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चलती नहीं, प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन में लगी आग; यात्रियों में दहशत

सासाराम भभुआ-सासाराम-पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस में सोमवार की अहले सुबह अचानक आग लगने से स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आग ट्रेन की जनरल बोगी में लगी, जिससे कुछ ही देर में धुआं और लपटें उठने लगीं। घटना के समय ट्रेन प्लेटफार्म पर खड़ी थी और बड़ी संख्या में यात्री बोगी में सवार थे। आग लगते ही यात्रियों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए जल्दबाजी में ट्रेन से नीचे उतरने लगे प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले बोगी से धुआं निकलता दिखाई दिया, जिसके बाद अचानक आग तेजी से फैल गई। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद फायर ब्रिगेड को बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक जनरल कोच का एक बड़ा हिस्सा जलकर क्षतिग्रस्त हो चुका था। समय रहते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद स्टेशन परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। यात्रियों में भय और दहशत देखी गई। कई यात्री अपना सामान छोड़कर ही नीचे उतर गए। आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट या किसी यात्री द्वारा ज्वलनशील सामग्री ले जाने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि घटना के बाद प्रभावित बोगी को अलग कर तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों ने ट्रेनों में नियमित जांच और अग्नि सुरक्षा के बेहतर इंतजाम की मांग की है। रेलवे ने दी सफाई अगलगी की इस घटना के बाद मुख्य जनसंपर्क अधिकरी सरस्वती चंद्र ने कहा कि सासाराम स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 06 पर खड़ी गाड़ी संख्या 53212 डाउन सासाराम-पटना पैसेंजर ट्रेन के एक कोच से धुआं निकलने की सूचना मिली थी। ट्रेन प्लेटफॉर्म पर स्थिर अवस्था में खड़ी थी तथा उस समय कोच में कोई यात्री मौजूद नहीं था। इसके बाद रेलकर्मियों ने फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी थी। रेलकर्मियों के सहयोग और तुरंत ऐक्शन के बाद करीब 6.05 मिनट पर आग पर काबू पा लिया गया था। घटना में किसी भी यात्री अथवा रेलकर्मी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। घटना के वजहों की जांच की जा रही है।

