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सेवानिवृत्ति से एक साल पहले होगा रिकॉर्ड सत्यापन, खत्म होगी भुगतान में देरी

धनबाद  कोयला कर्मियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही भविष्य निधि (पीएफ) और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफ) ने बड़ी पहल शुरू की है। इसके तहत अब कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से एक वर्ष पहले ही उनके पीएफ एवं पेंशन संबंधी सभी अभिलेखों का सत्यापन और अद्यतन कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस संबंध में सीएमपीएफ मुख्यालय ने देशभर के अपने 23 क्षेत्रीय कार्यालयों के क्षेत्रीय आयुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सीएमपीएफ का कार्यालय कन्याकुमारी से लेकर जम्मू और कश्मीर तक फैला है। इसकी पुष्टि सीएमपीएफ के आयुक्त सजिश कुमार एन ने भी की। कहा कि इससे कई तरह के लाभ उन्हें मिलेगा। साथ ही लोगों को परेशानी भी कम होगी। आपको बता दें कि सीएमपीएफ में कोल इंडिया के साथ टाटा, सेल, अडानी सहित कोयला खनन करने वाली सरकारी व गैर सरकारी कंपनी केे कर्मियों को पीएफ व पेंशन कार्य संचालित होता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले करीब 17 हजार कोयला कर्मियों को पीएफ और पेंशन भुगतान के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। संगठन का उद्देश्य है कि कर्मचारी के सेवा निवृत्त होते ही उसका दावा पहले से तैयार रहे और उसे समय पर सभी देय लाभ प्राप्त हो सकें। सीएमपीएफ अधिकारियों के अनुसार, कोयला उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों का सेवा काल लंबा होता है और इस दौरान उनका कई बार एक परियोजना, क्षेत्र या कंपनी से दूसरी इकाई में तबादला होता रहता है। ऐसे मामलों में सेवा अभिलेख, अंशदान विवरण और नामांकन संबंधी सूचनाओं के मिलान में समय लगता है, जिसके कारण कई बार सेवानिवृत्ति के बाद पीएफ एवं पेंशन भुगतान में विलंब की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्ति से 12 माह पूर्व संबंधित कर्मचारी की पूरी सेवा पुस्तिका, अंशदान रिकार्ड, नामांकन, परिवार विवरण और पेंशन पात्रता की जांच की जाएगी। किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर उसे समय रहते दूर कर लिया जाएगा। इससे अंतिम समय में दस्तावेजों की कमी, सेवा अवधि के मिलान अथवा तबादलों से जुड़े विवादों का समाधान पहले ही हो सकेगा। सीएमपीएफ के इस कदम से देशभर के लगभग साढ़े तीन लाख कोयला कर्मियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। ये सभी कर्मचारी नियमित रूप से सीएमपीएफ में अंशदान करते हैं और सेवानिवृत्ति के बाद इसी कोष से उन्हें पीएफ तथा पेंशन का लाभ प्राप्त होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिकार्ड के पूर्व सत्यापन और डिजिटलीकृत निगरानी व्यवस्था से न केवल भुगतान प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि कर्मचारियों का संगठन पर भरोसा भी और मजबूत होगा।

एमएलसी टिकट विवाद के बाद बिहार की सियासत में बढ़ी हलचल, दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर सवाल

