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भोपाल: मामूली विवाद में युवक की हत्या, होटल मालिक पर चाकू से हमला; परिजनों का थाने घेराव और चक्काजाम

भोपाल  भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में मामूली विवाद ने रविवार देर रात खौफनाक रूप ले लिया। ‘बेटा’ कहकर समझाने की कोशिश करने पर आरोपियों ने 35 साल के युवक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी।सोमवार सुबह गुस्साए परिजन और स्थानीय लोगों ने सुभाष कॉलोनी में चक्काजाम कर दिया। पुलिस की समझाइश के बाद करीब आधे घंटे में जाम खुल सका। इस दौरान परिजन का पुलिस से विवाद भी हुआ। परिजन हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ थाना परिसर में धरना दे रहे हैं। होटल बंद कर लौटते वक्त कर्मचारियों का विवाद पुलिस के अनुसार, विजय मेवाड़ा अशोका गार्डन और कोलार इलाके में चाय की दो होटलें चलाता था। रविवार रात करीब 1:30 बजे वह होटल बंद कर कर्मचारियों को प्रगति नगर छोड़ने के बाद लौट रहा था। यहां मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम अपने साथियों फरमान, कालू और इमरान के साथ मौजूद था। आरोपियों ने विजय के कर्मचारियों से अभद्रता की, जिन्होंने सुबह काम का हवाला देकर मना कर दिया। विरोध करने पर आसिफ ने ‘बेटा’ कहकर समझाने वाले विजय पर गुप्ती से कई वार किए। साथियों ने भी मारपीट की और सभी फरार हो गए। अस्पताल में तोड़ा दम, भारी पुलिस बल तैनात लहूलुहान विजय को स्थानीय लोगों ने हमीदिया अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना पर आधी रात को अशोका गार्डन और कोहेफिजा थाने की पुलिस भारी संख्या में पहुंची। पुलिस ने हत्या के मामले में दो-तीन संदेहियों को हिरासत में ले लिया, लेकिन मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम फरार है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया। एडिशनल पुलिस कमिश्नर अवधेश गोस्वामी समेत कई थानों के टीआई, एसीपी और एडिशनल डीसीपी मामले की जांच में जुटे हैं। परिजनों में आक्रोश, थाने का घेराव और चक्काजाम सोमवार सुबह गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अशोका गार्डन थाने का घेराव कर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। हिंदू संगठनों ने प्रदर्शनकारियों को समर्थन दिया। इसी क्रम में सुभाष कॉलोनी में चक्काजाम भी किया गया, जो पुलिस की समझाइश पर आधे घंटे बाद हटा। हमीदिया मॉर्चरी के बाहर भी हंगामा हुआ, जहां पुलिस बल तैनात है। होटल बंद कर लौट रहा था, रास्ते में हुआ विवाद पुलिस के मुताबिक, मृतक विजय मेवाड़ा सुभाष कॉलोनी का रहने वाला था। वह अशोका गार्डन और कोलार इलाके में चाय की दो होटल चलाता था। रविवार देर रात करीब 1:30 बजे वह होटल बंद कर कर्मचारियों को छोड़ने प्रगति नगर गया था। यहां मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम अपने साथियों फरमान, कालू और इमरान के साथ बैठा था। सभी मृतक के कर्मचारियों के पुराने दोस्त बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों से बदसलूकी, विरोध करने पर हमला आरोपियों ने कर्मचारियों को अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने सुबह जल्दी काम होने का हवाला देकर मना कर दिया। इस पर आरोपियों ने उनसे अभद्रता शुरू कर दी। विजय ने इसका विरोध किया। उसने आसिफ को ‘बेटा’ कहकर समझाने की कोशिश की। इसी बात पर विवाद बढ़ गया। पुलिस के अनुसार, गुस्साए आसिफ ने चाकू निकालकर विजय के पेट में घोंप दिया। उसके साथियों ने भी मारपीट की। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। घायल विजय को कर्मचारी और स्थानीय लोग फौरन निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम ने मध्यप्रदेश शासन को ₹8 करोड़ का लाभांश किया भुगतान

