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मझिआंव मोड़ पर गंदगी फैलाने वालों पर सख्ती, एसडीएम ने शुरू की कार्रवाई

गढ़वा झारखंड में गढ़वा शहर के व्यस्त मझिआंव मोड़ क्षेत्र में सड़क किनारे खुले में मुर्गा काटने और गंदगी फैलाने वाले कारोबारियों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा हंटर चलाया है. सार्वजनिक स्थलों पर मांस, खून, हड्डी और पंख बिखेरकर स्वच्छता को प्रभावित करने संबंधी लगातार मिल रही जनशिकायतों के बाद, सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने सख्त रुख अख्तियार किया है. अवैध मांस दुकानों पर प्रशासन का एक्शन एसडीएम ने मझिआंव मोड़ पर अवैध रूप से दुकान चलाने वाले पांच दुकान मालिकों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत ‘पब्लिक न्यूसेंस’ (जनता को परेशानी पहुंचाना) की कार्रवाई शुरू कर दी है. इसके साथ ही इस मामले में ढिलाई बरतने को लेकर गढ़वा नगर परिषद से भी शो-कॉज की गई है. एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि इन अवैध मांस कारोबारियों को पूर्व में भी कई बार हिदायत और चेतावनी दी जा चुकी थी. इसके अलावा, नगर परिषद को भी लिखित रूप से आदेश दिया गया था कि वे नियमित निगरानी रखें और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित कराएं. इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और आम जनता की परेशानियां बढ़ती गईं, जिसके बाद प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा. पांच दुकानदारों को नोटिस, अन्य इलाकों में भी होगी कार्रवाई बताया गया कि पहले चरण में मझिआंव मोड़ के पास नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले जिन पांच दुकानदारों/मालिकों को नोटिस जारी कर पक्षकार बनाया गया है, उसमें अजय सिंह (पिता- सूर्यदेव सिंह),अनुरुल हक (पिता- ताजुद्दीन खां),फैजान खान (पिता- लुहू तारीक),इब्राहिम खान (पिता- उस्मान खान),कमलेश अग्रवाल का नाम शामिल हैं . एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि पशु-पक्षियों का वध करना और उनके अपशिष्ट को ऐसे ही फेंक देना आम लोगों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ खिलवाड़ है. वहां से गुजरने वाले राहगीरों को भयंकर बदबू और असहजता का सामना करना पड़ता है, जो सीधे तौर पर ‘पब्लिक न्यूसेंस’ का गंभीर मामला है. ऐसी ही सख्त कार्रवाई अनुमंडल के अन्य इलाकों में भी चलाई जाएगी. गंदगी और बदबू पर एसडीएम सख्त एसडीएम ने कहा कि शहर में स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल देना प्रशासन की प्राथमिकता है. अब न केवल मुर्गा, मछली और मांस के व्यवसायियों को निर्धारित मानकों और स्वच्छता नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, बल्कि नगर निकाय (नगर परिषद) जैसी संस्थाओं को भी अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी, वरना उनपर भी गाज गिरेगी.

