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मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में किया योगाभ्यास

भोपाल  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के अवसर पर मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में राज्य स्तरीय योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कोलकाता, पश्चिम बंगाल में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़कर उनका प्रेरणादायी मार्गदर्शन भी प्राप्त किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने योग को विश्व शांति और बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि योग सबको जोड़ता है, सबको साथ लाता है और जब योग हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाता है, तब वह मानवीय एकता का आधार बनता है। उन्होंने कहा कि योग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं पर्यटन सचिव डॉ. इलैयाराजा टी., अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय बेडेकर तथा संत हिरदाराम मेडिकल कॉलेज के डॉ. अंकेश भदौरिया सहित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने योगाभ्यास किया। "योग अपनाएं, स्वस्थ और संतुलित जीवन पाएं" सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग केवल स्वास्थ्य गतिविधि नहीं, बल्कि हमारी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं जीवन मूल्यों से जुड़ी समृद्ध विरासत का अभिन्न हिस्सा है। योग हमें अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन जीने की श्रेष्ठ कला सिखाता है। "योग है स्वस्थ जीवन का आधार, इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाएं" मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय बेडेकर ने कहा कि योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाकर हम स्वस्थ, सुखी एवं समृद्ध समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। "योग फॉर हेल्दी एजिंग" थीम पर आयोजित हुआ सामूहिक योग सत्र पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों के साथ सेवा समिति वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने भी उत्साह से योगाभ्यास किया। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग’ थीम पर आयोजित सामूहिक योग सत्र में संत हिरदाराम आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान की प्रशिक्षित टीम द्वारा मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को योगाभ्यास कराया। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित योग प्रोटोकॉल के अनुसार योग सत्र में प्रारंभिक प्रार्थना, सूक्ष्म व्यायाम, आसन, प्राणायाम, ध्यान तथा समापन प्रार्थना का अभ्यास कराया गया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास कर स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर गूंजा योग का संदेश प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर पर्यटन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन ने जन सहभागिता के माध्यम से सामूहिक योगाभ्यास किया और योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में और पर्यटन विकास निगम के अधिकारियों ने बोट क्लब पर योगाभ्यास किया। इसी तरह खजुराहो, सांची, उदयगिरी, ग्वालियर के किले, इंदौर की 56 दुकान, तामिया आदि पर्यटन स्थलों में "योग फॉर हेल्दी एजिंग" थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं को योग के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के महत्व से अवगत कराया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने साल 2014 में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस किया था घोषित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 11 दिसंबर 2014 को एक प्रस्ताव पारित कर हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसके बाद, 21 जून 2015 को दुनिया भर में पहला आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। देश की योग दर्शन की विरासत से आज पूरा विश्व समाज लाभान्वित हो रहा है।  

