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महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बन रहा मेगा ब्रिज, उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी होगी आसान

 पटना उत्तर और दक्षिण बिहार की लाइफलाइन कहे जाने वाले महात्मा गांधी सेतु के समानांतर गंगा नदी पर बन रहे नये फोर लेन पुल का निर्माण करीब 73 प्रतिशत पूरा हो चुका है. पटना, सारण और वैशाली जिलों को आपस में जोड़ने वाली इस 14.500 किमी लंबी परियोजना की अनुमानित लागत 2574.20 करोड़ से अब 2926.42 हो चुकी है. इस पुल से होकर 2027 तक आवागमन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. 2021 में ही शुरू हुआ था काम इस पुल का निर्माण एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड कर रही है. काम की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए अथॉरिटी इंजीनियर मैसर्स दोहवा इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है. इस परियोजना का एग्रीमेंट अमाउंट 1794.37 करोड़ रुपये था. जमीन पर काम की शुरुआत (अपॉइंटेड डेट) 25 मार्च 2021 को हुई थी. एप्रोच रोड के लिए मिट्टी भराई का काम 77 प्रतिशत पूरा इस नये पुल के दोनों तरफ एप्रोच रोड के लिए मिट्टी भराई का काम 77 प्रतिशत पूरा हो चुका है. इसके साथ ही आरई पैनल कास्टिंग का 92 प्रतिशत काम हो चुका है. सड़क को मजबूती देने वाले जीएसबी का 61 प्रतिशत, डब्ल्यूएमएम का 50 प्रतिशत और डीबीएम का 48 प्रतिशत काम भी जमीनी स्तर पर पूरा हो गया है. पुल के बनने से होगा यह फायदा इस पुल के बनने से गाड़ियों के लिए पटना से हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीवान का सफर बेहद आसान हो जायेगा. साथ ही उत्तर बिहार के गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में बेहतर इलाज के लिए पटना आने और जाने में सहूलियत होगी. हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों और उत्तर बिहार के किसानों की ताजी सब्जियां, फल बिना समय गंवाए पटना की मंडियों तक पहुंच सकेंगे. इससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा. क्या कहते हैं अधिकारी? पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल का कहना है कि एक्स्ट्रा डोज्ड तकनीक से बन रहे इस मुख्य पुल में कुल 33 वेल फाउंडेशन बनने हैं, जिनमें से 31 का काम पूरा हो चुका है. टोटल 33 पीलर में से 16 पियर टेबल का काम पूरी तरह तैयार है और चार पर काम चल रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि तीन पियर टेबल का काम जल्द शुरू होगा. साथ ही पुल के लिए कुल 1868 कंक्रीट सेगमेंट्स की जरूरत है, जिसमें से 1381 की ढलाई हो चुकी है. 953 सेगमेंट्स को पीलर पर सफलतापूर्वक फिट भी कर दिया गया है. इस तरह से जल्द ही निर्माण कार्य पूरा हो सकेंगे.

