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पुजारी के बहिष्कार से बच्चों की पढ़ाई बाधित, प्रशासन ने शुरू की जांच

उज्जैन बड़नगर तहसील के पीर झलार गांव में खाप पंचायत जैसा मामला सामने आया है। यहां मंदिर में हुई सामाजिक बैठक में पुजारी और उसके परिवार का बहिष्कार कर दिया गया। सुनाए गए फैसले में बच्चों की पढ़ाई से लेकर पूजन, मजदूरी, घर के आसपास सफाई तक पर रोक लगा दी गई। फैसले का उल्लंघन करने पर 51 हजार रुपये जुर्माने की चेतावनी भी दी गई है। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।   मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश जानकारी के अनुसार पीर झलार गांव में करीब 300 साल पुराना देव धर्मराज मंदिर है। पूनमचंद चौधरी उर्फ पूनाजी यहां पुजारी हैं। मंदिर की करीब सात बीघा जमीन पर पुजारी खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। चौधरी के मुताबिक कुछ ग्रामीण मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार के नाम पर चंदा इकट्ठा कर लिया। उसी राशि से मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की जा रही है, जिसका पुजारी परिवार ने विरोध किया। पंचायत का फैसला माइक पर पढ़कर सुनाया पुजारी के बेटे मुकेश चौधरी ने बताया कि विरोध के बाद उन्हें और परिवार को निशाना बना लिया। गांव के प्रभावशाली लोगों ने 14 जुलाई को पंचायत बुलाकर बहिष्कार का फरमान सुना दिया। गांव के नागराज मंदिर परिसर में पूर्व सचिव गोकुल सिंह देवड़ा ने पंचायत का फैसला माइक पर पढ़कर सुनाया। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ग्रामीण बैठे नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद पुजारी पूनमचंद चौधरी ने कलेक्टर रौशन कुमार सिंह से शिकायत की है। पुजारी परिवार के तीन बच्चों को स्कूल से निकाला पुजारी के बेटे मुकेश ने बताया कि उसके तीन बच्चे 13 वर्षीय संध्या (आठवीं), 10 वर्षीय सतीश (पांचवीं) और छह वर्षीय विराट (तीसरी कक्षा) निजी विद्यालय में पढ़ते हैं। पंचायत के फैसले के बाद तीनों को स्कूल से निकाल दिया गया है। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि आपके परिवार का विवाद चल रहा है, इसलिए हम बच्चों को नहीं पढ़ा सकते। 'पुजारी परिवार की शिकायत पर जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मंदिर का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।' रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर

जबलपुर एवं ग्वालियर को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये मिलेगा मिनिस्ट्रियल अवार्ड

