samacharsecretary.com

एसआईआर प्रक्रिया झारखंड में शुरू, 29 जुलाई तक चलेगा मतदाता सत्यापन अभियान

रांची  झारखंड में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) आज से गणना चरण के साथ शुरू हो जाएगा। इस चरण में बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं के बीच गणना प्रपत्र (इन्यूमरेशन फार्म) वितरित करेंगे। मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए इस प्रपत्र में पिछले एसआईआर से संंबंधित जानकारी भरकर तथा हस्ताक्षर कर बीएलओ को लौटाना होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने सभी मतदाताओं से प्रपत्र मिलते ही आवश्यक जानकारी भरकर एवं हस्ताक्षर कर बीएलओ को लौटाने की अपील की है। यह कार्यक्रम 29 जुलाई तक चलेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि जब बीएलओ मतदाता के घर-घर जाएं तो मतदाताओं को विगत विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से उनकी मैपिंग अवश्य सुनिश्चित करा लें। राज्य में एसआईआर कार्यक्रम में वर्ष 2003 में हुए एसआईआर की मतदाता सूची से मैपिंग की विवरणी को नागरिकता हेतु सुपीरियर दस्तावेज के रूप में माना गया है। जिन मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो जाएगी, उन्हें एसआईआर के क्रम में सामान्यतः कोई अन्य दस्तावेज नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि बीएलओ द्वारा मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए प्रपत्र की दो प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।मतदाता एक प्रति अपने बीएलओ को देंगें और दूसरी प्रति पावती के रूप में अपने पास रखेंगे। जो भी मतदाता गणना प्रपत्र हस्ताक्षर कर लौटाएंगे, उनका नाम पांच अगस्त को प्रकाशित होनेवाली प्रारुप मतदाता सूची में होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि वैसे मतदाता जिनकी अभी भी विगत विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हुई है, वे बीएलओ को अपना विवरण बताकर मैपिंग करा लें। नए मतदाता पंजीकरण के लिए पूरी करें यह प्रक्रिया यदि आप नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहते है और एक अक्टूबर 2026 तक आपकी आयु 18 वर्ष पूरी हो रही है, तो गणना चरण या दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान फॉर्म-6 भरकर अपने संबंधित बीएलओ को जमा करें। फॉर्म के साथ घोषणापत्र और आवश्यक दस्तवेज भी संलग्न करने होंगे। जन्मतिथि के आधार पर आवेदक को स्वयं का अथवा माता-पिता में से किसी एक या दोनों के दस्तावेज जमा करने होंगे। दस्तावेज के रूप में पिछले एसआईआर के दौरान तैयार मतदाता सूची का वह संबंधित पृष्ठ भी मान्य होगा, जिसमें माता-पिता का नाम दर्ज हो। ध्यान में रखें ये महत्वपूर्ण तारीखें     30 जून से 29 जुलाई तक बीएलओ द्वारा घर-घर भ्रमण कर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा।     29 जुलाई तक मतदान केंद्रों का युक्तिकरण (रेशनलाइजेशन) होगा।     05 अगस्त को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा।     पांच अगस्त से चार सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि है।     पांच अगस्त से तीन अक्टूबर तक नोटिस फेज तथा दावा व आपत्तियों के निस्तारण की अवधि है।     सात अक्टूबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। गलत घोषणा पत्र भरकर देने पर कानूनी कार्रवाई मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी कहा कि गणना प्रपत्र में गलत घोषणा पत्र भरकर जमा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि एक भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से नहीं छूटेंगे और एक भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में नहीं जुड़ेंगे। एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी एवं सहभागी है, प्रत्येक फेज की जानकारी सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाता है। 74,329 बूथ लेवल एजेंट नियुक्त, सबसे अधिक भाजपा के एसआईआर को लेकर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा विभिन्न मतदान केंद्रों पर कुल 74,320 बीएलए-2 नियुक्त किए गए हैं। सबसे अधिक बीएलए-2 भाजपा द्वारा नियुक्त किए गए हैं। आप ने एक भी एजेंट नियुक्त नहीं किया है। वहीं, बसपा ने महज दो एजेंट नियुक्त किए हैं। सभी मतदान केंद्रों पर बीएलओ एवं बीएलए-2 की एसआईआर के दौरान बैठक की जानी है एवं इस बैठक के फोटो भी बीएलओ ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए-2 से अपने बीएलओ के कार्यों में सहयोग करने की अपेक्षा की है। 82 प्रतिशत मतदाताओं की हो चुकी है मैपिंग     कुल मतदाता : 2,64,63,236     जिन मतदाताओं की हो गई मैपिंग : 2,17,20,731     जिनकी नहीं हुई है मैपिंग : 47,42,505     जितने प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी : 82.08 प्रतिशत किस राजनीतिक दल ने नियुक्त किए कितने बीएलए-2? आप : 00 बसपा : 02 भाजपा : 28,217 सीपीआईएम : 103 कांग्रेस : 19,153 आजसू पार्टी : 4,596 झामुमो : 19,269 राजद : 2,980 कुल : 74,320 शिकायत के लिए 1950 हेल्पलाइन पर करें संपर्क निर्वाचन विभाग के अनुसार, एसआईआर से संबंधित किसी भी शिकायत या जानकारी के लिए मतदाता 1950 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। इस कॉल सेंटर पर प्रतिदिन औसतन 25 से 30 शिकायतें प्राप्त हो रही है, जिनका त्वरित और प्रभावी ढंग से निस्तारण किया जा रहा है।  