पटना में स्कूल टाइम बदला, भीषण गर्मी के चलते 8वीं तक की कक्षाएं 11 बजे तक

 पटना बिहार में गर्मी अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है। कई जिलों में सुबह से ही निकल रही तीखी धूप लोगों को घरों में दुबके रहने के लिए मजबूर कर रही है। दोपहर के वक्त आसमान से आग बरस रही है। भीषण गर्मी की वजह से लोग परेशान हैं। सोमवार को भी राज्य के अधिकांश जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि कई जिलों में इस दौरान अधिकतम तापमान 38-40 और 40-42 डिग्री तक जा सकता है। बिहार में कई जगहों पर दिन के अलावा रातें भी उबल रही हैं। रात के वक्त भी लोगों को गर्मी सता रही है। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि मंगलवार को उत्तर पूर्व बिहार के सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा के अलावा दक्षिण पूर्व बिहार के जमुई, मुंगेर, बांका, खगड़िया औऱ भागलपुर में एक-दो स्थानों पर बारिश हो सकती है। इसके बाद बुधवार और गुरुवार यानी 20 और 21 मई को भी बिहार के अधिकांश हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान है। पटना में स्कूलों के लिए आदेश भीषण गर्मी के कारण पटना के स्कूलों में 8वीं तक की कक्षाएं दिन में 11 बजे के बाद नहीं चलेंगी। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने रविवार को यह आदेश जारी किया। यह आदेश 21 मई तक लागू रहेगा। जिलाधिकारी ने कहा है कि जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र इसके दायरे में आएंगे। भीषण गर्मी के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। हालांकि आठवीं से ऊपर की कक्षाएं 11 बजे के बाद भी संचालित हो सकती हैं। नमी की मात्रा घटी धूप की तपिश ने झुलसाया मुजफ्फरपुर जिले में रविवार की सुबह से ही धूप खिली रही। इसके असर से दिन में हवा में नमी की मात्रा में तेजी से कमी आई और धूप की तपिश वास्तविक प्रभाव से कहीं अधिक महसूस हुई। इधर, मौसम विज्ञान विभाग ने अगले दो दिनों में तापमान के और अधिक बढ़ने और नमी में कमी आने की आशंका जताई है। इससे फिर त्वचा झुलसाने वाली गर्मी का दौर शुरू हो सकता है। पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई। अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। पूसा स्थित ग्रामीण मौसम विज्ञान केंद्र के नोडल पदाधिकारी डॉ. ए. सत्तार ने बताया कि जिले में जेट स्ट्रीम उत्तर की ओर मुड़ रही है। इससे हाई प्रेशर रिज बन रहा है, जो जिले में अधिक तापमान का कारण बन रहा है। कहा कि अगले दो-तीन दिनों तक तापमान तेजी से बढ़ेगा। रहेगा। इससे हवा में नमी की मात्रा तेजी से कम होगी। इससे झुलसाने वाली गर्मी महसूस हो सकती है। भागलपुर में 44 डिग्री गर्मी वाला एहसास भागलपुर जिले में 5 अप्रैल के बाद रविवार को एक बार फिर दिन का पारा 37.0 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। आसमान से आग बरसी। इस पर दिन में बही पूर्वी हवा बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आ गई। लिहाजा, रविवार को दिन में भले ही दिन का पारा 37.1 डिग्री सेल्सियस रहा हो, लेकिन लोगों को 44 डिग्री सेल्सियस जैसी गर्मी का एहसास (फीलिंग टेंपरेचर) हुआ। वहीं न्यूनतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि सामान्य तापमान से 2.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। रात में भी उमस से लोग परेशान रहे। भारतीय मौसम विभाग के अनुमानों की माने तो भीषण गर्मी व उमस सोमवार को भी लोगों के पसीने निकालेगी। जबकि मंगलवार से आंशिक बदरी के बीच गर्मी उमस तो सताएगी लेकिन इस दौरान कभी-कभार हल्की बारिश या बूंदाबांदी भी हो सकती है। आज आंशिक बदरी के बीच गर्मी और उमस सताएगी बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. बीरेंद्र कुमार ने बताया कि सोमवार को आंशिक बदरी के बीच गर्मी व उमस लोगों के पसीने छुड़ा देगी तो वहीं 19-20 मई को आंशिक बदरी के बीच जिले के कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी होगी। जबकि 21 से 23 मई के बीच जिले में आंधी-बारिश का अनुमान है। हालांकि बावजूद इसके दिन एवं रात के तापमान में कोई गिरावट नहीं होगी। गयाजी में आज भी भीषण गर्मी का अनुमान, मंगलवार को राहत की उम्मीद मौसम विशेषज्ञ एस के पटेल ने बताया कि 15 मई को भी एक पश्चिमी विक्षोभ आया था, लेकिन बहुत कमजोर रहने के कारण उसका असर नहीं रहा। इस कारण शनिवार से गर्म हवा यानी पछुआ चलने लगी। रविवार को मौसम और भी गर्म हो गया। इस वक्त तापमान से अधिक उसम वाली गर्मी का अहसाह होगा। बताया कि सोमवार को भी राहत का अनुमान नहीं है। अधिकतम तापमान के बढ़ने के ही आसार हैं। एस के पटेल ने बताया कि पूर्वी यूपी व बिहार के ऊपर चक्रवाती संचरण बना है। ट्रफ लाइन पूर्वी बिहार व बंगाल से होते हुए असम की ओर जा रहा है। सुबह में पछुआ चलेगी। दोपहर बाद पुरवैया चलने का अनुमान है। बताया कि मंगलवार को दोपहर बाद प्री मानसून गतिविधि हो सकती है। यानी तेज हवा, गरज के साथ बारिश हो सकती है। बताया कि अगले दो दिनों में मौसम के मिजाज में विशेष बदलाव का अनुमान नहीं है। कभी-कभी दोपहर बाद गरज व तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है।

मंच के पीछे चल रहा था शोषण का नेटवर्क! बेतिया में ऑर्केस्ट्रा ग्रुप पर रेड, 6 नाबालिग मुक्त

