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इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग का कहर: बर्बाद हुए सैकड़ों परिवार, टूटी कई जिंदगियां

 इंदौर  ऑनलाइन गेमिंग से अपना सबकुछ गंवा रही युवा पीढ़ी और इसकी लत का शिकार हुए अपने नौनिहालों को गंवा रहे परिवारों को अब जाकर राहत मिलने की उम्मीद जागी है। प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाए जाने की राह भी साफ हो गई है। देशभर में बीस हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि गंवाने के अलावा सैकड़ों युवाओं ने आत्महत्या भी कर ली। 2020 में इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ जनहित याचिका भी दायर की गई थी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार तथा गेमिंग कंपनियों के अलावा इसका प्रचार करने वाले खिलाड़ियों और फिल्म सितारों को भी नोटिस दिए गए थे। इंदौर में पिछले कुछ वर्षों में कई दर्दनाक घटनाएं सामने आईं। 13 वर्षीय छात्र आकलन जैन ने ऑनलाइन गेम खेलते हुए अपनी मां का डेबिट कार्ड इस्तेमाल कर लगभग 2,800 रुपये गंवा दिए। डर और तनाव के कारण एक अगस्त को उसने आत्महत्या कर ली। उसके स्वजन आज भी यह दर्द नहीं भूल पाए हैं। स्वजन ने कहा कि हमारा बेटा होनहार था। अगर पहले ही सरकार गेमिंग पर सख्ती करती तो शायद वह आज जीवित होता। नशे की तरह है गेमिंग की लत गेमिंग की लत नशे जैसी होती है। मरीज जब तक गेम नहीं खेलता, बेचैन रहता है। कई मामलों में लोग सारी कमाई एक हफ्ते में ऑनलाइन गेम में उड़ा देते हैं। इलाज के दौरान उन्हें दवा के साथ-साथ काउंसलिंग और बैंक खाते में सीमित पैसे रखने जैसी सलाह दी जाती है। माता-पिता को बच्चों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। – डॉ. कृष्णा मिश्रा, मनोचिकित्सक केस 1 : मार्च में इंदौर के 16 वर्षीय छात्र प्रिंस का मामला भी पूरे शहर को झकझोर गया था। वह ऑनलाइन गेम्स का आदी था और जब उसका फोन चोरी हो गया तो उसे तुरंत नया फोन नहीं मिल सका। गुस्से और बेचैनी में उसने जहर खा लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। केस 2 : 25 वर्षीय जितेंद्र वास्कले इंदौर में पढ़ाई के साथ सुरक्षा गार्ड का काम करता था। ऑनलाइन गेमिंग में फंसकर उसने लोन ले लिया, लेकिन लगातार हारने के कारण कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया। दबाव और निराशा में उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में उसने साफ लिखा कि वह कर्ज और गेमिंग लत से टूट चुका है। केस 3 : 24 वर्षीय एक नौकरीपेशा युवक जो हर माह 50 हजार रुपये कमाता था, यह पैसा वह एक ही हफ्ते में गेम में उड़ा देता था। इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचा। उसे ऑनलाइन गेम की लत बार-बार तलब होती थी। जब तक गेम नहीं खेलता था, बेचैन रहता था। उसके लिए गेम नशे की तरह एडिक्शन रहता है। डॉक्टरों ने खाते में कम रुपये रखवाए। इसके साथ ही दवाइयां भी दी। करीब छह माह इलाज के बाद वह अब स्वस्थ है। ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से हुई ठगी मंदसौर में ऑनलाइन गेम की लत से कई लोगों ने रुपये गंवाए हैं। लोक-लाज के भय से अधिकांश पुलिस थाने तक नहीं पहुंचे। 15 दिसंबर 2024 को इंदौर क्राइम ब्रांच ने मंदसौर के आठ सदस्यीय गिरोह को गिरफ्तार किया था, जो ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट के माध्यम से फ्राड करते थे। यह ठग लोगों से लिए रुपये अलग-अलग खातों में डालकर उन्हें आइडी और पासवर्ड देते थे। उसी आइडी से लोग वेबसाइट पर सट्टा खेलते थे। आरोपितों के पास से करोड़ों का हिसाब-किताब मिला था। पुलिस ने मंदसौर के परीक्षित लोहार, रोशन लालवानी, विजय विश्वकर्मा, अभिषेक यादव, राजेश कोतक, प्रफुल्ल सोनी, महेंद्रसिंह के साथ ही बिहार के रुचित को गिरफ्तार किया था। आरोपितों के पास से फर्जी बैंक खाते नंबर भी मिले थे। मोबाइल में दुबई मनी एक्सचेंज करने वाले लोगों के नंबर भी मिले थे।