आम महोत्सव बना सफलता की मिसाल, किसानों और महिला एफपीओ को मिला बेहतर बाजार

रांची पूर्वी सिंहभूम अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 से बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत आम बागवानी एवं मिश्रित आम बागवानी का कार्य विभाग द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के आलोक में किया जा रहा है। राज्य में लगभग 6000 एकड़ में बिरसा हरित ग्राम योजना के माध्यम से लाभुकों को न सिर्फ मजदूरी बल्कि स्थायी आजीविका के स्रोत भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2026-27 इसकी सफलता की कहानी स्वयं बयान कर रहा है। 96 हजार किलो से अधिक आम उत्पादन ने रचा नया कीर्तिमान वर्ष 2026-27 में कुल 96,175 किलो आम फलों का उत्पादन विभिन्न प्रखंडों में बिरसा हरित ग्राम योजना के लाभुकों द्वारा किया गया। इसके विक्रय हेतु जिला स्तर पर आम महोत्सव मेले का आयोजन किया गया, जो अपने आप में बेहद सफल रहा। एफपीओ और महिला किसानों ने बढ़ाया मेले का आकर्षण विभिन्न प्रखंडों से आए बिरसा हरित ग्राम योजना के किसान, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के सहयोग से एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों) जैसे बोड़ाम, तेजस्वी महिला किसान उत्पादक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बहरागोड़ा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, कन्हाईसर चाकुलिया महिला किसान उत्पादक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड तथा धालभूमगढ़ नारी शक्ति आजीविका प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की दीदियों एवं किसानों द्वारा उत्साहपूर्वक मेले में भाग लिया गया। आम महोत्सव में किसानों को मिली अच्छी आय किसानों और एफपीओ से कुल 1,249 किलो आम की खरीद कर आम महोत्सव में स्टॉल लगाया गया। यह न सिर्फ दीदियों के लिए उत्साह का कारण बना, बल्कि जमशेदपुरवासियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा। बिरसा हरित ग्राम योजना के आम किसानों की मुस्कान बने। जिला स्तरीय आम महोत्सव में कुल 64,150 रुपये की आय हुई। साथ ही किसानों ने स्थानीय बाजार में भी आमों का विक्रय कर अच्छी आमदनी अर्जित की। 1400 किसान एफपीओ से जुड़े, बाजार तक मिली सीधी पहुंच बाजार विपणन समिति, पूर्वी सिंहभूम के सहयोग तथा जेएसएलपीएस के माध्यम से बिरसा हरित ग्राम योजना के 1400 किसानों को एफपीओ से टैग किया गया, जो उनके उत्पादों को स्थानीय और बाहरी विक्रेताओं तक पहुंचा रहे हैं। जेएसएलपीएस के तीन एफपीओ में कुल 4,103 महिला किसान शेयरधारक हैं, जबकि धालभूमगढ़ नारी शक्ति प्रोड्यूसर कंपनी में 2,085 शेयरधारक जुड़ी हुई हैं। इनके माध्यम से ट्रेडिंग का कार्य किया जा रहा है। APEDA और KISAN SAY से जुड़कर बढ़े निर्यात के अवसर इस वर्ष मनरेगा आधारित बिरसा हरित ग्राम योजना के लाभुकों के साथ समन्वय स्थापित कर Renown Agency के साथ टाई-अप किया गया है। इसके तहत A Category के आमों को APEDA और KISAN SAY जैसे संस्थानों के साथ ऑनबोर्ड किया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिल सके। पूर्वी सिंहभूम से लंदन तक पहुंचा बिरसा हरित ग्राम योजना का आम बोड़ाम और बहरागोड़ा से 1.5 टन बिरसा हरित ग्राम योजना के आम को जिला प्रशासन के सहयोग से एफपीओ के माध्यम से लंदन भेजे जाने के लिए फ्लैग ऑफ किया गया। यह योजना की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही है बिरसा हरित ग्राम योजना बिरसा हरित ग्राम योजना झारखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो ग्रामीणों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना की सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।  