पटना बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर मची सियासी हलचल के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा इस समय जबरदस्त चर्चाओं में हैं। दरअसल, चर्चाओं की सबसे बड़ी वजह यह है कि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश वर्तमान में सरकार में मंत्री हैं, लेकिन इस बार एमएलसी चुनाव में एनडीए (NDA) गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया है। टिकट न मिलने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह बात तेजी से फैल रही है कि दीपक प्रकाश को जल्द ही अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा या उन्हें पद से हटना पड़ेगा। इन तमाम विपरीत चर्चाओं और झटकों के बावजूद उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को पटना में एक बड़ा राजनीतिक दावा ठोक दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि रालोमो बिहार में सत्ता की मजबूत हिस्सेदार है और आगे भी सरकार में उनकी यह हिस्सेदारी पूरी मजबूती के साथ बनी रहेगी। हालांकि, बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश अभी बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। नियम के मुताबिक, मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें शपथ लेने के छह महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना जरुरी है। लेकिन अब एमएलसी चुनाव में एनडीए ने उन्हें सीट ही नहीं दी है। इसके बाद निकट भविष्य में चुनाव भी नहीं है। जाहिर है ऐसे में दीपक प्रकाश का मंत्री पद पर बने रहना मुश्किल है। पटना महाधिवेशन में विधायक आलोक कुमार सिंह बने नए प्रदेश चीफ उपेंद्र कुशवाहा रविवार को पटना के रवींद्र भवन में आयोजित पार्टी के राज्य महाधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने गठबंधन और सत्ता में बने रहने के दावे के साथ-साथ संगठन को लेकर भी एक बहुत बड़ी घोषणा की। उपेंद्र कुशवाहा ने सार्वजनिक मंच से पार्टी के नए बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में विधायक आलोक कुमार सिंह के नाम का औपचारिक ऐलान किया। आलोक कुमार सिंह को बिहार संगठन की कमान सौंपते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी अब नए तेवर और कलेवर के साथ सूबे के कोने-कोने में अपनी पकड़ मजबूत करेगी। स्वास्थ्य मंत्री निशांत को मिले डिप्टी सीएम की कमान:उपेंद्र कुशवाहा इसी महाधिवेशन के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार सरकार के आंतरिक समीकरणों को लेकर भी एक बड़ा और दिलचस्प बयान देकर राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू नेतृत्व को एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने पुरजोर तरीके से पैरवी करते हुए कहा कि अगर निशांत को डिप्टी सीएम की कमान सौंपी जाती, तो यह पूरी तरह से खुद जेडीयू के राजनीतिक हित की बात होती। गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत को डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग बिहार की सियासत में पहली बार नहीं उठी है, बल्कि इससे पहले भी जेडीयू के ही कई जमीनी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता लगातार उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी देने की वकालत करते रहे हैं।

सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस विस्तार पर संकट, कैबिनेट मंजूरी के इंतजार में रुकी योजना

रांची  झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल वित्तीय संकट में फंस गई है। राज्य में 100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस (एसओई) खोलने की तैयारी पूरी होने के बावजूद करीब 400 करोड़ रुपये की जरूरत के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनवरी 2026 में ही इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी, लेकिन अब तक इसे कैबिनेट की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ऐसे में इन स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से पढ़ाई शुरू होने की संभावना नहीं है। शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी 24 जिलों में 100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस के लिए विद्यालयों का चयन कर लिया है। इन स्कूलों को सीबीएसइ पैटर्न पर विकसित किया जाना है। हालांकि योजना को धरातल पर उतारने के लिए अभी कैबिनेट की मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति, सीबीएसई संबद्धता, भवन और अन्य आधारभूत संरचनाओं का विकास तथा शिक्षकों की व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण चरण बाकी हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव को कैबिनेट तक पहुंचने में अभी दो से तीन माह का समय लग सकता है। इसके बाद वित्तीय स्वीकृति मिलने और निर्माण व अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगेगा। यही वजह है कि अगले शैक्षणिक सत्र से इन विद्यालयों का संचालन संभव नहीं दिख रहा है। रांची में खुलेंगे सबसे ज्यादा 10 नए एसओई 100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस में रांची जिले को सबसे अधिक 10 विद्यालय मिले हैं। वर्तमान में जिले में पांच एसओई संचालित हैं। इसके अलावा धनबाद, गिरिडीह और पलामू में आठ-आठ, गढ़वा और पूर्वी सिंहभूम में सात-सात, बोकारो, हजारीबाग और पश्चिमी सिंहभूम में छह-छह तथा देवघर में पांच नए विद्यालय प्रस्तावित हैं। एक स्कूल पर तीन से पांच करोड़ रुपये खर्च का अनुमान शिक्षा विभाग के अनुमान के अनुसार एक सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस को विकसित करने में औसतन तीन से पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें भवन उन्नयन, स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। 100 नए विद्यालयों पर कुल खर्च करीब 400 करोड़ रुपये आंका गया है। 80 से बढ़कर 180 होगी एसओई की संख्या राज्य में वर्तमान में 80 एसओई संचालित हैं, जिन्हें सीबीएसइ बोर्ड से संबद्धता प्राप्त है। इनके बेहतर शैक्षणिक परिणामों को देखते हुए सरकार इनकी संख्या बढ़ाकर 180 करने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि वित्तीय स्वीकृति मिलने तक 100 नए विद्यालयों का सपना कागजों से जमीन पर उतरने का इंतजार करता रहेगा।  

