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नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रोल मॉडल बनकर उभरा मध्यप्रदेश

मुरैना में होगा 600 मेगावॉट ऊर्जा का भंडारण भोपाल मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रोल मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रदेश में स्थापित की गई अनेक अभूतपूर्व परियोजनाओं से सौर ऊर्जा की आपूर्ति न केवल प्रदेश में, बल्कि दिल्ली मेट्रो एवं भारतीय रेल को भी की जा रही है। ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी पर विश्व की सबसे बढ़ी फ्लोटिंग सौर परियोजना स्थापित की है। मुरैना में भी एक अभिनव सौर परियोजना स्थापित की जा रही है, जिसमें ऊर्जा भण्डारण कर सुबह और शाम के व्यस्ततम समय (पीक ऑवर्स) में भी प्रदेश को हरित ऊर्जा प्रदाय की जाएगी। इस परियोजना की ऊर्जा भंडारण क्षमता 600 मेगावॉट होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। उनके संकल्प की पूर्ति के लिये मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध है और लक्ष्य प्राप्ति के लिये नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर नवाचार भी कर रहा है। मुरैना में स्थापित होने जा रही अनूठी परियोजना के लिए निवादा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस परियोजना में सलाहकार आईएफसी की सेवाएं ली गई हैं। साथ ही डेवलपर और निवेशकों के सुझाव भी सम्मिलित किये गए हैं। मुरैना सोलर पार्क में प्राप्त विद्युत् दर भविष्य की सौर ऊर्जा भण्डारण आधारित परियोजनाओं के लिए मानक होगी। परियोजना से प्रदेश में लगभग 4 हजार करोड़ रूपये का निवेश अपेक्षित है। इससे चंबल क्षेत्र का विकास होगा, साथ ही स्थानीय युवाओं के लिये रोज़गार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। मुरैना में विश्व-स्तरीय सौर ऊर्जा भण्डारण परियोजना की स्थापना गर्व का विषय है। इस परियोजना से प्रदेश नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक और कीर्तिमान स्थापित करेगा। मुरैना परियोजना से सौर ऊर्जा केवल दिन में ही नहीं बल्कि सूर्यास्त के बाद भी प्रदाय की जाएगी। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला का कहना है कि मुरैना परियोजना राज्य सरकार की सकारात्मक सोच एवं प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस परियोजना और ऐसी अन्य आगामी परियोजनाओं से मध्यप्रदेश, देश ही नहीं बल्कि विश्व के लिए अक्षय ऊर्जा का एक रोल मॉडल होगा। प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग एवं ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऊर्जा भण्डारण आवश्यक है। प्रदेश में दिन के समय हरित एवं सस्ती सौर ऊर्जा उपलब्ध है, परन्तु शाम के पीक ऑवर्स में विद्युत् आपूर्ति कोयला आधारित और महंगी है। मुरैना सोलर पार्क और ऊर्जा भण्डारण, प्रदेश की पीक ऊर्जा आवश्यकताओं को सौर ऊर्जा से पूरा करने की दिशा में पहला कदम है। यह सोलर प्लस बैटरी आधारित परियोजना है, जिसके अंतर्गत शाम 6 से रात 10 बजे तथा सुबह 6 से 9 बजे तक मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) की 440 मेगावॉट तक की पीक आवश्यकताएँ पूरी की जाएँगी। मुरैना का 600 मेगावॉट का सोलर पार्क शाम के पीक ऑवर्स में आपूर्ति के लिए दिन में बैटरी को चार्ज करेगा एवं रात के समय एमपीपीएमसीएल द्वारा सुबह के पीक ऑवर्स की आपूर्ति के लिए बैटरी चार्ज की जाएगी। मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन में अग्रणी है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग पौने 6 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। इन निवेशों से 1 लाख 85 हजार नए रोज़गार सृजित होंगे। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत ऊर्जा, अक्षय स्रोतों से प्राप्त करना है। प्रदेश में 24 हजार 600 से अधिक मेगावॉट बिजली बनाने की वर्तमान में क्षमता मौजूद है। इसे चालू वर्ष 2 हजार मेगावॉट से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य है। ओंकारेश्वर में देश की सबसे बड़ी-फ्लोटिंग सौर परियोजना के पहले चरण में 278 मेगावॉट बिजली बनने लगी है। आगर और नीमच में भी बड़े सौर प्लांट शुरू हुए हैं। मुरैना में 800 मेगावॉट की सोलर परियोजना विकसित की जा रही है, जिसमें 600 मेगावॉट की ऊर्जा भंडारण क्षमता भी होगी।