गंगा नदी पर बन रहा महासेतु बदलेगा तस्वीर, दिसंबर 2027 से शुरू होगा आवागमन

खगड़िया. अगुवानी-अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज) के बीच गंगा नदी पर निर्माणाधीन महासेतु का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। मालूम हो कि इस महासेतु का निर्माण कार्य बीच-बीच में कई कारणों से कई बार रुका, लेकिन अब निर्बाध रूप से निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। विभाग का दावा है कि दिसंबर 2027 में इस महासेतु होकर आवागमन आरंभ हो जाएगा।इसके बाद स्थानीय निवासियों को नाव से गंगा पार नहीं करना पड़ेगा। बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों के बीच आवागमन और अधिक सुगम होगा। जिससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नया आयाम मिलेगा। फिलहाल, गंगा की मुख्य धारा में तीन अलग-अलग स्थानों पर वैल कैप निर्माण का कार्य जारी है। निर्माण स्थल पर भारी मशीनों की मौजूदगी है। विभिन्न चरणों का काम एक साथ संचालित किया जा रहा है। कहीं पिलर संरचना के लिए कटिंग का कार्य हो रहा है, तो कहीं सरिया बांधने और कंक्रिटिंग की तैयारियां चल रही हैं। निर्माण कार्य की निगरानी कई इंजीनियर कर रहे हैं। निर्माण कंपनी एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन के अधिकारियों का दावा है कि आधुनिक तकनीक और भारी मशीनों की मदद से कार्य को गति दी जा रही है। निर्माण कंपनी से जुड़े अधिकारियों ने दावा किया है कि गंगा के उफान पर रहने और बाढ़ के समय भी महासेतु का कार्य नहीं रुकेगा। मालूम हो कि निर्माणाधीन महासेतु की लंबाई करीब 3.160 किलोमीटर है। जबकि एप्रोच पथ की लंबाई करीब 25 किलोमीटर है। एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. संजय कुमार ने कहा कि गंगा की मुख्य धारा में युद्धस्तर पर निर्माण कार्य चल रहा है और बाढ़ के समय भी कार्य जारी रहेगा।

कम जमीन और कम पानी में बढ़ा मुनाफा, थ्री-लेयर मॉडल बना आकर्षण

 कोडरमा  डोमचांच प्रखंड के प्रगतिशील किसान सुमन लाल मेहता ने खेती में अनूठा उदाहरण पेश करते हुए थ्री-लेयर (मल्टीलेयर) खेती की शुरुआत की है। पथरीली मिट्टी, कम पानी वाले इस क्षेत्र में उन्होंने अपनी दो एकड़ से अधिक खेती योग्य भूमि में से करीब एक चौथाई हिस्से में इस पद्धति को अपनाया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। थ्री-लेयर खेती के तहत जमीन के नीचे हल्दी, अदरक और गाजर जैसी फसलें लगाई गई हैं। वहीं, जमीन की ऊपरी सतह पर धनिया, साग समेत अन्य पत्तेदार सब्जियां उगाई जा रही हैं इसके अलावा खेत में बनाए गए बांस और घास-फूस के मचान पर करेला, कुंद्री, लौकी, नेनुआ और जंगली खक्सा जैसी लत्तरदार सब्जियों की खेती की जा रही है। इस पद्धति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि एक ही भूखंड पर एक साथ तीन अलग-अलग स्तरों पर विभिन्न फसलों का उत्पादन संभव हो रहा है। सामान्यतः इन फसलों के लिए अलग-अलग भूमि और खेती की अलग पद्धति अपनानी पड़ती है, लेकिन मल्टीलेयर खेती में एक ही मौसम, एक ही जमीन और एक ही सिंचाई व्यवस्था से विविध फसलों की पैदावार ली जा रही है। खेतों में टपक सिंचाई प्रणाली का उपयोग होने से पानी की भी पर्याप्त बचत हो रही है। भीषण गर्मी में पौधों को मिल रहा प्राकृतिक संरक्षण इस खेती की खासियत यह है कि खेत में बनाए गए मचान नीचे उगाई गई फसलों के लिए प्राकृतिक तापमान नियंत्रक का काम करते हैं। मचान की छाया के कारण मिट्टी की नमी बनी रहती है और तेज धूप का सीधा असर फसलों पर नहीं पड़ता। इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और झुलसने का खतरा भी कम हो जाता है। शांति देवी बताती हैं कि यह प्रयोग काफी कारगर साबित हो रहा है। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों को अच्छा मुनाफा भी मिलने की उम्मीद है। मिट्टी के अंदर और सतह पर लगी फसलों तक सूर्य की सीधी किरणें नहीं पहुंचतीं, जिससे पौधों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बना रहता है। मध्य प्रदेश में सीखी तकनीक, डोमचांच में प्रयोग प्रगतिशील किसान सुमन मेहता ने बताया कि मल्टीलेयर खेती की शुरुआत मध्य प्रदेश में हुई थी और अब देश के कई राज्यों में किसान इसे अपना रहे हैं। कृषि विभाग की ओर से उन्हें मध्य प्रदेश जाकर इस तकनीक को नजदीक से सीखने का अवसर मिला था। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने खेत को तैयार किया, मचान बनाए और तीन अलग-अलग स्तरों पर फसलें लगाकर इस प्रयोग की शुरुआत की। आज उनके खेत में जमीन के अंदर, जमीन की सतह पर और मचान के ऊपर एक साथ विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन हो रहा है, जो क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।  