स्वस्थ तन, प्रसन्न मन और योग बने जीवन का धन : राज्यपाल श्री पटेल

भोपाल  अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस राष्‍ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि हम भारत की उस महान योग परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने मानवता के लिये स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन का मार्ग प्रदान किया है। योग विश्व को हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल उपहार है। यह हमारे ऋषियों-मुनियों की हजारों वर्षों की साधना का परिणाम है। आज भारतभूमि से स्वास्थ्य, संतुलन, शांति और आत्मकल्याण का संदेश विश्व में प्रसारित किया जा रहा है। “योग स्वस्थ आयु के लिए” थीम पर राष्‍ट्रीय कार्यक्रम कोलकाता में प्रधानमंत्री  नरेन्‍द्र मोदी के मुख्‍य आतिथ्‍य में आयोजित किया गया। प्रदेश में राष्‍ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु के मुख्‍य आतिथ्‍य में जबलपुर के गैरीसन ग्राउंड में राज्य स्तरीय योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री  मोदी के कोलकाता से आयोजित कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखा व सुना। कार्यक्रम की शुरूआत व अंत में राष्‍ट्रगीत एवं राष्‍ट्रगान किया गया। योगाभ्यास में मध्यप्रदेश के राज्यपाल  मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्‍यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  जगदीश देवड़ा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार, लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, राज्‍यसभा सांसद  सुमित्रा बाल्‍मीक, सांसद  आशीष दुबे, विधायक  अजय विश्‍नोई, अशोक रोहाणी,  सुशील तिवारी इंदु, डॉ. अभिलाष पांडे,  नीरज सिंह,  संतोष बरकड़े, महापौर  जगत बहादुर सिंह अन्‍नू, मुख्‍य सचिव  अनुराग जैन, मध्‍यप्रदेश तीर्थ क्षेत्र एवं मेला प्राधिकरण अध्‍यक्ष  विनोद गोंटिया, नगर निगम अध्‍यक्ष रिकुंज विज,  रत्‍नेश सोनकर,  राजकुमार पटेल,  अखिलेश जैन,  अश्विनी परांजपे, संभागायुक्‍त  धनंजय सिंह, कलेक्‍टर  राघवेन्‍द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक  संपत उपाध्‍याय, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा लगभग 5 हजार योग साधकों ने सामूहिक योगाभ्यास में सहभागिता की। योग, आंतरिक शांति और सामूहिक कल्याण के लिये करता है प्रेरित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्‍ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने नागरिकों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को जीवन की सफलता का आधार माना गया है। योग उसी संतुलन को स्थापित करने का मार्ग है। ‘योग’ शब्द का अर्थ है जोड़ना — व्यक्ति को स्वयं से, समाज को प्रकृति से और सम्पूर्ण मानवता को व्यापक विश्व चेतना से जोड़ना। योग एक सशक्त माध्यम है, जो हमें आंतरिक शांति, संतुलन और सामूहिक कल्याण की दिशा में आगे बढ़ाता है। आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग मानवता को शांति, संतुलन, समरसता और सामूहिक कल्याण का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। योग, जीवनशैली का बनता जा रहा है अहम हिस्सा राष्ट्रपति  मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2014 में भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इस पहल से योग को विश्व कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में नई पहचान और व्यापक स्वीकार्यता मिली है। आज दुनिया के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बना रहे हैं। योग अब जीवन शैली का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। विदेशों में भी योग के प्रति लोगों का आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है, और यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति का सशक्त उदाहरण है। योग, बढ़ती आयु में स्वयं को स्वस्थ रखने में सहायक राष्‍ट्रपति  मुर्मु ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” है। यह थीम समाज के वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, सक्रियता, आत्मनिर्भरता और गरिमापूर्ण जीवन में योग की उपयोगिता को रेखांकित करती है। योग बढ़ती आयु में भी व्यक्ति को स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने में बहुत सहायक है। योग, मन को शांति और देता है भावनात्मक संतुलन योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मन को शांति और भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है। आज की व्यस्त दिन चर्या और जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां हमारे सामने एक बड़ी चुनौती हैं। इनकी रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य के लिए योग एक सरल, प्रभावी और सुलभ उपाय है। योग, को बनाये दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा राष्ट्रपति  मुर्मु ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि भारत सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए योग शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और जन-जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। सामूहिक प्रयासों से योग जन-जन तक पहुंचेगा और सामूहिक मानवता के कल्याण का आधार बनेगा। उन्‍होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों को योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्‍प दिलाया। योग, संतुलित, सरल और आनंदमयी जीवन की है पद्धति : राज्यपाल  पटेल राज्यपाल  पटेल ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ बनाने का माध्यम ही नहीं, बल्कि यह संपूर्ण जीवन को संतुलित, सरल और आनंदमयी बनाने की पद्धति है। योग ही स्वस्थ तन, प्रसन्न मन और योग बने जीवन का धन है। भारतीय ज्ञान परंपरा ने स्वस्थ जीवन का जो मार्ग दिखाया था, आज पूरी दुनिया उसे अपना रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भारतीय योग को अंतर्राष्ट्रीय सम्‍मान दिया गया। प्रधानमंत्री  मोदी की दूरदृष्टि और अटूट प्रतिबद्धता से ही योग को पूरी दुनिया में अपनाया गया है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्राणायाम के जरिए हम नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच को अपनाते हैं। ध्यान हमें अपने अंदर झांकने का अवसर देता है और मन की शांति प्रदान करता है। रोजाना केवल 20 से 30 मिनट का योगाभ्यास, ध्यान और प्राणायाम हमारे लिए प्रभावी और सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे सरल माध्यम है। आज योग को आत्मिक उन्नति का माध्यम बनाकर दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प लें। योग, वैश्विक शांति के लिए एकमात्र उपाय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस दुनियाभर में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम -योग फॉर हेल्दी एजिंग है। योग दिवस वैश्विक शांति और वैश्विक कल्याण को बढ़ावा देता है। प्रधानमंत्री  मोदी के कार्यकाल के सफलतम 12 वर्ष पूर्ण होने पर यह सुखद संयोग बना है, इस वर्ष राष्ट्रीय कार्यक्रम का नेतृत्व प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नगरी कोलकाता से किया गया। दुनिया के करीब 2500 स्थानों पर योगाभ्यास किया , 210 से अधिक दूतावासों ने भी सामूहिक योग में भागीदारी की । भारत ने योग के रूप में दुनिया को … Read more

