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शिक्षा से लेकर गृह विभाग तक बदलाव, कई जिलों के DDC बदले गए

 रांची  झारखंड सरकार ने प्रशासनिक महकमे में एक और बड़ा फेरबदल किया है. इस बार झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) के 66 अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला और पदस्थापन किया गया है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने 23 मई 2026 को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इस फेरबदल में कई जिलों के उप विकास आयुक्त (DDC) बदले गए हैं और कई प्रतीक्षारत व तैनात अधिकारियों को विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) व अन्य महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी गई है. शिक्षा, स्वास्थ्य और लोक सेवा से जुड़े विभागों में बदलाव इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में श्रीमती स्मिता टोप्पो को संयुक्त सचिव और श्री अनवर हुसैन को निदेशक (प्रशासन) बनाया गया है. वहीं, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग में श्री योगेंद्र प्रसाद और अनुज कुमार प्रसाद को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी मिली है, जबकि शशि प्रकाश सिंह को भी इसी विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात करते हुए उन्हें सीईओ आरोग्य सोसाइटी व एड्स कंट्रोल सोसाइटी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. इसके अलावा, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की उप सचिव रहीं सरोजनी तिर्की को अब आईटीडीए (ITDA) लातेहार का परियोजना निदेशक नियुक्त किया गया है. जिलों में नए उप विकास आयुक्तों (DDC) की तैनाती राज्य सरकार ने कई जिलों में नए उप विकास आयुक्त (DDC)-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) की नियुक्ति की है. इसके तहत जामताड़ा जिला परिषद में असीम किसपोट्टा, पलामू में मो. सादात अनवर, पाकुड़ में श्री अरविंद कुमार लाल, लोहरदगा में राज महेश्वरम्, गढ़वा में प्रेमलता मुर्मू और खूंटी जिला परिषद में प्रवीण कुमार प्रकाश को नया डीडीसी बनाया गया है. कल्याण, श्रम, और सामाजिक सुरक्षा विभाग अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में मेनका और सुनील दत्त खाखा को संयुक्त सचिव बनाया गया है, जबकि मुमताज अली अहमद को अल्पसंख्यक आयोग के सचिव की जिम्मेदारी दी गई है. श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग में हरिवंश पंडित और मोनी कुमारी तथा प्रीती किस्कू को संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थापित किया गया है. वहीं, सुमन पाठक को महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है. गृह, राजस्व, वित्त और योजना विभाग गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में बड़े पैमाने पर अफसरों की तैनाती हुई है, जिसमें संजय पांडेय, रौशन कुमार साह, ज्ञानेंद्र और विभूति मंडल को संयुक्त सचिव बनाया गया है. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग में प्रणव कुमार पाल संयुक्त सचिव होंगे, जबकि श्री धीरेंद्र कुमार सिंह और विद्या भूषण कुमार को क्रमशः राजस्व परिषद रांची में सचिव और संयुक्त सचिव बनाया गया है. वित्त विभाग में मधुमिता कुमारी और ज्योति कुमारी झा को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि राजेश्वर नाथ आलोक और संजीव कुमार (अतिरिक्त प्रभार- निदेशक, अर्थ एवं सांख्यिकी) को योजना एवं विकास विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है. जल संसाधन, नगर विकास और अन्य महत्वपूर्ण पदस्थापन जल संसाधन विभाग में बिनय मनीष आर. लकड़ा और अजय सिंह बड़ाईक को संयुक्त सचिव बनाया गया है. नगर विकास एवं आवास विभाग में बिजय कुमार, संतोष सिंह और रंजीत लोहरा को संयुक्त सचिव के पद पर तैनात किया गया है. इसके अलावा, दिनेश कुमार रंजन को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) में संयुक्त सचिव, विशालदीप खलखो को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग में संयुक्त सचिव (साथ ही जैप-आईटी के ओएसडी का अतिरिक्त प्रभार) और मो. जियाउल अंसारी को खान एवं भूतत्व विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया है. कृषि, पर्यटन, खेलकूद और अन्य निगमों में कमान कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग में मनोज कुमार को संयुक्त सचिव बनाया गया है, जबकि अजय कुमार साव को कृषि विभाग में संयुक्त सचिव के साथ-साथ झारखंड राज्य कृषि विपणन परिषद के प्रबंध निदेशक (MD) का अतिरिक्त प्रभार मिला है. पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग में रामा रविदास और सत्यवीर रजक को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसी तरह, रंजीता टोप्पो को खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग में संयुक्त सचिव बनाते हुए झारखंड राज्य खाद्य निगम के एमडी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वहीं, संतोष कुमार गर्ग को राज्यपाल सचिवालय में संयुक्त सचिव, प्रेम कुमार तिवारी को माडा (MADA) धनबाद का एमडी, और शैलेंद्र कुमार रजक को वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय का निदेशक (साथ ही पेंशन एवं लेखा निदेशालय का अतिरिक्त प्रभार) नियुक्त किया गया है. जनजातीय विकास में नई नियुक्तियां विभिन्न जिलों में समेकित जनजाति विकास अभिकरण (ITDA) के परियोजना निदेशकों की भी तैनाती की गई है. इसके तहत सरायकेला-खरसावां में उषा मुंडू, दुमका में मनीषा तिर्की, और गुमला में लीली एनोला लकड़ा को परियोजना निदेशक बनाया गया है. इसके साथ ही, विजय सिंह बिरुवा को झारखंड ट्राइबल डेवलपमेंट सोसाइटी (JTDS) रांची का परियोजना निदेशक नियुक्त किया गया है. उसी तरह मीना को लोकायुक्त कार्यालय में संयुक्त सचिव और सौरव कुमार सिन्हा को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