पूर्णिया से शुरू हुआ विस्तार, जल्द पटना तक पहुंचेगा मानसून

पटना दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने बिहार में दस्तक दे दी है। पूर्णिया के रास्ते गुरुवार को मॉनसून ने बिहार में प्रवेश लिया। मौसम विभाग के अनुसार कोसी और सीमांचल क्षेत्र के 7 जिलों में मॉनसून का प्रसार हो चुका है। इसके आगे बढ़ने की परिस्थितियां अनुकूल हैं। अगले एक-दो दिन तक इसका प्रसार थोड़ा धीमा हो सकता है, लेकिन इस सप्ताह के अंत तक यह बिहार के अधिकतर जिलों को कवर कर लेगा। पटना समेत अन्य जिलों के लोगों को मॉनसून का बेसब्री से इंतजार है। मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में दस्तक देने के बाद मॉनसून कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है। इसकी उत्तरी सीमा मधुबनी से होकर गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में इसके बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है। इस साल मॉनसून ने समय से पहले ही एंट्री ली है। मॉनसून के बिहार में प्रवेश की सामान्य तारीख 13 से 15 जून होती है। हालांकि, इस साल 11 जून को ही मॉनसून बिहार पहुंच गया। पहले दिन 7 जिलों में हुआ मॉनसून का प्रसार पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि बिहार में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आगमन हो चुका है। इसका प्रसार किशनगंज, अररिया, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और मधुबनी जिलों में हो चुका है। पटना में कब पहुंचेगा मॉनसून? मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आगामी 2-3 दिनों में मॉनसून के बिहार के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। इस सप्ताह के अंत तक मॉनसून के राजधानी पटना और दक्षिण बिहार के जिलों तक पहुंचने की पूरी संभावना नजर आ रही है। पूर्णिया में भारी बारिश से जलजमाव 24 घंटे में कहां-कितनी बारिश हुई? मॉनसून के आने से पहले ही उत्तर बिहार में भारी बारिश का दौर जारी है। बीते 24 घंटे के भीतर मिथिला, सीमांचल, कोसी, चंपारण क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई। किशनगंज जिले के तैयबपुर में सर्वाधिक 148 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सुपौल के सरायगढ़ भपटियाही में 106 मिमी, खगड़िया के बलतारा में 70 मिमी, समस्तीपुर के हसनपुर में 67.6 मिमी, मधुबनी के लौकही में 61.2 मिमी, पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर में 58 मिमी पानी गिरा। 12 जून को 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने बिहार के 10 जिलों में शुक्रवार को भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इनमें किशनगंज, अररिया, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज जिले शामिल हैं। इसके अलावा अन्य जिलों में भी हल्के से मध्यम दर्जे की बरसात होने की संभावना है।