तस्करी का भंडाफोड़ : कार में करोड़ों के जेवर, ट्रक में भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब

इंदौर इंदौर पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में जेवर और शराब जब्त की है। गुजरात से सोने के जेवर लेकर भागे आरोपी को क्राइम ब्रांच ने पकड़ा है। वहीं दूसरे मामले में कनाड़‍िया पुलिस ने शराब लेकर गुजरात जा रहे सीमेंट के बल्कर को पकड़ा। जिसमें से 811 पेटी अंग्रेजी शराब मिली है। पुलिस के मुताबिक अहमदाबाद (गुजरात) के ज्वेलर के 4 करोड़ 79 लाख रुपये के जेवर लेकर भागा चालक मसरू राबरी सीट के नीचे ही जेवर रखता था। उसने शराब तस्कर के जरिये आभूषण बेचने की कोशिश की, लेकिन हालमार्क देख कर दुकानदारों ने हाथ खींच लिए। डीसीपी (अपराध) राजेश कुमार त्रिपाठी के मुताबिक अंकित गोल्ड (अहमदाबाद) के संचालक धर्मेंद्रभाई की शिकायत पर मसरू राबरी के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। धर्मेंद्र कई राज्यों में आभूषणों की सप्लाई करता है। उसने 8 जुलाई को कर्मचारी सौरभ पांचाल को 4 किलो 800 ग्राम आभूषण लेकर इंदौर भेजा था, लेकिन चालक मसरू कार लेकर फरार हो गया। शुक्रवार को अपराध शाखा ने मसरू को शराब तस्कर प्रेमपाल देवड़ा जालौर (राजस्थान) के साथ पकड़ लिया। कार की तलाशी लेने पर चालक की सीट के नीचे जेवर मिल गए। मूलत: बनासकांठा (गुजरात) निवासी मसरू अपराधियों से जुड़ा है। उसने बिचौलियों के माध्यम से जेवर बेचने की कोशिश की, लेकिन सुनारों ने हालमार्क देख उन्हें लेने से इन्कार कर दिया। इसके बाद बिचौलियों ने धर्मेंद्रभाई से संपर्क कर तोड़बट्टा करने की कोशिश की। धर्मेंद्र ने अपराध शाखा को संदेहियों के मोबाइल नंबर दिए और टीम ने लोकेशन निकालकर आरोपित मसरू और प्रेमपाल को पकड़ लिया। देहरादून से गुजरात भेजी जा रही लाखों की शराब पकड़ी कनाड़िया पुलिस ने लाखों की अवैध शराब से भरा ट्रक पकड़ा। पुलिस ने ट्रक चालक को गिरफ्तार किया, लेकिन माफिया का पता नहीं चल पाया। शराब सीमेंट के ट्रक (बल्कर) में भरी गई थी। शराब की बोतलों से बैच नंबर कुरेद कर मिटा दिए गए हैं। एडिशनल डीसीपी (अपराध) अमरेंद्रसिंह के मुताबिक ट्रक क्रमांक एमपी 09 एचएच 6381 को कनाड़िया ब्रिज के समीप से पकड़ा। ट्रक में चालक प्रेमराम पुत्र नारायण राम जाट निवासी सरणुपुंजी बाड़मेर (राजस्थान) बैठा था। चालक ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और बताया कि सीमेंट ले जा रहा है। पुलिस ने मजदूर लगाकर ट्रक खाली करवाया तो अंग्रेजी शराब की 811 पेटियां निकलीं। चालक ने बताया कि उसने ट्रक देहरादून में सुपुर्दी में लिया था। ट्रक मालिक ने उससे कहा था कि झाबुआ-आलीराजपुर के रास्ते वडोदरा (गुजरात) जाना है। इसके बाद दूसरा ड्राइवर ट्रक ले लेगा। इसके बदले चालक को 60 हजार रुपये मिलते हैं। वह पूर्व में भी कई बार शराब से भरे ट्रक पहुंचा चुका है। एएसआई मुनेंद्रसिंह कुशवाह के मुताबिक शराब की बोतलों की जांच में पता चला कि आरोपितों ने बैच नंबर कुरेद कर मिटा दिए हैं। इससे डिस्टिलरी और ठेकेदार की जानकारी नहीं मिल सकेगी।

