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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, विक्रमादित्य के सुशासन आदर्श 2 हजार साल बाद भी प्रासंगिक

विक्रमादित्य ने सुशासन के प्रतिमान स्थापित किए, 2 हजार साल बाद भी उनके आदर्श प्रासंगिक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव सृष्टि के आरंभ की अमृत बेला का पर्व है नव संवत्सर मुख्यमंत्री ने की ब्रह्म ध्वज की स्थापना, नवसंवत्सर पर्व पर सभी के लिए की मंगलकामना रवीन्द्र भवन में हुआ कोटि सूर्य उपासना कार्यक्रम सम्राट विक्रमादित्य नाटक का हुआ मंचन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज गुड़ी पड़वा है। संपूर्ण सृष्टि में गुड़ जैसी मिठास फैल गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति में आज से नव संवत्सर एवं नववर्ष का प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि नव संवत्सर सृष्टि के आरंभ दिवस की अमृत बेला को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला पर्व है। आज से एक नए संवत् और भारतीय नववर्ष का प्रारंभ हो गया है। हमारे यहां संवत् सृष्टि के साथ, प्रकृति के सानिध्य में और शासक के पुरुषार्थ से प्रारंभ होता है। सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को परास्त किया। तत्कालीन समाज के अराजक तत्वों और आतताईयों का दमन किया। उन्होंने अपनी संपूर्ण प्रजा को कर्जमुक्त बनाया। सच्चे अर्थों में सामाजिक सद्भाव की नींव रखी। वे लोकतंत्र के महानायक थे। उनके पुरुषार्थ से ही प्रारंभ किया गया विक्रम संवत् आज 2083 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के ओजस्वी शासन उनके शौर्य, साहस, पराक्रम एवं न्याय के प्रतिमानों को आत्मसात करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास किया। हम समाज के हर वर्ग के चहुंमुखी विकास के लिए प्रयासरत हैं। हमने वीर विक्रमादित्य शोधपीठ सहित वैदिक घड़ी की भी स्थापना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत कोटि सूर्य उपासना कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नागरिकों को सृष्टि के आरंभ दिवस, गुड़ी पड़वा, चेटी चंड, नववर्ष विक्रम संवत् 2083 के आरंभ, घट स्थापना, नवरात्रि आरंभ, ज्योर्तिविज्ञान दिवस, नवरेह सहित आज देशभर में मनाये जा रहे सभी पर्वों की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्रम्ह ध्वज की स्थापना कर कहा कि यह ध्वज हमें सदैव एकजुट रहकर देश-प्रदेश की सेवा करने की प्रेरणा देता है। विक्रमोत्सव-2026 के आयोजन में निहित भावों और इसकी रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी शासन व्यवस्था से राज व्यवस्था को लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलने का सूत्रपात्र किया। उनका नेतृत्व और राज-काज शैली ऐसी थी, जिसमें बाद के शासकों को जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था के लिए प्रेरित किया। आज यदि दो हजार साल बाद भी सम्राट विक्रमादित्य को याद कर रहे हैं, तो इसके पीछे यह भाव परिलक्षित होता है कि भारत राष्ट्र की सरकार और राज्य सरकारें, वीर विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था को अंगीकृत करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज स्वस्फूर्त और अनुशासित समाज है। हमने हमेशा जियो और जीने दो सहित सबको लेकर चलने की भावना से जीना सीखा है। सम्राट विक्रमादित्य ने लोकतंत्र को बढ़ावा दिया, इसी से लोकतंत्र के सूत्र हम भारतीयों के शरीर में रक्त की तरह प्रवाहित है और अब यह हमारे अस्तित्व की पहचान भी बन गया है। स्वागत उद्बोधन देते हुए विधायक श्रीभगवानदास सबनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन के नए प्रतिमान स्थापित किए जा रहे हैं। वीर विक्रमादित्य की कर्मभूमि उज्जैन से देश में लोकतंत्र का दीप प्रज्ज्वलित हुआ और मुख्यमंत्री डॉ. यादव उसी दीप को और अधिक प्रकाशमान बना रहे हैं। कार्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित नाटक का मंचन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी नाट्य कलाकारों का सम्मान किया। इस अवसर पर विधायक श्री विष्णु खत्री, महापौर श्रीमती मालती राय, जिलाध्यक्ष श्री रविन्द्र यति, कमिश्नर भोपाल डिवीजन श्री संजीव सिंह, कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह सहित जन-प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण एवं स्कूली विद्यार्थी उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने पशुपतिनाथ मंदिर से जल गंगा जल संवर्धन अभियान की शुरुआत की