एनडीए का दबदबा, जदयू-भाजपा समेत 10 प्रत्याशियों की बिना मतदान जीत

पटना बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव और उपचुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे एवं स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार एमएलसी बन गए हैं। भोजपुरी स्टार पवन सिंह भी सदन पहुंच गए हैं। एनडीए के 9 और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक उम्मीदवार ने निर्विरोध चुनाव में जीत दर्ज की। गुरुवार को नाम वापसी की अवधि खत्म होने के बाद सभी को विजयी घोषित कर दिया गया। दूसरी ओर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) चीफ उपेंद्र कुशवाहा के बेटे एवं पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश एमएलसी बनने से चूक गए। उन्हें एनडीए ने प्रत्याशी नहीं बनाया था। अब उनका मंत्री पद संकट में आ गया है। बिहार विधान परिषद की विधानसभा कोटे वाली 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव पूरे हो गए हैं। इसके अलावा, पूर्व सीएम नीतीश कुमार द्वारा खाली की गई एक सीट पर भी उपचुनाव हुआ। सोमवार को कुल 10 सीटों पर 10 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था। इनमें से 9 सीटों पर एनडीए और विपक्ष से एक प्रत्याशी ने पर्चा भरा। 10 सीटों पर 10 कैंडिडेट ही होने से मतदान की नौबत नहीं आई और सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इसके पहले सभी 10 प्रत्याशियों का नामांकन वैध पाया गया था। मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच में सभी दलीय उम्मीदवार के पर्चे सही पाए गए थे। इसके साथ ही सभी का निर्वाचन तय हो गया था। MLC चुनाव जीतने वालों में 4-4 भाजपा एवं जदयू के हैं, जबकि एक-एक उम्मीदवार लोजपा (रामविलास) और आरजेडी के हैं। ये नेता बने एमएलसी नवनिर्वाचित एमएलसी में जदयू से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद शामिल हैं। वहीं, भाजपा से भोजपुरी स्टार पवन सिंह संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित का नाम है। लोजपा (रामविलास) के अशरफ अंसारी और आरजेडी के सुनील सिंह भी एमएलसी चुनाव जीते हैं। दीपक प्रकाश एमएलसी बनने से चूके, मंत्री पद जाएगा? राज्यसभा सांसद एवं रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश एमएलसी के मंत्री पद पर संशय पैदा हो गया है। वह बिना किसी सदन के सदस्य रहे दो बार बिहार सरकार में मंत्री बनाए गए। उन्होंने पिछले महीने नई सम्राट सरकार के गठन के बाद दूसरी बार मंत्री पद की शपथ ली थी। नियमों के अनुसार, मंत्री पद पर बने रहने के लिए दीपक प्रकाश को शपथ की तारीख से 6 महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन की सदस्यता लेनी होगी। उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीद थी कि वह भाजपा के सहयोग से अपने बेटे को एमएलसी बनाकर दीपक का मंत्री पद सुरक्षित कर लेंगे। हालांकि, भाजपा ने कुशवाहा को सीट नहीं दी। इससे दीपक एमएलसी बनने से चूक गए। अब कुशवाहा आगे क्या कदम उठाएंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Bihar MLC Election: 9 उम्मीदवार बिना मुकाबले जीते, पवन सिंह और निशांत कुमार के नाम भी शामिल