नल जल योजना को रफ्तार, स्पर्श पोर्टल पर डेटा अपलोड से फंड रिलीज की तैयारी

रांची   झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक नल से शुद्ध जल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना को गति देने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कवायद को बेहद तेज कर दी है. केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत लंबित पड़ी भारी-भरकम राशि को हासिल करने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. इसी सिलसिले में केंद्र सरकार के ‘एसएनए स्पर्श पोर्टल’ (SNA Sparsh Portal) पर जल जीवन मिशन की उन तमाम चालू और पूरी हो चुकी योजनाओं का विस्तृत विवरण अपलोड किया जा रहा है, जिनमें झारखंड सरकार अपने कोटे की राशि (राज्यांश) पहले ही खर्च कर चुकी है. डेटा अपलोडिंग के साथ-साथ इन सभी योजनाओं के उपयोगिता और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी पोर्टल पर डाले जा रहे हैं, ताकि वित्तीय लेन-देन में कोई तकनीकी अड़चन न रहे. दिल्ली में MOU के बाद बनी सहमति इस पूरी कवायद की पृष्ठभूमि हाल ही में नई दिल्ली में तैयार हुई थी. बीते 2 जून को नई दिल्ली में ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच एक उच्चस्तरीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे. इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के सामने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए राज्य की लगभग 6,500 करोड़ रुपये की लंबित केंद्रीय सहायता राशि को जल्द से जल्द जारी करने का आग्रह किया था. इस पर केंद्रीय अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि एनओसी और अन्य कागजी प्रक्रियाओं में केंद्र पूरा सहयोग करेगा, बशर्ते राज्य सरकार निर्धारित मानकों और अपनी 50 प्रतिशत राज्यांश की हिस्सेदारी का कड़ाई से पालन करे. एमओयू की है कड़ी शर्त जल शक्ति मंत्रालय के नियमों और एमओयू की शर्तों के अनुसार, केंद्र सरकार से फंड की अगली किस्त पाने के लिए झारखंड को पहले अपने हिस्से की मैचिंग ग्रांट (राज्यांश) को धरातल पर खर्च करके दिखाना होगा. दिल्ली में हुए एमओयू के करीब एक महीना बीतने को है, लेकिन अब तक एसएनए स्पर्श पोर्टल पर झारखंड का पूरा तकनीकी डेटा और एनओसी समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण केंद्र की ओर से राशि जारी नहीं हो पाई है. इस देरी को गंभीरता से लेते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आलाधिकारियों ने पूरी कागजी और तकनीकी प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक मोड पर डाल दिया है ताकि केंद्र से मिलने वाला फंड बिना किसी देरी के सीधे राज्य के खाते में आ सके. जेजेएम 2.0 में मिला 2,500 करोड़ का विशेष बोनस झारखंड सरकार इस मेगा मिशन के तहत दिसंबर 2028 तक राज्य के शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने के बड़े और ऐतिहासिक लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है. भौगोलिक रूप से कठिन माने जाने वाले झारखंड के पठारी इलाकों में इस लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए ‘जेजेएम 2.0’ के तहत केंद्र सरकार ने झारखंड को 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त विशेष आवंटन (बोनस फंड) भी मंजूर किया है. विभाग का प्रयास यह है कि इस महीने के अंत तक सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि जैसे ही फंड रिलीज हो, वैसे ही ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के निर्माण कार्य की गति को दोगुना किया जा सके. विभागीय मंत्री का आधिकारिक बयान मामले की जानकारी देते हुए झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि जेजेएम 2.0 को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू की सभी आधिकारिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं. हमारी सरकार केंद्रांश की बड़ी राशि को समय पर प्राप्त करने के लिए अनिवार्य तकनीकी और कागजी प्रक्रियाएं पूरी करने में जुटी है. विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दिन-रात काम करके स्पर्श पोर्टल पर डेटा फीडिंग पूरी करें, ताकि ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को बिना किसी बजटीय रुकावट के तेजी से पूरा किया जा सके.0 करोड़ के विकास कार्य, असुरक्षित भवनों पर तत्काल रोक लगाने का आदेश

