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पटना कोचिंग हिंसा केस: कोर्ट ने रौशन आनंद को नहीं दी राहत, खान सर को फिलहाल सुरक्षा

 पटना खान सर की कोचिंग सेंटर पर हुए हमले, मारपीट और तोड़फोड़ से जुड़े केस में आरोपी ज्ञान बिंदू जी.एस. एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद को कोर्ट से झटका लगा है। पटना सिविल कोर्ट ने रौशन आनंद की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। नियमित जमानत याचिका खारिज होने का मतलब यह है कि अभी रौशन आनंद को जेल भी रहना होगा। 2 जून को पटना स्थित खान ग्लोबल इंस्टीच्यूट में 15-20 लोगों के एक समूह ने बिहार की राजधानी पटना स्थित खान ग्लोबल स्टडीज संस्थान में कथित तौर पर तोड़फोड़ की थी और परिसर पर पथराव किया था। इस मामले में दर्ज केस के अनुसार अभियुक्तों पर खान ग्लोबल स्टडीज में प्रवेश कर एक सुरक्षाकर्मी को खींचकर बाहर सड़क पर लाने और उसके साथ मारपीट कर जख्मी कर देने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने रौशन आनंद, अभिषेक कुमार और गौरव कुमार को गिरफ्तार कर 03 जून 2026 को को जेल भेजा था। मामले की प्राथमिकी कदमकुआं थाना में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत कांड संख्या 410/26 के रूप में दर्ज की गई है। ज्ञान बिंदू जी.एस एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद के पक्ष में बहस करते हुए उनके वकील राघव कुमार ने अदालत में कहा था कि इस मामले में धारा 109 लागू नहीं होती। उन्होंने तर्क दिया था कि पीड़ित को लगी चोटें साधारण हैं और मामले में दर्ज सभी धाराएं जमानती हैं। सोमवार को उनके वकील ने अदालत में अपने मुवक्किल को निर्दोष बताया और उन पर लगाये गये आरोपों को निराधार बताते हुए जमानत पर छोड़े जाने की प्रार्थना की थी। हालांकि, अदालत में रौशन आनंद के वकीलों की तर्क काम ना आई और ज्ञान बिंदु के मालिक रौशन आनंद को बेल नहीं मिली। खान सर को गिरफ्तारी से फिलहाल राहत इधर खान ग्लोबल इंस्टीच्यूट के मालिक फैजल खान उर्फ खान सर को मंगलवार को अदालत की तरफ से फिलहाल राहत मिल गई है। अदालत ने खान सर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाई है। दंडात्मक कार्रवाई पर रोक का मतलब यह हुआ कि फिलहाल पुलिस उनपर कोई ऐक्शन नहीं लेगी और उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी। सोमवार को ही खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दिन अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को अदालत ने अपने आदेश में खान सर को फिलहाल राहत दी है। छात्रों ने सड़क पर किया था प्रदर्शन पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में पिछले 02 जून को खान सर के कोचिंग सेंटर पर हमले, मारपीट, तोड़फोड़ और फायरिंग मामले में ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रोशन आनंद और उनके दो सहयोगियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। रौशन आनंद सर को गिरफ्तार किए जाने के बाद कई छात्र उनके समर्थन में उतर आए थे। छात्रों का कहना था कि इस मामले में ज्ञान बिंदु कोचिंग के मालिक रोशन आनंद को फंसाया जा रहा है और वह पूरी तरह निर्दोष हैं। छात्रों ने कहा था कि यह अफवाह गलत है कि खान सर की फीस उनके प्रतिद्वंद्वियों से कम है। उनका दावा था किज्ञान बिंदु के ज्यादातर ऑफ लाईन कोर्सेस की कीमत खान ग्लोबल के मुकाबले कम हैं। छात्रों ने कहा था कि यह साबित होने के बाद कि फायरिंग खान सर के गार्डों ने की थी, प्रशासन को रोशन आनंद को छोड़ देना चाहिए।

यौन हिंसा मामलों पर झारखंड HC सख्त, पीड़ितों के लिए समयबद्ध राहत और पुनर्वास के निर्देश