बड़े पर्दे पर दिखेगा गोटमार मेले का अनोखा रंग, फिल्म की शूटिंग की तैयारी शुरू

पांढुर्णा मध्यप्रदेश के पांढुर्णा का प्रसिद्ध गोटमार मेला अब जल्द ही बड़े परदे पर दस्तक देने जा रहा है। पांढुर्णा की मिट्टी, जाम नदी के पत्थर और गोटमार की कहानी, जल्द ही बड़े परदे पर गूंजेगी। मुंबई की पल्स मीडिया और क्रेजी बैग्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने गोटमार पर फिल्म बनाने का ऐलान किया है। फिल्म निर्माण से पहले परंपरा और लोक गतिविधियों का गहन अध्ययन करने के लिए शुक्रवार को मुंबई से एक विशेष दल पांढुर्णा पहुंचा। इस दल में निर्माता सौरभ गौड़, संगीत निर्देशक शैल आर. सैनी, कार्यकारी निर्माता दिव्यांश मिश्रा, अपार जैन, और प्रमुख सहयोगी जितेंद्र परमार, दीपक कुशवाह व उत्कर्ष चौधरी शामिल थे। टीम ने किया स्थल का दौरा पांढुर्णा पहुंचकर दल ने सबसे पहले गोटमार मेले की आराध्या मां चंडिका के दर्शन किए। इसके बाद टीम ने गोटमार स्थल का निरीक्षण किया और वहां मौजूद लोगों से बातचीत कर इस अनूठे मेले की परंपराओं और उससे जुड़ी मान्यताओं को समझा। मीडिया से चर्चा में निर्माता सौरभ गौड़ ने बताया- “गोटमार मेला अपनी अलग ही पहचान रखता है। इस परंपरा में आस्था, लोक संस्कृति और जनमानस की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। हमारी कोशिश है कि फिल्म के माध्यम से इस मेले की लोकप्रियता केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों तक पहुंचे। प्रेमी युगल की कहानी गोटमार मेले की शुरुआत को लेकर एक किवदंती भी प्रचलित है। कहा जाता है कि पांढुर्णा का एक युवक सावरगांव की युवती से प्रेम करता था। एक दिन युवक अपनी प्रेमिका को लेकर पांढुर्णा लौट रहा था। जैसे ही वे जाम नदी के बीच पहुंचे, सावरगांव के लोगों को खबर मिल गई। युवती को रोकने सावरगांव के लोग पत्थरों के साथ पहुंचे और युवक पर हमला किया। जवाब में पांढुर्णा के लोग भी पत्थर बरसाने लगे। पत्थरों की इस मारा-मारी में अंततः प्रेमी युगल की जान चली गई। तभी से गोटमार मेले की परंपरा शुरू हुई और यह आयोजन हर साल आस्था, परंपरा और उस प्रेम कहानी की याद में होता आ रहा है। जिस पर अब फ़िल्म बनने जा रही है। फिल्म से बढ़ेगा आकर्षण टीम का मानना है कि गोटमार पर आधारित फिल्म दर्शकों के लिए रोचक और भावनात्मक अनुभव होगी। साथ ही यह परंपरा और संस्कृति का दस्तावेज बनकर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्लास्टिक मुक्त भारत की ओर बड़ा कदम: इंदौर को मिली बायोप्लास्टिक तकनीक की सौगात

