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ऊर्जा मंत्री तोमर ने उपनगर ग्वालियर में नाला निर्माण एवं सीवर लाइन का किया निरीक्षण

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने उपनगर ग्वालियर के वार्ड-3 एवं 4 में सीवर लाइन, सड़क, नाला निर्माण, पेयजल, साफ-सफाई एवं विद्युत व्यवस्था का घर-घर जाकर निरीक्षण किया। स्थानीय नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना एवं अधिकारियों को समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अपर आयुक्त  प्रदीप तोमर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने मोहिते गार्डन के सामने नाले का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नाला कचरे से भरा हुआ पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की तथा नाले की शीघ्र सफाई कर एक चेंबर बनाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों के दिए। साथ ही विनय नगर सेक्टर-03 में चल रहे सीवर कार्यों का निरीक्षण किया तथा स्वच्छता व्यवस्था का अवलोकन किया। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने वार्ड-4 के इंद्रा नगर, ओम नगर,  राम विहार कॉलोनी, सूरज नगर वार्ड 03 विनय नगर सेक्टर 3 आदि क्षेत्र में सीवर लाइन, सड़क, पेयजल एवं विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय नागरिकों ने भी ऊर्जा मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। लोगों ने जल भराव, गंदगी और सीवर जाम जैसी समस्याओं की शिकायत की, जिस पर मंत्री  तोमर ने अधिकारियों को तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीवर और नाला निर्माण का मुख्य उद्देश्य आम जनता को जल भराव और गंदगी से राहत दिलाना है, इसलिए कार्य में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर, शहरी स्वास्थ्य केंद्र मोहिते गार्डन का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, दवाइयों की उपलब्धता एवं आमजन को मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया तथा संजीवनी क्लीनिक पर कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से फोन पर बात कर आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि ऊर्जा मंत्री  तोमर समय-समय पर क्षेत्र का दौरा कर विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण करते रहते हैं और मौके पर ही समस्याओं के समाधान के निर्देश देते हैं।  

प्रमुख सचिव उमराव ने जबलपुर एवं मंडला जिले का किया भ्रमण, क्षीरधारा योजना अंतर्गत चयनित पशुपालकों के घर जाकर की भेंट

भोपाल प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी  उमाकांत उमराव औचक भ्रमण पर जबलपुर पहुंचे। यहां पर पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय सभागार में पशु चिकित्सकों के साथ बैठक की। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर जबलपुर  राघवेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। प्रमुख सचिव  उमराव ने बैठक में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के प्रकरणों में विस्तार से एक-एक पशु चिकित्सक से विस्तृत चर्चा कर लंबित प्रकरण बैंकों से स्वीकृत करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले के अंतर्गत चयनित क्षीरधारा ग्रामों में चलाई जा रही गतिविधियों एवं दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान पर भी चर्चा की। अवार्णित पशुओं में नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान देने को कहा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों की प्रशंसा की प्रमुख सचिव  उमराव ने कृत्रिम गर्भाधान कार्य में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों की प्रशंसा की। साथ ही न्यूनतम कार्य करने वाले पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों को कार्यशैली में सुधार करने के निर्देश दिए। सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों एवं मैत्री कार्यकर्ताओं से फील्ड में कार्य करने में आ रही कठिनाइयों एवं उनके निराकरण पर विस्तार से चर्चा की। प्रमुख सचिव  उमराव ने पाटन के क्षीर धारा ग्राम के पशु चिकित्सालय नुनसर का औचक निरीक्षण भी किया। बैठक में संयुक्त संचालक पशुपालन एवं डेयरी जबलपुर डॉ. व्ही.एन. मिश्रा एवं उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. प्रफुल्ल मून भी उपस्थित रहे। मंडला जिले के क्षीरधारा अंतर्गत चयनित ग्राम मैली का किया भ्रमण प्रमुख सचिव  उमराव मंडला जिले के ग्राम मैली पहुंचे। क्षीरधारा योजना अंतर्गत चयनित मैली ग्राम का भ्रमण किया। इस दौरान वे पशुपालक इंद्रकुमार सिंगरौरे, गौरीशंकर सिंगरौरे एवं कृष्णकांत झरिया, ग्राम बिनेका में शिवा चंदरोल, अशोक चंदरोल के घर पहुंचकर भेंट की। पशुपालकों को चयनित सीमेंन के उपयोग के बारे में जानकारी दी। साथ ही पशुओं के नस्ल सुधार में इसका अधिक से अधिक उपयोग करने पर जोर दिया। अधिकारियों को सघन बधियाकारण एवं बांझ निवारण शिविर लगाने को कहा। जिससे पशुओं में नस्ल सुधार किया जा सके। साथ ही दुग्ध उत्पादन में वृद्धि भी हो सके।।  

संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र सहित अन्य अधिकारी पहुंचे स्कूल, विद्यार्थियों से किया संवाद

भोपाल स्कूल चलें हम अभियान अंतर्गत शनिवार को प्रदेश की स्कूलों में भविष्य से भेंट कार्यक्रम का आयोजन हुआ। संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र  हरजिंदर सिंह भोपाल के पीएम  नवीन कन्या विद्यालय तुलसी नगर पहुंचे और विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से बात करते हुए उन्हें किताबी पढ़ाई के साथ-साथ दैनन्दिनी जीवन में खेलों के माध्यम से शारीरिक सुदृढता एवं कम्प्यूटर और एआई जैसी तकनीकी सुविधाओं के समावेश पर भी जोर दिया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल चलें हम अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन की दृष्टि से 4 अप्रैल को प्रदेश की समस्त शालाओं में समाज के प्रमुख व्यक्तियों की सहभागिता में “भविष्य से भेंट’’ कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध, प्रबुद्ध और सम्मानित व्यक्तियों को एक प्रेरक की भूमिका में विद्यार्थियों से भेंट के लिये शालाओं में आमंत्रित किया गया था, जिसके तहत प्रदेश की अनेक शालाओं में स्थानीय स्तर पर विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ी, साहित्यकार, कलाकार, मीडिया, संचार मित्रों, पुलिस अधिकारी, राज्य शासन के अधिकारी विशेष रूप से बच्चों के बीच पहुंचे और उन्हें जीवन में आगे बढने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान अनेक शालाओं में सामाजिक संस्थाओं एवं आमंत्रित व्यक्तियों द्वारा स्वेच्छा से विद्यार्थियों को शाला उपयोगी वस्तुएं भी भेंट की गई। स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगणों द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंचकर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया और सत्रारंभ के अवसर पर शालाओं में आवश्यक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। प्रत्येक जिले में प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों ने भी चयनित शालाओं में जाकर एक कालखण्ड अध्यापन कराया। भविष्य से भेंट कार्यक्रम में राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक  शीतांशु शुक्ला ने सीहोर, अपर संचालक डॉ. अरूण सिंह इंदौर और देवास जिले की विभिन्न शालाओं में विद्यार्थियों के बीच जाकर संवाद किया इस अवसर पर राज्य शिक्षा केन्द्र के समस्त जिला प्रभारी अधिकारियों के द्वारा जिलों में प्रवास कर स्कूल चलें हम अभियान अंतर्गत प्रवेशोत्सव के दौरान बच्चों का शाला नामांकन, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों एवं नि:शुल्क साईकिल वितरण आदि का अवलोकन कर आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया।  

भोपाल रेल मंडल में RPF का अद्भुत प्रयास: 720 बच्चों को मिली घर वापसी, 33 लोगों को सुरक्षा—‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’