ईंधन महंगा होने से बढ़ी आम लोगों की चिंता, रांची में पेट्रोल 102 रुपये के पार

रांची पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। तेल कंपनियों ने एक बार फिर ईंधन के दाम बढ़ा दिए हैं। रांची स्थित नंदी फ्यूल्स पेट्रोल पंप पर शनिवार सुबह छह बजे से पेट्रोल 102.63 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.66 रुपये प्रति लीटर की दर से मिलने लगा। इससे पहले 19 मई को पेट्रोल 101.75 रुपये और डीजल 96.70 रुपये प्रति लीटर था। यानी चार दिनों में पेट्रोल में 88 पैसे और डीजल में 96 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। उस समय पेट्रोल 97.86 रुपये से बढ़कर 100.86 रुपये और डीजल 92.62 रुपये से बढ़कर 95.76 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था। इसके बाद 19 मई और अब 23 मई को लगातार तीसरी बार दाम बढ़ाए गए हैं। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ईंधन महंगा हो रहा है। देश की सरकारी तेल कंपनियां धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। शहर के पेट्रोल पंप समय से पहले हुए बंद, कीमत का मिला लाभ लगातार बढ़ रही कीमतों का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। लेकिन वहीं शहर में शुक्रवार की रात कीमत बढ़ने के कारण पेट्रोल पंप समय पर पहले बंद हो गए। पेट्रोल पंप संचालकों ने पुराने स्टाक को शनिवार को भी सेल किया। इससे पे्ट्रोल पंप संचालकों को सीधा मुनाफा हुआ है। वहीं खासकर रोजाना बाइक और कार से आने-जाने वाले लोगों, आटो चालकों और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आने वाले दिनों में जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

पटना: चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य भुगतान में दिखाई तेजी, लगभग पूरा हुआ भुगतान