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर 15 हजार से अधिक श्रमिकों ने किया सामूहिक योगाभ्यास

भोपाल  श्रम और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रदेश के श्रमिकों के कल्याण और उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए उन्हें योग से जुड़ने का विशेष आह्वान किया था। मंत्री पटेल के इस प्रेरक आह्वान का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला! अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्य के औद्योगिक और विभिन्न कार्यक्षेत्रों में श्रमिकों ने बढ़-चढ़कर योगाभ्यास किया। प्रदेश के कुल 337 संस्थानों में 15 हजार से अधिक श्रमिकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। सचिव श्रम रघुराज राजेंद्रन ने कहा कि योग किसी एक दिवस तक सीमित न होकर, श्रमिकों के दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि श्रमिक प्रतिदिन योग से जुड़ें, जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रह सकें। एक स्वस्थ और ऊर्जावान श्रमिक ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण और प्रदेश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। श्रम विभाग और मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल के प्रयासों से आयोजित इस प्रदेश स्तरीय योग कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। श्रम मंत्री पटेल ने स्वयं जबलपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में उपस्थित होकर श्रमिकों के साथ योग किया। इसी क्रम में, श्रम आयुक्त संदीप जी आर ने इंदौर के एमराल्ड हाइट्स स्कूल में आयोजित मंडल के विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से प्राप्त तस्वीरों और जानकारियों के अनुसार, सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होकर श्रमिकों का उत्साहवर्धन किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का ग्वालियर विमानतल पर हुआ आत्मीय स्वागत

भोपाल  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का ग्वालियर विमानतल आगमन पर आत्मीय स्वागत हुआ। राष्ट्रपति मुर्मु रविवार 21 जून को वायुसेना के विमान से दोपहर 2.40 बजे वायुसेना के विमानतल महाराजपुरा पर पधारीं। उनके साथ मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी आए। राष्ट्रपति मुर्मु का ग्वालियर विमानतल पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं जल संसाधन एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने राष्ट्रपति को पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस मौके पर सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्ज मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह एवं महापौर शोभा सतीश सिकरवार ने भी पुष्प-गुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। राष्ट्रपति मुर्मु एवं राज्यपाल मंगुभाई पटेल कुछ देर रुकने के पश्चात हैलीकॉप्टर से श्योपुर जिले के कूनों के लिये रवाना हुए। विमानतल पर अपर मुख्य सचिव मनुवास्तव, डीजी होमगार्ड सुश्री प्रज्ञा रिचावास्तव, संभागीय आयुक्त मनोज खत्री, आईजी अरविंद कुमार सक्सेना, डीआईजी असित यादव, कलेक्टर रुचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय एवं वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। राष्ट्रपति मुर्मु 22 जून को प्रात: 10.40 बजे हैलीकॉप्टर से श्योपुर के कूनों से वायुमार्ग द्वारा ग्वालियर विमानतल महाराजपुरा आयेंगीं। कुछ देर रुकने के बाद वे वायुसेना के विमान से नई दिल्ली के लिये रवाना होंगी।