डाक विभाग की भूमिका पर आधारित प्रदर्शनी ‘गेट योरसेल्फ काउंटेड’ का आयोजन

 रांची  डिजिटल युग से पहले देश में जनगणना जैसे विशाल राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में डाक विभाग की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण थी, इसकी झलक रांची के आड्रे हाउस में आयोजित दो दिवसीय प्रदर्शनी गेट योरसेल्फ काउंटेड, स्वतंत्र भारत में जनगणना का एक डाक इतिहास में दिखाया गया। इस प्रदर्शनी 1951 से 2011 तक के दुर्लभ दस्तावेजों, पोस्टकार्डों, डाक टिकटों, प्रथम दिवस आवरणों और अन्य अभिलेखीय सामग्रियों के माध्यम से बताया गया है कि कैसे डाक व्यवस्था ने देश की जनगणना प्रक्रिया को गति देने और लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद भारत को चुनावों के संचालन और नियोजित विकास के लिए विश्वसनीय जनसंख्या आंकड़ों की आवश्यकता थी। इसी महत्व को देखते हुए संविधान सभा ने संविधान लागू होने से पहले ही जनगणना अधिनियम, 1948 पारित किया था। उस समय सीमित संचार साधनों और कम साक्षरता दर के कारण जनगणना के प्रति जागरूकता फैलाना बड़ी चुनौती थी। ऐसे में डाक विभाग ने न केवल प्रचार-प्रसार का कार्य संभाला, बल्कि गणनाकर्मियों और अधिकारियों के बीच संवाद स्थापित कर जनगणना की प्रगति पर नजर रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रदर्शनी के क्यूरेटर विकास कुमार, जो अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक हैं,ने इस अनूठे संग्रह को तैयार किया है। यह भ्रमणशील प्रदर्शनी इससे पहले जम्मू, बेंगलुरु और लखनऊ में भी प्रदर्शित की जा चुकी है। प्रदर्शनी का उद्घाटन झारखंड के निदेशक, जनगणना संचालन प्रभात कुमार ने किया। आयोजक विकास कुमार ने कहा कि मोबाइल आधारित जनगणना प्रणालियों के दौर में यह प्रदर्शनी उस ऐतिहासिक यात्रा को याद करने का अवसर है, जिसमें डाकघरों और डाककर्मियों ने देश की सांख्यिकीय व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस प्रदर्शनी में दिखा जनगणना का इतिहास 1951 से 2011 तक 11 बार बदले थे जनगणना के मुहर। जनगणना की शुरूआत डाक से हुई थी, डाक के माध्यम से ही जनगणना की जागरूकता और अभियान चलाया गया था। 15 भाषाओं में जनगणना की जानकारी के लिए विज्ञापन थे, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, बंगला , गुजराती , कन्नड, कोंकणी, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, सिंधी, तमिल,तेलुगू, उर्दू शामिल थे।  