पटना  गन्ना उद्योग विभाग की पहल पर चीनी मिलों ने किसानों से क्रय किए गए गन्ना मूल्य का 99.14 प्रतिशत राशि भुगतान कर दिया है। शेष बकाया राशि भुगतान करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में संचालित दस चीनी मिलों द्वारा पेराई सत्र 2025-26 में किसानों से नौ अप्रैल 26 तक कुल 572.66 लाख क्विंटल गन्ना का क्रय किया गया था। इसके एवज में गन्ना किसानों को 213783.58 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। बताया जा रहा है कि गन्ना उद्योग विभाग ने गन्ना क्रय शुरू होने के साथ ही सभी चीनी मिल संचालकों को गन्ना मूल्य का भुगतान करने का निर्देश दिया था। ताकि किसानों को समय से गन्ना का पैसा मिल सके। इसके साथ ही विभाग द्वारा लगातार गन्ना किसानों को होने वाले भुगतान की निगरानी की जा रही थी। विभाग के अनुसार किसानों के कुल देय राशि 213783.58 करोड़ रुपये के विरुद्ध अब तक 211481.43 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है, जो देय राशि का 99.14 प्रतिशत है। विभाग के अनुसार गन्ना किसानों को देय राशि का भुगतान करने की लगातार मानीटरिंग की जा रही थी। चीनी मिल संचालकों ने भी तत्परता के साथ किसानों को देय राशि का भुगतान करने में रुचि ली, सुफल से अब तक 99.14 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया गया है। शेष बकाया राशि का भुगातन करने की कार्रवाई जारी है।

हथौड़े-छेनी से तराशी गई ‘मशरूम रॉक’ बनी गया जिले की नई पहचान

गयाजी  बिहार के गया जिले में दो मजदूरों द्वारा तराशी गई मशरूम के आकार की एक शिलाशि मूर्ति इस क्षेत्र से गुजरने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह संरचना जेठियां-राजगीर मार्ग पर अराई गांव के पास स्थित है, जो गया जिला मुख्यालय से लगभग 60-65 किलोमीटर दूर है। चट्टान के विशिष्ट आकार के कारण स्थानीय लोग इसे मशरूम पहाड़ कहते हैं। मशरूम रॉक का जलवा इस मूर्ति का निर्माण कछारा गांव के निवासी शौकी राजवंशी और विनोद मांझी ने किया था, जो पहले स्थानीय ठेकेदारों के अधीन पहाड़ी क्षेत्र में पत्थर तराशने का काम करते थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, दोनों व्यक्तियों ने हथौड़ा, छेनी और लोहे की छड़ों जैसे पारंपरिक औजारों का उपयोग करके एक विशाल चट्टान को आकार देने में कई वर्ष बिताए। यह कार्य आधुनिक मशीनों के उपयोग के बिना किया गया था। जिस चट्टान को मूल रूप से उन्हें पत्थर तोड़ने के काम के लिए सौंपा गया था, उसे उसके आकार और मजबूती के कारण काटना मुश्किल माना जाता था। गांव को मिली पहचान स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मूर्ति ने कछारा गांव को पहचान दिलाई है, जो पहले इस क्षेत्र के बाहर काफी हद तक अज्ञात था। इस मार्ग से गुजरने वाले यात्री अक्सर इस संरचना को देखने के लिए रुकते हैं, और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल धीरे-धीरे एक छोटे पर्यटक आकर्षण के रूप में उभरा है। पत्थर तराशने की विरासत इस कहानी की तुलना दशरथ मांझी की विरासत से भी की गई है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से "पहाड़ का आदमी" के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक हाथ के औजारों का उपयोग करके गया जिले की एक पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाया था। हालांकि मशरूम के आकार की यह मूर्ति अलग-अलग परिस्थितियों में बनाई गई थी, लेकिन स्थानीय निवासी इसे इस क्षेत्र की दृढ़ता और हस्तशिल्प का एक और उदाहरण मानते हैं।

बिहार: उद्यमी योजना से युवाओं और महिलाओं को बड़ा अवसर, गांवों में खुलेंगे नए उद्योग