चीनी मिल में स्क्रैप कटाई से भड़के किसान, बिहार में आंदोलन की चेतावनी

गोपालगंज. छह वर्षों से बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल के पुनः संचालन की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) की प्रक्रिया के तहत खरीदे गए स्क्रैप की कटाई की तैयारी मिल परिसर में शुरू हो गई है। एक ओर बिहार सरकार गन्ना उद्योग विभाग के माध्यम से मिल चालू कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्क्रैप हटाने और परिसंपत्तियों की नीलामी तेज होने से किसानों और पूर्व मिलकर्मियों की चिंता बढ़ गई है। मंत्री से मिलेंगे किसान, कार्रवाई नहीं रुकी तो आंदोलन स्क्रैप कटाई की सूचना मिलते ही किसान संघर्ष समिति सक्रिय हो गई है। समिति के अध्यक्ष मोहम्मद तौहीद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पटना रवाना हुआ है। किसान गन्ना उद्योग मंत्री और विभागीय अधिकारियों से मिलकर स्क्रैप कटाई रोकने तथा मिल के पुनः संचालन पर ठोस निर्णय लेने की मांग करेंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा। 2020 से बंद है मिल, लगातार उठ रही संचालन की मांग सासामुसा चीनी मिल वर्ष 2020 से बंद पड़ी है। तब से हजारों गन्ना उत्पादक किसान और पूर्व मिलकर्मी इसके पुनः संचालन की मांग कर रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार को ज्ञापन देने के साथ मिल गेट पर धरना-प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। 40 करोड़ के बैंक बकाया से शुरू हुआ पूरा विवाद विवाद की शुरुआत मिल पर सेंट्रल बैंक के करीब 40 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान से हुई। बैंक ने वसूली के लिए एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया था। ट्रिब्यूनल ने पिछले वर्ष नवंबर में मिल का स्क्रैप करीब 18.50 करोड़ रुपये में बेचकर बैंक का बकाया चुकाने का आदेश दिया। इसके विरोध में किसानों ने 14 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया, जिसे मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद स्थगित किया गया था। चार निवेशकों ने दिखाई रुचि, लेकिन नहीं बन सकी बात गन्ना उद्योग विभाग की पहल पर मार्च और अप्रैल में चार निवेशक कंपनियों ने मिल परिसर का निरीक्षण किया और संचालन में रुचि दिखाई। हालांकि भूमि की सीमित उपलब्धता तथा तकनीकी और वित्तीय कारणों से कोई भी निवेशक अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच सका। इस बीच राज्य सरकार ने किसानों के लगभग 43 करोड़ रुपये बकाया भुगतान की स्वीकृति भी दी है। स्क्रैप हटाने का विरोध जारी, पुनर्जीवन की उम्मीद पर संकट स्क्रैप की नीलामी लेने वाली कंपनी के कर्मी मिल परिसर में पहुंचकर साफ-सफाई शुरू कर चुके हैं और जल्द मशीनों की कटाई शुरू होने की संभावना है। किसान संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि किसानों और मिलकर्मियों का बकाया भुगतान तथा मिल के भविष्य पर स्पष्ट निर्णय होने तक स्क्रैप बाहर ले जाने का विरोध जारी रहेगा। किसानों का कहना है कि सरकार ने अब भी हस्तक्षेप नहीं किया तो सासामुसा चीनी मिल के पुनर्जीवन की उम्मीद हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।  