फर्जी जॉइनिंग लेटर और ट्रेनिंग का खेल! BCCL भर्ती घोटाले में बड़ा खुलासा

डकरा  कोल इंडिया की सबसे पुरानी सब्सिडियरी बीसीसीएल धनबाद में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा, भुरकुंडा, हजारीबाग और बड़कागांव समेत कई इलाकों में सक्रिय एक संगठित गिरोह पर करीब 200 लोगों से लगभग 20 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप लगा है. मामले में खलारी थाना में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुटी है, जबकि आरोपियों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए हैं. कांग्रेस नेत्री से 24 लाख की ठगी डकरा निवासी कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी ने 12 मई को खलारी थाना में लिखित शिकायत देकर बताया कि उनके बेटे मनीष कुमार, कुणाल कुमार और भतीजा कौशल प्रसाद को बीसीसीएल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 24 लाख रुपये ठग लिए गए. इंदिरा देवी के अनुसार, चूरी उत्तरी के पूर्व मुखिया संजय आइंद की पत्नी मीनाक्षी आइंद ने उन्हें बताया था कि उसकी दोनों बेटियां साक्षी और श्रेया बीसीसीएल में नौकरी कर रही हैं. यह नौकरी केडी खलारी निवासी और अशोका, पिपरवार में कार्यरत सीसीएल कर्मचारी अजय कुमार सिन्हा और दरहाटांड़ राय निवासी पवन कुमार ने लगवाई है. फर्जी ज्वाइनिंग लेटर और मेडिकल जांच का खेल इंदिरा देवी ने बताया कि पवन कुमार ने खुद को बीसीसीएल में सेटिंग से नौकरी पाने वाला बताते हुए अपना कथित ज्वाइनिंग लेटर भी दिखाया. राजनीतिक परिवार से संबंध होने के कारण उन्होंने उस पर भरोसा कर लिया. पहले चेक के माध्यम से भुगतान करने की कोशिश हुई, लेकिन तकनीकी कारणों से पैसा नहीं निकल सका. इसके बाद पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी स्थित रॉयल पार्क अपार्टमेंट निवासी सागर चक्रवर्ती के शानवी इंटरप्राइजेज बैंक खाते में 24 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. पैसा ट्रांसफर होने के बाद एक बॉन्ड पेपर तैयार किया गया, जिस पर संबंधित लोगों के हस्ताक्षर भी कराए गए. इसके बाद युवकों को धनबाद बुलाकर होटल में ठहराया गया और पीएमसीएच में रवि राय और मुकेश महतो द्वारा मेडिकल जांच कराई गई. उस समय वहां कई दूसरे युवकों की भी जांच चल रही थी. बायोमीट्रिक और ट्रेनिंग के नाम पर ठगी थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, दूसरी बार धनबाद बुलाकर लोदना एरिया के रेलवे साइडिंग में अनुप सरकार, विशाल सिंह और रवि राय द्वारा बायोमीट्रिक हस्ताक्षर और बीटीसी ट्रेनिंग की प्रक्रिया पूरी कराई गई. इसके बाद युवकों को एक सूची दिखाई गई, जिसमें लगभग 200 अभ्यर्थियों के नाम अलग-अलग एरिया में पोस्टिंग के साथ दर्ज थे. इसमें इंदिरा देवी के तीनों बच्चों के नाम भी शामिल थे. हालांकि, इसके बाद किसी को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला और आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया. नेटवर्क मार्केटिंग की तरह चलाया गया गिरोह जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पूरी ठगी को नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल की तरह संचालित किया. इसके अलग-अलग चैनल बनाए गए थे. बताया जा रहा है कि एक चैनल सागर चक्रवर्ती और दूसरा मुस्तकीम अंसारी चला रहा था. सागर चक्रवर्ती के शानवी इंटरप्राइजेज बैंक खाते और मुस्तकीम के धनबाद स्थित एक टायर दुकान के खाते में पैसे जमा कराए गए. गिरोह में शामिल लोगों को पहले खुद नौकरी का लालच दिया गया. बाद में उनसे कहा गया कि वे नए कैंडिडेट जोड़ें, ताकि उनका काम बिना पैसे दिए हो जाए. इसी लालच में कई लोग खुद भी एजेंट बन गए. वे अपने रिश्तेदारों और परिचितों को फंसाने लगे. करोड़ों रुपये का हुआ लेनदेन सूत्रों के मुताबिक, पिपरवार के एक व्यक्ति ने विभिन्न लोगों से पैसे जुटाकर करीब पांच करोड़ रुपये गिरोह तक पहुंचाए. वहीं डकरा के एक सीसीएल कर्मचारी ने अपने रिश्तेदारों से 75 लाख रुपये इकट्ठा कर दिए. अब पैसे गंवाने वाले कई लोग मानसिक तनाव में हैं और सामाजिक बदनामी के डर से खुलकर सामने भी नहीं आ रहे हैं. धनबाद के सिजुआ से जुड़ रहे तार पीड़ितों के अनुसार, मुस्तकीम अंसारी धनबाद के सिजुआ का रहने वाला है. वह खुद को कांग्रेस और ट्रेड यूनियन नेता बताता था. वहीं, सागर चक्रवर्ती अपने आपको टीएमसी नेता बताकर लोगों पर प्रभाव जमाता था. मामले में संतोष सिंह, छोटेलाल राम, मुकेश महतो, विशाल कुमार, राजेश करमाली और करमा नामक लोगों की भी चर्चा हो रही है. पुलिस बोली- संपर्क से बाहर हैं आरोपी मामले की जांच कर रहे खलारी थाना के एसआई शंकर राम ने बताया कि पुलिस शुरुआती स्तर पर जांच कर रही है. कुछ लोगों को नोटिस भेजा गया है, लेकिन फिलहाल किसी आरोपी से संपर्क नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि इंदिरा देवी द्वारा भुगतान किए गए पैसों का सत्यापन कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