भोपाल  मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम मर्यादित के संचालक मण्डल की बैठक में निगम के अंशधारी मध्यप्रदेश शासन को वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक के अंतरिम लाभांश के रूप में राशि रू. 8.00 करोड़ का भुगतान किये जाने का निर्णय लिया गया है ।  तदानुसार मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में माननीय मंत्री, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय म.प्र. शासन एवं माननीय अध्यक्ष, मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम चेतन्य काश्यप द्वारा मध्यप्रदेश शासन के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय डॉ. मोहन यादव जी को राशि रू. 8.00 करोड़ अंतरिम लाभांश का चेक प्रदान किया गया।  इस अवसर पर सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम विभाग के प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह तथा आयुक्त, एम.एस.एम.ई, प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम दिलीप कुमार एवं निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन सोमवार से, लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी पर मंथन के लिए जुटेंगे युवा विधायक

भोपाल.  राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़  एवं राजस्थान के युवा विधायकों का दो दिवसीय सम्मेलन  30-31 मार्च को मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया और कार्यक्रम सफल एवं सुचारु रूप से संपन्न हो इस के लिये संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।इस अवसर पर विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा भी उपस्थित रहे। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत करना और युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर मंथन करना है। सम्मेलन में लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। मध्यप्रदेश में इस तरह का युवा विधायक सम्मेलन होना गर्व की बात है। सम्मेलन में कुल पांच सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पहले दिन तीन और दूसरे दिन दो सत्र होंगे। सम्मेलन में 45 वर्ष से कम उम्र वाले मध्यप्रदेश के 37, राजस्थान के 13 और छत्तीसगढ़ के 13 विधायक शामिल होंगे। सम्मेलन 30 मार्च 9:30 बजे से प्रारंभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भी होंगे शामिल कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन के प्रथम दिवस ‘लोकतंत्र और नागरिकों की भागीदारी को मजबूत करने के लिये युवा विधायकों की भूमिका’ विषय पर मंथन होगा। प्रथम दिवस माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी भी युवा विधायकों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन के दूसरे दिन 31 मार्च को ‘विकसित भारत 2047− युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर मंथन होगा। इस दिन अन्य सत्रों के अलावा एमआईटी पूना के चेयरमैन डॉ. राहुल वी. कराड का संबोधन होगा। समापन समारोह में राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश उपस्थित रहेंगे। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार उपस्थित रहेंगे।  

मध्य प्रदेश में BJP की तैयारी तेज, 1800 कार्यकर्ताओं को जल्द मिलेगी जिम्मेदारी

भोपाल एमपी बीजेपी में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं में और जोश जगाने सांग​ठनिक स्तर पर गहन विचार विमर्श चल रहा है। इसके अंतर्गत अब कुछ पद बांटे जाने का निर्णय लिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रदेशभर के 18 सौ नेता-कार्यकर्ताओं को जल्द ही अहम दायित्व दिया जाएगा। इसके लिए पार्टी ने की पहल की है। नगरीय निकाय चुनावों से पहले पकड़ मजबूत करने खास एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमें जिलों के अनुभवी नेताओं को एल्डरमैन बनाकर एडजस्ट करने की तैयारी की है। प्रादेशिक भाजपा नेताओं के मुताबिक लंबे अरसे से राजनीतिक नियुक्तियों के इंतजार में बैठे जिलों के वरिष्ठ नेताओं को एल्डरमैन में एडजस्ट करने की तैयारी कर चुकी है। इस पर जिले से प्रदेश संगठन के बीच समन्वय और सहमति बनाई जा चुकी है। हालांकि एल्डरमैन की परिषदों में कोई संवैधानिक भूमिका नहीं होती है पर इससे पार्टी कार्यकर्ताओं को अहमियत का अहसास जरूर होता है। एल्डरमैन को वोटिंग का अधिकार नहीं होता है और परिषदों की बैठक में भी इन्हें हिस्सा लेने का अधिकार नहीं है। पर पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते पार्षद या अध्यक्ष इनसे चर्चा कर मार्गदर्शन लेते हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अब कभी भी एल्डरमैन की घोषणा हो सकती है। दरअसल, भाजपा नगरीय निकायों में होने वाली एल्डरमैन की नियुक्ति में उन्हीं चेहरों को तवज्जो देगी, जिसके अनुभव का लाभ पार्टी को चुनाव में मिले। साथ ही परिषदों के कामकाज और विकास कार्यों की भी मॉनीटरिंग करवाई जा सके। बता दें, संगठन द्वारा नियुक्त एल्डरमैन न तो परिषदों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं और न ही इनके पास वोटिंग का अधिकार होता है। कुल मिलाकर इनकी भूमिका मार्गदर्शक के रूप में होती है। 413 निकायों में 18 सौ से अधिक नेता होंगे एडजस्ट निकायों में नेताओं को एडजस्ट करने का फॉर्मूला पार्टी ने तैयार किया है। 413 निकायों में करीब 1800 सक्रिय कार्यकर्ताओं को एडजस्ट किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक निकायों में 10 लाख से अधिक आबादी वाले 12 निकायों में 4-4 एल्डरमैन और 10 लाख से कम आबादी वाले में 8-8 की नियुक्ति की जाएगी। ऐसे ही नगर पालिकाओं में 6-6 और नगर परिषदों में 4-4 का फॉर्मूला तय हुआ है।