भोपाल  रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने वित्तीय वर्ष अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और रेल संपत्ति की रक्षा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर अपनी प्रभावी कार्यशैली का परिचय दिया है। चौबीसों घंटे मुस्तैद रहकर आरपीएफ ने जहां अपराधों पर सख्ती से नियंत्रण किया, वहीं विशेष अभियानों के माध्यम से बिछड़े बच्चों को परिवार से मिलाया, खोया सामान लौटाया और जरूरतमंद यात्रियों को त्वरित सहायता प्रदान की। इसके साथ ही अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई कर रेलवे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया है। 33 लोगों की बचाई जान आपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत 720 बिछड़े, घर से भागे या अपहृत बच्चों को सुरक्षित परिजनों या चाइल्ड लाइन को सौंपा गया। वहीं आपरेशन अमानत में 973 यात्रियों को करीब 2.88 करोड़ रुपए मूल्य का खोया सामान वापस दिलाया गया। आपरेशन जीवन रक्षा के जरिए 33 लोगों की जान बचाई गई। महिलाओं को दी जा रही सुरक्षा महिला सुरक्षा के लिए आपरेशन मेरी सहेली के तहत प्रतिदिन औसतन 110 ट्रेनों में महिला यात्रियों को सहायता दी गई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेल अधिनियम के तहत 53,566 मामलों में कार्रवाई कर 3.81 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना वसूला गया। अनाधिकृत वेंडरों पर सख्ती इसके अलावा अवैध ई-टिकट कारोबार पर कार्रवाई करते हुए 64 लोगों को गिरफ्तार कर 52 लाख रुपए से अधिक के टिकट जब्त किए गए। अनाधिकृत वेंडरों पर सख्ती दिखाते हुए 18,166 लोगों पर कार्रवाई की गई। रेल संपत्ति चोरी के 328 मामलों में 635 आरोपियों को गिरफ्तार कर संपत्ति बरामद की गई। वहीं नशे के खिलाफ आपरेशन नारकोस के तहत 27 मामलों में 43 तस्करों को पकड़कर 27 करोड़ रुपए से अधिक के मादक पदार्थ जब्त किए गए। साथ ही साइबर सेल के माध्यम से 180 मोबाइल ब्लाक कर 39 फोन यात्रियों को लौटाए गए।  