अमेरिका में होने वाले UN युवा सम्मेलन में संजय की भागीदारी, भारत का बढ़ाएंगे मान

दुमका. झारखंड की उपराजधानी दुमका के काठीकुंड प्रखंड अंतर्गत बड़तल्ली गांव के संजय पाल समय पर वीजा नहीं बन पाने के कारण अमेरिका नहीं जा सकेंगे, लेकिन अब वह वर्चुअल माध्यम से लॉस एंजिल्स में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के 13वें अंतरराष्ट्रीय युवा सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। संजय पाल का चयन नेतृत्व क्षमता व तार्किक-व्याख्यात्मक कौशल के कठोर मूल्यांकन के आधार पर इस वैश्विक मंच के लिए हुआ है। सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के करीब 20 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे। संजय वर्चुअल रूप से जुड़कर भारत की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखेंगे। उनका कहना है कि यदि भारत की युवा आबादी को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में मजबूत आधार मिले तो देश विश्व पटल पर महाशक्ति बन सकता है। उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाकर समाज की सेवा करना है। संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की प्रेरक कहानी: संजय पाल का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता कार्तिक पाल मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता रेणुका पाल ने सीमित शिक्षा के बावजूद बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। आर्थिक तंगी के दौर में संजय की मां ने रात में मूढ़ी (लाई) भूनकर परिवार का सहारा बनने का प्रयास किया, लेकिन लगातार धुएं में काम करने से उनका स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। इसके बाद संजय ने स्वयं पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने साप्ताहिक बाजारों में कपड़े की दुकानों पर काम किया और ग्रामीण क्षेत्रों में पावरोटी बेचकर पढ़ाई का खर्च निकाला, लेकिन पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। राज्य टॉपर से लेकर राष्ट्रीय मंच तक: संकटों के बीच संजय ने 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और आगे चलकर उच्च माध्यमिक परीक्षा में प्रखंड टाप करने के साथ अर्थशास्त्र में पूरे झारखंड में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर राज्य टॉपर बने। इसके बाद उन्होंने सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान, विकसित भारत युवा संवाद 2026 और बजट क्वेस्ट 2026 जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। उनके प्रदर्शन के लिए रांची स्थित रिम्स ऑडिटोरियम में माय भारत झारखंड की निदेशक ललिता कुमारी द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया। शिक्षकों और मार्गदर्शन के सहारे संजय ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी प्रतिभा को साबित किया, और आज वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने को तैयार हैं।

ड्यूटी से लेकर इलाज तक निगरानी, बिहार स्वास्थ्य विभाग का बड़ा डिजिटल सुधार प्लान

पटना बिहार के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मियों की जवाबदेही तय होगी। हर सरकारी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर और कर्मियों को ड्यूटी (रोस्टर) के अनुसार उपस्थित रहना होगा। साथ ही बारोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले माह (11 अप्रैल) को सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद अब स्वास्थ्य व्यस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों की निगरानी बायोमेट्रिक प्रणाली के तहत की जाएगी। डॉक्टरों को मरीजों को रेफर करने की आदत छोड़नी होगी। मरीजों के इलाज को लेकर उन्हें मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करना जरूरी होगा। वहीं, स्वास्थ्य कर्मियों को जांच आदि की सुविधा अस्पताल में ही मरीज को उपलब्ध करानी होगी। राज्य में नई सरकार और प्रशासनिक फेरबदल के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करने को लेकर कई लक्ष्य तय किए हैं। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अस्पताल में इलाज की व्यवस्था में बड़े बदलाव को लेकर कार्य करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाज व्यवस्था की निगरानी के लिए डिजिटलीकरण की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत इलाज को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने, मरीजों का पूरा डाटा डिजिटल करने की तैयारी की है। स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करने और लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने का भी निर्देश दिया गया है। रात्रिकालीन मुस्तैदी पिछले माह से ही लागू इसके पहले विभाग ने रात्रि पाली में कार्यरत डॉक्टरों के लिए सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। इस पाली में अपनी सेवा देने वाले चिकित्सकों को सुबह उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था पिछले महीने से ही लागू कर दी गई थी। इसका मकसद यह है कि वरीय चिकित्सक इमरजेंसी मरीजों की समुचित देखभाल कर सकें और वे अस्पतालों को अपनी जूनियरों के भरोसे छोड़कर नाइट ड्यूटी से गायब न हो सकें। सरकारी डॉक्टरों ने निजी प्रैक्टिस बंद करने के पहले आवास-सुरक्षा मांगी इधर बिहार में सरकारी डॉक्टरों ने उनकी निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के पहले बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के साथ बातचीत करने, सेवा चिकित्सकों को आवास एवं सुरक्षा सहित 19 सूत्री मांगें सरकार के समक्ष रखी। रविवार को भासा की आम सभा सह महासम्मेलन आईएमए हॉल में हुआ। महासम्मेलन के बाद चिकित्सकों ने मांगों के समर्थन में गांधी मैदान स्थित आईएमए हॉल से जेपी गोलंबर तक पैदल मार्च भी निकाला। भासा ने अपनी मांगों के तहत प्रशासनिक पदों पर कार्यरत चिकित्सा पदाधिकारियों को वाहन की सुविधा देने, बिहार चिकित्सा सेवा संस्थान एवं व्यक्ति सुरक्षा कानून 2011 एवं संशोधित 2014 को और अधिक प्रभावी बनाने, अस्पताल सशस्त्र सुरक्षा गार्ड की कार्यस्थल पर तैनाती करने सहित 19 मांगों को पूरा करने जोर दिया। भासा के प्रवक्ता डॉ. विनय कुमार ने बताया कि सभा में उपस्थित चिकित्सकों ने राज्य सरकार से सरकारी चिकित्सकों की सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया। आम सभा में राज्य के विभिन्न जिलों से आए चिकित्सकों एवं संघ प्रतिनिधि शामिल हुए।