 रांची झारखंड हाई कोर्ट ने महिलाओं और यौन हिंसा की पीड़िताओं के अधिकारों, सुरक्षा, न्याय और पुनर्वास से जुड़े एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका मामले में राज्य सरकार, पुलिस विभाग और संबंधित एजेंसियों को कई अहम निर्देश दिए हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी संज्ञेय अपराध, विशेषकर यौन हिंसा और POCSO मामलों में, क्षेत्राधिकार का हवाला देकर FIR दर्ज करने से इनकार नहीं किया जा सकता और Zero FIR दर्ज करना पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी है. मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने 8 जून 2026 को सुनाए गए फैसले में कहा कि Zero FIR दर्ज नहीं करना कानून के उल्लंघन के समान है. Zero FIR दर्ज करने में लापरवाही पर अदालत सख्त झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को BNSS 2023 की धारा 173 के तहत Zero FIR दर्ज करने की व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. इसके साथ ही अदालत ने पुलिसकर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम चलाने के भी आदेश दिए हैं. साथ ही, अदालत ने महिला और बाल विकास विभाग को राज्यभर में वन-स्टॉप सेंटरों की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि इन केंद्रों की निगरानी के लिए एक समिति बनाई जाए ताकि मामलों का समय पर निपटारा सुनिश्चित हो सके. यौन हिंसा पीड़ितों के लिए राहत और पुनर्वास पर जोर हाईकोर्ट ने यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास के लिए सरकार को और प्रभावी कदम उठाने को कहा है. अदालत ने पाया कि कई मामलों में पीड़ितों को समय पर सहायता नहीं मिलती, जिससे प्रक्रिया प्रभावित होती है. इसलिए अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों को तुरंत कानूनी और सामाजिक सहायता मिलनी चाहिए. दुष्कर्म पीड़ित बच्चों को मुफ्त शिक्षा और छात्रवृत्ति का आदेश अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि हर जिले में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जो दुष्कर्म से जन्मे बच्चों की शिक्षा और समग्र विकास की निगरानी करेगा. ऐसे बच्चों को बारहवीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी.वहीं, यदि कोई छात्र आईआईटी, एनआईटी, एम्स या आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करता है, तो उसे उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति का लाभ भी दिया जाए. प्रमुख निर्देश और व्यवस्था हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमे की शुरुआत में ही ट्रायल कोर्ट यह तय करे कि पीड़िता को अंतरिम राहत देने की जरूरत है या नहीं. मामले का अंतिम फैसला चाहे किसी भी रूप में आए, पीड़िता के लिए अंतिम मुआवजा तय करना जरूरी होगा. मुआवजे की राशि का भुगतान 30 दिनों के अंदर करने का निर्देश दिया गया है. यौन अपराध से जुड़े मामलों का निपटारा तय समयसीमा में हो और इसके लिए बीएनएसएस की धारा 346 का पालन किया जाए. अदालतों को बेवजह तारीख पर तारीख देने से बचने को कहा गया है, ताकि मामलों का जल्द निष्पादन हो सके. पुलिस महानिदेशक को एक विशेष निगरानी दल बनाने का निर्देश दिया गया है, जो समय-समय पर ऐसे मामलों की समीक्षा करेगा. मीडिया, पुलिस और न्यायालय से जुड़े सभी कर्मियों को पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करना होगा. पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने या उसकी गोपनीयता भंग करने वालों पर सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. दुष्कर्म के मामलों की प्रारंभिक जांच 15 दिनों के भीतर पूरी करने को कहा गया है. अंतिम जांच दो महीने के अंदर समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है. सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पीड़ितों को तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. पॉक्सो से जुड़े मामलों में 24 घंटे के भीतर आश्रय, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करनी होगी. यौन अपराध से पीड़ित महिलाओं और बच्चियों का बयान महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही दर्ज किया जाएगा. सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रतिबंधित चिकित्सीय जांच पद्धति पर पूरी तरह रोक लगाने और उसका सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया गया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रतिबंध का उल्लंघन गंभीर पेशेवर कदाचार माना जाएगा. दूरस्थ क्षेत्रों की किशोरियों और महिलाओं के लिए कानूनी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे. स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में निःशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने पर जोर दिया गया है. यदि किसी पीड़िता और उसके परिवार को सामाजिक कारणों से स्थान बदलना पड़े, तो सरकार उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था करेगी. महिला हेल्पलाइन 181 को और अधिक प्रभावी बनाने तथा उसे आपातकालीन सेवा 112 से जोड़ने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है.

भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे पटना के छात्र आशीष, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस में मिला मौका

पटना बिहार की राजधानी पटना के एक होनहार छात्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य और पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है। राजकीय पॉलिटेक्निक गुलजारबाग, पटना के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्र आशीष राजवंश का चयन चीन के शंघाई में होने वाली प्रतिष्ठित 'वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता' के लिए हुआ है। यह प्रतियोगिता इसी साल 22 सितंबर 2026 को आयोजित होने जा रही है, जिसमें आशीष 'एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस' के बेहद चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। आशीष की इस कामयाबी से न सिर्फ उनके कॉलेज प्रशासन में जश्न का माहौल है, बल्कि पूरे बिहार के युवाओं के लिए यह एक बहुत बड़ी प्रेरणा बनकर सामने आया है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं आशीष आशीष राजवंश संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के छठे सेमेस्टर के छात्र हैं। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का यह शानदार सफर तय किया है। आपको बता दें कि इस वैश्विक मंच तक पहुंचने से पहले आशीष ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शानदार खेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था, और इसके बाद आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। जीएमआर एयरो स्कूल में मिली एडवांस्ड ट्रेनिंग लगातार मिल रही इन बड़ी सफलताओं और उनकी अद्भुत तकनीकी क्षमता के आधार पर ही आशीष का चयन 'जीएमआर एयरो स्कूल ऑफ एविएशन' में एडवांस्ड ट्रेनिंग और मूल्यांकन के लिए किया गया था। वहां उन्होंने अपने हुनर का ऐसा प्रदर्शन किया कि वर्ल्ड स्किल्स शंघाई 2026 के लिए भारत की तरफ से उनका टिकट पूरी तरह पक्का हो गया। इस विशेष ट्रेनिंग ने उनकी स्किल्स को और अधिक धारदार बना दिया है। जानकारों और कॉलेज के प्रोफेसरों का कहना है कि आशीष जिस लगन से तैयारी कर रहे हैं, उससे पूरी उम्मीद है कि वह सितंबर में चीन की धरती पर तिरंगा लहराकर देश के लिए मेडल जरूर जीतेंगे।

देवगांव में बनेगा अत्याधुनिक टेक सेंटर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे शिलान्यास

 खिजरसराय जिले के खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत देवगांव स्थित फल्गु नदी के किनारे लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी सेंटर की आधारशिला 15 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा रखी जाएगी. इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को देखते हुए हेलीपैड निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक तैयारियों के लिए संबंधित अधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है. स्थल पर लगातार अधिकारियों का निरीक्षण एवं समीक्षा जारी है. जीतन राम माझी ने किया स्थल निरीक्षण इसी क्रम में सोमवार को केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी स्थल का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने नीमचक बथानी के एसडीओ एवं अन्य अधिकारियों के साथ परियोजना की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने एमएसएमई विभाग के विकास आयुक्त (डीसी) से भी फोन पर बातचीत कर परियोजना की प्रगति की जानकारी ली. गौरतलब है कि एमएसएमई विभाग द्वारा लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से इस टेक्नोलॉजी सेंटर का निर्माण कराया जाएगा. परियोजना के लिए बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि भूमि पूजन के बाद मुख्य निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है. साधु नगर में पेयजल संकट की शिकायत निरीक्षण के दौरान समीपवर्ती साधु नगर की महिलाओं ने केंद्रीय मंत्री से पेयजल समस्या को लेकर शिकायत की. महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