घर बैठे अच्छी कमाई कर रहे हैं होम-स्टे संचालक, अब तक ₹6.76 करोड़ कमाए

भोपाल मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति के इन्द्रधनुषी रंगों को करीब से देखना और ज्यादा आनंददायी और रोमांचक हो गया है। बड़ी संख्या में बन रहे होम-स्टे में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में हाई-वे और प्राकृतिक स्थानों के आस-पास के तथा जनजातीय क्षेत्रों में अब बड़ी संख्या में होम-स्टे नजर आ जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण उदयमिता को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण पर्यटन की असीम संभावनाओं का दोहन करने की नीति बनाई है। पिछले दो सालों में इससे ग्रामीण अंचलों में रोजगार के बड़े अवसर निर्मित हुए हैं। होम-स्टे से देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति के दर्शन अब सहजता से सुलभ हो गया है। प्रदेश में 98 चुने गांवों में 346 होम-स्टे ग्रामीणों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 642 होम-स्टे निर्माणाधीन हैं, जो जल्दी ही पर्यटकों के आतिथ्य के लिए तैयार हो जायेंगे। अब तक लगभग 34 हजार देशी-विदेशी पर्यटकों ने होम-स्टे कर ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। सुखद आवास सुविधा, परम्परागत व्यंजनों का स्वाद, स्थानीय लोक-कला, नृत्य-संगीत, हस्त-कला, हस्त-शिल्प से होम-स्टे संचालक परिवारों को ₹6.76 करोड़ की आय प्राप्त हुई। उन्हें आय का एक गरिमापूर्ण साधन मिल गया। पर्यटकों को खुशियां देने के साथ उनके परिवारों में भी खुशियां आ गईं। होम-स्टे योजना पर्यटन विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम एक बहुआयामी योजना है। इसका उददेश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाना, गांवों में ही रोजगार के अवसरों का निर्माण करना और ग्रामीण संस्कृति बचाये रखना है। प्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्रों बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, निमाड़, मालवा, महाकौशल एवं चम्बल की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासतों का दर्शन करा रही है। होम-स्टे गांवों में रची-बसी संस्कृति, ग्रामीण आवास विन्यास, परम्परागत व्यंजन, नृत्य संगीत, लोक-कला, हस्त-शिल्प से पर्यटकों को सुखद अनुभव प्रदान करते हैं। पर्यटन स्थलों से लगे ग्रामों के साथ ही प्राकृतिक, नैसर्गिक सुन्दरता से परिपूर्ण एवं जनजातीय सांस्कृतिक पहचान वाले गावों का चयन कर उन्हें गामीण पर्यटन से जोड़ा गया है। होम-स्टे शहरी पर्यटकों को कम बजट में गांव के शांत और सुरम्य वातावरण में सुखद स्मृतियों से सराबोर करने का काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा होम-स्टे एवं पर्यटन ग्रामों के समेकित विकास एवं विस्तार की दिशा में समय-समय पर हॉस्पिटैलिटी, साफ-सफाई एवं कौशल विकास के तकनीकी प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीणों के कौशल उन्नयन में सहयोग दिया जा रहा है। होम-स्टे के प्रचार-प्रसार में डिजिटल एवं आईटी, सोशल मीडिया के उपयोग की दिशा में भी समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाकर क्षमतावर्धन एवं सामुदायिक संगठन में नेतृत्व विकास का कार्य किया गया है। इसका परिणाम है कि पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे को ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से बुकिंग मिल रही है। सीहोर का ग्राम खारी बना मॉडल पर्यटन ग्राम भोपाल से लगे सीहोर जिले का ग्राम खारी ने मॉडल पर्यटन ग्राम के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां लगभग 209 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सरकारी एवं गैर-सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा समुदाय आधारित ग्रामीण अर्थव्यव्या में पर्यटन ग्रामों के योगदान का अध्ययन किया गया है। बैतूल जिले के घोड़ा डोंगरी तहसील के "बाचा'' गांव में गणेश उइके एक-डेढ़ साल से ताप्ती विहार होम-स्टे चला रहे हैं। उन्हें ₹2 लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। होम-स्टे चलाने का उन्हें अच्छा अनुभव हो गया है। देखते ही देखते "बाचा'' गांव में 8 होम-स्टे खुल गये हैं। सभी में स्थानीय पर्यटकों के अलावा विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं। ग्रामीण संस्कृति के दर्शन करते हुए आराम से रहना और देशी खाना पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण होता है। ज्वार-बाजरे की रोटियां, टमाटर की चटनी, भटे का भरता, देशी सब्जियों के व्यंजन, कोदो-कुटकी की खीर जैसा ग्रामीण खाना, भजन व नृत्य मंडलियों के साथ सहभागिता करना, गायों को चारा खिलाना, दूध दुहना, कुएं से पानी भरना, बैलगाड़ी हांकना जैसी ग्रामीण गतिविधियां पर्यटकों को बहुत लुभाती हैं और हमेशा के लिए सुखदायी स्मृतियां बन जाती हैं। "बाचा'' के  गणेश उइके बताते हैं कि अब तक 500 से ज्यादा परिवार होम-स्टे के लिये आ चुके हैं। इनमें 5 दुबई से आये विदेशी मेहमान भी थे। "बाचा'' की आदर्श पर्यटक समिति के अध्यक्ष  अनिल धुर्वे ने बताया कि "बाचा'' गांव नागपुर हाइ-वे से लगा है। यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हम चाहते हैं कि हमारा स्वागत सत्कार का व्यवसाय और आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच की तारीफ करते हुए  धुर्वे बताते हैं कि इससे हमारी रोजगार की समस्या हल हो रही है। आदर्श पर्यटक समिति के अन्य सदस्यों के भी अपने होम-स्टे हैं। जैसे  रामदास उइके शिवगंगा होम-स्टे,  अंकित का गुलमोहन होम-स्टे,  राजेश कुमरे का जयसेवा होम-स्टे,  सुधीर ठाकरे का सतपुड़ा होम-स्टे और सु मीनाक्षी धुर्वे का आशीर्वाद होम-स्टे है। सभी में पर्यटकों का आगमन हो रहा है। एक ही गांव में इतने सारे होम-स्टे शायद "बाचा'' में ही हैं। भोपाल से नागपुर हाइ-वे पर होने से यहां पहुंचना आसान है। ऐतिहासिक देवगढ़ का किला है। यहां  कैलाश सरके 2023 होम-स्टे चला रहे हैं। अब तक करीब 100 परिवार आ चुके हैं। इनमें फ्रांस के पर्यटक भी शामिल हैं। होटल और बाचा बैतूल बस स्टेंड और रेल्वे स्टेशन से 25 किमी, और भोपाल से 165 किमी है। इसी प्रकार छिंदवाड़ा में नागपुर रोड में उमरानाला से 25 दूर गोंड राजाओं का होम-स्टे का फर्क समझाते हुए  कैलाश बताते हैं कि एकमात्र फर्क है वातावरण का। होटल की सुविधाओं का हम मुकाबला नहीं कर सकते लेकिन देशी खाना, व्यंजन, गांव का शांत माहौल, सूर्यादय, सूर्यास्त दर्शन, पक्षियों का कलरव होम-स्टे में मन को खुश करने वाला होती हैं। ऐसी योजना बनाने के लिए हम मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद देते हैं। घर बैठे आमदनी का जरिया मिल गया है। होम-स्टे चलाने के लिए हम और भी काम करते हैं। अच्छी बागवानी कर रहे हैं, जिससे ताजा सब्जी मिलती रहे। खेतों को संवार रहे हैं। गांव को स्वच्छ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उन्होंने बताया कि हाल में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह जिले के दौरे पर थे और यहां हमारे गाँवों में भी आये थे। होम-स्टे पर रूके और इसके संचालन और प्रबंधन संबंधी जानकारी ली। उन्होने चाय पी और देवगढ़ का किला देखा। होम-स्टे चलाने की बधाई दी और किसी प्रकार की परेशानी होने पर बेझिझक बताने को भी कहा। छिन्दवाड़ा जिले में ही तामिया … Read more

