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Bihar Social Security Pension: लाभार्थियों के खाते में आए ₹84 करोड़, अब तय तारीख पर होगी भुगतान प्रक्रिया

पटना. सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 77265 लाभुकों के बैंक खाते में भेजे गए 84 करोड़ 99 लाख 24 हजार 625 रुपये भेज दिए गए हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लाभुकों को मई माह की पेंशन राशि प्रदान की। यह राशि उन्होंने दिल्ली में बिहार भवन से डीबीटी के जरिए भेजी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर सम्राट बुधवार पूर्वाह्न दिल्ली गए हैं। पहले वे मंगलवार रात को प्रस्थान करने वाले थे, लेकिन कामकाज की व्यस्तता के कारण पटना से निकल नहीं पाए। बुधवार को दिल्ली में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में सम्राट भी सहभागी रहेंगे। बैठक का उपलक्ष्य मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर जन-जन तक उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार है।  पेंशन भुगतान का समय अनियमित उल्लेखनीय है कि बिहार में उल्लेखनीय है कि बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के एक करोड़ 21 लाख चार हजार 939 लाभुक हैं। इस योजना के अंतर्गत प्रति लाभुक 1100 रुपये दिए जाते हैं। पहले पेंशन भुगतान का समय अनियमित था।  अब हर महीने 10 तारीख को पेंशन का भुगतान इस कारण बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की आर्थिक समस्याओं का  समय से समाधान नहीं हो पा रहा था। अंतत: मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया कि अब प्रत्येक माह की 10 तारीख को लाभुकों के खाते में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि भेज दी जाएगी। उस पर अमल शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद तबकों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना हमारी सरकार का दायित्व है। हमने पिछली सरकार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 400 रूपये से बढ़ाकर सीधे 1100 रुपये प्रति माह किया था। हम 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों, सभी विधवाओं एवं निःशक्तजनों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशनों का लाभ देते है।  सभी लाभुकों को यह राशि हर माह निश्चित समय पर प्राप्त हो इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने के सुअवसर पर इन योजनाओं के 94 लाख से अधिक लाभुकों को 1100 रुपये प्रति माह की दर से आज हम लगभग 1100 करोड़ रुपये की राशि उनके खाते में भेज रहे है।  जरूरतमंद लोगों की सेवा करते रहने के लिए संकल्पित उन्होंने कहा कि आगे हर महीने की 10 तारीख को हमारी सरकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभुकों के खाते में यह राशि अंतरित करती रहेगी। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के लोक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सरकार सभी जरूरतमंद लोगों की सेवा करते रहने के लिए कृतसंकल्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग जिन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वे लाभ प्राप्त करने के लिए शीघ्र आवेदन करें। साथ ही आधार कार्ड लिंक नहीं होने के कारण पेंशन से वंचित लोग भी जल्द अपना आधार लिंक कराकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ प्राप्त करें। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, स्थानिक आयुक्त मनोज कुमार उपस्थित थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवास, सभी जिलों के जिलाधिकारी एवं लाभार्थीगण जुड़े हुए थे।