भोपाल नई दिल्ली में गुरुवार 17 जुलाई को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्‍य एवं केन्‍द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर एवं केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री राज्‍य मंत्री श्री तोखन साहू की उपस्थिति में प्रात: 11 बजे विज्ञान भवन में स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में मध्यप्रदेश के आठ शहरों इन्दौर, उज्जैन, बुदनी, भोपाल, देवास, शाहगंज, जबलपुर एवं ग्वालियर को उनके उत्कृष्ट स्वच्छता प्रयासों के लिए विभिन्‍न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रदेश के विजेता शहरों के गौरवशाली पलों के साक्षी बनने के लिये नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी उपस्थित रहेंगी। प्रदेश के इन 8 शहरों ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। यह सम्मान उनके सतत प्रयासों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है। उल्‍लेखनीय है कि इस आयोजन में स्‍वच्‍छ भारत मिशन (शहरी) अंतर्गत केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शहरों के अथक प्रयासों को मान्‍यता देते हुए शहरी भारत के सबसे स्‍वच्‍छ शहरों को पुरस्‍कृत किया जाएगा। स्वच्छ सर्वेक्षण-2024, जो कि भारत में शहरी स्वच्छता के आंकलन का विश्व का सबसे बड़ा सर्वेक्षण है। यह सर्वेक्षण इस वर्ष अपने 9वें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। इस वर्ष 'सुपर स्‍वच्‍छ लीग शहर, पाँच जनसंख्‍या श्रेणियों में शीर्ष, स्‍वच्‍छ शहर, विशेष श्रेणी : गंगा शहर, छावनी बोर्ड, सफाई मित्र सुरक्षा, महाकुंभ, राज्‍य स्‍तरीय पुरस्‍कार आदि श्रेणियों में पुरस्‍कार प्रदान किए जाएंगे। प्रदेश के इन्‍दौर, उज्‍जैन एवं बुदनी को सुपर स्‍वच्‍छ लीग श्रेणी, भोपाल, देवास और शाहगंज को राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार, जबलपुर को विशेष श्रेणी एवं ग्‍वालियर को राज्‍य स्‍तरीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाएगा। इसके अलावा कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग और खुले में शौच से मुक्‍त शहरों की श्रेणियों (ओडीएफ++, वॉटर+) के परिणाम भी इसी दिन जारी किए जाएंगे। इस वर्ष का सर्वेक्षण “रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल” की थीम पर आधारित था। इसमें शहरी स्‍वच्‍छता और सेवा स्‍तर का आंकलन करने के लिए एक सजग, संरचित दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें 54 संकेतकों सहित 10 सुपरिभाषित मापदंडों पर शहरों में स्‍वच्‍छता और अपशिष्‍ट प्रबंधन के आधार पर लगभग 3 हजार से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा 45 दिनों तक देशभर के लगभग 4 हजार 500 से अधिक शहरों के प्रत्‍येक वार्ड का गहन निरीक्षण किया गया। स्‍वच्‍छता के विभिन्‍न मापदण्‍डों में समावेशिता, पारदर्शिता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता सहित 11 लाख से अधिक घरों का मूल्‍यांकन किया गया। यह राष्‍ट्रीय स्‍तर पर शहरी जीवन और स्‍वच्‍छता के मायने को समझने के लिए एक व्‍यापक और दूरगामी दृष्टिकोण को दर्शाता है। वर्ष-2024 के स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण के मूल्‍यांकन में लगभग 14 करोड़ देशवासियों द्वारा प्रत्‍यक्ष संवाद, स्‍वच्‍छता ऐप, माईगव और सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म के माध्‍यम से अपना फीडबैक भी दिया गया। स्‍वच्‍छता में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने वाले शहरों के लिए एक नई पहल सुपर स्‍वच्‍छ लीग (एसएसएल) की शुरूआत की गई है। सुपर स्‍वच्‍छ लीग का उद्देश्‍य शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शहरों को स्‍वच्‍छता के उच्‍च मानकों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करने के साथ ही अन्‍य शहरों को भी अपने प्रदर्शन में सुधार करने और शीर्ष रैंकिंग के लिए प्रतिस्‍पर्धा करने के लिये प्रोत्‍साहित करना है। स्‍वच्‍छ शहर लीग में वे शहर शामिल होंगे, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में शामिल हुए हैं और वर्तमान में अपनी संबंधित जनसंख्‍या श्रेणी में शीर्ष 20 प्रतिशत में बने हुए हैं। इस अवसर पर देश के सभी शहरों के लिये कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग, खुले में शौच से मुक्ति ओडीएफ़ और उपयोगित जल के प्रबंधन के लिये वॉटर प्लस प्रमाणीकरण भी जारी किए जाएंगे। इनके अलावा 44 नगरीय निकायों ने वॉटर प्लस के लिये भी अपने दावे प्रस्तुत किए हैं। आठ शहरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त होने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विजेता शहरों को बधाई दी है। उन्होने अपने संदेश में इस उपलब्धि के लिए सभी सफाई मित्रों, नागरिकों, जन-प्रतिनिधियों, कर्मचारियों, अधिकारियों और सभी सहयोगियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि “प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्वच्छता का जो संकल्प लिया है, उसमें मध्यप्रदेश कदम से कदम मिलाकर चल रहा है।’’ समारोह में महापौर इंदौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, महापौर उज्जैन श्री मुकेश टटवाल, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, महापौर ग्वालियर डॉ. शोभा सिकरवार, महापौर जबलपुर श्री जगत बहादुर सिंह और महापौर देवास श्रीमती गीता दुर्गेश अग्रवाल अपनी टीम के साथ भाग ले रहे हैं। इनके साथ नगर पालिका अध्यक्ष बुदनी श्रीमती सुनीता अर्जुन मालवीय एवं अध्यक्ष शाहगंज सुश्री सोनम भार्गव भी अपने टीम सदस्यों के साथ पुरुस्कार समारोह में उपस्थित रहेंगी। आयुक्त नगरीय प्रशासन श्री संकेत भोंडवे, मिशन संचालक डॉ. परीक्षित झाड़े, नगर निगम आयुक्त और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों के साथ इस समारोह में शामिल हो रहे हैं। इस आयोजन में अधिकारी, कर्मचारी, जन-प्रतिनिधि, स्वच्छता सहयोगियों और सफाई मित्रों सहित 100 से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधि मण्डल मध्यप्रदेश का नेतृत्त्व करेगा।  