निवेश बढ़ाने की तैयारी में JIADA, 99 साल की लीज समेत कई सुझाव मिले

 रांची झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (JIADA) राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और नियमों को सरल बनाने के लिए नया ‘जियाडा रेगुलेशन 2026’ लाने की तैयारी में है. इस नए रेगुलेशन का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सोमवार को रांची के होटल रेडिसन ब्लू में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में जियाडा के एमडी वरुण रंजन ने विभिन्न उद्योग संगठनों के उद्यमियों से सीधा संवाद किया और उनसे पूछा कि वे कैसा रेगुलेशन चाहते हैं? एमडी ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य निवेश को आसान बनाना और उद्यमियों की समस्याओं को दूर करना है. 99 साल के लिए लीज की मांग कार्यक्रम में शामिल FJCCI, JASSIA और AIADA के प्रतिनिधियों ने जियाडा के सामने अपनी कई महत्वपूर्ण मांगें और सुझाव रखें. जिसमें उद्यमियों ने कहा कि पहले औद्योगिक क्षेत्रों में 99 साल की लीज पर जमीन मिलती थी, जिसे घटाकर 30 साल कर दिया गया है. बिहार समेत कई राज्यों ने इसे दोबारा 99 साल कर दिया है, झारखंड में भी यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए. साथ ही साथ निवेशकों ने ऐसे ‘प्लग एंड प्ले’ परिसरों की मांग की जहां विकसित भूमि, तैयार शेड, बिजली, पानी, सड़क और अपशिष्ट प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) जैसी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों, ताकि उद्योग तुरंत शुरू हो सकें. ओनरशिप ट्रांसफर (स्वामित्व हस्तांतरण) को आसान बनाने के लिए ज्वाइंट वेंचर के प्रावधान शामिल करने का भी सुझाव दिया गया. इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए 10 फीसदी आवासीय सुविधा की मांग की गई. इस पर जियाडा की ओर से बताया गया कि इंडस्ट्रियल एरिया में वर्किंग वुमेंस हॉस्टल का निर्माण कराया जा रहा है. आदिवासी उद्यमियों की अनदेखी का लगा आरोप एक तरफ जहां जियाडा नए नियमों पर मंथन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ‘ट्राईबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ (TICC&I – टिक्की) झारखंड चैप्टर ने इस बैठक को लेकर सरकार और अधिकारियों के खिलाफ गहरी नराजगी व्यक्त की है. टिक्की ने सरकार पर आदिवासी उद्यमियों की घोर उपेक्षा करने का आरोप लगाया है. टिक्की के प्रदेश अध्यक्ष बैद्यनाथ मांडी ने कहा कि 12 जुलाई 2019 को जियाडा के आठवीं निदेशक मंडल की बैठक में एसटी-एससी (ST-SC) उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्रों में 50% की छूट पर जमीन उपलब्ध कराने का फैसला सर्वसम्मति से पास हुआ था, लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी इसे धरातल पर लागू नहीं किया गया. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि झारखंड को बने 25 वर्ष हो गए, लेकिन आदिवासियों के लिए कोई स्पष्ट उद्योग-व्यापार नीति नहीं बनी. इस महत्वपूर्ण बैठक में भी टिक्की जैसे बड़े स्टेकहोल्डर को आमंत्रित नहीं किया गया. इस बात का समर्थ करने वालों में बसंत तिर्की, राज मार्शल मार्डी, गोमिया सुंडी सहित कई अन्य सदस्य मौजूद थे.

गार्ड से गोली चलाने के आरोप मामले में खान सर को अंतरिम राहत, कोर्ट ने मांगी केस डायरी

पटना  पटना कोर्ट ने कोचिंग फायरिंग केस में फैजल खान उर्फ खान सर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। जिला जज की अदालत ने सोमवार को खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला रिजर्व कर लिया था, जो आ गया है। अदालत ने खान सर के मामले की केस डायरी के साथ-साथ उनका आपराधिक इतिहास पुलिस से पेश करने कहा है और अब इस पर अगली सुनवाई 30 जून को होगी। किसी भी कोर्ट में आम तौर पर जमानत की अर्जी दायर होने पर पुलिस से केस डायरी और आरोपी की क्रिमिनल हिस्ट्री मांगी जाती है। खान सर को अग्रिम जमानत नहीं मिली है, लेकिन गिरफ्तारी पर रोक लगने से उनकी चिंता और मुश्किलें दोनों कम हो गई हैं। बता दें कि 2 जून की रात पटना में खान सर के कोचिंग सेंटर खान ग्लोबल स्टडीज पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया था, जिसके आरोप में ज्ञान बिंदु कोचिंग के मालिक रौशन आनंद सर जेल में बंद हैं। हमले के दौरान खान सर के दो गार्ड द्वारा हवाई फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों गार्ड को अरेस्ट कर जेल भेज दिया था और बाद में खान सर पर भी मुकदमा दर्ज कर लिया था। तब से खान सर पुलिस की पहुंच से दूर रहकर गिरफ्तारी से न्यायिक राहत के इंतजार में थे। अदालत ने खान सर पर पुलिस द्वारा किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगाई है। इसका व्यावहारिक मतलब यह हुआ कि खान सर की गिरफ्तारी पर फिलहाल कोर्ट से रोक लग गई है। अदालत ने पुलिस से कहा है कि वो खान सर का आपराधिक इतिहास और इस केस की डायरी भी कोर्ट में पेश करे। खान सर की अग्रिम जमानत अर्जी पर अब अगली सुनवाई 30 जून को होगी। पुलिस ने हत्या का प्रयास और आर्म्स ऐक्ट की धाराओं के तहत खान सर पर मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद से खान सर गायब थे। खान सर को पकड़ने पुलिस कोचिंग सेंटर भी गई थी, लेकिन वहां मिले नहीं। तब से इस तरह की अटकलें थीं कि खान सर वकील के जरिए अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकते हैं या कोई उपाय ना दिखे तो सीधे कोर्ट में सरेंडर कर सकते हैं। सोमवार को खान सर की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने अपन फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब खान सर को अदालत से बड़ी राहत मिल गई है। फैजल खान के वकील ने क्या कहा?     खान सर के वकील अरविंद कुमार महुआर ने बताया कि मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी. फिलहाल कोर्ट ने खान सर को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. इसका मतलब है कि पुलिस अभी उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती।      वकील ने कहा कि अदालत ने केस डायरी और अन्य जरूरी दस्तावेज तलब किए हैं. अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है, जिसकी जानकारी बाद में दी जाएगी.     उन्होंने बताया कि अग्रिम जमानत याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार किया और अंतरिम संरक्षण (इंटरिम प्रोटेक्शन) दिया. जब तक कोर्ट का अगला आदेश नहीं आता, तब तक खान सर स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते हैं।      वकील के मुताबिक फिलहाल खान सर को कोर्ट में पेश होने की कोई जरूरी नहीं है. अगर अदालत की ओर से कोई निर्देश दिया जाता है, तभी उन्हें उपस्थित होना होगा. अब मामले में आगे की सुनवाई केस डायरी आने के बाद होगी, जिसके बाद जमानत याचिका पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।      