झारखंड के सरकारी स्कूलों के नए टाइमिंग जारी, 9 बजे से 3 बजे तक होगी पढ़ाई

मेदिनीनगर/पलामू. एक जुलाई से झारखंड के सरकारी स्कूलों के संचालन समय में बदलाव लागू हो जाएगा। शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं अब सुबह नौ बजे से अपराह्न तीन बजे तक संचालित होंगी। हालांकि भीषण गर्मी के बीच इस निर्णय को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इन दिनों तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है और दोपहर के समय तेज धूप व उमस के कारण विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में परेशानी हो सकती है। वर्तमान में पहली से आठवीं तक की कक्षाएं सुबह सात बजे से 11:30 बजे तक तथा नौवीं से 12वीं तक की कक्षाएं सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक संचालित हो रही हैं। वहीं शिक्षक सुबह सात बजे से अपराह्न एक बजे तक विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नए आदेश के लागू होने के साथ ही सभी कक्षाओं का संचालन सुबह नौ बजे से अपराह्न तीन बजे तक होगा। 4 जुलाई तक चलेगा मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता अभियान सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए 1 से 4 जुलाई तक विशेष जागरूकता एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। आयोजित होंगी विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां अभियान के दौरान विद्यालयों में स्लोगन लेखन, चित्रांकन एवं पेंटिंग प्रतियोगिता, ''मेरी बात- मेरा संकल्प'', मासिक धर्म स्वच्छता पर समूह चर्चा, रोल प्ले, नुक्कड़ नाटक तथा सामूहिक संकल्प जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य किशोरियों में मासिक धर्म से जुड़े मिथकों को दूर करना और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

22.97 करोड़ की परियोजना से पलामू में एआई, डेटा साइंस और रोबोटिक्स शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

रांची राज्य सरकार ने रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) जैसी आधुनिकतम तकनीक में शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इस उद्देश्य से सरकार ने पलामू स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कालेज में चार क्षेत्रों में सेंटर आफ एक्सीलेंस विकसित करने की योजना स्वीकृत की है। पांच वर्ष की इस परियोजना पर 22.97 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस परियोजना के तहत ही स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए पलामू इंजीनियरिंग कालेज में जीईसी इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी। कुल परियोजना लागत में से एक करोड़ रुपये इसके शेयर कैपिटल के रूप में मिलेंगे। इस परियोजना का उद्देश्य सिविल कंस्ट्रक्शन तथा टाउन प्लानिंग के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार तथा परामर्श सेवाओं को प्रोत्साहित करना, ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित पेशेवरों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करना है। साथ ही इससे उद्योग प्रेरित अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं का डेटा विश्लेषण, बीटेक, एमटेक एवं पीएचडी शोधार्थियों के अनुसंधान कार्यों में सहयोग प्रदान करना है। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन चारों सेंटर आफ एक्सीलेंस से न केवल पलामू इंजीनियरिंग कालेज, बल्कि राज्य के छह राजकीय पालीटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थियों को भी प्रशिक्षण में लाभ मिलेगा। सेंटर आफ एक्सीलेंस के लिए रोबोटिक्स लैब, डेटा साइंस लैब, रिन्यूअल ईनर्जी लैब, टाउन प्लानिंग लैब, अर्थक्वेक इंजीनियरिंग लैब, वेस्ट टू इनर्जी कंजरवेशन लैब आदि की स्थापना की जाएगी। राज्य सरकार ने इस परियोजना की स्वीकृति के पहले आइआइटी (आइएसएम), धनबाद से टेक्निकल वेटिंग कराई थी। संस्थान स्तर पर होगी निगरानी समिति जीईसी पलामू इनाेवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर फाउंडेशन द्वारा एक संस्थान स्तर पर निगरानी समिति गठित की जाएगी। इस समिति में सेंटर आफ एक्सीलेंस के फैकल्टी इंचार्ज, इंडस्ट्री पार्टनर के प्रतिनिधि, संबंधित विभागाध्यक्ष, मेंटर संस्थान के प्रतिनिधि रहेंगे। यह समिति सेंटर आफ एक्सीलेंस के संचालन तथा निगरानी का दायित्व निभाएगी। राज्य के भीतर एवं बाहर स्थित मेंटर संस्थानों की की पहचान करना तथा उन्हें सेंटर आफ एक्सीलेंस के संचालन में सहायता के लिए परामर्श या अनुदान प्राप्त करने में सहयोग प्रदान करने की भी जिम्मेदारी समिति निभाएगी। ये पालीटेक्निक संस्थान जुड़ेंगे सेंटर आफ एक्सीलेंस से – राजकीय पालीटेक्निक, रांची – राजकीय महिला पालीटेक्निक, रांची – राजकीय पालीटेक्निक, जमशेदपुर – राजकीय पालीटेक्निक, आदित्यपुर – राजकीय पालीटेक्निक, लातेहार – राजकीय पालीटेक्निक, सिमडेगा इन चार क्षेत्रों में तैयार होगा सेंटर आफ एक्सीलेंस     सिविल कंस्ट्रक्शन तथा टाउन प्लानिंग     रोबोटिक्स एंड आटोमेशन     डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस     सस्टनेबल एंड रिन्यूअल ईनर्जी टेक्नोलाजी  

