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बिहार में पंचायत सचिव की नियुक्ति जन्म से 9 महीने पहले, वरीयता सूची पर उठे सवाल

पटना बिहार में पंचायती राज विभाग ने पंचायत सचिवों की वरीयता सूची जारी की है। राज्य में स्नातक उत्तीर्ण पंचायत सचिव को प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी बनाया जाएगा। यह सूची राज्य में कार्यरत पंचायत सचिवों का एक अप्रैल 2026 के आधार पर जारी की गई है। विभाग के संयुक्त सचिव मो. वसीम अहमद ने जिलों के डीएम और जिला पंचायत राज पदाधिकारी (डीपीआरओ) को पत्र भेजा है। इस सूची में एक ऐसी गड़बड़ी सामने आई है जिसे जानकर कोई भी हैरान हो जाएगा। सूची में दी गई सूचना को सही मानें तो एक पंचायत सचिव को जन्म से 9 माह पहले ही नौकरी मिल गई। पंचायती राज विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा है कि वरीयता सूची में किसी सेवानिवृत्त, मृत या त्याग पत्र दिये हुए पंचायत सचिव का नाम हो या किसी पंचायत सचिव का नाम छूट गया हो तो डीपीआरओ पूर्ण विवरण के साथ विभाग को सूची उपलब्ध करायेंगे। वरीयता सूची में दावा और आपत्ति साक्ष्य के साथ 30 दिनों के अंदर उपलब्ध कराना होगा। इस अवधि में दावा या आपत्ति नहीं मिलने पर माना जायेगा कि औपबंधिक वरीयता सूची में कोई त्रुटि नहीं है। इसके बाद अंतिम रूप से वरीयता सूची का प्रकाशन कर दिया जायेगा। इस तरह पंचायत सचिवों की लंबी मांग पूरी हो जाएगी। इसे लेकर पंचायत सचिवों ने हड़ताल भी की थी। सूची में कई खामियां: संघ बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने कहा है कि इस लिस्ट में अन्य कई खामियां हैं। वरीयता सूची में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त दर्जन भर से अधिक स्नातक उत्तीर्ण पंचायत सचिवों का नाम नहीं है। सूची में कई प्रकार की गलतियां हैं। जन्म के 9 माह पहले ही मिल गई नौकरी औपबंधिक वरीयता सूची को देख आप चौक जायेंगे। इस सूची में सारण जिला के पंचायत सचिव सुदर्शन राम को उनके उनके जन्म के पहले ही नौकरी मिल गई है। सुदर्शन राम की जन्म तिथि 19 नवंबर 1969 अंकित है। जबकि इनकी पंचायत सचिव पद पर नियुक्ति तिथि 28 जनवरी 1969 अंकित है।

रांची में मोहर्रम को लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम, शहर पर ड्रोन और CCTV से रहेगी नजर

रांची  मोहर्रम के दौरान राजधानी रांची में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। सुरक्षा के मद्देनजर एक कंपनी रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) सहित करीब 6000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों और जुलूस मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था में आरएएफ, एसएसबी, एसआईआरबी, जैप, जैप महिला बटालियन, इको बटालियन, होमगार्ड तथा जिला बल के जवानों को लगाया जाएगा। इसके अलावा किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए टीयर गैस दस्ता, वज्रवाहन, रंगीन वाटर टैंकर और रबर बुलेट टीम को भी तैयार रखा गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों और धार्मिक स्थलों के आसपास ड्रोन कैमरों के माध्यम से निगरानी करने का निर्णय लिया है। साथ ही कई प्रमुख स्थानों और ऊंची इमारतों पर भी सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। सादे लिबास में भी पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी, जो भीड़ के बीच रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे। सोशल मीडिया पर रहेगी विशेष नजर मुहर्रम के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी पुलिस की पैनी नजर रहेगी। फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम समेत विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों की निगरानी के लिए अलग से तकनीकी टीम गठित की गई है। यह टीम अफवाह फैलाने वाले संदेशों और भ्रामक पोस्टों पर नजर रखेगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित ग्रुप एडमिन की भूमिका की भी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और किसी भी संदिग्ध सूचना की तत्काल पुलिस को जानकारी देने की अपील की है।  