चरपोखरी (आरा)  बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत भोजपुर जिले में स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार को नई रफ्तार मिलने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जारी औपबंधिक चयन सूची में जिले के 224 लाभार्थियों का चयन विभिन्न श्रेणियों के तहत उद्योग स्थापित करने के लिए किया गया है। सरकार की ओर से वित्तीय सहायता और तकनीकी प्रशिक्षण मिलने के बाद चयनित लाभार्थी जिले के अलग-अलग प्रखंडों और कस्बों में अपने उद्योग शुरू करेंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि युवाओं का महानगरों की ओर पलायन भी कम होने की उम्मीद है। युवाओं और महिलाओं को सबसे ज्यादा मौका इस बार सरकार ने सामाजिक संतुलन के साथ युवाओं और महिलाओं को सबसे अधिक प्राथमिकता दी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 53 युवाओं का चयन किया गया है। जबकि मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना में 52 महिलाओं को मौका मिला है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ईबीसी उद्यमी योजना के तहत 52, अनुसूचित जाति-जनजाति श्रेणी में 50, अल्पसंख्यक उद्यमी योजना में 14 और दिव्यांग उद्यमी योजना में तीन लोगों का चयन हुआ है। डिजिटल और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर बना पहली पसंद नई पीढ़ी का झुकाव डिजिटल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की ओर अधिक देखने को मिल रहा है। चयनित परियोजनाओं में सबसे ज्यादा 35 साइबर कैफे सह आईटी बिजनेस यूनिट शामिल हैं। इसके अलावा 26 आटा-सत्तू-मसाला पिसाई इकाइयां, 16 तेल मिल, छह मिनी राइस मिल और 12 रेडीमेड गारमेंट्स प्लांट स्थापित किए जाएंगे। वहीं 16 होटल, रेस्तरां और ढाबे, 15 पेपर प्लेट यूनिट, सात आधुनिक ऑटोमोबाइल गैराज, सात फर्नीचर प्लांट, पांच मेडिकल डायग्नोस्टिक सेंटर और चार फ्लेक्स प्रिंटिंग इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है। आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों में कूलर-पंखा असेंबलिंग के चार प्लांट, तीन एलईडी बल्ब उद्योग और तीन आधुनिक कृषि ड्रोन सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा 65 अन्य लघु और कुटीर उद्योगों को भी स्वीकृति मिली है। गांवों तक पहुंचेगी ड्रोन तकनीक इस बार आधुनिक कृषि ड्रोन सेवा केंद्रों को मंजूरी मिलना सबसे खास माना जा रहा है। चयनित उद्यमियों को ड्रोन खरीदने, पायलट प्रशिक्षण और सर्विस सेंटर संचालन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को गांव स्तर पर ही नैनो यूरिया और कीटनाशकों के छिड़काव के साथ फसल निगरानी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। 10 लाख तक की सहायता, आधी राशि अनुदान अधिकारियों के अनुसार दस्तावेज सत्यापन के बाद लाभार्थियों को पहली किस्त जारी की जाएगी। योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसमें 50 प्रतिशत यानी अधिकतम पांच लाख रुपये अनुदान के रूप में माफ किए जाते हैं। शेष राशि आसान शर्तों पर ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। पलायन रोकने में मिलेगी मदद आरा, तरारी, जगदीशपुर, पीरो, बिहिया, शाहपुर, संदेश और चरपोखरी जैसे इलाकों में ये इकाइयां शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। इससे दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे शहरों की ओर होने वाले पलायन पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है। हर साल बढ़ रहा योजना का दायरा मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की शुरुआत वर्ष 2018-19 में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए की गई थी। बाद में इसे अति पिछड़ा वर्ग और फिर 2021-22 से सभी वर्गों के युवाओं और महिलाओं के लिए खोल दिया गया। इसके बाद जिले में स्वरोजगार का दायरा लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2021-22 में 174, 2022-23 में 172, 2023-24 में 194, 2024-25 में 208 और अब 2025-26 में 224 लाभार्थियों का चयन किया गया है।