अब बिना इंटरनेट AI से पढ़ेंगे बच्चे, समस्तीपुर के स्कूलों में शुरू होगी स्मार्ट शिक्षा

समस्तीपुर. सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई अब सिर्फ किताब, कॉपी और कक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। मोबाइल आधारित 'पढ़ाई' ऐप के जरिये बच्चे घर बैठे बिना इंटरनेट के भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित करेंगे। एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित यह ऐप बच्चों की पढ़ने की क्षमता, उच्चारण और सीखने की गति का आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार सीखने में मदद करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले के ताजपुर और मोरवा प्रखंड के चयनित सरकारी विद्यालयों में 'टेक्नोलाजी इन टीचिंग एट द राइट लेवल' कार्यक्रम का संचालन मार्च 2027 तक किया जाएगा। यह प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के सहयोग से लागू होगा। इस पहल में कक्षा तीन से पांच तक के बच्चों को शामिल किया जाएगा। कमजोर बच्चों की पहचान होगी आसान हर बच्चे की सीखने की क्षमता अलग होती है। कुछ बच्चे तेजी से सीखते हैं, जबकि कुछ को अतिरिक्त अभ्यास की आवश्यकता होती है। 'पढ़ाई' ऐप बच्चों के प्रदर्शन का वास्तविक समय में विश्लेषण कर यह बताएगा कि किस बच्चे को भाषा या गणित में अधिक सहायता की जरूरत है। इससे शिक्षकों को बच्चों के अधिगम स्तर के अनुसार मार्गदर्शन देने में सुविधा होगी। ऐप बताएगा कहां हो रही गलती एआई आधारित यह ऐप केवल अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं कराएगा, बल्कि बच्चों की पढ़ने की क्षमता का भी मूल्यांकन करेगा। बच्चा जब पाठ पढ़ेगा तो ऐप उसकी आवाज सुनकर उच्चारण, पढ़ने की गति और त्रुटियों का विश्लेषण करेगा। इसके साथ ही 'असर' टूल पर आधारित गणितीय आकलन भी इसमें शामिल किया गया है। इससे बच्चों की बुनियादी भाषा दक्षता मजबूत होने के साथ आगे की पढ़ाई की मजबूत नींव तैयार होगी। घर पर भी मिलेगा अभ्यास का अवसर शिक्षा विभाग के अनुसार इस ऐप का उद्देश्य स्कूल की पढ़ाई का विकल्प बनना नहीं, बल्कि बच्चों को अतिरिक्त अभ्यास का अवसर उपलब्ध कराना है। स्कूल के बाद भी बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार घर पर अभ्यास कर सकेंगे। इससे उन बच्चों को विशेष लाभ मिलेगा, जिन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग नहीं मिल पाता। साथ ही शिक्षक और अभिभावक भी बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति को आसानी से समझ सकेंगे। एफएलएन सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम     यह पहल बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल उपकरणों को कक्षा आधारित शिक्षण प्रक्रिया से जोड़कर बच्चों के अधिगम स्तर का आकलन, उनकी आवश्यकता के अनुसार समूहीकरण और उचित शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने में यह उपयोगी साबित होगी। – सुधीर कुमार, कार्यक्रम समन्वयक, प्रथम पढ़ाई' ऐप का प्रयोग सफल 'पढ़ाई' ऐप का प्रयोग सफल रहा तो बच्चों की पढ़ाई के आकलन, अभ्यास और सुधार की पूरी प्रक्रिया को नया डिजिटल आधार मिलेगा। यह पहल भविष्य में सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। – जमालुद्दीन, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) शिक्षा विभाग, समस्तीपुर