श्रीधाम एक्सप्रेस में बड़ा बदलाव: एलएचबी कोच से बढ़ेगी रफ्तार और सुविधाएं

जबलपुर जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच संचालित होने वाली श्रीधाम एक्सप्रेस की यात्रा जल्द ही और आरामदायक बनेगी। ट्रेन को 30 मई से लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) रैक से दौड़ाने का निर्णय किया गया है। एलएचबी कोच पारंपरिक (आईसीएफ) कोचों की तुलना में अधिक सुविधाजनक एवं सुरक्षित होते हैं। ये वजन में भी हल्के होते हैं। उच्च गति पर संचालन की क्षमता होती है। एलएचबी कोच की नई संरचना और स्वरूप यात्रियों को अधिक सुखद और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करते हैं। नए रेक से ट्रेन की गति औसतन 20 किलोमीटर प्रतिघंटा तक बढ़ेगी। चाल में वृद्धि की संभावना को ध्यान में रखकर ट्रेन को दिल्ली पहुंचाने की भी मंशा है। दिल्ली पहुंचाने में लेती है सबसे ज्यादा समय जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच एक साप्ताहिक और चार ट्रेन प्रतिदिन संचालित होती हैं। इनमें दिल्ली पहुंचाने में सबसे ज्यादा समय (लगभग 18.30 घंटा) श्रीधाम एक्सप्रेस लेती है। यह ट्रेन इटारसी-भोपाल-बीना के रास्ते संचालित होने के कारण कटनी-सागर-बीना मार्ग के अपेक्षाकृत लगभग 130 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करती है। जबलपुर से दिल्ली के बीच सीधे चलने वाली अन्य ट्रेनों के अपेक्षाकृत यात्रा में औसतन साढ़े पांच से साढ़े छह घंटे का अतिरिक्त समय लगाती है। जिसके चलते ट्रेन दोपहर में दिल्ली पहुंचती है। सुपरफास्ट धीमी चाल यात्रियों को परेशान करती है। अब 22 कोच होंगे, स्लीपर के दो कोच घटेंगे श्रीधाम एक्सप्रेस (12192/91) का संचालन पश्चिम मध्य रेल करता है। वर्तमान में ट्रेन का 24 कोच का आइसीएफ रैक है। इसे एलएचबी रैक से परिवर्तित करने के साथ ही ट्रेन का कोच कांबिनेशन बदल जाएगा। थर्ड एसी के एक कोच की एसी इकोनामी कोच लेगा। दो स्लीपर कोच भी कम होंगे। 22 कोच के एलएचबी रेक में एक वातानुकूलित प्रथम श्रेणी, दो वातानुकूलित द्वितीय, पांच वातानुकूलित तृतीय, एक वातानुकूलित तृतीय इकोनॉमी, सात स्लीपर, चार सामान्य श्रेणी के कोच, एक एसएलआरडी एवं एक जनरेटर कार रहेंगे।

PNG कनेक्शन में इंदौर-ग्वालियर चमके, भोपाल पिछड़ा—आपके शहर की क्या स्थिति?