रोशन आनंद के बाद खान सर पर कानूनी शिकंजा, अग्रिम जमानत की तैयारी

पटना पटना से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां मशहूर शिक्षक खान सर और रोशन आनंद के बीच का विवाद अब कानूनी रूप से गंभीर मोड़ ले चुका है. रोशन आनंद को पहले ही जेल भेजा जा चुका है, वहीं अब खान सर की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं. उनके खिलाफ भी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. इस पूरे मामले को लेकर बिहार तक के संवाददाता शुभम निराला ने पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता यश माथुर से खास बातचीत की. एडवोकेट यश माथुर ने बताया कि खान सर पर जो धाराएं लगाईं गईं हैं, वे काफी गंभीर हैं और इनमें सजा का प्रावधान भी कड़ा है. उन्होंने बताया कि इस केस में आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत सार्वजनिक स्थान पर हथियार के इस्तेमाल को लेकर मामला दर्ज किया गया है, जिसमें अधिकतम 2 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. इसके अलावा धारा 27 के तहत हथियार के इस्तेमाल को लेकर कम से कम 3 साल की सजा हो सकती है. वहीं धारा 35 के तहत संयुक्त जिम्मेदारी (Joint Liability) भी तय की जा सकती है. सबसे गंभीर पहलू यह है कि हत्या के प्रयास जैसी धारा भी जोड़ी गई है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है. हालांकि, एडवोकेट यश माथुर ने यह भी स्पष्ट किया कि खान सर को अग्रिम जमानत मिल सकती है. लेकिन यह पूरी तरह अदालत के विवेक और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा. फिलहाल इस पूरे मामले में आगे क्या कानूनी मोड़ आता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. फैजल खान नहीं करेंगे सरेंडर इधर, खबर सामने आई है कि मामले फैजल खान (खान सर) सरेंडर नहीं करेंगे. इसकी जानकारी फैजल खान के वकील अरविंद कुमार मऊआर ने दी. वकील के मुताबिक हम अग्रिम जमानत मांगेंगे. क्योंकि खान सर के गार्ड्स ने आत्मसुरक्षा में गोली चलाई थी. इस फायरिंग से किसी को नुकसान नहीं पहुंचा है. वहीं फैजल खान के वकील से जब पूछा गया है कि क्या खान सर कोर्ट पहुंचे हैं तो उन्होंने कहा कि खान सर कोर्ट क्यों पहुंचेंगे?

‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना को मिलेगा बढ़ावा, खेल ढांचे के विस्तार पर जोर

पटना बिहार में खेलों को बढ़ावा देने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने कई बड़े ऐलान किए हैं। सम्राट चौधरी सरकार ने साफ किया है कि बिहार में अब ओलंपिक जैसी सुविधाएं मिलेंगी। सरकार ने ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना को भी बढ़ावा देने का मन बनाया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेलों को बिहार में ओलंपिक स्तर की सुविधाएं दी जायेंगी। मुख्यमंत्री ने शनिवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में खेल विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियमों का निर्माण समय सीमा के भीतर पूरा करने और इनके संचालन एवं रख-रखाव की व्यवस्था पीपीपी मॉडल के माध्यम से करने का निर्देश दिया। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और तमाम उपकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। विश्वस्तरीय खेल अवसंरचनाओं का निर्माण चरणबद्ध ढंग से कराया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल करने वाले युवा एवं प्रतिभावान खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा रहा है। बेहतर खेल प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के साथ-साथ उन्हें ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने खेल विश्वविद्यालय, राजगीर में ऐसे पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता देने का कहा, जिनमें नवाचार, देशस्तर पर उपयोगी एवं रोजगार की अधिक संभावनाएं हों। जिला स्तरीय खेल भवन-सह-व्यायामशालाओं के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए तथा इनके संचालन एवं रख-रखाव के लिए पीपीपी मॉडल की संभावनाओं का आकलन किया जाए। इसके पहले खेल सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने खेल अवसंरचना का विकास, विभिन्न योजनाओं की अद्यतन स्थिति, खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं, प्रोत्साहन एवं सम्मान तथा खेल विकास की भावी कार्य योजना की जानकारी दी। बैठक में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह व संजय कुमार सिंह, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रविन्द्रण शंकरण, खेल निदेशक आरिफ अहसन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पंचायत स्तर पर नियमित खेल उत्सवों एवं खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने समक्षा बैठक के दौरान कहा कि पंचायत खेल क्लबों से पुराने खिलाड़ियों, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों को जोड़कर खेल संस्कृति को विकसित किया जाए। साथ ही जिला एवं प्रखंड स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार करने का भी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया। पटना के डुमरी खेल परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनेगा मुख्यमंत्री ने पटना के डुमरी खेल परिसर में सभी खेलों के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम का निर्माण तथा राजगीर में क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 31 दिसंबर तक पूर्ण करने का निर्देश दिया। कहा कि राज्य की कुल 8053 ग्राम पंचायतों में से 5266 में खेल मैदान का निर्माण हो चुका है। शेष का निर्माण कार्य जल्द पूर्ण होगा। उन्होंने ग्राम पंचायतों में वीबी जी रामजी के माध्यम से खेल मैदानों के निर्माण का निर्देश दिया।

