में इसे एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास के रूप में देखा जा रहा है।

18 वर्ष पूरे करने वाले युवाओं के लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अवसर

रांची  एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा अपने पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 गणना चरण (30 जून से 29 जुलाई) तक फॉर्म-6 बीएलओ को जमा कर सकेंगे। हालांकि, यह फॉर्म और दस्तावेज दावा एवं आपत्ति अवधि (पांच अगस्त से चार सितंबर) के दौरान भी जमा किया जा सकेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, वैसे व्यक्ति जो झारखंड या भारत के किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें जन्म तिथि और जन्म स्थान के आधार पर स्वयं, स्वयं और माता-पिता में से किसी एक तथा स्वयं और दोनों माता-पिता के लिए घोषणा पत्र और आवश्यक दस्तावेज के साथ फॉर्म-6 जमा करना होगा आवेदक दस्तावेज के रूप में पिछले एसआईआर में तैयार मतदाता सूची का वह एक्सट्रैक्ट पेज भी जमा कर सकता है, जिसमें उसके माता-पिता का नाम है। यह एक्सट्रैक्ट पेज निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी, सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी तथा बीएलओ के पास उपलब्ध हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, झारखंड की वर्ष 2026 की मतदाता सूची में सम्मिलित वैसे मतदाता जो वर्ष 2003 की मतदाता सूची से अपना या अपने माता-पिता की मैपिंग पूरा कर चुके हैं, लेकिन वह झारखंड के किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित होना चाहते हैं, उन्हें कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। इन्हें दावा और आपत्ति अवधि के दौरान केवल फॉर्म-8 जमा करना होगा। इसी तरह, झारखंड से बाहर की वर्तमान मतदाता सूची में सम्मिलित मतदाता, जो झारखंड के किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित होना चाहते हैं, उन्हें दावा और आपत्ति अवधि के दौरान जन्म तिथि और जन्म स्थान के आधार पर स्वयं, स्वयं और माता-पिता में से किसी एक अथवा स्वयं और दोनों माता-पिता के लिए घोषणा पत्र और आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-8 जमा करना होगा। यह आवेदक भी दस्तावेज के रूप में पिछले एसआईआर में तैयार मतदाता सूची का उद्धरण पृष्ठ जमा कर सकता है, जिसमें उसके माता-पिता का नाम सम्मिलित है।