रिपोर्ट के लिए CAG परेशान, मध्य प्रदेश के 34 विभागों से नहीं मिला खर्च का डाटा

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के कई विभागों की हालत अच्छी नहीं है। मंत्रियों की उदासीनता और अफसरों की लापरवाही का नतीजा यह हो रहा है कि 34 विभाग अब तक बजट के बारे में जानकारी नहीं दे पा रहे। यह जानकारी ऑडिटर जनरल कार्यालय द्वारा मांगी गई है, लेकिन उसे जानकारी नहीं मिल पाई। दरअसल, महालेखाकार कार्यालय कैग ने 31 मार्च 2025 की स्थिति तक विभागों से जानकारी मांगी है। यह जानकारी मांगी गई है कि विभाग के अधीन बजट नियंत्रण अधिकारियों ने बैंकों में कितनी राशि जमा कर रखी थी? इस अवधि में कौन-कौन से बड़े कार्य और परियोजनाएं अधूरी रहीं? कई बार पत्र लिख चुका CAG महालेखाकार कार्यालय ने इसको लेकर इस वित्त वर्ष में सबसे पहले 29 अप्रैल को, फिर 20 मई और इसके बाद 24 जुलाई को पत्र लिखा था। महालेखाकार कार्यालय इस बार सीधे मुख्य सचिव को पत्र लिख चुका है। इसके बाद गुरुवार तक सभी विभागों को जानकारी भेजने के निर्देश एक बार फिर जारी किए गए थे। इसके बाद भी जवाब नहीं मिला तो एक अगस्त को वित्त विभाग को अलग और मुख्य सचिव को अलग पत्र भेजकर जानकारी दिलाने को कहा है। वित्त विभाग ने बार-बार विभागों को जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि बजट नियंत्रण अधिकारियों की इस लापरवाही का सीधा असर सरकार की वित्तीय रिपोर्टिंग पर पड़ रहा है। इससे राज्य के वित्तीय लेनदेन का ब्यौरा तैयार करने में मुश्किलें आ रही हैं। यह विभाग बने लापरवाह राजस्व विभाग, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, एमएसएमई, जनजातीय कार्य विभाग, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, अनुसूचित जाति कल्याण, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, महिला एवं बाल विकास, वाणिज्यिक कर, संसदीय कार्य, विमानन, लोक सेवा प्रबंधन, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, वित्त विभाग, गृह विभाग, स्कूल शिक्षा, विधि एवं विधायी कार्य, जनसंपर्क विभाग, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, संस्कृति विभाग, उच्च शिक्षा, सामान्य प्रशासन, वन विभाग, खनिज साधन, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, श्रम विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, नगरीय विकास एवं आवास, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग और लोक निर्माण विभाग। वित्त विभाग ने मांगी थी यह जानकारी तय बजट के अलावा अन्य खर्च, अनपेड बिलों से संबंधित देनदारियां, आउट साइड फंड ऑपरेशन की स्थिति, बैंकों में जमा राशि, पंचायत राज संस्थाओं को दी जाने वाली बकाया ग्रांट, अपूर्ण बड़े कार्यों की सूची, नए ऋण और अग्रिम (एडवांस) की जानकारी, ऋण की अदायगी और बकाया स्थिति, ऋण और अग्रिम का समेकित विवरण (समरी), निगमों, सरकारी कंपनियों और सहकारी संस्थाओं को दी गई सहायता, पीपीपी मोड और जनभागीदारी के तहत हुए निवेश की जानकारी, नई योजनाओं पर लिए गए नीतिगत निर्णयों का संभावित कैश फ्लो, संस्थाओं को दी गई ग्रांट की पूरी जानकारी, सिंचाई परियोजनाओं के वित्तीय परिणाम, अब तक नहीं दी गई यह महत्वपूर्ण जानकारी, बिजली योजनाओं के वित्तीय परिणाम, ऋण व लाभांश की रिपोर्ट।  