JPSC सिविल जज PT का संशोधित रिजल्ट जारी, 47 और अभ्यर्थी हुए सफल

रांची  झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा सिविल जज (जूनियर डिविजन) के 138 पदों पर नियुक्ति के लिए 10 मार्च 2024 को ली गई प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) का संशोधित रिजल्ट जारी कर दिया है. संशोधित रिजल्ट में कुल 1844 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं. जबकि पहली बार दो जुलाई 2024 को जारी रिजल्ट में 1797 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए थे. संशोधित रिजल्ट में 47 अभ्यर्थी बढ़ गए हैं.   सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संशोधित आंसर-की जारी आयोग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित न्यायादेश के आलोक में संशोधित आंसर-की जारी किया गया. संशोधित आंसर-की में कुल 100 प्रश्न में पांच प्रश्न के पूर्व के उत्तर में सुधार किया गया. दो प्रश्न ड्रॉप कर दिए गए. वहीं तीन सवाल के दिए गए सभी विकल्प गलत पाए जाने की स्थिति में सभी अभ्यर्थियों को एक-एक अंक दिए गए. आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक यह परीक्षा न्यायालय में सुलोचना कुमारी बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य, रामेश्ववर सिंह बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य तथा समरूप वादों के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगा. मुख्य परीक्षा की तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी. कुल 138 में 60 पद अनारक्षित हैं आयोग द्वारा यह नियुक्ति परीक्षा वर्ष 2023 से चल रही है. सिविल जज जूनियर डिविजन के कुल 138 पदों में अनारक्षित के 60 पद, एसटी के 28 पद, एससी के 12 पद, बीसी वन के 10 पद, बीसी टू के 15 पद और इडब्ल्यूएस के 13 पद शामिल हैं. मुख्य परीक्षा चार पेपर की होगी आयोग द्वारा पीटी के बाद अब मुख्य परीक्षा ली जाएगी. मुख्य परीक्षा कुल चार पेपर की होगी. हर पेपर 100 अंक का होगा. वाइवा-वॉयस टेस्ट 100 अंकों का होगा. आयोग द्वारा फाइनल मेरिट लिस्ट मुख्य परीक्षा और वाइवा-वॉयस टेस्ट में मिले अंकों के आधार पर तैयार होगा. रिजल्ट में झारखंड सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा.