बोकारो में नई व्यवस्था लागू, कस्टमर आईडी से आसान होगा पार्सल ट्रैकिंग और बुकिंग

 बोकारो  डाक विभाग ने पार्सल बुकिंग की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कस्टमर आईडी जारी करने का निर्णय लिया है। यह कदम ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करने और पार्सल बुकिंग के अनुभव को सुगम बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। कस्टमर आईडी के माध्यम से ग्राहक अपनी पार्सल बुकिंग की स्थिति को आसानी से ट्रैक कर सकेंगे। इसके अलावा, यह आईडी ग्राहकों को विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाने में भी मदद करेगी। डाक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह पहल ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी पार्सल सेवाओं का उपयोग कर सकें। इस नई प्रणाली के तहत, ग्राहक को अपनी पहचान के लिए एक विशेष आईडी प्रदान की जाएगी, जिसे वे अपनी पार्सल बुकिंग के समय उपयोग कर सकेंगे। यह आईडी न केवल बुकिंग प्रक्रिया को तेज करेगी, बल्कि ग्राहकों को अपनी पार्सल की स्थिति की जानकारी भी समय पर उपलब्ध कराएगी। डाक विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कस्टमर आईडी सभी ग्राहकों के लिए अनिवार्य होगी, और इसे प्राप्त करने के लिए ग्राहकों को अपने व्यक्तिगत विवरण प्रदान करने होंगे। विभाग का मानना है कि इस पहल से पार्सल बुकिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों का विश्वास भी मजबूत होगा। इस नई प्रणाली का कार्यान्वयन जल्द ही शुरू किया जाएगा, जिससे ग्राहकों को बेहतर और सुविधाजनक सेवा मिल सकेगी। डाक विभाग ने सभी ग्राहकों से अपील की है कि वे इस नई सुविधा का लाभ उठाएं और अपनी पार्सल बुकिंग को और अधिक सरल बनाएं।

धनबाद होमगार्ड भर्ती का इंतजार खत्म! जिला प्रशासन ने जारी किया रिजल्ट, यहां देखें नाम

धनबाद. झारखंड गृह रक्षा वाहिनी, धनबाद के तत्वावधान में संचालित गृह रक्षकों की नव-नामांकन प्रक्रिया को रिकॉर्ड समय में पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और कदाचार मुक्त वातावरण में संपन्न कर लिया गया है। इसकी मेधा सूची जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर मंगलवार को जारी कर दिया गया है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत धनबाद जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के योग्य महिला व पुरुष अभ्यर्थियों के चयन की औपबंधिक मेधा सूची को सार्वजनिक कर दिया गया है। सुरक्षा और निष्पक्षता के पुख्ता इंतजाम इस बार की संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया तकनीकी सुगमता और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के कारण विशेष चर्चा में रही है। आयोजित शारीरिक जांच परीक्षा तथा हिन्दी लेखन क्षमता परीक्षा में हजारों अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और निष्पक्षता के ऐसे पुख्ता इंतजाम किए गए थे कि संपूर्ण बहाली के दौरान कदाचार या किसी भी प्रकार की अनियमितता की एक भी घटना सामने नहीं आई। यह पारदर्शी चयन प्रणाली का एक नया कीर्तिमान है। कनीकी दक्षता जांच परीक्षा का आयोजन  शारीरिक एवं लिखित परीक्षा में सफल तकनीकी रूप से दक्ष अभ्यर्थियों की जांच हेतु विषय विशेषज्ञों के विशेष दल द्वारा 'तकनीकी दक्षता जाँच परीक्षा' का आयोजन किया गया था। पूर्व में प्रकाशित सूची की गहन समीक्षा एवं संशोधन करते हुए, सभी अनिवार्य योग्यताओं व अर्हताओं को पूर्ण करने वाले ग्रामीण (प्रखण्डवार) एवं शहरी (तकनीकी/गैर तकनीकी) अभ्यर्थियों की अंतिम संशोधित औपबंधिक मेधा सूची पारदर्शी तरीके से पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। उपायुक्त आदित्य रंजन ने इस सफल, त्वरित और स्वच्छ बहाली प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, पुलिस बल और शांतिपूर्ण ढंग से परीक्षा में सम्मिलित होने वाले सभी अभ्यर्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। इन कारणों से रद होगी उम्मीदवारी यह पूर्णतः एक औपबंधिक चयन सूची है। यदि किसी भी स्तर पर चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में कोई त्रुटि पाई जाती है, अथवा चरित्र सत्यापन एवं चिकित्सीय जाँच में अभ्यर्थी अयोग्य पाए जाते हैं, तो संबंधित अभ्यर्थी की उम्मीदवारी किसी भी स्तर पर तत्काल प्रभाव से रद कर दी जाएगी। इस लिंक पर मिलेगी मेधा सूची: आधिकारिक वेबसाइट www.dhanbad.nic.in पर https://cdn.s3waas.gov.in/s337f0e884fbad9667e38940169d0a3c95/uploads/17809410199791.pdf