राष्ट्रपति मुर्मु से मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सौजन्य भेंट, स्मृति चिन्हों का हुआ आदान-प्रदान

भोपाल राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से जबलपुर सर्किट हाउस में मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सौजन्य भेंट की। इस गरिमामयी मुलाकात के दौरान दोनों के बीच आत्मीय संवाद हुआ और संस्कृति व श्रद्धा के प्रतीक स्वरूप स्मृति चिन्हों का आदान-प्रदान किया गया। राष्ट्रपति मुर्मु को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश आगमन पर स्वागत करते हुए जीवनदायिनी मां नर्मदा की बेहद सुंदर प्रतिमा भेंट की। वहीं, राष्‍ट्रपति मुर्मु ने भी अपनी ओर से मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव को पुरी स्थित सुप्रसिद्ध भगवान जगन्‍नाथ, भाई बलराम तथा बहन सुभद्रा की अलौकिक तस्‍वीर सप्रेम भेंट की। ओडिशा की ऐतिहासिक धरोहर कोणार्क सूर्य मंदिर के विश्व प्रसिद्ध चक्र की भव्य प्रतिकृति भी उपहार स्वरूप प्रदान की। 

जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास में शिक्षित युवाओं की भूमिका अहम

भोपाल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच के विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं। विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना भी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आधुनिकता और परंपरा के संतुलन से ही देश का समग्र विकास संभव है। राष्ट्र्पति मुर्मु रविवार को जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहीं थी। इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने विभिन्न संकायों में एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करने वाले 20 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किये और उपाधियों का वितरण किया। कार्यक्रम में विश्व्विद्यालय के 141 विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया। साथ ही 182 शोधार्थियों को पीएचडी सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की। महामहिम राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्विविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर होना गर्व का विषय है। रानी दुर्गावती वीरता, साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं और नारी शक्ति के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगी। उन्होंने महान वीरांगना की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों को जनजातीय समाज, वंचित वर्गों तथा विशेषकर बेटियों के सशक्तिकरण के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जिस क्षेत्र में स्थित है, वहां जनजातीय और वनवासी संस्कृति की समृद्ध उपस्थिति है। ऐसे में यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं का दायित्व केवल अपने करियर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने समाज और गांवों तक पहुंचकर वहां के लोगों का मार्गदर्शन भी करना चाहिए। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार जनजातीय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। कई बार लोगों को इन योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ लेने की प्रक्रिया का पता नहीं होता। ऐसे में शिक्षित युवाओं, विशेषकर जनजातीय समाज से आगे बढ़े युवक-युवतियों का कर्तव्य है कि वे अपने समाज के बीच जाकर लोगों को मार्गदर्शन दें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति और पिछड़े समुदायों को भी विकास की मुख्यधारा में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की पहचान, संस्कृति, परंपरा और अस्मिता को बनाए रखना उतना ही आवश्यक है, जितना आधुनिक विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना। जनजातीय समाज के कौशल, पारंपरिक ज्ञान और शिल्प को आधुनिक शिक्षा, नवाचार और शोध से जोड़ने की आवश्यकता है। इस दिशा में विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों को विशेष प्रयास करने चाहिए, जिससे जनजातीय ज्ञान परंपरा का व्यवस्थित अध्ययन हो सके और उसका लाभ व्यापक समाज तक पहुंचे। राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में समाहित करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने तथा डिजाइन इनोवेशन सेंटर के माध्यम से पेटेंट प्राप्त करने जैसे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक है, जो महिला सशक्तिकरण और बदलते भारत की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज का भारत युवाओं का भारत है और देश को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे शिक्षा, शोध, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम बनाएं। उन्होंने कहा कि आज विश्व तेजी से बदल रहा है और जीवनशैली में भी तीव्र परिवर्तन आ रहा है, लेकिन इस बदलते दौर में भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। देश के युवाओं को भारत के सांस्कृतिक मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य भारतीय चेतना का अभिन्न हिस्सा हैं। इन मूल्यों को जीवन में अपनाकर युवा न केवल कठिन परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, बल्कि आदर्श नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी जिम्मेदारियां केवल परिवार या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं। वे राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। युवाओं के कंधों पर देश का भविष्य टिका है और उनके ज्ञान, ऊर्जा तथा संकल्प से विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखते हुए समाज के व्यापक कल्याण के लिए भी करें। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षित युवा अपने आसपास के वंचित, ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की समस्याओं को समझें, उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करें और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज जो विद्यार्थी विश्वविद्यालय से निकल रहे हैं, वे भविष्य में अधिकारी, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। ऐसे में उनका दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वे समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने अमर वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन जनजातीय अस्मिता, प्रजा कल्याण, नारी शक्ति, त्याग, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और आत्मगौरव का अमर संदेश है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र हैं। राज्यपाल पटेल ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्र-छात्राओं से कहा कि उनकी डिग्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण, नवाचार और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने वाली शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे रानी दुर्गावती सहित देश के महान जननायकों के शौर्य, लोककल्याण और संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें। उन्होंने प्रत्येक विश्वविद्यालय से 5-5 पिछड़े ग्रामों को … Read more