बिहार सरकार की नई टोल पॉलिसी तैयार, अब स्टेट हाईवे और पुलों पर बढ़ेगा टोल

पटना  बिहार में गाड़ी चलाना आपके लिए और महंगा होने जा रहा है। यूं समझिए कि पेट्रोल-डीजल के बाद अब बिहार में सरकार आपकी जेब का बोझ बढ़ाने जा रही है। बिहार की सम्राट चौधरी सरकार नई टोल नीति पर काम शुरू कर चुकी है। इसके लागू होने के बाद अब बिहार में आपको और टोल टैक्स चुकाना होगा। इसके लिए पथ निर्माण विभाग के अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक को काम पर लगा दिया गया है। बिहार में टोल टैक्स होगा महंगा बिहार की सम्राट सरकार की नई टोल नीति लाने का मकसद राजस्व बढ़ाना है। इस राजस्व का इस्तेमाल सड़कों और पुलों के रखरखाव पर किया जाएगा। इसको लेकर अफसरों को नई नीति तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं और वो इस पर काम भी कर रहे हैं। पुल के लिए भी टोल टैक्स इसमें एक और भी बड़ी बात है। वो ये कि अब बिहार में पुल पार करने पर भी टैक्स लगेगा। एक न्यूज पोर्टल के मुताबिक जो प्रस्ताव रखा गया है उसके अनुसार पुल की एक किलोमीटर की लंबाई को साधारण सड़क के 10 किलोमीटर के बराबर माना जाएगा। ऐसे में सड़कों के मुकाबले पुल पर लगने वाला टोल टैक्स जाहिर तौर पर ज्यादा होगा। ऐसे समझिए कि आप जितना टोल सड़क पर 10 किमी गाड़ी चलाने के लिए देंगे, उतना पुल पर सिर्फ एक किलोमीटर का लग जाएगा। यही नहीं पुल तक पहुंचने के लिए अप्रोच रोड पर भी अलग टोल की दरें तय की जा रही हैं।     बिहार में जल्द आ सकती है नई टोल टैक्स पॉलिसी     इसके तहत पुलों के लिए भी लगेगा टोल टैक्स     स्टेट हाईवे पर भी वसूला जाएगा टोल     पथ निर्माण विभाग इसके लिए काम पर लगा सरकार क्यों बढ़ा रही टोल टैक्स पथ निर्माण विभाग के अनुसार बिहार में बड़े पुलों और स्टेट हाईवे के नेटवर्क को मेंटेन रखने के लिए मोटे बजट की जरूरत होती है। बिहार में टोल टैक्स को लेकर इस नई टोल नीति के बाद जो पैसा आएगा उससे पुलों और सड़कों की मरम्मत से लेकर सुरक्षा तक तय की जाएगी। हालांकि अभी प्रस्ताव पर सोच-विचार चल रहा है। ड्राफ्टिंग को पूरा होने में समय लगेगा। माना जा रहा है कि एक महीने के अंदर ही ये लागू किया जा सकता है। बिहार सड़क उपयोगकर्ता शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) अभी प्रक्रिया में है। लागू होने पर टोल वसूली के लिए एजेंसियों को चुना जाएगा।    

शिक्षा व्यवस्था में बड़ा एक्शन, भागलपुर-बांका के कोचिंग संस्थानों की होगी निगरानी