राज्यपाल जनजातीय जीवन रक्षा एवं सिकल सेल हितैषी संवाद कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए जेनेटिक काउंसलिंग और व्यापक जन-जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जुड़कर इसे एक जन-आंदोलन बनाना होगा। राज्यपाल  पटेल शनिवार को खरगोन जिले के प्रवास के दौरान जनजातीय जीवन रक्षा एवं सिकल सेल हितैषी संवाद को संबोधित कर रहे थे।   राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि विवाह से पूर्व जेनेटिक कार्ड का मिलान और गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच से आने वाली पीढ़ी को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होने  विशेष रूप से जेनेटिक काउंसलिंग पर बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन' के तहत वर्ष 2047 तक इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों और नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकेंगे। राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी महामहिम राज्यपाल के सिकल सेल के क्षेत्र में किए जा रहे पुनीत कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि वह इस बीमारी की वेदना को समझते हुए पूरे प्रदेश विशेषतः जनजातीय वर्ग मे इसके उन्मूलन और सर्वांगीण विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक  बालकृष्ण पाटीदार ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया अनुवांशिक रोग है, जिसका  प्रभाव शरीर  में अनेक गंभीर रोग उत्पन्न करता है। समाज के सेवाभावी लोगों और संस्थाओं की प्रशंसा की, जिन्होंने इस क्षेत्र में प्रेरणादायी कार्य किए हैं। सिकल सेल यूनिट का किया लोकार्पण राज्यपाल  पटेल ने रक्षा अस्पताल में नवनिर्मित सिकल सेल यूनिट का विधिवत लोकार्पण किया। उन्होंने सिकेल सेल यूनिट के अंतर्गत निर्मित 2 वार्डों का निरीक्षण कर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और जांच उपकरणों की जानकारी ली। साथ ही निर्देशित किया कि सिकल सेल पीड़ितों को समय पर उपचार और उचित मार्गदर्शन मिलना सुनिश्चित किया जाए। सिकेल सेल पीड़ित बच्चों से की मुलाकात राज्यपाल  पटेल ने सिकल सेल के क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अधिकारियों के कार्यों की सराहना की। सिकेल सेल क्षेत्र में किए गए कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। सिकल सेल पीड़ित बच्चों से उपचार के सम्बंध में भी जानकारी प्राप्त कर उन्हे नियमित दवाई, सुपाच्य भोजन, अधिक मात्रा में पानी पीने, व्यायाम एवं ठंडे पानी से नहीं नहाने की समझाइश दी।  