इंदौर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन को साकार करते हुए, बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) ने देश का पहला बायोप्लास्टिक (पॉलीलैक्टिक एसिड-पीएलए) प्लांट स्थापित किया है। यह एक ऐसा कदम है जो सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक बड़ा हथियार साबित होगा। मध्य प्रदेश के इंदौर में हाल ही में ‘बायो युग ऑन द व्हील्स’ नामक एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बलरामपुर चीनी मिल्स के बनाए गए बायोप्लास्टिक उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिन्होंने सभी का ध्यान खींचा। इंडियन प्लास्ट पैक फोरम के अध्यक्ष, सचिन बंसल ने बताया कि गन्ने से प्राप्त होने वाली चीनी को पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) में बदला जाता है, जिससे कई तरह के उत्पाद बनाए जा सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि ये उत्पाद पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल हैं। इन्हें इस्तेमाल के बाद मिट्टी में दबाकर आसानी से डिस्पोज किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता। क्यों है यह प्लांट इतना महत्वपूर्ण ? अभी तक पीएलए बनाने के लिए कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता था, जो काफी महंगा पड़ता था। भारत में इसके उत्पादन से न सिर्फ कीमतें कम होंगी, बल्कि आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।बलरामपुर चीनी मिल्स की प्रतिनिधि, श्वेता सूर्यवंशी ने बताया कि यह नया उद्यम भारत के पहले औद्योगिक-स्तरीय बायो-पॉलीमर प्लांट की स्थापना में सहायक होगा, जो भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। इस बायोप्लास्टिक से कटलरी, कप, बोतलें, स्ट्रॉ, खिलौने, फ्लेक्स बैनर और यहां तक कि पीपीई किट भी बनाई जा सकती हैं। यह पारंपरिक प्लास्टिक का एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प है। इस कार्यक्रम में उद्योगपतियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भी हिस्सा लिया, जिससे इस पहल की गंभीरता और भविष्य की संभावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह प्लांट भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो न सिर्फ प्रदूषण कम करने में मदद करेगा, बल्कि एक आत्मनिर्भर और हरित भविष्य की नींव भी रखेगा।

वायरल वीडियो: लुंगी में नजर आए SDM, अतिक्रमणकारियों पर जमाया रौब

दतिया मध्य प्रदेश के दतिया एसडीएम का अनोखा अंदाज देखने को मिला। एसडीएम साहब लुंगी पहन हाथ में माइक थाम कर अतिक्रमण हटाने पहुंचे। जिसका वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। शहर के पीतांबरा पीठ उत्तर गेट पर एसडीएम संतोष तिवारी सुबह लुंगी पहनकर अतिक्रमण हटाने पहुंचे। उन्होंने अपने हाथ में माइक भी लिया था। एसडीएम को लुंगी में देखकर पहले तो लोग चकित रह गए उसके बाद जब उन्होंने माइक से चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि आप लोगों को बार-बार समझाइए दे रहा हूं तो आपको समझ में नहीं आ रहा है। एक महीने से प्रत्येक शनिवार को दो-दो घंटे खड़े होकर अतिक्रमण हटवा रहा हूं, लेकिन अब मैं आप लोगों का सामान जब्त कर लूंगा। यह सुनते ही अतिक्रमणकारी दुकानदार भागते हुए नजर आए। आपको बता दें कि पिछले दो महीने से लगातार जिला प्रशासन अतिक्रमण मुहिम चला रहा है, लेकिन अतिक्रमणकारी है कि कुछ समय के लिए अतिक्रमण हटाते हैं और फिर प्रशासन के जाते ही वहां अतिक्रमण कर लेते हैं, लेकिन प्रशासन भी मुस्तैद है, जहां भी उसे सूचना मिलती है तत्काल वहां पहुंच जाता है। दतिया की शक्तिपीठ स्थल पीतांबरा पीठ पर श्रद्धालुओं को आने-जाने में कोई परेशानी ना हो इसके लिए प्रशासन लगातार वहां अतिक्रमण पर नजर बनाए हुए हैं।

महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे बॉलीवुड सितारे, सिद्धार्थ और जाह्नवी ने टेका मत्था

उज्जैन बॉलीवुड अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा और अभिनेत्री जाह्नवी कपूर मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंचे। जहां दोनों ने महाकाल मंदिर के दर्शन किए। नंदी हॉल में बैठकर पूजा-अर्चना की और गर्भगृह के द्वार की देहरी पर माथा टेककर भगवान से आशीर्वाद मांगा। शनिवार को बॉलीवुड अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा और अभिनेत्री जाह्नवी उज्जैन पहुंचे। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक हिमांशु ने स्वागत किया। पुजारी राजेश शर्मा और दिनेश त्रिवेदी ने परंपरागत तरीके से पूजा कराई। इस दौरान दोनों भक्ति में लीन दिखाई दिए। संध्या आरती के समय जाह्नवी कपूर ने नंदी के कानों में अपनी मनोकामना की। सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कहा कि महाकाल दर्शन से उन्हें नई ऊर्जा मिली है, जबकि जान्हवी ने इसे एक आध्यात्मिक अनुभव बताया। दोनों सेलिब्रेटी ने मंदिर परिसर में अपने फैंस के साथ सेल्फी भी ली। आपको बता दें कि अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा और अभिनेत्री जाह्नवी कपूर अपनी फिल्म ‘परम सुंदरी’ के प्रचार प्रसार में जुटे हुए हैं। वे टीम के साथ अलग-अलग शहरों में जाकर फिल्म का प्रमोशन कर रहे हैं। दोनों ने आगामी फिल्म की सफलता के लिए बाबा महाकाल से प्रार्थना की। फिल्म ‘परम सुंदरी’ 29 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह मूवी एक रोमांटिक ड्रामा है, जिसमें पहली बार दोनों की जोड़ी स्क्रीन पर नजर आएगी।

भक्ति की मिसाल: इंदौर का परिवार 11 वर्षों से मुफ्त बांट रहा मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं

इंदौर अहिल्या की नगरी में भक्तों को बिना मोल भाव से एक परिवार पुणे की साडू की माटी से बने गणेश मूर्तियां दे रहा है। परिवार की भक्ति की अनूठी पहल एक दो दिन नहीं बल्कि पिछले 11 वर्ष से चलाई जा रही है। परिवार के छोटे-बड़े सभी पांच सदस्य मूर्ति निर्माण गुड़ी पड़वा पर पुणे से मिट्टी मंगवाकर विघ्न हर्ता की अनूठी आराधना में जुट जाते है। भक्तों ने दक्षिणा गणेश का नाम दिया इस परिवार की इस भक्ति को देख भक्तों ने उनके द्वारा बनाए जा रहे गणेश को दक्षिणा गणेश का नाम दिया है। आज के समय में पाई-पाई के लिए आप धापी मची हुई है, लेकिन यह न्यू राजाराम नगर स्कीम नंबर 51 में रहने वाला यह परिवार श्रद्धा के अनुरूप मिली दक्षिणा के बदले बगैर किसी मोल भाव के गणेश मूर्तियां दे रहा है।   इनकी संख्या भी हर वर्ष 500 से ऊपर जाती है। मूर्ति ले जाने वाले लोग अपनी इच्छा के अनुरूप मूर्ति के बदले मूर्ति के स्थान पर रख देता है। पर्यावरण हितैषी मूर्तियां सुंदर मूर्तियां संदीप पडोले को बनाता है। अपनी मन पसंद की मूर्ति पसंद कर अपनी श्रद्धा के मुताबिक दक्षिणा रख, लकड़ी के पाठ पर रख सम्मान के साथ अपने घर चले जाते हैं। पहल शुरू की तब जागरूकता का अभाव मूर्ति बनाने वाले संदीप किशोर पडोले बताते है कि जब हमने माटी के गणेश की मूर्ति बनाना शुरू की तो उस समय माटी के मूर्ति बनाने को लेकर लोगों में जागरुकता का अभाव था। उस समय हमने पुणे से इंदौर साढू की माटी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर एक से बढ़कर एक गणेश मूर्तियां तैयार करना शुरू की। इसमें शुरुआत में हमने पांच के करीब शुरुआत की थी। इसमें पिता किशोर, पत्नी मनीषा पडोले, बेटा नैतिक और भाई अमित हाथ बटा रहे है। ऐसी हुई इसकी की शुरुआत परिवार के सदस्य बताते है कि इसकी शुरुआत व्यवसायिक नहीं की गई। 11 साल पहले उन्होंने अपने माटी के गणेश बनाए, पास की आंटी को पसंद आए, वो ले गई। इसके बाद चार प्रतिमाएं बनाई वो भी आस पास के लोग गणेश उत्सव के लिए स्थापित करने के ले गए। इसके बाद उत्साह बढ़ा और मूर्तियां बनाना शुरू की। हमारे द्वारा बनाए गए मूर्तियां का नाम लोगों ने खुद ही दक्षिणा गणेश रख दिया। इस प्राप्त दक्षिण का उपयोग सेवा कार्य के लिए किया जाता है।