पटना फायरिंग मामले में खान सर को राहत, गिरफ्तारी पर रोक, तीन जुलाई होगी सुनवाई

पटना  अपने कोचिंग सेंटर में हुई फायरिंग से संबंधित केस में फिलहाल खान सर की गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी। दरअसल पटना सिविल कोर्ट में खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। अब इसपर सुनवाई 03 जुलाई को होगी। अदालत ने पहले ही खान सर की गिरफ्तारी रोक लगा रखी है। अब फैजल खान और खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर 03 जुलाई को अदाालत सुनवाई करेगा। बताया जा रहा है कि सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक की तरफ से कहा गया कि खान सर के अंगरक्षकों के पास अवैध हथियार थे। दहशत फैलाने के इरादे से ही वहां फायरिंग की गई थी। इसपर बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी है कि हथियार का लाइसेंस है और कागजात फिलहाल पुलिस ने जब्त कर लिए हैं। इसपर अदालत ने केस के आईओ को लोक अभियोजक से हथियार के कागजात मांगे हैं। इस मामले में अगली सुनवाई अब 03 जुलाई को होगी। बता दें कि पटना में -2 जुलाई को खान सर के कोचिंग संस्थान के नजदीक हुई गोलीबारी के वायरल वीडियो के आधार पर कदमकुआं थाना की पुलिस ने खान सर और उनके दो सुरक्षा कर्मियों के अलावा अन्य अज्ञात के खिलाफ बी एन एस और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं में 04 जून 2026 को कदम कुआं थाना में कांड संख्या 418/2026 दर्ज किया है। खान कोचिंग पर पथराव के एक घंटे बाद हुई फायरिंग बता दें कि पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र के मुसल्लहपुर में दो जून की रात दो कोचिंग संस्थान खान ग्सोबल कोचिंग सेंटर और ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के बीच विवाद के मामले को पुलिस हर पहलू पर परख रही है और इसका अनुसंधान कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रात 10 बजे के करीब खान ग्लोबल कोचिंग सेंटर पर पथराव और गार्ड के सााथ मारपीट की घटना हुई थी। लेकिन उनके बॉडीगार्ड द्वारा फायरिंग घटना के करीब एक घंटे के बाद की गई थी। इसका मतलब है कि निजी सुरक्षा कर्मियों ने पथराव से अपनी रक्षा की बजाय दहशत फैलाने और डर का माहौल कायम करने के लिए ऐसा किया था। इस घटना के अनुसंधान की निगरानी एक वरीय पुलिस अधिकारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि फुटेज को सुक्ष्मता से देखा गया है। रात में करीब 10 बजे खान कोचिंग सेंटर पर पथराव और गार्ड के साथ मारपीट की घटना हुई थी। करीब एक घंटे के बाद गार्ड द्वारा हवा में फायरिंग की गई थी। उस समय दूसरे पक्ष के लोग वहां से चले गए थे।

रांची के कई इलाकों में बिछेगी पीएनजी पाइपलाइन, 2026 तक जुड़ेंगे 20 हजार नए उपभोक्ता