भोपाल मध्य प्रदेश में पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस का कनेक्शन दो लाख घरों तक पहुंच गया है। लेकिन इसके नियमित उपभोक्ता केवल एक लाख परिवार ही हैं। कई जगहों पर उपभोक्ताओं तक कनेक्शन पहुंचने के बावजूद गैस की आपूर्ति शुरू नहीं की जा सकी है। नए आदेश आने के बाद इसमें तेजी लाने की बात कही जा रही है। पाइपलाइन और आपूर्ति में देरी के कारण राजधानी सहित प्रदेश के सभी जिलों में पिछले तीन सालों से पाइपलाइन बिछाने का काम बहुत तेजी से किया जा रहा है। जिसके तहत अधिकांश क्षेत्रों में पाइपलाइन तो बिछ गई लेकिन लोगों के घर-घर कनेक्शन देने का काम अभी धीमा है और जहां पर उपभोक्ताओं को कनेक्शन मिल गए हैं वहां पर आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसका मुख्य कारण पाइपलाइन होने के बावजूद घर तक अंतिम कनेक्शन में देरी, लोगों में जानकारी की कमी और अधिक शुरुआती खर्च बताया जा रहा है। इंदौर और ग्वालियर की बढ़त, भोपाल पिछड़ा जानकारी के अनुसार पीएनजी कनेक्शन देने में इंदौर पहले तो ग्वालियर दूसरे स्थान पर है, जबकि भोपाल में यह काम काफी पिछड़ा हुआ है। इंदौर ने 50 हजार लक्ष्य के बदले में एक लाख 23 हजार 804 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए हैं, जो तय लक्ष्य से अधिक हैं। इसी तरह, ग्वालियर ने भी तय लक्ष्य 44 हजार के बदले में 63 हजार 150 कनेक्शन दिए हैं। वहीं भोपाल में पांच लाख 50 हजार 222 का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बदले में अब तक महज 40 हजार कनेक्शन ही दिए गए हैं। बता दें सरकार और कंपनियों ने बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे गैस पाइपलाइन और कनेक्शन) की योजना बनाकर उसे स्थापित तो कर दिया, लेकिन लोगों को कनेक्शन व आपूर्ति समय से शुरू नहीं होने से काम पिछड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन स्वीकृत हो चुकी है या फिर निर्माणाधीन है। अभी तक घरेलू कनेक्शन देने का काम धीमी गति से चल रहा था लेकिन अब इसे तेजी से पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इन वजहों से पीएनजी से परहेज     लोग पाइप्ड गैस की निर्बाध आपूर्ति पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।     कनेक्शन की शुरुआती लागत अधिक है, इसलिए लोग एलपीजी छोड़कर पीएनजी पर शिफ्ट नहीं हो रहे हैं।     एलपीजी सिलिंडर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में आसानी होती है, यह सुविधा स्थायी पाइप वाली पीएनजी में नहीं मिलेगी इससे भी हिचकिचाहट।     पीएनजी हल्की है और एलपीजी की अपेक्षा इसकी आंच कम तीखी है, यह धारणा भी बनी हुई है।     पाइप्ड गैस में केबल इंटरनेट और पानी की पाइपलाइन की तरह रोज की टूटफूट और लीकेज से आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी लोगों को डरा रही है। (कई क्षेत्रों में लोगों ने जैसे बातचीत में बताया) जहां पीएनजी उपलब्धता वहां एलपीजी बंद होगी केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पिछले दिनों नया आदेश जारी किया है। इसके तहत जिन क्षेत्रों में पीएनजी की उपलब्धता है, वहां के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को तीन माह के अंदर इसका कनेक्शन लेना होगा। समय सीमा में ऐसा नहीं करने पर उनके यहां एलपीजी की आपूर्ति रोक दी जाएगी।