संगीत शिक्षिका को राहत, झारखंड HC ने सेवा बहाली का दिया आदेश

रांची झारखंड हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक ही संस्थान से हासिल समान डिग्री धारकों के बीच केवल अंकों के बदलाव के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शिक्षा विभाग के उस नियम को मनमाना और अमान्य करार दिया, जिसके तहत 2007 से पहले 300 अंकों की संगीत प्रभाकर डिग्री लेने वालों को बहाली के अयोग्य मान लिया गया था. अदालत ने याचिकाकर्ता सुचरिता महतो को आठ सप्ताह के भीतर सभी परिणामी लाभों के साथ सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है. संगीत शिक्षिका की सेवा समाप्त करने पर कोर्ट सख्त बोकारो निवासी सुचरिता महतो ने प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से वर्ष 1985 और 1989 में संगीत प्रभाकर की डिग्री हासिल की थी. वर्ष 2011 के विज्ञापन के आधार पर उन्हें गिरिडीह में संगीत शिक्षिका के पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन 31 जुलाई 2020 को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने उनकी सेवा यह कहते हुए समाप्त कर दी कि उनकी डिग्री को सरकार से मान्यता प्राप्त नहीं है. 300 और 500 अंकों की डिग्री को लेकर उठा विवाद शिक्षा विभाग ने 14 सितंबर 2022 को एक संकल्प जारी किया. इसमें प्रयाग संगीत समिति की 500 अंकों वाली संगीत प्रभाकर डिग्री को स्नातक के समकक्ष मान्यता दी गयी, लेकिन याचिकाकर्ता को इसलिए बाहर रखा गया क्योंकि उनके पास 2007 से पहले की 300 अंकों वाली डिग्री थी.

यूपी में वन्यजीव संकट: बाग के तार बने जानलेवा, तेंदुए की मौत से मचा हड़कंप

 लखनऊ यूपी के बलरामपुर के सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग अंतर्गत बनकटवा रेंज क्षेत्र में रविवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने वन विभाग के साथ-साथ ग्रामीणों को भी झकझोर कर रख दिया। तुलसीपुर–सिरसिया मार्ग पर स्थित चौधरीडीह गांव के दक्षिण जंगल से भटककर निकली करीब तीन वर्ष की एक मादा तेंदुआ आम के बाग में लगाए गए तार में फंस गई, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। रविवार सुबह करीब आठ बजे गांव के बाहर स्थित आम के बाग में रखवाली कर रहे लोगों ने एक तेंदुए को छटपटाते हुए देखा। पास जाकर देखने पर पता चला कि मादा तेंदुए की गर्दन बाग में लगे लोहे के तार में बुरी तरह फंस गई थी। तेंदुआ काफी देर तक खुद को छुड़ाने का प्रयास करता रहा, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। लगातार संघर्ष और दम घुटने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।घटना की सूचना मिलते ही गांव में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को जानकारी दी। सूचना पाकर बनकटवा रेंज के रेंजर शत्रुघ्न लाल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। वन विभाग की टीम ने मृत तेंदुए को कब्जे में लेकर रेंज कार्यालय पहुंचाया। ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से जंगल से सटे इलाकों में जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ गई है। खेतों और बागों में सुरक्षा के लिए लगाए गए तार वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। इस संबंध में उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) मनोज कुमार ने बताया कि मादा तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों की पैनल टीम द्वारा बनकटवा रेंज में कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला तार में फंसने से मौत का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। वन विभाग की टीम पूरे मामले की गहन जांच में जुट गई है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है, वहीं वन्यजीव प्रेमियों ने इस घटना पर चिंता जताते हुए जंगल से सटे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और वन्यजीव संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। तेंदुआ घुसने से गांव में दहशत उधर, बहराइच वन्यजीव प्रभाग के चकिया वन रेंज अंतर्गत मौजीपुरवा गांव में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक तेंदुआ अचानक ग्रामीण के घर में घुस गया। तेंदुए के हमले में तीन ग्रामीण घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर तेंदुए को पकड़ने के प्रयास में जुट गई। सुबह करीब 7 बजे मौजीपुरवा गांव निवासी मोहम्मद अहमद के घर में अचानक जंगल से भटककर एक तेंदुआ घुस आया। घर के लोगों ने तेंदुए को देखते ही शोर मचाया और किसी तरह जान बचाकर बाहर भागे। शोर सुनकर आसपास के काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। भीड़ बढ़ती देख तेंदुआ घर के अंदर बने एक कमरे में घुसकर छिप गया। इस दौरान तेंदुए को बाहर निकालने की कोशिश के बीच वह अचानक उग्र हो गया और उसने गांव निवासी नसीम, फजलू रहमान तथा जुबेर पर हमला कर पंजा मार दिया, जिससे तीनों घायल हो गए। घायलों का स्थानीय स्तर पर उपचार कराया गया।