 रांची  राजधानी रांची में स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में गेल इंडिया लगातार अपने पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) नेटवर्क का विस्तार कर रही है। शहर के वार्ड नंबर 46 स्थित कृष्णापुरी, मोरहाबादी, हेहल, लालपुर, स्मार्ट सिटी और बीआईटी मेसरा क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।  इस विस्तार योजना के पूरा होने के बाद शहर की लगभग एक लाख आबादी को घरेलू गैस पाइपलाइन सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है।  150 किलोमीटर अतिरिक्त पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने की योजना गेल इंडिया के डीजीएम प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि रांची में पीएनजी नेटवर्क का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान लगभग 150 किलोमीटर अतिरिक्त पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने की योजना बनाई गई है, ताकि शहर के अधिक से अधिक क्षेत्रों को इस सुविधा से जोड़ा जा सके।  उन्होंने बताया कि वर्तमान में रांची में करीब 550 किलोमीटर एमडीपीई पाइपलाइन और लगभग 70 किलोमीटर स्टील पाइपलाइन नेटवर्क में गैस चार्ज की जा चुकी है। इसके माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों में गैस आपूर्ति की व्यवस्था विकसित की गई है। 78 हजार घरों तक पहुंची अवसंरचना घरेलू पीएनजी कनेक्शन के लिए अब तक लगभग 78 हजार घरों में आवश्यक अवसंरचना तैयार की जा चुकी है। इनमें से करीब 24 हजार घरों तक गैस आपूर्ति शुरू हो चुकी है, जबकि लगभग 18 हजार उपभोक्ता नियमित रूप से पीएनजी गैस का उपयोग कर रहे हैं।  कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2026 के अंत तक अतिरिक्त 20 हजार नए घरेलू उपभोक्ताओं को इस सुविधा से जोड़ने का है। गेल इंडिया की यह योजना केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्रों तक भी गैस नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, जिससे उद्योगों को सस्ती, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी। वार्ड 46 में 20 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य वार्ड नंबर 46 की पार्षद आरती कुमारी ने बताया कि गैस सिलिंडर की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों के कारण लोगों में पीएनजी कनेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी है। स्थानीय लोगों की मांग और शिकायतों के बाद उनके वार्ड में पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया है। वार्ड में लगभग 20 किलोमीटर गैस पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे अगले एक वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्य पूरा होने के बाद विशेष शिविर लगाकर एक साथ बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। वार्ड में करीब 20 हजार परिवार रहते हैं, जिन्हें इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा। शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर जारी गेल इंडिया ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-123-121-111 जारी किया है। किसी भी प्रकार की शिकायत, तकनीकी सहायता या कनेक्शन संबंधी जानकारी के लिए उपभोक्ता इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। कंपनी ने वर्ष 2027 के अंत तक परियोजना को व्यापक रूप से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। घर तक गैस पाइपलाइन पहुंचने से सिलेंडर बुकिंग और ढुलाई की परेशानी खत्म होगी। यह आम लोगों के लिए बड़ी राहत है।- संतोष सिंह, स्थानीय निवासी     पीएनजी कनेक्शन सुरक्षित होने के साथ-साथ किफायती भी है। इससे पुरुषों का समय बचेगा व महिलाओं को सबसे अधिक सुविधा मिलेगी।- सुमंत महतो, स्थानीय निवासी यदि पूरे वार्ड में समय पर काम पूरा हो जाता है तो हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। घरेलू गैस के साथ उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।- विजय कुमार, स्थानीय निवासी  

डॉक्टरों की हर गतिविधि पर रहेगी नजर, बिहार के 15 हजार स्वास्थ्य संस्थानों में होगी कैमरों से मॉनिटरिंग

