samacharsecretary.com

स्व आधारित मानसिकता की नींव है स्वबोध – प्रवीण गुप्त

स्व आधारित मानसिकता का आधार है स्वबोध – प्रवीण गुप्त  नव वर्ष गुड़ी पड़वा के अवसर पर दो दिवसीय डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला      में भारत पुनरुत्थान का आधार स्वबोध विषय पर हुआ व्याख्यान  बड़वानी देश में 1947 को जो घटना घटी उसे समाज याद कर स्वाधीनता दिवस, स्वतंत्रता दिवस के रूप में याद करता है ओर 75 वर्ष होने पर अमृत महोत्सव कह रहे हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान लिखा व कहा कि यह संविधान ने आर्थिक व राजनीतिक स्वतंत्रता दी मगर सामाजिक स्वतंत्रता नहीं मिली। अंग्रेजो से स्वाधीन हुए, स्वतंत्रता नहीं मिली। कृत्रिम विकास अपने राष्ट्र के आधार पर उत्तम नहीं हो सकता, स्व आधारित मानसिकता का आधार स्वबोध है। स्व के आधार पर ध्यान देने से भारत दुनिया के प्रारंभिक देशों में अग्रणी हो सकता है।  उक्त विचार नगर के साखी रिसॉर्ट में नव वर्ष गुड़ी पड़वा के अवसर पर आयोजित स्वामी अमूर्तनंदगिरी सेवा न्यास द्वारा आयोजित डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला के प्रथम दिवस पर वक्ता श्री प्रवीण गुप्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र संपर्क प्रमुख द्वारा भारत पुनरुत्थान का आधार स्वबोध विषय पर अपना उद्बोधन दिया। श्री गुप्त ने रवींद्रनाथ टैगोर जी की पुस्तक स्वराज भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि पाश्चात्य की नकल के बजाय हमें अपने स्व के आधार पर ध्यान देना चाहिए। फ्रांस, इज़राइल व जर्मनी का अपनी मातृभाषा के प्रति विशेष लगाव के कारण आज वह विश्व में अग्रणी देश है। हम भारत देश को भी चार सूत्रीय भाषा को महत्व देते हुए मातृभाषा, जिस प्रांत में रहते है वहां की बोली, संपर्क भाषा हिंदी व व्यापार की भाषा होनी चाहिए। ऐसे ही स्व की अभिव्यक्ति परिवार से प्रारंभ होती है। देश में जो गलत नारेटिव बनाया गया है उसे ठीक करना होगा। कार्यक्रम का प्रारंभ मां भारत माता के चित्र पर श्री गुप्त, अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल पाटीदार व समिति अध्यक्ष डॉ. चक्रेश पहाड़िया ने  दीप प्रज्वलित कर हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, मातृशक्ति उपस्थित रहे। संचालन डॉ. नितिन पाटीदार व आभार सीए गरीमेश निमाड़े ने व्यक्त किया। समापन वंदे मातरम गायन से हुआ।  देशभक्ति प्रतिफल प्रदर्शित होना चाहिए क्षणिक देशभक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि देशभक्ति 15 अगस्त, 26 जनवरी ओर क्रिकेट मैच जीत पर ही झलकती है जबकि देशभक्ति तो प्रतिफल प्रदर्शित होना चाहिए। जन्मभूमि स्वर्ग से महान है  कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राहुल पाटीदार ने प्रभु श्री राम के द्वारा रावण का वध करने के बाद भाई लक्ष्मण के द्वारा स्वर्ण लंका का सुख लेने का उदाहरण देते हुए अपनी जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर बताया। अपनी संस्कृति, परंपरा, धर्म के प्रति स्वबोध को अपनाने का आह्वान किया। वर्तमान में विश्व में वैश्विक युद्ध व पाश्चात्य की अंधी दौड़ के बजाय भारत के सनातन धर्म के सर्वे भवन्तु सुखिन के मार्ग को अपनाने से  विश्व शांति प्राप्त होगी।

सिंहस्थ-2028 के लिए एम.पी. ट्रांसको के कार्य एक वर्ष पहले होंगे पूरे, ऊर्जा मंत्री तोमर ने की पुष्टि