 बेतिया बिहार के बेतिया जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ऑर्केस्ट्रा की आड़ में कथित तौर पर चल रहे मानव तस्करी और नाबालिग लड़कियों के शोषण से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जिले के योगापट्टी प्रखंड के शनिचरी थाना क्षेत्र स्थित बहुअरवा गांव में जिला प्रशासन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर छह नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू किया है. मामले में ऑर्केस्ट्रा संचालक रामबाबू गुप्ता समेत करीब आधा दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।  छापेमारी कर निकाली गई लड़कियां बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई की शुरुआत एक गोपनीय सूचना के आधार पर हुई. चाइल्ड हेल्पलाइन सेंटर के डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर आलोक कुमार ने बताया कि पटना स्थित मुक्ति फाउंडेशन से इस मामले की जानकारी मिली थी. सूचना मिलने के बाद विभिन्न संस्थाओं और प्रशासनिक इकाइयों की मदद से एक विशेष टीम का गठन किया गया।  इस टीम में प्रयास जैक संस्थान के डीसी पवन कुमार, सपोर्ट पर्सन शालिनी कुमारी और ग्राम नियोजन केंद्र नरकटियागंज के अरविंद कुमार पांडे समेत अन्य सदस्य शामिल थे. टीम ने स्थानीय प्रशासन और एएचटीयू के सहयोग से बहुअरवा गांव में छापेमारी की और वहां से लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाला।  रोजगार के बहाने धंधे में ढकेला रेस्क्यू की गई लड़कियों में पांच पश्चिम बंगाल और एक बिहार के सीतामढ़ी जिले की बताई जा रही है. प्रारंभिक पूछताछ में लड़कियों ने बताया कि उन्हें रोजगार दिलाने का झांसा देकर यहां बुलाया गया था. बाद में उन्हें कथित तौर पर जबरन गलत गतिविधियों में धकेला जाने लगा।  गर्भवती मिली एक नाबालिग रेस्क्यू अभियान में शामिल शालिनी कुमारी के मुताबिक, लड़कियां ऑर्केस्ट्रा संचालक और उसके सहयोगियों के साथ मिलीं. इस दौरान एक गर्भवती नाबालिग भी टीम को मिली, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।  फिलहाल सभी लड़कियों को प्रशासनिक संरक्षण में रखा गया है और उनकी काउंसलिंग कराई जा रही है. पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस बात की जांच में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं. इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और पूरे मामले को लेकर प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है। 