नशे के खिलाफ बड़ा अभियान, ANT F अब पूरे राज्य में करेगी तेज कार्रवाई

 रांची  झारखंड के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को मजबूत बनाया गया है। पहले से कार्यरत इस बल को सीआईडी झारखंड के एडीजी मनोज कौशिक ने री-स्ट्रक्चर किया है। इसमें न सिर्फ पदाधिकारियों की संख्या बढ़ाई गई है, बल्कि झारखंड जगुआर या स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के 40 कमांडो की एक टुकड़ी को भी इस बल के साथ जोड़ा गया है। ये वही कमांडो हैं, जिन्हें माओवादियों के विरुद्ध अभियान में लगाया गया था। 40 कमांडों का एक पूरा असाल्ट ग्रुप इससे जुड़ा हुआ है। इसे इस कदर मजबूत बनाया गया है, ताकि यह पूरे राज्य में कहीं भी बिना किसी की मदद लिए छापेमारी कर सके और केस दर्ज कर सके। झारखंड में नशे के विरुद्ध मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सख्त निर्देश के बाद राज्य में अफीम, गांजा, ब्राउन शुगर, प्रतिबंधित सीरप, इंजेक्शन व प्रतिबंधित दवाओं के विरुद्ध अब एएनटीएफ का छापामारी अभियान तेज होगा। हाल ही में राज्य सरकार ने नारकोटिक्स के विरुद्ध अभियान, गुप्तचरों के लिए योजनाएं सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संकल्प जारी किया है। एएनटीएफ व सक्षम एजेंसी की तरह काम करेगी, आरोपितों के विरुद्ध एफआईआर की भी स्वतंत्रता होगी। इस एएनटीएफ की सीधी निगरानी सीआईडी के एडीजी करेंगे। इसका नियंत्री विभाग भी सीआईडी ही होगा। इसमें शामिल अधिकारी सूचना संग्रह कर, अंतरराज्यीय समन्वय, वित्तीय लेन-देन के बिंदु पर काम करेंगे और सभी 24 जिलों के एसएसपी, एसपी के समन्वय से अभियान संचालित करेंगे। राज्य के 14 जिलों में अफीम की खेती एएनटीएफ के रडार पर राज्य के वे 14 जिले हैं, जहां सर्वाधिक अफीम की खेती होती है। इन जिलों में रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, सरायकेला-खरसांवा, पलामू, लातेहार, गढ़वा, हजारीबाग, चाईबासा, चतरा, कोडरमा व देवघर शामिल हैं। एएनटीएफ का मानना है कि नशे के सौदागरों के पास बड़े हथियार भी होते हैं, जिससे वे सूचनादाता से लेकर अभियान में शामिल पदाधिकारियों-जवानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। यही वजह है कि तेज तर्रार अधिकारियों के अलावा जवानों को भी इसमें शामिल किया गया है। झारखंड का चतरा, खूंटी, पलामू, लातेहार, और रांची के ग्रामीण इलाकों में अफीम की खेती सर्वाधिक होती है। यहां से अफीम को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली भेजा जाता है। झारखंड में ब्राउन शुगर की खेप मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (मुर्शिदाबाद और मालदा रूट) तथा उत्तर प्रदेश के बरेली रूट से आता है। पूर्व में बड़ी संख्या में ब्राउन शुगर की जब्ती हुई है।  

मिलिट्री हॉस्पिटल नामकुम में मेगा आई कैंप, विशेषज्ञ डॉक्टर कर रहे मोतियाबिंद और रेटिना उपचार

रांची जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना ने मिलिट्री हॉस्पिटल नामकुम में ‘दृष्टि 2026’ मेगा नेत्र चिकित्सा शिविर का शुभारंभ किया है. 16 से 19 जून तक आयोजित इस चार दिवसीय शिविर के माध्यम से झारखंड के लोगों को अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा और विशेषज्ञ उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. शिविर का उद्घाटन सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, महानिदेशक सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवाएं (DGAFMS) द्वारा किया गया. विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम दे रही सेवा नई दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों की टीम पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और रांची एवं आसपास के जिलों से आए नागरिकों को परामर्श, जांच और उन्नत उपचार दे रही है. शिविर में मोतियाबिंद ऑपरेशन, ग्लूकोमा उपचार और रेटिना संबंधी रोगों के लिए एंटी-VEGF इंजेक्शन जैसी विशेष सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो आंखों की रोशनी सुधारने और अंधापन रोकने की संभावना को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. सेना की पहल से राहत विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं को सीधे रांची तक पहुंचाकर भारतीय सेना ने लोगों को महानगरों में इलाज के लिए होने वाली लंबी और खर्चीली यात्राओं से राहत दी है. उद्घाटन समारोह में डीजीएएफएमएस ने पूर्वी कमान, मिलिट्री हॉस्पिटल नामकुम और विशेषज्ञ चिकित्सा टीमों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.   बड़ी संख्या में लाभार्थी पहुंचे पहले ही दिन बड़ी संख्या में लोग शिविर में पहुंचे, जिससे इसकी जरूरत और महत्व साफ दिख गया. ‘दृष्टि 2026’ भारतीय सेना की उस सेवा भावना का सशक्त उदाहरण है, जो सीमाओं की सुरक्षा से आगे बढ़कर समाज के जरूरतमंद लोगों तक आशा, उपचार और बेहतर जीवन का संदेश पहुंचाती है.

अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए पूर्व मध्य रेलवे चलाएगा दर्जनों परीक्षा स्पेशल ट्रेनें

 पटना  बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूर्व मध्य रेलवे ने व्यापक इंतजाम किए हैं। रेलवे प्रशासन ने परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के सुगम आवागमन के लिए 16 एवं 17 जून को 30 से अधिक परीक्षा स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की व्यवस्था की है। इससे पूर्व सोमवार रात रेलवे ने 14 विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा की थी। मंगलवार को इसमें 16 और अतिरिक्त रूटों पर भी विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा पूर्व मध्य रेल प्रशासन ने की है। 14 जून को चली थी 19 स्‍पेशल ट्रेनें पूर्व मध्य रेलवे द्वारा जारी प्रेस बयान के अनुसार, 14 जून को आयोजित परीक्षा के दौरान भी अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए कुल 19 परीक्षा स्पेशल ट्रेनें चलाई गई थीं। इनमें दानापुर मंडल द्वारा 12 तथा समस्तीपुर मंडल द्वारा 7 विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया था। रेलवे प्रशासन ने परीक्षार्थियों की भारी संख्या को देखते हुए दूसरे चरण की परीक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की है। रेलवे के अनुसार 16 जून की रात पाटलिपुत्र से किशनगंज, अररिया और नौगछिया के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसके अलावा पटना से नरकटियागंज तथा भभुआ के लिए भी स्पेशल ट्रेनें संचालित होंगी। इन ट्रेनों का ठहराव बेगूसराय, खगड़िया, नौगछिया, कटिहार, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, बापूधाम मोतिहारी, बेतिया, जहानाबाद, गया, डेहरी ऑन सोन और सासाराम सहित विभिन्न प्रमुख स्टेशनों पर रहेगा। 17 जून को व‍िभ‍िन्‍न रूट पर चलेंगी ट्रेनें 17 जून को भी बड़ी संख्या में परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा। पटना-गया, बक्सर-पटना, बक्सर-दानापुर, किऊल-गया, गया-किऊल, बख्तियारपुर-राजगीर, राजगीर-बख्तियारपुर, बेतिया-हाजीपुर, बेतिया-पाटलिपुत्र, दोरम मधेपुरा-हाजीपुर के बीच ट्रेन चलेगी। इसी तरह मधुबनी-सोनपुर, मुजफ्फरपुर-पाटलिपुत्र, समस्तीपुर-सीवान, समस्तीपुर-हाजीपुर, पूर्णिया कोर्ट-पाटलिपुत्र, सहरसा-हाजीपुर, सुपौल-देवघर, औरंगाबाद-गया, हाजीपुर-छपरा, सोनपुर-मुजफ्फरपुर तथा नौगछिया-पाटलिपुत्र के बीच विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों तक अभ्यर्थियों की सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कोच, विशेष निगरानी और आवश्यक परिचालन प्रबंध किए गए हैं। स्टेशन परिसरों में भीड़ नियंत्रण और यात्रियों की सहायता के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की गई है। पूर्व मध्य रेलवे ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर स्टेशन पहुंचें तथा रेलवे द्वारा संचालित परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का अधिकतम लाभ उठाएं। रेलवे प्रशासन का मानना है कि इन विशेष ट्रेनों के संचालन से अभ्यर्थियों को यात्रा में सुविधा मिलेगी और नियमित ट्रेनों पर दबाव भी कम होगा। प्रमुख मार्ग एवं ठहराव     पाटलिपुत्र–किशनगंज / अररिया / नौगछिया स्पेशल : बेगूसराय, खगड़िया, नौगछिया और कटिहार मार्ग से चलेगी।     पटना–नरकटियागंज स्पेशल : पाटलिपुत्र, सोनपुर, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, बापूधाम मोतिहारी और बेतिया होते हुए संचालित होगी।     पटना–भभुआ स्पेशल : तरेगना, जहानाबाद, गया, डेहरी ऑन सोन और सासाराम मार्ग से चलेगी।     किऊल–गया एवं गया–किऊल स्पेशल : शेखपुरा और नवादा के रास्ते संचालित होगी।     बख्तियारपुर–राजगीर स्पेशल : बिहारशरीफ और नालंदा होते हुए चलेगी।  