किसी भी कार्य की जीएडी निरस्त नहीं की गयी, आईआरसी कोड और मोर्थ के मापदंडों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाता

भोपाल ब्रिज परियोजनाओं का तकनीकी मापदंडों के अनुसार निर्माण सुनिश्चित करने की दिशा में लोक निर्माण विभाग द्वारा सतत कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एक व्यापक दक्षता संवर्द्धन कार्यक्रम निर्धारित किया है, जिसके अंतर्गत राज्य के सभी अभियंताओं को इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) कोड्स और मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज़ (मोर्थ) के दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर उनके आधार पर कार्यों का क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए हैं। ब्रिज परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण निर्माण, मापदंड अनुसार डिजाइन, सतत सुपरविजन प्रणाली अपनाने एवं निर्माण के दौरान सतत निरीक्षण के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। रेलवे अथवा नगर निगम जैसे विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। मुख्य अभियंता सेतु परिक्षेत्र पीसी वर्मा द्वारा स्पष्ट किया गया है कि पुराने अलाइनमेंट्स को रद्द नहीं किया गया है अपितु गलती से जारी हुआ एक त्रुटिपूर्ण आदेश उसी दिन निरस्त कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि पुलों और फ्लायओवर की जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) रेलवे और लोक निर्माण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जारी की जाती हैं। मुख्य अभियंता को इन्हें निरस्त करने का कोई अधिकार नहीं है और ऐसी कोई आवश्यकता किसी परियोजना में परिलक्षित नहीं हुई है। निर्माण कार्यों के दौरान अक्सर स्थान विशेष की परिस्थिति अनुसार अलाइनमेंट और डिजाइन में परिवर्तन की आवश्यकता होती है, जो कि सतत प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे परिवर्तनों के दौरान संबंधित आईआरसी कोड और मोर्थ के मापदंडों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाता है। राज्य शासन ने निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण के दौरान होने वाले सभी परिवर्तन अन्य स्टेकहोल्डर्स जैसे नगर निगम और रेलवे के समन्वय से ही किए जाएं। परियोजनाओं के रुकने जैसी कोई स्थिति नहीं है। ब्रिज परियोजनाओं में आने वाली जटिल बाधाओं के शीघ्र निराकरण के लिये प्रमुख अभियंता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें आवश्यकता अनुसार शासकीय या निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है। अब समस्याओं का तकनीकी स्तर पर शीघ्र समाधान हो सकेगा और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। राज्य शासन ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रदेश के सभी अभियंताओं का दक्षता संवर्द्धन किया जाए। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) के तकनीकी सलाहकार को इंडियन अकादमी फॉर हाईवे इंजीनियरिंग के साथ मिलकर पुलों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग बड़ी परियोजनाओं के लिए अनुबंध के अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और डिजाइन में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। बड़ी परियोजनाओं को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर करने की कार्ययोजना पर विचार किया जा रहा है। साथ ही राज्य शासन विभागीय क्रियान्वयन में अधिकतम सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी विचार कर रहा है, जिसमें बड़ी परियोजनाओं की कैमरा युक्त निगरानी भी शामिल है। इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेतु परिक्षेत्र द्वारा किसी भी कार्य की जीएडी निरस्त नहीं की गई है और ना ही किसी कार्य को रोका गया है।  

40 करोड़ के एक्वा पार्क से भोपाल में नया जल रोमांच, वॉटर टनल और 3D जोन का होगा उद्घाटन

भोपाल  राजधानी भोपाल का आकर्षण जल्द ही और बढ़ जाएगा। यहां एक्वा पार्क के रूप में अत्याधुनिक मछलीघर बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को इसका भूमि-पूजन करेंगे। भोपाल के विख्यात मछलीघर को यह नया और भव्य रूप दिया जाएगा। अब यहां मछलियों की नई दुनिया बसेगी। अधिकारियों के अनुसार मछली घर से नए एक्वा पार्क तक का सफर, इतिहास से भविष्य को जोड़ने की कवायद भी होगी। यह अत्याधुनिक एक्वा पार्क करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित किया जा रहा है। भोपाल आने वाले पर्यटकों के लिए मछलीघर की खास पहचान रही है। यहां रंग-बिरंगी मछलियों को देखने पूरे प्रदेश से लोग आते थे। नीली रोशनी में तैरती सुनहरी मछलियों को देख टूरिस्ट मंत्र मुग्ध रह जाते थे। समय के साथ मछलीघर अतीत को साथ में समेटे हुए फिर से भोपाल में एक नई पहचान के साथ लौट रहा है। यहां अब देश का सबसे सुंदर और आधुनिक “एक्वा पार्क” बनाया जा रहा है। 