भागलपुर. प्रमंडल के 496 कोचिंग सेंटर पर अब जिला स्तर से निगरानी होगी। इसे लेकर जल्द ही पूरे राज्य में बिहार राज्य कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2026’ को लागू करने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे सार्वजनिक सुझाव के लिए विभागीय वेबसाइट पर जारी किया गया है। शिक्षा विभाग के सर्वे के अनुसार, भागलपुर में 295 और बांका में 201 कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। उनमें भागलपुर में लगभग 32,399 और बांका में 25733 बच्चे पढ़ रहे हैं। जिला शिक्षा विभाग से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित कानून के तहत राज्य स्तर पर 13 सदस्यीय प्राधिकरण गठित होगा। इसके पदेन अध्यक्ष शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव होंगे। इसके अलावा अन्य पदाधिकारी शामिल रहेंगे। वहीं, जिले में 6 सदस्यीय टीम होगी। उन्होंने बताया कि यह समिति जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण, आधारभूत सुविधाओं, सुरक्षा मानकों और छात्र हितों की निगरानी करेगी। कोचिंग संस्थानों को अनिवार्य रूप से निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों पर कार्रवाई की जाएगी। रैंडम जांच में कई कोचिंग में मिली थी अनियमितता 2023 में पूर्व शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के कार्यकाल में जिले में बड़े स्तर पर कोचिंग संस्थानों की रैंडम जांच कराई गई थी। उस समय 50 से अधिक कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया गया था। जांच में बिना निबंधन संचालन, अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था की कमी, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था नहीं होना, शिक्षकों और फीस संबंधी जानकारी प्रदर्शित नहीं करना जैसी कई अनियमितताएं सामने आई थीं। कुछ संस्थानों में सीसीटीवी और उपस्थिति पंजी भी नहीं मिली थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार द्वारा लगभग आधा दर्जन कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई भी की गई थी तथा कई संचालकों को नोटिस जारी कर सुधार का निर्देश दिया गया था। पूर्वी बिहार व कोसी सीमांचल के 3803 कोचिंग सेंटर पर कसेगा शिकंजा पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल के 13 जिलों में कुल 3803 कोचिंग संस्थान संचालित हैं। वहां करीब 1.88 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। भागलपुर प्रमंडल के भागलपुर में 295, बांका के अलावा जमुई में 238 और मुंगेर में 90 कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। इनमें जमुई में 21,764 और मुंगेर में 7,022 छात्र-छात्राएं कोचिंग में पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, कोसी क्षेत्र के खगड़िया में 145, मधेपुरा में 233, सहरसा में 522 और सुपौल में 395 कोचिंग संस्थान संचालित हैं। इन जिलों में सहरसा में 26,014, मधेपुरा में 24,884, सुपौल में 6,779 और खगड़िया में 14,937 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। वहीं, सीमांचल क्षेत्र के पूर्णिया में 598, कटिहार में 577, अररिया में 266 और किशनगंज में 243 कोचिंग संस्थान संचालित हैं। इन जिलों में पूर्णिया में 9,585, कटिहार में 21,840, अररिया में 15,823 और किशनगंज में 10,924 छात्र-छात्राएं कोचिंग में पढ़ाई कर रहे हैं।