जंगलों की नीलामी नहीं, फिर भी धड़ल्ले से चल रहा केंदुपत्ता व्यापार, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

लातेहार  हेरहंज व बारियातू के जंगल इन दिनों एक अजीब कहानी कह रहे हैं। पेड़ों की डालियों से टूटकर गिरते केंदुपत्ते मानो अपनी ही बेबसी का बयान कर रहे हों। जिन जंगलों की हरियाली कभी वन विभाग के राजस्व का आधार हुआ करती थी, वहां आज माफियाओं का साया गहराता दिख रहा है। सुरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध रूप से केंदुपत्ता तुड़वाने और उसकी खरीद-बिक्री का खेल इस कदर फैल चुका है कि जंगलों से अधिक चहल-पहल अब गांवों के खलिहानों में दिखाई दे रही है। खुलेआम अवैध खरीद केंद्र संचालित बिदीर, डोंरांग, इचाक, खीराखाड़, करंदाग समेत कई गांवों में खुलेआम अवैध खरीद केंद्र संचालित होने की चर्चा है। यहां सुबह से शाम तक मजदूर जंगलों से पत्ते ढोते हैं और बदले में उन्हें उनकी मेहनत की कीमत से कहीं कम राशि थमा दी जाती है। पसीना ग्रामीणों का बहता है, जबकि मुनाफे की हरियाली किसी और की झोली में चली जाती है। सूत्रों के अनुसार इस कारोबार की डोर आसपास के कुछ केंदुपत्ता ठेकेदारों से जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों को आगे कर खरीदारी करवाई जा रही है। पत्तों को भरने के लिए बोरे उपलब्ध कराए जा रहे हैं और रात ढलते ही ट्रैक्टरों तथा अन्य वाहनों पर लादकर इन्हें दूसरे स्थानों तक पहुंचा दिया जाता है। कई जंगलों की नहीं हुई नीलामी दिन में जंगलों में तुड़ाई और रात में परिवहन का यह सिलसिला चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस वर्ष हेरहंज व बारियातू क्षेत्र के कई जंगलों की नीलामी ही नहीं हुई। नीलामी नहीं होने से वन विभाग को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद जंगलों से केंदुपत्ता निकल रहा है, खलिहान भर रहे हैं और कारोबार भी चल रहा है।   लगातार बढ़ रहे अवैध हाथ यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच गूंज रहा है कि जब नीलामी नहीं हुई तो केंदू पत्ता आखिर किस रास्ते से बाजार तक पहुंच रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और क्षेत्र की पहचान हैं। ऐसे में यदि वन संपदा पर अवैध हाथ लगातार बढ़ते रहे तो नुकसान केवल सरकारी राजस्व का नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की विरासत भी दांव पर लग जाएगी। फिलहाल जंगलों की खामोशी बहुत कुछ कह रही है व लोग यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि वन विभाग इस खेल पर कब और कैसी लगाम लगाता है।

निवेशकों के लिए बड़ी राहत: बिहार में सिंगल विंडो सिस्टम से तेज होगी मंजूरी प्रक्रिया

पटना  बिहार में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को तेज और निवेशकों के लिए अधिक सरल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को कहा कि अब बिहार में नए उद्योग लगाने के लिए जरूरी स्वीकृतियां मात्र 30 दिनों के भीतर प्रदान की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि बिहार ने औद्योगिक प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सिंगल विंडो स‍िस्‍टम की व्‍यवस्‍था उन्होंने बताया कि निवेशकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने तथा उद्योग स्थापना की प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से राज्य में सिंगल विंडो प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है। इसके माध्यम से विभिन्न विभागों से मिलने वाली अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया एक ही मंच से संचालित होगी। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर मंजूरी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, नई व्यवस्था से विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और अनुमोदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनेगी। दूर होंगी प्रशासनिक जटिलताएं साथ ही प्रशासनिक जटिलताओं को भी काफी हद तक समाप्त किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे औद्योगिक परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में मदद मिलेगी और निवेशकों का भरोसा बिहार में और मजबूत होगा। सम्राट चौधरी ने दावा किया कि राज्य सरकार के इस फैसले से बिहार में निवेश को नई रफ्तार मिलेगी। नए उद्योग स्थापित होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों के साथ बिहार अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से अग्रसर है।  