भारतीय सेना के शक्तिशाली टैंक T-72 और T-90 का अब MP में होगा रखरखाव

भोपाल   भारतीय सेना में शामिल शाक्तिशाली रूसी मूल के टी-90 और टी 72 टैंक की जल्द मध्यप्रदेश में रिपेयरिंग होगी. इन टैंकों की रिपेयरिंग के लिए मध्यप्रदेश में जल्द ही वॉर टैंक रिपेयरिंग हब बनने जा रहा है. मध्यप्रदेश के दौरे पर आई केन्द्रीय रक्षा संयुक्त सचिव गरिमा भगत ने भोपाल में डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स की मीटिंग में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के जबलपुर, कटनी, इटारसी और सागर के बीच डिफेंस कॉरिडोर की भरपूर संभावनाएं हैं. जबलपुर में टैंक रिपेयरिंग हब के लिए करीबन 300 करोड़ का निवेश प्रस्ताव भी मिला है. डिफेंस सेक्टर का बड़ा केन्द्र बन सकता है एमपी मैन्युफैक्चरर्स और अधिकारियों से चर्चा के दौरान केन्द्रीय रक्षा संयुक्त सचिव ने कहा, '' मध्यप्रदेश के जबलपुर में 24 सितंबर को एमएसएमई कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रही है. डिफेंस सेक्टर में जबलपुर में अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं. यहां पहले से ही व्हीकल फैक्ट्री और गन कैरिज फैक्ट्री मौजूद हैं. व्हीकल फैक्ट्री में भारतीय सेना के शक्तिशाली टैंक टी-90 और टी-72 की रिपेयरिंग का भी प्रस्ताव है. मध्यप्रदेश में रक्षा क्षेत्र में निवेश को लेकर बड़ी संभावना मौजूद है और केन्द्र सरकार इसमें प्रदेश का सहयोग कर रही है. रूसी मूल के हैं T-90, T72 टैंक     टी-90 टैंक मूल रूप से रूसी युद्धक टैंक हैं.     इसका भारतीय नाम भीष्म दिया गया है.     इसे विश्व के सबसे घातक टैंकों में से एक माना जाता है.     2003 से ही यह भारतीय सेना का मुख्य युद्ध टैंक है.     इसे लगातार अपग्रेड किया जा रहा है.     इसी तरह टी-72 टैंक अब पुराने हो चले हैं, टी 90 टैंक टी-72 का ही अपग्रेड वर्जन है.     टी-72 टैंक को भी लगातार अपग्रेड किया जा रहा है.     इन टैंकों में अब 1 हजार एचपी के इंजन लगाए जा रहे हैं.     अभी इसमें 780 एचपी के इंजन लगे हैं. देश का तीसरा बड़ा सेंटर बनेगा मध्यप्रदेश जबलपुर में मेंटेनन्स, रिपेयर और ऑपरेशन सेंटर प्रस्तावित किया गया है. यदि इसने आकार लिया तो यह दिल्ली और चेन्नई के बाद देश का तीसरा बेस टैंक ओवरहॉल फैसिलिटी सेंटर होगा, जहां टैंकों की रिपेयरिंग कर उन्हें नया रूप दिया जाएगा. दिल्ली और चेन्नई में फिलहाल यह काम हो रहा है, लेकिन काम का ज्यादा भार है. इसे देखते हुए इसका तीसरा सेंटर बनाने की ओर कदम आगे बढ़ाए जा रहे हैं. जबलपुर वैसे भी देश का बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब है. यहां गन कैरिज, बुलेटप्रूफ व्हीकल्स और गोला-बारूद बनाकर देश की सेना की बड़ी जरूरतें पूरी की जाती हैं. जबलपुर में 1904 में पहली पहली बार फैक्ट्री लगाई गई थी और सेना से जुड़े हथियार बनाना शुरू किए गए थे. 