सिंचाई सुविधा से बदल रही तस्वीर, जिले में 3674 हेक्टेयर में गरमा खेती

सरायकेला सरायकेला खरसावां जिले में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष गरमा खेती का दायरा बढ़ा है. गरमा खेती को लेकर किसान भी खासा उत्साहित है. किसानो का रुझान गरमा धान की ओर देखा जा रहा है. जिले में गरमा धान की खेती का लक्ष्य के अनुसार हो रहा है. 1022 हेक्टेयर में गरमा धान की खेती हो रही है. जिले में पिछले वर्ष 955 हेक्येटर में गरमा धान की खेती हुई थी. गरमा धान की खेती में हुई लाभ से उत्साहित किसान इस साल ओर भी वृहद पैमाने पर खेती कर रहे हैं. धान में आने लगी है बालिया, 15-20 में होगी कटाई खेतों तैयार धान के बालियों आने लगी है. फसल भी पकने को तैयार हैं. इससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. अगले दो-तीन सप्ताह में गरमा धान पूरी तरह से तैयार हो जाएगा. इससे किसानों को अच्छी आमदानी भी होगी. किसानों ने बताया कि गरमा धान तीन से चार माह में तैयार हो जाता है. चांडिल और चौका क्षेत्र में सर्वाधिक हुई है खेती गरमा धान की खेती सबसे अधिक चांडिल व चौका क्षेत्र में हुई है. चौका के पालना डैम से सिंचाई नहर के कीनारे स्थित पालना, मुसरीबेडा, खूंटी, कुरली, दिरलोंग, झाबरी खेतों के साथ साथ तथा चांडिल डैम से निकलने वाली नहर के स्थित दालग्राम, गांगुडीह, रिमली, रुचाव, पाटा आदि गांवों में गरमा धान की अच्छी खेती हुई है. इसके अलावे खरसावां व कुचाई के पाहाड़ी क्षेत्र में कुछ कुछ स्थानों पर लोग नदी नाला के पानी से गरमा धान की खेती कर रहे है. राजनगर में भी जल संरक्षित कर गरमा धान की खेती की जा रही है. सिंचाई की व्यवस्था हुई तो बढ़ेगा खेती का दायरा जिले में गरमा धान समेत अन्य गरमा फसलों की खेती सिर्फ सिंचाई सुविधा उपलब्ध वाले क्षेत्रों में ही हो रही है. पालना व चांडिल डैम के अलावे पाहाड़ी क्षेत्रों में स्थित छोटे छोटे चैक डैम  ग्रामीण क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर गरमा धान की खेती का दायरा बढ़ सकता है. किसान उद्वह सिंचाई योजना की मांग कर रहे है, ताकि खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच सके. सुरु डैम पुरा होते ही खरसावां में बढ़ेगी गरमा खेती खरसावां में निर्माणाधीन सुरु जलाशय योजना का कार्य पुरा होते ही क्षेत्र में खेती गरमा की खेती हो पाएगी. डैम का निर्माण कार्य जोरों पर चल रही है. निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद नहर के जरीये करीब एक दर्जन गांवों तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा. इससे गरमा धान की खेती भी हो सकेगी. इस वर्ष जिले में 3674 हेक्टेयर में गरमा की खेती सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष जिले में 3674 हेक्टेयर में गरमा की खेती हो रही है. गरमा फसल में अब तक लक्ष्य का 70 फीसदी आच्छादन हो चुका है. जिले में 5190 हेक्टेयर में गरमा की खेती का लक्ष्य रखा गया था.  1022 हेक्टेयर में गरमा धान, 360 हेक्टेयर में गरमा मक्का, 2175 हेक्टेयर में गरमा मुंग की खेती हो रही है. क्षेत्र के किसान गरमा सूर्यमुखी की खेती में दिलचस्पी नहीं ले रहे है. 850 हेक्टेयर में गरमा सूर्यमुखी की खेती का लक्ष्य था, परंतु सिर्फ 117 हेक्टेयर में ही गरमा सूर्यमुखी की खेती हो रही है. सरायकेला-खरसावां जिले में इस वर्ष हुई गरमा धान की खेती की स्थिति फसल : लक्ष्य (हेक्टयर) : अच्छादन : अच्छादन प्रतिशत     धान : 1025 : 1022 : 99.71     मक्का : 565 : 360 : 63.72     मुंग : 2750 : 2175 : 79.09     सूर्यमुखी : 850 : 117 : 1376     कुल : 5190 : 3674 : 70.79 क्या कहते हैं किसान? पालना के किसान पंचानन महतो कहते हैं कि इस वर्ष जिले में गरमा धान की अच्छी खेती हुई है. धान के बाली आने लगे हैं. अगले 15-20 दिनों में धान की कटाई की जाएगी. किसानों से सरकारी स्तर पर धान खरीद की व्यवस्था हो. धुनाडीह (कुचाई) के किसान गुरुलाल मुंडा कहते हैं कि सिंचाई की व्यवस्था हो तो जिले में गरमा फसल का दायरा भी बढ़ेगा. सिंचाई के अभाव में किसान गरमा धान समेत अन्य फसल उगा नहीं पा रहे हैं. सरकार छोटे-छोटे योजनाओं के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था करें.