अब स्मार्ट पोर्टल बताएगा MP के किस जिले में कौन-सी बीमारी फैल रही है

 भोपाल  मध्य प्रदेश के जिला अस्पताल अब डिजिटल तकनीक से लैस हो रहे हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) मध्यप्रदेश ने स्मार्ट पोर्टल (स्टेट मानिटरिंग एंड असेसमेंट आन रियल टाइम पोर्टल) को नए स्वरूप में शुरू किया है। शुरुआत राजधानी के जेपी अस्पताल से हो चुकी है और आने वाले समय में सभी जिला अस्पताल इस प्लेटफार्म से जुड़ेंगे। स्मार्ट पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफार्म है, जिसमें मरीजों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट और दवाइयों की जानकारी दर्ज होगी। हर मरीज को यूनिक हेल्थ आईडी (यूएचआईडी) नंबर मिलेगा। इस नंबर के आधार पर डॉक्टर तुरंत मरीज की पिछली रिपोर्ट, बीमारियों और उपचार का पूरा रिकॉर्ड देख सकेंगे। इससे मरीजों को हर बार पुराने पर्चे और कागज लाने की झंझट से छुटकारा मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग को मिलेगा जिलावार डेटा विशेषज्ञों के अनुसार, पोर्टल से जिलावार बीमारी का डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा। किस जिले में कौन-सी बीमारी तेजी से फैल रही है, इसका तुरंत पता लगाया जा सकेगा। कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक का विश्लेषण संभव होगा। इससे सरकार को स्वास्थ्य नीतियां बनाने और योजनाओं की दिशा तय करने में मदद मिलेगी। पोर्टल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है। इसमें गैर-संचारी रोग (एनसीडी), नेशनल ओरल हेल्थ प्रोग्राम (एनओएचपी), नेशनल प्रोग्राम फार हेल्थ केयर आफ द एल्डरली (एनपीएचसीई), नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनआरसीपी) और नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एनएमएचपी) शामिल होंगे। अब इन योजनाओं से जुड़ी जांच, दवाइयों और परामर्श की जानकारी भी ऑनलाइन दर्ज होगी। पारदर्शिता और सुविधा डिजिटल सिस्टम के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं न केवल पारदर्शी होंगी, बल्कि तेज भी होंगी। डॉक्टर और मरीज दोनों को इससे सुविधा होगी। मरीज का इलाज आसान होगा और अस्पताल प्रशासन के रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी। प्रदेशभर में लागू किया जा रहा     पोर्टल पहले से संचालित था, लेकिन इसकी प्रापर मानिटरिंग नहीं हो पा रही थी। कुछ कमियां थीं, इसलिए अब इसे नए स्वरूप में लागू किया जा रहा है। मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री और राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं को एक ही प्लेटफार्म पर लाकर इसे 2025 से पूरे प्रदेशभर में लागू किया जा रहा है। – सलोनी सिडाना, मिशन संचालक, एनएचएम, मप्र  

मध्यप्रदेश में पराली प्रबंधन की नई पहल, किसानों को धान और गेहूं के अवशेष से होगा फायदा