दमोह के 3 गांवों ने आपसी सहमति से शराबबंदी का फैसला, तोड़ा तो जेब ढीली

दमोह   शराब को सामाजिक बुराई का दर्जा दिया गया है. दमोह में 3 गांव के लोगों ने मिलकर इस बुराई को दूर करने का फैसला किया है. ग्रामीणों ने आपसी सहमति से गांव में पूरी तरह से शराबबंदी का फैसला लिया है. इस फैसले को कड़ाई से लागू कराने के लिए इसका उल्लंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि शराब की वजह से कई घर-परिवार बर्बाद हो गए. गांव में आए दिन शराब पीकर मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं. इस पर लगाम लगाने के लिए ये फैसला लिया गया है. दमोह के 3 गांवों में शराबबंदी का निर्णय विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा दमोह में शराबबंदी के लिए मुहिम चलाई जा रही है. जिसमें भगवती मानव कल्याण संगठन द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग ला रहे हैं. संगठन के प्रयासों से 2 दिन के भीतर जिले के 3 ग्राम पंचायत आनू, हलगज और मुराड़ी में सर्वसम्मति से शराबबंदी का निर्णय लिया गया. इस मौके पर जनप्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय थाने की पुलिस भी मौजूद थी. ग्रामीणों की सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय पंचायत में फैसला लिया गया कि तीनों गांवों में शराब, गांजा सहित सभी प्रकार के नशे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. जो भी व्यक्ति इस फैसले का उल्लंघन करेगा, जैसे शराब पीकर गांव में आएगा, गांव में शराब बेचेगा या किसी भी प्रकार का नशा करने या दूसरों को करने के लिए प्रेरित करेगा, उस पर 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. ग्रामीणों ने नारा लगाकर इस बुराई को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया. ग्रामीणों की सर्वसम्मति से लिया गया फैसला ग्राम पंचायत मुड़ारी के सरपंच प्रतिनिधि मुकेश सिंह ने बताया "हमारे गांव में जो गांजा, शराब और अन्य नशीले पदार्थ बिक रहे हैं उन्हें बंद करना है. इससे गांव में बहुत परेशानियां हो रही हैं. शराब पीकर लोग गाली गलौज भी करते हैं. जिसके बाद सभी ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया और प्रस्ताव पारित किया है कि गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू की जाए." आनू की ग्राम सभा में पहुंचे बांदकपुर चौकी प्रभारी एएसआई राजेंद्र मिश्रा में कहा कि "यह एक अच्छी पहल है. इस सामाजिक बुराई को दूर होना चाहिए. ग्रामीण और उनकी मुहिम में पुलिस का पूरा सहयोग है. पहले भी पुलिस ने सहयोग किया है अभी भी करेगी." शराब पीकर गाली गलौज करने पर 5 हजार का जुर्माना भगवती मानव कल्याण संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश लोधी ने कहा कि "शराब ने घर परिवार में कोहराम मचा रखा है. जिस परिवार में बाप-बेटे शराब पीते हैं, वहां मारपीट होती है लड़ाई-झगड़े होते हैं. वहां का वातावरण खराब हो गया है. इससे जब लोग परेशान हो गए तो इसके लिए सभी जाति धर्म के लोगों ने निर्णय लिया कि शराब बंदी की जाए. इसके लिए शराब पीकर गाली-गलौज करने वालों पर 5000 और 11000 रुपए का जुर्माने का प्रावधान रखा गया है." मध्य प्रदेश के कई गांवों में लागू है शराबबंदी इससे पहले भी बीते महीने दमोह की हटा तहसील के बंधा गांव में ग्रामीणों ने आपसी सहमति से शराबबंदी का निर्णय लिया था. इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के कई गांव में इसी तरह शराबबंदी का फैसला लिया गया है. बुरहानपुर के चौंड़ी और जम्बूपानी गांव में शराब बैन है. जबलपुर की तिन्हेटा तहसील के 6 गांवों में शराबबंदी लागू है. निवाड़ी के किशोरपुरा गांव में शराब बैन है. इसके अलावा भी प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं जहां ग्रामीणों ने आपसी सहमति से गांव में शराब पीने और बेचने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.