सेवा ही साधना: नर्मदा तट पर जागृत हुआ जनचेतना का दीप”

भोपाल बुदनी की पावन धरा पर स्थित गुंजारी नर्मदा संगम घाट आज पुनः उस दिव्य अनुभूति का साक्षी बना, जहां श्रद्धा और सेवा एकाकार होकर जनचेतना का नया इतिहास रचती दिखाई दी। मां नर्मदा की शांत, कल-कल बहती धारा में जब जनप्रतिनिधि, संत और आमजन एक साथ श्रमदान में जुटे, तो वह दृश्य केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जागरण का सजीव प्रतीक बन गया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने श्रमदान कर यह स्पष्ट किया कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो अपने आचरण से प्रेरणा देता है। नर्मदा परिक्रमा के तपस्वी, पूज्य दादागुरु जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। चार बार नर्मदा परिक्रमा पूर्ण कर चुके और केवल नर्मदा जल का सेवन करने वाले संत का संगम पर आगमन मानो स्वयं मां नर्मदा का आशीर्वाद प्रतीत हुआ। दादागुरु जी महाराज ने संगम के समग्र विकास पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे केवल एक भौतिक स्थल नहीं, बल्कि साधना, आत्मशुद्धि और आंतरिक जागरण का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि जीवन की आधारशिला हैं, जिनकी पवित्रता बनाए रखना हम सभी का धर्म है। उन्होंने “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार, मंत्री  पटेल एवं जनभागीदारी के संयुक्त प्रयासों से इस प्राचीन धरोहर को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जो वर्षों से उपेक्षित रही थी। आज उसी प्राचीन घाट पर जिस प्रकार स्वच्छता और विकास के कार्य गति पकड़ रहे हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है और अन्य स्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। मंत्री  पटेल ने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल शासन का दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना का दर्पण है। उन्होंने स्वच्छता को अभियान से आगे बढ़ाकर जीवन का संस्कार बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करेगा, तभी स्थायी परिवर्तन संभव हो सकेगा। उन्होंने संगम स्थल पर चल रहे स्वच्छता एवं संरक्षण कार्यों का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए, जिससे इस पावन स्थल का विकास निरंतर और सुव्यवस्थित रूप से आगे बढ़ता रहे। गुंजारी नर्मदा संगम घाट पर आज का यह आयोजन प्रशासन, आध्यात्म और जनसहभागिता का अद्भुत संगम बन गया। श्रमदान करते हाथ, संतों का आशीर्वाद और जनसमूह की सक्रिय भागीदारी ने मिलकर यह सिद्ध कर दिया कि जब सेवा को साधना का रूप मिलता है, तब परिवर्तन अवश्यंभावी हो जाता है। माँ नर्मदा की पावन धारा के साक्ष्य में लिया गया यह संकल्प केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुंदर और संस्कारित धरोहर का वचन है। यह आयोजन हमें यह भी स्मरण कराता है कि प्रकृति की सेवा ही सच्ची पूजा है और जन सहभागिता ही उसका सबसे प्रभावी मार्ग है।  