सीतामढ़ी में दर्दनाक हादसा: आंधी में घर पर गिरा पीपल का पेड़, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत

पटना पूरे बिहार में मौसम का मिजाज बिहारियों को खूब छका रहा है। कई जिलों में भीषण गर्मी का प्रकोप है तो कई जगहों पर आंधी-बारिश ने लोगों को हैरान कर रखा है। सीतामढ़ी जिले में आंधी-बारिश की वजह से बड़ा हादसा भी हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहां तेज आंधी के बाद एक घर पर पेड़ गिर गया। पेड़ गिरने की वजह से एक ही परिवार के 5 सदस्यों की मौत हो गई है। घटना सोमवर की रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहां एक कच्चे मकान पर पीपल का पेड़ गिर पड़ा। अचानक मकान पर पेड़ गिरने की वजह से मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। रात के वक्त घर के अंदर सो रहे लोग मकान के मलबे में दब गए। हालांकि, गांव वालों ने मौके पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया और लोगों को मलबे के नीचे से निकालने की कोशिश शुरू की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय लोगों ने बताया है कि यह पीपल का पेड़ काफी पुराना था। पेड़ की जड़ें कमजोर हो चुकी थीं। अचानक तेज हवा चलने की वजह से पेड़ मकान पर आ गिरा जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। इधर इस घटना की सूचना मिलने के बाद सदर एसडीपीओ राजीव कुमार भी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत और बचाव कार्य का जायजा लिया। मृतकों में सिकंदर सहनी की 28 वर्षीय पत्नी पूजा देवी, 7 साल का उनका बेटा राजकुमार, 5 साल की बेटी शिवानी, 2 साल के बेटे वीरभद्र कुमार और महीने के बेटे लाइगर कुमार शामिल हैं। इस हादसे में वीरभद्र घायल हो गया था जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान वीरभद्र ने दम तोड़ दिया। आंधी से कई जगह गिरे पेड़ जिले में सोमवार को दिनभर भीषण गर्मी और उमस से लोग परेशान रहे। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। हालांकि शाम होते-होते मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ कई इलाकों में बारिश हुई। जिससे लोगों को काफी राहत मिली। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम दर्जे की वर्षा दर्ज की गई। बारिश शुरू होने के साथ तापमान में गिरावट आई और वातावरण सुहावना हो गया। दिनभर की गर्मी से परेशान लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं तेज आंधी के कारण कई स्थानों पर पेड़ और पेड़ों की डालियां टूटकर सड़कों पर गिर गईं। जिससे कुछ समय के लिए आवागमन बाधित रहा। बाईपास रोड स्थित चक महिला के राजकीय मध्य विद्यालय के समीप एक बड़ा पेड़ बिजली के तार पर गिर पड़ा। घटना के बाद गौशाला और डुमरा की ओर जाने वाले मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। सड़क पर पेड़ गिरने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। आगे कैसा रहेगा मौसम इधर सीतामढ़ी जिले में मौसम को लेकर विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि अगले कुछ दिनों तक जिले में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है। हालांकि, कहीं-कहीं हल्के बादल छाने की संभावना है। लेकिन इससे तापमान में विशेष कमी आने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। लगातार बनी गर्मी ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है और हर किसी को अब मानसून की बारिश का इंतजार है।