ग्वालियर :जिला अस्पताल में इस महीने से IPHL की सुविधा, जिससे मरीजों को बेहतर और सुलभ जांच सेवाएं मिलेंगी

 ग्वालियर  एमपी में ग्वालियर के जिला अस्पताल में सर्वसुविधा युक्त इंट्रीगेटेड हेल्थ लैब (आईपीएचएल) की सुविधा इस महीने से मिलने लगेगी। इस सुविधा से मरीजों की महंगी जांचें भी आसानी से यहां पर फ्री में हो जाएंगी। इसके लिए जल्द ही शिफ्टिंग का काम शुरू किया जाएगा। जिला अस्पताल में अभी लगभग 162 के प्रकार की जांच होती हैं। इसमें महंगी जांचें शामिल नहीं हैं, लेकिन आईपीएचएल लैब के शुरू होने से कल्चर की सभी जांचें होने लगेंगी। इसमें लगभग 34 जांचें और जुड़ जाएंगी। मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। वर्तमान में बड़ी जांच के लिए मरीजों को निजी लैब के अलावा जेएएच भेजा जाता है। ब्लड की सभी तरह की जांचें शुरू हो जाएंगी जिला अस्पताल में थाइराइड, विटामिन डी, विटामिन बी- 12, आदि की जांचें बाजार में एक हजार रुपए तक की होती हैं, लेकिन यहां पर यह सभी जांचें फ्री में हो रही हैं। वहीं यह लैब शुरू होने से अब कल्चर की जांच में ब्लड की सभी तरह की जांचें भी शुरू हो जाएंगी। बिल्डिंग शिफ्टिंग का काम होगा शुरू जिला अस्पताल में इस लैब के लिए तैयार हॉल में बारिश के पानी के कारण कुछ परेशानी आने से शिफ्टिंग का काम कुछ लेट हो गया है। संभवत: इसी महीने इस लैब का सामान शिफ्ट होकर जांचें शुरू कर दी जाएंगी। आईपीएचएल लैब में मरीजों को 196 तरह की जांचें होंगी। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। जल्द ही मरीजों को इस लैब की सुविधाएं मिलना शुरू हो जाएंगी।– डॉ. राजेश शर्मा, सिविल अस्पताल

इंदौर का क्लीननेस रिकॉर्ड कायम! इंदौर फिर सबसे ऊपर? दिल्ली में आज 17 जुलाई को परिणाम का खुलासा