सिंहस्थ-2028 के लिये एम.पी. ट्रांसको के कार्य एक वर्ष पूर्व पूर्ण करने का लक्ष्य, हो रही है नियमित मॉनिटरिंग : ऊर्जा मंत्री  तोमर उज्जैन ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक सिंहस्थ-2028 के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी उज्जैन क्षेत्र में अपनी पारेषण (ट्रांसमिशन) प्रणाली को सुदृढ़ एवं विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना पर तेजी से कार्य कर रही है। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि कंपनी के प्रबंध संचालक  सुनील तिवारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सिंहस्थ-2028 से संबंधित सभी कार्य आयोजन तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व पूर्ण कर लिए जाएं। इससे पारेषण तंत्र की स्थिरता, विश्वसनीयता एवं आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त परीक्षण एवं सुधार का समय मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि इन निर्देशों के परिपालन में प्रबंध संचालक  सुनील तिवारी स्वयं कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें तथा सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करें। चिंतामन सबस्टेशन का निर्माण कार्य प्रारंभ सिंहस्थ अवधि में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रथम चरण में 132 के.व्ही. चिंतामन सबस्टेशन के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।इसके अलावा उज्जैन- चंद्रावती गंज एवं  देपालपुर- चिंतामन 132 के वी ट्रांसमिशन लाइन का "लाइन इन लाइन आउट"कार्य भी प्रगति पर है।  इसके साथ ही त्रिवेणी विहार क्षेत्र से संबंधित विद्युत अवसंरचना कार्य भी तेजी से प्रगति पर हैं, जिससे स्थानीय लोड प्रबंधन में सुधार होगा। शंकरपुर सब स्टेशन में क्षमता वृद्धि उज्जैन क्षेत्र के 220 के.व्ही. शंकरपुर सबस्टेशन में पूर्व में स्थापित 20 एम.व्ही.ए. क्षमता के ट्रांसफार्मर को अपग्रेड कर 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया जा चुका है। इस उन्नयन से क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा संभावित अतिरिक्त मांग को सहजता से पूरा किया जा सकेगा। 400 के.व्ही. ताजपुर सब स्टेशन का विस्तार उज्जैन स्थित 400 के.व्ही. ताजपुर सबस्टेशन में 132 के.व्ही. नेटवर्क के विस्तार की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का एक अतिरिक्त ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा तथा 33 के.व्ही. के चार नए फीडर विकसित किए जाएंगे। इससे सिंहस्थ-2028 के दौरान विद्युत वितरण व्यवस्था अधिक सुदृढ़, संतुलित एवं भरोसेमंद बन सकेगी। मिलेगी निर्बाध बिजली ऊर्जा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सभी परियोजनाओं के समयबद्ध पूर्ण होने से सिंहस्थ-2028 में उज्जैन में निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

एमपी में ट्रांसजेंडर को पहचान देने का नया नियम, अब जांच के बाद मिलेगा अधिकार

भोपाल  मध्यप्रदेश में ट्रांसजेंडर के संबंध में बड़ा फैसला लिया गया है। जेंडर बदलने से पहले अब कलेक्टर को इसकी सूचना देनी होगी। मेडिकल जांच के बाद ही ट्रांसजेंडर को जिला प्रशासन आइडी देगा। स्वयं के शपथ पत्र पर ट्रांसजेंडर व्यक्ति अब पहचान पत्र नहीं ले पाएगा। अभी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए ट्रांसजेंडर अधिकारों का संरक्षण संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया गया है। ये लागू होगा तो पुलिस व प्रशासन को जिले में अलग से ट्रांसजेंडर सेल का गठन करना होगा, जो ट्रांसजेंडर Transgender के साथ होने वाले अपराधों की निगरानी करेगी। अब ट्रांसजेंडर को जिला प्रशासन से अपना पहचान पत्र बनवाना जरूरी होगा। जिलास्तर पर इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं करना होगी। जेंडर बदलने के लिए सर्जरी करवाने के लिए प्रमाण पत्र अब अनिवार्य कर दिया गया है। भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि जिले में ट्रांसजेंडर समेत सभी श्रेणी के व्यक्तियों को लेकर प्रशासन संवेदनशील है। नियमों के अनुसार व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी। हाल में मतदाता सूची के वृहद गहन पुनरीक्षण में जिले में 72 ट्रांसजेंडर मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए गए। जांच के बाद ही आइडी देगी सरकार ट्रांसजेंडर Transgender व्यक्ति खुद के शपथ पत्र पर जिला मजिस्ट्रेट से पहचान पत्र नहीं ले पाएगा। जिले में एक मेडिकल बोर्ड का गठन होगा। सीएमएचओ की अध्यक्षता वाली ये समिति जिला मजिस्ट्रेट को सिफारिश करेगी। इसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी होगा। यदि कोई व्यक्ति जेंडर बदलने के लिए सर्जरी करवाता है, तो उसके लिए संशोधित प्रमाण पत्र प्राप्त करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। ट्रांसजेंडर के लिए सरकार पुलिस भर्ती में अवसर देने की व्यवस्था कर रही मध्यप्रदेश में ट्रांसजेंडर के लिए सरकार पुलिस भर्ती में अवसर देने की व्यवस्था कर रही है। एमपी पुलिस में कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर के पदों पर ऐसे उम्मीदवारों का कलेक्टर द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। राज्य सरकार ने किन्नर बोर्ड का गठन किया है, जो ट्रांसजेंडर समुदाय को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और डेटाबेस रखने का काम करता है। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य बीमा की पहल भी की जा रही है। किन्नर कल्याण बोर्ड के माध्यम से नौकरियों के साथ ही कल्याण योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।