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से जल गंगा जल संवर्धन अभियान का किया शुभारंभ मंदिर परिसर में प्याऊ का लोकार्पण, जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी पर दिया जोर मंदसौर  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने आज भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंदिर परिसर में आमजन की सुविधा के लिए निर्मित प्याऊ का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में आमजन, पत्रकार उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और वर्तमान समय में जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” के माध्यम से जिले में जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जाएंगे। यह अभियान 30 जून 2026 तक संचालित होगा। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत तालाबों, नदियों, कुओं, बावड़ियों सहित अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा। साथ ही इन जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई, गहरीकरण एवं मरम्मत के कार्य भी सुनिश्चित किए जाएंगे, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल शासन का नहीं, बल्कि जन-जन का अभियान है। इसमें आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं शासकीय विभागों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने सभी से अपील की कि जल संरक्षण के इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखें। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर परिसर में शुरू की गई प्याऊ व्यवस्था की सराहना की और कहा कि इससे श्रद्धालुओं एवं आमजन को गर्मी के मौसम में शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा, जो एक सराहनीय पहल है।

पं. कुंजीलाल दुबे का विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल अविस्मरणीय: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पं. कुंजीलाल दुबे का विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल भुलाया नहीं जा सकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने तीन बार विधानसभा अध्यक्ष रहे स्व. पं. दुबे की 130वीं जन्म जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित कर दी श्रद्धांजलि भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. पं. कुंजीलाल दुबे तीन बार मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने हिन्दी भाषा को प्रतिष्ठित स्थान दिलाने में बड़ा योगदान दिया। स्व. पं. दुबे के विधानसभा अध्यक्षीय कार्यकाल की सुदीर्घ सेवाओं और संसदीय परम्पराओं को और भी समृद्ध बनाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को स्व. पं. कुंजीलाल दुबे की 130वीं जन्म जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा भवन परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. पं. दुबे की समाजोन्मुखी सेवाओं के लिए वर्ष 1964 में इन्हें पद्मभूषण की उपाधि विभूषित किया गया। विद्या और ज्ञान के क्षेत्र में की गई सेवाओं और उपलब्धियों के लिए स्व. पं. दुबे को 1965 में एलएलडी की उपाधि दी गई, वहीं 1967 में विक्रम विश्वविद्यालय ने इन्हें डी-लिट की उपाधि प्रदान की थी। वे सदैव हमारी स्मृतियों में बने रहेंगे। म.प्र. विधानसभा के भूतपूर्व अध्यक्ष स्व. पं. कुंजीलाल दुबे का जन्म 19 मार्च 1896 को वर्तमान नरसिंहपुर जिले के ग्राम आमगांव में हुआ था। वकालत के पेशे से एक सुघड़ राजनीतिज्ञ के रूप स्थापित होकर स्व. पं. दुबे प्रथम विधानसभा (1956-57), द्वितीय विधानसभा (1957-62) एवं तृतीय विधानसभा (1962-67) में कुल तीन बार मप्र विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सेवारत रहे। पुष्पांजलि कार्यक्रम में म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रमुख सचिव विधानसभा अरविन्द शर्मा तथा भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. पं. दुबे के परिजन सहित विधानसभा के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।  

मध्य प्रदेश में 3 दिन आंधी-बारिश का अलर्ट, मार्च में ओलावृष्टि की पहली भविष्यवाणी