ग्वालियर  ग्वालियर चंबल अंचल में हुई रिकार्ड वर्षा के बीच धान का रकबा लक्ष्य से अधिक बढ़ गया है। इसके साथ ही पराली की समस्या भी डराने लगी है, क्योंकि पिछले साल देश में सबसे अधिक पराली अंचल के श्योपुर और दतिया में जलाई गई थी। बहरहाल, कृषि विभाग ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। कृषि विभाग ने किसानों को पराली का प्रबंधन सिखाने की योजना बनाई है। योजना कारगर साबित हुई तो किसानों को दोहरा फायदा होगा। यानी पराली की समस्या का समाधान होगा और बुवाई के लिए खेत की बार-बार जुताई से मुक्ति मिलेगी। एक बार में ही खेत की पराली समस्या का हल और बीज की बुवाई भी हो जाएगी। यह काम हैप्पी सीडर मशीन से होगा। कृषि विभाग फिलहाल जिले के 250 किसानों को 250 हेक्टेयर जमीन पर हैप्पी सीडर से पराली प्रबंधन व जुताई का तरीका सिखाएगा। क्या है हैप्पी सीडर मशीन, कैसे होगा पराली की समस्या का हल हैप्पी सीडर एक आधुनिक कृषि मशीन है, जो खासतौर पर पराली (फसल कटने के बाद बचा हुआ डंठल और पुआल) जलाने की समस्या का समाधान करेगी। हैप्पी सीडर को ट्रैक्टर से जोड़ा जाता है। यह पहले खेत में पड़ी हुई पराली को काटकर साइड में फैला देती है। उसी समय मशीन जमीन में गेहूं या अन्य रबी की फसल का बीज बो देती है। इस तरह बिना पराली जलाए सीधे उसी खेत में अगली फसल की बुआई हो जाती है। क्या है कृषि विभाग की पूरी योजना     स्थानीय कृषि विभाग धान की पैदावार करने वाले अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे 250 किसानों को चिह्नित कर रहा है, जिनके पास कम से कम एक हेक्टेयर जमीन हो। धान की फसल होने के बाद इन किसानों के खेतों में हैप्पी सीडर से सीधे पराली को काटकर, खेत जोतकर गेहूं की बुवाई कराई जाएगी।     हैप्पी सीडर मशीन की कीमत 1.5 लाख से 3 लाख रुपये के बीच है। इस पर सरकार 50 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी दे रही है। यदि कोई समूह या समिति इसे खरीदता है, तो सब्सिडी और बढ़ जाती है। कृषि विभाग गांव के उन किसानों को हैप्पी सीडर मशीन खरीदने के लिए प्रेरित कर रही है, जिनके पास ट्रैक्टर हैं। ऐसे होगा किसानों को दोहरा फायदा     कृषि विभाग के सहायक संचालक नरेश मीणा बताते हैं कि धान की कटाई के बाद पराली को जलाने या नष्ट करने के लिए खेत को तैयार किया जाता है। इस तरह बुआई से पहले किसानों को दो से तीन बार जुताई करना होती है। हैप्पी सीडर मशीन पराली की कटाई करेगी और साथ ही गहरी जुताई भी कर देगी। इस तरह किसानों का श्रम और खर्च बचेगा। इसका उपयोग गेहूं की कटाई के बाद नरवाई के प्रबंधन में भी किया जा सकता है।     हैप्पी सीडर से काटकर खेत की मिट्टी में मिलाई गई पराली एक से डेढ़ महीने में जैविक खाद में बदल जाएगी। इससे किसानों को खेतों में खाद भी कम देना होगा। धान का रकबा बढ़ गया     ग्वालियर ही नहीं, श्योपुर आदि जिलों में अच्छी वर्षा की वजह से अन्य फसलों की बुवाई नहीं हो पाई, केवल धान की बुवाई हुई है। इस बार धान का रकबा करीब 15 हजार हेक्टेयर बढ़ गया है। धान की कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या खड़ी होगी। इसलिए किसानों को हैप्पी सीडर मशीन से पराली का प्रबंधन व सीधे गेहूं की बुआई का प्रबंधन सिखाया जाएगा। – आरबीएस जाटव, उप संचालक, कृषि व किसान कल्याण विभाग, ग्वालियर  

पंडित प्रदीप मिश्रा की मुश्किलें बढ़ीं, कुबरेश्वर धाम विवाद अब अदालत में

सीहोर मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में स्थित कुबरेश्वर धाम वाले पंडित प्रदीप मिश्रा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा व कुबरेश्वर धाम की विटलेश सेवा समिति के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने इस याचिका पर पुलिस को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं साथ ही मामले में पर कोर्ट में अगली सुनवाई के लिए 13 सितंबर का दिन तय किया है। इंदौर के एक वकील ने सीहोर आकर ये याचिका दायर की है। पंडित प्रदीप मिश्रा की बढ़ सकती हैं मुश्किलें इंदौर के एडवोकेट प्रकाश यादव ने सीहोर के कुबरेश्वर धाम में बीते दिनों हुए कार्यक्रम में अव्यवस्था व अलग अलग कारणों से सात लोगों की मौत होने के बाद सीहोर आकर मंडी थाना पुलिस में शिकायत पत्र दिया था। जब शिकायत पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो एडवोकेट प्रकाश यादव ने सीहोर जिला न्यायालय में याचिका लगाई। जिसमें पंडित प्रदीप मिश्रा और विटलेश सेवा समिति को विभिन्न धाराओं में आरोपी बनाने की मांग की गई। अब कोर्ट ने मंडी थाना पुलिस को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 सितंबर का दिन तय किया है।   कुबरेश्वर धाम में हुई थीं मौतें बता दें कि बीते दिनों कुबेरेश्वर धाम में कांवड़ यात्रा व रूद्राक्ष वितरण का कार्यक्रम हुआ था। इन कार्यक्रमों के दौरान अलग अलग कारणों से सात लोगों की मौत हो गई थी। लोगों की भारी भीड़ कुबरेश्वर धाम में जुटी थी और भारी अव्यवस्थाओं की खबरें भी सामने आई थीं। कांवड़ यात्रा के दौरान इंदौर-भोपाल रोड पर लंबा जाम भी लगा था जिसके कारण लोगों को काफी परेशानी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने मात्र डीजे संचालकों पर मामला दर्ज किया था।