भरत तिवारी मामले में भावुक पल, आयोग अध्यक्ष ने मां को दिया न्याय का भरोसा

भोजपुर. भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण की न्यायिक जांच के सिलसिले में गुरुवार को न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष एवं पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा बिलौटी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने मृतक भरत भूषण तिवारी के स्वजन से मुलाकात की और मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। परिवार का दर्द सुना, निष्पक्ष जांच का आश्वासन स्वजन से बातचीत के दौरान न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि वह परिवार के दर्द को समझते हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद पीड़ा होना स्वाभाविक है। घटना की सच्चाई सामने लाने और व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से ही उन्हें जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष ने स्वजन से जांच में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने घटना से संबंधित सभी फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराने का अनुरोध करते हुए कहा कि मामले से जुड़ी हर जानकारी का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा। मोबाइल लौटाने की उठी मांग इस दौरान मृतक के भाई ने भरत भूषण तिवारी का मोबाइल फोन वापस दिलाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि मोबाइल फिलहाल पुलिस के कब्जे में है। इस पर न्यायमूर्ति सिन्हा ने भरोसा दिलाया कि वह इस संबंध में डीएम और एसपी से बातचीत करेंगे। सुरक्षा को लेकर जताई चिंता मृतक के स्वजन ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की। परिवार का कहना था कि घटना के बाद भय का माहौल बना हुआ है। इस पर न्यायमूर्ति सिन्हा ने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे और परिवार की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई की मांग मृतक की मां आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जाएगी। वहीं, उनके गांव पहुंचने की सूचना पर दिनभर लोगों की भीड़ जुटी रही और आयोग स्थानीय लोगों से भी जानकारी जुटाकर जांच को आगे बढ़ाने में लगा रहा।

कलाकारों के लिए खुशखबरी, झारखंड सरकार देगी बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग कलाकारों को 4 हजार रुपये पेंशन

रांची. झारखंड के वरिष्ठ, गंभीर रूप से बीमार एवं स्थायी रूप से दिव्यांग कलाकारों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कलाकारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्च्त करने के उद्देश्य से मासिक निवृत्तिका (कलाकार पेंशन) योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत पात्र कलाकारों को प्रतिमाह 4,000 रुपए की सम्मान राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। कला-संस्कृति विभाग के निदेशक आसिफ एकराम ने बताया कि यह योजना उम्र, गंभीर बीमारी अथवा स्थायी दिव्यांगता के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल कलाकारों के जीवनपर्यंत योगदान के प्रति राज्य सरकार के सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है। योजना का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि कलाकारों के योगदान का सम्मान करना भी है। आवेदन करने वालों में राज्य के मूल निवासी, वृद्ध, गंभीर रूप से बीमार और स्थायी रूप से दिव्यांग कलाकार शामिल रहेंगे। संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोककला, चित्रकला, मूर्तिकला तथा अन्य सांस्कृतिक विधाओं से जुड़े कलाकारों को यह सुविधा दी जाएगी। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। आवश्यक प्रक्रिया और दस्तावेज इच्छुक कलाकार विज्ञापन के साथ जारी आवेदन प्रपत्र को भरकर योजना के लिए आवेदन कर सकते है। पूर्ण रूप से भरा हुआ आवेदन पत्र आवश्यक दस्तावेजों के साथ सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, रांची के कार्यलय में जमा करना होगा। आवेदन प्रपत्र विभाग की आधिकारिक वेबसाइट [www.jharkhandculture.com](https://www.jharkhandculture.com) से डाउनलोड किया जा सकता है। आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज कला क्षेत्र (संगीत, नृत्य, रंगमंच, चित्रकला, लोककला, मूर्तिकला आदि) से जुड़ी उपलब्धियों, सम्मान एवं पुरस्कारों के प्रमाण-पत्र झारखंड का स्थायी निवासी होने संबंधी प्रमाण-पत्र आयु प्रमाण-पत्र वार्षिक आयु प्रमाण-पत्र बैंक खाते का विवरण आधार कार्ड अथवा अन्य वैध पहचान-पत्र की छायाप्रति गंभीर बीमारी या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी चिकित्सा अथवा दिव्यांगता प्रमाण-पत्र आवेदन पत्र विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा किया जा सकता है।