बासुकीनाथ मेला क्षेत्र में सड़कों और पार्किंग के लिए करोड़ों की योजनाएं शुरू

 दुमका  श्रावणी मेला के मद्देनजर बासुकीनाथ में प्रशासनिक तैयारियों को धरातल पर उतारने की पहल तेज हो गई है। पथ निर्माण विभाग ने श्रावणी को ध्यान में रखते हुए बासुकीनाथ में स्थित शिवगंगा पहुंच पथ में नवनिर्मित आठ गुणा पांच मीटर बॉक्स कल्भर्ट के किनारे जोरिया में पीसीसी गार्डवाल एवं पहुंच पथ का निर्माण कराने के लिए टेंडर आमंत्रित किया है। इस योजना की प्राक्कलित राशि 30 लाख रुपये है। विभाग की ओर से दुमका-भागलपुर मुख्य पथ पर दुमका-हंसडीहा के बीच एनएच 17 के 25 वें, 44 वें, 49 वें एवं 51 वें किलोमीटर पर स्थित पुल पर मैस्टिक एसफाल्ट वेयरिंग कोर्स लेयिंग कार्य एवं मरम्मति के लिए भी टेंडर आमंत्रित किया गया है। इस योजना की प्राक्कलित राशि 25 लाख रुपये है। श्रावणी मेला को ध्यान में रखते हुए पथ निर्माण विभाग ने शनि मंदिर नोनीहाट-बासुकीनाथ-खैराबनी लिंक रोड के निकट बासुकीनाथ बस स्टैंड तक एप्रोच पथ निर्माण कराने के लिए टेंडर आमंत्रित किया है। दो साल है डेडलाइन इस योजना की प्राक्कलित राशि 60 लाख रुपये है। इस योजना को दो माह के अंदर पूर्ण कराने की मियाद तय की गई है। जबकि विभाग की ओर से नोनीहाट-बासुकीनाथ-कैराबनी रोड की विशेष मरम्मति के लिए भी एक करोड़ 25 लाख रुपये का टेंडर आमंत्रित किया गया है। इस कार्य को पूरा कराने के लिए भी दो माह का वक्त निर्धारित किया गया है। जबकि 75 लाख रुपये की लागत से बासुकीनाथ रिंग रोड में पार्किंग एरिया के निर्माण के लिए भी पथ निर्माण विभाग ने टेंडर आमंत्रित किया है। इस काम को पूरा करने की मियाद डेढ़ माह तय किया गया है। इसके अलावा 75 लाख रुपये की प्राक्कलित राशि से सतह नवीनीकरण, रोड मार्किंग, पेवर ब्लाक एवं साइन बोर्ड, कल्भर्ट की पेंटिंग एवं फ्लैंक मरम्मति का काम बासुकीनाथ मेला क्षेत्र में कराया जाएगा। इसके लिए भी विभागीय स्तर पर टेंडर आमंत्रित किया जा चुका है। इस काम को भी विभाग ने दो माह में पूरा कराने का वक्त तय किया है। एनएच करेगा काम चूंकि दुमका-देवघर मुख्य पथ अब पथ निर्माण विभाग के बजाए नेशनल हाइवे के जिम्मे है इसलिए इस बार श्रावणी मेला के नाम पर इस पथ पर किसी भी तरह का काम पथ निर्माण विभाग की ओर से संभवत: नहीं कराया जाएगा। इसके पीछे एक दूसरी वजह यह भी है कि दुमका से बासुकीनाथ तक फोर लेन का निर्माण काम एनएच के जरिए हो रहा है और बासुकीनाथ से दुमका तक फोर लेन सड़क निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है। ऐसे में इस पथ पर इस वर्ष श्रावणी मेला में विशेष मरम्मति का कार्य या तो एनएच के जरिए होगा या फिर नहीं होगा। श्रावणी मेला के दौरान बासुकीनाथ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी स्तर पर कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी गई है। मेला से जुड़े तमाम विभागों के साथ बैठक कर समय रहते तय कार्याें को पूरा कराने का निर्देश दिया गया है ताकि मेला में किसी तरह की कमी नहीं रहे।  