बिहार में रेल नेटवर्क विस्तार की तैयारी, ₹1852 करोड़ की नई लाइन को मिली मंजूरी

किशनगंज. सीमांचल क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली जालालगढ़- किशनगंज नई रेल लाइन बिछने की उम्मीद फिर से जगी है। साल 2008-09 में स्वीकृत हुई यह परियोजना तकनीकी और बजटीय कारणों से करीब 17 वर्षों से ठप पड़ी थी, लेकिन अब इसे फिर से गति दिया जा रहा है। रेलवे बोर्ड और उत्तर पूर्वी सीमांत रेलवे संशोधित लागत का अंतिम मूल्यांकन कर रही हैं। तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2008-09 में इस परियोजना का शिलान्यास किया था। उस समय इसकी अनुमानित लागत 360 करोड़ रुपए थी। करीब 17 सालों में भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत में वृद्धि के कारण अब परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 1852 करोड़ रुपये के करीब हो गई है। प्रस्तावित रेल लाइन की कुल लंबाई 51.632 किलोमीटर होगी। यह रेल मार्ग पूर्णिया के जलालगढ़ जंक्शन से शुरू होकर अमौर, बैसा, रौटा, खाताहाट, महीनगांव, दौला जैसे क्षेत्रों से गुजरेगा और किशनगंज मुख्यालय तक पहुंचेगा। इस पूरे खंड में यात्रियों की सुविधा के लिए आठ नए रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने के बाद न्यू जलपाईगुड़ी से कटिहार जाने वाली ट्रेनों के लिए एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत छोटा मार्ग उपलब्ध होगा। इससे वर्तमान में अत्यधिक व्यस्त मुकुरिया-किशनगंज रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव कम होगा। परियोजना से यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन में सुधार आएगा। पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक क्षेत्र के समानांतर यह एक वैकल्पिक रेल संपर्क उपलब्ध कराएगी। इस रेलवे लाइन का निर्माण हो जाने से आपातकालीन परिस्थितियों में सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए यह मार्ग रणनीतिक कवच साबित हो सकता है। अमौर और बैसा जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को इस रेल लाइन से सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। महानंदा और कनकई नदी की बाढ़ से प्रभावित इन इलाकों के किसान अपनी मक्का, जूट और धान जैसी फसलों को अब आसानी से सिलीगुड़ी, कोलकाता और दिल्ली की बड़ी मंडियों तक पहुंचा सकेंगे। वहीं, सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रेल संपर्क बेहतर होने से स्थानीय व्यापार को नई गति मिलेगी, परिवहन लागत घटेगी और सीमांचल क्षेत्र के आर्थिक विकास को नया आधार मिलेगा। इस नए रेल खंड के निर्माण से जहां सुरक्षा की दृष्टि से वैकल्पिक रेलवे रूट बनेगा, वहीं सुदूर ग्रामीण क्षेत्र को रेलवे कनेक्टिविटी सुविधा मिल जाएगी। दरअसल, तत्कालीन किशनगंज सांसद मरहूम तस्लीमुद्दीन के पहल से तत्कालीन यूपीए सरकार के समय इस परियोजना को हरी झंडी मिली थी, लेकिन तत्कालीन रेल मंत्री के शिलान्यास के कुछ दिनों के बाद इस परियोजना में ग्रहण लग गया था और 17 साल तक इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया। वहीं, अब केंद्र सरकार ने परियोजना को रिवाइज कर राशि देने की घोषणा की है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि किशनगंज-जलालगढ़ के बीच नई रेल लाइन बिछाने को लेकर कार्य चल रहा है। रेल मंत्रालय जल्द ही इस दिशा में काम शुरू होगा।

पर्वतपुर–सीतानाला कोल ब्लॉक शुरू होने का रास्ता साफ, दुगदा वाशरी को मिलेगा स्थायी कोयला फीड