संस्कृति विभाग ने 14 स्थानों पर आयोजित किए सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनजातीय संग्रहालय में संगीत संध्या

भोपाल  विश्व संगीत दिवस के पावन अवसर पर समूचा मध्य प्रदेश नाद-ब्रह्म की अलौकिक स्वर-लहरियों से गुंजायमान हो उठा। संस्कृति विभाग के तत्वावधान में प्रदेश के 14 अंचलों में कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य का एक ऐसा अनुपम वितान तना, जिसने युवा पीढ़ी में नई सांस्कृतिक चेतना का संचार कर दिया। शासकीय संगीत एवं ललित कला महाविद्यालयों सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, कला और परंपराओं से जोड़ना एवं उनमें सांस्कृतिक चेतना का संवर्धन करना रहा। इसी श्रृंखला में, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित 'संगीत संध्या' मुख्य आकर्षण रही, जहाँ कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिला। इस शाम पुणे की सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना सुस्मिता महाजन की लयात्मक प्रस्तुतियों और भोपाल की गुणी गायिका सुप्रदक्षिणा भट्ट के मनोहारी शास्त्रीय गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जो सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन में एक सराहनीय प्रयास सिद्ध हुआ। इस अवसर पर संचालक, संस्कृति एन.पी. नामदेव एवं संस्कृति संचालनालय की उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला ने उपस्थित कलाकारों का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोता एवं दर्शक उपस्थित रहे। संगीत संध्या में पुणे (महाराष्ट्र) की सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना सुस्मिता महाजन ने अपनी शिष्याओं सुहार्दिका फड़के, सुसिद्धि पाटिल एवं सुसिद्धि तार्डे के साथ भरतनाट्यम की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी। प्रस्तुत सभी नृत्य रचनाएँ संस्कृत एवं हिंदी में रचित थीं, जिनका लेखन, संगीतबद्धता और नृत्य संयोजन स्वयं स्मिता महाजन द्वारा किया गया है। प्रस्तुति का शुभारंभ ‘विनायक स्तुति’ से हुआ, जिसमें विघ्नहर्ता भगवान गणेश की वंदना करते हुए उनसे बुद्धि, शक्ति एवं मंगलकारी आशीर्वाद की कामना की गई। इसके पश्चात प्रस्तुत ‘मल्लारी’ में मंदिरों में देवयात्रा के दौरान वाद्ययंत्रों पर बजाई जाने वाली पारंपरिक रचना को भरतनाट्यम की शैली में साकार किया गया। चार विभिन्न गतियों में प्रस्तुत इस रचना ने दर्शकों को लय और ताल की अद्भुत अनुभूति कराई। अगली प्रस्तुति ‘देवी कौतुकम्’ रही, जिसमें ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती, समृद्धि की प्रतीक देवी लक्ष्मी तथा शक्ति स्वरूपा माँ अम्बा की स्तुतियाँ तीन भिन्न रागों एवं तालों में प्रस्तुत की गईं। इसके बाद प्रस्तुत हिंदी पदम में एक युवती की मनःस्थिति को भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया गया, जो अपनी प्रिय सखी के रूठ जाने से व्यथित है और उसे मनाने का उपाय खोज रही है। दूसरे पदम