भोपाल के केरवा-कलियासोत में 96 अवैध निर्माणों को किया जाएगा ध्वस्त, सरकार ने माना ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ में निर्माण

भोपाल  शहर की खूबसूरती और पर्यावरण की जान माने जाने वाले केरवा और कलियासोत जलाशय अब अपने पुराने स्वरूप में लौटेंगे। राज्य सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने स्वीकार किया है कि इन जलाशयों के आसपास के ग्रीन बेल्ट में बड़े पैमाने पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। भोपाल विकास योजना 2005 के प्रावधानों को ताक पर रखकर यहां जो निर्माण हुए थे, अब उन्हें हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। 13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद अब जमीन का सीमांकन शुरू हो गया है। क्या-क्या बना है 'नो-कंस्ट्रक्शन जोन' में? सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, कुल 96 निर्माणों को अवैध पाया गया है। इनमें से 84 सरकारी जमीन पर हैं और 12 निजी जमीन पर, जो 'नो-कंस्ट्रक्शन जोन' के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। FTL के 33 मीटर में बड़ा खतरा जलाशयों के फुल टैंक लेवल (FTL) से 33 मीटर के दायरे को सबसे संवेदनशील माना जाता है। केरवा जलाशय के इस दायरे में 16 पक्के निर्माण पाए गए हैं। इनमें से 2 सरकारी जमीन पर हैं, जिन्हें हटाने के आदेश राजस्व कोर्ट ने दे दिए हैं। बाकी 14 निजी जमीन पर हैं, जिन पर अब राजस्व विभाग नियमों के तहत कार्रवाई करने की तैयारी में है। मंत्रालय में हुई बैठक में साफ कर दिया गया है कि भोपाल विकास योजना 2005 के क्लॉज 2.57 का कड़ाई से पालन होगा। 150 हेक्टेयर की यह जमीन केवल प्रकृति के लिए सुरक्षित रहेगी, यहां किसी भी निजी स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं है। अब बनेगा बॉटनिकल गार्डन सरकार की योजना यहां 150 हेक्टेयर क्षेत्र में एक विशाल बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क बनाने की है। इसके लिए टीएंडसीपी विभाग ने मैप तैयार कर लिया है। खसरा रिकॉर्ड को मास्टर प्लान के मैप पर सुपरइम्पोज कर दिया गया है, जिससे अब एक-एक इंच जमीन का हिसाब साफ हो गया है। कलेक्टर भोपाल को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व विभाग के जरिए इस पूरी जमीन को जल्द से जल्द बाउंड्री बनाकर सुरक्षित करें। अब तक क्या हुआ? 13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में निर्णायक बैठक हुई। इसके बाद 28 फरवरी 2026 को 69 में से 28 अवैध निर्माणों को प्रशासन ने जमींदोज कर दिया। जबकि बाकी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली वारंट जारी हो चुके हैं। क्यों जरूरी है यह कार्रवाई? केरवा और कलियासोत न केवल भोपाल के जल स्तर को बनाए रखते हैं, बल्कि यह क्षेत्र बाघों और अन्य वन्यजीवों का कॉरिडोर भी है। पिछले कुछ वर्षों में यहां होटल, रेस्टोरेंट और फार्म हाउस की बाढ़ आ गई थी, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने लगा था। एनजीटी में दायर एक याचिका के बाद अब यह पूरा मामला कोर्ट की सीधी निगरानी में है।