नीट 2026 परीक्षा: 21 जून को अभ्यर्थियों को मुफ्त बस यात्रा, CM ने दिए निर्देश

पटना नीट परीक्षा देने वाले दिन बिहार के छात्र-छात्राओं का बस भाड़ा नहीं लगेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीट परीक्षार्थियों के लिए सभी सरकारी बसों में मुफ्त सफर का ऐलान किया है। 21 जून को होने वाले नीट एग्जाम में शामिल होने वाले अभ्यर्थी बिना टिकट के ही बस का सफर कर सकेंगे। सीएम ने इस संबंध में सभी जिलों को निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने शुक्रवार को नीट परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा भी की। सीएम सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को नीट परीक्षा के मद्देनजर कई अहम निर्देश दिए। सभी जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। बता दें कि 21 जून को बिहार समेत देश भर में नीट परीक्षा का आयोजन होगा। पेपर एक ही पारी में एक ही दिन होगा। पूर्व में हुए पेपर लीक और धांधली से बचने के लिए इस बार प्रशासन ने सख्त तैयारियां की हैं। बिहार में 331 सेंटर पर होगा नीट एग्जाम राज्य के 35 जिलों में नीट परीक्षा के 331 सेंटर बनाए गए हैं। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन सक्रिय है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नीट परीक्षा के आयोजन में किसी तरह की लापरवाही ना बरतें। सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। समय से तैयारियां पूरी कर ली जाएं। परीक्षा केंद्रों पर सुविधाएं जरूर रखें सम्राट चौधरी ने कहा कि नीट एग्जाम सेंटर पर परीक्षार्थियों के लिए पेयजल, शौचालय, बिजली आपूर्ति, मेडिकल सहायता और अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाए। नीट परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को यातायात की समुचित व्यवस्था मिले। सूचना तंत्र को प्रभावी बनाया जाए। ताकि उन्हें सहूलियत हो और परेशानी का सामना ना करना पड़े। देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इस परीक्षा के मार्क्स के आधार पर ही मेडिकल कॉलेजों में यूजी कोर्स के लिए एडमिशन होते हैं। पिछले महीने 3 मई को नीट यूजी एग्जाम आयोजित किया गया था। मगर पेपर लीक होने और गड़बड़ी मिलने के बाद उसे रद्द कर दिया गया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने फिर से परीक्षा का आयोजन करने का ऐलान करते हुए तारीख 21 जून तय की। परीक्षा का समय दोपहर 2 से शाम 5.15 बजे के बीच रखा गया है। हालांकि, परीक्षार्थियों को समय से पहले ही एग्जाम सेंटर पहुंचना होगा। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए राज्य सरकार कुछ अतिरिक्त बसों का संचालन भी कर सकती है। एग्जाम देने वाले छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त सफर का ऐलान करने के बाद बिहार की सरकारी बसों में 21 जून को भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है। इससे अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने हुई नीट परीक्षा के पेपर लीक के तार बिहार से भी जुड़े थे। इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी सीबीआई कर रही है। सीबीआई ने पेपर लीक के मुख्य सरगना रॉकी उर्फ राकेश रंजन को दबोचा। उसके तार इस रैकेट के पुराने मास्टरमाइंड संजीव मुखिया से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा झारखंड, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से भी कई लोगों को पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि 3 मई को हुई नीट परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी। परीक्षा से पहले ही कई परीक्षार्थियों के पास पेपर पहुंच गए थे। इसका सौदा लाखों रुपये में किया गया था।