में वासकसज्जिता नायिका के भावों का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया, जिसमें वह अपने प्रियतम के आगमन की प्रतीक्षा करते हुए उनके साथ बिताए जाने वाले सुखद क्षणों की कल्पना करती है। कार्यक्रम का समापन पारंपरिक रूप से ‘तिल्लाना’ से हुआ, जो लयात्मकता, ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम था। राग देश में निबद्ध इस रचना के माध्यम से मातृभूमि को भावपूर्ण नमन अर्पित किया गया। उल्लेखनीय है कि स्मिता महाजन ने स्वयं रचित एवं संगीतबद्ध 75 भरतनाट्यम रचनाओं का तीन खंडों में प्रकाशित ग्रंथ ‘मार्गम उन्मेष’ तैयार किया है। उन्हें 16वीं से 19वीं शताब्दी के तंजावुर भोंसले राजाओं की परंपरा के पश्चात मराठी एवं हिंदी में नृत्य रचनाओं के लेखन और संगीत-सृजन की विशिष्ट परंपरा को आगे बढ़ाने वाली अग्रणी कलाकारों में माना जाता है। भरतनाट्यम की प्रस्तुति पश्चात शास्त्रीय गायन की सभा सजी। भोपाल की गुणी गायिका सुप्रदक्षिणा भट्ट ने अपने सुरों से शाम को सजाया। उन्होंने अपनी सुरमयी प्रस्तुति की शुरुआत राग यमन कल्याण से किया। इस राग की गरिमा और माधुर्य को स्वर देते हुए एकताल में निबद्ध बड़ा ख़याल “मेरा मन बाँध लीनो रे” एवं तीनताल में छोटा ख़याल “रंग दे रंग रेजवा” प्रस्तुत किया। उनकी गायकी में राग की शास्त्रीय गंभीरता और भावों की सहज अभिव्यक्ति श्रोताओं को एक विशिष्ट संगीतानुभूति प्रदान कर रही थी। इसके उपरांत ग्वालियर घराने की समृद्ध और विशिष्ट परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए तराना एवं तिरबट की प्रस्तुति दी। तिरबट की विशेषता यह है कि इसमें अर्थपूर्ण शब्दों के स्थान पर तबले और पखावज के बोलों की प्रधानता रहती है, जो लय और स्वर के अद्भुत समन्वय का सृजन करती है। इस क्रम में उन्होंने हमीर, केदार, बहार, दरबारी, अड़ाना और भोपाली जैसी विविध रागों की रंगत प्रस्तुत की, जिन्हें एकताल, तीनताल एवं रूपक ताल में संयोजित किया गया। अपनी प्रस्तुति का भावपूर्ण समापन अपने दादा एवं गुरु पंडित सज्जनलाल ब्रह्मभट्ट द्वारा रचित भजन “मोहन की राधा” से किया, जो भक्ति, माधुर्य और गुरु-परंपरा के प्रति उनकी श्रद्धा का सुंदर प्रतीक था। इस संगीत संध्या में उनके साथ हारमोनियम पर चैतन्य भट्ट एवं तबले पर रतलाम के युवा तबला वादक तल्लीन त्रिवेदी ने संगत दी। स्वर, लय और भाव के समन्वय से सुसज्जित यह प्रस्तुति भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा, सौंदर्य और आध्यात्मिक संवेदना का अनुपम उत्सव सिद्ध हुई। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट नृत्य एवं गायन प्रस्तुतियों ने वातावरण को कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य से सराबोर कर दिया। विश्व संगीत दिवस पर आयोजित यह संध्या भारतीय शास्त्रीय कलाओं की समृद्ध विरासत, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई।  

चीता परियोजना का जायजा लेने पहुंचीं राष्ट्रपति, चीता प्रदर्शिनी का भी किया अवलोकन