 बोकारो  झारखंड सरकार ने जिले के चंदनकियारी स्थित पर्वतपुर कोल ब्लॉक और सीतानाला कोल ब्लॉक के खनन पट्टा को स्वीकृत कर लिया है। इससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और जश्न का माहौल है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को मंजूरी मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं में नई आशा जगी है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि कोयला खनन शुरू होने से चंदनकियारी में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। विधायक उमाकांत रजक ने इसे ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए कहा कि इससे रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विकास और स्थानीय व्यापार-व्यवसाय को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला चंदनकियारी को विकास और आत्मनिर्भरता की नई दिशा देगा। विधायक का कहना है केि विकास के कार्यो से संबंधित फाइलों की धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं। विदित हो कि यह दोनों कोल ब्लाक जेएसडब्ल्यू स्टील को वर्ष 2023 में नीलामी के माध्यम से दिया गया था। तब से खनन पट्टा एवं अन्य स्वीकृति को लेकर उत्पादन प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। अब खनन पट्टा मिलने के बाद जल्द ही उत्पादन प्रारंभ होने की संभावना है। अब निवेश, रोजगार और विकास पर नजर कैबिनेट की स्वीकृति के बाद पर्वतपुर कोल ब्लॉक के 2174.52 एकड़ तथा सीतानाला कोल ब्लॉक के लगभग 792 एकड़ क्षेत्र में खनन गतिविधियां शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा। खनन कार्य शुरू होने के साथ परिवहन, मशीनरी, ठेका कार्य, छोटे व्यापार, होटल और सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा सड़क, बिजली, जलापूर्ति और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि वर्षों से कागजों में अटकी परियोजनाएं धरातल पर उतरेंगी और चंदनकियारी कोयला आधारित औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में उभरेगा। वर्षों के इंतजार के बाद खुला रास्ता: पर्वतपुर कोल ब्लॉक का सफर पिछले कई वर्षों से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर इसके संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) को सौंपने का निर्णय लिया था। उस समय यह माना गया था कि बंद पड़ी खदान के चालू होने से करीब चार हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। लगभग नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस कोल ब्लॉक को भूमिगत (अंडरग्राउंड) खनन के रूप में विकसित करने की योजना थी ताकि आसपास के गांवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। हालांकि, कोल ब्लॉक आवंटन नीति, कानूनी प्रक्रियाओं और स्वामित्व हस्तांतरण की जटिलताओं के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। पहले सेल इसकी देखरेख करता रहा, बाद में ब्लॉक बीसीसीएल के पास पहुंचा और अंततः वर्ष 2023 में जेएसडब्ल्यू स्टील ने नीलामी के माध्यम से इसे हासिल कर लिया। पर्वतपुर-सीता नाला परियोजना को संचालन की मंजूरी, दुगदा वाशरी को मिलेगा कच्चा कोयला सरकार से संचालन की अनुमति मिलने के बाद जेएसडब्ल्यू स्टील की पर्वतपुर एवं सीता नाला कोकिंग कोल परियोजना में उत्पादन शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। परियोजना से निकाले जाने वाले कोकिंग कोयले का उपयोग दुगदा कोल वाशरी में किया जाएगा, जिसका संचालन भी हाल ही में जेएसडब्ल्यू स्टील को सौंपा गया है। जानकारी के अनुसार, पांच वर्षों से अधिक समय से बंद पड़ी दुगदा कोल वाशरी को पुनः चालू करने की तैयारी तेज हो गई है। कंपनी वाशरी की मशीनरी और आधारभूत संरचना का आकलन कर रही है। वाशरी की वर्तमान क्षमता सालाना दो मिलियन टन वाश्ड कोल उत्पादन की है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर चार मिलियन टन तक ले जाने की योजना है। पर्वतपुर और सीता नाला परियोजना से मिलने वाला कच्चा कोयला दुगदा वाशरी के लिए स्थायी फीड का काम करेगा। इससे वाशरी के नियमित संचालन में मदद मिलेगी और कोकिंग कोल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि खदान और वाशरी दोनों के संचालन की जिम्मेदारी एक ही कंपनी के पास होने से उत्पादन, परिवहन और प्रसंस्करण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। दुगदा वाशरी के पुनः संचालन से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ इस्पात उद्योग को गुणवत्तापूर्ण वाश्ड कोकिंग कोल उपलब्ध होगा। इससे आयातित वाश्ड कोल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। बोकारो-धनबाद कोल बेल्ट में इसे एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास के रूप में देखा जा रहा है।