बिहार बना 5जी का नया हब, गांव-गांव पहुंचा हाई-स्पीड इंटरनेट

पटना देश में 5जी नेटवर्क सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। खास बात यह है कि जिस बिहार को अक्सर विकास की दौड़ में पीछे बताया जाता है, वह 5जी कवरेज के मामले में देश के टेक हब कर्नाटक और बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से भी आगे है। बिहार में अब 94.52% आबादी 5जी नेटवर्क की पहुंच में आ चुकी है। जबकि राष्ट्रीय औसत 86.18 प्रतिशत है। देश के आईटी हब कर्नाटक में यह कवरेज सिर्फ 79.92% है, जबकि यूपी में 85.25 % लोग 5जी से जुड़ पाए हैं। बेंगलुरु दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के दफ्तर हैं। फिर भी वहां का ग्रामीण इलाका 5जी की रफ्तार से दूर है। बिहार में ग्रामीण इलाकों में 5जी सेवाओं पर हुआ काम बिहार में 5जी सेवाओं की बेहतर कवरेज की सबसे बड़ी वजह यह है कि टेलीकॉम कंपनियों ने बिहार में ग्रामीण इलाकों को प्राथमिकता दी, जबकि कर्नाटक में शहरी क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया गया। बिहार में कंपनियों और सरकार ने मिलकर गांव-गांव तक 5जी नेटवर्क पहुंचाने में कवायद की है। केन्द्र सरकार के भारत नेट परियोजना के तहत बिहार के लगभग 8,860 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया है, जिस पर 812 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। योजना का मकसद हर गांव में तेज इंटरनेट पहुंचाना है। बिहार ने इसे सफलतापूर्वक अमल में लाया। इसका नतीजा है कि आज बिहार के दूरदराज के गांवों में बैठे लोग भी अब 5जी इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूरसंचार दिवस का क्या है इतिहास यह दिवस पहली बार 1969 में मनाया गया था, जो 1865 में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की स्थापना की वर्षगांठ के रूप में चुना गया। इसका उद्देश्य लोगों को दूरसंचार के महत्व, डिजिटल विभाजन को पाटने और नई तकनीकों के बारे में जागरूक करना है। यह दिन सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से दुनिया को जोड़ने और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का संदेश देता है। राष्ट्रीय राजमार्गों-ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या बिहार में भले ही 5जी नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। लेकिन नेटवर्क कनेक्विटी अब भी कई जगहों पर ठीक नहीं है। राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1750 किलोमीटर क्षेत्र में 424 स्थान ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल उपलब्ध नहीं है। इन जगहों पर टावरों के बीच की दूरी इतनी अधिक है कि नेटवर्क पहुंच ही नहीं पाता। दूरसंचार के मानक के अनुसार शहरी टावरों के बीच की दूरी 500 से 800 मीटर के बीच होनी चाहिए। लेकिन कई जगहों पर यह 1.5 से 2 किलोमीटर से भी अधिक है। गांवों में 3 से 5 किलोमीटर, जो 7 से 8 किलोमीटर तक भी है। इससे नेटवर्क की समस्या अब भी कई जगहों पर है। बीएसएनएल से केवल 36.89% कॉल ही लग पाया ट्राई ने नेटवर्क की स्थिति जानने के लिए जनवरी में इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट कराया। यह टेस्ट समस्तीपुर जिले में किया गया। सबसे बड़ी चिंता बीएसएनएल को लेकर सामने आई। बीएसएनएल से केवल 36.89% कॉल ही लग पाया, जबकि 10.04% कॉल ड्राप हो गई। एयरटेल और जियो ने 99% से अधिक कॉल सफलता दी। डाउनलोड स्पीड में भी बड़ा अंतर सामने आया। जियो ने 158 एमबीपीएस, एयरटेल ने 101 एमबीपीएस, जबकि बीएसएनएल का केवल 12 एमबीपीएस स्पीड रहा। ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार सीवान, रोहतास, कैमूर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और सीमावर्ती इलाकों में टावरों के बीच अधिक दूरी है।

सड़क, बिजली और स्वास्थ्य क्षेत्र में बिहार को मिलेगी नई रफ्तार, अदाणी समूह करेगा भारी निवेश