बकायेदारों पर निगम की बड़ी कार्रवाई की तैयारी, मुंगेर में 72 घंटे का अल्टीमेटम जारी

मुंगेर. वर्षों से होल्डिंग टैक्स और यूजर चार्ज बकाया रखने वाले बड़े बकायेदारों पर अब नगर निगम ने सख्ती शुरू कर दी है। नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता के निर्देश पर निगम प्रशासन ने अंतिम नोटिस जारी करते हुए तीन दिनों के भीतर बकाया राशि जमा करने का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर संपत्ति सील करने से लेकर कुर्की-जब्ती, चल-अचल संपत्ति की बिक्री और बैंक खाते फ्रीज करने तक की कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम द्वारा जारी नोटिस के अनुसार तोपखाना बाजार स्थित नेशनल अस्पताल व मु. गुलाम मोईन उद्दीन सहित संबंधित पक्षों पर वर्ष 2011-12 से 2026-27 तक का 20.76 लाख रुपये होल्डिंग टैक्स बकाया है। इसके अलावा 36 हजार रुपये यूजर चार्ज भी पेंडिंग है। इस प्रकार कुल बकाया राशि 21.12 लाख रुपये पहुंच गई है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तीन दिनों के भीतर राशि जमा नहीं होने पर 12 जून से बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 158 के तहत विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। साथ ही जिन्होंने नोटिस नहीं लिया है उन्हें डाक से भी भेजा गया है। चस्पा भी कर दिया गया है। होटल संचालकों को भी चेतावनी वार्ड संख्या-26 स्थित होटल मुरारी पैलेस के स्वामी रामेश्वर बजाज एवं ज्वाला बजाज को भी अंतिम नोटिस भेजा गया है। होटल पर वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक 5.18 लाख रुपये होल्डिंग टैक्स तथा 12 हजार रुपये यूजर चार्ज बकाया है। कुल मिलाकर 5.30 लाख रुपये की देनदारी बताई गई है। निगम ने होटल प्रबंधन को भी जल्द से जल्द बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया है। अन्यथा उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम सूत्रों के अनुसार, दो अन्य शैक्षणिक संस्थानों को भी बकाया कर भुगतान के लिए नोटिस जारी किया गया है। निगम प्रशासन अब बड़े बकायेदारों की सूची तैयार कर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। राजस्व बढ़ाने के लिए तेज हुआ अभियान नगर निगम का कहना है कि शहर के विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं के संचालन के लिए कर संग्रह बेहद जरूरी है। ऐसे में लंबे समय से बकाया रखने वालों के खिलाफ अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। निगम की इस कार्रवाई से बड़े बकायेदारों में हड़कंप मच गया है। वहीं, प्रशासन का दावा है कि अभियान से राजस्व वसूली में तेजी आएगी और वर्षों से पेंडिंग करोड़ों रुपये की राशि वसूलने का रास्ता साफ होगा।