सिक्किम हाईकोर्ट की जज मिनाक्षी एम. राय को पटना हाईकोर्ट की कमान

पटना पटना हाईकोर्ट को जल्द ही नया मुख्य न्यायाधीश मिलने वाला है।। मिनाक्षी एम राय पटना उच्च न्यायालय की नई चीफ जस्टिस होंगी। सिक्किम हाईकोर्ट की जज रह चुकीं मिनाक्षी एम राय पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बन जाएंगी। सिक्किम के पूर्व गृह सचिव के घर 12 जुलाई 1964 को जन्मी मीनाक्षी एम राय ने वर्ष 1980 में दसवीं पास कर इंटर में दाखिला ली थी। मार्च 1983 में बारहवी पास कर उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति शास्त्र से स्नातक की थी। उसके बाद दिल्ली के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की डिग्री लेकर मिनाक्षी ने खुद को दिल्ली बार काउंसिल में वकालत करने के लिए इनरोलमेंट कराया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट एंव सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की थी। 11 दिसम्बर1990 को सिक्किम में बतौर न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर बहाल हुई थीं। 15 अप्रैल 2015 को सिक्किम हाई कोर्ट में पहली महिला जज के रूप में नियुक्त हुई थीं। बताया जा रहा है कि मिनाक्षी मदन राय के पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सिक्किम के लोगों के लिए गौरव भरा पल है। अपने बयान में सिक्किम के मुख्यमंत्री ने कहा कि मिनाक्षी एम राय का पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में चुने जाने एक ऐतिहासिक क्षण है। वो सिक्किम से पहली महिला जज हैं तो इतने उच्च पद पर आसीन हुई हैं। मुख्यमंत्री ने न्यायिक प्रक्रिया में मिनाक्षी एम राय के योगदान को सराहनीय और अतुल्नीय बताया है। सीएम ने सिक्किम की जनता और सरकार की तरफ से मिनाक्षी एम राय को बधाई दी है। सीएम ने कहा कि मिनाक्षी एम राय के द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में दिए गए योगदान को सिक्किम तथा देश के लोग याद रखेंगे। मिनाक्षी एम राय के आत्मविश्वास की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम में हाईकोर्ट के जज के तौर पर मिनाक्षी एम राय ने जिस तरह से निष्पक्षता से अपने न्यायिक दायित्वों को निभाया उसका लाभ अब पटना हाईकोर्ट को भी मिलेगा।

छात्रों-शिक्षकों को बड़ी राहत, बिहार सरकार ने स्कूलों में पुरानी हाफ-डे व्यवस्था लौटाने का लिया फैसला