आगर की रीना ने अपनाया ड्रोन तकनीक, आधुनिक खेती में महिलाओं का बढ़ता कदम

आधुनिक खेती में महिलाओं का बढ़ता कदम, आगर की रीना बनीं ड्रोन सखी ड्रोन तकनीक से बदली तस्वीर भोपाल आधुनिक तकनीक अब ग्रामीण भारत की महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की नई उड़ान दे रही है। आगर जिले के ग्राम थडोदा की रीना चंदेल इसका प्रेरक उदाहरण हैं। आजीविका मिशन और नाफेड के सहयोग से प्राप्त ड्रोन संचालन प्रशिक्षण ने रीना को न केवल नई पहचान दी, बल्कि उन्हें गांव-गांव में आधुनिक खेती की अग्रदूत बना दिया है। अब रीना ड्रोन तकनीक के माध्यम से किसानों के खेतों में स्प्रे कर रही हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रीना ने जिले में किसानों के खेतों तक ड्रोन तकनीक पहुंचाने का काम शुरू किया। वह स्वयं ड्रोन का संचालन करती हैं और खेतों में कीटनाशक व पोषक तत्वों का स्प्रे करती हैं। खरीफ सीजन में रीना ने 42 किसानों की लगभग 121 एकड़ जमीन पर ड्रोन के माध्यम से स्प्रे किया और प्रति एकड़ 500 रुपये की दर से सेवा प्रदान की। वहीं रबी सीजन में उन्होंने 56 किसानों की लगभग 156 एकड़ जमीन पर ड्रोन स्प्रे कर आधुनिक कृषि पद्धति को बढ़ावा दिया। रीना की सक्रियता और मेहनत को देखते हुए कृषि विभाग ने उन्हें “कृषि सखी” की जिम्मेदारी भी सौंपी है। जिला स्तरीय प्रशिक्षण के बाद वह समूह की महिलाओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दे रही हैं। इस कार्य के लिए उन्हें विभाग की ओर से प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानदेय भी दिया जा रहा है। रीना चंदेल की कहानी यह दर्शाती है कि यदि अवसर और प्रशिक्षण मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी तकनीक के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकती हैं। ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग से उन्होंने न केवल अपनी आय का स्रोत बढ़ाया है, बल्कि किसानों को भी समय और श्रम की बचत के साथ बेहतर खेती की दिशा दिखाई है। आज रीना अपने गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी यह सफलता बताती है कि बदलते समय में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आधुनिक तकनीक को अपनाकर गांव और खेती दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।  