भोपाल  मध्यप्रदेश में गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। तेज सिस्टम के एक्टिव होने से अगले तीन दिन प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर देखने को मिल सकता है। प्रदेश में दो ट्रफ लाइनों और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से यह बदलाव आया है, जिसका असर करीब 72 घंटे तक रहने का अनुमान है।  इससे पहले बुधवार को कई जिलों में बादल छाए रहे, कई स्थानों पर हल्की बारिश हुई और कुछ जगहों पर तेज हवाओं का दौर चला। बालाघाट में करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने 19 मार्च के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत 30 से ज्यादा जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। इन जिलों में तेज हवाओं की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। मौसम का अलर्ट मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 19 और 20 मार्च को मौसम का असर सबसे ज्यादा रहेगा। यह धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को कवर करेगा। 22 मार्च के बाद मौसम सा 19-20 मार्च को सबसे ज्यादा असर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 19 और 20 मार्च को इसका असर सबसे ज्यादा रहेगा और यह सिस्टम धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को कवर करेगा। 22 मार्च के बाद मौसम साफ होने के संकेत हैं। बदलते मौसम के कारण कई शहरों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मार्च में पहली बार ओलों की एंट्री इस बार मार्च में पहली बार ओलावृष्टि होने जा रही है। खासतौर पर सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में दो दिन तक ओले गिर सकते हैं, जबकि अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर रहेगा। फरवरी में भी मौसम ने चार बार करवट ली थी। कई इलाकों में ओले और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ था, जिसके बाद सरकार को सर्वे कराना पड़ा था। अब मार्च में फिर से वैसा ही पैटर्न देखने को मिल रहा है। 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान मौसम विभाग के मुताबिक, मार्च के आखिरी हफ्ते से गर्मी फिर जोर पकड़ सकती है। अप्रैल-मई में 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान है। फिलहाल प्रदेश में “तीनों मौसम” का असर देखने को मिल रहा है—दिन में गर्मी, रात में हल्की ठंड और बीच-बीच में बारिश। कुछ दिन पहले नर्मदापुरम में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया था। आने वाले दिनों में भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में भी दिन का तापमान 40 डिग्री के आसपास जा सकता है, जबकि रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहेंगी।  फ होने के संकेत हैं। बदलाव के कारण कई शहरों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मार्च में पहली बार ओलावृष्टि विशेष रूप से मार्च में यह पहली बार है जब ओलावृष्टि होने जा रही है। सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में दो दिन तक ओले गिरने का अनुमान है, जबकि अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर रहेगा। फरवरी में भी मौसम ने चार बार करवट ली थी और कई इलाकों में ओले और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ था। अप्रैल और मई में 20 दिन लू का अनुमान मौसम विभाग ने चेताया है कि मार्च के आखिरी हफ्ते से प्रदेश में गर्मी फिर जोर पकड़ सकती है। अप्रैल और मई में 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान है। फिलहाल प्रदेश में “तीनों मौसम” का असर देखने को मिल रहा है। दिन में गर्मी, रात में हल्की ठंड और बीच-बीच में बारिश। कुछ दिन पहले नर्मदापुरम में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया था। आने वाले दिनों में भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है, जबकि रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहेंगी।

अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के द्वारा जीतू पटवारी से की मुलाकात

अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के द्वारा जीतू पटवारी से की मुलाकात भोपाल मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष माननीय जीतू पटवारी से अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति भोपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डल्लू कुमार सोनी एवं रोहित यादव राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष हीरा सिंह ठाकुर इंदौर संभागीय अध्यक्ष,शिवम तिवारी एडवोके ,ओम प्रकाश ठाकुर, छबिलाल महारा एवं समिति के पदाधिकारीयों ने जीतू पटवारी जी को स्मृति चिन्ह एवं मांग पत्र देकर उनका स्वागत किया