‘आपातकाल लोकतंत्र पर काला धब्बा’ : सम्राट चौधरी ने कांग्रेस को घेरा

पटना. 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में याद करते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कांग्रेस और आपातकाल को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय बताया और कहा कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा नागरिक अधिकारों को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा था। आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर हमला सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में कहा कि 25 जून भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐसा दिन है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके अनुसार आपातकाल के दौरान सत्ता के अहंकार में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश हुई और आम नागरिकों के अधिकार प्रभावित हुए। लोकतंत्र सेनानियों को किया नमन उपमुख्यमंत्री ने उन लोगों को भी याद किया जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि उस समय विरोध की आवाज उठाने वाले अनेक लोगों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता नहीं किया। सोशल मीडिया पर साझा किया संदेश सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा कि लोकतंत्र की रक्षा, संविधान का सम्मान और जनस्वर की शक्ति को सर्वोपरि रखना ही उन लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया था। उनका यह संदेश राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ‘संविधान हत्या दिवस’ को लेकर जारी है बहस गौरतलब है कि 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था। इसे लेकर वर्षों से राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं। एक पक्ष इसे लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला मानता है, जबकि दूसरा पक्ष उस समय की परिस्थितियों का हवाला देता है। राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज सम्राट चौधरी की इस टिप्पणी के बाद बिहार की राजनीति में भी आपातकाल और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। ‘संविधान हत्या दिवस’ को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहने की संभावना है।

JSCA स्टेडियम में अव्यवस्था बनी हादसे की वजह, 4 में से सिर्फ एक गेट खुलने से भगदड़

रांची. जेएससीए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में जेपीएल-20 फाइनल मुकाबला देखने पहुंचे क्रिकेट प्रेमियों को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। फाइनल मैच को लेकर उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ और जेएससीए और पुलिस-प्रशासन की कमजोर तैयारी के कारण नॉर्थ गेट पर अफरातफरी मच गई। पहले लोगों को नॉर्थ गेट से प्रवेश कराया जा रहा था। भीड़ अधिक हो जाने से लोगों को साउथ गेट से प्रवेश करने के लिए बोल दिया गया। इसी को लेकर भगदड़ हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि गेट पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। नाराज दर्शकों ने बाद में वेस्ट गेट को तोड़ दिया।  बच्चे, महिलाएं और युवा हुए चोटिल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्टेडियम में प्रवेश के दौरान हजारों दर्शक एक साथ नॉर्थ गेट की ओर पहुंच गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं थी। इसी दौरान धक्का-मुक्की शुरू हुई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। भगदड़ में बच्चे, महिलाएं और युवा भी चोटिल हो गए। इस बीच स्टेडियम के बाहर लगे लोहे की बैरिकेडिंग टूट गई। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन के तमाम आला पदाधिकारी घटना स्थल पहुंचे और पूरे मामले को जानने का प्रयास में लगे रहें। दजनों लोग हुए घायल आठ गंभीर रूप से हुए जख्मी घटना में कम से कम आठ क्रिकेट प्रेमियों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इनमें से पांच घायलों को राज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि दो घायलों को सदर अस्पताल और एक को पारस अस्पताल पहुंचाया गया। दर्जनों घायलों को निजी अस्पतालों में प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। राज अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि सभी घायल खतरे से बाहर हैं और उनका उपचार किया गया है। हालांकि एक लड़की के पेट में गंभीर चोट लगी है, जिसके कारण उसे निगरानी में रखा गया है। सिर्फ एक गेट खोला गया घटना के बाद पुलिस और स्टेडियम प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फाइनल मुकाबले को लेकर बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना पहले से थी, बावजूद इसके भीड़ प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखी। कई दर्शकों ने आरोप लगाया कि गेट पर न तो पर्याप्त सुरक्षा कर्मी मौजूद थे और न ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था थी। स्टेडियम में प्रवेश के लिए चार गेट है लेकिन एक ही गेट खोला गया जिससे भगदड़ मच गई। इसमें भी जब भीड़ अधिक होने लगी तो गेट बंद कर दिया गया और लोग बेकाबू हो गए। जबकि अंदर स्टेडियम में काफी जगह थी। चारों ओर बिखरे पड़े हैं चप्पल-जूता स्टेडियम के बाहर और अंदर लोगों के अफरा-तफरी के दौरान चप्पल-जूता बिखरा पड़ा है। हालांकि घंटों प्रयास के बाद स्थिति पर काबू पाया गया लेकिन इस बीच महिला, बच्चे व युवाओं को काफी चोट लगी। दर्जनों लोग हल्के चोट लगने के बाद किसी तरह वापस अपने घर को चले गए लेकिन अधिक घायलों को अस्पताल ले जाया गया। दर्जनों एंबुलेंस भेजी गईं रांची के सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही स्टेडियम परिसर में देर रात तक लगातार 108 एंबुलेंस भेजी जाती रही। रात 11.30 बजे तक सदर अस्पताल में दो, पारस अस्पताल में एक और राज अस्पताल में पांच घायलों को इलाज के लिए लाया गया। उन्होंने बताया कि सभी घायलों का इलाज कराया जा रहा है और प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बना हुआ है। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को सदर अस्पताल में भी शिफ्ट किया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि देर रात तक कुछ और घायल इलाज के लिए पहुंच सकते हैं। बड़े आयोजन में सुरक्षा प्रबंधन पर फिर सवाल जेपीएल फाइनल जैसे बड़े आयोजन में हुई इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। खेल प्रेमियों का कहना है कि मैच का रोमांच देखने पहुंचे लोगों को स्टेडियम प्रबंधन की ओर से अव्यवस्था और लापरवाही की कीमत चोट खाकर चुकानी पड़ी। अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई और घटना की जांच पर टिकी है। लोगों ने स्टेडियम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों के अंदर काफी गुस्सा भरा हुआ था।