पटना  बिहार में स्वास्थ्य मंत्री की कुर्सी संभालने के बाद निशांत कुमार फुल ऐक्शन में नजर आ रहे हैं। वो ताबड़तोड़ अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं और लापरवाही पर ऐक्शन ले रहे हैं तो वहीं वो बड़े-बड़े फैसले भी ले रहे हैं। अब निशांत कुमार ने ऐलान किया है कि बिहार के सभी सरकारी अस्पतालों में कैमरे लगाए जाएंगे। सरकारी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के पीछे सरकार की यह मंशा है कि वो डॉक्टरों पर निगरानी रख सकें कि अस्पताल में वो किस तरह से अपना काम कर रहे हैं।निशांत कुमार ने यह भी कहा है कि राज्य के सभी जिला अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल और सभी सीएचसी को स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में डेवलप किया जाएगा। मीडिया से बातचीत में निशांत कुमार ने कहा, ‘हमारी कोशिश है कि हम जो दवा दे रहे हैं वो जनता तक पहुंचे। हम इस बात को लेकर प्रयासरत हैं कि दवा सही मात्रा में और सही ढंग से जनता तक पहुंच सके। हमारी सबसे बड़ी समस्या है डॉक्टरों या अन्य कर्मचारियों की गैरमौजूदगी की। इसके लिए हमलोग काम कर रहे हैं। बिहार में करीब 15 हजार सरकारी स्वास्थ्य संस्थान हैं और हम इन सभी में अब कैमरा लगवा रहे हैं। हम एक ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप कर रहे हैं कि कोई भी डॉक्टर अस्पताल में आता है, जाता है तो उसके बीच में वो क्या करता है उसका रिकॉर्ड हम रख सकें। मान लीजिए अगर कोई डॉक्टर 9 बजे आया और 1 बजे गया तो इस बीच में उसने ओपीडी किया या आईपीडी किया याा फिर उसने सर्जरी की या क्या कुछ किया उन सभी चीजों का रिकॉर्ड हमारे पास रहेगा। सभी जगहों पर हम कैमरा लगा रहे हैं ताकि हम कैमरे से ही निगरानी कर सकें। मैं खुद इसको मॉनीटरिंग करूंगा।’ निशांत कुमार ने बताया है कि बिहार के पांच जोन में 11 लेवल-थ्री और पांच लेवल-टू ट्रामा सेंटर बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा एलएनजेपी अस्पताल में 400 बेड का नया अस्पताल बनाया जाएगा। PMCH के प्राचार्य पर हुआ था ऐक्शन बता दें कि इससे पहले पटना स्थित PMCH में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने जब दौरा किया था तब लापरवाही के आरोप में प्राचार्य पर ऐक्शन भी लिया गया था। बिहार सरकार ने पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (पीएमसीएच) के प्रभारी प्राचार्य को ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के चलते अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया। यह कार्रवाई बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के पीएमसीएच के पूर्व निर्धारित निरीक्षण के बाद की गई थी। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने पाया था कि प्रभारी प्राचार्य नरेन्द्र प्रताप सिंह अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति की कोई सूचना नहीं दी थी और न ही अपने स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को प्रभार सौंपा था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, नरेंद्र सिंह ने विभागीय अधिकारियों के फोन कॉल का भी जवाब नहीं दिया। नरेंद्र सिंह को अब बेतिया में प्रोफेसर के पद पर पदस्थापित किया गया है। वहीं, पटना चिकित्सा महाविद्यालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रो. गीता सिन्हा को अगले आदेश तक पीएमसीएच की प्रभारी प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

मिड-डे मील में गड़बड़ी पर सख्ती, खाली बोरों की राशि जमा नहीं करने पर महालेखाकार की आपत्ति

रांची  पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजना योजना) के तहत चावल के खाली बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है। इसे प्रधानाध्यापक या कोई शिक्षक अपने पास नहीं रख सकता। साथ ही स्कूलों को इसका पूरा हिसाब-किताब सरकार को देना है। महालेखाकार द्वारा कई जिलों में बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा नहीं होने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए हर हाल में राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भी सभी जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों को यह राशि हर हाल में जमा करने को कहा है। महालेखाकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2025-26 तक मध्याह्न भोजन में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के हिसाब-किताब दुरुस्त नहीं होने तथा राशि जमा नहीं होने की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। इस अवधि में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के लिए प्रति बोरा 14.40 रुपये जमा किया जाना है। इस राशि का सही तरह से आकलन कर पूरी राशि को सरस्वती वाहिनी की बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिलों को इसकी रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस आशय के निर्देश मिलने के बाद कुछ जिलों में इसके पूर्व के वर्षों की राशि का भी हिसाब-किताब लिया जा रहा है। बताते चलें कि स्कूलों को कुकिंग कास्ट के रूप में निर्धारित राशि दी जाती है, जबकि चावल एफसीआई के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। चावल की राशि एफसीआई को झारखंड मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा दी जाती है, जिसमें केंद्रांश की 60 प्रतिशत तथा राज्यांश की 60 प्रतिशत राशि होती है।