पटना एशिया के प्रमुख उद्योगपति गौतम अदाणी ने कहा कि बिहार की प्रगति के लिए अदाणी सूमह 50-60 हजार करोड़ निवेश करेगा। बिजली, सड़क, शिक्षा, स्कूल और विश्वविद्यालय के क्षेत्र में भी अदाणी समूह कार्य करेगा। सरकार को सहयोग कर बिहार की प्रगति को बढ़ावा देने के लिए जो भी संभव हो किया जाएगा। गौतम अदाणी ने कहा कि यह निवेश बिहार में सड़क, शिक्षा, ऊर्जा, मल्‍टी मोडल लॉजिस्‍ट‍िक हब के साथ स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में किया जाएगा। इससे बिहार विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर होगा। बिहार में संसाधन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सड़क एवं औद्योगीकरण की जरूरत है। हर घर में 24 घंटे क‍िफायती दर पर बिजली की जरूरत है। अब बिहार विकसित होगा। रविवार की सुबह करीब 11 बजे सारण जिले के दरियापुर प्रखंड अंतर्गत मस्तीचक स्थित अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रम में अदाणी पत्रकारों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रस्तावित “अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल – अदाणी सेंटर फॉर आई डिजीज़ेस” और “अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल – अदाणी ट्रेनिंग सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक मेडिसिन” का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम में भक्ति, सेवा और आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का अनोखा संगम देखने को मिला।बिहार के सारण में बनने वाला यह अत्याधुनिक संस्थान नेत्र चिकित्सा, रिसर्च और मेडिकल प्रशिक्षण के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाएगा। यहां मरीजों को आधुनिक उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के साथ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे बिहार सहित पूर्वी भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। “यह तो बहुत अच्छा है…” प्रतिमा देख ठहर गए गौतम अदाणी अस्पताल परिसर में स्थापित पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की भव्य प्रतिमा ने गौतम अदाणी का विशेष ध्यान खींचा। प्रतिमा के सामने वे कुछ पल के लिए रुक गए और उसे गौर से निहारते रहे। आध्यात्मिक वातावरण से प्रभावित होकर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “यह तो बहुत अच्छा है।” उनके इस आत्मीय भाव ने वहां मौजूद लोगों को उत्साहित कर दिया। इसके बाद उन्होंने गायत्री मंदिर में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। शंख, नगाड़े और स्वागत गीत से गूंज उठा परिसर डॉ. प्रीति अदाणी के साथ पहुंचे गौतम अदाणी का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि शंखध्वनि और नगाड़ों की गूंज से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। अस्पताल के सीईओ और एक्जीक्यूटिव ट्रस्टी मृत्युंजय तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और अस्पताल परिवार के सदस्य मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ भूमि-पूजन भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों से लाए गए गंगाजल और पवित्र मिट्टी को पूजन स्थल पर अर्पित किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार ईंट रखकर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। इसके बाद गौतम अदाणी ने शिलापट्ट का अनावरण किया। आयोजन के दौरान पूरा परिसर श्रद्धा और उत्साह से सराबोर दिखा। नेत्र स्वास्थ्य और ग्रामीण सेवा अभियान को मिलेगी नई दिशा कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और कौशल विकास से जुड़ी नई योजनाओं की भी आधारशिला रखी गई। अस्पताल की ओर से मरीजों की चिकित्सा और परिवहन सुविधा के लिए दस बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। बताया गया कि ‘सेवा ही साधना है’ के उद्देश्य के साथ यह अभियान ग्रामीण इलाकों तक बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। कई गणमान्य लोग रहे मौजूद समारोह में प्रणव अडाणी, एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन रवि कांत, क्लिनिकल एवं रिसर्च एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन डॉ. राजवर्धन आज़ाद और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अजीत कुमार पोद्दार, अखंड ज्योति आई अस्पताल के सीईओ मृत्युंजय तिवारी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि यह परियोजना लाखों जरूरतमंद मरीजों के लिए वरदान साबित होगी और बिहार को नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।

भारत-नेपाल सीमा पर राहत,सुप्रीम कोर्ट ने कस्टम ड्यूटी वसूली पर लगाई अंतरिम रोक

 सोनबरसा  नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल-भारत सीमा से आम नागरिकों द्वारा लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर लगाए गए कस्टम शुल्क की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश से तराई-मधेश के सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोगों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय, वित्त मंत्रालय समेत संबंधित निकायों को निर्देश दिया कि अंतिम निर्णय आने तक दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर सीमा शुल्क नहीं वसूला जाए। दरअसल, नेपाल सरकार ने 2 मई 2082 को जारी अधिसूचना के तहत नेपाल-भारत सीमा से लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम शुल्क अनिवार्य कर दिया था। इस निर्णय के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में विरोध शुरू हो गया था।लोगों का कहना था कि इससे रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही प्रभावित हो रही है। सरकार के इसी निर्णय को चुनौती देते हुए अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग सिंह और प्रशांत विक्रम शाह ने 14 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह व्यवस्था सीमा शुल्क अधिनियम 2081 की भावना के विपरीत है तथा आम नागरिकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। सुनवाई के बाद अदालत ने प्रारंभिक तौर पर याचिकाकर्ताओं की दलीलों को गंभीर मानते हुए अंतरिम आदेश जारी किया। अब अंतिम फैसला आने तक सरकार उक्त प्रावधान के तहत दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कस्टम शुल्क नहीं ले सकेगी। जैसे ही फैसले की बाते बाहर आई देश के सभी महत्वपूर्ण मीडिया ने इसे प्राथमिकता में रखा। अब हर जगह न्यायालय के इस निर्णय पर लोगो का एक ही बात कहना है,जिस देश की अदालत सख्त और इमानदार हो,वहां सरकारें अपनी मनमानी नहीं कर सकती।  