आर्द्रा स्नान पर बक्सर के घाटों पर जुटे 20 हजार श्रद्धालु, गंगा स्नान के लिए उमड़ी भीड़

बक्सर. प्रसिद्ध रामरेखा घाट पर बुधवार तड़के से ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। घाट के पुजारियों के अनुसार, आद्रा नक्षत्र के अवसर पर 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान किया। बड़ी संख्या में लोग मुंडन संस्कार कराने के लिए भी घाट पहुंचे। पंडित धनजी तिवारी ने कहा कि गुरुवार को पड़ने वाली भीमसेनी निर्जला एकादशी के कारण गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ज्योतिषाचार्य नरोत्तम द्विवेदी ने बताया कि ग्रहों के राजा सूर्य 22 जून की रात 8:27 बजे मृगशिरा नक्षत्र से निकलकर राहु के स्वामित्व वाले आद्रा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं। सूर्य का यह गोचर छह जुलाई तक रहेगा। ज्योतिष एवं कृषि की दृष्टि से आद्रा नक्षत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे मानसून के आगमन का संकेतक माना जाता है। उन्होंने बताया कि पंचांग के अनुसार जून के अंतिम दिनों तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह में वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, आद्रा नक्षत्र के प्रारंभिक तीन-चार दिनों तक धरती को 'रजस्वला' अवस्था में माना जाता है, इसलिए किसान इस अवधि के बाद ही खेतों की जुताई शुरू करते हैं। कोच-बकसड़ा गांव के किसान बांके बिहारी मिश्र ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. देवकरण ने बताया कि जिले में 26 और 27 जून को क्रमशः आठ और छह मिलीमीटर वर्षा होने की संभावना है। हालांकि इस दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बने रहने का अनुमान है। भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत:  भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत गुरुवार को रखा जाएगा। आचार्यों के अनुसार, इस व्रत का फल वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों के व्रत के बराबर माना गया है। एकादशी तिथि बुधवार रात्रि से प्रारंभ होकर गुरुवार रात 9:14 बजे तक रहेगी। श्रद्धालु गुरुवार को व्रत रखकर शुक्रवार को सूर्योदय के बाद सुविधा अनुसार पारण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में बलशाली भीमसेन को अत्यधिक भूख लगती थी, जिसके कारण वे वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का व्रत करने का परामर्श दिया था। इसी कारण यह व्रत 'भीमसेनी एकादशी' के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस अवसर पर जल से भरा घड़ा, मौसमी फल, छाता, वस्त्र तथा अन्य उपयोगी सामग्री का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है।