पटना  बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया गुरुवार  को औपचारिक रूप से पूरी हो गई. नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया. इसके बाद निर्वाची पदाधिकारी ने पवन सिंह समेत सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के नए चेहरे पवन सिंह को लेकर रही, जिन्हें पहली बार पार्टी ने विधान परिषद भेजा है।  पहली बार विधान परिषद पहुंचे पवन सिंह भाजपा ने इस बार विधान परिषद चुनाव में भोजपुरी फिल्म अभिनेता और गायक पवन सिंह को उम्मीदवार बनाया था. नामांकन के बाद से ही उनकी उम्मीदवारी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। अब निर्विरोध निर्वाचन के साथ पवन सिंह का विधान परिषद पहुंचना तय हो गया है. माना जा रहा है कि पवन सिंह विधानपरिषद में अपने इलाके के लोगों के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।  बीजेपी के चार उम्मीदवार हुए निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी के खाते से पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं. इनमें संजय मयूख लगातार तीसरी बार विधान परिषद पहुंचे हैं, जबकि पवन सिंह और शीला पंडित के लिए यह नई राजनीतिक पारी की शुरुआत मानी जा रही है।  जेडीयू के चार उम्मीदवारों को भी मिली जीत जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन कुमार भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए. पार्टी ने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।  एलजेपी (रामविलास) और आरजेडी को भी एक-एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अशरफ अंसारी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुनील कुमार सिंह भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं. दोनों नेताओं का विधान परिषद पहुंचना पहले से लगभग तय माना जा रहा था।  नामांकन वापसी की समय सीमा तक नहीं हुआ कोई बदलाव निर्वाचन प्रक्रिया के तहत नामांकन वापसी का समय बुधवार शाम 3 बजे तक निर्धारित था. लेकिन, किसी भी उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया. चूंकि जितनी सीटें थीं, उतने ही उम्मीदवार मैदान में थे, इसलिए सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।  यूपी चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद के लिए उम्मीदवारों का चयन सिर्फ संगठनात्मक जरूरत नहीं, बल्कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की रणनीति का भी हिस्सा है. खासकर पवन सिंह की एंट्री को भाजपा के बड़े राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है. भोजपुरी क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी भी दे सकती है, जिसका लाभ यूपी चुनाव में भी देखने को मिल सकता है. बहरहाल, सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन के साथ बिहार विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव बिना मतदान के ही संपन्न हो गया है।  पवन सिंह और भाजपा उम्मीदवारों की CM से होगी मुलाकात भाजपा के उम्मीदवार पवन सिंह निर्वाचन प्रमाण पत्र लेने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी मिलेंगे।भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय मयूख के साथ पार्टी के सभी निर्वाचित उम्मीदवार मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे।इस मुलाकात को आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जदयू के चारों निर्वाचित MLC करेंगे नीतीश कुमार से मुलाकात जनता दल यूनाइटेड के सभी 4 निर्वाचित विधान पार्षद प्रमाण पत्र मिलने के बाद मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे। इसके लिए वे 7, सर्कुलर रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचेंगे। जदयू के नवनिर्वाचित सदस्य पार्टी नेतृत्व का आशीर्वाद लेने के साथ-साथ आगामी राजनीतिक जिम्मेदारियों पर भी चर्चा कर सकते हैं। राजद के सुनील सिंह लेंगे लालू-राबड़ी और तेजस्वी का आशीर्वाद राजद के निर्वाचित उम्मीदवार सुनील सिंह निर्वाचन प्रमाण पत्र लेने के बाद राजद नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। वे पहले तेजस्वी यादव से मिलेंगे और उसके बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का आशीर्वाद लेंगे। राजद इसे संगठन की एकजुटता और नेतृत्व के प्रति सम्मान के रूप में देख रही है। औपचारिक निर्वाचन के साथ नए सदस्यों की होगी परिषद में एंट्री निर्वाचन प्रमाण पत्र मिलने के बाद सभी 10 उम्मीदवार औपचारिक रूप से बिहार विधान परिषद के सदस्य बन जाएंगे।निर्विरोध निर्वाचन के कारण इस बार मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित कर ली।अब सभी की नजर परिषद में इन नए सदस्यों की भूमिका और राजनीतिक गतिविधियों पर रहेगी।