पटना केस में नया मोड़, खान सर की कानूनी टीम FIR क्वैशिंग पर कर रही विचार

 पटना पटना कोचिंग विवाद से जुड़े मामले में शिक्षक और यूट्यूबर फैसल खान (खान सर) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि उनकी कानूनी टीम अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। इस संभावित कदम ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। कानूनी और राजनीतिक गलियारों में भी इस पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ‘FIR खत्म, तो खत्म होगा पूरा विवाद?’ हाईकोर्ट में दांव लगाने की तैयारी जानकारी के अनुसार, खान सर की ओर से FIR Quashing Petition दाखिल करने पर विचार किया जा रहा है। इस याचिका के जरिए हाईकोर्ट से एफआईआर रद करने की मांग की जाती है। कानूनी टीम मामले के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन कर रही है। यदि याचिका दायर होती है तो यह केस का सबसे अहम मोड़ साबित हो सकता है। कोर्ट पहले याचिका की वैधता और आधारों की जांच करेगा। इसके बाद आगे की सुनवाई का रास्ता तय होगा। कब रद होती है FIR? जानिए हाईकोर्ट के पास कितनी बड़ी ताकत कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, हर एफआईआर को रद नहीं किया जा सकता। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में हाईकोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है। यदि मामला झूठा या निराधार प्रतीत हो तो राहत मिल सकती है। कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग की स्थिति भी अहम आधार मानी जाती है। समझौता होने या गंभीर अपराध के तत्व न मिलने पर भी सुनवाई संभव है। अंतिम फैसला तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही होता है। बढ़ता दबाव या बड़ी रणनीति? हर कदम पर टिकी हैं सबकी निगाहें कोचिंग विवाद पहले से ही चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब हाईकोर्ट जाने की खबर ने उत्सुकता और बढ़ा दी है। कई कानूनी जानकार इसे बचाव पक्ष की बड़ी रणनीति मान रहे हैं। अगर याचिका दाखिल होती है तो कई नए कानूनी सवाल उठ सकते हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियां भी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में मामला और दिलचस्प हो सकता है। खान सर को बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर फिलहाल लगी ब्रेक इस बीच खान सर को अदालत से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले से उन्हें तत्काल कानूनी सुरक्षा मिल गई है। पिछले कुछ दिनों से पुलिस कार्रवाई की चर्चाएं तेज थीं। इसी बीच अग्रिम जमानत की मांग को अदालत ने स्वीकार किया। फिलहाल अगली सुनवाई तक राहत बरकरार रहेगी। अब सबकी नजर हाईकोर्ट पर, क्या बदल जाएगी केस की पूरी कहानी? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या FIR रद कराने की याचिका वास्तव में दाखिल होगी। यदि ऐसा होता है तो हाईकोर्ट के सामने पूरे मामले की कानूनी जांच होगी। याचिका मंजूर होने पर केस की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। वहीं, राहत न मिलने पर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल हर पक्ष अगली कानूनी चाल का इंतजार कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी ज्यादा चर्चा में रह सकता है।

इतिहास की सच्चाई: जेल में बिरसा मुंडा की मौत और अंतिम संस्कार से जुड़े विवादित दावे