भोपाल हाट में दो दिवसीय आजीविका फ्रेश मेले का उद्घाटन किया राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह ने

स्व-सहायता समूहों के स्टॉल पर मिल रहे हैं रसायन रहित कृषि उत्पाद बेडई, भुट्टे का कीस, कोदो की खीर, हर्वल पेय, सहित विभिन्न क्षेत्रों के व्यंजनों का स्वाद एवं मनोरंजन भी 24 अगस्त को भी रहेगा मेला भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत स्व-सहायता समूहों का दो दिवसीय आजीविका फ्रेश मेला भोपाल हाट में 23 एवं 24 अगस्त को आयोजित किया गया है। मेले का शुभारंभ आज पंचायत एवं ग्रामीण विकासराज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह ने किया। मेले में विभिन्न जिलों से आई स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा रसायन रहित एवं जैविक तरीके से उगाये हुये कृषि उत्पादों, दुग्ध उत्पादों सहित अन्य उत्पादों का विक्रय सह प्रदर्शन किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर मेले का शुभारंभ कर उद्वोधन दिया। तत्पश्चात मेला भ्रमण कर समूहों की दीदियों से चर्चा की, उत्पाद देखे,कला प्रदर्शन करने वाली दीदियों का हौसला बढाया तथा व्यंजनों का स्वाद भी चखा। इसके पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन श्रीमती हर्षिका सिंह ने स्वागत उद्वोधन देते हुये मेले के संबंध में जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को वृहद बाजारों से जोडने के लिये अनेक प्रयास आजीविका मिशन द्वारा किये जा रहे हैं। इसी क्रम में स्व-सहायता समूहों का दो दिवसीय आजीविका फ्रेश मेला अरेरा हिल्स पर स्थित भोपाल हाट परिसर में आयोजित किया गया है,मेला प्रात: 11 बजे से रात्रि 09.30 बजे तक चलेगा। मेले में विभिन्न जिलों से आई ग्रामीण स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा स्टॉल लगाये गये हैं, समूहों से जुडेपरिवारों को कम लागत में अधिक उपज हेतु कृषि एवं पशुपालन की उन्नत तकनीकि अपनाने के लिये कृषि सखियों व पशुपालन सखियों द्वारा सहयोग दिया जा रहा है। विशेष रूप से प्राकृतिक पद्धति से रसायन रहित जैविक उत्पाद तैयार करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन प्रयासों के फलस्वरूप समूहों द्वारा रसायन रहित उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं जिन्हें इस मेले में खास तौर से लाया गया है। इनमें मुख्य रूप से अनाज,दलहन, तिलहन, सब्जियां एवं फल दुग्ध आधारित उत्पादों में देशी गाय एवं गिर गाय का घी, पनीर, सोयाबीन उत्पादों में टोफू, सोयाबडी, मशरूम आधारित उत्पादोंमेंसूखा मशरूम, अचार, पाउडर, कुकीज, जंगल की शुद्ध शहद, महुआ उत्पादों में महुआ कुकीज, लड्डू , नमकीन महुआ, लघु वनोपज में आंवला कैंडी, मुरब्बा, मिलेट उत्पादों में कोदो, कुटकी, चावल कुकीज, लड्डू, खीर, सहित जैविक खाद,जैविक कीटनाशक, गौ आधारित उत्पादों में गोवर की मूर्ति, दीये, कंडे आदि शामिल हैं। सब्जियों में श्योपुर एवं अलीराजपुर जिले के ककोडे लोगों की पसंद बने हुये हैं। क्षेत्रीय प्रसिद्ध कृषि उत्पादों में नरसिंहपुर जिले की तुअर (अरहर) दाल एवं गुड, बालाघाट जिले का चिनौरी चावल, सिवनी जिले का जीरा शंकर चावल की खरीददारी तथा क्षेत्रीय खान-पान में मालवा, निमाड, चंबल-ग्वालियर, विंध्य, बुंदेल खण्ड, बघेल खण्ड आदि क्षेत्रों के प्रसिद्ध खान-पान व्यंजनों तथा हर्वल पेय का आनंद इस मेले में लिया जा रहा है।मेले के पहले दिन आद सैलानियों ने दालवाटी-चूरमा, मंगोडे, चटपटी बेडई, भुट्टे का कीस, कोदो-कुटकी की खीर सहित मिलेट के अनेकों व्यंजनों का स्वाद चखा। कला में रूचि रखने वालों के लिये यहां पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन देखने एवं सीखने का अवसर भी मिल रहा है। यहां धार जिले के सुप्रसिद्ध बाग प्रिंट, जरी-जरदोजी, सहित पिथौरा पेटिंग आदि गोंडी आर्ट को सीखने का मौका भी मिल रहा है।भोपाल शहर एवं आस-पास के क्षेत्रों से मेले में खरीददारी के लिये आने वाले परिवारों के मनोरंजन के लिये सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी व्यवस्था की गई है।  

रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

रीवा में दो दिवसीय विशाल रक्तदान शिविर का किया शुभारंभ भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कृष्णाराज कपूर आडिटोरियम रीवा में दो दिवसीय विशाल रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। रक्त फैक्ट्री में नहीं बनता उसका निर्माण मानव शरीर में ही संभव है जब हम रक्तदान करते हैं तो उससे पीड़ित को जीवनदान मिलता है। स्वयं के स्वस्थ के लिए भी रक्तदान लाभकारी होता है। हर स्वस्थ्य व्यक्ति तीन माह में एक बार रक्तदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने जीवन में जो पुण्य के कार्य किये हैं उनमें रक्तदान सर्वोंपरी है। रीवा में अब रक्त को संधारित करने की पर्याप्त सुविधा हो गयी है। सभी नागरिक समय-समय पर रक्तदान करके पीड़ितों की जान बचाने में सहयोग दें। रक्तदान शिविर का आयोजन जिला प्रशासन और प्रजापिता ब्राम्हकुमारी ईश्वरी संस्थान द्वारा किया गया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रजा पिता ब्राम्हकुमारी संस्थान देश में आध्यात्मिक चेतना के विकास और समाज सेवा में सराहनीय कार्य कर रहा है। संस्थान का माउंटआबू मुख्यालय आध्यात्मिक ऊर्जा का केन्द्र है। संस्थान की दादी प्रकाशमणि भौतिक रूप से हमारे बीच अब नहीं हैं लेकिन उनका स्नेह आशीर्वाद और आध्यात्मिक चेतना हमेशा सदैव प्रेरणा देती रहेगी। अपने लिए तो सभी जीते हैं ब्राम्हकुमारी संस्थान ने हमें दूसरों के लिए जीना सिखाया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री श्री नितिन गड़करी ने जबलपुर में विभिन्न निर्माण कार्यों के साथ रीवा को भी सिरमौर डभौरा रोड तथा रीवा बाईपास 8 लेन निर्माण का शिलान्यास करके बड़ी सौगात दी है। बाईपास और बेला सिलपरा रिंग रोड का निर्माण आगामी मार्च माह तक पूरा हो जायेगा। इससे रीवा रिंग रोड की सुविधा वाला प्रदेश का पहला शहर बन जायेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने रक्तदान करने वाले नागरिकों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्व. प्रकाशमणि को श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। आयुक्त नगर निगम डॉ. सौरभ सोनवणे, जिला रेडक्रास समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर चतुर्वेदी, संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय अनिल दुबे, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. आरपी सिंह, ब्राम्हकुमारी संस्थान के श्री बी.के. प्रकाश एवं बड़ी संख्या में संस्थान पदाधिकारी तथा रक्तदान करने वाले उपस्थित रहे।  

IAS अधिकारी के मुरीद बने ज्योतिरादित्य सिंधिया, खूब सराहा कामकाज

अशोकनगर मध्यप्रदेश की गुना शिवपुरी सीट से सांसद और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के एक IAS के कायल हो गए हैं। सिंधिया ने भरे मंच से IAS की तारीफ करते हुए उनके लिए तालियां बजवाईं और उन्हें धन्यवाद भी दिया। पूरा वाक्या अशोकनगर का है जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के लिए पहुंचे थे। बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह के काम की जमकर तारीफ की है। कलेक्टर के कायल हुए सिंधिया बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री कार्यक्रम वितरण के दौरान मंच से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंच से कहा कि सरकार आपके साथ खड़ी है और आपके पास तो ऐसे कलेक्टर हैं जो गाड़ी में बैठकर बत्ती नहीं चलाते वह तो साइकिल पर बैठकर अशोकनगर से चंदेरी पहुंच जाते हैं। इन के लिए तालियां बजाएं। इस पर मंच पर मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी कलेक्टर आदित्य सिंह की तारीफ करते हुए सिंधिया को बताया कि कलेक्टर कीचड़ में एक-एक घर तक पहुंचे थे जिससे सिंधिया और भी प्रभावित हुए और फिर से कलेक्टर के लिए तालियां बजवाईं।   कलेक्टर ने कहा थैंक्यू ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस दौरान मंच से ये भी कहा कि हमारे नाम भी एक ही हैं ये आदित्य हैं और मैं ज्योतिरादित्य हूं। बाढ़ के समय कलेक्टर आदित्य सिंह ने कलेक्टर की तरह नहीं बल्कि परिवार के सदस्य की तरह आप लोगों की सेवा की है। सिंधिया के द्वारा की गई इस तारीफ पर कलेक्टर आदित्य सिंह ने भी मुस्कुरा कर उन्हें थैंक्यू कहा। बता दें कि आदित्य सिंह 2014 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के IAS हैं। उन्होंने करीब 4 महीने पहले अशोकनगर कलेक्टर का पद संभाला और लगातार कार्रवाई करने के लिए चर्चाओं में रहे। उन्होंने साइकिल से अशोकनगर जिले में 65 किमी. का दौरा भी किया जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हुई थी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- कटनी माइनिंग कॉन्क्लेव में मिले 56,414 करोड़ के निवेश प्रस्ताव