रांची में भूजल स्तर बढ़ाने की बड़ी योजना, 3 लाख मिलियन लीटर जल रिचार्ज का लक्ष्य

रांची  राज्य में भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाने और वर्षा का जल संरक्षित करने के लिए पेयजल स्वच्छता विभाग और नगर निकायों की तरफ से अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए करीब 2500 ऐसे जलस्रोतों की पहचान की गई है जिनमें कम जल रहता है या सूखे पड़े हैं। इनकी जलभंडारण क्षमता को बढ़ाकर वर्षा का जल इनमें जमा किया जाएगा। इसके अलावा खराब पड़े हैंडपंप, डीप बोरिंग और खदानों के जरिए भी जल संग्रहण किया जाएगा। केंद्रीय भूजल परियोजना के विज्ञानी सलाहकार परमिंदर सिंह ने बताया कि इस तरह के उपायों से करीब तीन लाख मिलियन लीटर जल जमीन के नीचे भेजा जाएगा। यह जल पहले से बने वाटर रिचार्ज सिस्टम के अतिरिक्त होगा। भूजल की स्थिति को इससे नया रिचार्ज सिस्टम मिलेगा और यह लंबे समय तक प्रभावी रहेगा। परमिंदर सिंह ने बताया कि नदियों और तालाबों का पानी एक दूसरे को रिचार्ज करेगा तो सतह पर मौजूद जलस्रोतों में सालों भर जल की उपलब्धता रहेगी। बड़े बांध की जगह नए कच्चे निर्माण से रोकेंगे जल राज्य में 28 के करीब बड़े बांध हैं जिनमें साल भर जल रहता है। पिछले तीस सालों में किसी बड़े बांध का निर्माण नहीं हुआ है। लेकिन दस हजार के करीब कच्ची संरचना बनी है। पिछले साल हुई भारी बारिश ने ग्रामीण और वन क्षेत्र में सतह के उपर और नीचे मौजूद जल को स्थिर किया है। लेकिन शहरी क्षेत्र में जल की समस्या गर्मी के साथ ही चरम पर है। इसे रोकने के लिए शहरों के आसपास भी कच्चे निर्माण कर उनमें जल संरक्षण किया जाएगा। बढ़ा है राज्य का जलभंडार राज्य में इस वर्ष भी बारिश समय से पहले हुई है। पिछले साल वर्षा जल रिचार्ज और जल दोहन का अनुपात सही रहा था। नई वर्षा ने जल भंडारण को बढ़ाया है जबकि अभी मानसून आने ही वाला है। इससे राज्य को सुरक्षित जल भंडारण में मदद मिलेगी।  

किसानों के लिए बड़ी सौगात: बाढ़ और फतुहा में बन रहे दो चेकडैम, 3000 एकड़ भूमि होगी सिंचित

बाढ़ (पटना)  बाढ़ और फतुहा के किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। क्षेत्र में जल संचयन और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा दो बड़े चेकडैम का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। इस पूरी महत्वाकांक्षी योजना के तहत कुल 10 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है, जिसका आवंटन ग्लोबल टेंडर के माध्यम से किया गया है। आगामी मानसून और वर्षा के मौसम को देखते हुए निर्माण एजेंसी द्वारा कार्य की रफ्तार काफी तेज कर दी गई है। जनवरी 2027 तक अंदौली चेकडैम पूरा करने का लक्ष्य, 10 गांवों को मिलेगा लाभ योजना के अंतर्गत पहला चेकडैम फतुहा प्रखंड के जैतीया पंचायत में धारदा नदी पर और दूसरा बाढ़ अनुमंडल के महाने नदी पर अंदौली चेकडैम के नाम से बनाया जा रहा है। बाढ़ के अंदौली में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से जयप्रकाश कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा तैयार किए जा रहे इस चेकडैम का निर्माण कार्य जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस परियोजना से नदी में करीब डेढ़ मीटर तक पानी को रोका जा सकेगा। कनीय अभियंता चंद्रशेखर वर्मा ने बताया कि इस चेकडैम से पानी को डाइवर्ट कर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे विशेषकर गेहूं की फसल के पटवन में किसानों को व्यापक फायदा मिलेगा। इन दोनों परियोजनाओं से दोनों अनुमंडलों के लगभग 10-10 गांवों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और करीब 1500-1500 एकड़ (कुल 3000 एकड़) कृषि भूमि सिंचित हो सकेगी। इसके साथ ही आसपास के इलाकों का वाटर लेवल (भूजल स्तर) भी काफी सुधरेगा। काम बंद होने की अफवाह निराधार: जेपीसी हाल ही में स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों के विरोध के कारण निर्माण कार्य बंद होने की उड़ी अफवाहों को कंपनी प्रबंधन ने पूरी तरह खारिज कर दिया है जयप्रकाश कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधिकारी सूरज साह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि काम रुकने की बात पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार है। यह केवल कंपनी पर अनावश्यक दबाव बनाने की कुछ तत्वों की साजिश थी, जबकि हकीकत यह है कि निर्माण कार्य एक मिनट के लिए भी प्रभावित नहीं हुआ है और लगातार जारी है। घटिया ईंट की शिकायत पर तुरंत एक्शन, ग्रामीणों की निगरानी में हो रहा काम परियोजना की गुणवत्ता के सवाल पर कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि कुछ ग्रामीणों ने निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटों के स्तर को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर प्रबंधन ने त्वरित संज्ञान लिया। अधिकारियों के अनुसार, इस बड़े प्रोजेक्ट में सैकड़ों डाला ट्रैक्टर ईंटों की खपत होनी है, जिसमें से संबंधित ईंट भट्ठा मालिक द्वारा भेजे गए महज एक-दो डाला ईंटों में थोड़ी कमी पाई गई थी। शिकायत मिलते ही उस भट्ठे से तत्काल सप्लाई रोक दी गई और कमियों को दुरुस्त कर लिया गया। ईंट की शिकायत करने वाले स्थानीय ग्रामीण सुजीत कुमार ने बताया कि शुरुआत में दो डाला ईंट दो-तीन नंबर (घटिया स्तर) की आ गई थी, जिसकी उन्होंने आपत्ति की थी। शिकायत के बाद कंपनी द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए उन ईंटों को बदलवा दिया गया और अब पूरी तरह से नंबर वन (उत्कृष्ट) ईंटें लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण खुद लगातार इस पूरी परियोजना की निगरानी कर रहे हैं और अब बेहद पारदर्शी व गुणवत्तापूर्ण काम हो रहा है।