सरकारी अस्पतालों में दवा प्रबंधन होगा डिजिटल, एक्सपायरी दवाओं पर लगेगी रोक

रांची राज्य के सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में कौन-सी दवा कब एक्सपायर होगी, यह जानकारी सरकार के पास रहेगी। इसकी नियमित रूप से जानकारी ऑनलाइन मिलती रहेगी। स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर सी-डैक के माध्यम से सिस्टम तैयार करा रहा है। पहले चरण में यह व्यवस्था मेडिकल कालेजों व जिला अस्पतालों में शुरू होगी। बाद में इसे अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी अपनाया जाएगा। वर्तमान में राज्य स्तर पर मेडिकल हेल्थ एंड इंफ्रस्ट्राक्चर डवलपमेंट कारपोरेशन द्वारा या जिला स्तर पर सिविल सर्जनों के माध्यम से जो भी दवा की खरीदारी होती है, उसकी खपत की निगरानी के लिए कोई ठोस और पुख्ता तंत्र नहीं है। कई बार दवाइयां उपयोग नहीं होने से एक्सपायर्ड हो जाती है। राज्य में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें आवश्यकता से अधिक दवाइयां खरीदी गईं, जिससे बाद में उनका उपयोग नहीं होने से बेकार हो गईं। कई बार अस्पतालों में एसपायर्ड दवाइयां फेंके जाने जलाए जाने की भी शिकायतें आती हैं। अब दवाइयाें की ऑनलाइन निगरानी होने से ऐसे मामलों पर रोक लगेगी। ऑनलाइन निगरानी के लिए अधिकारियों की जिम्मेदार भी तय की जाएगी। दवा एक्सपायर्ड होने के एक-दो माह पहले आनलाइन नोटिस भी संबंधित अधिकारियों या चिकित्सा प्रभारियों को मिलेगा ताकि वे अलर्ट हो सकें। स्वास्थ्य में डिजिटल को दिया जा रहा बढ़ावा स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए डिजिटल को लगातार बढ़ावा दे रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत भी राज्य में कई कार्य किए जा रहे हैं। लैब रिपोर्ट ऑनलाइन मिलने की भी व्यवस्था की जा रही है। मरीजों या उनके परिजनों को उनके मोबाइल पर भी रिपोर्ट आ जाएगी। हेल्थ मैनेजमेंट इंफारमेशन सिस्टम (एचएमआइएस) के तहत भी अस्पतालों की सभी व्यवस्था को ऑनलाइन किया जा रहा है। राज्य स्तर पर राजधानी रांची में कंट्रोल एंड कमांड सेंटर स्थापित करने की भी तैयारी है। निजी अस्पतालों के लिए भी अनिवार्य राज्य सरकार राज्य के सभी निजी अस्पतालों में भी एबीडीएम (आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन) आधारित एचएमआइएस शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। वैसे सभी निजी अस्पताल जो आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना या झारखंड अबुआ स्वास्थ्य योजना के तहत सूचीबद्ध हैं, उनमें इसे अनिवार्य किया गया है।  

झारखंड में बालू आपूर्ति सुधार की कवायद, 6 घाटों से खनन शुरू करने की तैयारी

रांची झारखंड में बालू की आपूर्ति सामान्य करने के लिए खान विभाग ने नीतिगत बदलाव के बाद अब सभी जिलों को निर्देश देना शुरू कर दिया है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि बालू खनन पर रोक हटने के साथ ही शनिवार होने के बावजूद छह बालू घाटों से संबंधित कागजी प्रक्रियाओं को पूर्ण कर दिया गया है। इन्हीं घाटों से कई करोड़ सीएफटी बालू का प्रबंध हो जाएगा। राज्य में 29 और बालू घाटों से संबंधित कागजी कार्रवाई को अनुमति मिलने के बाद पूरे राज्य में उपभोक्ताओं के लिए बालू की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। दुमका समेत कई और जिलों के बड़े बालू घाटों से संबंधित कागजी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। सरकार के लिए राहत की बात यह भी है कि अधिसंख्य बड़े घाटों को ईसी मिल चुकी है और कहीं भी बालू की कमी नहीं है। अनुमान के मुताबिक झारखंड के बालू घाटों पर नौ करोड़ घन फीट से अधिक बालू का स्टाक है जिसे आने वाले दिनों में आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस बार सरकारी कार्यों के लिए भी बालू खरीदने पर चालान कटाने का नियम लागू किया गया है। पहले चरण में जिन छह घाटों को खनन की स्वीकृति प्रदान की गई है उनमें दो रांची में स्थित हैं, दो बोकारो और दो जमशेदपुर में। इसके अलावा तमाम कागजी पूर्ण कर चुके बालू घाटों में दुमका में पांच, खूंटी में दो, जामताड़ा में तीन, हजारीबाग में छह, रांची में एक, गोड्डा में चार को अनुमति मिल जाएगी। इसी तरह पूर्वी सिंहभूम में एक, रामगढ़ में तीन एवं लातेहार में चार बालू घाटों को एक-दो दिनों में अनुमति प्रदान किए जाने की उम्मीद है।  