राजस्थान के बाद अब MP में सक्रिय: ‘म्याऊं-म्याऊं’ नेटवर्क ने रतलाम और मंदसौर को अपना गढ़ बनाया

रतलाम राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के देवलदी, नौगांव और अखेपुर जैसे क्षेत्रों में कभी एमडी ड्रग (मेफेड्रोन) बनाने का बड़ा नेटवर्क सक्रिय था, लेकिन पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियों की सख्ती के बाद अब यह नेटवर्क धीरे-धीरे मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में शिफ्ट हो गया है। पिछले तीन-चार वर्षों में लगातार हुई कार्रवाई के बाद तस्करों ने अपना ठिकाना बदल लिया और अब रतलाम, मंदसौर व आसपास के क्षेत्रों में छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए सिंथेटिक ड्रग का निर्माण किया जा रहा है। ड्रग निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क एमडी ड्रग, जिसे महानगरों में ‘म्याऊं-म्याऊं’ के नाम से जाना जाता है, की सबसे ज्यादा खपत मुंबई, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में होने वाली हाई-प्रोफाइल पार्टियों में होती है। जांच एजेंसियों के मुताबिक रतलाम में ढाई महीने के भीतर दूसरी एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि राजस्थान से फरार आरोपित अब मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में शरण लेकर यहीं से ड्रग निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क चला रहे हैं। रतलाम अफीम तस्करी के लिए कुख्यात तस्कर अब भी अफीम तस्करी के पुराने बेल्ट और स्थापित रूट का ही उपयोग एमडी ड्रग के लिए कर रहे हैं। मंदसौर-नीमच-रतलाम क्षेत्र पहले से ही अफीम तस्करी के लिए कुख्यात रहा है, ऐसे में यहां पहले से मौजूद नेटवर्क और संपर्कों का इस्तेमाल सिंथेटिक ड्रग के कारोबार में किया जा रहा है। छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए होती है एमडी ड्रग तैयार हाल ही में भोपाल, रतलाम और मंदसौर में पकड़ी गई फैक्ट्रियों की कड़ियां प्रतापगढ़ के देवलदी क्षेत्र से जुड़ी मिली हैं। इससे साफ है कि नेटवर्क का संचालन अब भी राजस्थान से हो रहा है, जबकि निर्माण इकाइयां मध्य प्रदेश में शिफ्ट हो चुकी हैं। सूत्र बताते हैं कि मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में अब छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए एमडी ड्रग तैयार की जा रही है। जांच एजेंसियां अब इस अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई कर रही हैं। भोपाल ड्रग फैक्ट्री से खुला राजस्थान का नेटवर्क 6 अक्टूबर 2024 को भोपाल के बगरोदा में एनसीबी व गुजरात एटीएस ने एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ी। आरोपित सान्याल बाने और अमित चतुर्वेदी गिरफ्तार हुए। पूछताछ में मंदसौर निवासी हरीश आंजना का नाम सामने आया, जिसे बाद में पकड़ा गया। जांच में खुलासा हुआ कि नेटवर्क का सरगना प्रतापगढ़ के देवलदी निवासी शोएब लाला है, जो राजस्थान से संचालन कर एमपी व गुजरात में सप्लाई कर रहा था। आरोपित के ससुराल में चल रही थी फैक्ट्री 16 जनवरी 2026 को रतलाम के चिकलाना में पुलिस ने एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ी। 10 से अधिक आरोपित गिरफ्तार हुए। दिलावर खान पठान के मकान से 10.50 किलो एमडी ड्रग, 300 लीटर मेफेड्रोन कैमिकल, 2 बंदूकें व 91 कारतूस जब्त किए गए। जांच में सामने आया कि देवलदी निवासी उसका दामाद याकूब खान, जो फरार है, ड्रग बनाने में माहिर था और उसी ने ससुराल को फैक्ट्री में बदला। ड्रग्स का डाक्टर जमशेद बना ट्रेनर 31 मार्च 2026 को रतलाम के बोरखेड़ा में पोल्ट्री फार्म पर चल रही एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ी गई। देवलदी निवासी जमशेद लाला उर्फ डाक्टर सहित चार आरोपित गिरफ्तार हुए। मौके से 200 ग्राम एमडी ड्रग, भारी मात्रा में केमिकल व उपकरण जब्त हुए। जांच में सामने आया कि जमशेद को ड्रग बनाने के लिए हायर किया गया था। उसने 7-8 वर्षों में 250 किलो एमडी ड्रग बनाने और कई लोगों को ट्रेनिंग देने की बात कबूली। एमडी ड्रग फैक्ट्री और तस्करों पर रेंज में कार्रवाई जारी रहेगी। राजस्थान के प्रतापगढ़ और झालावाड़ पुलिस के साथ समन्वय बैठक कर सूचनाओं का आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई के बारे में विमर्श किया जाएगा।- निमिष अग्रवाल, डीआइजी, रतलाम रेंज।  