इंदौर स्वच्छ भारत सर्वेक्षण की रैंकिंग आज गुरुवार को जारी होगी। दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू की मौजूदगी में स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को पुरस्कार मिलेंगे। जनसंख्या के हिसाब से शहरोंं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। इस बार इंदौर सहित अन्य 12 शहरों की स्वच्छता का पैमाना अलग रहेगा। उनका आंकलन भी अलग रहा। लगातार तीन वर्षों तक रैंकिंग में टाॅप रहे शहरों की केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने अलग केटेगरी बनाई है। इन शहरों को प्रीमियर लीग में रखा गया है। सात साल से लगातार देश में स्वच्छता का ताज बरकार रखने वाले इंदौर का दावा इस बार मजबूत है, लेकिन सूरत की तरफ से कड़ी टक्कर इंदौर को मिल रही है। सूरत ने पिछले साल भी इंदौर के साथ स्वच्छता का पुरस्कार साझा किया था। सफाई में इस बार स्वच्छता की अलग-अलग श्रेणियां रखी गई है। लीग में जो शहर पहले स्थान पर होगा, उसे स्वच्छता लीग पुरस्कार दिया जाएगा,जबकि लीग से बाहर के शहरों के पुरस्कारों की घोषणा अलग से रैंकिंग के आधार पर होगी। इस रैंकिंग में गुजरात का अहमदाबाद शहर पहले स्थान पर हो सकता है। दूसरे नंबर पर भोपाल शहर है। विजेता शहरों को राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत किया जाएगा। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इंदौर से अफसर रवाना हो गए है।   चार हजार से अधिक शहरों की रैंकिंग स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में 4 हजार 700 शहर शामिल है। इन शहरों को 12 हजार 500 में से अंक दिए जाएंगे। कचरा प्रबंधन, निपटान, पब्लिक फीडबैक, कचरा संग्रहण सहित अन्य केटेगरी में अलग-अलग नंबर दिए जाएंगे। इंदौर का दावा इसलिए मजबूत इंदौर में सड़कों की सफाई, कचरा कलेक्शन और कचरा निपटना का सिस्टम सबसे मजबूत है। इंदौर के लोग भी सफाई को लेकर सजग है। कचरा सड़कों पर नहीं फेंकते है। दूसरे शहरों में यह सिस्टम नियमित तौर पर काम नहीं कर पा रहा है। सूरत ने पिछले साल डोर डू डोर कचरा संग्रहण पर काफी काम किया था और उसमे समान नंबर आने के कारण रैंकिंग में इंदौर के समान नंबर पाए थे। स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में भोपाल देश के सबसे साफ शहरों में टॉप-3 पर स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में स्वच्छ शहरों के मामले राजधानी भोपाल ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है. भोपाल की रैंकिंग में सुधार करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया. देश के दूसरे क्लीनेस्ट सिटी में शुमार हुए भोपाल में अब जश्न की तैयारी है. भोपाल नगर निगम ने जनप्रतिनिधि स्वच्छता मित्रों और जनता के साथ जश्न मनाएंगी. स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में भोपाल देश के सबसे साफ शहरों में टॉप-3 पर है। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू पुरस्कार देगी। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बताया, भोपाल ने 3 पायदान छलांग लगाई है और देश में दूसरे नंबर पर आया है स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राजधानी भोपाल ने पिछले साल की तुलना में तीन पायदान की छलांग लगाते हुए भारत के दूसरे क्लीनेस्ट सिटी का तमगा हासिल किया है.अहमदाबाद अव्वल आया है, जबकि लखनऊ ने 44वें पायदान से बड़ी छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गई है. 17 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में होगा स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 अवॉर्ड वितरण कार्यक्रम गौरतलब है 17 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 अवॉर्ड वितरण कार्यक्रम में होगा. अवॉर्ड समारोह में शामिल होने के लिए भोपाल मेयर और कमिश्नर आज नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां आधिकारिक रूप से स्वच्छ शहर के विजेताओं की घोषणा भी होगी, इसके बाद अवॉर्ड दिए जाएंगे. अवॉर्ड लेने नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे भोपाल नगर निगम मेयर और कमिश्नर रिपोर्ट के मुताबिक देश के स्वच्छ सिटी में दूसरा स्थान का अवॉर्ड पाने के लिए भोपाल नगर निगम मेयर और निगम कमिश्नर आज नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे और 17 जुलाई यानी कल राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के हाथों अवॉर्ड ग्रहण करेंगे.निगम शुक्रवार को भोपाल में जनप्रतिनिधि स्वच्छता मित्रों और जनता के साथ जश्न मनाने की तैयारी कर रही है. राष्ट्रपति 17 जुलाई को सुपर लीग श्रेणी में इंदौर को अवॉर्ड देंगी. यह अवॉर्ड इंदौर को 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में मिलेगा. 3 से 10 लाख तक की जनसंख्या में उज्जैन और 20 हजार से अधिक जनसंख्या वाले में सीहोर जिले की बुदनी को यह अवॉर्ड मिलेगा. इधर, पुरस्कार लेने के लिए मेयर मालती राय और निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण बुधवार को दिल्ली के रवाना होंगे। 17 जुलाई को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक आयोजन होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू करेंगी। सबसे स्वच्छ राजधानी का तमगा मिलने की उम्मीद स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार भी मध्यप्रदेश के शहर बाजी मारेंगे। राजधानी भोपाल देश के सबसे स्वच्छ शहरों में दूसरे नंबर पर रहेगा। साथ ही सबसे स्वच्छ राजधानी का तमगा भी फिर मिलने की उम्मीद है। पिछली बार पांचवें नंबर पर था भोपाल पिछले सर्वे में भोपाल 5वें नंबर पर था। कचरे की प्रोसेसिंग में सुधार व डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था को और पुख्ता कर भोपाल ने दावा मजबूत किया है। वहीं, फरवरी में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) की वजह से भी भोपाल को फायदा मिलेगा। जीआईएस के चलते राजधानी में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के काम शहर में हुए हैं। इसमें स्वच्छता से जुड़े काम भी शामिल थे। इसी दौरान स्वच्छता सर्वेक्षण टीमें भी भोपाल पहुंची थी। इसलिए दावा मजबूत है। स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल का अब तक का सफर स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल ने 2017 और 2018 में लगातार दो साल देश में दूसरी रैंक हासिल की थी। 2019 में भोपाल खिसककर 19वें नंबर पर आ गया था। उस समय अफसरों के लगातार तबादले के कारण तैयारियों की दिशा ही तय नहीं हो पाई थी, लेकिन 2020 में कम बैक करते हुए 12 पायदान ऊपर खिसका और 7वीं रैंक हासिल की। 2021 के सर्वेक्षण में भी भोपाल ने 7वां स्थान हासिल किया था। 2022 के सर्वेक्षण में भोपाल की रैंक सुधरी और यह छठवें स्थान पर आ गया। वहीं, भोपाल को 5 स्टार मिला। 2023 के सर्वेक्षण में पांचवीं रैंकिंग रही थी। इस बार यह टॉप-3 में हो सकती है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में इस बार प्रदेश के कुल 8 शहर सम्मानित किया गया हैं … Read more