कॉन्क्लेव में हुए 3 एमओयू प्रदेश के लिये होंगे महत्वपूर्ण माइनिंग से है कटनी की पहचान विकास में किसान और जवान की तरह उद्योगपति का भी है योगदान हमारी संस्कृति शोषण की नहीं दोहन की है, जिओ और जीने दो प्रदेश में हैं उद्योग हितैषी नीतियां, उद्योग अनुरूप वातावरण उद्योगपति निवेश का बड़े से बड़ा सपना देखें, मध्यप्रदेश सरकार है उनके साथ प्रदेश में मेजर और माइनर मिनरल्स के साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स भी क्षेत्रवार इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के बाद अब हो रही है सेक्टरवाइज कॉन्क्लेव प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को बनाएंगे नंबर वन राज्य मानवता से जीने का नाम ही है राम राज्य भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खनिज संसाधनों के मामले में मध्यप्रदेश कभी किसी से पीछे नहीं रहा है। अब नई परिस्थितियों और संभावनाओं के अनुरूप हम मध्यप्रदेश को देश के माइनिंग स्टेट के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश का यही सही समय है। आप मध्यप्रदेश में अपना उद्योग लगाईए, बड़े सपने देखिए, इन्हें पूरा करने में हम आपकी हर संभव मदद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से अपील की कि दिल खोलकर मध्यप्रदेश में बेहिचक निवेश कीजिए, हम आपको निराश नहीं होने देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कटनी में आज हुई कॉन्क्लेव में मिले निवेश प्रस्ताव यह दर्शाते है कि देश के विभिन्न अंचलों के उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश आकर्षित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कटनी में आयोजित मध्यप्रदेश माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0 में खनन क्षेत्र के उद्योगपतियों और खनन उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष जताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में खनिजों की खोज और खनन क्षेत्र में नई संभावनाओं को एक्सप्लोर करने की दिशा में यह आयोजन बहुत सफल रहा है। कटनी कॉन्क्लेव से सरकार को आठ माइनिंग कम्पनियों द्वारा 56 हजार 414 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। ये निवेश प्रस्ताव हमें और बेहतर करने की नई ऊर्जा देकर उत्साहित भी करते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य शासन ने क्रिटिकल मिनरल की खोज, प्रसंस्करण और संवर्धन के लिए कोल इंडिया लिमिटेड के साथ एमओयू किया। शासन ने खनन क्षेत्र में आर्टिफियल इंटेलीजेन्स, आईओटी, ब्लॉक चेन, रिमोट सेंसिंग के उपयोग के मद्देनजर धनबाद की टेक्समिन आईएसएम के साथ भी एमओयू किया। इसी तरह खनिज अन्वेषण अनुसंधान के लिए राज्य शासन ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल के साथ भी एमओयू साइन किए गए हैं। यह एमओयू मध्यप्रदेश के खनिज क्षेत्र को ऊँचाइयां प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारे धर्म में तांबे का महत्व सोने-चांदी से अधिक है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एक विजनरी लीडर हैं। उन्होंने हर वर्ग की जरूरतों को पूरा करते हुए गुजरात में विकास का जो मॉडल खड़ा किया, आज हम सभी उससे परिचित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गो माता हमें दूध उपलब्ध कराती है और बच्चे को भी पिलाती है। भारतीय संस्कृति की धारा दोहन की है, शोषण की नहीं। दुनिया के बड़े-बड़े देश अपना माल खपाने के लिए चालाकी का रास्ता अपना रहे हैं। आज हमारे उद्योगपति आगे बढ़ रहे हैं। उद्योगपति अपने साथ दूसरों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हैं। आइए मध्यप्रदेश से जुड़िए, यहां पर्याप्त लैंड बैंक, बिजली, पानी है। प्रदेश में शीघ्र ही एयर कार्गो की सुविधा भी मिलेगी और दो मेट्रोपोलिटन सिटी भी बनने जा रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि कटनी में खनिज का भंडार है। अब तो क्रिटिकल मिनरल्स भी मिल