नामांकन खत्म होते ही तय हुई जीत, बिहार विधानपरिषद की 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन

पटना बिहार विधानपरिषद चुनाव के लिए एनडीए और महागठबंधन उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया सोमवार को पूरी हो गई। अंतिम दिन एनडीए की ओर से नौ उम्मीदवारों ने नामांकन किया जबकि महागठबंधन की ओर से केवल एक ही नामांकन किया । विधानपरिषद की दस सीटों के लिए दस उम्मीदवार मैदान में हैं। तीन बजे नामांकन की अवधि खत्म होते ही इन सभी उम्मीदवारों की जीत भी पक्की हो गई क्योंकि, दीपक प्रकाश के नामांकन नहीं करने से वोटिंग की स्थिति नहीं बन पाई। 18 जून को मतदान होना सुनिश्चित किया गया था नामांकन करने वालों में जदयू से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद के अलावा भाजपा से संजय प्रकाश मयूख, पवन सिंह, अनिल ठाकुर और शीला पंडित जबकि लोजपा ने अशरफ अंसारी हैं। निशांत कुमार सदन का सदस्य बनने से पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन चुके हैं। राजद ने राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील सिंह को टिकट दिया है। उन्हें दूसरी बार यह मौका मिला है। सुनील सिंह ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। हालांकि, लालू की बेटी और तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्या ने सुनील सिंह को टिकट दिए जाने का विरोध किया है। बिहार विधान परिषद की जिन दस सीटों के चुनाव हो रहे हैं उनमें सात सीटें विधान पार्षदों का टर्म पूरा होने के कारण खाली हो रहे हैं। दो सीट सम्राट चौधरी और और भगवान सिंह कुशवाहा के विधानसभा जाने से खाली हुआ। सभी का टर्म 28 जून को पूरा हो रहा है। इन सीटों पर जीतने वाले उम्मीदवारों का कार्यकाल 6 सालों का होगा। एक सीट नीतीश कुमार के इस्तीफे के कारण खाली हुआ। इस सीट पर जदयू ने ललन प्रसाद को मौका दिया है। ललन प्रसाद का कार्यकाल चार वर्षों का होगा। इस चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा के मंत्री बेटे दीपक प्रकाश को मौका नहीं मिला। एनडीए ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया। सोमवार को अंतिम दिन उन्होंने नामांकन भी दाखिल नहीं किया। इस वजह से उनके मंत्री पद पर भी तलवार लटक गई है क्योंकि, दीपक प्रकाश वर्तमान में किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। उपेंद्र कुशवाहा खेमे में इससे नाराजगी देखी जा रही है। सोमवार को एनडीए के सभी घटक दलों के नेता नामांकन में पहुंचे पर उपेंद्र कुशवाहा और दीपक प्रकाश नहीं दिखे। इससे पहले रविवार को पार्टी के अधिवेशन में उपेंद्र कुशवाहा नें कहा कि जदयू और आरएलएम की विचारधारा मेल खाती है पर भाजपा की अलग है। भाषण में उनका दर्द भी छलका। उपेंद्र कुशवाहा पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए दिल्ली जा रहे हैं।

RJD में अंदरूनी कलह के संकेत? MLC टिकट विवाद के बीच रोहिणी आचार्य की पोस्ट चर्चा में