भोपाल के गोमांस तस्करी मामले में असलम चमड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गोमांस तस्करी केस में 70 दिन बाद बड़ा अपडेट सामने आया है। ट्रक भरकर मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट की तरफ से जांच में कई कमियों का हवाला दिया गया है। बताया जा रहा है कि, असलम कुरैशी की तरफ से कोर्ट में साबित किया गया कि, उसके ट्रक में गोमांस नहीं, बल्कि भैंस का मास था। इसप कोर्ट ने उन्हें 35 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत मिली है। असलम चमड़ा के अधिवक्ता ने भोपाल जिला अदालत में कहा कि, जो मांस सैंपल के लिए हैदराबाद भेजा गया था। उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें, लेकिन पुलिस ऐसा नहीं कर सकी। सत्र न्यायालय में द्वितीय जमानत आवेदन का हिंदू संगठन ने कड़ा विरोध किया था। भानु हिंदू ने न्यायमूर्ति पंकज कुमार जैन की कोर्ट में उपस्थित होकर आपत्ति दर्ज कराई थी। मथुरा लैब की रिपोर्ट में गोमांस होने की पुष्टि हुई थी, लेकिन हैदराबाद की लैब की रिपोर्ट पेश ही नहीं हुई।. क्या है मामला? हिंदू संगठनों ने पुलिस मुख्यालय के सामने दिसंबर 2025 में एक ट्रोक रोका, जिसमें 26 टन मांस भरा था तो उसमें 26 टन गोमांस होने का दावा किया गया था। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर सैंपल जांच के लिए भेज दिए। इसके बाद प्रशासन ने भोपाल का स्लॉटर हाउस भी बंद करवा दिया। असलम कुरैशी पर आरोप लगा कि, स्लॉटर हाउस में गोवंश का अवैध कत्ल कर मांस मुंबई भेजा जा रहा था। फॉरेंसिक रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि के बाद आरोपी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस मामले में एसआईटी पहले ही 500 पन्नों का चालान अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर चुकी है। जमानत के बाद हिंदू संगठनों का विरोध हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने सेशन कोर्ट से असलम चमड़े को कोर्ट से जमानत मिलने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, असलम चमड़े जैसे हत्यारे को इतनी आसानी से जमानत दे दी गई। ये एक सोचने वाला विषय है कि, सीट की रिपोर्ट किस प्रकार प्रस्तुत की गई? सिर्फ ड्राइवर और असलम चमड़े को मुजरिम बनाया गया, बाकी सहयोगियों को छोड़ दिया गया। इसमें सही तरीके से शासन ने अपना पक्ष नहीं रखा। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ये मांग करता है कि, असलम पर तुरंत रासुका की कार्रवाई हो, वरना हम जन आंदोलन करेंगे।

सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर सीएम ने की दिन की शुरुआत, प्रदेशभर में आयोजित किए गए भव्य कार्यक्रम

भोपाल  हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति और उज्जैन की गौरवशाली परंपरा को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित परंपराएं आज भी समाज को प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन में आयोजित हो रहा विक्रमोत्सव अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग और सभी प्रमुख पर्व विक्रम संवत पर आधारित हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसी क्रम में 19 मार्च 2026 को सृष्टि आरंभ दिवस और वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सुबह 10 बजे सूर्य उपासना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  मंत्री प्रभार वाले जिलों में आयोजित कार्यक्रम में होंगे शामिल  राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में मौजूद रहेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर और राजेंद्र शुक्ला रीवा में कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कई कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री अपने-अपने आवंटित जिलों में कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे। विक्रमोत्सव–2026 का आयोजन 15 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा। इस दौरान उज्जैन में विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। देशभर से आए कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक साधक अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा की समृद्ध झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। भारतीय परंपरा को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास  उत्सव के अंतर्गत संगीत, नृत्य, नाटक, लोककला और संगोष्ठियों के जरिए सम्राट विक्रमादित्य की परंपरा और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और पर्यटकों की भागीदारी से उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और भी सशक्त रूप में उभरकर सामने आ रही है। बता दें कि विक्रमोत्सव 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें “लॉन्गस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर” और WOW अवॉर्ड शामिल हैं। आने वाले समय में यह उत्सव भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का सशक्त माध्यम बनेगा। 

KBC में 50 लाख जीतने वाली अफसर अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट ने की तय