रहे हैं। पन्ना में हीरे मिलते हैं तो कटनी में भी सोना मिल सकता है। राज्य सरकार ने सभी सेक्टर्स के विकास के लिए पारदर्शी नीतियां लागू की हैं। पहले इंडस्ट्री कॉन्क्लेव कीं, अब सेक्टर आधारित कॉन्क्लेव कर रहे हैं। आगामी 27 अगस्त को उज्जैन में स्प्रिरीचुअल कॉन्क्लेव हो रही है और ग्वालियर में भी 31 अगस्त को टूरिज्म कॉन्क्लेव होगी। राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। जब भारत 2047 तक विकसित देश बनेगा तो प्रदेश की परिस्थितियां भी  बदल जाएगी। राज्य सरकार ने युवाओं के प्रशिक्षण के लिये कई योजनाएं बनाई हैं। कटनी को 25 अगस्त को बड़ी सौगात मिलने वाली है। प्रदेश में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेजों के साथ अस्पताल शुरू किए जा रहे हैं। राज्य सरकार मेडिकल कॉलेज खोलने पर 1 रुपए में 25 एकड़ जमीन देगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष 25 अगस्त को 4 मेडिकल कॉलेजों के लिए एमओयू होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग के लिए 29 तरह की अनुमतियों को कम करके मात्र 10 कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने श्रम कानून में बदलाव करते हुए महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी है। प्रदेश सरकार की नीतियों से आज दूसरे राज्य भी सीख ले रहे हैं। मध्यप्रदेश देश का नंबर-1 राज्य बने, इसके लिए तेज गति से कार्य हो रहे हैं।  इनके बीच हुए एमओयू कॉन्क्लेव में राज्य शासन ने क्रिटिकल मिनरल की खोज , प्रसंस्करण और संवर्धन के लिए कोल इंडिया लिमिटेड के साथ एमओयू किया। डॉ. चंद्र शेखर सिंह एचओडी क्रिटिकल मिलरल्स, श्री बिरांची दास डायरेक्टर एचआरएसएसईएल, श्री फ्रैंक नोबेल ए डायरेक्टर एंड जीडीएम एमपी स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन और प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने एमओयू का आदान-प्रदान किया। यह समझौता दुनिया की सबसे बड़ी खनन कंपनी और राज्य खनन अन्वेषण एजेंसियों के माध्यम से मध्यप्रदेश को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां देगा। खनन क्षेत्र में आर्टिफियल इंटेलीजेन्स, आईओटी, ब्लॉक चेन, रिमोट सेंसिंग के उपयोग के मद्देनजर धनबाद की टेक्समिन आईएसएम के साथ और खनिज अन्वेषण अनुसंधान के लिए भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल के साथ भी एमओयू साइन हुआ। कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग भी की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उघोगपतियों से किया वर्चुअल संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में श्री राजीव मुंद्रा (कोलकाता) , श्री जेपी अग्रवाल (श्रीलंका), श्री विवेक भाटिया (दिल्ली), श्री वी.साईंराम (कोचीन), श्री थॉमस चेरियन (हैदराबाद) से उनकी निवेश योजनाओं एवं अनुभव को लेकर वर्चुअल संवाद किया। उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार मानते हुए कहा कि … Read more

देहदान का पुण्यकारी निर्णय परोपकार की अद्वितीय मिसाल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

देहदान करने वाली श्रीमती रमा का गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अंतिम संस्कार मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा का भोपाल में हुआ पहली बार अमल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देहदान करने वाली भोपाल निवासी श्रीमती रमा चौदा जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि देहदान का यह पुण्यकारी निर्णय समाज में करुणा, सहअस्तित्व की भावना और परोपकार की अद्वितीय मिसाल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुसार राज्य शासन द्वारा गांधी मेडिकल कॉलेज में देहदान के उपरांत श्रीमती रमा को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ ससम्मान अंतिम विदाई दी गई। भोपाल में यह पहला अवसर है जब किसी का राजकीय सम्मान के साथ देहदान संपन्न हुआ।