संस्कृत शिक्षा व्यवस्था में सुधार की तैयारी, संचालन के लिए जल्द आएगी SOP

पटना. प्रदेश के संस्कृत स्कूलों के संचालन को ले शिक्षा विभाग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहा है। संस्कृत विद्यालय अब एसओपी के माध्यम से ही संचालित होंगे। इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने संस्कृत शिक्षा बोर्ड के दफ्तर को इंटर मीडिएट कांउसिल भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। संस्कृत स्कूलों को ले बन रहे एसओपी के बारे में मिली जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था की जा रही कि सब कुछ डिजिटल मोड में उपलब्ध हो। अभी संस्कृत स्कूलों के बारे में एक जगह सभी जानकारी नहीं है। आसानी से मिलेगी जानकारी कुछ सूचनाएं संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पास है और कुछ सचिवालय में। एसओपी के तहत अब संस्कृत स्कूलों को कितना अनुदान मिला और विद्यालय का संचालन कहां हो रहा यह जानकारी सहजता से मिल सकेगी। अभी यह मालूम करने में परेशानी है कि संस्कृत स्कूल बीच में ही कहां-कहां बंद हो गए। जो राजकीय संस्कृत संचालित हो रहे थे उनमें बहुतों के बंद होने की सूचना विभाग को मिलती रहती है पर विभाग के पास इसका विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं रहता। जो एसओपी बनाया जा रहा उसके हिस्से में यह जानकारी भी रहेगी कि कितने संस्कृत विद्यालय सही तरीके से संचालित हो रहे। एसओपी के माध्यम से यह गाइडलाइन उपलब्ध कराया जाएगा कि कब किस विद्यालय को अनुदान मिलना है। संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी इसके माध्यम से नियमित की जाएगी। जिस संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों की संख्या छात्रों के लिहाज से काफी कम है वहां आने वाले समय में नियुक्ति की प्रक्रिया भी आरंभ होगी। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जुलाई तक एसओपी के आने की उम्मीद है।  

अब बिना ट्रांजिट पास नहीं आएगी बालू-गिट्टी, नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

भागलपुर. बिहार सरकार ने दूसरे राज्यों से आने वाले बालू, गिट्टी, पत्थर, मोरंग एवं अन्य लघु खनिजों के परिवहन पर निगरानी कड़ी करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले सभी लघु खनिज लदे वाहनों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत 10 जून से ट्रांजिट पास जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 20 जून से इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। जिला खनिज पदाधिकारी बलवंत कुमार के अनुसार अब झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों से बिहार आने वाले खनिज वाहनों को आनलाइन पंजीकरण कराकर ट्रांजिट पास प्राप्त करना होगा। जिला खनन विकास पदाधिकारी ने बताया कि अवैध खनन, फर्जी चालान और अनियमित खनिज परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत वाहन मालिक, ट्रांसपोर्टर और खनिज कारोबारी आईएसटीपी बिहार पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। पंजीकरण के बाद प्राप्त लागिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से ट्रांजिट पास के लिए आवेदन किया जाएगा। विभाग ने समय रहते सभी संबंधित लोगों से प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। विभाग द्वारा ट्रांजिट पास शुल्क भी निर्धारित कर दिया गया है। यदि खनिज की मात्रा वजन के आधार पर दर्ज है तो 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन शुल्क देना होगा। वहीं आयतन के आधार पर दर्ज खनिज के लिए 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क लिया जाएगा। भुगतान केवल आनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। नए नियम के अनुसार खनिज स्रोत स्थल से परिवहन चालान जारी होने के छह घंटे के भीतर वाहन पर लदे खनिज के अनुरूप ट्रांजिट पास लेना अनिवार्य होगा। इसकी वैधता परिवहन चालान की अवधि के बराबर होगी। परिवहन के दौरान वाहन चालक के पास संबंधित राज्य का वैध चालान और आईएसटीपी दोनों दस्तावेज होना आवश्यक होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान दोनों में से कोई भी दस्तावेज नहीं मिलने पर बिहार खनिज (समाहरण, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली-2019 तथा संशोधित नियमावली-2026 के तहत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह जुर्माना दस लाख तक हो सकती है। खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिहार में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण कार्यों के कारण खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़ी मात्रा में बालू, गिट्टी और पत्थर दूसरे राज्यों से मंगाए जा रहे हैं। अब तक इनके परिवहन की कोई प्रभावी निगरानी व्यवस्था नहीं थी, जिससे वास्तविक आंकड़े जुटाने में कठिनाई होती थी। नई आनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद राज्य में आने वाले प्रत्येक खनिज वाहन का डिजिटल रिकार्ड तैयार होगा। इससे एक ही चालान पर बार-बार ढुलाई, अवैध परिवहन और राजस्व चोरी जैसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी। सरकार को आयातित खनिजों का सटीक डाटा उपलब्ध होगा, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी। बिहार सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था खनन क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।