 पटना राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) द्वारा विधान परिषद चुनाव के लिए सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी और पार्टी नेता रोहिणी आचार्य ने इस फैसले पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर एक तीखी पोस्ट साझा की है. उनकी पोस्ट को पार्टी के भीतर असंतोष और आंतरिक मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।  रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में किसी का नाम लिए बिना ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए जाने पर नाराजगी जताई. उन्होंने लिखा कि गुटबाजी – भीतरघात – विश्वासघात , मक्कारी जिसकी फितरत , विरोधियों से जिसकी मिलीभगत, नजदीकियों की बात बता कर उगाही – वसूली करना जिसका धंधा, जो अपनी झूठी धौंस जताने के लिए पार्टी कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ताओं – पदाधिकारियों को सामने बिठा कर बहन – बेटियों के बारे में ओछी – अमर्यादित बातें करता है, उसको कैसे "उसके" ही द्वारा उम्मीदवार बना दिया गया।   रोहिणी की पोस्ट से चर्चाओं का दौर शुरू रोहिणी ने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि क्या पार्टी में अब समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं व नेताओं की कमी हो गई है. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने और पार्टी को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी जिन लोगों को सौंपी गई है, वे ऐसे व्यक्तियों को आगे बढ़ा रहे हैं. जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।  आरजेडी नेता की इस टिप्पणी को सीधे तौर पर सुनील कुमार सिंह की उम्मीदवारी से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि रोहिणी ने अपने पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे उसी फैसले के खिलाफ प्रतिक्रिया माना जा रहा है. उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बिहार में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।  रोहिणी ने पार्टी के भविष्य को लेकर भी जताई चिंता रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि पार्टी की स्थापना के समय से लेकर आज तक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े एक नहीं अनेकों समर्पित, सम्मानित , जमीन से जुड़े कट्टर लालूवादी अल्पसंख्यक चेहरे हैं. यादव , दलित , पिछड़े व वंचित समाज से आने वाले वरिष्ठ व युवा लोग हैं , ऐसे लोगों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है और पार्टी हित में तो कतई नहीं है।  फिलहाल आरजेडी की ओर से रोहिणी आचार्य की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन उनकी पोस्ट ने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व से जुड़े सवालों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 

एनएच-31/231 पर 143 किमी फोरलेन निर्माण तेज, कोसी-सीमांचल को मिलेगा बड़ा लाभ

भागलपुर  राष्ट्रीय राजमार्ग-31/231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को फोरलेन में तब्दील करने की बहुप्रतीक्षित परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। इस 3936 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को लेकर रविवार को बरौनी में पथ निर्माण मंत्री इं. कुमार शैलेंद्र ने एनएचएआई और पीआईयू-बेगूसराय के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। यह परियोजना सीमांचल और कोसी क्षेत्र के विकास के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। हाल ही में केंद्र सरकार की कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद अब इस परियोजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि परियोजना का अवार्ड अगस्त 2026 तक होने की संभावना है। लगभग 90 प्रतिशत भूमि पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे निर्माण कार्य शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। ढाई वर्ष में पूरा होगा निर्माण कार्य परियोजना के तहत निर्माण कार्य की अवधि ढाई वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि इसके बाद 27.5 वर्षों तक रखरखाव का प्रावधान रहेगा। कुल 143.53 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सड़क को आधुनिक मानकों के अनुसार विकसित किया जाएगा। पूर्णिया में 6.73 किलोमीटर लंबा नया बाइपास भी बनाया जाएगा, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा। इसके साथ ही सड़क पर एक इंटरचेंज, नौ फ्लाइओवर, 29 अंडरपास, तीन फुट ओवरब्रिज, 30 बस-बे और आठ ट्रक ले-बाय का निर्माण प्रस्तावित है। कोशी नदी पर बनेगा 1090 मीटर लंबा पुल परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में कुरसेला में कोशी नदी पर 1090 मीटर लंबा दो लेन का मेजर ब्रिज बनाया जाएगा। इसके अलावा चार अन्य बड़े पुल और छह छोटे पुल भी प्रस्तावित हैं। अधिकारियों के अनुसार यह संरचना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और यातायात को सुगम बनाएगी। इससे लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्याओं में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सर्विस रोड और आधुनिक डिजाइन स्पीड घनी आबादी वाले क्षेत्रों और प्रमुख जंक्शनों को ध्यान में रखते हुए परियोजना में 65 किलोमीटर सर्विस रोड और करीब 101 किलोमीटर स्लिप रोड का प्रावधान किया गया है। हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड के अनुरूप तैयार किया जाएगा। सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक और सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। इससे दुर्घटनाओं में कमी आने और यातायात संचालन में सुधार की उम्मीद है। सीमांचल-कोसी क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद खगड़िया से पूर्णिया की दूरी मात्र दो घंटे में तय की जा सकेगी। इससे खगड़िया, मानसी, महेशखूंट, पसराहा, नारायणपुर, बिहपुर, खरीक, नवगछिया, भागलपुर, कुरसेला, कटिहार और पूर्णिया जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय से इस परियोजना को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।