PMCH में 200 छात्रों की आंतरिक परीक्षा रद्द, नई तारीखें जारी

पटना देश में NEET की परीक्षा रद्द होने के बाद अब पटना में एमबीबीएस की परीक्षा रद्द कर दी गई है।पटना मेडिकल कॉलेज के औषधि विभाग के वर्ष 2022 बैच के एमबीबीएस छात्रों की प्रथम आंतरिक परीक्षा रद्द कर दी गई है। इसमें लिखित, मौखिक और प्रायोगिक परीक्षा शामिल हैं। कदाचार की आशंका को देखते हुए परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। परीक्षा में औषधि विभाग के करीब 200 छात्र शामिल हुए थे। इसकी सूचना पटना मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने औषधि विभाग के विभागाध्यक्ष को दी है। साथ ही कार्रवाई के लिए मेडिकल एजुकेशन यूनिट को भी सूचित किया गया है। परीक्षा 11 और 12 मई को आयोजित की गई थी। 11 मई को लिखित परीक्षा हुई थी, जबकि 12 मई को मौखिक और प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा रद्द करने के साथ ही पटना मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नई तिथियां भी जारी कर दी हैं। नई तिथि के अनुसार लिखित परीक्षा 20 मई को दोपहर एक बजे से दो बजे तक आयोजित की जाएगी। लिखित परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र का पैटर्न भी कॉलेज प्रशासन ने जारी किया है। वहीं 21 मई को मौखिक और प्रायोगिक परीक्षा होगी, जो सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगी। परीक्षा में औषधि विभाग के सभी फैकल्टी सदस्यों की ड्यूटी लगाई गई है। नीट पर्चा लीक में एनटीए की विशेषज्ञ गिरफ्तार इधर नीट यूजी-2026 में बायोलॉजी का प्रश्नपत्र लीक कराने में लिप्त कथित मास्टरमाइंड मनीषा गुरुनाथ मंधारे को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। मनीषा पुणे के एक कॉलेज में बॉटनी की लेक्चरर हैं। उसे एनटीए ने नीट यूजी-2026 में विशेषज्ञ बनाया था। जांच में सामने आया है कि परीक्षा के बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्नपत्रों तक उसकी पूरी पहुंच थी। सीबीआई के अनुसार, बीते अप्रैल में मनीषा मंधारे ने पुणे की मनीषा वाघमारे (जिसे 14 मई को गिरफ्तार किया गया) के जरिये नीट अभ्यर्थियों को जमा किया और उनके लिए पुणे स्थित अपने आवास पर विशेष कक्षाएं चलाईं। इनमें छात्रों को बॉटनी और जूलॉजी के कई सवाल बताए गए। इनमें से अधिकांश प्रश्न तीन मई को आयोजित नीट यूजी के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। मनीषा की गिरफ्तारी लातूर के शिक्षक पीवी कुलकर्णी के बाद हुई है। कुलकर्णी भी नीट के प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समितियों में था। सीबीआई जांच में पता चला है कि केमिस्ट्री व बायोलॉजी पर्चा लीक का स्रोत परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोग ही थे और कुछ बिचौलियों ने लाखों में पर्चे बेचे और छात्रों को विशेष कोचिंग कक्षाओं तक पहुंचाया। वहां, परीक्षा में आने वाले सवाल बताए गए।