इंदौर-खंडवा रेल परियोजना को लेकर एक बड़ी खुशखबरी, वन विभाग की NOC, दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी

इंदौर इंदौर-खंडवा रेल परियोजना को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए वन विभाग ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है, जिससे परियोजना की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है। अब इस रेल मार्ग के निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा मार्ग होगी, जो न केवल इंदौर के व्यापारिक और औद्योगिक विकास को नई गति देगी, बल्कि यात्रियों के लिए समय और दूरी की बचत भी करेगी। यह परियोजना मालवांचल के लिए एक नया युग शुरू करने वाली है, जो क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगी।  यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा रेल मार्ग साबित होगी, जो न केवल इंदौर के व्यापारिक और औद्योगिक भविष्य को नई रफ्तार देगा, बल्कि यात्रियों को भी समय और दूरी दोनों में राहत देगी। इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने इस प्रोजेक्ट में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने रेलवे अधिकारियों और वन विभाग के बीच संयुक्त बैठक करवाई थी, जिससे आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल हुईं। इसके बाद हाल ही में सांसद लालवानी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस परियोजना की प्राथमिकता को रेखांकित किया और वन विभाग से अनुमति दिलवाने का अनुरोध किया था। इंदौर-खंडवा रेल लाइन के पूरा होने के बाद इंदौर का संपर्क सीधे खंडवा-भुसावल-नासिक-मुंबई की ओर तथा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों से तेज़, किफायती और सुविधाजनक सफर हो जाएगा। इस रेल कॉरिडोर से मालवांचल के व्यापारियों, किसानों और यात्रियों सभी को लाभ मिलेगा। सांसद ने बताया कि यह रेल मार्ग मालवांचल और दक्षिण भारत के बीच सीधी व बेहतर कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम है। बढ़कर 80 किमी हो जाएगी इंदौर-खंडवा की दूरी इंदौर से खंडवा की दूरी मीटरगेज में पहले 48 किमी थी, लेकिन अब बढ़कर 80 किमी हो जाएगी। ब्रॉडगेज का ट्रैक बनाने के लिए पातालपानी के पहले घूमकर ट्रेन बलवाड़ा पहुंचेगी, जिससे 32 किमी की दूरी बढ़ गई है। हालांकि इस ट्रैक के बनने से इंदौर की दक्षिण भारत के शहरों बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई व उत्तर भारत के जयपुर, अजमेर शहरों तक सीधी पहुंच होगी। अभी इन शहरों तक जाने के लिए घूमकर जाना पड़ता है। इंदौर खंडवा अकोला ब्रॉडगेज हो जाने से उत्तर और दक्षिण को जोड़ने वाला सबसे छोटा रूट होगा। इससे आम लोगों के समय की बचत होगी। रेलवे का मुनाफा बढ़ेगा। एक दशक से इंदौर से खंडवा रेल कनेक्टिविटी खत्म हो चुकी एक दशक से इंदौर से खंडवा के बीच रेल कनेक्टिविटी खत्म हो गई है। पूर्व में यहां पर मीटरगेज लाइन थी, जो महू से पातालपानी, कालाकुंड, बलवाड़ा, चौरल होकर खंडवा तक जाती थी। अब ब्रॉडगेज लाइन महू से पातालपानी के पहले घूमकर बलवाड़ा तक जा रही है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 32 किमी का घुमाव है, जिसमें 454 हेक्टेयर जमीन वन विभाग की आ रही है। ट्रैक में महू और बड़वाह तहसील की अधिकांश भूमि जमीन आ रही है। उस पर ट्रैक डालने के लिए रेलवे लंबे समय से अनुमति मांग रहा था। दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी का सपना होगा साकार इंदौर-खंडवा रेल लाइन के पूरा होने के बाद इंदौर का सीधा संपर्क खंडवा, भुसावल, नासिक और मुंबई के साथ-साथ तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों से हो जाएगा। यह रेल कॉरिडोर मालवांचल के व्यापारियों, किसानों और यात्रियों के लिए तेज, किफायती और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प प्रदान करेगा। सांसद लालवानी ने बताया कि यह रेल मार्ग मालवांचल और दक्षिण भारत के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एक दशक से बंद थी रेल कनेक्टिविटी   पिछले एक दशक से इंदौर और खंडवा के बीच रेल कनेक्टिविटी बंद थी। पहले यहां मीटरगेज लाइन थी, जो महू से पातालपानी, कालाकुंड, बलवाड़ा और चौरल होते हुए खंडवा तक जाती थी। अब ब्रॉडगेज लाइन के लिए महू से पातालपानी के पहले घूमकर बलवाड़ा तक ट्रैक बनाया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 32 किमी का घुमाव है, जिसमें 454 हेक्टेयर वन विभाग की जमीन शामिल है। रेलवे लंबे समय से इस जमीन पर ट्रैक बिछाने की अनुमति मांग रहा था, जो अब मिल गई है।        