मध्यप्रदेश में टैक्स वृद्धि का प्रस्ताव, 10-15 प्रतिशत तक हो सकती है बढ़ोत्तरी

भोपाल  भोपालवासियों पर टैक्स वृद्धि की मार पड़ सकती है। 23 मार्च को नगर निगम का बजट आएगा, जिसमें वाटर-सीवेज और प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी की संभावना है। बताया जा रहा है कि योजना आयोग ने आमदनी बढ़ाने के लिए हर साल टैक्स बढ़ाने की सलाह दी है। लिहाजा नगर निगम के वाटर टैक्स और सीवेज चार्ज में बढ़ोतरी हो सकती है। बजट राशि एवं अनुदान राशियों पर चर्चा के लिए महापौर परिषद ने इसे पारित कर दिया है। अब नगर परिषद की बैठक में बहुमत के आधार पर फैसला होगा। आने वाले समय में शहर की जनता की जेब पर कर का बोझ बढऩे वाला है। नगर निगम विभागीय वर्ष 2026-27 के लिए 23 मार्च को बजट प्रस्तुत करने जा रहा है। निगम प्रबंधन योजना आयोग की अनुशंसा को आधार बनाकर इस बजट में भी प्रॉपर्टी, वाटर और सीवेज जैसे मदों में टैक्स में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करने की तैयारी में है। हालांकि इस प्रस्ताव पर ज्यादातर पार्षद और एमआइसी सदस्य राजी नहीं हैं। निगम का तर्क है, योजना आयोग आय बढ़ाने हर साल बजट में टैक्स बढ़ाने की सलाह दी है। भोपाल में बीते वर्ष ही प्रॉपर्टी टैक्स में 10 प्रतिशत वाटर टैक्स एवं सीवेज चार्ज में 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। निगम ने विभागीय वर्ष 2025-26 के लिए 3611 करोड़ 79 लाख रुपए का बजट का बजट पेश किया था। सबसे महंगा-सबसे सस्ता टैक्स परिक्षेत्र क्रमांक 1 से 7 में तय होने वाले संपत्ति के वार्षिक भाड़ा मूल्य के आधार पर अरेरा कॉलोनी-एमपी नगर में सबसे महंगा व बैरसिया के अररिया में सबसे सस्ता प्रॉपर्टी टैक्स है। दरें सामान रहेंगी। विकास निधि: निगम के सभी जनप्रतिनिधियों की विकास निधि दोगुनी हो चुकी है। इसमें वृद्धि नहीं होगी। महापौर 10 करोड़, निगम अध्यक्ष 5 करोड़, महापौर परिषद सदस्य 1 करोड़, वार्ड नियोजन 50 लाख, जोन अध्यक्ष 10 लाख सालाना खर्च कर सकेंगे। इस बार नगर निगम द्वारा बजट में खर्च कम करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही उलझनों से बचने के लिए बजट में मदों को घटा दिया गया है। कई विभागों के खर्च कम किए गए हैं और उनकी सीमा भी तय कर दी गई है। पहले जनसंपर्क प्रकोष्ठ के बजट की सीमा निर्धारित नहीं थी पर अब यह प्रावधान खत्म कर दिया है।

ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल के लिए नई प्रक्रिया शुरू, जानें क्या है बदलाव

इंदौर  ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण (Driving License Renewal) प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए परिवहन विभाग ने फेसलेस सुविधा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित फेस वेरिफिकेशन प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। अब 15 वर्ष की वैधता पूरी होने के बाद लाइसेंस रिन्यू कराने वाले आवेदकों को अपने चेहरे का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। फर्जीवाड़ों पर लगेगी रोक नई व्यवस्था के तहत एआई सॉफ्टवेयर पुराने ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज फोटो और वर्तमान आवेदक के चेहरे का मिलान करेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 15 वर्ष पहले जिस व्यक्ति ने लाइसेंस बनवाया था, वही अब नवीनीकरण के लिए आवेदन कर रहा है। इस कदम से फर्जीवाड़े और गलत पहचान के मामलों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से तैयार इस सॉफ्टवेयर को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसकी शुरुआत भोपाल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से की जाएगी। प्रदेश में 70 लाख ड्राइविंग लाइसेंस मध्य प्रदेश में वर्तमान में लगभग 70 लाख ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद हैं और हर वर्ष करीब 6 लाख नए लाइसेंस बनाए जाते हैं। आने वाले समय में बड़ी संख्या में नवीनीकरण के प्रकरण सामने आएंगे, जिससे पुराने फोटो के आधार पर सही व्यक्ति की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी लिए ये कदम उठाया जा रहा है।  साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है। एआई आधारित फेस वेरिफिकेशन लागू होने से लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय बनेगी, साथ ही प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ेगी। ये है रिन्यूअल का ऑनलाइन प्रोसेस (Online Process) -सबसे पहले परिवहन पोर्टल की वेबसाइट पर जाएं। अब यहां पर "Driving License Related Services" चुनें। -अब यहां पर ड्रॉप-डाउन से 'Madhya Pradesh' चुनें। -आवेदन करें: 'Apply for DL Renewal' पर क्लिक करें। -विवरण भरें: अपना डीएल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें। -दस्तावेज अपलोड: फॉर्म-9 (आवेदन पत्र), फॉर्म-1A (चिकित्सा प्रमाण पत्र – 40+ आयु के लिए), पुराना लाइसेंस अपलोड करें। -फीस भुगतान: रिन्यूअल फीस ऑनलाइन जमा करें। -अपॉइंटमेंट: आरटीओ में दस्तावेज सत्यापन के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें।-इसके बाद आपको अपॉइंटमेंट मिल जाएगा।  

एमपी ने 43,014 गांवों का ड्रोन सर्वे करके 54.18 लाख लोगों को दिया संपत्ति कार्ड, गुजरात-महाराष्ट्र को पीछे छोड़ा