भोपाल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कूनो नेशनल उद्यान के दो दिवसीय प्रवास के दौरान रविवार को चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर का अवलोकन किया। चीता कमांड एवं कण्ट्रोल सेंटर के अवलोकन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु को चीतों कि निगरानी और ट्रैकिंग की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी प्रदान की गयी। राष्ट्रपति ने चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर परिसर में चीता प्रोजेक्ट की अभी तक की प्रगति पर लगाई गई प्रदर्शिनी का अवलोकन किया। राष्ट्रपति मुर्मु को अवगत कराया गया कि वर्तमान में भारत में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो में मौजूद है, तीन चीते गाँधी सागर अभयारण्य मंदसौर भेजे गए है। राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा इस दौरान चीतों के लिए की गई आवश्यक सुविधाओं के विषय में जानकारी ली गई। बताया गया कि हर 2 किलोमीटर पर जंगल में वाटर पिट बनाये गए हैँ जिनमें अवश्यकता अनुसार पानी भरवाया जाता है। इस दौरान उन्हें बोत्सवाना से लाये गए चीतों की गतिविधियों की भी जानकारी दी गयी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति श्री मुर्मु द्वारा अपनी बोत्सवाना यात्रा के दौरान 8 चीते रिसीव किये गए थे जिन्हें कुनो लाया गया है। इस दौरान सीसीफ श्री उत्तम कुमार, कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, डीएफओ श्री आर थिरूकुराल आदि मौजूद रहे। राष्ट्रपति मुर्मु की कूनो हेलीपैड पर हुई आगवानी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने दो दिवसीय प्रवास पर रविवार को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क पहुंचीं। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल भी साथ रहे। इस अवसर पर कूनो नेशनल पार्क स्थित हेलीपैड पर मिनिस्टर इन वेटिंग एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने आगवनी करते हुए पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान सांसद श्री शिवमंगल सिंह तोमर, प्रमुख सचिव वन श्री संदीप यादव, पीसीसीएफ श्री शुभरंजन सेन, कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक श्री सुधीर कुमार अग्रवाल द्वारा भी उनकी आगवनी करते हुए स्वागत किया गया। राष्ट्रपति मुर्मु कूनो नेशनल पार्क में रात्रि विश्राम करेंगी और भारत में चीतों के पुनर्स्थापन की इस महत्वपूर्ण परियोजना के संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा भी करेंगी। 

दबंगों ने महिला सरपंच को बनाया निशाना, बालाघाट में मारपीट के बाद 5 आरोपी पकड़े गए

बालाघाट/परसवाड़ा. परसवाड़ा थाना के ग्राम चिनी बर्राटोला की महिला सरपंच को गांव से अतिक्रमण हटवाना भारी पड़ गया। इस कार्रवाई से नाराज अतिक्रमणकारियों ने सरपंच प्रमिला उइके पर ईंट व लकड़ी से जानलेवा हमला कर दिया। जिससे सरपंच सहित अन्य चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मारपीट की घटना शनिवार शाम पांच बजे की बताई जा रही है। घायलों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परसवाड़ा में उपचार करवाया गया। इस मामले में पुलिस ने व्यासमून तिवारी, वेदमून तिवारी, कौशल्या बाई तिवारी, दुर्गा बाई तिवारी और लक्ष्मीपति पांडे को हिरासत में लिया है। अतिक्रमण को हटाकर सड़क का निर्माण कराया गया था शुक्रवार को ग्राम चिनी बर्राटोला निवासी व्यासमून तिवारी के द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाकर सड़क का निर्माण कराया गया था, जिससे नाराज अतिक्रमणकारी दूसरे दिन सड़क में गड्ढा खोद रहा था। इसकी सूचना पर सरपंच प्रमिला उइके वहां पहुंचीं और अतिक्रमणकारी को समझाने का प्रयास कर रही थीं। आरोपितों ने मिलकर पीटा इसी दौरान अतिक्रमणकारी ने महिला सरपंच को ईंट व लकड़ी से मारपीट कर दी। इसके साथ ही बीच-बचाव में आई अन्य महिलाओं को भी आरोपितों ने मिलकर पीटा। मारपीट की घटना में सभी को चोटें आई हैं। आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा इस घटनाक्रम से नाराज चिनी के सैकड़ों ग्रामीण थाना परसवाड़ा पहुंचे और आरोपितों को तत्काल गिरफ्तार कर कार्रवाई की मांग को लेकर देर रात्रि तक डटे रहे। घटना को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों सहित सरपंच संघ ने नाराजगी जाहिर की और घटना की घोर निंदा करते हुए कहा कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अगर प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो पूरा सरपंच संघ आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर आरोपितों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। इनका कहना महिला सरपंच से अतिक्रमणकारी ने मारपीट की है। जिससे सरपंच के चेहरे में चोट आई है। मामले की शिकायत थाना में की गई है। यदि आरोपितों पर न्यायोचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो सरपंच संघ के माध्यम से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। कपूरचंद वरकड़े, सरपंच ग्राम पंचायत लिंगा एवं उपाध्यक्ष, सरपंच संघ बालाघाट।