 रांची  कोकर के डिस्टिलरी पुल के पास आज के दिन ही नौ जून, 1900 को धरती आबा का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। तब, यह क्षेत्र काफी सुनसान था। जंगल था। एक नदी बहती थी, जो अब विकास की भेंट चढ़ गई। 125 साल पहले 25 साल के युवा बिरसा से ब्रिटिश सरकार डरी-सहमी थी। सुबह-सुबह बिरसा की कथित हैजे से मौत हो गई। जेल में बिरसा की हालत दो दिन पहले खराब हो गई थी। नौ जून को स्थिति और खराब हो गई। नौ बजते-बजते नाड़ी बंद हो गई। डॉक्टरों ने नाड़ी देखी और सरकार इस अप्रत्याशित घटना से सकते में आ गई। 25 साल के युवा से ब्रिटिश सरकार डरी ऐसा पहली बार हुआ कि 25 साल के युवा से ब्रिटिश सरकार डरी हुई थी। जेल के अंदर दिन भर कवायद जारी रहा। शाम होते ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। शव को ब्रिटिश सरकार ने परिवार को सौंपना उचित नहीं समझा। रांची में 1850 के आसपास स्थापित गोस्सनर चर्च बिरसा के आंदोलन को शक की निगाह से देखता था। बिरसा मुंडा ने मतांतरण के खिलाफ भी आंदोलन चलाया था। इसलिए इस मिशन की पत्रिका घरबंधु ने 15 जून के अंक में खबर छपी। शीर्षक था-दाऊद बिरसा मर गया। जब बिरसा का बपतिस्मा हुआ था तब यही नाम दाउद ही मिला था, लेकिन जल्द ही वह इस धर्म से दूर, खुद ही एक अलग धर्म बिरसाइत की स्थापना की थी। पत्रिका ने इसकी सूचना दी 9 जून को दाऊद बिरसा जेल में हैजे से मर गया और उसी दिन में डोम लोग उसको नदी तक ले गये और जेलर बाबू के सामने जलाया। थोड़े दिनों के पीछे हाकिम का बिचारने उसको अपने पास बुलाया और उसका बिचार किया। उस बिचार की निंदा उसने की और अपने मुक्तिदाता को छोड़ दिया था जो कहता है कि स्वर्ग और पृथ्वी का समस्त अधिकार मुझे दिया गया है। केवल दो लोग हैजे से पकड़े गए घरबंधु इस मौत पर अचंभित होता है। आगे लिखता है, बड़े अचंभे की बात है कि जेलखाने के जिस आंगन में बिरसा और उसके निज चेले अपनी-अपनी कोठरी में रहते थे केवल दो जन हैजे से पकड़े गए हैं जो कचहरी में पहुंचाए जाते रहते थे अर्थात बिरसा और बराया मुंडा। वही पहले मर गया। हैजे से निधन पर घर बंधु संदेह भी करता है। आगे लिखता है-वे सब एक खाना खाते थे और केवल वे ही दो पकड़े गये। निश्चय उनको चुप कराने की लालसा उन लोगों की रही जिन्होंने अपनेको छिपाके बिरसाको उलगुलान करने के लिये उस्काया और निश्चय वे बहुत डरते थे कि बिरसा इजहार देनेके समय में उस उलगुलान का भेद खोलेगा। कचहरी में बहुत लोग बिरसा के आसपास जमा हुए और उसका गुप्तमें तमाकू वा दूसरी चीजके साथ विष देने का बहुत अवसर मिलता था ऐसा हुआ कि नहीं हुआ सो ईश्वर जानता है। घरबंधु में प्रकाशित होती थी खबरें बिरसा मुंडा के आंदोलन की खबरें घरबंधु में प्रकाशित होती रहती थीं। एक तरह से आंदोलन पर इस पाक्षिक पत्रिका की नजर भी रहती थी। 1900 अप्रैल के अंक में बिरसा भगवान का गोलमाल शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई। इसमें सरवदा चर्चा पर हुए हमले में दोषी के दंड का जिक्र है। खबर है- जो उपद्रवी जेल में हें उनका इजहार बराबर लिया जाता रहता है। 27वीं अप्रैल में कातिंगकेलके परौ मुन्डा का बिचार हुआ जिसने सरवदा के रोमन पादरी पर तीर चलाया जिससे वह घायल किया गया, वह जीवन भर दायमुल भेजा जाता है। और पांडु मुन्डा को घर जलाने के कारण सात बरस जेल हुआ। एक खबर गया मुंडा को लेकर भी प्रकाशित हुई थी। इस तरह धार्मिक पत्रिका घर बंधु में समय-समय पर इस तरह की खबरें भी ठीक से स्थान पाती थीं। बिरसा मुंडा के साथियों ने सरवदा चर्च पर क्रिसमस की पूर्व संध्या पर हमला किया था, जिसमें फादर हाफमैन भी घायल हो गए थे। बाद में फादर ने जमीन सुरक्षा को लेकर सीएनटी एक्ट का ड्राफ्ट तैयार किया था और 16 खंडों में इनसाइक्लोपीडिया आफ मुंडारिका लिखी। हाफमैन बाद में जर्मनी अपने देश वापस चले गए थे। बिरसा जेल अब बन गया स्मारक रांची जेल की स्थापना 1890 के बाद हुई थी। बिरसा के बलिदान के बाद इस जेल का नाम धरती आबा के नाम से कर दिया गया। पहली बार धरती आबा की बड़े स्तर पर चर्चा तब हुई जब रांची से 40 किमी दूर रामगढ़ में कांग्रेस का महाधिवेशन 1940 के मार्च में हुआ था। तब गांधी, नेहरू, पटेल से लेर मौलाना आजाद, बाबू राजेंद्र प्रसाद आदि सभी बड़े-छोटे नेता आए थे। उस समय बिरसा मुंडा द्वार बना था और उस समय प्रकाशित स्मारिक में बिरसा मुंडा पर एक लेख भी अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ था। लंबे समय बाद, झारखंड बनने के बाद जब नया जेल बना तो इसे स्मारक व पार्क में बदल दिया गया। जिस कक्ष में बिरसा मुंडा बंदी थे, उसमें एक प्रतिमा लगा दी गई है। इसके बाद जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया था, वहां भी एक स्मारक बना दिया गया है। कुल पांच साल तक चला आंदोलन 15 नवंबर 1875 को खूंटी जिले के उलिहातू में जन्मे धरती आबा का आंदोलन 1895 से लेकर 1900 तक चला। यानी, 20 साल की उम्र में उन्होंने बिगुल फूंक दिया। हिंदू-ईसाई धर्म का ज्ञान भी प्राप्त किया और एक नया धर्म बिरसाइत धर्म चलाया। पांच साल तक चले इस आंदोलन के कारण ब्रिटिश सरकार को आदिवासी जमीन के लिए एक नया कानून बनाना पड़ा। 1908 में अस्तित्व में आया यह कानून आज भी जारी है। बिरसा ने कई समाज सुधार के काम भी किए। इसलिए उसे पैगंबर भी कहा गया। मसीहा भी कहा गया। ब्रिटिश लेखक ने ईसा मसीह से भी तुलना की।