भोपाल  स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति कार्ड (प्रॉपर्टी कार्ड ) वितरित करने के मामले में मध्य प्रदेश ने देश के कई बड़े और प्रमुख राज्यों को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है। लोकसभा में छत्तीसगढ़ से सांसद विजय बघेल के सवाल के जवाब में जो जानकारी दी गई। उसके मुताबिक एमपी ने गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पछाड़कर डिजिटल लैंड रिकॉर्ड बनाने और लोगों तक पहुंचाने में रिकॉर्ड बनाया है। 54 लाख से ज्यादा ग्रामीणों को मिला उनका 'मालिकाना हक' दस्तावेज के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक कुल 43,014 गांवों को इस योजना के लिए अधिसूचित किया गया था और इन सभी 43,014 गांवों में ड्रोन सर्वे का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। एमपी के 39,813 गांवों के लिए कुल 65,76,707 संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं । इनमें से 54,18,319 संपत्ति कार्ड ग्रामीणों को वितरित किए जा चुके हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है। जानिए क्या है संपत्ति कार्ड स्वामित्व योजना के तहत दिया जाने वाला संपत्ति कार्ड ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए उनकी संपत्ति का एक आधिकारिक और कानूनी 'अधिकार अभिलेख' (Record of Rights) है । पहले ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के पास मालिकाना हक के पुख्ता दस्तावेज नहीं होते थे, जिसे अब ड्रोन सर्वे और आधुनिक मैपिंग तकनीक के जरिए सरकार द्वारा प्रमाणित किया जा रहा है । संपत्ति कार्ड से होने वाले प्रमुख फायदे विवादों का समाधान ड्रोन सर्वे और 'निरंतर परिचालन संदर्भ स्टेशनों' (CORS) तकनीक से गांव के आबादी क्षेत्रों के अत्यधिक सटीक नक्शे तैयार किए जाते हैं । इससे संपत्ति की सीमाएं स्पष्ट हो जाती हैं, जिससे वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद समाप्त हो रहे हैं । बैंकों से लोन की सुविधा इस आधिकारिक कार्ड के आधार पर ग्रामीण अब अपनी संपत्ति पर बैंकों से आसानी से ऋण (Loan) प्राप्त कर सकते हैं, जो पहले बिना वैध दस्तावेजों के संभव नहीं था । संपत्ति की खरीद-बिक्री में आसानी कानूनी रिकॉर्ड होने से संपत्ति की खरीद और बिक्री की प्रक्रिया पारदर्शी और आसान हो गई है। महिला सशक्तिकरण मध्य प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहाँ महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का हक दिलाने के लिए संपत्ति कार्ड में 'सह-स्वामित्व' (Co-ownership) का विशेष प्रावधान किया गया है । पारदर्शी प्रक्रिया संपत्ति कार्ड जारी करने से पहले दोनों पक्षों की सहमति और जमीनी सत्यापन किया जाता है, जिससे भविष्य में विवाद की संभावना नगण्य हो जाती है । जानिए किन बड़े राज्यों को मध्य प्रदेश ने पछाड़ा?     महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में 37,85,481 कार्ड वितरित किए गए हैं, जबकि मध्य प्रदेश 54,18,319 कार्डों के साथ बहुत आगे है।     राजस्थान: राजस्थान में अब तक 14,43,423 कार्ड ही वितरित हो पाए हैं, जो मध्य प्रदेश की तुलना में लगभग एक-चौथाई ही है।     गुजरात: देश के विकसित राज्यों में शुमार गुजरात में 12,32,223 कार्ड वितरित हुए हैं, जिसे मध्य प्रदेश ने काफी पीछे छोड़ दिया है।     कर्नाटक: दक्षिण भारत के इस बड़े राज्य में केवल 3,36,779 कार्ड वितरित किए गए हैं।     हरियाणा: यहां 25,15,646 कार्ड वितरित हुए हैं।     छत्तीसगढ़: पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में अभी वितरण की प्रक्रिया काफी धीमी है, जहां मात्र 92,545 कार्ड वितरित किए गए हैं।

मध्य प्रदेश की 22.77 लाख महिलाएं लखपति दीदी बनीं, देश के टॉप-5 राज्यों में चौथे स्थान पर