मुंडेश्वरी धाम के विकास को गति, कैमूर-रोहतास के बीच बनेगा एयरपोर्ट, जल्द शुरू होगा रोप-वे

भभुआ. जिले के भगवानपुर प्रखंड में स्थित सबसे प्राचीन माता मुंडेश्वरी धाम परिसर में मंगलवार को आयोजित सभा को संबोधित करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कई महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही रोहतास व कैमूर के बीच जमीन चिह्नित कर एयरपोर्ट बनवाया जाएगा। इसके लिए मैंने पदाधिकारियों को निर्देश दे दिया है। उन्होंने कहा कि माता मुंडेश्वरी मंदिर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई कार्य होंगे। यहां लंबित रोप-वे निर्माण का कार्य बरसात के बाद शुरू होगा। मैं अगली बार आऊंगा तो रोप-वे का शिलान्यास करूंगा। हेलीकॉप्टर की सेवा भी मिलेगी उन्होंने कहा कि इसके अलावा मां ताराचंडी, तुतला भवानी, गुप्ता धाम आदि धार्मिक स्थलों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यहां हेलीकॉप्टर की सुविधा शुरू होगी। कैमूर जिले को टूरिस्ट हब के रूप में विकसित करने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसा पहाड़ का दृश्य विश्व में शायद ही कहीं देखने को मिले। मां मुंडेश्वरी धाम परिसर में स्थित धर्मशाला का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ मिले। सभी प्रखंडों में खुलेंगे मॉडल स्कूल उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बिहार में दो साल के अंदर सभी प्रखंडों में मॉडल स्कूल खोलेगी। जिसमें सभी तरह की शैक्षणिक व्यवस्था होगी। यहां के बच्चे नीट, जेईई, आईआईटी की तैयारी करने बाहर नहीं जाएंगे। मॉडल स्कूलों में पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के बच्चे भी पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि जब पदाधिकारी व जनप्रतिनिधियों के बच्चे मॉडल स्कूल में पढ़ेंगे तब लगेगा कि बिहार का विकास हो रहा है। कैमूर के बच्चे वाराणसी के बीएचयू में पढ़ने जाते हैं। हमने पदाधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि बिहार की धरती पर बीएचयू की शाखा खोली जाए। इसके लिए भी काम जल्द शुरू होगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सबकी समस्याओं के समाधान के लिए कार्य कर रही है। सहयोग शिविर के एक माह होने वाले हैं। जिसमें तीन लाख 36 हजार 78 आवेदन आए, जिसमें दो लाख 61628 आवेदनों का निष्पादन कर दिया गया है, जो 90 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि जो पदाधिकारी दस दिन में कोई आदेश नहीं करता, उसे 11वें दिन नोटिस दिया जाता है। इसके बाद फिर 20 दिन तक आदेश नहीं देने पर 21वें दिन नोटिस दिया जाता है, फिर 25 दिन तक आदेश नहीं करने पर 26वें दिन नोटिस दिया जाती है और यदि पदाधिकारी 30 दिन तक कोई ओदश नहीं करते हैं तो वे 31वें दिन स्वत: निलंबित (सस्पेंड) हो जाएंगे। सीएम ने कहा कि हमारी सरकारी जनता से संवाद यानी जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना चाहती है, ताकि बिहार की जनता कोई परेशानी न झेले। 'अपराधी या तो बिहार छोड़ दें…' उन्होंने कहा कि बिहार को अपराध मुक्त बनाना है। इसके लिए अपराधी या तो बिहार छोड़ दें या अपराध छोड़ दें। यदि अपराधी पकड़े जाते हैं तो पहले उनसे कहा जाएगा कि वे अपराध छोड़ दें, और यदि इसके बाद भी वे नहीं मानते हैं और अपराध करते हैं तो 48 घंटा के अंदर उन्हें अपराध की श्रेणी की तरह ही जवाब दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि बिहार में बिजली महंगे दर पर खरीदी जाती थी, लेकिन अब बिहार में थर्मल पावर है। यहां जब झारखंड से बिहार अलग हुआ था तब आबादी लगभग 6 करोड़ थी, और अब लगभग 14 करोड़ है। बिहार की आबादी बढ़ने के साथ ही संरचना को भी बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम गांव-गांव बिजली पहुंचाएंगे तब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, हम घर-घर बिजली पहुंचाएंगे। अब हमारी सरकारी 25 लाख बीपीएल लोगों के घरों की छत पर सोलर प्लेट लगाएगी। इससे आगामी 25 वर्ष तक बिजली बिल से मुक्ति और 125 यूनिट से अधिक बिजली उत्पादन पर सरकार पैसा देगी।