पतरातू यार्ड में मॉक ड्रिल: आपात स्थिति में यात्रियों को बचाने का किया गया अभ्यास

धनबाद  रेल दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को धनबाद मंडल के पतरातू यार्ड में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. यह मॉक ड्रिल वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त, धनबाद के निर्देशानुसार निरीक्षक प्रभारी पतरातू के नेतृत्व में आयोजित की गई. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेल दुर्घटना जैसी आपात परिस्थितियों में विभिन्न विभागों की तैयारियों, समन्वय क्षमता तथा राहत-बचाव कार्यों की दक्षता का आकलन करना था. रेल दुर्घटना मॉक ड्रिल का आयोजन मॉक ड्रिल के दौरान पतरातू यार्ड में खड़ी स्टेबल रेक को दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन के रूप में चिन्हित किया गया. जैसे ही काल्पनिक दुर्घटना की सूचना प्रसारित हुई, रेलवे सुरक्षा बल, इंजीनियरिंग विभाग और चिकित्सा विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय होकर मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया. यात्रियों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास अभ्यास के दौरान यह प्रदर्शित किया गया कि आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित कैसे बाहर निकाला जाए, घटनास्थल की घेराबंदी और सुरक्षा व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाए और यात्रियों के सामान की सुरक्षा किस प्रकार की जाए. घायलों के उपचार और चिकित्सा व्यवस्था ड्रिल में घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार देने, गंभीर रूप से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और अस्पताल भेजने से पहले आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने का अभ्यास किया गया. चिकित्सा टीम ने मौके पर ही अस्पताल पूर्व चिकित्सा की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया. आपात तैयारी की जांच बचाव दलों के बीच समन्वय, कम्युनिकेशन सिस्टम और आपातकालीन संसाधनों के उपयोग की भी जांच की गई. अधिकारियों ने बताया कि रेल दुर्घटना के शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए सभी विभागों का सतर्क और प्रशिक्षित रहना जरूरी है. अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी इस मॉक ड्रिल में आरपीएफ निरीक्षक अजय कुमार सिंह, उप निरीक्षक सोनू कुमार, उप निरीक्षक प्रवीण कुमार सहित आरपीएफ के जवानों ने सक्रिय भूमिका निभाई. वहीं वरीय अनुभाग अभियंता (रेल पथ) शशि कुमार अपने विभागीय कर्मचारियों के साथ उपस्थित थे. चिकित्सा विभाग की ओर से डॉ अभिषेक कुमार और उनकी टीम ने घायलों के उपचार और चिकित्सकीय सहायता संबंधी प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया. इसके अलावा, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी भाग लेकर आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखा.