30 दिन में फाइल निपटाओ वरना सस्पेंशन तय: बिहार सरकार का सख्त संदेश

पटना बिहार में जनता की समस्याओं के समाधान का फाइल लटकाने वालों अफसरों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अफसरों को दो टूक शब्दों में संदेश था कि कि हर हाल में जनता की समस्याओं का समाधान कम से कम समय में करना पड़ेगा। सीएम के ऐलान के बाद पहला विकेट मुजफ्फरपुर में गिरा। जिले में एक राजस्व अधिकारी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। मंत्री ठीक से काम करेगा तो अधिकाकारियों और कर्मचारियों को भी अपने दायित्यव का समय से पालन करना पड़ेगा। भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। इसी के तहत मुजफ्फरपुर के कुढनी में पदस्थापित राजस्व अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। इस विभाग पर भ्रष्टाचार का सबसे अधिक आरोप लगता है। इसने कैंसर रोग की तरह विभाग को जकड़ लिया है। इसलिए एंटिबायोटिक से इलाज शुरू हो गया है। धर्मेंद्र कुमार पर कई बार काम में लापरवाही के आरोप लगे। यह सभी अधिकारियों के लिए एक मैसेज है। तीन महीनों तक हड़ताल के कारण काम काफी पीछे पड़ गया है। अधिकारियों को दिन रात एक करके इमानदारी के साथ काम करना पड़ेगा। जब मंत्री इमानदारी से काम करेंगे तो अधिकारियों और कर्मियों को भी अपने कार्य व्यवहार में सुधार लाना पड़ेगा। दिलीप जायसवाल ने कहा कि लापरवारी पर कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी। माननीय मुख्यमंत्री ने भी साफ कर दिया है कि जनता का काम सफर नहीं करना चाहिए। इसके लिए तीस दिनों का समय भी तय कर दिया गया है। इस समय सीमा का पालन होना चाहिए। जो कोताही बरतेंगे वे नप जाएंगे। उन्हें कोई नहीं बचा पाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश को जमीन पर उतारा जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते 11 मई को ही साफ कर दिया था कि किसी भी फाइल को 30 दिनों में निष्पादित कर देना पड़ेगा। ऐसा नहीं करने पर 31वें दिन अधिकारी सस्पेंड हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सहयोग पोर्टल और सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100 का भी शुभारंभ किया था। सोमवार को उन्होंने फिर से यह बात दोहराई। कहा कि फाइलों को अटकाना और भटकाना नहीं है। जो मामले न्यायालय से संबंधित हैं उनमें भी तीस दिनों के अंदर कोई ना कोई ऐक्शन दिखना चाहिए। अंतिम नहीं तो अंतरिम आदेश तो होना ही चाहिए। ऐसे मामलों में अधिकारियों को 10 दिन और 20 दिनों पर नोटिस दी जाएगी। 25वें दिन की नोटिस के बाद ऐसे अधिकारी खुद को निलंबित समझें।

आपदा से निपटने को बिहार तैयार, फायर ब्रिगेड बेड़े में शामिल हुए 80 आधुनिक वाहन

पटना. बिहार में फायर ब्र‍िगेड के बेड़े में 80 हाईटेक गाड़‍ियां शामिल हुई हैं। अग्निशमन व्‍यवस्‍था को मजबूत बनाने के लिए राज्‍य सरकार ने यह व्‍यवस्‍था की है। गांधी मैदान में मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी ने वाहनों को हरी झंडी द‍िखाई। उनके साथ डिप्‍टी सीएम विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव भी मौजूद थे। इस अवसर पर इन गाड़‍ियों का लाइव डेमो भी किया गया। फायरकर्मियों ने तत्‍परता और साहस का प्रदर्शन किया। यह देख तालियां बजती रहीं। अग्निशमन व‍िभाग को मिली इन गाड़‍ियों में 36 स्‍कॉर्पियो हैं। आग लगने की सूचना मिलने पर कुछ ही देर में वाहन के साथ फायर कर्मी पहुंच जाएंगे। राज्य में अप्रैल और मई के दौरान आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। ग्रामीण इलाकों में फूस के घर, खेतों के पास सूखी घास और बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट की वजह से कई जिलों में नुकसान की घटनाएं सामने आई हैं। इसी स्थिति को देखते हुए अग्निशमन विभाग को आधुनिक संसाधनों से लैस करने का फैसला लिया गया। नई खरीदी गई 80 गाड़ियों में 36 स्कॉर्पियो वाहन भी शामिल हैं, जिन्हें त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया गया है। सरकार के मुताबिक, पहले कई इलाकों में दमकल गाड़ियों को पहुंचने में लंबा समय लग जाता था। सड़क, दूरी और सीमित संसाधन बड़ी चुनौती बनते थे। नई गाड़ियों के शामिल होने से अब जिला और प्रखंड स्तर पर अग्निशमन टीमों की तैनाती मजबूत होगी। इससे शुरुआती समय में ही आग पर काबू पाने में मदद मिलेगी और नुकसान कम होगा। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ आग लगने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। बिजली की खराब वायरिंग, ट्रांसफॉर्मर में खराबी, गैस सिलेंडर लीक और खेतों में जलावन जलाने जैसी वजहें बड़ी घटनाओं में बदल जाती हैं। ऐसे में फायर ब्रिगेड की तेज प्रतिक्रिया सबसे अहम होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए नए वाहनों को हाई-स्पीड मूवमेंट और त्वरित राहत कार्य के हिसाब से तैयार किया गया है। नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखने की उम्मीद है। अब तक कई गांवों में दमकल वाहन देर से पहुंचते थे। इससे छोटे हादसे भी बड़े नुकसान में बदल जाते थे। सरकार का दावा है कि नई गाड़ियों के जरिए गांवों तक राहत सेवाओं की पहुंच पहले से बेहतर होगी। इससे जान-माल की सुरक्षा को लेकर लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। गर्मी के मौसम में बिजली उपकरणों के इस्तेमाल में सावधानी बरतने, खेतों और घरों के आसपास ज्वलनशील सामान नहीं रखने और आग लगने की स्थिति में तुरंत सूचना देने को कहा गया है। सरकार का मानना है कि आधुनिक संसाधनों और तेज रिस्पॉन्स सिस्टम के जरिए इस बार अगलगी की घटनाओं में नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