पंचायत विकास दिवस पर बिहार में विशेष आयोजन, ग्राम स्वराज को मिलेगी मजबूती

पटना. सरकार ने ग्राम पंचायतों के सतत और समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को पंचायत विकास दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में 28 जून को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत विकास दिवस का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री मुंगेर जिले की एक चयनित ग्राम पंचायत से करेंगे। मंत्रिमंडल सचिवालय की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य बापू के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करना और पंचायतों को ग्रामीण विकास का सशक्त केंद्र बनाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम तय किया गया है। पंचायती राज संस्थाओं को महत्वपूर्ण अधिकार और जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें ग्राम पंचायत सबसे महत्वपूर्ण इकाई है, जो ग्रामीणों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में सीधी भूमिका निभाती है। पंचायत विकास दिवस के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों, ग्राम सभा के सदस्यों, महिलाओं, युवाओं और अन्य हितधारकों के बीच संवाद को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को मिली जिम्मेदारी राज्य सरकार ने सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को अपने-अपने आवंटित जिले की किसी एक पंचायत में कार्यक्रम में शामिल होने का निर्देश दिया है, ताकि विकास योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन हो सके और पंचायतों को अधिक सशक्त बनाया जा सके।

गेस्ट हाउस पर पुलिस का छापा, कमरों से आपत्तिजनक सामग्री बरामद; सेक्स रैकेट का खुलासा

सहरसा बिहार के सहरसा में पुलिस ने छापेमारी कर सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस का कहना है कि इस मामले को लेकर सूचना मिली थी, जिसके बाद एक्शन लिया गया. मौके से एक महिला और छह पुरुष मिले, जिन्हें कस्टडी में लिया है. इसी के साथ आपत्तिजनक सामग्री भी मिली. पुलिस ने गेस्ट हाउस के कमरों को भी सील कर दिया है।  दरअसल, मंगलवार को सदर थाना क्षेत्र के रिफ्यूजी कॉलोनी में स्थित गेस्ट हाउस में पुलिस ने सूचना के आधार पर छापेमारी की. इस दौरान पुलिस ने एक महिला और 6 पुरुषों को हिरासत में लिया है. साथ ही गेस्ट हाउस के कमरे से पुलिस ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामान भी बरामद किया।  इस छापेमारी में सदर एसडीपीओ आलोक कुमार, हेडक्वार्टर डीएसपी कमलेश्वरी प्रसाद सिंह, सदर थाना अध्यक्ष अजय पासवान और एसटीएफ पुलिस शामिल थे. आरोप है कि इस गेस्ट हाउस में काफी दिनों से देह व्यापार चल रहा था. गेस्ट हाउस का संचालक सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक लड़कियों और महिलाओं को बुलाकर रखता था. वो कस्टमर्स से मोटी रकम वसूलता था. ऐसे में सवाल यह भी है कि बीच मार्केट इस तरह का अनैतिक काम कैसे चलता रहा? इस मामले को लेकर मौके पर पहुंचे सदर एसडीपीओ आलोक कुमार ने बताया कि सदर थाना अध्यक्ष को सूचना मिली थी कि रिफ्यूजी कॉलोनी स्थित एक मकान में अनैतिक देह व्यापार हो रहा है. सूचना मिलते ही सदर थाना अध्यक्ष पुलिस फोर्स के साथ वहां पहुंचे और जायजा लिया. इसी के साथ FSL टीम को भी मौके पर बुला लिया गया, जिसने वहां से जरूरी सबूत जुटाए।  इस पूरे मामले को लेकर केस दर्ज कर गेस्ट हाउस संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. एसडीपीओ ने कहा कि छापेमारी के दौरान मौके से एक महिला और 6 पुरुषों को हिरासत में लिया गया है, साथ ही सभी कमरों को भी सील कर दिया गया है।   

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को बड़ा सम्मान: राष्ट्रपति मुर्मू ने परिवार को सौंपा पद्म भूषण