पटना कोचिंग हिंसा केस: कोर्ट ने रौशन आनंद को नहीं दी राहत, खान सर को फिलहाल सुरक्षा

 पटना खान सर की कोचिंग सेंटर पर हुए हमले, मारपीट और तोड़फोड़ से जुड़े केस में आरोपी ज्ञान बिंदू जी.एस. एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद को कोर्ट से झटका लगा है। पटना सिविल कोर्ट ने रौशन आनंद की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। नियमित जमानत याचिका खारिज होने का मतलब यह है कि अभी रौशन आनंद को जेल भी रहना होगा। 2 जून को पटना स्थित खान ग्लोबल इंस्टीच्यूट में 15-20 लोगों के एक समूह ने बिहार की राजधानी पटना स्थित खान ग्लोबल स्टडीज संस्थान में कथित तौर पर तोड़फोड़ की थी और परिसर पर पथराव किया था। इस मामले में दर्ज केस के अनुसार अभियुक्तों पर खान ग्लोबल स्टडीज में प्रवेश कर एक सुरक्षाकर्मी को खींचकर बाहर सड़क पर लाने और उसके साथ मारपीट कर जख्मी कर देने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने रौशन आनंद, अभिषेक कुमार और गौरव कुमार को गिरफ्तार कर 03 जून 2026 को को जेल भेजा था। मामले की प्राथमिकी कदमकुआं थाना में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत कांड संख्या 410/26 के रूप में दर्ज की गई है। ज्ञान बिंदू जी.एस एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद के पक्ष में बहस करते हुए उनके वकील राघव कुमार ने अदालत में कहा था कि इस मामले में धारा 109 लागू नहीं होती। उन्होंने तर्क दिया था कि पीड़ित को लगी चोटें साधारण हैं और मामले में दर्ज सभी धाराएं जमानती हैं। सोमवार को उनके वकील ने अदालत में अपने मुवक्किल को निर्दोष बताया और उन पर लगाये गये आरोपों को निराधार बताते हुए जमानत पर छोड़े जाने की प्रार्थना की थी। हालांकि, अदालत में रौशन आनंद के वकीलों की तर्क काम ना आई और ज्ञान बिंदु के मालिक रौशन आनंद को बेल नहीं मिली। खान सर को गिरफ्तारी से फिलहाल राहत इधर खान ग्लोबल इंस्टीच्यूट के मालिक फैजल खान उर्फ खान सर को मंगलवार को अदालत की तरफ से फिलहाल राहत मिल गई है। अदालत ने खान सर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाई है। दंडात्मक कार्रवाई पर रोक का मतलब यह हुआ कि फिलहाल पुलिस उनपर कोई ऐक्शन नहीं लेगी और उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी। सोमवार को ही खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दिन अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को अदालत ने अपने आदेश में खान सर को फिलहाल राहत दी है। छात्रों ने सड़क पर किया था प्रदर्शन पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में पिछले 02 जून को खान सर के कोचिंग सेंटर पर हमले, मारपीट, तोड़फोड़ और फायरिंग मामले में ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रोशन आनंद और उनके दो सहयोगियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। रौशन आनंद सर को गिरफ्तार किए जाने के बाद कई छात्र उनके समर्थन में उतर आए थे। छात्रों का कहना था कि इस मामले में ज्ञान बिंदु कोचिंग के मालिक रोशन आनंद को फंसाया जा रहा है और वह पूरी तरह निर्दोष हैं। छात्रों ने कहा था कि यह अफवाह गलत है कि खान सर की फीस उनके प्रतिद्वंद्वियों से कम है। उनका दावा था किज्ञान बिंदु के ज्यादातर ऑफ लाईन कोर्सेस की कीमत खान ग्लोबल के मुकाबले कम हैं। छात्रों ने कहा था कि यह साबित होने के बाद कि फायरिंग खान सर के गार्डों ने की थी, प्रशासन को रोशन आनंद को छोड़ देना चाहिए।