भ्रष्टाचार मामलों में बढ़ी कार्रवाई, लोकायुक्त ने 272 फाइलों का निपटारा किया

 रांची  पांच साल तक बेपटरी रहा लोकायुक्त झारखंड का कार्यालय अब धीरे-धीरे रेस पकड़ने लगा है। इसी वर्ष 21 अप्रैल 2026 को झारखंड के नव नियुक्त लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता के पदभार ग्रहण के साथ ही इस कार्यालय में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकायतें आनी शुरू हो चुकी हैं। गत वर्ष जहां 12 महीने में केवल 157 शिकायतें आईं थीं, इस वर्ष अब तक 161 शिकायतें आईं हैं। लोकायुक्त के पदभार ग्रहण के बाद से अब तक यानी महज डेढ़ महीने में 100 शिकायतें आ चुकी हैं, जिसपर काम भी शुरू हो चुका है। लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने इस डेढ़ महीने के भीतर करीब 1400 लंबित फाइलें देख ली हैं। इनमें से 272 फाइलों को निष्पादित कर दिया, जबकि 250 मामलों में लोकायुक्त ने सुनवाई के लिए आदेश जारी किया है। शिकायतकर्ता को नोटिस गया है और उनकी शिकायतें सुनी जा रही हैं और उसपर आगे की कार्रवाई चल रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकायुक्त कार्यालय में जो शिकायतें आ रही हैं, उनमें सर्वाधिक शिकायतें अंचलों में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध हैं। कई शिकायतों में लोकायुक्त ने एसीबी दिया है जांच का आदेश लोकायुक्त ने कई शिकायतों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को जांच का आदेश दिया है। ये शिकायतें लोकसेवकों के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से संबंधित हैं। लोकायुक्त के यहां जो शिकायतें आईं हैं, उनमें भूमि विवाद, टेंडर आवंटन, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने व सेवांत लाभ नहीं मिलने से संबंधित शिकायतें सर्वाधिक हैं। अंचलों में भ्रष्टाचार पर भी लगातार आ रहीं शिकायतें लोकायुक्त झारखंड के कार्यालय में अंचलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इनमें रसीद निर्गत करने से रोकना, बिना पक्ष जाने दाखिल खारिज रद करने की अनुशंसा करना, दाखिल खारिज के एवज में रिश्वत की मांग करना और नहीं देने पर आवेदन अस्वीकृत करना, बिना किसी ठोस वजह बताए, बिना पक्ष सुने दाखिल खारिज के आवेदन को अस्वीकृत करना आदि शामिल हैं। लोग अपनी-अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में लोकायुक्त कार्यालय से संबंधित अंचलाधिकारियों को उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी होगा।