शिक्षकों को पोस्टिंग में बड़ी राहत, सम्राट चौधरी बोले- अब पढ़ाई पर कोई समझौता नहीं

 पटना बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक बेहद सख्त बयान सामने आया है। कैमूर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में शिक्षकों को चेतावनी दी है कि सरकार उनकी सुविधाओं का पूरा ख्याल रख रही है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शिक्षकों के ट्रांसफर नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि "ट्रांसफर जहां कराना है, करा लीजिए, लेकिन पढ़ाना तो पड़ेगा। कोई बहाना नहीं चलेगा।" मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से साफ है कि सरकार अब राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पूरी तरह से एक्शन मोड में है और लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर गाज गिरना तय है। शिक्षकों को पोस्टिंग की बड़ी राहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षकों की सहूलियत के लिए ट्रांसफर के नियमों को काफी आसान बनाया है। उन्होंने कहा, "शिक्षकों के लिए हम लोगों ने तय किया है कि आप अपने गांव के बिल्कुल बगल में चले जाइए, इसमें सरकार को कोई दिक्कत नहीं है।" उन्होंने महिला शिक्षिकाओं के लिए कहा कि जो हमारी बहनें शिक्षिका हैं, उन्हें उनके घर या गांव के ठीक बगल वाले पंचायत में ही पढ़ाने के लिए पोस्टिंग दी जाएगी। वहीं, जो हमारे भाई शिक्षक हैं, उन्हें भी ज्यादा दूर न भेजकर उनके बगल वाले प्रखंड में ही काम करने का अवसर दिया जाएगा। सम्राट चौधरी बोले- 'पढ़ाने के लिए अब कोई एक्सक्यूज नहीं मिलेगा' शिक्षकों को बड़ी राहत देने के साथ ही मुख्यमंत्री ने अपनी दूसरी शर्त भी बेहद कड़े शब्दों में सामने रख दी। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, "बगल के पंचायत और प्रखंड में पोस्टिंग तो मैं दे दूंगा, लेकिन पढ़ाना तो आपको हर हाल में पड़ेगा। अब पढ़ाने के लिए किसी भी तरह का कोई एक्सक्यूज नहीं मिलेगा।" उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे पूरी निष्ठा से स्कूल जाएं, बच्चों को पढ़ाएं और बिहार के भविष्य को आगे बढ़ाने का काम करें। मुख्यमंत्री ने राज्य में हुए ढांचागत बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आज बिहार की पूरी स्कूल व्यवस्था बदल चुकी है और लगभग 75 हजार सरकारी स्कूलों को खोला व सुधारा जा चुका है। अब सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और किसान के बच्चों को देश की सबसे बेहतरीन शिक्षा मिल सके।