बिहार में बदमाशों पर पुलिस का शिकंजा, पैर में गोली मारकर किए गिरफ्तार

पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार की पुलिस अपराधियों पर लगातार कहर बनकर टूट रही है। सोमवार का दिन अपराधियों को भारी पड़ता दिख रहा है। सीवान से लेकर पटना तक पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और दोनों ही जिलों में पुलिस ने हाफ एनकाउंटर कर अपराधियों को लंगड़ा बना दिया है। सबसे पहले बात बिहार की राजधानी पटना की। पटना के ट्रांसपोर्ट नगर में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। यहां पुलिस ने एक अपराधी के पैर में गोली मार दी। बताया जा रहा है कि अगमकुआं थाना इलाके में 2 दिन पहले एक टीचर के साथ लूटपाट की गटना हुई थी। इस लूटपाट में यह अपराधी शामिल थी। पुलिस का कहना है कि वो इस अपराधी को पकड़ने गई थी। लेकिन इस बदमाश ने पुलिस को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपराधी के पैर में गोली मार दी। घायल बदमाश संदीप उर्फ बादल को इलाज के लिए पटना के ही नालंद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अगमकुआं थाना क्षेत्र के भागवत नगर में 13 मई को अहले सुबह शिक्षक शंभू कुमार के साथ लूटपाट हुई थी। पटना के एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने इस एनकाउंटर पर जानकारी देते हुए कहा कि कुछ दिनों पहले एक घटना हुई थी जिसमें सुबह के वक्त एक व्यक्ति मोटरसाइकिल से जा रहे थे तो उनसे छिनतई के क्रम में गोली चलाई गई थी। इस गोलीकांड में वो जख्मी हो गए थे। इलाज के बाद फिलहाल वो रिकवर हो रहे हैं। इस मामले में पुलिस की टीम बनाई गई थी। यह टीम इस घटना को अंजाम देने वाले की पहचान में जुटी थी। टीम ने इस बदमाश की पहचान की और इसमें छापेमारी की गई। इस घटना में 2 लोग शामिल थे। इसमें से एक बदमाश छापेमारी के दौरान मौजूद था। उसे नशे की भी लत थी। छापेमारी के दौरान बदमाश ने पुलिस की टीम पर फायरिंग कर दी। यह गोली पुलिस की गाड़ी पर जाकर लगी थी। इसके बाद पुलिस ने मोर्चा संभाला और अपराधी को पैर में गोली मार दी। दूसरे अपराधी की पहचान कर ली गई है और उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है।। घटना में जिस मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया गया था उसे बरामद कर लिया गया है। घायल को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सीवान में हाफ एनकाउंटर इधर सीवान जिले में चर्चित जामापुर ज्वेलरी लूटकांड के एक आरोपित को सोमवार की अहले सुबह पुलिस ने हाफ एनकाउंटर में घायल कर दिया। पुलिस आरोपित को दोनों घुटनों में गोली लगी है। आरोपी को इलाज के लिए पहले सदर अस्पताल लाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे पटना रेफर कर दिया गया। घायल आरोपित की पहचान सिसवन थाना क्षेत्र के चांदपुर घुरघाट निवासी श्रीनिवास सिंह के 26 वर्षीय पुत्र अंकित कुमार सिंह के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अंकित 6 मई को जीरादेई थाना क्षेत्र के जामापुर बाजार स्थित ओम साई ज्वेलरी शॉप में हुई करीब 20 लाख रुपए की लूट की घटना में शामिल था। उसी का गोली चलाते वीडियो भी वायरल हुआ था। मुठभेड़ को लेकर बताया जा रहा है कि अंकित अपने एक साथी के साथ यूपी से सीवान जिले की ओर आ रहा था। इसी दौरान पुलिस की गश्ती गाड़ी को तितरा बाजार बंका मोड़ के पास देखकर फायरिंग करने लगा। उसकी फायरिंग के जवाब में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की तो उसे पैर में गोली लग गई। गोली लगने के बाद उसको घायल अवस्था में सदर अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया,जहां से बेहतर इलाज के लिए चिकित्सकों ने पटना रेफर कर दिया। सदर अस्पताल के चिकित्सक ने बताया कि युवक के दोनों घुटनों में गोली लगी थी। एसपी पूरन कुमार झा ने बताया कि जामापुर लूटकांड के बाद यह यूपी की ओर फरार हो गया था। उसने लूट के दौरान भी दुकान में तीन गोली चलाई थी। वहीं फायरिंग करते हुए फरार भी हो गया था।