भवन हादसा अनूपपुर: दो मृत, कई फंसे, घायल को तुरंत अस्पताल भेजा गया

अनूपपुर कोतमा नगर के वार्ड क्रमांक 5 स्थित बस स्टैंड के पास शनिवार शाम एक तीन मंजिला लाज इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, इस घटना में कई लोग मलबे में दब गए जबकि दो की जान चली गई है। इस घटना से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय इमारत में कई लोग मौजूद थे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मलबे में दस से अधिक लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, नगर पालिका और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। शहर के नागरिकों और बचाव दल ने तत्परता दिखाते हुए मलबे से दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा भेजा गया। वहां उनका उपचार जारी है। घटनास्थल पर एक क्रेन और चार जेसीबी से मलबे को हटाने का कार्य किया जा रहा है। दो पुरुष व्यक्तियों की मौत की खबर सामने आई है। बताया गया संजय अग्रवाल की लाज थी जो भर भराकर गिर गई इसके पीछे की वजह यह थी कि बाजू में एक कंस्ट्रक्शन का कार्य चल रहा था जहां 10 फीट गहरा नींव खोद दिया गया था जिसके कारण बड़े की भवन कमजोर पड़ गई और गिर गई।  

इंदौर के डायल-112 हीरोज रात्रि गश्त के दौरान घायल मिले व्यक्ति को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  इंदौर जिले के थाना तेजाजी नगर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की सतर्कता एवं संवेदनशीलता से रात्रि गश्त के दौरान सड़क किनारे घायल अवस्था में मिले एक व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्रवाई से पीड़ित व्यक्ति को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। दिनांक 04 अप्रैल को थाना तेजाजी नगर क्षेत्र अंतर्गत केलोद फाटा के पास रात्रि गश्त के दौरान डायल-112 एफआरव्ही स्टाफ को सड़क किनारे एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उक्त जानकारी तत्काल राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को दी गई एवं आवश्यक सहायता हेतु कार्रवाई प्रारंभ की गई। मौके पर मौजूद डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री मोहन मालवीय, आरक्षक श्री आशीष पालीवाल एवं पायलट श्री मोहित जाट ने तत्परता दिखाते हुए घायल व्यक्ति को बिना विलंब किए एफआरव्ही वाहन की सहायता से एम.वाय. अस्पताल, इंदौर पहुँचाया। डायल-112 जवानों की सतर्क एवं मानवीय कार्यवाही से घायल व्यक्ति को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन की सुरक्षा एवं आपात सहायता हेतु चौबीसों घंटे सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।