1.90 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं में से 1.40 करोड़ को मिलती है सस्ते दर पर बिजली : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल.  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के कुल एक करोड़ 90 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से लगभग एक करोड़ 40 लाख अर्थात 74 प्रतिशत उपभोक्ताओं को सस्ते दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। उपभोक्ता श्रेणी के आधार पर यह दर अधिकतम 2.78 रुपये प्रति यूनिट तक होती है, जो कि वास्तविक दर 7.05 प्रति यूनिट से काफी कम है। इन उपभोक्ताओं को दी जा रही सब्सिडी का भार राज्य शासन द्वारा वहन किया जाता है। मंत्री तोमर ने बताया है कि राज्य शासन द्वारा अटल गृह ज्योति योजना के अंतर्गत हर माह लगभग एक करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं से प्रथम 100 यूनिट पर मात्र 100 रुपये ही लिये जा रहे हैं। इसी तरह अटल कृषि ज्योति योजना में लगभग 28 लाख कृषि उपभोक्ताओं से कुल वार्षिक देयक की मात्र 7 से 15 प्रतिशत राशि 2 किश्तों में ली जा रही है। इन दोनों योजनाओं में इनके वास्तविक बिजली बिल के अंतर की राशि राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में विद्युत वितरण कम्पनियों को दी जा रही है। राज्य शासन द्वारा एक हेक्टेयर तक की भूमि एवं 5 एचपी क्षमता तक के स्थाई पम्प कनेक्शन वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को नि:शुल्क बिजली दी जा रही है। आवश्यकता अनुसार उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए बिजली का विक्रय भी किया जाता है। पॉवर एक्सचेंज में विद्युत विक्रय केवल लाभकारी परिस्थितियों में ही किया जाता है, जब राज्य के भीतर विद्युत माँग अपेक्षाकृत कम होती है। साथ ही बाजार दर उपलब्ध अधिशेष विद्युत की लागत से अधिक होती है। इसकी निगरानी के लिये जबलपुर में 24×7 कंट्रोल रूम बनाया गया है। इसके माध्यम से पॉवर एक्सचेंज में विद्युत विक्रय/क्रय का निर्णय लिया जाता है।  

अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक – उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक है। रीवा में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार को बेहतर बनाने के सभी प्रयास जारी हैं। हमारा प्रयास है कि गुणात्मक शिक्षा व बेहतर इलाज की सभी व्यवस्थायें रहें ताकि यहां के लोगों को उच्च शिक्षा व इलाज के लिये बाहर न जाना पड़े। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने लगभग 3 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा भवन का लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने संभाग को आदर्श संभाग बनायें। महाविद्यालय के प्राचार्यों का दायित्व है कि वह अपने महाविद्यालय में नवीन पाठ¬क्रम संचालन के लिये प्रयासरत रहें तथा प्राध्यापकों व विद्यार्थियों के साथ जीवंत संबंध बनायें रखें। उन्होंने कहा कि अच्छा प्रशासक वही है जो जमीनी फीड बैक लेकर कार्य करे। यह भवन उच्च स्तरीय सुविधाओं से युक्त है। जब कार्यालय अच्छा होता है तो कार्य करने की इच्छा भी बढ़ जाती है। इस कार्यालय भवन के द्वारा संभाग के सभी महाविद्यालयों के विकास व उच्च शिक्षा के गुणात्मक सुधार के सभी प्रयास तत्परता से होंगे। अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि लगभग 3 करोड़ रूपये से निर्मित भवन में सभी सुविधाएँ हैं। यहां से शासकीय, अशासकीय व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों पर नियंत्रण होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर आयुक्त रीवा संभाग बीएस जामोद, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय सहित महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक व विद्यार्थी उपस्थित रहे। 

इंदौर: डबल डेकर फ्लाईओवर पर बड़ा अपडेट, 400 टन ‘बो स्ट्रिंग’ तैयार, जेक पुश तकनीक से होगी शिफ्टिंग