स्वैच्छिक ट्रांसफर में शिक्षकों की बढ़ी मुश्किलें, ई-अटेंडेंस के चलते रिक्त पद भी दिखे ‘रिजर्व’

भोपाल. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू किए जाने से पहले ही शिक्षकों के सामने नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। प्रदेश के कई शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में रिक्त पदों को स्थानांतरण पोर्टल पर रिजर्व दर्शाए जाने से हजारों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। वहीं पोर्टल पर आवेदन की तैयारी कर रहे अनेक शिक्षकों को 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता भी बड़ी बाधा बन रही है। शिक्षकों का कहना है कि दो दिन पहले तक पोर्टल पर जो पद रिक्त दिखाई दे रहे थे, वे अब उपलब्ध सूची से गायब हो गए हैं। इससे उन्हें वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी नहीं मिल पा रही है और वे अपनी पसंद के स्थानों के लिए आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। कई शिक्षकों को पोर्टल पर यह संदेश भी मिल रहा है कि उनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम होने के कारण वे आवेदन के पात्र नहीं हैं। पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल शिक्षक संगठनों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि जब तक स्थानांतरण आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो जाती और सभी पात्र शिक्षकों को विकल्प चयन का अवसर नहीं मिल जाता, तब तक रिक्त पदों को रिजर्व या भरा हुआ दर्शाना उचित नहीं है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में रिक्त पदों को रिजर्व दिखाए जाने से ऐसे शिक्षक प्रभावित होंगे जो वर्षों से पारिवारिक, स्वास्थ्य या अन्य आवश्यक कारणों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इससे उन्हें अपनी पसंद के स्थानों का चयन करने का अवसर नहीं मिल पाएगा। नियमों में संशोधन की मांग शिक्षक संगठनों ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्वैच्छिक स्थानांतरण पोर्टल पर सभी वास्तविक रिक्त पदों को प्रदर्शित किया जाए तथा आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी पद को अनावश्यक रूप से रिजर्व न रखा जाए। साथ ही, स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति में संशोधन करते हुए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त समाप्त करने और जनगणना ड्यूटी में संलग्न शिक्षकों को भी स्थानांतरण के लिए पात्र घोषित करने की मांग की गई है। ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त हो 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त हो, साथ ही जनगणना वाले शिक्षकों को भी मौका दिया जाए। यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के शिक्षक लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए बाध्य होंगे। – उपेन्द्र कौशल,कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष,शासकीय शिक्षक संगठन। जनगणना कार्य के बाद कार्यमुक्त जनगणना कार्य करने वाले शिक्षकों को स्थानांतरण से वंचित करना उनके साथ अन्याय है। यदि शासन को जनगणना कार्य प्रभावित होने की आशंका हो, तो स्थानांतरण आदेश में यह शर्त जोड़ी जा सकती है कि संबंधित शिक्षक को जनगणना कार्य पूर्ण होने के बाद ही कार्यमुक्त किया जाए। नीति में संशोधन किया जाए। – जगदीश यादव, प्रांताध्यक्ष,राज्य शिक्षक संघ।