RSS की विस्तार रणनीति में बदलाव, भैयाजी जोशी बोले- गांव से जोड़ेंगे बड़ी कंपनियों को

इंदौर  इंदौर में हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के एक दिवसीय प्रवास के बाद अब संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भैयाजी जोशी मध्यप्रदेश पहुंचे हैं। वे इंदौर में संघ पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इसमें संघ के शताब्दी वर्ष (2025-26) के दौरान प्रदेश के गांव-गांव में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। युवाओं और प्रोफेशनल्स को शाखाओं से जोड़ने पर जोर भैयाजी जोशी ने इंदौर से पहले बैतूल में बैठक की थी। इस बैठक में पंच परिवर्तन, शाखाओं का विस्तार और सेवा कार्यक्रमों पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, जोशी शाम तक इंदौर पहुंचेंगे और यहां संपर्क विभाग के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। संघ 2025-26 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर से की गई है। शताब्दी वर्ष में विशेष रूप से युवाओं और प्रोफेशनल्स को शाखाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। शाखाओं की संख्या बढ़ाने के लिए समय-निर्धारण लचीला रखा जाएगा ताकि सुबह से शाम तक किसी भी समय शाखा लगाई जा सके। इसके साथ ही गोष्ठियों और पंच परिवर्तन कार्यक्रमों का कैलेंडर भी तैयार किया गया है। प्रचारकों को गांवों में जिम्मेदारी बैतूल बैठक में भैयाजी जोशी ने प्रचारकों को निर्देश दिए कि वे गांवों में शाखाओं की संख्या बढ़ाएं और कॉलेज, आईटी के छात्रों व प्रोफेशनल्स को संघ से जोड़ें। इसके अलावा शहरों में पथ संचलन, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संवाद और युवाओं को नगर, मंडल व बस्तियों में सक्रिय करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। विजयदशमी (2 अक्टूबर 2025) से संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू होंगे। पंच परिवर्तन पर फोकस मालवा प्रांत में वर्तमान में 3046 स्थानों पर 4636 शाखाएं संचालित हो रही हैं। बैतूल सम्मेलन में संघ के सामाजिक और सेवा कार्यों की भी समीक्षा की गई, जिनमें शिक्षा, चिकित्सा, स्वावलंबन और सामाजिक जागरूकता शामिल हैं। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि पंच परिवर्तन के तहत स्वदेशी, पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता और कुटुंब प्रबोधन से जुड़े कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके अलावा बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक नए लोगों को जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है। रिटायर अधिकारियों-कर्मचारियों को भी संघ के कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए संपर्क अभियान शुरू कर दिया गया है।