 श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले की विजयपुर तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. बाढ़ राहत राशि घोटाले के मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दी है. इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। दरअसल, साल 2021 में श्योपुर जिले में आई बाढ़ के बाद पीड़ितों के लिए राहत राशि का वितरण किया गया था. आरोप है कि बड़ौदा तहसील में उस समय पदस्थ तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर, करीब 25 पटवारियों और 100 से ज्यादा दलालों ने मिलकर 127 फर्जी खातों में लगभग 2.57 करोड़ रुपये की राशि बांट दी. यह गड़बड़ी डिप्टी कलेक्टर की ऑडिट में पकड़ में आई, जिसके बाद बड़ौदा थाने में FIR दर्ज कराई गई। 2.57 करोड़ का बाढ़ राहत घोटाला जांच में आरोप लगा कि राहत राशि वितरण के दौरान रिश्तेदारों और परिचितों को बाढ़ पीड़ित दिखाकर रकम उनके खातों में डलवाई गई. इस कथित घोटाले में तहलसील कार्यालय के कर्मियों और बिचौलियों की मिलीभगत बताई गई है. पुलिस जांच में 100 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें अमिता सिंह तोमर और 25 पटवारी भी शामिल हैं. अब आगे क्या? गिरफ्तारी से बचने के लिए अमिता सिंह तोमर ने पहले हाई कोर्ट (ग्वालियर खंडपीठ) में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में SLP के साथ अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई. 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी,अब या तो उन्हें स्वेच्छा से सरेंडर करना होगा या पुलिस गिरफ्तारी कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद राजस्व अमले और प्रशासनिक तंत्र में हलचल तेज हो गई है. बड़ौदा थाने की पुलिस कभी भी अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी कर सकती है. कानूनी जानकारों के मुताबिक,अब उनके पास सरेंडर या कस्टोडियल इंटरोगेशन की स्थिति के लिए तैयार रहने के विकल्प हैं. KBC से लेकर विवादित पोस्ट तक का सफर बता दें कि महिला तहसीलदार अमिता सिंह तोमर साल 2011 में केबीसी के पांचवें सीजन में 50 लाख रुपये जीतकर सुर्खियों में आई थीं. पिछले वर्षों में सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट और कमेंट डालकर प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताने और संविधान से जुड़ी एक पोस्ट पर आपत्तिजनक कमेंट करने पर अमिता तोमर निलंबित भी हो चुकी हैं.  इतना ही नहीं, अमिता सिंह अपने बार-बार तबादलों लेकर पीएम मोदी को पत्र भी लिख चुकी हैं. साल 2023 में तहसील का प्रभार नहीं मिलने से खफा होकर इस्तीफे के पत्र भी लिख चुकी हैं.    

हिंदू नववर्ष: विक्रम संवत को मान्यता, 1.96 अरब वर्ष पहले बनी सृष्टि, अंग्रेजी कैलेंडर 58 साल पीछे