पहली सवारी में संकरे पड़े गए मार्ग, प्रशासन के लिए यह है बड़ा अलर्ट, सवारी मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी

उज्जैन  श्रावण के पहले सोमवार को राजाधिराज महाकाल की निकली भव्य सवारी के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह साफ कर दिया है कि मौजूदा सवारी मार्ग इस विशाल जनसमूह के दबाव को सहने में सक्षम नहीं है। समय आ गया है कि अब बिना कोई देरी किए महाकाल सवारी मार्ग को मास्टर प्लान अनुसार 15 से 24 मीटर चौड़ा किया जाए। भीड़, अव्यवस्था और सीमित मार्ग की वजह से श्रद्धालुओं को जो कठिनाई हुई, वह प्रशासन के लिए चेतावनी से कम नहीं है। स्थितियों को देख शासन-प्रशासन ने इस मार्ग को चौड़ा करने का काम प्राथमिक सूची में शामिल कर लिया है। मालूम हो कि महाकाल सवारी मार्ग केवल एक रास्ता नहीं, यह आस्था की वह धारा है जिससे उज्जैन की सांस्कृतिक, धार्मिक और विकास की दिशा जुड़ी है। अब जबकि सिंहस्थ की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, तो इस मार्ग को उसकी गरिमा के अनुरूप बनाना समय की मांग है। प्रदेश सरकार, इसी वर्ष अप्रैल में इस कार्य के लिए 64 करोड़ रुपये स्वीकृत कर चुकी है, लेकिन अब तक ठेकेदार तय करने को निविदा प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी है। इस विषय पर पिछले सप्ताह महापौर मुकेश टटवाल ने योजना को तेजी से लागू करने के निर्देश नगर निगम के अधिकारियों को दिए थे। उनका ‘नईदुनिया’ से कहना है कि महाकाल सवारी मार्ग को अब उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड नहीं, बल्कि नगर निगम खुद अपने स्तर पर विस्तृत कार्य योजना बनाकर क्रियान्वित करेगा। यह काम उनकी प्राथमिकता में पहले भी था, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। 4.3 किलोमीटर लंबे महाकाल सवारी मार्ग को मास्टर प्लान-2035 में 15 से 24 मीटर चौड़ा करने का लेख है। चौड़ीकरण के लिए सरकार 64 करोड़ रुपये अप्रैल में मंजूर कर चुकी है। स्पष्ट किया है कि मार्ग में डिवाइडर नहीं बनाएंगे। मार्ग में आने वाली ऐतिहासिक धरोहरों को फसाड़ लाइट से आकर्षक स्वरुप दिया जाएगा। बिजली, पानी और सीवरेज की सभी लाइनें भूमिगत की जाएंगीं। चौराहों को त्रिशूल, डमरू, नंदी जैसी कलाकृतियों से सजाया जाएगा। 2023 में बनी थी 110 करोड़ की योजना, विरोध के कारण काम नहीं हुआ महाकाल सवारी मार्ग काे चौड़ा करने को 110 करोड़ रुपये की योजना वर्ष 2023 में उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने बनाई थी। सर्वे में 2500 भवन प्रभाव में आना चिह्नित किए थे। एक हिस्से का काम शुरू भी हुआ था, लेकिन विरोध और न्यायालय में याचिका के चलते काम आगे न बढ़ा और बंद हो गया। अब जब महाकुंभ सिंहस्थ-2028 निकट है, तो शासन इस कार्य को पुनः पूर्ण करने को तत्पर है। जन सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से बेहतर जरूरी श्रावण और भादौ मास में हर सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी को देखने लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भविष्य में सिंहस्थ जैसे आयोजनों में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की आमद तय मानी जा रही है। ऐसे में सवारी मार्ग का चौड़ीकरण यातायात, सुरक्षा और सुविधा तीनों ही दृष्टि से बेहद आवश्यक हो गया है।