इंदौर शहर के सबसे ऊंचे डबल डेकर फ्लाईओवर के 65 मीटर लंबे स्पान पर बो स्ट्रिंग (गर्डर) को पूल प्रक्रिया से रख दिया गया है। अब एक पखवाड़े में 400 टन वजनी बो स्ट्रिंग को दूसरी भुजा पर रखा जाएगा। यह कार्य जेक पुश प्रक्रिया के माध्यम से होगा और धीरे-धीरे इसको जेक की सहायता से दूसरी भुजा पर ले जाया जाएगा। वहीं दूसरी बो स्ट्रिंग के असेंबल की प्रक्रिया भी अगले सप्ताह से शुरू होगी, जिसको एक माह में पूरा किया जाएगा। ऊपर ही किया गया बो स्ट्रिंग का असेंबल कार्य इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) द्वारा लवकुश चौराहा पर 1452 मीटर लंबा डबल डेकर फ्लाईओवर बनाया जा रहा है। इसके मुख्य चौराहे पर 65 मीटर लंबी बो स्ट्रिंग को रखा गया है। नीचे मेट्रो और एमआर-10-सुपर कॉरिडोर फ्लाईओवर होने से बो स्ट्रिंग को नीचे-ऊपर पहुंचाना आसान नहीं था, इसलिए बो स्ट्रिंग को ऊपर ही असेंबल किया गया। 12 घंटे की जटिल प्रक्रिया और यातायात सुरक्षा पूरी बो स्ट्रिंग असेंबल होने के बाद इसको पूल कर बो स्ट्रिंग्स पर रखा गया। यह गर्डर 23 मीटर ऊंचाई पर सफलतापूर्वक रखी गई। करीब 12 घंटे की प्रक्रिया के बाद बो स्ट्रिंग को स्पान पर रखा गया। गर्डर को पूल करने में पांच घंटे का समय लगा और इसके लिए तीन विंच मशीन का उपयोग किया गया। दो विंच मशीन खींचने और एक पीछे से रोकने के लिए लगाई गई थी। बो स्ट्रिंग को लांच करने के लिए नीचे से यातायात पूरी तरह से बंद किया गया, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो। आगामी चरण और भारी क्रेन का उपयोग आइडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े का कहना है कि बो स्ट्रिंग को सफलता से स्पान पर रख दिया गया है। अब शिफ्टिंग की प्रक्रिया की जाएगी। साथ ही दूसरी बो स्ट्रिंग का निर्माण भी शुरू करेंगे। 900 टन क्षमता की दो क्रेन का उपयोग बो स्ट्रिंग को ऊपर असेंबल करने के लिए किया गया। इसमें एक 600 टन और दूसरी 300 टन क्षमता की क्रेन थी। इन क्रेन की सहायता से गर्डर के एंगल और अन्य सामग्री ऊपर पहुंचाई गई। बो स्ट्रिंग को असेंबल करने के लिए ऊपर ही कंपोजिट गर्डर स्पान बनाया गया है। इसी पर दूसरी बो स्ट्रिंग असेंबल की जाएगी।   सेगमेंट और वजन का तकनीकी विवरण फ्लाईओवर पर रखे 247 सेगमेंट डबल डेकर फ्लाईओवर के पियर तैयार होने के बाद स्पान पर सेगमेंट रखे गए। एक स्पान पर 13 सेगमेंट रखे गए हैं। एक सेगमेंट की चौड़ाई 25 मीटर और वजन 120 टन है। इसके अनुसार 13 स्पान की चौड़ाई 351 मीटर और वजन 1560 टन हुआ। सभी 24 स्पान पर सीमेंट और स्टील के 30 हजार टन वजन के 247 सेगमेंट रखे गए हैं।

सरकारी नौकरी में 24 साल बाद नया नियम लागू, कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा?

भोपाल मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए लागू दो बच्चों की शर्त को खत्म करने की तैयारी अंतिम चरण में है। राज्य सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने रख सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और माना जा रहा है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी मिल सकती है। प्रदेश में फिलहाल दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों के लिए कुछ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति पर प्रतिबंध लागू है। यह प्रावधान वर्ष 1961 के नियमों और बाद में 2001 में किए गए संशोधनों के तहत लागू किया गया था। अब सरकार इस शर्त को समाप्त करने पर विचार कर रही है। सभी विभागों में लागू होगा नियम यदि कैबिनेट से मंजूरी मिलती है तो सरकारी नौकरी के इच्छुक ऐसे अभ्यर्थियों को भी अवसर मिल सकेगा जिनके दो से अधिक बच्चे हैं। सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव काफी समय से विचाराधीन था, लेकिन कुछ बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं होने के कारण निर्णय टलता रहा। अब विभागीय स्तर पर सहमति बनने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद इसे सभी विभागों में लागू किया जाएगा। हालांकि इस बदलाव का असर पहले से सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर किस तरह पड़ेगा, इस बारे में अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियम हटने के बाद भविष्य में होने वाली भर्तियों में इसका सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही जिन अभ्यर्थियों को पहले इस नियम के कारण आवेदन से वंचित रहना पड़ता था, उन्हें भी मौका मिल सकेगा। परिवारों को कैशलेस इलाज राज्य सरकार के स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ अन्य सेवा नियमों में भी समय के अनुसार बदलाव किए जाएं। इसी क्रम में दो बच्चों की शर्त हटाने को प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इसी के साथ सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी कैबिनेट में लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार ऐसे कर्मचारियों और उनके आश्रितों को करीब 20 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।