रांची झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. मंगलवार को संसद भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन को यह सम्मान प्रदान किया. इस अवसर पर गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, अंजनी सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे. शिबू सोरेन को यह सम्मान आदिवासी समाज, झारखंड आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान के लिए दिया गया है. नेमरा गांव से शुरू हुआ था संघर्ष का सफर शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को वर्तमान रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था. बचपन में उनका नाम शिवलाल था, लेकिन बाद में वे शिबू सोरेन के नाम से देशभर में पहचान बनाने लगे. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा नेमरा गांव के स्कूल और बाद में गोला हाई स्कूल से प्राप्त की. उनके पिता सोबरन सोरेन शिक्षक होने के साथ गांधीवादी विचारधारा के समर्थक थे. 27 नवंबर 1957 को महाजनों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई. जमीन कब्जे और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हुई इस घटना ने किशोरावस्था में ही शिबू सोरेन के जीवन की दिशा बदल दी. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना. महाजनों के खिलाफ आंदोलन से मिली पहचान युवा अवस्था में उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित करने का काम शुरू किया. उन्होंने संताल नवयुवक संघ और सोनोत संताल समाज का गठन किया. इसके बाद धनकटनी आंदोलन चलाकर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी. गोला, बोकारो, जैनामोड़ और टुंडी क्षेत्र में आंदोलन को मजबूत करने के दौरान उनकी मुलाकात विनोद बिहारी महतो से हुई. बाद में पारसनाथ की पहाड़ियों और टुंडी क्षेत्र को उन्होंने अपने आंदोलन का केंद्र बनाया. टुंडी में बनाई सामाजिक व्यवस्था की नई मिसाल टुंडी और आसपास के इलाकों में शिबू सोरेन ने सामूहिक खेती, पशुपालन और रात्रि पाठशालाओं की शुरुआत कर ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया. उस समय क्षेत्र में उनकी एक तरह की समानांतर सामाजिक व्यवस्था भी चलती थी, जहां स्थानीय विवादों का निपटारा किया जाता था. इन्हीं प्रयासों के कारण आदिवासी और मूलवासी समाज में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई और वे “दिशोम गुरु” के नाम से पहचाने जाने लगे. झारखंड आंदोलन को दी नई दिशा साल 1973 में शिबू सोरेन ने विनोद बिहारी महतो और एके राय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना की. पार्टी में विनोद बिहारी महतो अध्यक्ष और शिबू सोरेन महासचिव बने. अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले वर्षों में व्यापक जन आंदोलन में बदल गया. आपातकाल के दौरान वर्ष 1975 में उन्हें जेल भी जाना पड़ा. 1977 में उन्होंने टुंडी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर 1980 में वे पहली बार दुमका से लोकसभा सांसद चुने गए. इसके बाद कई बार संसद पहुंचे और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. 1987 में निर्मल महतो की हत्या के बाद उन्होंने झामुमो की कमान संभाली और पार्टी अध्यक्ष बने. 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ, लेकिन वे पहले मुख्यमंत्री नहीं बन सके. हालांकि बाद के वर्षों में उन्होंने तीन बार राज्य की कमान संभाली.     2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर सके.     2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने.     2009 में तमाड़ विधानसभा उपचुनाव हारने के बाद इस्तीफा देना पड़ा.     दिसंबर 2009 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने.     वर्ष 2010 में उनकी सरकार गिर गई. मोदी लहर में भी बरकरार रखा जनाधार 2014 के लोकसभा चुनाव में देशभर में भाजपा और नरेंद्र मोदी की लहर के बावजूद शिबू सोरेन दुमका से सांसद चुने गए. 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया और वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय बने रहे. 15 अप्रैल 2025 को झामुमो के महाधिवेशन में हेमंत सोरेन को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई. लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया. उनके निधन से झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन के एक युग का अंत माना गया. संघर्ष से सम्मान तक की यात्रा शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने दशकों तक आदिवासियों, वंचितों और झारखंड की पहचान के लिए संघर्ष किया. यही कारण है कि उनके समर्थक उन्हें केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि “दिशोम गुरु” के रूप में याद करते हैं. अब मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान के साथ उनके सार्वजनिक जीवन और योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी औपचारिक मान्यता मिली है. नेमरा गांव के एक साधारण परिवार से निकलकर देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान तक पहुंचने की यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र और जन आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज रहेगी.