मंत्री पटेल ने कहा- मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन जल संकट की आहट को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि ग्रामीण विकास एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे पंचायत प्रतिनिधियों को नियत और न्याय की भावना से स्वीकार करना होगा। मंत्री श्री पटेल धार में आयोजित पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री पटेल ने बताया कि सांसद रहते हुए उन्होंने सदैव कृषि और ग्रामीण विकास विषयक संसदीय समितियों में रहकर देश भर में इन विषयों को गहराई से समझने का प्रयास किया। प्रदेश में मंत्री के रूप में उन्हें इन नीतियों को लागू करने का अवसर मिला है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि अपने क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, वृक्षारोपण और योजनाओं का रिकॉर्ड पारदर्शिता से रखें। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का आहवान मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन जल संकट की आहट को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जल संरक्षण के लिये वृक्षारोपण ही सबसे स्थायी उपाय है। उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत व्यापक पौधारोपण का आहवान किया और कहा कि “जो पौधा आप लगाते हैं, उसकी देखभाल भी आपकी व्यक्तिगत जवाबदेही है।” उन्होंने कहा कि “वृक्षारोपण अभियान 2025” में महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन को भी बल मिलेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री पटेल ने कहा कि पुराने, जीर्ण-शीर्ण पंचायत भवनों को तोड़कर 48 लाख और 37 लाख रुपये की लागत से नए भवनों की मंजूरी दी गई है। कोई भी पंचायत अब भवन विहीन नहीं रहेगी। धार जिले में इस वर्ष 81 पंचायत भवन और 85 पुलियों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। चौथे चरण की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत अब मजरे-टोले को भी जोड़ा जा सकेगा, जिसके लिए राजस्व ग्राम की शर्त हटा दी गई है। केन्द्रीय राज्यमंत्री श्रीमती सवित्री ठाकुर ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार की योजनाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाने का कार्य करें और प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में जुट जाएँ। सम्मेलन में अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। सम्मेलन में जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, विधायक नीना वर्मा और कालूसिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव,नीलेश भारती एवं चंचल पाटीदार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में अधिकारी सहित बड़ी संख्या में सरपंच व पंच उपस्थित रहे। 

पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर रोक, MP हाईकोर्ट करेगा व्यापक जांच और जवाबदेही तय

भोपाल /जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान एक अहम् फैसला सुनाते हुए पैरामेडिकल कॉलेजों को दी जा रही मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगा दी है , इस आदेश के बाद कॉलेज संचालकों में हड़कंप मच गया है, बता दें मध्य प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को लंबे इन्तजार के बाद मान्यता मिलने जा रही थी जिसे हाई कोर्ट ने रोक दिया है। नर्सिंग घोटाले के बाद अब पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और एडमिशन में गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर की डिवीज़नल बेंच ने एक महत्वपूर्ण स्थगन आदेश पारित किया है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा दाखिल की गई नर्सिंग मामले की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पिछले दिनों एक आवेदन पेश कर कोर्ट को बताया गया था कि नर्सिंग की तरह पैरामेडिकल कॉलेजों के मान्यताओं में भी अनियमितताएँ की जा रही है। 2023-24 एवं 2024-25 सत्र के लिए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल दे रहा मान्यता  याचिका में कहा गया कि एमपी पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा निकल चुके एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से दी जा रही है और बगैर मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से सम्बद्धता प्राप्त किए सरकारी तथा निजी पैरामेडिकल कॉलेजों के द्वारा अवैध रूप से छात्रों के प्रवेश दिए जा रहे हैं, नर्सिंग घोटाले की जांच में जिन कॉलेजों को सीबीआई ने अनसूटेबल बताया है उन्हीं बिल्डिंग में पैरामेडिकल काउंसिल अब पैरा मेडिकल कॉलेजों की मान्यता दे रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूरी मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगाई   पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के आवेदन पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने इसे अलग जनहित याचिका (PIL) के रूप में पंजीबद्ध करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने इस गंभीर विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन व रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे, आज की सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य शासन के उस आदेश पर रोक लगा दी है जो पैरामेडिकल काउंसिल को एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से देने की अनुमति देता था। 24 जुलाई को होगी अगली सुनवाई  मामले में पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन और रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाया गया है बताते चलें कि मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ राजेंद्र शुक्ला, पैरामेडिकल काउंसिल के पदेन चेयरमैन हैं । इस मामले की अगली सुनवाई सभी नर्सिंग मामलों के साथ 24 जुलाई को होगी ।