इंदौर  गुड़ी पड़वा पर्व को हिंदुओं का नववर्ष माना जाता है। मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर सृष्टि की उत्पत्ति हुई थी इसलिए इसे हिंदुओं के नववर्ष की तरह मनाते हैं। उज्जैन में चैत्र प्रतिपदा से विक्रम संवत (वर्ष) की शुरुआत हुई। आज भी इसे गुड़ी पड़वा पर्व पर शिप्रा नदी के रामघाट पर आतिशबाजी और रंगारंग कार्यक्रम कर विक्रमोत्सव के रूप में मनाया जाता है।  हिंदू नववर्ष के कैलेंडर की शुरुआत उज्जैन शहर से हुई। इस कैलेंडर को विक्रम संवत या पंचांग भी कहा जाता है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत (वर्ष) की शुरुआत की थी, तभी से इस कैलेंडर के अनुसार हिंदू नववर्ष मनाया जाता है। नेपाल में पूरी तरह माना जाता है विक्रम संवत मान्यता है कि चैत्र की प्रतिपदा एकम के दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था, इसलिए गुड़ी पड़वा के दिन नववर्ष मनाया जाता है। करीब 1 अरब 96 करोड़ 58 लाख 81 हजार 126 वर्ष पहले सृष्टि की रचना मानी जाती है। विक्रम संवत भारतीय कालगणना का सबसे अचूक प्रामाणिक पंचांग है। शादी, तीज, त्योहार या अन्य कार्यक्रम इसी पंचांग से तय होते हैं। विक्रम संवत सबसे प्राचीन है। इसके बाद हिजरी, ईस्वी आदि आए थे। विक्रम संवत को नेपाल, मॉरीशस, सूरीनाम और यूक्रेन जैसे देशों में माना जाता है। नेपाल में तो पूरी तरह विक्रम संवत ही चलता है। पुरातत्वविद रमण सोलंकी ने बताया कि नव संवत्सर का मतलब नया साल होता है। संवत मतलब वर्ष होता है। भारत में आज भी अंग्रेजी कैलेंडर से ही काल की गणना की जा रही है। विक्रम संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 58 वर्ष आगे है। अंग्रेजी कैलेंडर में वर्ष 2026 चल रहा है, जबकि 19 मार्च से विक्रम संवत 2083 शुरू होगा। दुनिया भर में 60 से अधिक संवत हिंदू कैलेंडर का पहला महीना चैत्र और आखिरी महीना फाल्गुन होता है। राजा विक्रमादित्य उज्जैन के राजा थे। विक्रमादित्य का जन्म 102 ईसा पूर्व हुआ था। उन्होंने 57 ईसा पूर्व भारत से शक साम्राज्य का पतन किया। शकों को हराने के बाद उन्होंने उनके कैलेंडर शक संवत की जगह इसी साल से विक्रम संवत शुरू किया। इसे आगे चलकर हिंदू कैलेंडर कहा है। दुनिया भर में 60 से अधिक संवत हुए, लेकिन विक्रम संवत सबसे ज्यादा प्रचलित है। उज्जैन में राजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत की शुरुआत उज्जैन से की गई इसीलिए इसका सीधा संबंध उज्जैन से है। 

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मुकेश मल्होत्रा रहेंगे विजयपुर विधायक, राज्यसभा चुनाव में नहीं होगा वोट

श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. इस सीट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने उपचुनाव में दूसरे नंबर पर रहे रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था. विधायक बने रहेंगे मल्होत्रा हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को शून्य घोषित कर रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था. इसके बाद मुकेश मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर अपील के लिए समय मांगा था. इसके बाद हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए 15 दिन का समय है. मुकेश मल्होत्रा को विधायकी बचाने के लिए 20 मार्च तक सुप्रीम कोर्ट से स्टे लाना होगा. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है तो मुकेश मल्होत्रा विधायक बने रहेंगे.  सुप्रीम कोर्ट में मुकेश मल्होत्रा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अदालत ने मल्होत्रा को राहत दी। सुप्रीम कोर्ट की दो प्रमुख शर्तें जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक के रूप में जारी रखने की अनुमति तो दी है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक ये पाबंदियां भी लगाई हैं… वोटिंग राइट नहीं: मुकेश मल्होत्रा फिलहाल राज्यसभा के लिए मतदान नहीं कर सकेंगे। ऐसे में अब मुकेश जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे। वेतन पर रोक: जब तक कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे। हालांकि, उन्हें विधायक निधि मिलेगी या नहीं…यह अभी साफ नहीं हुआ है। वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने बताया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। मुकेश और रामनिवास दोनों ने बदली थी पार्टी पूर्व राज्यमंत्री और आदिवासी नेता मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को कांग्रेस जॉइन की थी। उन्होंने मुरैना जिले में आयोजित प्रियंका गांधी की चुनावी सभा में सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव–2023 में मुकेश मल्होत्रा विजयपुर सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे थे, तब पूरे क्षेत्र के आदिवासियों ने उनका साथ दिया था। उन्हें 45 हजार वोट मिले थे। मुकेश विजयपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पहले में बीजेपी में थे, तब सरकार ने उन्हें सहारिया प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया था। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बनाया था। विधानभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने 2023 के चुनाव से पहले भाजपा का साथ छोड़ दिया था। दरअसल, विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में सहारिया आदिवासी समाज के 70 हजार से ज्यादा वोट हैं। कांग्रेस ने आदिवासी वोटों को ध्यान में रखकर मुकेश को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था।