पटना बिहार के सरकारी स्कूलों के समय और कार्यदिवसों को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहे विवाद पर अब सम्राट सरकार पूर्णविराम लगाने जा रही है. राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों और शिक्षकों के हित में एक और बड़ा कदम उठाते हुए शनिवार को आधे दिन के कार्यदिवस वाली पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है. सूत्रों के अनुसार, नए निर्णय के के तहत अब बिहार के सभी सरकारी स्कूलों में शनिवार को ‘हाफ डे’ यानी आधे दिन की पढ़ाई होगी. बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक और नए शेड्यूल की गहन समीक्षा के बाद इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति बन गई है, और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी जल्द ही इस नई व्यवस्था की आधिकारिक घोषणा करेंगे।  पौने छह लाख शिक्षकों और करोड़ों छात्रों को मिलेगी राहत बता दें कि पिछले कुछ समय से राज्य के पौने छह लाख सरकारी शिक्षक और विभिन्न शिक्षक संघ लगातार यह मांग उठा रहे थे कि शनिवार को फुल डे की जगह हाफ डे की व्यवस्था दोबारा शुरू की जाए. खासकर मई महीने की इस भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच पूरे दिन स्कूल संचालन से बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा था. इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के करोड़ों छात्र-छात्राओं को राहत मिलेगी, बल्कि मानसिक तनाव से जूझ रहे शिक्षकों को भी वीकेंड पर अपने जरूरी कार्यों को निपटाने का समय मिल सकेगा।  31 मई तक जारी हो जाएगी आधिकारिक अधिसूचना शिक्षा विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस नए स्कूल शेड्यूल और समय सारिणी यानी टाइम टेबल (Time Table) को लेकर ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. विभाग आगामी 31 मई तक इस संबंध में विधिवत अधिसूचना जारी कर देगा. सम्राट सरकार का यह फैसला इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ शिक्षकों और छात्रों के अनुकूल माहौल तैयार करने की कोशिशों में जुटी है. माना जा रहा है कि जून महीने में स्कूल खुलने के साथ ही यह व्यवस्था पूरी तरह से जमीन पर प्रभावी हो जाएगी।   

सम्राट चौधरी की अनुशंसा पर विधान परिषद में नेता, सचेतक और उपनेता नियुक्त

पटना  मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी की अनुशंसा पर बिहार विधान परिषद में सत्‍ता पक्ष के 6 नेताओं को नई जिम्‍मेदारी दी गई है। संसदीय कार्य विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी की है। 15 मई से प्रभावी इस फैसले के तहत नेता, उपनेता, मुख्य सचेतक और उपमुख्य सचेतक के पदों पर मनोनयन किया गया है। ललन एवं राजेंद्र बने उपनेता अधिसूचना के अनुसार ललन कुमार सर्राफ एवं प्रो. राजेंद्र प्रसाद गुप्‍ता को उपनेता का बनाया गया है। इन्‍हें मंत्री पद की सुविधा प्रदान की गई है। जदयू के विधान पार्षद संजय कुमार सिंह को मुख्‍य सचेतक बनाया गया है। इन्‍हें भी मंत्री की सुविधा प्राप्‍त हो गई है। वहीं जनक राम उपमुख्‍य सचेतक बनाए गए हैं। इन्‍हें राज्‍य मंत्री की सुविधा प्रदान की गई है। इनके अलावा नीरज कुमार एवं रीना देवी को सचेतक बनाया गया है। इन्‍हें भी राज्‍य मंत्री की सुविधा मि‍ली है।   राज्‍यस्‍तरीय कार्यान्‍वयन समित‍ि का पुनर्गठन इससे एक दिन पूर्व राज्‍यस्‍तरीय कार्यान्‍वयण समिति का पुनर्गठन राज्‍य सरकार ने किया। सीएम सम्राट चौधरी इसके अध्‍यक्ष बनाए गए हैं। इनके अलावा उपमुख्‍यमंत्री व‍िजय कुमार चौधरी कार्यकारी अध्‍यक्ष बनाए गए हैं। समिति में संजय सरावगी एवं उमेश सिंह कुशवाहा को उपाध्‍यक्ष बनाया गया है।   उपाध्‍यक्ष के पद पर ललन कुमार मंडल भी रखे गए हैं। समिति में विधायक चेतन आनंद, संगीता कुमारी, भरत बिन्द, मुरारी प्रसाद गौतम तथा सिद्धार्थ सौरव सहित कई नेताओं को सदस्य बनाया गया है। इसके अतिरिक्त प्रहलाद यादव, नीलम देवी, जगन्नाथ ठाकुर, राजेश कुमार वर्मा, भारती मेहता और चंदन कुमार सिंह भी सदस्‍य बनाए गए हैं। दोनों उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाएगा, जबकि सभी सदस्यों को राज्य के उप मंत्री का दर्जा प्राप्त होगा। बिहार विधान मंडल के सदस्य अपने वर्तमान वेतन, भत्ता और अन्य सुविधाएं पूर्ववत प्राप्त करते रहेंगे।