भोपाल  मध्य प्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 22,77,814 महिलाएं सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक आय अर्जित कर रही हैं। इसी के साथ मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा ‘लखपति दीदी’ वाली सूची में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पहले राज्य इस सूची में आठवें स्थान पर था। यह जानकारी संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में सामने आई है। क्या है ‘लखपति दीदी’ योजना यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार से जोड़ने की सुविधा और बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे सालाना न्यूनतम ₹1 लाख की आय हासिल कर सकें। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 15 अगस्त 2023 को इस योजना की घोषणा की थी। शुरुआत में इसका लक्ष्य 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था, जिसे बाद में बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया। ड्रोन तकनीक से बढ़ी कमाई मध्य प्रदेश ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने में भी बढ़त दिखाई है। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत राज्य को 34 ड्रोन मिले हैं, जिससे यह देश में तीसरे स्थान पर है। राज्य के 89 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। ये महिलाएं अब खेतों में ड्रोन के जरिए तरल उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है। ड्रोन वितरण के मामले में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य आगे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वहीं, ड्रोन ट्रेनिंग के मामले में भी राज्य शीर्ष पांच में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और वित्तीय सहायता का यह संयोजन ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने में अहम भूमिका निभा रहा है। मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का संकेत भी देती है। बड़ी संख्या में महिलाएं अब स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। नमो ड्रोन दीदी को सरकार ने दिए 34 ड्रोन आधुनिक खेती और तकनीक के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश की महिलाएं पीछे नहीं हैं। 'नमो ड्रोन दीदी' योजना के तहत मध्य प्रदेश को 34 ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं, जो इसे देश में तीसरे स्थान (आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बाद) पर खड़ा करता है। एमपी के 89 स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं ने ड्रोन से संबंधित प्रमाणित तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे वे अब खेतों में लिक्विड फर्टिलाइजर (तरल उर्वरकों) और कीटनाशकों का छिड़काव ड्रोन के जरिए कर रहीं हैं। क्या है 'लखपति दीदी' योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत हरेक महिला सदस्य को कम से कम चार कृषि ऋतुओं या व्यावसायिक चक्रों के आधार पर सालाना 1 लाख रुपये की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने में सक्षम बनाना है । 2023 में पीएम ने किया था योजना का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2023 को लाल किले की प्राचीर से 'लखपति दीदी' योजना की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य शुरुआती चरण में 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था (बाद में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया)। कैसे काम करती है योजना इस पहल के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता, बाजार लिंकेज, कौशल विकास प्रशिक्षण और बैंक ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है । इसमें 'नमो ड्रोन दीदी' जैसी सहायक योजनाएं भी शामिल हैं, जो महिलाओं को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आय बढ़ाने में मदद करती हैं। नमो ड्रोन दीदी: राज्यों में ड्रोन वितरण (Top 5) (योजना के तहत दिए गए 500 ड्रोनों के आधार पर) टॉप – 5 राज्य (जहां सबसे ज्यादा ड्रोन दिए गए)     आंध्र प्रदेश: 96     कर्नाटक: 82     तेलंगाना: 72     मध्य प्रदेश: 34     उत्तर प्रदेश: 32 नमो ड्रोन दीदी को ड्रोन ट्रेनिंग देने वाले टॉप – 5 राज्य     कर्नाटक: 145     उत्तर प्रदेश: 128     आंध्र प्रदेश: 108     हरियाणा: 102     मध्य प्रदेश: 89 (इन राज्यों में महिला लाभार्थियों/ SHG को ड्रोन चलाने का सर्टिफिकेट मिला)

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, जल गंगा अभियान की सफलता के लिए स्थानीय निकायों की सक्रियता आवश्यक

जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय निकाय हों सक्रिय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रम संवत और नव वर्ष त्योहारों पर दी बधाई मं‍त्रि-परिषद की बैठक के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संबोधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में आगामी 19 मार्च से राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान प्रारंभ हो रहा है। प्रदेश के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान का यह तीसरा वर्ष है। कुओं, बावड़ियों, नदियों के पुनरुद्धार के अभियान से सभी वर्गों को जोड़ने के लिए नगरीय निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय निकाय सक्रिय भूमिका का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले महत्वपूर्ण विषयों पर मंत्रीगण को जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाए। समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ सामाजिक संस्थाओं को अभियान से जोड़ा जाए। युवाओं को विशेष भागीदारी का अवसर दिया जाए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 3000 से अधिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जा चुका है। गत वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए 86 हजार से अधिक खेत तालाब और 550 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए। भू-जल संवर्धन के लिए एक लाख से अधिक कुओं का पुनर्भरण कार्य भी प्रारंभ किया गया। नदियों की निर्मलता के लिए प्रदेश की 57 प्रमुख नदियों और 194 प्रदूषण जल स्रोतों की पहचान कर उनके शोधन की पहल की गई। लगभग 145 नदियों के उद्गम क्षेत्र में हरित विकास के लिए गंगोत्री हरित योजना भी प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि जन भागीदारी से इस अभियान को सफल बनाया जाएगा। जल महोत्सव की गतिविधियों को सफल बनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल महोत्सव की गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। आगामी 22 मार्च तक जल महोत्सव के तहत विभिन्न कार्य हो रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भी जल संरक्षण कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका है। 'हर घर जल' के लिए मध्यप्रदेश के हित में नई दिल्ली में हुआ महत्वपूर्ण करारनामा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय जल शक्ति और पेयजल मंत्रालय के साथ नई दिल्ली में आज एक महत्वपूर्ण करारनामा हुआ है, जिसके अंतर्गत पेयजल योजना के लिए पाइप लाइन बिछाने और हर व्यक्ति तक जल पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान 2 राज्यों का चयन हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए प्रतिष्ठा की बात है। इस अवसर पर प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उईके मंगलवार को नई दिल्ली में उपस्थित थीं। स्वच्छ जल प्रदाय के लिए वर्ष 2028 तक जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाने और जल जीवन मिशन 2.0 पुनर्गठित कर लागू करने की स्वीकृति दी गई है,जिसका लाभ मध्यप्रदेश को मिलेगा और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाओं को सशक्त टिकाऊ बनाने में सहयोग मिलेगा। किसान कल्याण वर्ष में विभागों की गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण वर्ष-2026 में 17 विभाग के सहयोग से वर्ष भर होने वाली विभिन्न गतिविधियों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में किसानों के हित में अभिनव पहल की जा रही है। कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए राज्य सरकार बहु आयामी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री का 4-लेन निर्माण स्वीकृति के लिए माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय कैबिनेट द्वारा हाल ही में 3839 करोड़ रुपए की लागत से एनएच 752 डी पर बदनावर पेटलावद थांदला टिमरवानी सेक्शन में 4-लेन निर्माण की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से यह स्वीकृति अत्यंत महत्वपूर्ण है। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ प्रदेश के अनेक जिलों को मिलेगा। इंदौर पीथमपुर उज्जैन देवास के औद्योगिक इलाकों तक पहुंच को सुगम बनाया जा सकेगा। धार और झाबुआ जनजातीय बहुल जिलों के आर्थिक विकास में भी सहयोग मिलेगा। भावांतर योजना में सरसों को जोड़े जाने से किसानों को मिलेगी मदद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के किसानों के लिए भावांतर योजना में सरसों को शामिल करने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि 7 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को सरकार 1500 करोड. रुपए की राशि भावांतर योजना में दे चुकी है। अब सरसों उत्पादक किसानों को भी योजना का लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने किसानों के हित में सबसे पहले सफलतापूर्वक भावांतर जैसी महत्वपूर्ण योजना लागू की है। सर्वाइकल कैंसर को रोकेगी वैक्सीन, मध्यप्रदेश में चल रहा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से 14 वर्ष और उससे अधिक उम्र की बेटियों को बचाने के लिए टीका लगाने का अभियान प्रदेश में चल रहा है। सर्वाइकल कैंसर से बेटियों को बचाने के लिए निःशुल्क वैक्सीन लगाई जा रही है। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और इससे हमारी बेटियां आजीवन सुरक्षित जीवन जिएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों से कहा कि वे अपने प्रभार के जिलों में इस महत्वपूर्ण अभियान की सतत समीक्षा करें। विक्रम संवत् वर्षारंभ की बधाइयां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी 19 मार्च को गुड़ी पड़वा और विक्रम संवत वर्ष आरंभ होने की सभी मंत्रीगण को बधाई दी और प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय नववर्ष के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम भी हो रहे हैं निश्चित ही इनसे जन-जन जुड़ता है। यह अवसर हमारे लिए महत्वपूर्ण है।